अनुवांशिकता एवं जैव विकास – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 9 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर

16 August 2026  |  By Ramnivas KT

Table of Contents

प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 9)

“अनुवांशिकता एवं जैव विकास” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के जीव विज्ञान खंड का नौवाँ अध्याय है। इस अध्याय में यह अध्ययन किया जाता है कि माता-पिता के लक्षण संतानों में किस प्रकार पहुँचते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवों में विभिन्नताएँ किस प्रकार उत्पन्न होती हैं। आनुवंशिकता और विभिन्नता जैव विज्ञान की महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जिनका संबंध जीवों के गुणों, उनकी संततियों तथा लंबे समय में होने वाले जैव विकास से है।

इस अध्याय में ग्रेगर जॉन मेंडल के आनुवंशिकता संबंधी प्रयोगों, प्रभाविता और अप्रभाविता, जीन तथा गुणसूत्र, मानव में लिंग निर्धारण, विभिन्नता, प्राकृतिक चयन, जीवाश्म तथा जैव विकास के प्रमाणों का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थियों के लिए यह अध्याय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और दीर्घ उत्तरीय दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।

आनुवंशिकता क्या है?

माता-पिता से उनके संतानों में लक्षणों का पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरण आनुवंशिकता कहलाता है। बालकों में माता-पिता के समान कई लक्षण दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए आँखों का रंग, बालों की बनावट और कुछ अन्य शारीरिक विशेषताएँ आनुवंशिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँच सकती हैं।

आनुवंशिकता के अध्ययन से यह समझने में सहायता मिलती है कि किसी जीव के लक्षण किस प्रकार नियंत्रित होते हैं और संतानों में किस प्रकार स्थानांतरित होते हैं।

विभिन्नता क्या है?

एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले छोटे-बड़े अंतर को विभिन्नता कहते हैं। उदाहरण के लिए एक ही परिवार के सदस्यों की ऊँचाई, त्वचा का रंग, बालों की बनावट या अन्य शारीरिक लक्षणों में अंतर हो सकता है।

विभिन्नता का एक महत्वपूर्ण कारण DNA की प्रतिकृति के दौरान होने वाले छोटे परिवर्तन हैं। लैंगिक जनन में माता-पिता दोनों की आनुवंशिक सामग्री मिलने के कारण भी संतानों में विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं।

विभिन्नता का महत्त्व

विभिन्नता जीवों को बदलती हुई पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल बनने में सहायता कर सकती है। यदि वातावरण में परिवर्तन होता है, तो किसी प्रजाति के कुछ जीवों में मौजूद उपयोगी लक्षण उनके जीवित रहने में लाभ पहुँचा सकते हैं। लंबे समय में ऐसी विभिन्नताएँ जैव विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

मेंडल और आनुवंशिकता के प्रयोग

ग्रेगर जॉन मेंडल ने आनुवंशिकता के नियमों को समझने के लिए मटर के पौधों पर महत्वपूर्ण प्रयोग किए। उन्होंने मटर के पौधों का चयन इसलिए किया क्योंकि इसमें अनेक स्पष्ट विपरीत लक्षण पाए जाते हैं और इसके जीवन-चक्र में अपेक्षाकृत कम समय लगता है।

मेंडल ने मटर के पौधों में कई जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया। उनके प्रयोगों ने यह समझने का आधार प्रदान किया कि माता-पिता के लक्षण संतानों में किस प्रकार पहुँचते हैं। इसी कारण मेंडल को आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है।

मेंडल के मटर के पौधे के लक्षण

मेंडल ने मटर के पौधों में सात जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया। इनमें पौधे की लंबाई, बीज का आकार, बीज का रंग, फूल का रंग, फली का आकार, फली का रंग तथा फूल की स्थिति जैसे लक्षण शामिल थे।

इन स्पष्ट विपरीत लक्षणों के कारण मटर का पौधा आनुवंशिकता के प्रयोगों के लिए उपयोगी साबित हुआ।

प्रभावी और अप्रभावी लक्षण

मेंडल के प्रयोगों से पता चला कि कुछ लक्षण संकर संतति में दिखाई देते हैं, जबकि कुछ लक्षण छिप जाते हैं। जो लक्षण संकर अवस्था में भी दिखाई देता है, उसे प्रभावी लक्षण कहते हैं। जो लक्षण प्रभावी लक्षण की उपस्थिति में दिखाई नहीं देता, उसे अप्रभावी लक्षण कहते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि लंबे पौधे का लक्षण प्रभावी और बौने पौधे का लक्षण अप्रभावी माना जाए, तो संकर संतति में लंबाई का प्रभावी लक्षण दिखाई दे सकता है।

जीन क्या है?

जीन DNA का वह विशिष्ट भाग है जो किसी विशेष लक्षण से संबंधित आनुवंशिक सूचना को नियंत्रित करता है। जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं। किसी जीव के अनेक आनुवंशिक लक्षणों के निर्धारण में जीन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

‘जीन’ शब्द का प्रयोग वैज्ञानिक विल्हेम जोहान्सन ने किया था। जीन को आनुवंशिकता की मूल इकाई के रूप में समझा जाता है।

गुणसूत्र

कोशिका के केंद्रक में पाए जाने वाले धागेनुमा संरचनाओं को गुणसूत्र कहते हैं। गुणसूत्र मुख्यतः DNA और प्रोटीन से बने होते हैं। जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं और आनुवंशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मानव में गुणसूत्रों की संख्या

मानव की सामान्य शरीर कोशिका में कुल 46 गुणसूत्र पाए जाते हैं, जो 23 जोड़ों में व्यवस्थित होते हैं। इनमें 22 जोड़े ऑटोसोम तथा एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र का होता है।

मानव युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या 23 होती है। निषेचन के दौरान नर और मादा युग्मकों के मिलने से बनने वाली युग्मनज कोशिका में सामान्यतः 46 गुणसूत्र हो जाते हैं।

मेंडल का एकसंकरण प्रयोग

मेंडल ने एक जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले पौधों को लेकर संकरण कराया। उदाहरण के लिए लंबे और बौने मटर के पौधों के संकरण से प्रथम पीढ़ी में सामान्यतः लंबे पौधे प्राप्त हुए। इससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि एक लक्षण दूसरे लक्षण पर प्रभावी हो सकता है।

जब प्रथम पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण कराया गया, तो दूसरी पीढ़ी में लंबे और बौने पौधे प्राप्त हुए। इनके लक्षण-प्ररूपी अनुपात को सामान्यतः 3 : 1 के रूप में समझाया जाता है।

मेंडल का प्रभुत्व का नियम

जब किसी जीव में किसी लक्षण के दो विपरीत कारक उपस्थित हों, तो उनमें से एक प्रभावी होकर अपना लक्षण प्रकट कर सकता है, जबकि दूसरा अप्रभावी रह सकता है। इस अवधारणा को प्रभुत्व का नियम कहा जाता है।

पृथक्करण का नियम

युग्मक निर्माण के समय किसी लक्षण के वैकल्पिक कारक एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में उनका केवल एक कारक पहुँचता है। इसे पृथक्करण का नियम कहा जाता है। निषेचन के समय नर और मादा युग्मकों के मिलने से ये कारक फिर से जोड़ी बना सकते हैं।

लैंगिक जनन और आनुवंशिकता

लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों का योगदान होता है। इसलिए संतान को आनुवंशिक सामग्री दोनों जनकों से प्राप्त होती है। इसी कारण संतान में माता और पिता दोनों के लक्षणों का मिश्रण दिखाई दे सकता है।

लैंगिक जनन में उत्पन्न आनुवंशिक संयोजन विभिन्नता का महत्वपूर्ण स्रोत है। यही विभिन्नता आगे चलकर प्राकृतिक चयन और जैव विकास की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मानव में लिंग निर्धारण

मनुष्य में लिंग निर्धारण मुख्यतः लिंग गुणसूत्रों द्वारा होता है। महिलाओं में लिंग गुणसूत्रों का संयोजन सामान्यतः XX और पुरुषों में XY होता है।

महिला के अंडाणु में सामान्यतः X गुणसूत्र होता है, जबकि पुरुष के शुक्राणु में X या Y गुणसूत्र हो सकता है। यदि X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडाणु से निषेचित करता है, तो XX संयोजन बनता है। यदि Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु निषेचन करता है, तो XY संयोजन बनता है। इसलिए जैविक लिंग निर्धारण में शुक्राणु का X या Y गुणसूत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लिंग गुणसूत्र और ऑटोसोम

आधारऑटोसोमलिंग गुणसूत्र
मानव में जोड़े22 जोड़े1 जोड़ा
मुख्य भूमिकाशरीर के अनेक लक्षणों का नियंत्रणलिंग निर्धारण में प्रमुख भूमिका
उदाहरणगुणसूत्र 1 से 22X और Y

वंशागत और अर्जित लक्षण

जो लक्षण आनुवंशिक पदार्थ के माध्यम से माता-पिता से संतानों तक पहुँचते हैं, उन्हें वंशागत लक्षण कहा जाता है। इसके विपरीत जीवनकाल के दौरान वातावरण, अभ्यास या अनुभव के कारण प्राप्त होने वाले लक्षणों को अर्जित लक्षण कहा जाता है।

अर्जित लक्षण सामान्यतः सीधे DNA में वंशागत परिवर्तन नहीं करते, इसलिए वे आवश्यक रूप से अगली पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं होते। उदाहरण के लिए व्यायाम से विकसित मांसपेशियाँ सामान्यतः संतानों में उसी रूप में वंशागत नहीं होतीं।

जैव विकास क्या है?

जीवों की पीढ़ियों में लंबे समय के दौरान होने वाले वंशागत परिवर्तनों के संचय से जीवों के रूप और संरचना में होने वाले परिवर्तन को जैव विकास या विकासवाद कहा जाता है। जैव विकास कोई अचानक होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह अनेक पीढ़ियों में होने वाले परिवर्तनों का परिणाम है।

विभिन्नता, आनुवंशिकता और प्राकृतिक चयन जैव विकास को समझने में महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। जीवों की बदलती परिस्थितियों में अनुकूलता के कारण कुछ लक्षण अधिक सामान्य हो सकते हैं।

लामार्क का सिद्धांत

जीन बैप्टिस्ट लामार्क ने जीवों के विकास को समझाने के लिए उपार्जित लक्षणों की वंशागति का सिद्धांत प्रस्तुत किया। उनके अनुसार जीव अपने जीवनकाल में उपयोग और अनुपयोग के कारण कुछ लक्षणों में परिवर्तन प्राप्त कर सकते हैं और ये उपार्जित लक्षण अगली पीढ़ी तक पहुँच सकते हैं।

आधुनिक आनुवंशिकी के विकास के बाद उपार्जित लक्षणों की सामान्य वंशागति संबंधी लामार्क की अवधारणा को जैव विकास की पूर्ण व्याख्या नहीं माना जाता। फिर भी विकासवाद के इतिहास में लामार्क का योगदान महत्वपूर्ण है।

डार्विन का प्राकृतिक चयन का सिद्धांत

चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक चयन के माध्यम से जैव विकास की महत्वपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत की। उनके अनुसार किसी जनसंख्या में विभिन्नताएँ मौजूद होती हैं और सीमित संसाधनों के कारण जीवों के बीच अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है। ऐसे जीव जिनमें वातावरण के अनुकूल उपयोगी लक्षण होते हैं, उनके जीवित रहने और प्रजनन की संभावना अधिक हो सकती है।

समय के साथ उपयोगी वंशागत लक्षणों का प्रसार बढ़ सकता है। इस प्रक्रिया को प्राकृतिक चयन के संदर्भ में समझा जाता है। डार्विन की प्रसिद्ध पुस्तक “On the Origin of Species” में प्राकृतिक चयन से संबंधित विचारों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया था।

प्राकृतिक चयन

पर्यावरण के अनुकूल उपयोगी वंशागत लक्षणों वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की अपेक्षाकृत अधिक संभावना को प्राकृतिक चयन के रूप में समझा जाता है। प्राकृतिक चयन लंबे समय में जनसंख्या की विशेषताओं में परिवर्तन ला सकता है।

जीवाश्म

प्राचीन जीवों के शरीर, उनके अवशेषों या उनके द्वारा छोड़े गए चिन्हों के संरक्षित प्रमाणों को जीवाश्म कहते हैं। जीवाश्म पृथ्वी पर जीवन के इतिहास और जीवों में समय के साथ हुए परिवर्तनों को समझने के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।

जीवाश्मों की आयु और उनकी संरचना का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास करते हैं कि प्राचीन जीव किस प्रकार के थे और उनके बाद आने वाले जीवों से उनका क्या संबंध हो सकता है।

समजात अंग

वे अंग जिनकी मूल संरचनात्मक योजना समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग हो सकते हैं, समजात अंग कहलाते हैं। उदाहरण के लिए मनुष्य का हाथ, चमगादड़ का अग्रपाद और व्हेल का फ्लिपर मूल संरचनात्मक समानता प्रदर्शित करते हैं, हालांकि इनके कार्य अलग हैं। समजात अंग समान पूर्वज से संबंधित विकासीय इतिहास का संकेत दे सकते हैं।

समवृत्ति अंग

वे अंग जिनके कार्य समान होते हैं, लेकिन उनकी मूल संरचना और विकासीय उत्पत्ति अलग होती है, समवृत्ति अंग कहलाते हैं। उदाहरण के लिए पक्षी के पंख और कीट के पंख उड़ने का समान कार्य करते हैं, लेकिन उनकी संरचना और विकासीय उत्पत्ति अलग होती है।

अवशेषी अंग

ऐसे अंग जो किसी जीव के पूर्वजों में अधिक उपयोगी रहे होंगे, लेकिन वर्तमान जीव में उनका कार्य बहुत कम या सीमित हो गया है, उन्हें अवशेषी अंग कहा जाता है। मानव शरीर में अपेंडिक्स और कान की कुछ मांसपेशियाँ इसके उदाहरणों के रूप में पढ़ाई जाती हैं।

जैव विकास के प्रमाण

जैव विकास के अध्ययन में जीवाश्म, समजात अंग, समवृत्ति अंग तथा भ्रूणीय समानताएँ महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करती हैं। विभिन्न जीवों की संरचना में पाई जाने वाली समानताएँ और अंतर उनके विकासीय संबंधों को समझने में सहायता करते हैं।

कृत्रिम चयन

मनुष्य द्वारा अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी विशेष उपयोगी लक्षण वाले जीवों का चयन करके उनका प्रजनन करवाना कृत्रिम चयन कहलाता है। विभिन्न प्रकार की पत्तागोभी, ब्रोकोली और अन्य कृषि किस्मों का विकास कृत्रिम चयन के उदाहरणों से समझाया जा सकता है।

विभिन्नता और जैव विकास में संबंध

विभिन्नता जैव विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। यदि किसी जनसंख्या में वंशागत विभिन्नताएँ मौजूद हैं, तो बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में कुछ विभिन्नताएँ लाभदायक हो सकती हैं। प्राकृतिक चयन उन लक्षणों के प्रसार में सहायता कर सकता है जो जीवों को उनके वातावरण में अधिक अनुकूल बनाते हैं।

मानव विकास

मानव विकास एक लंबी विकासीय प्रक्रिया का परिणाम है। आधुनिक मानव और अन्य प्राइमेट्स के बीच विकासीय संबंध पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने जीवाश्मों, आनुवंशिक प्रमाणों और तुलनात्मक शरीर रचना के आधार पर मानव विकास के इतिहास का अध्ययन किया है। आधुनिक मानव के प्रारंभिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण जीवाश्म अफ्रीका से प्राप्त हुए हैं।

मानव विकास को समझते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आधुनिक मनुष्य सीधे वर्तमान समय के किसी एक जीवित बंदर से विकसित नहीं हुआ। मनुष्य और वर्तमान के अन्य प्राइमेट्स का दूरस्थ विकासीय पूर्वज साझा रहा है।

अनुवांशिकता और जैव विकास में संबंध

आनुवंशिकता के कारण लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते हैं और विभिन्नता के कारण संततियों में नए अंतर उत्पन्न हो सकते हैं। यदि कोई वंशागत विभिन्नता पर्यावरण में लाभदायक होती है और प्राकृतिक चयन के कारण उसका प्रसार बढ़ता है, तो अनेक पीढ़ियों के बाद जनसंख्या में महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई दे सकता है। इस प्रकार आनुवंशिकता, विभिन्नता और प्राकृतिक चयन जैव विकास को समझने में परस्पर जुड़े हुए हैं।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. आनुवंशिकी का जनक किसे कहा जाता है?

    (a) चार्ल्स डार्विन (b) ग्रेगर जॉन मेंडल (c) लामार्क (d) रॉबर्ट हुक

    उत्तर: (b) ग्रेगर जॉन मेंडल
  2. मेंडल ने अपने प्रयोगों में किस पौधे का उपयोग किया?

    (a) गुलाब (b) मटर (c) गेहूँ (d) चना

    उत्तर: (b) मटर
  3. मेंडल ने मटर में कितने जोड़े विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया?

    (a) 3 (b) 5 (c) 7 (d) 9

    उत्तर: (c) 7
  4. जीन कहाँ पाए जाते हैं?

    (a) कोशिका झिल्ली में (b) गुणसूत्रों पर (c) कोशिकाद्रव्य में (d) राइबोसोम में

    उत्तर: (b) गुणसूत्रों पर
  5. गुणसूत्र मुख्यतः किससे बने होते हैं?

    (a) केवल RNA (b) केवल वसा (c) DNA और प्रोटीन (d) केवल कार्बोहाइड्रेट

    उत्तर: (c) DNA और प्रोटीन
  6. मानव की सामान्य शरीर कोशिका में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    (a) 23 (b) 44 (c) 46 (d) 48

    उत्तर: (c) 46
  7. मानव में ऑटोसोम के कितने जोड़े होते हैं?

    (a) 21 (b) 22 (c) 23 (d) 24

    उत्तर: (b) 22
  8. मानव में स्त्री के लिंग गुणसूत्रों का संयोजन क्या होता है?

    (a) XY (b) XX (c) YY (d) XO

    उत्तर: (b) XX
  9. मानव में पुरुष के लिंग गुणसूत्रों का संयोजन क्या होता है?

    (a) XX (b) XY (c) YY (d) XO

    उत्तर: (b) XY
  10. मानव युग्मक में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    (a) 22 (b) 23 (c) 44 (d) 46

    उत्तर: (b) 23
  11. मेंडल के एकसंकरण प्रयोग में F2 पीढ़ी का लक्षण-प्ररूपी अनुपात क्या था?

    (a) 1 : 1 (b) 1 : 2 : 1 (c) 3 : 1 (d) 9 : 3 : 3 : 1

    उत्तर: (c) 3 : 1
  12. प्राकृतिक चयन का सिद्धांत किसने दिया?

    (a) लामार्क (b) डार्विन (c) मेंडल (d) हुक

    उत्तर: (b) डार्विन
  13. ‘On the Origin of Species’ पुस्तक किसने लिखी?

    (a) डार्विन (b) मेंडल (c) लामार्क (d) अरस्तू

    उत्तर: (a) डार्विन
  14. कीटों के पंख और चमगादड़ के पंख किस प्रकार के अंग हैं?

    (a) समजात (b) समवृत्ति (c) अवशेषी (d) समान संरचना वाले

    उत्तर: (b) समवृत्ति
  15. मनुष्य के हाथ और चमगादड़ के अग्रपाद किस प्रकार के अंग हैं?

    (a) समजात (b) समवृत्ति (c) अवशेषी (d) कोई नहीं

    उत्तर: (a) समजात
  16. वंशागत लक्षणों का नियंत्रण मुख्यतः किसके द्वारा होता है?

    (a) जीन (b) कोशिका भित्ति (c) जल (d) वसा

    उत्तर: (a) जीन
  17. DNA की प्रतिकृति में होने वाले छोटे परिवर्तन किसका कारण बन सकते हैं?

    (a) विभिन्नता (b) पाचन (c) श्वसन (d) उत्सर्जन

    उत्तर: (a) विभिन्नता
  18. मानव में बच्चे के लिंग निर्धारण में कौन-सा युग्मक X या Y गुणसूत्र प्रदान करता है?

    (a) अंडाणु (b) शुक्राणु (c) दोनों हमेशा Y (d) कोई नहीं

    उत्तर: (b) शुक्राणु
  19. अफ्रीका को किसके विकास के महत्वपूर्ण प्रारंभिक क्षेत्र के रूप में माना जाता है?

    (a) आधुनिक मानव (b) मछली (c) कीट (d) सरीसृप

    उत्तर: (a) आधुनिक मानव
  20. जीवाश्म किसके अध्ययन में महत्वपूर्ण प्रमाण हैं?

    (a) जैव विकास (b) केवल पाचन (c) केवल श्वसन (d) केवल उत्सर्जन

    उत्तर: (a) जैव विकास

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: आनुवंशिकता क्या है?

    उत्तर: माता-पिता से संतानों में लक्षणों के स्थानांतरण की प्रक्रिया आनुवंशिकता कहलाती है।
  2. प्रश्न: विभिन्नता क्या है?

    उत्तर: एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले अंतर को विभिन्नता कहते हैं।
  3. प्रश्न: जीन क्या है?

    उत्तर: DNA का वह विशिष्ट भाग जो किसी आनुवंशिक लक्षण से संबंधित सूचना रखता है, जीन कहलाता है।
  4. प्रश्न: गुणसूत्र क्या हैं?

    उत्तर: केंद्रक में पाए जाने वाले DNA और प्रोटीन से बने धागेनुमा संरचनाओं को गुणसूत्र कहते हैं।
  5. प्रश्न: मानव शरीर की सामान्य कोशिका में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    उत्तर: मानव की सामान्य शरीर कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं।
  6. प्रश्न: मानव युग्मक में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    उत्तर: मानव युग्मक में 23 गुणसूत्र होते हैं।
  7. प्रश्न: मेंडल ने किस पौधे पर प्रयोग किया था?

    उत्तर: मेंडल ने मटर के पौधे पर प्रयोग किया था।
  8. प्रश्न: प्राकृतिक चयन का सिद्धांत किसने दिया?

    उत्तर: प्राकृतिक चयन का सिद्धांत चार्ल्स डार्विन ने दिया था।
  9. प्रश्न: समजात अंग क्या हैं?

    उत्तर: समान मूल संरचनात्मक योजना वाले, लेकिन अलग कार्य करने वाले अंग समजात अंग कहलाते हैं।
  10. प्रश्न: समवृत्ति अंग क्या हैं?

    उत्तर: समान कार्य करने वाले लेकिन अलग संरचनात्मक और विकासीय उत्पत्ति वाले अंग समवृत्ति अंग कहलाते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: आनुवंशिकता और विभिन्नता में क्या संबंध है?

    उत्तर: आनुवंशिकता के कारण माता-पिता के लक्षण संतानों तक पहुँचते हैं, जबकि विभिन्नता के कारण संतानों में नए अंतर उत्पन्न हो सकते हैं। दोनों मिलकर जीवों के लक्षणों और उनके विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  2. प्रश्न: मेंडल ने मटर के पौधे को अपने प्रयोगों के लिए क्यों चुना?

    उत्तर: मटर में कई स्पष्ट विपरीत लक्षण पाए जाते हैं, इसका जीवन-चक्र अपेक्षाकृत छोटा होता है और इसमें स्वपरागण तथा परपरागण को नियंत्रित करना आसान होता है। इसलिए यह आनुवंशिकता के प्रयोगों के लिए उपयुक्त था।
  3. प्रश्न: प्रभावी और अप्रभावी लक्षण में अंतर बताइए।

    उत्तर: जो लक्षण संकर अवस्था में भी व्यक्त होता है, उसे प्रभावी लक्षण कहते हैं। जो लक्षण प्रभावी लक्षण की उपस्थिति में व्यक्त नहीं होता, उसे अप्रभावी लक्षण कहते हैं।
  4. प्रश्न: DNA प्रतिकृति में विभिन्नता कैसे उत्पन्न होती है?

    उत्तर: DNA की प्रतिकृति बनाते समय प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं होती। कभी-कभी छोटे परिवर्तन उत्पन्न हो जाते हैं। ये परिवर्तन, विशेषकर यदि वे जनन कोशिकाओं में हों, संतति में आनुवंशिक विभिन्नता का कारण बन सकते हैं।
  5. प्रश्न: मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है?

    उत्तर: महिला के अंडाणु में X गुणसूत्र होता है, जबकि पुरुष के शुक्राणु में X या Y गुणसूत्र हो सकता है। X शुक्राणु के मिलने पर XX संयोजन और Y शुक्राणु के मिलने पर XY संयोजन बनता है।
  6. प्रश्न: समजात और समवृत्ति अंगों में अंतर बताइए।

    उत्तर: समजात अंगों की मूल संरचना और विकासीय उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग हो सकते हैं। समवृत्ति अंगों के कार्य समान होते हैं, लेकिन उनकी मूल संरचना और विकासीय उत्पत्ति अलग होती है।
  7. प्रश्न: जीवाश्म जैव विकास के प्रमाण कैसे हैं?

    उत्तर: जीवाश्म प्राचीन जीवों के संरक्षित अवशेष या चिन्ह हैं। इनके अध्ययन से वैज्ञानिक प्राचीन जीवों की संरचना तथा अलग-अलग समय में जीवों में हुए परिवर्तनों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।
  8. प्रश्न: अर्जित और वंशागत लक्षणों में अंतर बताइए।

    उत्तर: वंशागत लक्षण आनुवंशिक पदार्थ के माध्यम से माता-पिता से संतानों तक पहुँचते हैं। अर्जित लक्षण जीवनकाल के दौरान वातावरण, अभ्यास या अनुभव के कारण विकसित होते हैं और सामान्यतः उसी रूप में संतानों तक नहीं पहुँचते।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: मेंडल के प्रयोग और उनके निष्कर्षों को समझाइए।

    उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडल ने मटर के पौधों पर आनुवंशिकता के महत्वपूर्ण प्रयोग किए। उन्होंने स्पष्ट विपरीत लक्षणों वाले पौधों का चयन किया और संकरण कराया। एकसंकरण प्रयोग में लंबे और बौने पौधों के संकरण से प्रथम पीढ़ी में लंबे पौधे प्राप्त हुए। इससे प्रभावी लक्षण की अवधारणा स्पष्ट हुई। जब प्रथम पीढ़ी के पौधों का स्वपरागण कराया गया, तो दूसरी पीढ़ी में लंबे और बौने दोनों पौधे प्राप्त हुए और सामान्यतः 3 : 1 का लक्षण-प्ररूपी अनुपात देखा गया। मेंडल के प्रयोगों ने यह स्पष्ट किया कि आनुवंशिक लक्षण विशिष्ट कारकों द्वारा नियंत्रित होते हैं और ये कारक युग्मक निर्माण के समय अलग हो सकते हैं।
  2. प्रश्न: मानव में लिंग निर्धारण की प्रक्रिया समझाइए।

    उत्तर: मानव में कुल 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं, जिनमें एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र का होता है। महिलाओं में सामान्यतः XX और पुरुषों में XY संयोजन होता है। महिला के सभी अंडाणु X गुणसूत्र वाले होते हैं। पुरुष के शुक्राणु दो प्रकार के हो सकते हैं—X वाले और Y वाले। यदि X वाला शुक्राणु अंडाणु से मिलता है तो XX संयोजन बनता है और भ्रूण का जैविक लिंग सामान्यतः स्त्री होता है। यदि Y वाला शुक्राणु अंडाणु से मिलता है तो XY संयोजन बनता है और भ्रूण का जैविक लिंग सामान्यतः पुरुष होता है।
  3. प्रश्न: जैव विकास में विभिन्नता की भूमिका समझाइए।

    उत्तर: किसी प्रजाति की जनसंख्या में विभिन्न प्रकार की वंशागत विभिन्नताएँ मौजूद हो सकती हैं। वातावरण में परिवर्तन होने पर इनमें से कुछ विभिन्नताएँ जीवों के लिए लाभदायक साबित हो सकती हैं। ऐसे जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की संभावना अधिक हो सकती है। यदि लाभदायक लक्षण अगली पीढ़ियों में लगातार पहुँचता और फैलता है, तो लंबे समय में जनसंख्या की विशेषताओं में परिवर्तन हो सकता है। इसलिए विभिन्नता जैव विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
  4. प्रश्न: डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत को समझाइए।

    उत्तर: डार्विन के अनुसार जीवों की जनसंख्या में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। जीवों की संख्या बढ़ने की क्षमता संसाधनों की उपलब्धता से अधिक हो सकती है, इसलिए अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है। वातावरण के अनुकूल उपयोगी लक्षण वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की संभावना अधिक हो सकती है। उनके वंशजों में वे लक्षण अधिक सामान्य हो सकते हैं। कई पीढ़ियों तक यह प्रक्रिया चलने पर जनसंख्या में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकता है। इस प्रक्रिया को प्राकृतिक चयन के रूप में समझा जाता है।
  5. प्रश्न: जैव विकास के प्रमुख प्रमाणों का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: जैव विकास के प्रमुख प्रमाणों में जीवाश्म, समजात अंग, समवृत्ति अंग और भ्रूणीय समानताएँ शामिल हैं। जीवाश्म प्राचीन जीवों के बारे में जानकारी देते हैं। समजात अंग विभिन्न जीवों के समान विकासीय मूल का संकेत देते हैं। समवृत्ति अंग बताते हैं कि अलग विकासीय पृष्ठभूमि वाले जीवों में समान कार्य के लिए समान प्रकार की संरचनाएँ विकसित हो सकती हैं। इन प्रमाणों के संयुक्त अध्ययन से जीवों के विकासीय इतिहास को समझने में सहायता मिलती है।

परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 9 कौन-सा है?

    उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 9 “अनुवांशिकता एवं जैव विकास” है।
  2. प्रश्न: आनुवंशिकी का जनक किसे कहा जाता है?

    उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडल को आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है।
  3. प्रश्न: मेंडल ने किस पौधे पर प्रयोग किया था?

    उत्तर: मेंडल ने मटर के पौधे पर आनुवंशिकता संबंधी प्रयोग किए थे।
  4. प्रश्न: मानव शरीर की सामान्य कोशिका में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    उत्तर: मानव की सामान्य शरीर कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं, जो 23 जोड़ों में पाए जाते हैं।
  5. प्रश्न: मानव युग्मक में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    उत्तर: मानव के नर और मादा युग्मक में 23-23 गुणसूत्र होते हैं।
  6. प्रश्न: मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है?

    उत्तर: महिला का अंडाणु X गुणसूत्र प्रदान करता है, जबकि पुरुष का शुक्राणु X या Y गुणसूत्र प्रदान कर सकता है। XX संयोजन सामान्यतः स्त्री और XY संयोजन सामान्यतः पुरुष जैविक लिंग से संबंधित होता है।
  7. प्रश्न: प्राकृतिक चयन का सिद्धांत किसने दिया?

    उत्तर: प्राकृतिक चयन का सिद्धांत चार्ल्स डार्विन ने प्रस्तुत किया था।
  8. प्रश्न: जीवाश्म क्या हैं?

    उत्तर: प्राचीन जीवों के संरक्षित अवशेष या उनके द्वारा छोड़े गए चिन्ह जीवाश्म कहलाते हैं।
  9. प्रश्न: समजात अंग क्या हैं?

    उत्तर: समान मूल संरचना और विकासीय उत्पत्ति वाले, लेकिन अलग कार्य करने वाले अंग समजात अंग कहलाते हैं।
  10. प्रश्न: समवृत्ति अंग क्या हैं?

    उत्तर: समान कार्य करने वाले लेकिन अलग मूल संरचना और विकासीय उत्पत्ति वाले अंग समवृत्ति अंग कहलाते हैं।
  11. प्रश्न: विभिन्नता जैव विकास में क्यों महत्वपूर्ण है?

    उत्तर: विभिन्नता बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में कुछ जीवों को लाभ पहुँचा सकती है और प्राकृतिक चयन के माध्यम से लंबे समय में जनसंख्या में विकासीय परिवर्तन का आधार बन सकती है।

निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 9)

“अनुवांशिकता एवं जैव विकास” अध्याय से यह समझने में सहायता मिलती है कि जीवों के लक्षण किस प्रकार माता-पिता से संतानों तक पहुँचते हैं और विभिन्नताएँ किस प्रकार उत्पन्न होती हैं। मेंडल के प्रयोगों ने आनुवंशिकता के अध्ययन को वैज्ञानिक आधार दिया, जबकि डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत ने जीवों के विकास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जीन, DNA और गुणसूत्र आनुवंशिक सूचना के स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानव में लिंग निर्धारण लिंग गुणसूत्रों से संबंधित है। जीवाश्म, समजात अंग और समवृत्ति अंग जैसे प्रमाण जैव विकास के अध्ययन में उपयोगी हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को मेंडल के प्रयोग, आनुवंशिकता के नियम, लिंग निर्धारण, विभिन्नता, प्राकृतिक चयन तथा जैव विकास के प्रमाणों को विशेष रूप से तैयार करना चाहिए।

यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

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