ढहते विश्वास – कक्षा 10 हिंदी वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 2 सम्पूर्ण व्याख्या

11 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 2)

“ढहते विश्वास” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक “वर्णिका भाग 2” के गद्य खंड की दूसरी कहानी है। यह मूल रूप से उड़िया भाषा में लिखी गई एक चिंतन-प्रधान कहानी है, जिसके रचयिता सातकोड़ी होता हैं। यह कहानी उड़ीसा (ओडिशा) के जन-जीवन, वहाँ की प्राकृतिक विपत्तियों तथा बाढ़ की विभीषिका का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती है। कहानी के माध्यम से लेखक यह दिखाते हैं कि प्राकृतिक आपदा के समय मनुष्य का देवी-देवताओं पर से विश्वास किस प्रकार डगमगाने लगता है।

लेखक परिचय

“ढहते विश्वास” कहानी के रचयिता सातकोड़ी होता उड़िया भाषा के प्रसिद्ध कथाकार हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में उड़ीसा प्रदेश के आम जन-जीवन, वहाँ की प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और सूखे, तथा सामान्य जनता के संघर्ष और पीड़ा को अत्यंत सजीव और मार्मिक ढंग से चित्रित किया है। उन्हें उड़ीसा के जन-जीवन का सफल चितेरा माना जाता है। उनकी लेखनी में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदना की गहरी झलक मिलती है।

कहानी का सारांश (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 2)

कहानी की केंद्रीय पात्र लक्ष्मी है, जिसका पति लक्ष्मण कलकत्ता में नौकरी करता था, परंतु उसकी कमाई से परिवार का पूरा भरण-पोषण नहीं हो पाता था। इसलिए लक्ष्मी स्वयं तहसीलदार साहब के घर छिटपुट काम करके परिवार की आर्थिक कमी को पूरा करती थी। उसके पास एक बीघा खेत भी था, जिसे वह हल किराए पर लेकर जुतवाती थी, परंतु प्रकृति के प्रकोप के कारण यह भूमि भी अक्सर बर्बाद हो जाती थी। लक्ष्मी का घर देबी नदी के बाँध के नीचे स्थित था, और वह अपने विवाहित जीवन में पहले भी दलेई बाँध के टूटने से आई भीषण बाढ़ की त्रासदी झेल चुकी थी।

लगातार कई दिनों तक हो रही वर्षा को देखकर लक्ष्मी के मन में यह आशंका गहराने लगती है कि इस बार भी भयंकर बाढ़ आ सकती है। पहले सूखे के कारण धान के अंकुर जल चुके थे, फिर भी किसान हिम्मत न हारकर वर्षा होने पर रोपनी की प्रतीक्षा कर रहे थे। लेकिन लगातार बारिश ने बाढ़ की आशंका को और बढ़ा दिया। गाँव के युवक स्वयंसेवक दल बनाकर बाँध की सुरक्षा में जुट जाते हैं। अच्युत और गुणनिधि जैसे युवक बाँध की मरम्मत और सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

लक्ष्मी अपने बड़े बेटे को बाँध की स्थिति पर नजर रखने के लिए भेजती है और स्वयं दो छोटी बच्चियों तथा एक साल के शिशु के साथ घर पर रहती है। पूर्व अनुभव के आधार पर वह पहले से ही कुछ चिउड़ा, बर्तन और कपड़े इकट्ठा कर लेती है तथा गाय-बकरियों को खोल देती है। शीघ्र ही पानी बढ़ने लगता है और चारों ओर शोर मच जाता है। स्वयंसेवक युवक लोगों को ऊँचे स्थानों की ओर जाने का निर्देश देते हैं। तभी दलेई बाँध टूट जाता है और बाढ़ का पानी वृक्षों और घरों को तेजी से निगलने लगता है।

भयभीत लोग काँपते पैरों से ऊँचे टीलों, विद्यालय और देवी-स्थान की ओर भागते हैं। शिव मंदिर के पास पानी का बहाव इतना तीव्र हो जाता है कि लक्ष्मी बरगद के पेड़ की जटाओं में लटककर किसी तरह पेड़ पर चढ़ जाती है और अपनी जान बचाती है। लोग बड़ी आशा से माँ मुंडेश्वरी देवी और भगवान शिव की शरण में जाते हैं, जहाँ चैत की संक्रांति पर पूजा और बलि दी जाती थी, परंतु इस भीषण संकट में न तो देवी और न ही भगवान शिव कोई सहायता कर पाते हैं। इससे लोगों का देवी-देवताओं पर से विश्वास टूटने लगता है, और यही घटना कहानी को उसका शीर्षक “ढहते विश्वास” प्रदान करती है।

केंद्रीय भाव (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 2)

इस कहानी का केंद्रीय भाव यह है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय मनुष्य की अंधश्रद्धा और देवी-देवताओं पर आँख मूंदकर किया गया भरोसा टूट जाता है, और वह यह समझने लगता है कि संकट के समय वास्तविक सहायता मानवीय प्रयास, संगठन और साहस से ही संभव है। साथ ही यह कहानी उड़ीसा के ग्रामीण जनजीवन के संघर्ष, गरीबी और प्राकृतिक विपत्तियों के बीच भी हार न मानने की भावना को उजागर करती है।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

सातकोड़ी होता इस कहानी में उड़ीसा के एक ऐसे परिवार का चित्रण करते हैं, जो निरंतर प्राकृतिक आपदाओं—बाढ़ और सूखे—का सामना करते हुए भी जीवन-संघर्ष में डटा रहता है। लक्ष्मी का चरित्र एक ऐसी स्त्री के रूप में उभरता है, जो पति के परदेश में रहने के बावजूद अकेले ही परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी संभालती है। उसका पूर्व अनुभव उसे संकट के प्रति सचेत रखता है, इसीलिए वह पहले से आवश्यक सामग्री एकत्र कर लेती है।

गाँव के युवकों द्वारा बनाया गया स्वयंसेवक दल यह दर्शाता है कि संगठित सामूहिक प्रयास ही आपदा से निपटने का सबसे सशक्त माध्यम है। परंतु जब दलेई बाँध टूटता है और बाढ़ का पानी सब कुछ लीलने लगता है, तो लोग निराश होकर देवी-देवताओं की शरण में जाते हैं। यहाँ लेखक यह गहरा प्रश्न उठाते हैं कि क्या केवल आस्था और पूजा-पाठ से प्राकृतिक विपत्तियों का सामना किया जा सकता है? जब माँ मुंडेश्वरी और भगवान शिव भी कोई सहायता नहीं कर पाते, तो लोगों की अंधश्रद्धा टूटने लगती है और उनका विश्वास डगमगा जाता है। इस प्रकार कहानी का शीर्षक “ढहते विश्वास” पूर्णतः सार्थक सिद्ध होता है।

पात्र-परिचय

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 2)

  1. “ढहते विश्वास” कहानी के रचयिता कौन हैं?(a) श्रीनिवास (b) सातकोड़ी होता (c) साँवर दइया (d) सुजाता

    उत्तर: (b) सातकोड़ी होता

  2. सातकोड़ी होता किस भाषा के कथाकार हैं?(a) तमिल (b) गुजराती (c) राजस्थानी (d) उड़िया

    उत्तर: (d) उड़िया

  3. लक्ष्मी का पति किस शहर में नौकरी करता था?(a) मुंबई (b) दिल्ली (c) कलकत्ता (d) जयपुर

    उत्तर: (c) कलकत्ता

  4. लक्ष्मी का घर किस नदी के बाँध के नीचे था?(a) गंगा (b) यमुना (c) देबी (d) सतलज

    उत्तर: (c) देबी

  5. बाढ़ के पानी को रोकने के लिए गाँव के लोग किस बाँध को मजबूत करने का प्रयास कर रहे थे?(a) हीराकुंड (b) दलेई (c) भाखड़ा (d) इनमें से कोई नहीं

    उत्तर: (b) दलेई

  6. लोग बाढ़ के समय किन देवी-देवताओं की शरण में गए?(a) माँ मुंडेश्वरी एवं भगवान शिव (b) गणेश जी (c) हनुमान जी (d) माँ दुर्गा

    उत्तर: (a) माँ मुंडेश्वरी एवं भगवान शिव

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: “ढहते विश्वास” कहानी किस भाषा से अनूदित है?उत्तर: यह कहानी उड़िया भाषा से अनूदित है।
  2. प्रश्न: लक्ष्मी अपने पति की अनुपस्थिति में क्या काम करके परिवार चलाती थी?उत्तर: लक्ष्मी तहसीलदार साहब के घर छिटपुट काम करके परिवार का भरण-पोषण करती थी।
  3. प्रश्न: बाढ़ के समय लक्ष्मी ने अपनी जान कैसे बचाई?उत्तर: लक्ष्मी बरगद के पेड़ की जटाओं में लटककर पेड़ पर चढ़ गई और इस प्रकार अपनी जान बचाई।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: कहानी का शीर्षक “ढहते विश्वास” क्यों सार्थक है?उत्तर: भीषण बाढ़ के समय लोग बड़ी आशा से माँ मुंडेश्वरी और भगवान शिव की शरण में गए, परंतु कोई सहायता न मिलने पर उनका देवी-देवताओं पर से विश्वास टूटने लगा, इसलिए कहानी का शीर्षक “ढहते विश्वास” पूर्णतः सटीक है।
  2. प्रश्न: गाँव के युवकों ने बाढ़ के समय क्या भूमिका निभाई?उत्तर: गाँव के युवकों ने स्वयंसेवक दल बनाकर बाँध की सुरक्षा और मरम्मत में योगदान दिया तथा लोगों को समय रहते ऊँचे स्थानों पर जाने का निर्देश देकर उनकी जान बचाने में सहायता की।
  3. प्रश्न: बाढ़ आने से पहले लक्ष्मी ने क्या तैयारी की?उत्तर: पूर्व अनुभव के आधार पर लक्ष्मी ने पहले से ही चिउड़ा, बर्तन और कपड़े इकट्ठा कर लिए तथा अपने पशुओं को खोल दिया, ताकि आपातकाल में वे स्वयं भाग सकें।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: “ढहते विश्वास” कहानी के आधार पर बाढ़ की विभीषिका का वर्णन कीजिए।उत्तर: सातकोड़ी होता की “ढहते विश्वास” कहानी में उड़ीसा में आई भीषण बाढ़ का सजीव चित्रण किया गया है। लगातार वर्षा के कारण दलेई बाँध टूट जाता है और बाढ़ का पानी तेजी से गाँव में फैलकर घरों और वृक्षों को अपने आगोश में ले लेता है। लोग भयभीत होकर ऊँचे स्थानों, विद्यालय और देवी-स्थान की ओर भागते हैं। लक्ष्मी भी अपने बच्चों के साथ किसी तरह बरगद के पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाती है। इस भीषण संकट में लोग देवी-देवताओं से सहायता की आशा करते हैं, परंतु कोई चमत्कार नहीं होता। इस प्रकार लेखक ने बाढ़ की विनाशकारी शक्ति और मनुष्य की असहायता को बड़ी संवेदनशीलता से चित्रित किया है।
  2. प्रश्न: इस कहानी के माध्यम से लेखक ने समाज को क्या संदेश दिया है?उत्तर: लेखक सातकोड़ी होता इस कहानी के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं के समय केवल अंधश्रद्धा और देवी-देवताओं पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है, बल्कि संगठित मानवीय प्रयास, सतर्कता और साहस ही वास्तविक सहायता प्रदान कर सकते हैं। साथ ही यह कहानी यह भी सिखाती है कि विपत्ति चाहे कितनी भी भीषण क्यों न हो, मनुष्य को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और संकट का डटकर सामना करना चाहिए।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 2)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: यह गद्य पाठ किस पुस्तक और पाठ संख्या से संबंधित है?उत्तर: यह पाठ “वर्णिका भाग 2” पुस्तक के गद्य खंड का पाठ 2 है।
  2. प्रश्न: कहानी का केंद्रीय विषय क्या है?उत्तर: कहानी के केंद्र में उड़ीसा में आई बाढ़ की समस्या और उसके कारण लोगों की आस्था में आया बदलाव है।
  3. प्रश्न: लक्ष्मी का पति क्या करता था?उत्तर: लक्ष्मी का पति लक्ष्मण कलकत्ता में नौकरी करता था और परिवार के लिए कुछ पैसे भेजता था।

निष्कर्ष (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 2)

“ढहते विश्वास” कहानी उड़ीसा के ग्रामीण जनजीवन में बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न संघर्ष, पीड़ा और अंततः अंधश्रद्धा के टूटने की मार्मिक अभिव्यक्ति है। यह कहानी छात्रों को यह सिखाती है कि संकट के समय साहस, संगठन और मानवीय प्रयास ही सच्ची सहायता प्रदान कर सकते हैं, और जीवन में कठिनाइयों का डटकर सामना करना ही सच्ची मानवता है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 पाठ्यक्रम (वर्णिका भाग 2) के आधार पर तैयार किया गया है।

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