दही वाली मंगम्मा – कक्षा 10 हिंदी वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 1 सम्पूर्ण व्याख्या

11 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 1)

“दही वाली मंगम्मा” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक “वर्णिका भाग 2” के गद्य खंड की पहली कहानी है। यह मूल रूप से कन्नड़ भाषा में लिखी गई एक सामाजिक और भावनात्मक कहानी है, जिसका हिंदी अनुवाद बी. आर. नारायण ने किया है। यह कहानी “कन्नड़ कहानियाँ” (नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया) से संकलित है। इस पाठ में एक बुजुर्ग विधवा स्त्री मंगम्मा के जीवन-संघर्ष, स्वाभिमान और परिवार के भीतर के अधिकार-संबंधी टकराव को बड़ी संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया गया है।

लेखक परिचय

इस कहानी के मूल रचनाकार श्रीनिवास हैं, जिनका वास्तविक नाम मास्ती वेंकटेश अय्यंगार था। उनका जन्म 6 जून 1891 ई. को कर्नाटक के कोलार नामक स्थान में हुआ था और उनका निधन 6 जून 1986 ई. को हुआ। वे कन्नड़ साहित्य के अत्यंत प्रतिष्ठित और सम्मानित रचनाकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं में सामान्य जनजीवन, ग्रामीण परिवेश और मानवीय संबंधों को बड़ी सूक्ष्मता से उकेरा है। “दही वाली मंगम्मा” उनकी एक भावना-प्रधान कहानी है, जिसमें दो पीढ़ियों के आपसी संबंधों और भावनाओं को स्वाभाविक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस कहानी का हिंदी अनुवाद बी. आर. नारायण द्वारा किया गया है।

कहानी का सारांश (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 1)

मंगम्मा अवलूर के समीप स्थित वेंकटपुर गाँव की रहनेवाली एक विधवा स्त्री थी। उसका पति नहीं था, इसलिए वह अपना जीवन-यापन करने के लिए प्रतिदिन दही बेचने बंगलूर (बेंगलुरु) जाया करती थी। रास्ते में वह कहानी के कथावाचक के घर के पास बैठकर अपनी बातें साझा किया करती थी। इसी क्रम में पाठक को उसके परिवार, उसके बेटे-बहू और पोते के बारे में जानकारी मिलती है।

मंगम्मा की बहू का नाम नंजम्मा था। सास-बहू के बीच झगड़े का प्रत्यक्ष कारण पोते की पिटाई थी, परंतु इसके पीछे असली वजह घर में अधिकार को लेकर दोनों के बीच की ईर्ष्या और असुरक्षा की भावना थी। मंगम्मा अपने बेटे और पोते पर से अपना हक नहीं छोड़ना चाहती थी, वहीं नंजम्मा अपने पति पर पूर्ण अधिकार जताना चाहती थी। इस टकराव के कारण मंगम्मा अलग रहने लगी और अपना भोजन स्वयं बनाने लगी।

मंगम्मा को अकेला और असहाय जानकर गाँव के ही एक व्यक्ति रंगप्पा ने उसका लाभ उठाने की कोशिश की। रंगप्पा गाँव का एक लंपट और जुआरी व्यक्ति था, जो मंगम्मा से धन ऐंठना चाहता था और उसकी अकेली स्थिति का दुरुपयोग करना चाहता था। नंजम्मा, जो अत्यंत चतुर और दूरदर्शी स्त्री थी, को जब इस बात की भनक लगी कि रंगप्पा मंगम्मा का धन हड़पने का प्रयास कर रहा है, तो उसने चतुराई से अपने छोटे बेटे को मंगम्मा के पास रहने के लिए भेज दिया, ताकि सास किसी और को अपना पैसा या संपत्ति न दे सके।

इसके बाद उचित अवसर देखकर नंजम्मा अपने पति के साथ मंगम्मा के पास जाकर क्षमा माँगती है और उसे सम्मानपूर्वक वापस अपने घर ले आती है। कहानी के अंत में परिवार में फिर से मेल-मिलाप हो जाता है और सब लोग हंसी-खुशी साथ रहने लगते हैं। इतना ही नहीं, नंजम्मा धीरे-धीरे मंगम्मा का दही बेचने का व्यवसाय भी स्वयं संभालने लगती है। इस प्रकार यह कहानी पारिवारिक अधिकार, स्वाभिमान और अंततः सामंजस्य की एक मार्मिक झलक प्रस्तुत करती है।

केंद्रीय भाव (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 1)

इस कहानी का केंद्रीय भाव यह है कि परिवार में सास और बहू, दोनों ही अपने-अपने अधिकार और स्थान को लेकर संवेदनशील होते हैं, परंतु आपसी समझ, त्याग और सूझबूझ से पारिवारिक कलह को सुलझाया जा सकता है। साथ ही, यह कहानी यह भी दर्शाती है कि समाज में अकेली और असहाय स्त्रियों को स्वार्थी लोगों से किस प्रकार खतरा हो सकता है, और परिवार का साथ ही सबसे बड़ा संबल होता है।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

इस कहानी में लेखक श्रीनिवास ने ग्रामीण परिवेश की एक साधारण किंतु स्वाभिमानी स्त्री मंगम्मा के जीवन को केंद्र में रखा है। मंगम्मा विधवा होते हुए भी अपना जीवन-यापन स्वयं परिश्रम से करती है और दही बेचकर आत्मनिर्भर बनी रहती है। परिवार में उठे मामूली विवाद ने जब गंभीर रूप ले लिया, तो मंगम्मा अलग रहने को विवश हो गई। इससे स्पष्ट होता है कि परिवार में छोटी-छोटी बातें भी बड़े मनमुटाव का कारण बन सकती हैं, यदि उन्हें समय रहते न सुलझाया जाए।

दूसरी ओर, बहू नंजम्मा का चरित्र एक तेज-तर्रार, चतुर और व्यवहार-कुशल स्त्री के रूप में सामने आता है। वह न केवल अपने अधिकार की रक्षा करना जानती है, बल्कि सास की सुरक्षा और परिवार की एकता के लिए भी सजग रहती है। जब उसे रंगप्पा जैसे स्वार्थी व्यक्ति से खतरे का आभास होता है, तो वह बुद्धिमानी से स्थिति को संभालती है और अंततः सास से क्षमा माँगकर परिवार को फिर से जोड़ देती है। इस प्रकार यह कहानी यह संदेश देती है कि परिवार में समझदारी, धैर्य और आपसी सम्मान से हर विवाद का समाधान संभव है।

पात्र-परिचय

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 1)

  1. “दही वाली मंगम्मा” कहानी के मूल लेखक कौन हैं?

    (a) रवींद्रनाथ टैगोर (b) श्रीनिवास (c) प्रेमचंद (d) ईश्वर पेटलीकर

    उत्तर: (b) श्रीनिवास

  2. श्रीनिवास का वास्तविक नाम क्या था?

    (a) मास्ती वेंकटेश अय्यंगार (b) बी. आर. नारायण (c) कुँवर नारायण (d) रामधारी सिंह

    उत्तर: (a) मास्ती वेंकटेश अय्यंगार

  3. “दही वाली मंगम्मा” कहानी का हिंदी अनुवाद किसने किया?

    (a) श्रीनिवास (b) बी. आर. नारायण (c) गोपालदास नागर (d) अज्ञेय

    उत्तर: (b) बी. आर. नारायण

  4. मंगम्मा किस गाँव की रहनेवाली थी?

    (a) वेंकटपुर (b) अवलूर (c) बंगलूर (d) कोलार

    उत्तर: (a) वेंकटपुर

  5. मंगम्मा की बहू का क्या नाम था?

    (a) नंजम्मा (b) रामम्मा (c) सीतम्मा (d) गंगम्मा

    उत्तर: (a) नंजम्मा

  6. रंगप्पा गाँव का कैसा व्यक्ति था?

    (a) ईमानदार (b) लंपट और जुआरी (c) व्यापारी (d) किसान

    उत्तर: (b) लंपट और जुआरी

  7. “दही वाली मंगम्मा” मूल रूप से किस भाषा की कहानी है?

    (a) तमिल (b) तेलुगु (c) कन्नड़ (d) मराठी

    उत्तर: (c) कन्नड़

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: मंगम्मा क्या बेचकर अपना जीवन-यापन करती थी?

    उत्तर: मंगम्मा दही बेचकर अपना जीवन-यापन करती थी।

  2. प्रश्न: मंगम्मा और नंजम्मा के बीच झगड़े का प्रत्यक्ष कारण क्या था?

    उत्तर: झगड़े का प्रत्यक्ष कारण पोते की पिटाई थी।

  3. प्रश्न: रंगप्पा मंगम्मा से क्या चाहता था?

    उत्तर: रंगप्पा मंगम्मा से उसका धन हड़पना चाहता था।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: मंगम्मा और नंजम्मा के बीच झगड़े का वास्तविक कारण क्या था?

    उत्तर: झगड़े का प्रत्यक्ष कारण पोते की पिटाई थी, परंतु वास्तविक कारण सास-बहू के बीच घर में अधिकार को लेकर उत्पन्न ईर्ष्या और असुरक्षा की भावना थी।

  2. प्रश्न: नंजम्मा ने मंगम्मा की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किया?

    उत्तर: जब नंजम्मा को रंगप्पा के इरादों की भनक लगी, तो उसने अपने छोटे बेटे को मंगम्मा के पास रहने के लिए भेज दिया, ताकि सास किसी और को धन न दे सके और उसकी सुरक्षा भी बनी रहे।

  3. प्रश्न: कहानी के अंत में परिवार में मेल-मिलाप कैसे होता है?

    उत्तर: उचित अवसर देखकर नंजम्मा अपने पति के साथ मंगम्मा के पास जाकर क्षमा माँगती है और उसे सम्मानपूर्वक वापस घर ले आती है, जिसके बाद परिवार में फिर से खुशहाली लौट आती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: “दही वाली मंगम्मा” कहानी के आधार पर मंगम्मा के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।

    उत्तर: मंगम्मा एक विधवा, परिश्रमी और स्वाभिमानी स्त्री है, जो दही बेचकर स्वयं अपना जीवन-यापन करती है। वह अपने बेटे और पोते पर से अपना अधिकार नहीं छोड़ना चाहती, जिससे बहू के साथ उसका मतभेद उत्पन्न होता है। अपनी अकेली स्थिति के बावजूद वह आत्मनिर्भर बनी रहती है, यद्यपि इसी अकेलेपन का लाभ उठाने का प्रयास रंगप्पा जैसा स्वार्थी व्यक्ति करता है। अंततः जब बहू क्षमा माँगकर उसे वापस घर ले आती है, तो वह पुनः परिवार के साथ हंसी-खुशी रहने लगती है। इस प्रकार मंगम्मा भारतीय ग्रामीण समाज की उन असंख्य स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करती है, जो कठिन परिस्थितियों में भी सम्मान के साथ जीना चाहती हैं।

  2. प्रश्न: इस कहानी के माध्यम से लेखक ने परिवार और समाज को क्या संदेश दिया है?

    उत्तर: लेखक श्रीनिवास इस कहानी के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि परिवार में सास-बहू के बीच अधिकार और भावनाओं को लेकर मतभेद स्वाभाविक हैं, परंतु यदि दोनों पक्ष समझदारी, धैर्य और आपसी सम्मान से काम लें, तो हर विवाद सुलझाया जा सकता है। साथ ही यह कहानी यह भी सचेत करती है कि समाज में अकेली और असहाय स्त्रियों को रंगप्पा जैसे स्वार्थी लोगों से खतरा हो सकता है, इसलिए परिवार का साथ और सुरक्षा सबसे आवश्यक है। यह कहानी पारिवारिक एकता और सामंजस्य के महत्व को रेखांकित करती है।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 1)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: यह गद्य पाठ किस पुस्तक और पाठ संख्या से संबंधित है?

    उत्तर: यह पाठ “वर्णिका भाग 2” पुस्तक के गद्य खंड का पाठ 1 है।

  2. प्रश्न: इस कहानी का मूल स्रोत क्या है?

    उत्तर: यह कहानी “कन्नड़ कहानियाँ” (नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया) से संकलित है।

  3. प्रश्न: मंगम्मा की बहू ने अंततः क्या किया?

    उत्तर: मंगम्मा की बहू नंजम्मा ने क्षमा माँगकर उसे वापस घर लाया और धीरे-धीरे उसका दही बेचने का व्यवसाय भी स्वयं संभालने लगी।

निष्कर्ष (वर्णिका भाग 2, गद्य पाठ 1)

“दही वाली मंगम्मा” कहानी भारतीय ग्रामीण परिवार में सास-बहू के संबंधों, आपसी अधिकार-भावना और अंततः प्रेम व सामंजस्य की एक सजीव झलक प्रस्तुत करती है। यह कहानी छात्रों को यह सिखाती है कि परिवार में समझदारी और धैर्य से हर कठिनाई का समाधान संभव है, और स्वाभिमान के साथ जीना ही जीवन की सच्ची सफलता है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 पाठ्यक्रम (वर्णिका भाग 2) के आधार पर तैयार किया गया है।

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