विश्वशांतिः – कक्षा 10 संस्कृत पाठ 13 सम्पूर्ण व्याख्या, शब्दार्थ एवं प्रश्न-उत्तर

12 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना (कक्षा 10 संस्कृत, पाठ 13)

“विश्वशांतिः” बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत पाठ्यपुस्तक का तेरहवाँ पाठ है। यह पाठ आज के विश्व में व्याप्त अशांति के वातावरण का चित्रण करते हुए उसके कारणों की गहन विवेचना करता है तथा विश्व-शांति की स्थापना के लिए आवश्यक उपायों पर प्रकाश डालता है। यह पाठ भारतीय दर्शन के मूल तत्व शांति और “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसे उदात्त विचारों को केंद्र में रखकर लिखा गया है।

पाठ का सारांश (Summary)

“विश्वशांतिः” पाठ में वर्तमान विश्व में व्याप्त अशांति के वातावरण का चित्रण किया गया है। लेखक के अनुसार आज के युग का सबसे बड़ा दुःख सार्वभौमिक अशांति है, जो संपूर्ण मानवता को विनाश की ओर ले जा रही है। इस विनाश का सबसे बड़ा भय आज आविष्कृत हो चुके विध्वंसक अस्त्रों से है। अनेक राज्यों के बीच परस्पर शीतयुद्ध चल रहा है, जिससे विश्व में तनाव बना हुआ है।

पाठ के अनुसार अशांति के मूलतः दो कारण हैं — द्वेष और असहिष्णुता। द्वेष ही असहिष्णुता को जन्म देता है, और स्वार्थ वैर (शत्रुता) को बढ़ाता है। लेखक भगवान बुद्ध के इस प्रसिद्ध विचार का उल्लेख करते हैं कि वैर से वैर का शमन कभी संभव नहीं होता। पर-पीड़न (दूसरों को पीड़ा पहुँचाना) अंततः आत्मनाश का कारण बनता है, जबकि परोपकार शांति का कारण बनता है। इसलिए लेखक सभी से स्वार्थ त्यागने का आह्वान करते हैं और कहते हैं कि स्वार्थपूर्ण उपदेशों (स्वार्थोपदेश) को बलपूर्वक रोका जाना आवश्यक है, यद्यपि सामान्य जन बल से नहीं बल्कि समझ और ज्ञान से ही प्रेरित होता है।

पाठ में देशों के बीच के विवादों को शांत करने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूनाइटेड नेशंस) नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था का भी उल्लेख किया गया है, जो विश्व-शांति की स्थापना हेतु कार्य करती है। लेखक के अनुसार क्रिया (व्यवहार में उतारे बिना) के बिना ज्ञान भी केवल भार बनकर रह जाता है — अर्थात शांति का सिद्धांत तभी सार्थक है जब उसे आचरण में लाया जाए। “अयं निजः परो वेति” (यह मेरा है, वह पराया है) जैसी संकीर्ण सोच लघुचेतस अर्थात संकीर्ण मन वाले व्यक्तियों की पहचान है, जबकि उदार चरित्र वाले महापुरुष “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात संपूर्ण पृथ्वी को एक परिवार मानने के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं। संसार इस समय अशांति के सागर के मध्य स्थित प्रतीत होता है, और भारतीय दर्शन का मूल तत्व सदैव शांति ही रहा है।

केंद्रीय भाव (Central Idea)

इस पाठ का केंद्रीय भाव यह है कि विश्व-शांति की स्थापना के लिए स्वार्थ, द्वेष और असहिष्णुता का त्याग आवश्यक है। वैर को वैर से नहीं, बल्कि परोपकार और उदारता से ही शांत किया जा सकता है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना अपनाकर ही मानवता विनाश से बच सकती है और सच्ची विश्व-शांति की स्थापना हो सकती है।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

“विश्वशांतिः” पाठ में लेखक वर्तमान युग की सबसे गंभीर समस्या — सार्वभौमिक अशांति — पर गहन चिंतन प्रस्तुत करते हैं। आज विश्व में विनाशकारी अस्त्रों का आविष्कार हो चुका है, जिससे संपूर्ण मानवता के विनाश का भय उत्पन्न हो गया है। अनेक राष्ट्रों के बीच प्रत्यक्ष युद्ध न होते हुए भी शीतयुद्ध की स्थिति बनी रहती है, जो विश्व-शांति के लिए एक स्थायी खतरा है।

लेखक अशांति के मूल में दो प्रमुख कारण बताते हैं — द्वेष और असहिष्णुता। द्वेष ही असहिष्णुता को जन्म देता है, और स्वार्थ इस वैर की भावना को और अधिक प्रबल बना देता है। भगवान बुद्ध का यह प्रसिद्ध कथन कि “वैर से वैर कभी शांत नहीं होता”, इस पाठ का मूल संदेश है — अर्थात हिंसा या प्रतिशोध से शांति स्थापित नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए क्षमा, सहिष्णुता और परोपकार की आवश्यकता है। दूसरों को पीड़ा पहुँचाना अंततः स्वयं के विनाश का कारण बनता है, जबकि परोपकार सच्ची शांति का स्रोत है।

लेखक यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है — क्रिया अर्थात आचरण के बिना ज्ञान भी निरर्थक भार बन जाता है। इसी प्रकार, संकीर्ण सोच रखने वाले लोग ही “यह मेरा है, वह पराया है” जैसे विभाजनकारी विचार रखते हैं, जबकि उदार और महान व्यक्ति “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत को अपनाते हैं, जो भारतीय दर्शन का मूल आधार रहा है। देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसी संस्थाएँ प्रयासरत हैं, परंतु सच्ची विश्व-शांति तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वार्थ त्यागकर परोपकार और सहिष्णुता की भावना अपनाए।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

  1. ‘विश्वशांतिः’ पाठ में किसका चित्रण मिलता है?

    (A) अशांति के वातावरण का (B) देशभक्ति के वातावरण का (C) वैज्ञानिक वातावरण का (D) शांति के वातावरण का

    उत्तर: (A) अशांति के वातावरण का

  2. दुःख का विषय क्या है?

    (A) अशांति (B) सार्वभौमिक अशांति (C) शांति (D) सार्वभौमिक शांति

    उत्तर: (B) सार्वभौमिक अशांति

  3. अशांति मानवता का क्या करती है?

    (A) उन्नति (B) विनाश (C) ऊपर (D) नीचे

    उत्तर: (B) विनाश

  4. मानवता के विनाश का भय किससे है?

    (A) शस्त्र से (B) अस्त्र से (C) (A) और (B) दोनों से (D) इनमें से कोई नहीं

    उत्तर: (B) अस्त्र से

  5. अनेक राज्यों में परस्पर क्या चल रहा है?

    (A) उष्ण युद्ध (B) अस्त्र युद्ध (C) शस्त्र युद्ध (D) शीत युद्ध

    उत्तर: (D) शीत युद्ध

  6. अशांति के कितने कारण हैं?

    (A) एक (B) दो (C) तीन (D) चार

    उत्तर: (B) दो (द्वेष और असहिष्णुता)

  7. क्रिया के बिना क्या भार है?

    (A) शास्त्र (B) विवेक (C) ज्ञान (D) पुस्तक

    उत्तर: (C) ज्ञान

  8. देशों के बीच विवाद शांत करने के लिए कौन-सी संस्था है?

    (A) राष्ट्रसंघ (B) संयुक्त राष्ट्रसंघ (C) उच्च न्यायालय (D) सर्वोच्च न्यायालय

    उत्तर: (B) संयुक्त राष्ट्रसंघ

  9. वैर से किसका शमन असंभव है?

    (A) अवैर का (B) वैर का (C) स्वार्थ का (D) परमार्थ का

    उत्तर: (B) वैर का

  10. “वैरेण वैरस्य शमनम् असम्भवम्” यह किसने कहा?

    (A) भगवान बुद्ध ने (B) महात्मा गांधी ने (C) विनोबा भावे ने (D) भगवान महावीर ने

    उत्तर: (A) भगवान बुद्ध ने

  11. परपीड़न किसके लिए होता है?

    (A) स्वार्थ के लिए (B) परमार्थ के लिए (C) आत्मनाश के लिए (D) आत्मविकास के लिए

    उत्तर: (C) आत्मनाश के लिए

  12. परोपकार किसका कारण बनता है?

    (A) अशांति का (B) शांति का (C) दुःख निवारण का (D) विध्वंस का

    उत्तर: (B) शांति का

  13. सभी को क्या त्यागना चाहिए?

    (A) स्वार्थ (B) परमार्थ (C) परोपकार (D) असहिष्णुता

    उत्तर: (A) स्वार्थ

  14. असहिष्णुता को कौन उत्पन्न करता है?

    (A) आवेश (B) भावावेश (C) द्वेष (D) मैत्री

    उत्तर: (C) द्वेष

  15. स्वार्थ क्या बढ़ाता है?

    (A) धर्म (B) कर्म (C) वैर (D) स्थैर्य

    उत्तर: (C) वैर

  16. बलपूर्वक क्या रोका जाना चाहिए?

    (A) धर्मोपदेश (B) कर्मोपदेश (C) अर्थोपदेश (D) स्वार्थोपदेश

    उत्तर: (D) स्वार्थोपदेश

  17. अशांति सागर के तट के मध्य में क्या स्थित है?

    (A) मानव (B) दानव (C) जीव (D) संसार

    उत्तर: (D) संसार

  18. उदार चरित्र वाले क्या मानते हैं?

    (A) अयं निजः, परो वेति (B) केवल स्वार्थ (C) वसुधैव कुटुम्बकम् (D) स्वार्थे सर्वम्

    उत्तर: (C) वसुधैव कुटुम्बकम्

  19. “अयं निजः परो वेति” यह विचार किनकी गणना में आता है?

    (A) उदारचरितों की (B) महापुरुषों की (C) महात्माओं की (D) संकीर्ण/लघुचेतस व्यक्तियों की

    उत्तर: (D) संकीर्ण/लघुचेतस व्यक्तियों की

  20. भारतीय दर्शन का मूल तत्व क्या माना जाता है?

    (A) शांति (B) अशांति (C) वैर (D) अवैर

    उत्तर: (A) शांति

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: ‘विश्वशांतिः’ पाठ में किस समस्या का चित्रण किया गया है?

    उत्तर: इस पाठ में विश्व में व्याप्त सार्वभौमिक अशांति के वातावरण का चित्रण किया गया है, जो मानवता के विनाश का कारण बन रही है।

  2. प्रश्न: अशांति के मूल कारण कौन-से हैं?

    उत्तर: अशांति के दो मूल कारण हैं — द्वेष और असहिष्णुता। द्वेष ही असहिष्णुता को जन्म देता है और स्वार्थ वैर को बढ़ाता है।

  3. प्रश्न: भगवान बुद्ध का कौन-सा प्रसिद्ध कथन इस पाठ में उल्लेखित है?

    उत्तर: भगवान बुद्ध ने कहा है कि “वैर से वैर का शमन कभी संभव नहीं होता” — अर्थात शत्रुता को शत्रुता से नहीं, बल्कि प्रेम और परोपकार से ही शांत किया जा सकता है।

  4. प्रश्न: “वसुधैव कुटुम्बकम्” का क्या अर्थ है और यह किनकी सोच है?

    उत्तर: “वसुधैव कुटुम्बकम्” का अर्थ है संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार है। यह उदार चरित्र वाले महापुरुषों की सोच है, जबकि संकीर्ण सोच वाले लोग “यह मेरा है, वह पराया है” जैसा भेदभाव करते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: ‘विश्वशांतिः’ पाठ के आधार पर विश्व में व्याप्त अशांति के कारणों और उसके निवारण के उपायों का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: इस पाठ के अनुसार आज विश्व सार्वभौमिक अशांति से ग्रस्त है, जिसका मुख्य कारण द्वेष और असहिष्णुता है। स्वार्थ के कारण राष्ट्रों के बीच वैर बढ़ता है, और आज आविष्कृत हो चुके विध्वंसक अस्त्रों से मानवता के विनाश का भय उत्पन्न हो गया है। अनेक राष्ट्रों के बीच शीतयुद्ध जैसी स्थिति बनी रहती है। इस अशांति के निवारण के लिए लेखक स्वार्थ त्यागने, परोपकार अपनाने और भगवान बुद्ध के इस सिद्धांत को अपनाने की सलाह देते हैं कि वैर से वैर कभी शांत नहीं होता। साथ ही संयुक्त राष्ट्रसंघ जैसी संस्थाएँ भी देशों के बीच विवाद सुलझाने में सहायक होती हैं।

  2. प्रश्न: इस पाठ से मिलने वाली शिक्षा और “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत का महत्व स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची विश्व-शांति स्वार्थ त्यागकर, परोपकार और सहिष्णुता अपनाकर ही स्थापित की जा सकती है। जो व्यक्ति “यह मेरा है, वह पराया है” जैसी संकीर्ण सोच रखते हैं, वे लघुचेतस कहलाते हैं, जबकि उदार और महान व्यक्ति “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं, अर्थात वे संपूर्ण पृथ्वी को एक परिवार मानते हैं। यह सिद्धांत भारतीय दर्शन का मूल तत्व है और यही विश्व-शांति की स्थापना का सच्चा आधार है। पाठ यह भी सिखाता है कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे क्रिया (आचरण) में उतारना आवश्यक है।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (Important Exam Questions)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: ‘विश्वशांतिः’ पाठ में किस समस्या का वर्णन है?

    उत्तर: इस पाठ में विश्व में व्याप्त सार्वभौमिक अशांति और उसके कारणों तथा निवारण के उपायों का वर्णन किया गया है।

  2. प्रश्न: अशांति के दो मुख्य कारण कौन-से हैं?

    उत्तर: अशांति के दो मुख्य कारण द्वेष और असहिष्णुता हैं।

  3. प्रश्न: इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

    उत्तर: इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि स्वार्थ त्यागकर, परोपकार और सहिष्णुता अपनाकर ही सच्ची विश्व-शांति स्थापित की जा सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

“विश्वशांतिः” पाठ आज के युग की सबसे गंभीर समस्या — वैश्विक अशांति — पर गहन और सारगर्भित चिंतन प्रस्तुत करता है। यह पाठ स्पष्ट करता है कि द्वेष, असहिष्णुता और स्वार्थ ही अशांति के मूल कारण हैं, और इनका निवारण परोपकार, सहिष्णुता तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसे उदात्त सिद्धांतों को अपनाकर ही संभव है। यह पाठ छात्रों में विश्व-बंधुत्व, सहिष्णुता और शांतिप्रिय दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक है।

नोट: संदर्भ स्रोत में एक मामूली असंगति पाई गई — “किसके बिना ज्ञान भार स्वरूप बन जाता है” के उत्तर में एक स्थान पर ‘क्रिया’ तथा दूसरे स्थान पर ‘व्यवहार’ शब्द का प्रयोग हुआ है। चूँकि दोनों शब्द भावार्थ में समान हैं (आचरण/अभ्यास), तथा बहुसंख्य स्रोत ‘क्रिया’ शब्द की पुष्टि करते हैं, अतः इसी को इस लेख में मानक उत्तर के रूप में लिया गया है। यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 संस्कृत पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है।

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