जीव जनन कैसे करते हैं – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर

16 August 2026  |  By Ramnivas KT

Table of Contents

प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8)

“जीव जनन कैसे करते हैं” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के जीव विज्ञान खंड का आठवाँ अध्याय है। इस अध्याय में जीवों द्वारा अपनी प्रजाति की निरंतरता बनाए रखने के लिए की जाने वाली जनन प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है। जनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने समान नए जीव उत्पन्न करते हैं। यह व्यक्तिगत जीव के जीवित रहने के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन किसी प्रजाति के अस्तित्व और निरंतरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जनन मुख्यतः दो प्रकार का होता है – अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन। अलैंगिक जनन में सामान्यतः एक ही जनक भाग लेता है और संतति में जनक के समान गुण पाए जाते हैं। लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों के संलयन से नई संतति का निर्माण होता है। लैंगिक जनन में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है।

इस अध्याय में अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियाँ, पौधों में लैंगिक जनन, मानव नर एवं मादा जनन तंत्र, युग्मक निर्माण, निषेचन, भ्रूण का विकास, किशोरावस्था, जनन स्वास्थ्य तथा गर्भनिरोधक उपायों का अध्ययन किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जनन क्या है?

जीवों द्वारा अपने समान नए जीव उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया को जनन या प्रजनन कहते हैं। जनन के कारण किसी प्रजाति की संख्या बनी रहती है और एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी का निर्माण होता है। यदि जनन की प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो जाए, तो धीरे-धीरे उस प्रजाति का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।

जनन जीव के व्यक्तिगत अस्तित्व के लिए आवश्यक नहीं है, लेकिन प्रजाति के अस्तित्व के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। जनन के दौरान DNA की प्रतिकृति बनती है और आनुवंशिक सूचना अगली पीढ़ी तक पहुँचती है।

जनन का महत्त्व

जनन के प्रकार

जनन को मुख्य रूप से दो प्रकारों में बाँटा जाता है:

  1. अलैंगिक जनन
  2. लैंगिक जनन

अलैंगिक जनन

जिस जनन में केवल एक जनक भाग लेता है और नर तथा मादा युग्मकों के संलयन की आवश्यकता नहीं होती, उसे अलैंगिक जनन कहते हैं। इस प्रकार के जनन से उत्पन्न संतति सामान्यतः आनुवंशिक रूप से जनक के बहुत समान होती है।

अलैंगिक जनन सरल जीवों और अनेक पौधों में सामान्य रूप से पाया जाता है। इसके प्रमुख प्रकार हैं – द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन, खंडन, पुनरुद्भवन, बीजाणुजनन और कायिक प्रवर्धन।

द्विखंडन

जिस अलैंगिक जनन में एक जीव दो लगभग समान संतति जीवों में विभाजित हो जाता है, उसे द्विखंडन कहते हैं। अमीबा में द्विखंडन द्वारा जनन होता है। इसमें पहले केंद्रक विभाजित होता है और उसके बाद कोशिकाद्रव्य विभाजित होकर दो नई कोशिकाओं का निर्माण करता है।

बहुखंडन

जिस प्रक्रिया में एक जनक कोशिका विभाजित होकर एक साथ अनेक संतति कोशिकाएँ बनाती है, उसे बहुखंडन कहते हैं। प्लाज्मोडियम जैसे जीवों में बहुखंडन द्वारा जनन का उदाहरण मिलता है। अनुकूल या विशेष परिस्थितियों में कोशिका के अंदर अनेक नए जीवों का निर्माण हो सकता है।

मुकुलन

जिस अलैंगिक जनन में जनक के शरीर पर एक छोटी-सी उभार जैसी संरचना बनती है और बाद में विकसित होकर नए जीव में बदल जाती है, उसे मुकुलन कहते हैं। यीस्ट और हाइड्रा में मुकुलन द्वारा जनन होता है।

यीस्ट में कोशिका के एक भाग पर छोटा मुकुल बनता है। मुकुल धीरे-धीरे बड़ा होता है और पूर्ण विकसित होने पर जनक कोशिका से अलग होकर स्वतंत्र जीव के रूप में जीवन शुरू कर सकता है।

खंडन

जब कोई बहुकोशिकीय जीव अपने शरीर के कई भागों में टूट जाता है और प्रत्येक भाग से नया जीव विकसित हो जाता है, तो इसे खंडन कहते हैं। स्पाइरोगाइरा में खंडन द्वारा जनन होता है। अनुकूल परिस्थितियों में इसका तंतु छोटे-छोटे खंडों में टूट सकता है और प्रत्येक खंड नया जीव बना सकता है।

पुनरुद्भवन

किसी जीव के शरीर के टूटे हुए भाग से नए जीव का निर्माण होने की क्षमता को पुनरुद्भवन कहते हैं। प्लेनेरिया जैसे जीवों में पुनरुद्भवन की क्षमता पाई जाती है। यदि शरीर का उपयुक्त भाग अलग हो जाए, तो उसमें विशेष कोशिकाओं की सहायता से नए ऊतकों और अंगों का निर्माण हो सकता है।

पुनरुद्भवन और सामान्य खंडन में अंतर समझना आवश्यक है। पुनरुद्भवन में शरीर के भाग से नए अंगों और संरचनाओं का निर्माण करने की क्षमता प्रमुख होती है।

बीजाणुजनन

कुछ जीव बीजाणुओं की सहायता से अलैंगिक जनन करते हैं। इसे बीजाणुजनन कहते हैं। कई कवकों में बीजाणु बनते हैं। बीजाणु सामान्यतः छोटे होते हैं और उनके चारों ओर सुरक्षात्मक आवरण हो सकता है। अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर वे अंकुरित होकर नए जीव का निर्माण करते हैं।

कायिक प्रवर्धन

पौधों के कायिक अंगों जैसे जड़, तना या पत्ती से नए पौधे के निर्माण को कायिक प्रवर्धन कहते हैं। यह अलैंगिक जनन की एक महत्वपूर्ण विधि है। गुलाब में तने द्वारा, जबकि कुछ पौधों में जड़ या पत्ती द्वारा कायिक प्रवर्धन किया जा सकता है।

कायिक प्रवर्धन का उपयोग कृषि और उद्यानिकी में भी किया जाता है, क्योंकि इससे कम समय में बड़ी संख्या में नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं और कई मामलों में मूल पौधे के समान गुण वाले पौधे प्राप्त होते हैं।

लैंगिक जनन

जिस जनन में सामान्यतः नर और मादा युग्मकों का निर्माण तथा उनका संलयन होता है, उसे लैंगिक जनन कहते हैं। लैंगिक जनन में दो जनकों की आनुवंशिक सामग्री का योगदान हो सकता है। इसी कारण संतति में नए आनुवंशिक संयोजन उत्पन्न होते हैं।

लैंगिक जनन में युग्मक सामान्यतः अगुणित होते हैं। नर और मादा युग्मकों के संलयन से द्विगुणित युग्मनज बनता है, जिससे आगे चलकर भ्रूण और नया जीव विकसित होता है।

लैंगिक जनन में विविधता

लैंगिक जनन में नर और मादा दोनों से आनुवंशिक पदार्थ प्राप्त होने के कारण संतति में माता-पिता के गुणों के नए संयोजन बन सकते हैं। DNA की प्रतिकृति के दौरान होने वाली छोटी-छोटी भिन्नताएँ भी विविधता का कारण बनती हैं। यही विविधता बदलते वातावरण में प्रजातियों के अनुकूलन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन

पुष्पी पौधों में फूल लैंगिक जनन का प्रमुख अंग है। फूल में नर जनन अंग को पुंकेसर और मादा जनन अंग को स्त्रीकेसर कहा जाता है। पुंकेसर में परागकण बनते हैं, जबकि स्त्रीकेसर में अंडप पाए जाते हैं जिनमें बीजांड स्थित होते हैं।

पुंकेसर

पुंकेसर फूल का नर जनन अंग है। इसके दो प्रमुख भाग होते हैं – तंतु और परागकोश। परागकोश में परागकण बनते हैं। परागकणों में नर युग्मक बनने की क्षमता होती है।

स्त्रीकेसर

स्त्रीकेसर फूल का मादा जनन अंग है। इसके तीन प्रमुख भाग होते हैं – वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय। वर्तिकाग्र परागकणों को ग्रहण करता है। वर्तिका वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ती है और अंडाशय के भीतर बीजांड पाए जाते हैं।

परागण

परागकोश से परागकणों का वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण कहते हैं। परागण दो प्रकार का हो सकता है – स्वपरागण और परपरागण

जब किसी फूल के परागकण उसी फूल या उसी पौधे के किसी अन्य फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं, तो इसे स्वपरागण कहते हैं। जब परागकण एक पौधे के फूल से दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, तो इसे परपरागण कहा जाता है।

परागण के माध्यम

परागकणों का स्थानांतरण हवा, जल, कीट, पक्षी तथा अन्य माध्यमों से हो सकता है। फूलों के रंग, गंध और मधुरस जैसी विशेषताएँ कई बार परागण करने वाले जीवों को आकर्षित करती हैं।

परागनली

जब परागकण उपयुक्त वर्तिकाग्र पर पहुँचकर अंकुरित होता है, तो उससे एक पतली संरचना निकलती है जिसे परागनली कहते हैं। परागनली वर्तिका से होकर अंडाशय तक पहुँचती है और नर युग्मक को बीजांड तक ले जाने में सहायता करती है।

निषेचन

नर युग्मक और मादा युग्मक के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं। निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है। युग्मनज आगे विभाजित होकर भ्रूण का निर्माण करता है।

निषेचन के बाद फूल में परिवर्तन

निषेचन के बाद फूल के विभिन्न भागों में परिवर्तन होते हैं। बीजांड से सामान्यतः बीज का निर्माण होता है और अंडाशय विकसित होकर फल बन जाता है। युग्मनज से भ्रूण विकसित होता है। इस प्रकार निषेचन के बाद पौधे में अगली पीढ़ी के विकास की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

मानव में लैंगिक जनन

मनुष्य में लैंगिक जनन होता है। पुरुष के जनन तंत्र में शुक्राणु और स्त्री के जनन तंत्र में अंडाणु बनते हैं। नर और मादा युग्मकों के संलयन से युग्मनज बनता है, जो आगे चलकर भ्रूण में विकसित होता है।

मानव नर जनन तंत्र

मानव नर जनन तंत्र के प्रमुख अंगों में वृषण, शुक्रवाहिका, शुक्राशय, प्रोस्टेट ग्रंथि, मूत्रमार्ग और लिंग शामिल हैं। वृषण उदर गुहा के बाहर स्थित अंडकोश में पाए जाते हैं। वृषण में शुक्राणुओं का निर्माण होता है और टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का स्राव भी होता है।

वृषण

वृषण पुरुष के प्रमुख जनन अंग हैं। इनमें शुक्राणुओं का निर्माण होता है। वृषण से टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन भी स्रावित होता है, जो पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास तथा जनन संबंधी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शुक्राणु

शुक्राणु पुरुष का नर युग्मक है। यह बहुत सूक्ष्म और गतिशील कोशिका होती है। इसमें आनुवंशिक पदार्थ पाया जाता है और इसका कार्य मादा युग्मक तक पहुँचकर निषेचन में भाग लेना है। मानव शुक्राणु में 23 गुणसूत्र होते हैं।

मानव मादा जनन तंत्र

मानव मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंगों में अंडाशय, डिंबवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और योनि शामिल हैं। अंडाशय में अंडाणु का निर्माण होता है तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन जैसे हॉर्मोन स्रावित होते हैं।

अंडाशय

अंडाशय स्त्री का प्रमुख जनन अंग है। इसमें मादा युग्मक अर्थात अंडाणु का निर्माण और परिपक्वता होती है। अंडाशय से एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरॉन जैसे हॉर्मोन भी स्रावित होते हैं।

अंडाणु

अंडाणु मानव मादा का मादा युग्मक है। यह शुक्राणु की तुलना में बड़ा होता है और सामान्यतः गतिशील नहीं होता। मानव अंडाणु में 23 गुणसूत्र होते हैं।

अंडोत्सर्ग

अंडाशय से परिपक्व अंडाणु के निकलने की प्रक्रिया को अंडोत्सर्ग कहते हैं। सामान्य 28-दिवसीय मासिक चक्र में यह प्रायः चक्र के मध्य के आसपास होता है, हालांकि वास्तविक समय व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकता है।

निषेचन का स्थान

मानव में सामान्यतः निषेचन डिंबवाहिनी में होता है। शुक्राणु और अंडाणु के संलयन से युग्मनज बनता है। इसके बाद युग्मनज विभाजित होता हुआ गर्भाशय की ओर बढ़ता है।

भ्रूण का विकास

निषेचन के बाद बना युग्मनज लगातार विभाजित होता है और धीरे-धीरे भ्रूण का निर्माण करता है। भ्रूण गर्भाशय में स्थापित होता है और वहीं उसका आगे विकास होता है। गर्भाशय भ्रूण के विकास के लिए आवश्यक स्थान और वातावरण प्रदान करता है।

अपरा या प्लेसेंटा

माँ और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करने वाली विशेष संरचना को अपरा या प्लेसेंटा कहते हैं। इसके माध्यम से भ्रूण को आवश्यक पोषक पदार्थ और ऑक्सीजन प्राप्त होती है तथा कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन में सहायता मिलती है।

यौवनावस्था

वह अवस्था जिसमें शरीर में ऐसे परिवर्तन होने लगते हैं जिनसे व्यक्ति जनन की दृष्टि से परिपक्व होने लगता है, यौवनावस्था कहलाती है। इस दौरान जनन अंगों का विकास होता है और द्वितीयक लैंगिक लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

लड़कों में आवाज का भारी होना, चेहरे पर बाल आना तथा शरीर में मांसपेशीय विकास जैसे परिवर्तन हो सकते हैं। लड़कियों में स्तनों का विकास और मासिक धर्म का प्रारंभ प्रमुख परिवर्तनों में शामिल हैं। इन परिवर्तनों के नियंत्रण में लैंगिक हॉर्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मासिक चक्र

मानव मादा में प्रजनन तंत्र से संबंधित नियमित चक्र को मासिक चक्र कहते हैं। औसतन इसे 28 दिनों का माना जाता है, लेकिन इसकी अवधि व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकती है। यदि निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की आंतरिक परत टूटकर रक्त के साथ बाहर निकलती है। इसे मासिक धर्म या रजोधर्म कहते हैं।

लैंगिक संचारित रोग

ऐसे रोग जो मुख्यतः यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकते हैं, उन्हें लैंगिक संचारित रोग कहा जाता है। गोनोरिया, सिफलिस और HIV संक्रमण इसके उदाहरण हैं। कुछ संक्रमणों से बचाव के लिए सुरक्षित यौन व्यवहार और उचित चिकित्सा सलाह आवश्यक है।

जनन स्वास्थ्य

जनन अंगों की उचित देखभाल, स्वच्छता, संक्रमण से बचाव, सुरक्षित यौन व्यवहार तथा जनन संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता को जनन स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। किशोरावस्था में सही वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करना विशेष रूप से आवश्यक है।

गर्भनिरोधक उपाय

गर्भधारण को रोकने के लिए विभिन्न गर्भनिरोधक उपाय उपलब्ध हैं। इनमें कंडोम, मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ, अंतर्गर्भाशयी युक्तियाँ तथा स्थायी शल्य विधियाँ शामिल हैं। कंडोम यौन संचारित कुछ संक्रमणों के जोखिम को कम करने में भी सहायता करता है। किसी भी गर्भनिरोधक विधि का चुनाव स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।

कंडोम

कंडोम एक अवरोधक गर्भनिरोधक विधि है। यह शुक्राणुओं को मादा जनन तंत्र में प्रवेश करने से रोकने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त कंडोम के उचित उपयोग से कई लैंगिक संचारित संक्रमणों के संक्रमण का जोखिम कम किया जा सकता है।

स्थायी गर्भनिरोधक विधियाँ

पुरुषों में स्थायी गर्भनिरोधक शल्य विधि को वसेक्टॉमी और महिलाओं में स्थायी गर्भनिरोधक शल्य विधि को ट्यूबेक्टॉमी कहा जाता है। इन विधियों में जनन कोशिकाओं के सामान्य मार्ग को अवरुद्ध किया जाता है। ये स्थायी उपाय हैं, इसलिए इन्हें अपनाने से पहले चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।

DNA और जनन

कोशिका के केंद्रक में पाए जाने वाले गुणसूत्रों में DNA उपस्थित होता है। DNA में आनुवंशिक सूचनाएँ संग्रहीत रहती हैं। जनन के समय DNA की प्रतिकृति बनती है और आनुवंशिक सूचना संतति तक पहुँचती है। DNA की प्रतिकृति पूर्णतः त्रुटिरहित नहीं होती, इसलिए कभी-कभी छोटे परिवर्तन उत्पन्न हो जाते हैं।

जनन और आनुवंशिक विविधता

अलैंगिक जनन में संतति सामान्यतः जनक के समान होती है, जबकि लैंगिक जनन में दो युग्मकों की आनुवंशिक सामग्री मिलती है। इसलिए लैंगिक जनन से संतति में अधिक विविधता उत्पन्न हो सकती है। यह विविधता बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में किसी प्रजाति के अस्तित्व और अनुकूलन के लिए उपयोगी हो सकती है।

अलैंगिक और लैंगिक जनन में अंतर

आधारअलैंगिक जननलैंगिक जनन
जनकों की संख्यासामान्यतः एकसामान्यतः दो
युग्मकयुग्मकों का संलयन नहीं होतानर और मादा युग्मकों का संलयन होता है
गतिसामान्यतः तेजतुलनात्मक रूप से जटिल
विविधताकमअधिक
उदाहरणअमीबा, यीस्टमनुष्य, पुष्पी पौधे

अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियाँ

विधिउदाहरण
द्विखंडनअमीबा
बहुखंडनप्लाज्मोडियम
मुकुलनयीस्ट, हाइड्रा
खंडनस्पाइरोगाइरा
पुनरुद्भवनप्लेनेरिया
कायिक प्रवर्धनगुलाब आदि

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. जीवों में अपनी प्रजाति की निरंतरता बनाए रखने वाली प्रक्रिया क्या है?

    (a) पोषण (b) जनन (c) श्वसन (d) उत्सर्जन

    उत्तर: (b) जनन
  2. अमीबा में किस प्रकार का अलैंगिक जनन होता है?

    (a) मुकुलन (b) द्विखंडन (c) खंडन (d) बीजाणुजनन

    उत्तर: (b) द्विखंडन
  3. यीस्ट में अलैंगिक जनन किस विधि से होता है?

    (a) मुकुलन (b) द्विखंडन (c) पुनरुद्भवन (d) खंडन

    उत्तर: (a) मुकुलन
  4. स्पाइरोगाइरा में जनन की प्रमुख अलैंगिक विधि कौन-सी है?

    (a) मुकुलन (b) खंडन (c) द्विखंडन (d) बीजाणुजनन

    उत्तर: (b) खंडन
  5. प्लेनेरिया में पुनरुद्भवन की क्षमता पाई जाती है।

    (a) सही (b) गलत

    उत्तर: (a) सही
  6. फूल का नर जनन अंग कौन-सा है?

    (a) स्त्रीकेसर (b) पुंकेसर (c) अंडाशय (d) वर्तिका

    उत्तर: (b) पुंकेसर
  7. फूल का मादा जनन अंग कौन-सा है?

    (a) पुंकेसर (b) परागकोश (c) स्त्रीकेसर (d) तंतु

    उत्तर: (c) स्त्रीकेसर
  8. परागकण कहाँ बनते हैं?

    (a) अंडाशय (b) वर्तिकाग्र (c) परागकोश (d) वर्तिका

    उत्तर: (c) परागकोश
  9. परागकण के वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया कहलाती है:

    (a) निषेचन (b) परागण (c) अंकुरण (d) जनन

    उत्तर: (b) परागण
  10. नर और मादा युग्मकों के संलयन को क्या कहते हैं?

    (a) परागण (b) निषेचन (c) अंकुरण (d) द्विखंडन

    उत्तर: (b) निषेचन
  11. निषेचन के बाद क्या बनता है?

    (a) परागकण (b) युग्मनज (c) बीजाणु (d) वर्तिका

    उत्तर: (b) युग्मनज
  12. मानव नर में शुक्राणु का निर्माण कहाँ होता है?

    (a) वृषण (b) अंडाशय (c) गर्भाशय (d) प्रोस्टेट

    उत्तर: (a) वृषण
  13. पुरुषों में प्रमुख लैंगिक हॉर्मोन कौन-सा है?

    (a) एस्ट्रोजन (b) टेस्टोस्टेरॉन (c) इंसुलिन (d) थायरॉक्सिन

    उत्तर: (b) टेस्टोस्टेरॉन
  14. मानव मादा में अंडाणु का निर्माण कहाँ होता है?

    (a) गर्भाशय (b) अंडाशय (c) योनि (d) डिंबवाहिनी

    उत्तर: (b) अंडाशय
  15. मानव में सामान्यतः निषेचन कहाँ होता है?

    (a) गर्भाशय (b) अंडाशय (c) डिंबवाहिनी (d) योनि

    उत्तर: (c) डिंबवाहिनी
  16. भ्रूण का विकास मुख्यतः कहाँ होता है?

    (a) अंडाशय (b) गर्भाशय (c) योनि (d) डिंबवाहिनी

    उत्तर: (b) गर्भाशय
  17. मानव शुक्राणु में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    (a) 46 (b) 23 (c) 44 (d) 22 जोड़े

    उत्तर: (b) 23
  18. मानव अंडाणु में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    (a) 46 (b) 23 (c) 44 (d) 92

    उत्तर: (b) 23
  19. गर्भ में भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन पहुँचाने में कौन-सी संरचना सहायता करती है?

    (a) अपरा (b) अंडाशय (c) वर्तिका (d) शुक्रवाहिका

    उत्तर: (a) अपरा
  20. कंडोम किस प्रकार की गर्भनिरोधक विधि है?

    (a) हार्मोनल (b) अवरोधक (c) शल्य (d) प्राकृतिक

    उत्तर: (b) अवरोधक

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: जनन क्या है?

    उत्तर: जीवों द्वारा अपने समान नए जीव उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया को जनन कहते हैं।
  2. प्रश्न: अलैंगिक जनन क्या है?

    उत्तर: एक ही जनक से बिना युग्मकों के संलयन के नए जीव के निर्माण को अलैंगिक जनन कहते हैं।
  3. प्रश्न: द्विखंडन क्या है?

    उत्तर: एक जनक जीव के दो संतति जीवों में विभाजित होने की प्रक्रिया द्विखंडन कहलाती है।
  4. प्रश्न: मुकुलन क्या है?

    उत्तर: जनक शरीर पर बनने वाली छोटी कलिका से नए जीव के निर्माण को मुकुलन कहते हैं।
  5. प्रश्न: पुंकेसर क्या है?

    उत्तर: पुंकेसर फूल का नर जनन अंग है, जिसमें परागकण बनते हैं।
  6. प्रश्न: स्त्रीकेसर क्या है?

    उत्तर: स्त्रीकेसर फूल का मादा जनन अंग है, जिसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय पाए जाते हैं।
  7. प्रश्न: परागण क्या है?

    उत्तर: परागकणों के परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया परागण कहलाती है।
  8. प्रश्न: निषेचन क्या है?

    उत्तर: नर और मादा युग्मकों के संलयन को निषेचन कहते हैं।
  9. प्रश्न: युग्मनज क्या है?

    उत्तर: नर और मादा युग्मकों के संलयन से बनने वाली द्विगुणित कोशिका को युग्मनज कहते हैं।
  10. प्रश्न: शुक्राणु कहाँ बनते हैं?

    उत्तर: शुक्राणु वृषण में बनते हैं।
  11. प्रश्न: अंडाणु कहाँ बनते हैं?

    उत्तर: अंडाणु अंडाशय में बनते और परिपक्व होते हैं।
  12. प्रश्न: मानव में निषेचन कहाँ होता है?

    उत्तर: मानव में सामान्यतः निषेचन डिंबवाहिनी में होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन में अंतर बताइए।

    उत्तर: अलैंगिक जनन में सामान्यतः एक जनक भाग लेता है और युग्मकों का संलयन नहीं होता। इसकी प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल और तेज होती है तथा संतति सामान्यतः जनक के समान होती है। लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों का संलयन होता है और आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है।
  2. प्रश्न: द्विखंडन और मुकुलन में अंतर बताइए।

    उत्तर: द्विखंडन में एक जनक जीव दो संतति जीवों में विभाजित हो जाता है, जैसे अमीबा में। मुकुलन में जनक के शरीर पर एक छोटी कलिका बनती है और उससे नया जीव विकसित होता है, जैसे यीस्ट और हाइड्रा में।
  3. प्रश्न: कायिक प्रवर्धन के क्या लाभ हैं?

    उत्तर: कायिक प्रवर्धन द्वारा कम समय में बड़ी संख्या में पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इसमें मूल पौधे के समान गुण वाले पौधे प्राप्त हो सकते हैं। ऐसे पौधों में फल या फूल आने में बीज से उगाए पौधों की तुलना में कम समय लग सकता है।
  4. प्रश्न: परागण और निषेचन में अंतर बताइए।

    उत्तर: परागकण के परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचने को परागण कहते हैं। नर और मादा युग्मकों के संलयन को निषेचन कहते हैं। परागण निषेचन से पहले की प्रक्रिया है, जबकि निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है।
  5. प्रश्न: निषेचन के बाद फूल में क्या परिवर्तन होते हैं?

    उत्तर: निषेचन के बाद युग्मनज भ्रूण में विकसित होता है। बीजांड बीज में बदलता है और अंडाशय फल के रूप में विकसित होता है। फूल के अन्य भाग सामान्यतः सूखकर गिर सकते हैं।
  6. प्रश्न: मानव नर जनन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।

    उत्तर: मानव नर जनन तंत्र के प्रमुख अंगों में वृषण, शुक्रवाहिका, शुक्राशय, प्रोस्टेट ग्रंथि, मूत्रमार्ग और लिंग शामिल हैं। वृषण शुक्राणु तथा टेस्टोस्टेरॉन के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं।
  7. प्रश्न: मानव मादा जनन तंत्र के प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।

    उत्तर: मानव मादा जनन तंत्र में अंडाशय, डिंबवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और योनि प्रमुख अंग हैं। अंडाशय अंडाणु और प्रमुख मादा लैंगिक हॉर्मोन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  8. प्रश्न: यौवनावस्था में होने वाले प्रमुख परिवर्तन लिखिए।

    उत्तर: यौवनावस्था में जनन अंग परिपक्व होने लगते हैं और द्वितीयक लैंगिक लक्षण विकसित होते हैं। लड़कों में आवाज भारी होना तथा चेहरे पर बाल आना जैसे परिवर्तन हो सकते हैं, जबकि लड़कियों में स्तनों का विकास और मासिक धर्म का प्रारंभ प्रमुख परिवर्तन हैं।
  9. प्रश्न: अपरा का क्या कार्य है?

    उत्तर: अपरा माँ और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करता है। इसके माध्यम से भ्रूण को पोषक पदार्थ और ऑक्सीजन प्राप्त होती है तथा अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में सहायता मिलती है।
  10. प्रश्न: जनन में DNA की क्या भूमिका है?

    उत्तर: DNA में आनुवंशिक सूचनाएँ संग्रहीत रहती हैं। जनन के समय DNA की प्रतिकृति बनती है और आनुवंशिक सूचना अगली पीढ़ी तक पहुँचती है। DNA की प्रतिकृति में होने वाले छोटे परिवर्तन विविधता का कारण बन सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियों का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।

    उत्तर: अलैंगिक जनन में एक ही जनक से नए जीव बनते हैं। द्विखंडन में एक जीव दो संततियों में विभाजित होता है, जैसे अमीबा। बहुखंडन में एक जनक से अनेक संततियाँ बन सकती हैं, जैसे प्लाज्मोडियम में। मुकुलन में जनक शरीर पर कलिका बनती है और उससे नया जीव विकसित होता है, जैसे यीस्ट और हाइड्रा में। खंडन में शरीर के खंडों से नए जीव बनते हैं, जैसे स्पाइरोगाइरा में। पुनरुद्भवन में शरीर के उपयुक्त भाग से नए जीव के निर्माण की क्षमता होती है, जैसे प्लेनेरिया में। पौधों में जड़, तना या पत्ती से नए पौधे का निर्माण कायिक प्रवर्धन कहलाता है।
  2. प्रश्न: पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन की प्रक्रिया समझाइए।

    उत्तर: पुष्पी पौधों में फूल लैंगिक जनन का प्रमुख अंग है। पुंकेसर के परागकोश में परागकण बनते हैं और स्त्रीकेसर के अंडाशय में बीजांड पाए जाते हैं। परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, जिसे परागण कहते हैं। उपयुक्त परिस्थितियों में परागकण से परागनली निकलती है और नर युग्मक को बीजांड तक पहुँचाती है। नर और मादा युग्मकों के संलयन से युग्मनज बनता है। इसके बाद युग्मनज भ्रूण में विकसित होता है, बीजांड बीज और अंडाशय फल में विकसित हो जाता है।
  3. प्रश्न: मानव नर जनन तंत्र का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: मानव नर जनन तंत्र में वृषण, शुक्रवाहिका, शुक्राशय, प्रोस्टेट ग्रंथि, मूत्रमार्ग और लिंग प्रमुख अंग हैं। वृषण अंडकोश में स्थित होते हैं और इनमें शुक्राणुओं का निर्माण होता है। वृषण से टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन भी स्रावित होता है। शुक्राणु विभिन्न जनन नलिकाओं से होकर आगे बढ़ते हैं। शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथि से निकलने वाले स्राव शुक्राणुओं के साथ मिलकर वीर्य का निर्माण करते हैं। वीर्य मूत्रमार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर निकलता है।
  4. प्रश्न: मानव मादा जनन तंत्र और निषेचन की प्रक्रिया समझाइए।

    उत्तर: मानव मादा जनन तंत्र में अंडाशय, डिंबवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और योनि प्रमुख अंग हैं। अंडाशय में अंडाणु बनते और परिपक्व होते हैं। अंडोत्सर्ग के समय परिपक्व अंडाणु डिंबवाहिनी में पहुँचता है। यदि इस दौरान शुक्राणु से उसका संलयन होता है, तो निषेचन होता है और युग्मनज बनता है। युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण बनाता है और गर्भाशय में स्थापित होकर आगे विकसित होता है। अपरा भ्रूण को आवश्यक पोषक पदार्थ और ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में सहायता करता है।
  5. प्रश्न: जनन के दौरान विविधता कैसे उत्पन्न होती है और इसका क्या महत्त्व है?

    उत्तर: DNA की प्रतिकृति बनाते समय छोटे-छोटे परिवर्तन हो सकते हैं। लैंगिक जनन में नर और मादा दोनों से आनुवंशिक सामग्री प्राप्त होने के कारण इन परिवर्तनों के नए संयोजन बन सकते हैं। इससे संतति में विविधता उत्पन्न होती है। पर्यावरण लगातार बदलता रहता है और ऐसी विविधता किसी प्रजाति के कुछ सदस्यों को नई परिस्थितियों के अनुकूल बनने में सहायता कर सकती है। इसलिए विविधता प्रजातियों के दीर्घकालिक अस्तित्व और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  6. प्रश्न: विभिन्न गर्भनिरोधक विधियों का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: गर्भधारण को रोकने के लिए विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है। कंडोम जैसी अवरोधक विधियाँ शुक्राणुओं को मादा जनन तंत्र में पहुँचने से रोकती हैं। मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ हॉर्मोनल नियंत्रण के माध्यम से गर्भधारण की संभावना कम करती हैं। अंतर्गर्भाशयी युक्तियाँ गर्भाशय में स्थापित की जाती हैं। स्थायी विधियों में पुरुषों के लिए वसेक्टॉमी और महिलाओं के लिए ट्यूबेक्टॉमी शामिल हैं। गर्भनिरोधक का चुनाव व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से करना उचित है।

परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 8 कौन-सा है?

    उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 8 “जीव जनन कैसे करते हैं” है।
  2. प्रश्न: जनन क्यों आवश्यक है?

    उत्तर: जनन से नई संतति उत्पन्न होती है और किसी प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है।
  3. प्रश्न: अलैंगिक जनन क्या है?

    उत्तर: एक ही जनक से बिना नर और मादा युग्मकों के संलयन के नए जीव के निर्माण को अलैंगिक जनन कहते हैं।
  4. प्रश्न: अमीबा में किस प्रकार का जनन होता है?

    उत्तर: अमीबा में द्विखंडन द्वारा अलैंगिक जनन होता है।
  5. प्रश्न: यीस्ट में जनन किस प्रकार होता है?

    उत्तर: यीस्ट में मुकुलन द्वारा अलैंगिक जनन होता है।
  6. प्रश्न: फूल का नर जनन अंग कौन-सा है?

    उत्तर: फूल का नर जनन अंग पुंकेसर है।
  7. प्रश्न: फूल का मादा जनन अंग कौन-सा है?

    उत्तर: फूल का मादा जनन अंग स्त्रीकेसर है।
  8. प्रश्न: मानव में शुक्राणु कहाँ बनते हैं?

    उत्तर: मानव में शुक्राणु वृषण में बनते हैं।
  9. प्रश्न: मानव में निषेचन कहाँ होता है?

    उत्तर: मानव में सामान्यतः निषेचन डिंबवाहिनी में होता है।
  10. प्रश्न: भ्रूण का विकास कहाँ होता है?

    उत्तर: निषेचित अंडाणु से बना भ्रूण गर्भाशय में स्थापित होकर विकसित होता है।
  11. प्रश्न: अपरा का क्या कार्य है?

    उत्तर: अपरा माँ और भ्रूण के बीच पोषक पदार्थ, ऑक्सीजन और अपशिष्ट पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करता है।
  12. प्रश्न: मानव युग्मक में कितने गुणसूत्र होते हैं?

    उत्तर: मानव के नर और मादा युग्मकों में 23-23 गुणसूत्र होते हैं।
  13. प्रश्न: लैंगिक जनन से विविधता क्यों उत्पन्न होती है?

    उत्तर: लैंगिक जनन में नर और मादा दोनों की आनुवंशिक सामग्री का संयोजन होता है, जिससे संतति में आनुवंशिक गुणों के नए संयोजन बन सकते हैं।
  14. प्रश्न: जनन स्वास्थ्य क्यों आवश्यक है?

    उत्तर: जनन स्वास्थ्य व्यक्ति को जनन तंत्र से संबंधित संक्रमणों और समस्याओं से बचाने, उचित स्वच्छता बनाए रखने तथा सुरक्षित और जिम्मेदार जनन संबंधी निर्णय लेने में सहायता करता है।

निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8)

“जीव जनन कैसे करते हैं” अध्याय जीवों की प्रजातिगत निरंतरता और नई पीढ़ी के निर्माण को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अलैंगिक जनन में एक जनक से अपेक्षाकृत सरल तरीके से नई संतति बनती है, जबकि लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों के संलयन से युग्मनज बनता है। लैंगिक जनन आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पुष्पी पौधों में पुंकेसर, स्त्रीकेसर, परागण और निषेचन जनन की प्रमुख अवस्थाएँ हैं। मनुष्य में वृषण और अंडाशय क्रमशः नर और मादा युग्मकों के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं। निषेचन के बाद भ्रूण का विकास गर्भाशय में होता है और अपरा भ्रूण को आवश्यक पदार्थ उपलब्ध कराने में सहायता करता है। परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को अलैंगिक जनन की विधियाँ, पुष्प के जनन अंग, मानव जनन तंत्र, निषेचन, मासिक चक्र, जनन स्वास्थ्य तथा गर्भनिरोधक विधियों को विशेष रूप से तैयार करना चाहिए।

यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

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