नियंत्रण एवं समन्वय – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7)
“नियंत्रण एवं समन्वय” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के जीव विज्ञान खंड का सातवाँ अध्याय है। इस अध्याय में जीवों द्वारा अपने शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करने और बाहरी वातावरण से प्राप्त उद्दीपनों के प्रति उचित अनुक्रिया करने की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है। किसी भी जीव के लिए अपने शरीर के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मनुष्य और अन्य जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र तथा हॉर्मोन के द्वारा होता है। दूसरी ओर पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं पाया जाता, लेकिन वे भी प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण, जल, स्पर्श आदि उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया करते हैं। पौधों की वृद्धि और विकास में पादप हॉर्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अध्याय में न्यूरॉन, तंत्रिका तंत्र, प्रतिवर्ती क्रिया, मानव मस्तिष्क, पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय, पादप हॉर्मोन, जंतुओं में हॉर्मोनल नियंत्रण तथा विभिन्न अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्यों का अध्ययन किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नियंत्रण एवं समन्वय क्या है?
जीवों के शरीर में विभिन्न अंगों और तंत्रों की क्रियाओं को नियंत्रित करके उनमें तालमेल बनाए रखने की प्रक्रिया को नियंत्रण एवं समन्वय कहा जाता है। वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति उचित प्रतिक्रिया देने के लिए नियंत्रण एवं समन्वय आवश्यक है।
उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु को छूने पर हम तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लेते हैं। यह एक तीव्र अनैच्छिक अनुक्रिया है। इसी प्रकार तेज प्रकाश में आँखों की पुतलियों का आकार बदलना भी शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय का उदाहरण है।
उद्दीपन और अनुक्रिया
वातावरण में होने वाला ऐसा परिवर्तन जो किसी जीव में प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, उद्दीपन कहलाता है। उद्दीपन के प्रति जीव द्वारा दिखाई गई प्रतिक्रिया को अनुक्रिया कहते हैं।
प्रकाश, तापमान, स्पर्श, ध्वनि, जल तथा रसायन आदि विभिन्न प्रकार के उद्दीपन हो सकते हैं। जीवों में उपस्थित ग्राही इन उद्दीपनों को पहचानते हैं और उनसे संबंधित सूचना नियंत्रण तंत्र तक पहुँचती है।
तंत्रिका तंत्र
मनुष्य और अन्य कशेरुकियों में शरीर के विभिन्न भागों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान तथा नियंत्रण करने वाले तंत्र को तंत्रिका तंत्र कहा जाता है। तंत्रिका तंत्र शरीर को बाहरी वातावरण से प्राप्त उद्दीपनों के प्रति शीघ्र प्रतिक्रिया करने में सहायता करता है।
मानव तंत्रिका तंत्र के प्रमुख भाग मस्तिष्क, मेरुरज्जु और उनसे जुड़ी तंत्रिकाएँ हैं। तंत्रिका तंत्र में संदेशों का संचार मुख्यतः विद्युत संकेतों के रूप में होता है।
न्यूरॉन
न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका तंत्रिका तंत्र की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। यह उद्दीपन से संबंधित सूचना को ग्रहण करने और उसे आगे पहुँचाने का कार्य करती है।
एक सामान्य न्यूरॉन में मुख्यतः कोशिका काय, द्रुमिकाएँ और तंत्रिकाक्ष पाए जाते हैं। द्रुमिकाएँ संकेत ग्रहण करती हैं, जबकि तंत्रिकाक्ष संकेत को आगे ले जाता है।
सिनेप्स
दो क्रमिक न्यूरॉनों के बीच उपस्थित सूक्ष्म अंतराल को सिनेप्स कहते हैं। एक न्यूरॉन के तंत्रिकाक्ष के अंतिम सिरे से रासायनिक पदार्थ निकलते हैं, जो अगले न्यूरॉन में विद्युत संकेत उत्पन्न करने में सहायता करते हैं। इस प्रकार तंत्रिका संदेश एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचता है।
प्रतिवर्ती क्रिया
किसी उद्दीपन के प्रति बहुत तेजी से होने वाली स्वचालित और अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं। इसमें सोचने या निर्णय लेने की आवश्यकता नहीं होती। गर्म वस्तु को छूने पर हाथ को तुरंत पीछे खींच लेना प्रतिवर्ती क्रिया का सामान्य उदाहरण है।
प्रतिवर्ती क्रियाएँ शरीर को संभावित नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये क्रियाएँ बहुत तेजी से होती हैं, इसलिए खतरे से बचाव तुरंत हो जाता है।
प्रतिवर्ती चाप
संवेदांग से लेकर प्रभावी अंग तक तंत्रिका आवेग के जिस मार्ग से होकर प्रतिवर्ती क्रिया पूरी होती है, उसे प्रतिवर्ती चाप कहा जाता है। इसमें ग्राही, संवेदी न्यूरॉन, मेरुरज्जु, चालक न्यूरॉन और प्रभावी अंग प्रमुख रूप से शामिल होते हैं।
उदाहरण के लिए, जब हाथ किसी गर्म वस्तु के संपर्क में आता है, तो त्वचा के ग्राही गर्मी का अनुभव करते हैं। संदेश संवेदी न्यूरॉन द्वारा मेरुरज्जु तक पहुँचता है। वहाँ से चालक न्यूरॉन के माध्यम से मांसपेशियों को संकेत मिलता है और हाथ तुरंत पीछे हट जाता है।
प्रतिवर्ती क्रिया और ऐच्छिक क्रिया में अंतर
| आधार | प्रतिवर्ती क्रिया | ऐच्छिक क्रिया |
|---|---|---|
| नियंत्रण | मुख्यतः मेरुरज्जु द्वारा त्वरित नियंत्रण | मस्तिष्क की इच्छा के अनुसार |
| गति | बहुत तेज | तुलनात्मक रूप से नियंत्रित |
| इच्छा | बिना इच्छा के होती है | इच्छा से की जाती है |
| उदाहरण | गर्म वस्तु से हाथ हटाना | चलना या लिखना |
मानव मस्तिष्क
मानव मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण केंद्र है। यह शरीर की अनेक ऐच्छिक तथा अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है। मस्तिष्क खोपड़ी के भीतर सुरक्षित रहता है और विभिन्न भाग मिलकर शरीर की गतिविधियों का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं।
प्रमस्तिष्क
प्रमस्तिष्क मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह सोचने, समझने, स्मृति, सीखने, तर्क करने तथा ऐच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारी विभिन्न ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त अनेक सूचनाओं का विश्लेषण भी इसी भाग में होता है।
अनुमस्तिष्क
अनुमस्तिष्क शरीर की स्थिति, संतुलन और मांसपेशियों के बीच समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चलना, दौड़ना, कूदना और अन्य समन्वित गतियों को नियंत्रित करने में यह सहायक होता है।
मेड्यूला ऑब्लांगेटा
मेड्यूला ऑब्लांगेटा मस्तिष्क का पिछला भाग है और यह कई अनैच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। श्वसन, हृदय की धड़कन तथा रक्त परिसंचरण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण क्रियाएँ इसके नियंत्रण से जुड़ी होती हैं।
हाइपोथैलेमस
हाइपोथैलेमस मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह शरीर के तापमान, भूख, प्यास और अन्य कई शारीरिक प्रक्रियाओं के नियमन में भूमिका निभाता है। यह अंतःस्रावी तंत्र के नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण है।
मेरुरज्जु
मेरुरज्जु मस्तिष्क से निकलकर रीढ़ की हड्डी के भीतर स्थित रहती है। यह मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न भागों के बीच तंत्रिका संदेशों के आवागमन का प्रमुख मार्ग है। इसके अतिरिक्त कई प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण भी मेरुरज्जु द्वारा किया जाता है।
ग्राही
शरीर में उपस्थित विशेष कोशिकाएँ या संरचनाएँ जो बाहरी या आंतरिक उद्दीपनों को पहचानती हैं, ग्राही कहलाती हैं। आँखों में प्रकाश ग्राही, कानों में ध्वनि संबंधी ग्राही तथा नाक में गंध संबंधी ग्राही पाए जाते हैं।
यदि किसी ग्राही की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाए, तो संबंधित उद्दीपन को पहचानने में कठिनाई हो सकती है। उदाहरण के लिए, गंध ग्राही ठीक से काम न करने पर गंध की पहचान प्रभावित हो सकती है।
पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय
पौधों में जंतुओं की तरह तंत्रिका तंत्र नहीं पाया जाता। फिर भी पौधे बाहरी उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया करते हैं। पौधों की अनुक्रियाएँ प्रायः वृद्धि में होने वाले परिवर्तनों या कोशिकाओं में जल की मात्रा में परिवर्तन के कारण दिखाई देती हैं।
प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण, जल और स्पर्श जैसे उद्दीपनों के प्रति पौधों की विभिन्न प्रतिक्रियाएँ देखी जा सकती हैं। पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने में पादप हॉर्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पादप हॉर्मोन
पौधों की वृद्धि, विकास और विभिन्न जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करने वाले रासायनिक पदार्थों को पादप हॉर्मोन या फाइटोहॉर्मोन कहते हैं। ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल और एथिलीन प्रमुख पादप हॉर्मोन हैं।
ऑक्सिन
ऑक्सिन पौधों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है। प्ररोह में ऑक्सिन की सहायता से कोशिका वृद्धि होती है और पौधा प्रकाश की दिशा में मुड़ सकता है।
जिबरेलिन
जिबरेलिन पौधों की वृद्धि में सहायक हॉर्मोन है। यह तने की लंबाई बढ़ाने, बीजों के अंकुरण तथा कुछ अन्य वृद्धि संबंधी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
साइटोकाइनिन
साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देने वाला प्रमुख पादप हॉर्मोन है। यह कोशिका विभाजन और पौधों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एब्सिसिक अम्ल
एब्सिसिक अम्ल सामान्यतः वृद्धि निरोधक हॉर्मोन के रूप में कार्य करता है। यह पौधों में प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति प्रतिक्रिया तथा कुछ वृद्धि संबंधी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।
एथिलीन
एथिलीन गैसीय पादप हॉर्मोन है। यह विशेष रूप से फलों के पकने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रकाशानुवर्तन
प्रकाश की दिशा में या प्रकाश से दूर पौधे के किसी भाग की वृद्धि-आधारित गति को प्रकाशानुवर्तन कहते हैं। सामान्यतः प्ररोह प्रकाश की ओर बढ़ता है और इसे धनात्मक प्रकाशानुवर्तन कहा जाता है। जड़ प्रकाश से विपरीत दिशा में बढ़ने की प्रवृत्ति दिखा सकती है।
गुरुत्वानुवर्तन
गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में पौधों के अंगों की वृद्धि की दिशा में होने वाले परिवर्तन को गुरुत्वानुवर्तन कहते हैं। जड़ें सामान्यतः गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती हैं, इसलिए उनमें धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन पाया जाता है। प्ररोह सामान्यतः गुरुत्वाकर्षण की विपरीत दिशा में बढ़ता है।
स्पर्शानुवर्तन और छुई-मुई की गति
कुछ पौधे स्पर्श के प्रति भी अनुक्रिया करते हैं। छुई-मुई या मिमोसा की पत्तियों को छूने पर वे मुड़कर बंद हो जाती हैं। यह गति वृद्धि के कारण नहीं, बल्कि कोशिकाओं में जल की स्थिति में तेजी से होने वाले परिवर्तन के कारण होती है।
जंतुओं में रासायनिक समन्वय
जंतुओं में तंत्रिका तंत्र के साथ-साथ हॉर्मोन भी नियंत्रण एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हॉर्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। ये रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचकर विशिष्ट क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
अंतःस्रावी ग्रंथियाँ
जिन ग्रंथियों में नलिकाएँ नहीं होतीं और जो अपने हॉर्मोन सीधे रक्त में छोड़ती हैं, उन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियाँ कहते हैं। पीयूष, थायरॉइड, पैराथायरॉइड, अधिवृक्क, अग्न्याशय के अंतःस्रावी भाग और जनन ग्रंथियाँ इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
पीयूष ग्रंथि
पीयूष ग्रंथि मस्तिष्क के आधार के पास स्थित एक महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथि है। यह कई हॉर्मोन के स्राव को नियंत्रित करती है और शरीर की वृद्धि तथा अन्य अंतःस्रावी क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसे सामान्यतः मास्टर ग्रंथि कहा जाता है।
थायरॉइड ग्रंथि
थायरॉइड ग्रंथि गर्दन के क्षेत्र में स्थित होती है। यह थायरॉक्सिन हॉर्मोन का निर्माण करती है। थायरॉक्सिन शरीर के उपापचय को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है। आयोडीन की कमी से घेंघा जैसी समस्या हो सकती है।
अधिवृक्क ग्रंथि
अधिवृक्क ग्रंथियाँ वृक्कों के ऊपर स्थित होती हैं। इनसे एड्रीनलिन सहित विभिन्न हॉर्मोन स्रावित होते हैं। आपातकालीन या तनावपूर्ण परिस्थितियों में एड्रीनलिन शरीर को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करने में सहायता करता है।
अग्न्याशय और इंसुलिन
अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि है। इसके अंतःस्रावी भाग से इंसुलिन जैसे हॉर्मोन स्रावित होते हैं। इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इंसुलिन की कमी या उसके प्रभाव में कमी से मधुमेह जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पैराथायरॉइड ग्रंथि
पैराथायरॉइड ग्रंथियाँ थायरॉइड ग्रंथि के पीछे स्थित छोटी अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हैं। इनसे स्रावित हॉर्मोन शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के संतुलन के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
तंत्रिका और हॉर्मोनल नियंत्रण में अंतर
| आधार | तंत्रिका नियंत्रण | हॉर्मोनल नियंत्रण |
|---|---|---|
| संदेश | तंत्रिका आवेग | रासायनिक हॉर्मोन |
| परिवहन | तंत्रिकाओं के माध्यम से | रक्त के माध्यम से |
| गति | बहुत तेज | तुलनात्मक रूप से धीमी |
| प्रभाव | विशिष्ट और सामान्यतः अल्पकालिक | कई बार व्यापक और अपेक्षाकृत दीर्घकालिक |
नियंत्रण एवं समन्वय का महत्त्व
- बाहरी उद्दीपनों के प्रति उचित अनुक्रिया करने में सहायता करता है।
- शरीर के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय बनाए रखता है।
- शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है।
- पर्यावरण के साथ जीव के उचित सामंजस्य में सहायता करता है।
- खतरनाक परिस्थितियों से शरीर की रक्षा करता है।
- शरीर की आंतरिक क्रियाओं के संतुलन में सहायता करता है।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई क्या है?
(a) नेफ्रॉन (b) न्यूरॉन (c) कूपिका (d) हार्मोन
उत्तर: (b) न्यूरॉन
- दो न्यूरॉनों के बीच के सूक्ष्म अंतराल को क्या कहते हैं?
(a) द्रुमिका (b) सिनेप्स (c) तंत्रिकाक्ष (d) कोशिका काय
उत्तर: (b) सिनेप्स
- गर्म वस्तु को छूने पर हाथ पीछे खींचना किस प्रकार की क्रिया है?
(a) ऐच्छिक क्रिया (b) प्रतिवर्ती क्रिया (c) वृद्धि क्रिया (d) पाचन क्रिया
उत्तर: (b) प्रतिवर्ती क्रिया
- शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मस्तिष्क का कौन-सा भाग महत्वपूर्ण है?
(a) प्रमस्तिष्क (b) अनुमस्तिष्क (c) मेड्यूला (d) हाइपोथैलेमस
उत्तर: (b) अनुमस्तिष्क
- अनैच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण में कौन-सा भाग महत्वपूर्ण है?
(a) मेड्यूला ऑब्लांगेटा (b) प्रमस्तिष्क (c) द्रुमिका (d) सिनेप्स
उत्तर: (a) मेड्यूला ऑब्लांगेटा
- निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है?
(a) इंसुलिन (b) थायरॉक्सिन (c) साइटोकाइनिन (d) एड्रीनलिन
उत्तर: (c) साइटोकाइनिन
- कोशिका विभाजन को बढ़ावा देने वाला पादप हॉर्मोन कौन-सा है?
(a) ऑक्सिन (b) साइटोकाइनिन (c) एब्सिसिक अम्ल (d) एथिलीन
उत्तर: (b) साइटोकाइनिन
- फलों के पकने में कौन-सा हॉर्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
(a) एथिलीन (b) ऑक्सिन (c) इंसुलिन (d) थायरॉक्सिन
उत्तर: (a) एथिलीन
- थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए कौन-सा तत्व आवश्यक है?
(a) कैल्शियम (b) आयोडीन (c) लोहा (d) सोडियम
उत्तर: (b) आयोडीन
- रक्त में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित करने वाला प्रमुख हॉर्मोन कौन-सा है?
(a) इंसुलिन (b) एड्रीनलिन (c) थायरॉक्सिन (d) ऑक्सिन
उत्तर: (a) इंसुलिन
- पीयूष ग्रंथि को सामान्यतः क्या कहा जाता है?
(a) पाचन ग्रंथि (b) मास्टर ग्रंथि (c) उत्सर्जी ग्रंथि (d) लार ग्रंथि
उत्तर: (b) मास्टर ग्रंथि
- पौधे का प्ररोह सामान्यतः किस दिशा में प्रकाशानुवर्तन करता है?
(a) प्रकाश से दूर (b) प्रकाश की ओर (c) नीचे की ओर (d) कोई निश्चित दिशा नहीं
उत्तर: (b) प्रकाश की ओर
- पौधों में गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ने वाली संरचना सामान्यतः कौन-सी है?
(a) प्ररोह (b) जड़ (c) पत्ती (d) फूल
उत्तर: (b) जड़
- आयोडीन युक्त नमक का उपयोग मुख्यतः किस हॉर्मोन के उचित निर्माण के लिए आवश्यक है?
(a) इंसुलिन (b) थायरॉक्सिन (c) ऑक्सिन (d) एड्रीनलिन
उत्तर: (b) थायरॉक्सिन
- पौधों में वृद्धि को बढ़ावा देने वाले हॉर्मोन का उदाहरण कौन-सा है?
(a) जिबरेलिन (b) एब्सिसिक अम्ल (c) इंसुलिन (d) थायरॉक्सिन
उत्तर: (a) जिबरेलिन
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: न्यूरॉन क्या है?
उत्तर: न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
- प्रश्न: सिनेप्स क्या है?
उत्तर: दो क्रमिक न्यूरॉनों के बीच उपस्थित सूक्ष्म अंतराल को सिनेप्स कहते हैं।
- प्रश्न: प्रतिवर्ती क्रिया क्या है?
उत्तर: किसी उद्दीपन के प्रति बहुत तेजी से होने वाली स्वचालित और अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
- प्रश्न: अनुमस्तिष्क का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: अनुमस्तिष्क शरीर के संतुलन तथा मांसपेशियों के समन्वय को बनाए रखने में सहायता करता है।
- प्रश्न: पादप हॉर्मोन क्या हैं?
उत्तर: पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने वाले रासायनिक पदार्थों को पादप हॉर्मोन कहते हैं।
- प्रश्न: ऑक्सिन का एक कार्य लिखिए।
उत्तर: ऑक्सिन कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने तथा पौधों की वृद्धि में सहायता करता है।
- प्रश्न: साइटोकाइनिन का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: साइटोकाइनिन मुख्यतः कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है।
- प्रश्न: थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए कौन-सा तत्व आवश्यक है?
उत्तर: थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है।
- प्रश्न: इंसुलिन का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
- प्रश्न: प्रतिवर्ती चाप क्या है?
उत्तर: ग्राही से प्रभावी अंग तक प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान तंत्रिका आवेग जिस मार्ग से गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: प्रतिवर्ती क्रिया और ऐच्छिक क्रिया में अंतर बताइए।
उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया अचानक और अनैच्छिक रूप से होती है तथा शरीर को तत्काल खतरे से बचाने में सहायता करती है। ऐच्छिक क्रिया हमारी इच्छा और चेतन नियंत्रण के अनुसार की जाती है। गर्म वस्तु से हाथ हटाना प्रतिवर्ती क्रिया है, जबकि लिखना या चलना ऐच्छिक क्रिया के उदाहरण हैं।
- प्रश्न: दो न्यूरॉनों के बीच सिनेप्स में क्या होता है?
उत्तर: एक न्यूरॉन के तंत्रिकाक्ष के अंतिम सिरे पर पहुँचने वाला विद्युत संकेत रासायनिक संदेशवाहक पदार्थों के स्राव को प्रेरित करता है। ये पदार्थ अगले न्यूरॉन तक संदेश पहुँचाने में सहायता करते हैं।
- प्रश्न: मेरुरज्जु के दो प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर: मेरुरज्जु मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न भागों के बीच तंत्रिका संदेशों के आवागमन का मार्ग प्रदान करती है तथा अनेक प्रतिवर्ती क्रियाओं के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- प्रश्न: पादप हॉर्मोन और जंतु हॉर्मोन में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों रासायनिक संदेशवाहक होते हैं, लेकिन पादप हॉर्मोन पौधों की वृद्धि, विकास और उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया को नियंत्रित करते हैं, जबकि जंतु हॉर्मोन शरीर की वृद्धि, उपापचय, प्रजनन और अन्य शारीरिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
- प्रश्न: छुई-मुई की पत्तियाँ छूने पर बंद क्यों हो जाती हैं?
उत्तर: छुई-मुई की पत्तियों में स्पर्श के कारण कुछ कोशिकाओं में जल की मात्रा और दाब में तेजी से परिवर्तन होता है। इसी कारण पत्तियाँ मुड़कर बंद हो जाती हैं।
- प्रश्न: पौधों में प्रकाशानुवर्तन को समझाइए।
उत्तर: प्रकाश की दिशा के अनुसार पौधे के अंग की वृद्धि में होने वाले परिवर्तन को प्रकाशानुवर्तन कहते हैं। सामान्यतः प्ररोह प्रकाश की ओर बढ़ता है और इसलिए वह धनात्मक प्रकाशानुवर्तन प्रदर्शित करता है।
- प्रश्न: आयोडीन युक्त नमक के प्रयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर: आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि द्वारा थायरॉक्सिन हॉर्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है। आयोडीन की कमी से थायरॉइड संबंधी विकार उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए भोजन में आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह दी जाती है।
- प्रश्न: एड्रीनलिन हॉर्मोन के स्राव से शरीर में क्या परिवर्तन होते हैं?
उत्तर: आपातकालीन स्थिति में एड्रीनलिन के कारण हृदय की धड़कन और श्वसन दर बढ़ सकती है तथा मांसपेशियों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए शरीर तत्काल प्रतिक्रिया के लिए तैयार होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: प्रतिवर्ती क्रिया को प्रतिवर्ती चाप के आधार पर समझाइए।
उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया किसी उद्दीपन के प्रति बहुत तेजी से होने वाली अनैच्छिक प्रतिक्रिया है। जब कोई व्यक्ति गर्म वस्तु को छूता है, तो त्वचा में उपस्थित ग्राही गर्मी का अनुभव करते हैं। यह सूचना संवेदी न्यूरॉन के माध्यम से मेरुरज्जु तक पहुँचती है। मेरुरज्जु से चालक न्यूरॉन के माध्यम से संबंधित मांसपेशियों को संकेत मिलता है और हाथ तुरंत पीछे हट जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में ग्राही से प्रभावी अंग तक तंत्रिका आवेग जिस मार्ग से गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं। प्रतिवर्ती क्रिया शरीर को चोट या अन्य संभावित खतरे से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- प्रश्न: मानव मस्तिष्क के प्रमुख भागों और उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मानव मस्तिष्क के प्रमुख भागों में प्रमस्तिष्क, अनुमस्तिष्क और मेड्यूला ऑब्लांगेटा शामिल हैं। प्रमस्तिष्क मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है और सोचने, समझने, स्मृति तथा ऐच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण में महत्वपूर्ण है। अनुमस्तिष्क शरीर के संतुलन और मांसपेशियों के समन्वय में सहायता करता है। मेड्यूला ऑब्लांगेटा कई अनैच्छिक क्रियाओं जैसे श्वसन और हृदय की धड़कन के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हाइपोथैलेमस तापमान, भूख, प्यास तथा कई आंतरिक प्रक्रियाओं के नियमन में सहायता करता है।
- प्रश्न: पादप हॉर्मोन क्या हैं? प्रमुख पादप हॉर्मोन और उनके कार्य लिखिए।
उत्तर: पौधों की वृद्धि, विकास और विभिन्न उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया को नियंत्रित करने वाले रासायनिक पदार्थ पादप हॉर्मोन कहलाते हैं। ऑक्सिन कोशिका वृद्धि और प्ररोह की लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है। जिबरेलिन तने की वृद्धि तथा बीजों के अंकुरण जैसी प्रक्रियाओं में सहायक है। साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है। एब्सिसिक अम्ल सामान्यतः वृद्धि निरोधक के रूप में कार्य करता है। एथिलीन फलों के पकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- प्रश्न: जंतुओं में तंत्रिका तथा हॉर्मोनल नियंत्रण की तुलना कीजिए।
उत्तर: तंत्रिका नियंत्रण में संदेश मुख्यतः तंत्रिका आवेगों के रूप में तंत्रिकाओं के माध्यम से बहुत तेजी से पहुँचते हैं। इसका प्रभाव सामान्यतः विशिष्ट और तीव्र होता है। इसके विपरीत हॉर्मोनल नियंत्रण रासायनिक हॉर्मोन के माध्यम से होता है, जो रक्त द्वारा शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं। हॉर्मोनल नियंत्रण अपेक्षाकृत धीमा होता है, लेकिन इसका प्रभाव कई बार अधिक समय तक बना रह सकता है। दोनों तंत्र शरीर में नियंत्रण और समन्वय स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं।
- प्रश्न: मनुष्य में हॉर्मोन द्वारा नियंत्रण को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: मनुष्य में विभिन्न अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हॉर्मोन का स्राव करती हैं। पीयूष ग्रंथि कई अन्य ग्रंथियों और शरीर की वृद्धि को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। थायरॉइड ग्रंथि थायरॉक्सिन का स्राव करती है, जो उपापचय को प्रभावित करता है। अग्न्याशय से स्रावित इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित करता है। अधिवृक्क ग्रंथि से स्रावित एड्रीनलिन आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करता है। इस प्रकार हॉर्मोन शरीर की विभिन्न क्रियाओं में समन्वय स्थापित करते हैं।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- नियंत्रण एवं समन्वय से क्या समझते हैं?
- न्यूरॉन की संरचना और कार्य समझाइए।
- सिनेप्स क्या है और इसका क्या महत्त्व है?
- प्रतिवर्ती क्रिया क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
- प्रतिवर्ती चाप का वर्णन कीजिए।
- प्रतिवर्ती और ऐच्छिक क्रिया में अंतर लिखिए।
- मानव मस्तिष्क के प्रमुख भागों का वर्णन कीजिए।
- अनुमस्तिष्क का क्या कार्य है?
- मेरुरज्जु के प्रमुख कार्य लिखिए।
- पादप हॉर्मोन क्या हैं?
- ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल और एथिलीन के कार्य लिखिए।
- पौधों में प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्वानुवर्तन समझाइए।
- छुई-मुई में होने वाली गति को समझाइए।
- जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
- आयोडीन युक्त नमक का उपयोग क्यों किया जाता है?
- थायरॉक्सिन हॉर्मोन के कार्य लिखिए।
- इंसुलिन की भूमिका समझाइए।
- एड्रीनलिन के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
- तंत्रिका और हॉर्मोनल नियंत्रण में अंतर लिखिए।
- नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र का जीवों में क्या महत्त्व है?
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
- दो न्यूरॉनों के बीच का सूक्ष्म अंतराल सिनेप्स कहलाता है।
- गर्म वस्तु से हाथ हटाना प्रतिवर्ती क्रिया का उदाहरण है।
- प्रतिवर्ती क्रिया में मेरुरज्जु महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- अनुमस्तिष्क शरीर के संतुलन और मांसपेशीय समन्वय में सहायक है।
- मेड्यूला ऑब्लांगेटा कई अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
- पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता।
- ऑक्सिन पौधों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है।
- जिबरेलिन वृद्धि और अंकुरण में सहायक है।
- एब्सिसिक अम्ल सामान्यतः वृद्धि निरोधक हॉर्मोन है।
- एथिलीन फलों के पकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- प्ररोह सामान्यतः प्रकाश की ओर बढ़ता है।
- जड़ सामान्यतः गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती है।
- पीयूष ग्रंथि को सामान्यतः मास्टर ग्रंथि कहा जाता है।
- थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है।
- इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।
- एड्रीनलिन आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया को तेज करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 7 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 7 “नियंत्रण एवं समन्वय” है।
- प्रश्न: तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई क्या है?
उत्तर: तंत्रिका तंत्र की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई न्यूरॉन है।
- प्रश्न: प्रतिवर्ती क्रिया क्या है?
उत्तर: किसी उद्दीपन के प्रति बहुत तेजी से होने वाली स्वचालित और अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
- प्रश्न: मानव शरीर का संतुलन कौन-सा मस्तिष्क भाग बनाए रखता है?
उत्तर: अनुमस्तिष्क शरीर के संतुलन और मांसपेशियों के समन्वय को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- प्रश्न: पादप हॉर्मोन क्या हैं?
उत्तर: पौधों की वृद्धि, विकास और विभिन्न अनुक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले रासायनिक पदार्थ पादप हॉर्मोन कहलाते हैं।
- प्रश्न: कौन-सा पादप हॉर्मोन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है?
उत्तर: साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है।
- प्रश्न: फलों को पकाने में कौन-सा हॉर्मोन सहायता करता है?
उत्तर: एथिलीन फलों के पकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- प्रश्न: थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन क्यों आवश्यक है?
उत्तर: थायरॉइड ग्रंथि को थायरॉक्सिन हॉर्मोन के निर्माण के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है।
- प्रश्न: इंसुलिन का क्या कार्य है?
उत्तर: इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- प्रश्न: तंत्रिका नियंत्रण और हॉर्मोनल नियंत्रण में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: तंत्रिका नियंत्रण तंत्रिका आवेगों द्वारा बहुत तेजी से होता है, जबकि हॉर्मोनल नियंत्रण रक्त के माध्यम से हॉर्मोन द्वारा अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7)
“नियंत्रण एवं समन्वय” अध्याय जीवों के शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं के बीच तालमेल को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मनुष्य में तंत्रिका तंत्र उद्दीपनों के प्रति तेज प्रतिक्रिया देने में सहायता करता है, जबकि हॉर्मोन शरीर की अनेक दीर्घकालिक और रासायनिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
पौधों में तंत्रिका तंत्र न होने के बावजूद वे प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण और स्पर्श जैसे उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल और एथिलीन जैसे पादप हॉर्मोन उनकी वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को न्यूरॉन, प्रतिवर्ती चाप, मानव मस्तिष्क, पादप हॉर्मोन तथा प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियों और उनके हॉर्मोन से संबंधित प्रश्नों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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