मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 11 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 11)
“मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के भौतिक विज्ञान खंड का ग्यारहवाँ अध्याय है। इस अध्याय में मानव नेत्र की संरचना, उसके विभिन्न भागों के कार्य, नेत्र की समंजन क्षमता तथा दृष्टि से संबंधित विभिन्न दोषों का अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही प्रकाश के प्रकीर्णन, वर्ण विक्षेपण, प्रिज्म, तारों के टिमटिमाने, आकाश के नीले दिखाई देने तथा सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य के लाल दिखाई देने जैसी महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटनाओं को समझाया गया है।
यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें मानव नेत्र के प्रमुख भाग, निकट-दृष्टि दोष, दूर-दृष्टि दोष, जरा-दूरदृष्टिता, दृष्टिदोषों का संशोधन, लेंस की क्षमता, प्रिज्म द्वारा प्रकाश का विचलन, श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण तथा प्रकाश के प्रकीर्णन से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
मानव नेत्र
मानव नेत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकाशीय अंग है, जिसकी सहायता से हम अपने आसपास की वस्तुओं को देख पाते हैं। नेत्र एक कैमरे की तरह कार्य करता है। वस्तुओं से आने वाला प्रकाश नेत्र में प्रवेश करता है और नेत्र के लेंस द्वारा उसका वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब दृष्टिपटल अर्थात रेटिना पर बनता है। मस्तिष्क इस संकेत को समझकर हमें वस्तु का स्पष्ट दृश्य प्रदान करता है।
मानव नेत्र के प्रमुख भाग
मानव नेत्र के कई महत्वपूर्ण भाग होते हैं। प्रत्येक भाग का अपना विशेष कार्य है। प्रमुख भागों में कॉर्निया, आइरिस, पुतली, नेत्र-लेंस, पक्ष्माभी पेशियाँ, रेटिना, दृष्टि-तंत्रिका, जलीय द्रव तथा कांचाभ द्रव शामिल हैं।
कॉर्निया
नेत्र के सामने का पारदर्शी और उभरा हुआ भाग कॉर्निया कहलाता है। प्रकाश सबसे पहले इसी भाग से होकर नेत्र में प्रवेश करता है। नेत्र की कुल अपवर्तक शक्ति में कॉर्निया का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
आइरिस
कॉर्निया के पीछे स्थित रंगीन झिल्ली को आइरिस कहते हैं। यह नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। तेज प्रकाश में आइरिस पुतली को छोटा कर देता है और कम प्रकाश में पुतली को बड़ा कर देता है।
पुतली
आइरिस के बीच स्थित छोटे छिद्र को पुतली कहते हैं। इसी छिद्र से प्रकाश नेत्र के अंदर प्रवेश करता है। पुतली का आकार प्रकाश की तीव्रता के अनुसार बदलता रहता है।
नेत्र-लेंस
पुतली के पीछे स्थित पारदर्शी द्वि-उत्तल लेंस को नेत्र-लेंस कहते हैं। यह वस्तुओं से आने वाली प्रकाश किरणों को अपवर्तित करके रेटिना पर प्रतिबिंब बनाने में सहायता करता है।
पक्ष्माभी पेशियाँ
नेत्र-लेंस की फोकस दूरी को बदलने वाली पेशियों को पक्ष्माभी पेशियाँ कहते हैं। ये लेंस की वक्रता को बदलकर उसकी फोकस दूरी में परिवर्तन करती हैं। इसी के कारण आँख अलग-अलग दूरी पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देख सकती है।
दृष्टिपटल या रेटिना
नेत्र के पीछे स्थित संवेदनशील परदे को रेटिना या दृष्टिपटल कहते हैं। वस्तु का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है। रेटिना प्रकाश-संवेदनाओं को तंत्रिका संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक पहुँचाने में सहायता करता है।
दृष्टि-तंत्रिका
रेटिना से प्राप्त प्रकाशीय संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाने वाली तंत्रिका को दृष्टि-तंत्रिका कहते हैं। मस्तिष्क इन संकेतों को संसाधित करके हमें वस्तुओं का दृश्य अनुभव कराता है।
नेत्र की समंजन क्षमता
नेत्र की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके अलग-अलग दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकता है, समंजन क्षमता कहलाती है। इसमें पक्ष्माभी पेशियाँ नेत्र-लेंस की वक्रता को बदलती हैं।
जब हम किसी निकट वस्तु को देखते हैं, तो नेत्र-लेंस की फोकस दूरी कम होती है। दूर की वस्तु देखने के लिए लेंस की फोकस दूरी अपेक्षाकृत बढ़ जाती है। इस प्रकार नेत्र अलग-अलग दूरी की वस्तुओं के प्रतिबिंब को रेटिना पर स्पष्ट रूप से बना सकता है।
निकट बिंदु और दूर बिंदु
वह निकटतम बिंदु जिसे सामान्य नेत्र अधिकतम समंजन क्षमता लगाकर स्पष्ट देख सकता है, निकट बिंदु कहलाता है। सामान्य वयस्क नेत्र के लिए निकट बिंदु लगभग 25 cm होता है।
वह सबसे दूर का बिंदु जिसे सामान्य नेत्र बिना विशेष समंजन के स्पष्ट देख सकता है, दूर बिंदु कहलाता है। सामान्य नेत्र के लिए दूर बिंदु अनंत पर माना जाता है।
दृष्टि दोष
जब नेत्र किसी वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब रेटिना पर बनाने में सक्षम नहीं होता और वस्तु धुंधली दिखाई देती है, तो इसे दृष्टि दोष कहा जाता है। प्रमुख दृष्टि दोषों में निकट-दृष्टि दोष, दूर-दृष्टि दोष और जरा-दूरदृष्टिता शामिल हैं।
निकट-दृष्टि दोष
निकट-दृष्टि दोष को मायोपिया कहा जाता है। इस दोष से पीड़ित व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है, लेकिन दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। ऐसे व्यक्ति का दूर बिंदु अनंत पर न होकर आँख के सामने किसी सीमित दूरी पर होता है।
निकट-दृष्टि दोष के कारण नेत्र-लेंस की फोकस दूरी कम हो सकती है या नेत्र-गोलक अपेक्षाकृत लंबा हो सकता है। इस स्थिति में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बन जाता है।
निकट-दृष्टि दोष का संशोधन
निकट-दृष्टि दोष को दूर करने के लिए अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है। अवतल लेंस दूर की वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणों को इस प्रकार अपसारित करता है कि नेत्र-लेंस उन्हें रेटिना पर फोकस कर सके।
दूर-दृष्टि दोष
दूर-दृष्टि दोष को हाइपरमेट्रोपिया कहा जाता है। इस दोष से पीड़ित व्यक्ति दूर की वस्तुओं को अपेक्षाकृत स्पष्ट देख सकता है, लेकिन पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता। इस दोष में निकट बिंदु सामान्य 25 cm से अधिक दूर हो जाता है।
दूर-दृष्टि दोष नेत्र-लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाने या नेत्र-गोलक की लंबाई कम हो जाने के कारण हो सकता है। इस स्थिति में निकट वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनने की प्रवृत्ति होती है।
दूर-दृष्टि दोष का संशोधन
दूर-दृष्टि दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है। उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को पहले से अभिसरित करता है, जिससे नेत्र-लेंस द्वारा प्रतिबिंब को रेटिना पर स्पष्ट रूप से बनाया जा सके।
जरा-दूरदृष्टिता
आयु बढ़ने के साथ नेत्र की समंजन क्षमता कम हो जाने के कारण निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देखने में कठिनाई होने लगती है। इस दोष को जरा-दूरदृष्टिता या प्रेसबायोपिया कहते हैं। इसका मुख्य कारण पक्ष्माभी पेशियों की क्षमता में कमी और नेत्र-लेंस की लोच में कमी हो सकता है।
इस दोष को आवश्यकता के अनुसार उत्तल लेंस या द्विफोकसी लेंस की सहायता से संशोधित किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति में निकट-दृष्टि और दूर-दृष्टि दोनों दोष हों, तो उसके लिए उपयुक्त द्विफोकसी या अन्य सुधारात्मक लेंस का उपयोग किया जा सकता है।
दृष्टिदोषों का संक्षिप्त सार
| दृष्टिदोष | मुख्य समस्या | प्रतिबिंब की स्थिति | संशोधन |
|---|---|---|---|
| निकट-दृष्टि दोष | दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं | रेटिना के आगे | अवतल लेंस |
| दूर-दृष्टि दोष | पास की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं | रेटिना के पीछे | उत्तल लेंस |
| जरा-दूरदृष्टिता | निकट की वस्तुएँ स्पष्ट देखने में कठिनाई | समंजन क्षमता कम | उपयुक्त उत्तल/द्विफोकसी लेंस |
लेंस की क्षमता और दृष्टिदोष
लेंस की क्षमता को P से प्रदर्शित किया जाता है। इसका सूत्र है:
P = 1/f
यहाँ f फोकस दूरी मीटर में है। लेंस की क्षमता की इकाई डायोप्टर (D) है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है।
प्रिज्म
प्रिज्म एक पारदर्शी प्रकाशीय माध्यम है जिसकी दो समतल अपवर्तक सतहें एक-दूसरे के साथ कोण बनाती हैं। जब प्रकाश प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो अपवर्तन के कारण उसकी दिशा बदल जाती है। प्रकाश की मूल दिशा से होने वाले इस परिवर्तन को विचलन कहते हैं।
प्रिज्म द्वारा प्रकाश का विचलन
जब प्रकाश की किरण प्रिज्म के एक अपवर्तक पृष्ठ पर गिरती है, तो वह अपवर्तित होकर अभिलंब की ओर मुड़ती है। दूसरे पृष्ठ से बाहर निकलते समय वह अभिलंब से दूर मुड़ती है। इस प्रकार निर्गत किरण अपनी प्रारंभिक दिशा से विचलित हो जाती है।
आपतित किरण की दिशा और निर्गत किरण की दिशा के बीच बनने वाले कोण को विचलन कोण कहते हैं। किसी विशेष आपतन कोण पर विचलन कोण का मान न्यूनतम हो जाता है, जिसे अल्पतम विचलन कोण कहते हैं।
प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण
जब श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म से होकर गुजरती है, तो वह अपने विभिन्न अवयवी रंगों में विभाजित हो जाती है। प्रकाश के इस घटना को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं। पर्दे पर प्राप्त सात रंगों की पट्टी को स्पेक्ट्रम कहते हैं।
श्वेत प्रकाश के सात प्रमुख रंगों का क्रम VIBGYOR से याद किया जाता है—Violet, Indigo, Blue, Green, Yellow, Orange और Red अर्थात् बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल।
वर्ण-विक्षेपण का कारण
विभिन्न रंगों के प्रकाश की तरंगदैर्घ्य अलग-अलग होती है और किसी माध्यम में उनका अपवर्तन समान नहीं होता। बैंगनी प्रकाश का विचलन सबसे अधिक और लाल प्रकाश का विचलन सबसे कम होता है। इसी कारण प्रिज्म से निकलने पर विभिन्न रंग अलग-अलग दिशाओं में दिखाई देते हैं।
श्वेत प्रकाश का संघटन
प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का सात रंगों में विभाजन यह सिद्ध करता है कि श्वेत प्रकाश विभिन्न रंगों का मिश्रण है। यदि पहले प्रिज्म द्वारा अलग किए गए रंगों को दूसरे समान प्रिज्म की सहायता से पुनः मिलाया जाए, तो श्वेत प्रकाश प्राप्त किया जा सकता है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रिज्म प्रकाश को रंगीन नहीं करता, बल्कि उसमें मौजूद विभिन्न रंगों को अलग करता है।
प्रकाश का प्रकीर्णन
जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से गुजरता है जिसमें धूल, धुआँ या वायु के अणुओं जैसे सूक्ष्म कण मौजूद होते हैं, तो प्रकाश का कुछ भाग विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है। इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।
प्रकीर्णन में छोटी तरंगदैर्घ्य वाले रंगों का प्रकीर्णन अधिक और बड़ी तरंगदैर्घ्य वाले रंगों का प्रकीर्णन कम होता है। सामान्यतः बैंगनी रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक तथा लाल रंग का सबसे कम होता है।
आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?
सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से गुजरते समय वायु के अणुओं और सूक्ष्म कणों से टकराकर प्रकीर्णित होता है। नीले प्रकाश का प्रकीर्णन लाल प्रकाश की तुलना में अधिक होता है। इसलिए नीला प्रकाश वातावरण में चारों ओर अधिक फैलता है और हमारी आँखों तक पहुँचता है। इसी कारण दिन के समय आकाश नीला दिखाई देता है।
अंतरिक्ष से आकाश काला क्यों दिखाई देता है?
अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा घना वायुमंडल नहीं होता। इसलिए सूर्य के प्रकाश का सामान्य वायुमंडलीय प्रकीर्णन नहीं होता। इसी कारण अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीला न दिखाई देकर काला दिखाई देता है। चंद्रमा पर भी वायुमंडल लगभग न होने के कारण वहाँ से आकाश काला दिखाई देता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?
सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में लंबी दूरी तय करके हमारी आँखों तक पहुँचता है। इस लंबी यात्रा के दौरान नीले और बैंगनी जैसे छोटे तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन हो जाता है। हमारी आँखों तक अपेक्षाकृत अधिक लाल और नारंगी प्रकाश पहुँचता है। इसलिए सूर्य लाल या नारंगी दिखाई देता है।
तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
तारे पृथ्वी से बहुत दूर होने के कारण बिंदु-स्रोत की तरह दिखाई देते हैं। तारों का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों से गुजरते समय लगातार अपवर्तित होता है। वायुमंडल की परिस्थितियों में लगातार परिवर्तन होने के कारण तारे की आभासी स्थिति और चमक में परिवर्तन होता रहता है। इसी कारण तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं।
ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
ग्रह तारों की तुलना में पृथ्वी के काफी निकट होते हैं और वे बिंदु-स्रोत के बजाय विस्तृत प्रकाश-स्रोत की तरह दिखाई देते हैं। ग्रह के विभिन्न भागों से आने वाले प्रकाश के छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव का प्रभाव औसत हो जाता है। इसलिए ग्रह सामान्यतः तारों की तरह टिमटिमाते हुए दिखाई नहीं देते।
वर्णान्धता
कुछ व्यक्तियों को कुछ विशेष रंगों में अंतर करने में कठिनाई होती है। इस स्थिति को वर्णान्धता कहते हैं। यह सामान्यतः आनुवंशिक दृष्टि दोष है। वर्णान्ध व्यक्ति सामान्य रूप से वस्तुओं को देख सकता है, लेकिन कुछ रंगों को पहचानने या उनमें अंतर करने में कठिनाई हो सकती है।
मरीचिका
गर्म रेगिस्तानी क्षेत्रों में कभी-कभी दूर की वस्तुओं के साथ उनका उल्टा प्रतिबिंब पानी की सतह जैसा दिखाई देता है। इस घटना को मरीचिका कहते हैं। यह वायुमंडल की अलग-अलग तापमान वाली परतों में प्रकाश के अपवर्तन और कुछ परिस्थितियों में पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण उत्पन्न होती है।
हीरा क्यों चमकता है?
हीरे का अपवर्तनांक अधिक होता है और उसका क्रांतिक कोण अपेक्षाकृत छोटा होता है। कटे हुए हीरे के अंदर प्रवेश करने वाला प्रकाश उसकी विभिन्न सतहों से बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन कर सकता है। इस कारण प्रकाश विशेष दिशाओं में बाहर निकलता है और हीरा अत्यधिक चमकीला दिखाई देता है।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- मानव नेत्र में वस्तु का प्रतिबिंब किस भाग पर बनता है?
(a) कॉर्निया (b) आइरिस (c) पुतली (d) रेटिना
उत्तर: (d) रेटिना - मानव नेत्र की समंजन क्षमता किसके कारण होती है?
(a) आइरिस (b) पक्ष्माभी पेशियाँ (c) रेटिना (d) पुतली
उत्तर: (b) पक्ष्माभी पेशियाँ - सामान्य नेत्र का निकट बिंदु कितनी दूरी पर होता है?
(a) 2.5 cm (b) 25 cm (c) 2.5 m (d) अनंत
उत्तर: (b) 25 cm - सामान्य नेत्र का दूर बिंदु कहाँ होता है?
(a) 25 cm (b) 1 m (c) 10 m (d) अनंत
उत्तर: (d) अनंत - निकट-दृष्टि दोष को किस लेंस से दूर किया जाता है?
(a) उत्तल (b) अवतल (c) बेलनाकार (d) समतल
उत्तर: (b) अवतल - दूर-दृष्टि दोष को किस लेंस से दूर किया जाता है?
(a) अवतल (b) उत्तल (c) समतल (d) कोई नहीं
उत्तर: (b) उत्तल - निकट-दृष्टि दोष में प्रतिबिंब कहाँ बनता है?
(a) रेटिना पर (b) रेटिना के आगे (c) रेटिना के पीछे (d) कॉर्निया पर
उत्तर: (b) रेटिना के आगे - दूर-दृष्टि दोष में प्रतिबिंब कहाँ बनने की प्रवृत्ति होती है?
(a) रेटिना के आगे (b) रेटिना के पीछे (c) रेटिना पर (d) पुतली पर
उत्तर: (b) रेटिना के पीछे - लेंस की शक्ति की इकाई क्या है?
(a) मीटर (b) न्यूटन (c) डायोप्टर (d) जूल
उत्तर: (c) डायोप्टर - लेंस की शक्ति का सूत्र क्या है?
(a) P = f (b) P = 1/f (c) P = v/u (d) P = u/v
उत्तर: (b) P = 1/f - उत्तल लेंस की शक्ति कैसी होती है?
(a) ऋणात्मक (b) धनात्मक (c) शून्य (d) अनंत
उत्तर: (b) धनात्मक - अवतल लेंस की शक्ति कैसी होती है?
(a) धनात्मक (b) ऋणात्मक (c) शून्य (d) हमेशा 1 D
उत्तर: (b) ऋणात्मक - प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के सात रंगों में विभाजन को क्या कहते हैं?
(a) परावर्तन (b) वर्ण-विक्षेपण (c) ध्रुवण (d) अपवर्तन
उत्तर: (b) वर्ण-विक्षेपण - श्वेत प्रकाश के वर्णक्रम में सबसे अधिक विचलित होने वाला रंग कौन-सा है?
(a) लाल (b) पीला (c) हरा (d) बैंगनी
उत्तर: (d) बैंगनी - सबसे कम विचलित होने वाला रंग कौन-सा है?
(a) लाल (b) बैंगनी (c) नीला (d) हरा
उत्तर: (a) लाल - आकाश नीला दिखाई देने का मुख्य कारण क्या है?
(a) परावर्तन (b) प्रकाश का प्रकीर्णन (c) पूर्ण आंतरिक परावर्तन (d) विवर्तन
उत्तर: (b) प्रकाश का प्रकीर्णन - तारे टिमटिमाते हुए क्यों दिखाई देते हैं?
(a) परावर्तन के कारण (b) वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण (c) प्रकीर्णन के कारण (d) विवर्तन के कारण
उत्तर: (b) वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण - सूर्योदय के समय सूर्य सामान्यतः किस रंग का दिखाई देता है?
(a) नीला (b) हरा (c) लाल (d) बैंगनी
उत्तर: (c) लाल - अंतरिक्ष में आकाश काला दिखाई देने का कारण क्या है?
(a) प्रकाश का अभाव (b) वायुमंडलीय प्रकीर्णन का अभाव (c) गुरुत्वाकर्षण (d) परावर्तन
उत्तर: (b) वायुमंडलीय प्रकीर्णन का अभाव - वर्णान्धता किस प्रकार का दोष है?
(a) आनुवंशिक दृष्टि दोष (b) संक्रामक रोग (c) श्रवण दोष (d) अस्थि रोग
उत्तर: (a) आनुवंशिक दृष्टि दोष
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: नेत्र की समंजन क्षमता क्या है?
उत्तर: नेत्र की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी बदलकर अलग-अलग दूरी की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है, समंजन क्षमता कहलाती है। - प्रश्न: सामान्य नेत्र का निकट बिंदु क्या है?
उत्तर: सामान्य वयस्क नेत्र का निकट बिंदु लगभग 25 cm होता है। - प्रश्न: सामान्य नेत्र का दूर बिंदु कहाँ होता है?
उत्तर: सामान्य नेत्र का दूर बिंदु अनंत पर होता है। - प्रश्न: निकट-दृष्टि दोष के लिए कौन-सा लेंस प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: निकट-दृष्टि दोष के लिए अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है। - प्रश्न: दूर-दृष्टि दोष के लिए कौन-सा लेंस प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: दूर-दृष्टि दोष के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है। - प्रश्न: लेंस की शक्ति की इकाई क्या है?
उत्तर: लेंस की शक्ति की इकाई डायोप्टर है। - प्रश्न: प्रिज्म क्या है?
उत्तर: प्रिज्म एक पारदर्शी प्रकाशीय माध्यम है जिसकी दो समतल अपवर्तक सतहें एक कोण पर झुकी होती हैं। - प्रश्न: वर्ण-विक्षेपण क्या है?
उत्तर: श्वेत प्रकाश के विभिन्न अवयवी रंगों में विभाजित होने की घटना को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं। - प्रश्न: प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है?
उत्तर: सूक्ष्म कणों द्वारा प्रकाश को विभिन्न दिशाओं में फैलाने की घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। - प्रश्न: आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?
उत्तर: वायुमंडल में नीले प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक होने के कारण आकाश नीला दिखाई देता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: मानव नेत्र की समंजन क्षमता को समझाइए।
उत्तर: नेत्र की वह क्षमता जिसके कारण नेत्र-लेंस अपनी फोकस दूरी को बदलकर अलग-अलग दूरी की वस्तुओं के प्रतिबिंब को रेटिना पर स्पष्ट रूप से बना सकता है, समंजन क्षमता कहलाती है। यह कार्य मुख्यतः पक्ष्माभी पेशियों द्वारा लेंस की वक्रता बदलकर किया जाता है। - प्रश्न: निकट-दृष्टि दोष के कारण और उसका संशोधन बताइए।
उत्तर: निकट-दृष्टि दोष में दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनने लगता है। इसका कारण नेत्र-लेंस की फोकस दूरी कम होना या नेत्र-गोलक का अधिक लंबा होना हो सकता है। इसका संशोधन उचित क्षमता वाले अवतल लेंस से किया जाता है। - प्रश्न: दूर-दृष्टि दोष के कारण और उसका संशोधन बताइए।
उत्तर: दूर-दृष्टि दोष में निकट की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनने की प्रवृत्ति होती है। इसका कारण नेत्र-लेंस की फोकस दूरी बढ़ना या नेत्र-गोलक का छोटा होना हो सकता है। इसे उचित क्षमता वाले उत्तल लेंस से संशोधित किया जाता है। - प्रश्न: तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर: तारों का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल की अलग-अलग परतों से गुजरते समय लगातार अपवर्तित होता है। वायुमंडलीय परिस्थितियों में परिवर्तन के कारण तारे की आभासी चमक और स्थिति में परिवर्तन होता रहता है, जिससे तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं। - प्रश्न: ग्रह तारों की तरह टिमटिमाते क्यों नहीं हैं?
उत्तर: ग्रह पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट होने के कारण विस्तृत प्रकाश-स्रोत की तरह दिखाई देते हैं। उनके विभिन्न भागों से आने वाले प्रकाश के उतार-चढ़ाव का प्रभाव औसत हो जाता है। इसलिए ग्रह सामान्यतः टिमटिमाते हुए नहीं दिखाई देते। - प्रश्न: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?
उत्तर: इस समय सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में लंबी दूरी तय करता है। छोटे तरंगदैर्घ्य वाले नीले और बैंगनी प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन हो जाता है और हमारी आँखों तक अपेक्षाकृत अधिक लाल प्रकाश पहुँचता है। इसलिए सूर्य लाल दिखाई देता है। - प्रश्न: आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?
उत्तर: सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में उपस्थित अणुओं और सूक्ष्म कणों से प्रकीर्णित होता है। नीले प्रकाश का प्रकीर्णन लाल प्रकाश से अधिक होता है। इसलिए नीला प्रकाश चारों ओर फैलता है और हमारी आँखों तक पहुँचकर आकाश को नीला दिखाई देता है। - प्रश्न: वर्ण-विक्षेपण क्या है? इसके सात रंगों के नाम लिखिए।
उत्तर: प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश को उसके विभिन्न अवयवी रंगों में विभाजित करने की घटना वर्ण-विक्षेपण कहलाती है। इसके सात रंग हैं—बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल। इन्हें VIBGYOR से याद किया जा सकता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: मानव नेत्र के प्रमुख भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मानव नेत्र के प्रमुख भागों में कॉर्निया, आइरिस, पुतली, नेत्र-लेंस, पक्ष्माभी पेशियाँ, रेटिना और दृष्टि-तंत्रिका शामिल हैं। कॉर्निया से प्रकाश नेत्र में प्रवेश करता है। आइरिस पुतली के आकार को नियंत्रित करके प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करता है। नेत्र-लेंस प्रकाश किरणों को अपवर्तित करके रेटिना पर प्रतिबिंब बनाता है। पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की फोकस दूरी बदलने में सहायता करती हैं। रेटिना पर वस्तु का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है तथा दृष्टि-तंत्रिका संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती है। - प्रश्न: निकट-दृष्टि और दूर-दृष्टि दोष में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: निकट-दृष्टि दोष में व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट देखता है, लेकिन दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं देख पाता। इसमें दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनने की प्रवृत्ति होती है और इसे अवतल लेंस से ठीक किया जाता है। दूर-दृष्टि दोष में व्यक्ति दूर की वस्तुओं को अपेक्षाकृत स्पष्ट देख सकता है, लेकिन पास की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं। इसमें निकट वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनने की प्रवृत्ति होती है और इसे उत्तल लेंस से ठीक किया जाता है। - प्रश्न: प्रिज्म द्वारा प्रकाश के विचलन और वर्ण-विक्षेपण को समझाइए।
उत्तर: जब प्रकाश प्रिज्म के एक पृष्ठ में प्रवेश करता है, तो अपवर्तन के कारण उसकी दिशा बदलती है। दूसरे पृष्ठ से बाहर निकलते समय भी उसका अपवर्तन होता है और प्रकाश अपनी मूल दिशा से विचलित हो जाता है। यदि प्रिज्म पर श्वेत प्रकाश डाला जाए, तो विभिन्न रंगों का अपवर्तन अलग-अलग मात्रा में होने के कारण श्वेत प्रकाश सात रंगों में विभाजित हो जाता है। इस घटना को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं। बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक और लाल रंग का सबसे कम होता है। - प्रश्न: प्रकाश के प्रकीर्णन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जब प्रकाश सूक्ष्म कणों या वायुमंडलीय अणुओं से टकराकर विभिन्न दिशाओं में फैलता है, तो इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। आकाश का नीला दिखाई देना इसका प्रमुख उदाहरण है। सूर्य के प्रकाश में नीले प्रकाश का प्रकीर्णन लाल प्रकाश की तुलना में अधिक होता है। इसी कारण नीला प्रकाश वातावरण में अधिक फैलता है और हमें आकाश नीला दिखाई देता है। - प्रश्न: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देने का कारण समझाइए।
उत्तर: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज के पास होता है और उसका प्रकाश वायुमंडल में लंबी दूरी तय करता है। इस दौरान छोटे तरंगदैर्घ्य वाले नीले और बैंगनी प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक हो जाता है। लाल प्रकाश का तरंगदैर्घ्य अधिक होने के कारण उसका प्रकीर्णन अपेक्षाकृत कम होता है और वह अधिक मात्रा में हमारी आँखों तक पहुँचता है। इसलिए सूर्य लाल या नारंगी दिखाई देता है। - प्रश्न: जरा-दूरदृष्टिता क्या है और इसे कैसे दूर किया जाता है?
उत्तर: आयु बढ़ने के साथ नेत्र-लेंस की लोच और पक्ष्माभी पेशियों की क्षमता कम होने के कारण निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देखने में कठिनाई होने लगती है। इस दोष को जरा-दूरदृष्टिता कहते हैं। आवश्यकता के अनुसार इसे उचित उत्तल लेंस या द्विफोकसी लेंस की सहायता से संशोधित किया जा सकता है।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- मानव नेत्र की संरचना और उसके प्रमुख भागों का वर्णन कीजिए।
- नेत्र की समंजन क्षमता क्या है?
- निकट बिंदु और दूर बिंदु की परिभाषा लिखिए।
- सामान्य नेत्र के निकट और दूर बिंदु का मान लिखिए।
- निकट-दृष्टि दोष क्या है? इसके कारण और निवारण लिखिए।
- दूर-दृष्टि दोष क्या है? इसके कारण और निवारण लिखिए।
- जरा-दूरदृष्टिता क्या है?
- वर्णान्धता क्या है?
- लेंस की शक्ति क्या है? इसका सूत्र और इकाई लिखिए।
- प्रिज्म क्या है?
- प्रिज्म द्वारा प्रकाश के विचलन को समझाइए।
- वर्ण-विक्षेपण क्या है?
- श्वेत प्रकाश के सात रंगों के नाम लिखिए।
- प्रकाश के प्रकीर्णन को समझाइए।
- आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?
- तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
- ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
- सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?
- अंतरिक्ष में आकाश काला क्यों दिखाई देता है?
- मरीचिका क्या है? इसके बनने का कारण समझाइए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- मानव नेत्र एक प्रकाशीय उपकरण की तरह कार्य करता है।
- नेत्र का वास्तविक प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।
- सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm होता है।
- सामान्य नेत्र का दूर बिंदु अनंत पर होता है।
- पक्ष्माभी पेशियाँ नेत्र की समंजन क्षमता में सहायता करती हैं।
- निकट-दृष्टि दोष को अवतल लेंस से ठीक किया जाता है।
- दूर-दृष्टि दोष को उत्तल लेंस से ठीक किया जाता है।
- जरा-दूरदृष्टिता आयु बढ़ने के साथ समंजन क्षमता कम होने से संबंधित है।
- लेंस की शक्ति P = 1/f होती है।
- लेंस की शक्ति की इकाई डायोप्टर है।
- उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक और अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है।
- प्रिज्म प्रकाश की दिशा में विचलन उत्पन्न करता है।
- श्वेत प्रकाश सात प्रमुख रंगों का मिश्रण है।
- बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक होता है।
- लाल रंग का विचलन सबसे कम होता है।
- आकाश का नीला दिखाई देना प्रकाश के प्रकीर्णन से संबंधित है।
- तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है।
- सूर्योदय और सूर्यास्त के समय लाल रंग का प्रकाश अधिक मात्रा में आँखों तक पहुँचता है।
- अंतरिक्ष में वायुमंडलीय प्रकीर्णन न होने के कारण आकाश काला दिखाई देता है।
- मरीचिका वायुमंडलीय अपवर्तन और पूर्ण आंतरिक परावर्तन से संबंधित घटना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 11 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 11 “मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार” है। - प्रश्न: सामान्य नेत्र का निकट बिंदु कितनी दूरी पर होता है?
उत्तर: सामान्य वयस्क नेत्र का निकट बिंदु लगभग 25 cm होता है। - प्रश्न: सामान्य नेत्र का दूर बिंदु कहाँ होता है?
उत्तर: सामान्य नेत्र का दूर बिंदु अनंत पर होता है। - प्रश्न: निकट-दृष्टि दोष के लिए कौन-सा लेंस लगाया जाता है?
उत्तर: निकट-दृष्टि दोष को दूर करने के लिए उचित क्षमता वाला अवतल लेंस लगाया जाता है। - प्रश्न: दूर-दृष्टि दोष के लिए कौन-सा लेंस लगाया जाता है?
उत्तर: दूर-दृष्टि दोष को दूर करने के लिए उचित क्षमता वाला उत्तल लेंस लगाया जाता है। - प्रश्न: लेंस की शक्ति की इकाई क्या है?
उत्तर: लेंस की शक्ति की इकाई डायोप्टर है। - प्रश्न: आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?
उत्तर: वायुमंडल में नीले प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक होने के कारण आकाश नीला दिखाई देता है। - प्रश्न: तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर: तारों के प्रकाश के वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण उनकी आभासी चमक और स्थिति में परिवर्तन होता रहता है, इसलिए वे टिमटिमाते दिखाई देते हैं। - प्रश्न: ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
उत्तर: ग्रह विस्तृत प्रकाश-स्रोत की तरह दिखाई देते हैं, इसलिए उनके विभिन्न भागों से आने वाले प्रकाश का प्रभाव औसत हो जाता है और टिमटिमाने का प्रभाव बहुत कम दिखाई देता है। - प्रश्न: सूर्योदय के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?
उत्तर: सूर्योदय के समय सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में लंबी दूरी तय करता है। नीले और बैंगनी प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन हो जाता है और लाल प्रकाश अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में आँखों तक पहुँचता है। इसलिए सूर्य लाल दिखाई देता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 11)
“मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार” अध्याय मानव नेत्र की संरचना और कार्यप्रणाली के साथ प्रकाश से जुड़ी अनेक प्राकृतिक घटनाओं को समझने में सहायता करता है। इसमें समंजन क्षमता, निकट बिंदु, दूर बिंदु और विभिन्न दृष्टिदोषों के कारण तथा उनके सुधार के लिए प्रयुक्त लेंसों का अध्ययन किया जाता है।
इस अध्याय में प्रिज्म द्वारा प्रकाश का विचलन और वर्ण-विक्षेपण, प्रकाश का प्रकीर्णन, आकाश का नीला दिखाई देना, तारों का टिमटिमाना तथा सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखाई देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा की तैयारी करते समय विद्यार्थियों को दृष्टिदोषों के संशोधन, लेंस की क्षमता, प्रिज्म और प्रकीर्णन से संबंधित संख्यात्मक तथा व्याख्यात्मक प्रश्नों का विशेष अभ्यास करना चाहिए।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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