विद्युत – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12)
“विद्युत” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के भौतिक विज्ञान खंड का बारहवाँ अध्याय है। इस अध्याय में विद्युत धारा, विद्युत विभवांतर, विद्युत परिपथ, प्रतिरोध, ओम का नियम, प्रतिरोधों का श्रेणीक्रम और समान्तर क्रम में संयोजन, विद्युत शक्ति तथा विद्युत ऊर्जा जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है।
विद्युत हमारे दैनिक जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। घरों में बल्ब, पंखे, टीवी, फ्रिज, मोबाइल चार्जर और अनेक विद्युत उपकरण विद्युत ऊर्जा का उपयोग करते हैं। इस अध्याय में यह समझाया जाता है कि विद्युत धारा किस प्रकार प्रवाहित होती है, किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है और विद्युत ऊर्जा को किस प्रकार मापा जाता है।
विद्युत धारा
किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित होने वाले विद्युत आवेश को विद्युत धारा कहते हैं। इसे I से प्रदर्शित किया जाता है।
यदि किसी चालक से t समय में Q आवेश प्रवाहित होता है, तो विद्युत धारा:
I = Q/t
विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर (A) है। एक ऐम्पियर धारा तब कहलाती है जब किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से एक सेकंड में एक कूलॉम आवेश प्रवाहित हो।
विद्युत आवेश
विद्युत धारा का प्रवाह विद्युत आवेश के कारण होता है। आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है। एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिमाण लगभग 1.6 × 10-19 C होता है।
एक कूलॉम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या लगभग 6.25 × 1018 होती है।
विद्युत परिपथ
विद्युत धारा के सतत तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं। एक सामान्य विद्युत परिपथ में सेल या बैटरी, संयोजक तार, स्विच तथा विद्युत उपकरण या प्रतिरोधक हो सकते हैं।
परिपथ खुला होने पर विद्युत धारा का प्रवाह नहीं होता, जबकि परिपथ बंद होने पर धारा प्रवाहित हो सकती है।
विद्युत विभव
किसी एकांक धन आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का विद्युत विभव कहते हैं। विद्युत विभव का SI मात्रक वोल्ट है।
विभवांतर
दो बिंदुओं के बीच विद्युत विभव के अंतर को विभवांतर कहते हैं। यदि किसी आवेश Q को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में W कार्य किया जाता है, तो विभवांतर:
V = W/Q
विभवांतर का SI मात्रक वोल्ट (V) है।
विद्युत धारा और विभवांतर में संबंध
किसी चालक में विभवांतर उत्पन्न करने पर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है। विभवांतर जितना अधिक होगा, समान परिस्थितियों में धारा का मान भी अधिक हो सकता है। इस संबंध को ओम के नियम द्वारा स्पष्ट किया जाता है।
ओम का नियम
नियत तापमान पर किसी धात्विक चालक के सिरों के बीच विभवांतर V उसमें प्रवाहित धारा I के समानुपाती होता है। अर्थात्:
V ∝ I
या
V = IR
जहाँ R चालक का प्रतिरोध है। इसे ओम का नियम कहते हैं।
प्रतिरोध
किसी चालक का वह गुण जिसके कारण वह विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, विद्युत प्रतिरोध कहलाता है। इसे R से प्रदर्शित किया जाता है।
ओम के नियम से:
R = V/I
प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है।
प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
किसी तार का प्रतिरोध मुख्यतः निम्न कारकों पर निर्भर करता है:
- तार की लंबाई
- तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
- तार के पदार्थ की प्रकृति
- तापमान
समान पदार्थ और समान तापमान के लिए तार का प्रतिरोध उसकी लंबाई के समानुपाती तथा उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
R ∝ l/A
अतः:
R = ρl/A
जहाँ ρ पदार्थ की प्रतिरोधकता, l तार की लंबाई और A अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
प्रतिरोधकता
किसी पदार्थ की वह विशेषता जो उसके विद्युत प्रतिरोध का निर्धारण करती है, प्रतिरोधकता कहलाती है। इसे सामान्यतः ρ से प्रदर्शित किया जाता है।
प्रतिरोधकता का SI मात्रक ओम-मीटर (Ω m) है। प्रतिरोधकता पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है।
श्रेणीक्रम में प्रतिरोधों का संयोजन
जब कई प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि एक के बाद दूसरा प्रतिरोध जुड़ा हो और सभी प्रतिरोधों में समान धारा प्रवाहित हो, तो इसे श्रेणीक्रम संयोजन कहते हैं।
यदि R1, R2 और R3 श्रेणीक्रम में जुड़े हों, तो तुल्य प्रतिरोध:
R = R1 + R2 + R3
श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध से समान विद्युत धारा प्रवाहित होती है, जबकि प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर विभवांतर अलग-अलग हो सकता है।
समान्तर क्रम में प्रतिरोधों का संयोजन
जब कई प्रतिरोधों के एक-एक सिरे को एक बिंदु से तथा दूसरे सिरे को दूसरे बिंदु से जोड़ा जाता है, तो इसे समान्तर क्रम संयोजन कहते हैं।
तीन प्रतिरोधों R1, R2 और R3 के लिए:
1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3
समान्तर संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवांतर समान होता है, जबकि अलग-अलग शाखाओं में धारा अलग हो सकती है।
श्रेणीक्रम और समान्तर क्रम में अंतर
| आधार | श्रेणीक्रम | समान्तर क्रम |
|---|---|---|
| धारा | सभी प्रतिरोधों में समान | शाखाओं में अलग-अलग हो सकती है |
| विभवांतर | अलग-अलग हो सकता है | प्रत्येक शाखा में समान |
| तुल्य प्रतिरोध | प्रतिरोधों के योग के बराबर | प्रत्येक प्रतिरोध से कम हो सकता है |
| उपयोग | सरल श्रेणी परिपथ | घरेलू विद्युत परिपथ |
घरेलू विद्युत परिपथ में समान्तर संयोजन
घरों में विद्युत उपकरणों को सामान्यतः समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर प्राप्त होता है और किसी एक उपकरण को बंद करने पर अन्य उपकरण सामान्यतः काम करते रहते हैं।
यदि घरेलू उपकरणों को श्रेणीक्रम में जोड़ दिया जाए, तो एक उपकरण में खराबी आने पर पूरा परिपथ प्रभावित हो सकता है और प्रत्येक उपकरण को आवश्यक विभवांतर भी नहीं मिल पाएगा।
विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव
जब किसी प्रतिरोधक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो विद्युत ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। इसे विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहते हैं।
जूल के नियम के अनुसार उत्पन्न ऊष्मा:
H = I2Rt
जहाँ H उत्पन्न ऊष्मा, I धारा, R प्रतिरोध और t समय है।
विद्युत बल्ब
विद्युत बल्ब विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित उपकरण है। इसमें उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक वाली टंगस्टन धातु का फिलामेंट प्रयोग किया जाता है। जब फिलामेंट में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वह बहुत अधिक गर्म होकर प्रकाश देने लगता है।
बल्ब के अंदर निर्वात या उपयुक्त अक्रिय गैस जैसे आर्गन का उपयोग किया जाता है ताकि फिलामेंट का ऑक्सीकरण कम हो और उसका जीवन बढ़े।
विद्युत शक्ति
विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। इसे P से प्रदर्शित किया जाता है।
P = W/t
यदि किसी परिपथ में V विभवांतर और I धारा हो, तो:
P = VI
ओम के नियम से:
P = I2R
या
P = V2/R
विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है।
विद्युत ऊर्जा
विद्युत उपकरण द्वारा विद्युत ऊर्जा की खपत को विद्युत ऊर्जा कहते हैं। यदि शक्ति P का कोई उपकरण t समय तक चलता है, तो विद्युत ऊर्जा:
E = Pt
विद्युत ऊर्जा का SI मात्रक जूल है। व्यावहारिक रूप से विद्युत ऊर्जा की खपत को किलोवाट-घंटा (kWh) में मापा जाता है। एक किलोवाट-घंटा को सामान्य भाषा में एक यूनिट विद्युत ऊर्जा कहते हैं।
विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई
विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई किलोवाट-घंटा (kWh) है।
1 kWh = 3.6 × 106 J
घरों में बिजली के बिल में विद्युत ऊर्जा की खपत यूनिटों में दर्शाई जाती है।
विद्युत धारा, विभवांतर और प्रतिरोध के महत्वपूर्ण सूत्र
- I = Q/t
- V = W/Q
- V = IR
- R = V/I
- R = ρl/A
- P = VI
- P = I2R
- P = V2/R
- E = Pt
- H = I2Rt
विद्युत धारा का व्यावहारिक महत्व
विद्युत ऊर्जा का उपयोग प्रकाश, ताप, संचार, परिवहन, उद्योग और घरेलू उपकरणों में व्यापक रूप से किया जाता है। विद्युत के सुरक्षित उपयोग के लिए उचित परिपथ, फ्यूज, स्विच और उपयुक्त तारों का प्रयोग आवश्यक है।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- विद्युत धारा का SI मात्रक क्या है?
(a) वोल्ट (b) ओम (c) ऐम्पियर (d) वाट
उत्तर: (c) ऐम्पियर - विद्युत आवेश का SI मात्रक क्या है?
(a) कूलॉम (b) ऐम्पियर (c) वोल्ट (d) जूल
उत्तर: (a) कूलॉम - विभवांतर का SI मात्रक क्या है?
(a) ओम (b) वोल्ट (c) वाट (d) ऐम्पियर
उत्तर: (b) वोल्ट - प्रतिरोध का SI मात्रक क्या है?
(a) ओम (b) वोल्ट (c) वाट (d) जूल
उत्तर: (a) ओम - ओम के नियम का सही सूत्र कौन-सा है?
(a) V = IR (b) I = VR (c) R = VI (d) V = I/R
उत्तर: (a) V = IR - विद्युत धारा का सूत्र क्या है?
(a) I = Q/t (b) I = Qt (c) I = t/Q (d) I = Q + t
उत्तर: (a) I = Q/t - किसी चालक का प्रतिरोध किस सूत्र से प्राप्त किया जा सकता है?
(a) R = V/I (b) R = VI (c) R = I/V (d) R = V+I
उत्तर: (a) R = V/I - प्रतिरोध किनमें से किस पर निर्भर करता है?
(a) केवल लंबाई पर (b) केवल क्षेत्रफल पर (c) पदार्थ, लंबाई, क्षेत्रफल और तापमान पर (d) केवल धारा पर
उत्तर: (c) पदार्थ, लंबाई, क्षेत्रफल और तापमान पर - तार की लंबाई बढ़ाने पर उसका प्रतिरोध सामान्यतः:
(a) घटता है (b) बढ़ता है (c) शून्य हो जाता है (d) अपरिवर्तित रहता है
उत्तर: (b) बढ़ता है - तार का अनुप्रस्थ काट बढ़ाने पर उसका प्रतिरोध सामान्यतः:
(a) बढ़ता है (b) घटता है (c) अनंत हो जाता है (d) समान रहता है
उत्तर: (b) घटता है - श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों में कौन-सी राशि समान रहती है?
(a) विभवांतर (b) धारा (c) शक्ति (d) प्रतिरोध
उत्तर: (b) धारा - समान्तर क्रम में जुड़े प्रतिरोधों के सिरों पर क्या समान रहता है?
(a) धारा (b) विभवांतर (c) शक्ति (d) प्रतिरोध
उत्तर: (b) विभवांतर - विद्युत शक्ति का SI मात्रक क्या है?
(a) जूल (b) वाट (c) ओम (d) कूलॉम
उत्तर: (b) वाट - विद्युत शक्ति का सही सूत्र कौन-सा है?
(a) P = VI (b) P = V/I (c) P = I/V (d) P = V+I
उत्तर: (a) P = VI - विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई क्या है?
(a) वाट (b) जूल (c) किलोवाट-घंटा (d) ओम
उत्तर: (c) किलोवाट-घंटा - 1 किलोवाट-घंटा कितने जूल के बराबर होता है?
(a) 3.6 × 103 J (b) 3.6 × 104 J (c) 3.6 × 105 J (d) 3.6 × 106 J
उत्तर: (d) 3.6 × 106 J - विद्युत बल्ब का फिलामेंट किस धातु का बना होता है?
(a) ताँबा (b) एल्युमिनियम (c) टंगस्टन (d) लोहा
उत्तर: (c) टंगस्टन - विद्युत बल्ब किस प्रभाव पर आधारित है?
(a) चुंबकीय प्रभाव (b) ऊष्मीय प्रभाव (c) रासायनिक प्रभाव (d) प्रकाश-वैद्युत प्रभाव
उत्तर: (b) ऊष्मीय प्रभाव - विद्युत धारा से उत्पन्न ऊष्मा का सूत्र क्या है?
(a) H = IRt (b) H = I2Rt (c) H = VIt2 (d) H = V/R
उत्तर: (b) H = I2Rt - प्रतिरोधकता का SI मात्रक क्या है?
(a) Ω (b) Ω m (c) V (d) A
उत्तर: (b) Ω m
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: विद्युत धारा क्या है?
उत्तर: किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से एकांक समय में प्रवाहित विद्युत आवेश को विद्युत धारा कहते हैं। - प्रश्न: विद्युत धारा का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर है। - प्रश्न: विभवांतर क्या है?
उत्तर: दो बिंदुओं के बीच विद्युत विभव के अंतर को विभवांतर कहते हैं। - प्रश्न: प्रतिरोध क्या है?
उत्तर: चालक का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोध कहलाता है। - प्रश्न: ओम का नियम लिखिए।
उत्तर: नियत तापमान पर V ∝ I या V = IR होता है। - प्रश्न: प्रतिरोध का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: प्रतिरोध का SI मात्रक ओम है। - प्रश्न: विद्युत शक्ति क्या है?
उत्तर: विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। - प्रश्न: विद्युत शक्ति का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट है। - प्रश्न: विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई क्या है?
उत्तर: विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई किलोवाट-घंटा या यूनिट है। - प्रश्न: विद्युत बल्ब का फिलामेंट किस पदार्थ का होता है?
उत्तर: विद्युत बल्ब का फिलामेंट टंगस्टन का बना होता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: ओम के नियम को समझाइए।
उत्तर: नियत तापमान पर किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है। इसलिए V = IR, जहाँ R चालक का प्रतिरोध है। - प्रश्न: चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: प्रतिरोध तार की लंबाई, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल, पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है। समान पदार्थ और तापमान के लिए R = ρl/A होता है। - प्रश्न: श्रेणीक्रम में प्रतिरोधों को जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर: श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध उनके प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है। यदि तीन प्रतिरोध R₁, R₂ और R₃ हों, तो R = R₁ + R₂ + R₃। - प्रश्न: समान्तर क्रम में प्रतिरोधों के संयोजन का सूत्र लिखिए।
उत्तर: तीन प्रतिरोधों के लिए 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ होता है। समान्तर संयोजन में प्रत्येक शाखा के सिरों पर विभवांतर समान रहता है। - प्रश्न: घरों में विद्युत उपकरण समान्तर क्रम में क्यों जोड़े जाते हैं?
उत्तर: समान्तर संयोजन में प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर प्राप्त होता है और किसी एक उपकरण को बंद करने या खराब होने पर अन्य उपकरण सामान्यतः काम करते रहते हैं। - प्रश्न: विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव क्या है?
उत्तर: प्रतिरोधक से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर विद्युत ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा में बदल जाता है। इसे विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहते हैं। उत्पन्न ऊष्मा H = I²Rt होती है। - प्रश्न: विद्युत शक्ति के विभिन्न सूत्र लिखिए।
उत्तर: विद्युत शक्ति के प्रमुख सूत्र P = VI, P = I²R तथा P = V²/R हैं। - प्रश्न: विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई क्या है?
उत्तर: विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई किलोवाट-घंटा है। 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J होता है। इसे सामान्यतः एक यूनिट विद्युत ऊर्जा कहा जाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: ओम के नियम का प्रयोग द्वारा सत्यापन समझाइए।
उत्तर: ओम के नियम के सत्यापन के लिए बैटरी, कुंजी, अमीटर, वोल्टमीटर, प्रतिरोध तथा धारा नियंत्रक को उचित परिपथ में जोड़ा जाता है। अमीटर को प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर को प्रतिरोध के समान्तर जोड़ा जाता है। धारा नियंत्रक की सहायता से धारा के विभिन्न मान प्राप्त किए जाते हैं और प्रत्येक स्थिति में धारा तथा विभवांतर के पाठ्यांक लिए जाते हैं। V को Y-अक्ष और I को X-अक्ष पर लेकर ग्राफ बनाया जाता है। यदि सीधी रेखा प्राप्त होती है और V/I नियत रहता है, तो चालक ओम के नियम का पालन करता है। - प्रश्न: श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध का सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर: मान लें R₁, R₂ और R₃ तीन प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध से समान धारा I प्रवाहित होती है। कुल विभवांतर V = V₁ + V₂ + V₃ होगा। ओम के नियम से V = IR, V₁ = IR₁, V₂ = IR₂ और V₃ = IR₃। अतः IR = IR₁ + IR₂ + IR₃। इसलिए R = R₁ + R₂ + R₃। इस प्रकार श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है। - प्रश्न: समान्तर क्रम में जुड़े प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध का सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर: मान लें R₁, R₂ और R₃ समान्तर क्रम में जुड़े हैं। प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर समान विभवांतर V होगा। कुल धारा I = I₁ + I₂ + I₃ होगी। ओम के नियम से I = V/R, I₁ = V/R₁, I₂ = V/R₂ और I₃ = V/R₃। अतः V/R = V/R₁ + V/R₂ + V/R₃। दोनों पक्षों को V से भाग देने पर 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ प्राप्त होता है। - प्रश्न: विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा को समझाइए।
उत्तर: विद्युत ऊर्जा के उपभोग की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। इसे P से प्रदर्शित किया जाता है और P = W/t होता है। यदि किसी उपकरण में V विभवांतर और I धारा प्रवाहित हो, तो P = VI होता है। विद्युत ऊर्जा की खपत E = Pt से प्राप्त की जा सकती है। विद्युत शक्ति की इकाई वाट तथा विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई किलोवाट-घंटा है। - प्रश्न: विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव को समझाइए और उसका सूत्र लिखिए।
उत्तर: जब किसी प्रतिरोधक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके प्रतिरोध के कारण विद्युत ऊर्जा का एक भाग ऊष्मा में बदल जाता है। इसे विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहते हैं। जूल के नियम के अनुसार उत्पन्न ऊष्मा H = I²Rt होती है। इससे स्पष्ट है कि समान प्रतिरोध और समय के लिए ऊष्मा धारा के वर्ग के समानुपाती होती है। विद्युत इस्तरी, हीटर, टोस्टर और विद्युत बल्ब जैसे उपकरणों में इस प्रभाव का उपयोग होता है।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- विद्युत धारा की परिभाषा एवं SI मात्रक लिखिए।
- विद्युत विभव और विभवांतर को समझाइए।
- ओम के नियम को लिखकर समझाइए।
- ओम के नियम का प्रयोग द्वारा सत्यापन कीजिए।
- विद्युत प्रतिरोध क्या है?
- प्रतिरोध किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
- प्रतिरोधकता क्या है? इसका SI मात्रक लिखिए।
- श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध का सूत्र प्राप्त कीजिए।
- समान्तर क्रम में जुड़े प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध का सूत्र प्राप्त कीजिए।
- श्रेणीक्रम और समान्तर क्रम में अंतर बताइए।
- घरेलू विद्युत परिपथ में उपकरणों को समान्तर क्रम में क्यों जोड़ा जाता है?
- विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव को समझाइए।
- जूल के नियम का सूत्र लिखिए।
- विद्युत शक्ति क्या है? इसके विभिन्न सूत्र लिखिए।
- विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई क्या है?
- एक किलोवाट-घंटा को जूल में व्यक्त कीजिए।
- विद्युत बल्ब का सिद्धांत और कार्यविधि समझाइए।
- विद्युत बल्ब में टंगस्टन का उपयोग क्यों किया जाता है?
- विद्युत ऊर्जा की खपत और बिजली के बिल में यूनिट का अर्थ समझाइए।
- विद्युत से संबंधित संख्यात्मक प्रश्नों में ओम के नियम और शक्ति के सूत्रों का प्रयोग कीजिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर है।
- विद्युत आवेश का SI मात्रक कूलॉम है।
- विभवांतर का SI मात्रक वोल्ट है।
- प्रतिरोध का SI मात्रक ओम है।
- ओम का नियम V = IR है।
- प्रतिरोध R = V/I होता है।
- प्रतिरोध R = ρl/A होता है।
- प्रतिरोधकता का SI मात्रक Ω m है।
- श्रेणीक्रम में प्रतिरोधों में धारा समान होती है।
- समान्तर क्रम में प्रतिरोधों के सिरों पर विभवांतर समान होता है।
- श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।
- समान्तर क्रम में तुल्य प्रतिरोध सामान्यतः सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
- विद्युत शक्ति P = VI = I²R = V²/R होती है।
- विद्युत ऊर्जा E = Pt होती है।
- विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई kWh है।
- 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J होता है।
- विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव में H = I²Rt होता है।
- विद्युत बल्ब विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित है।
- बल्ब के फिलामेंट में टंगस्टन का उपयोग किया जाता है।
- घरेलू उपकरण सामान्यतः समान्तर क्रम में जोड़े जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 12 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 12 “विद्युत” है। - प्रश्न: विद्युत धारा का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर है। - प्रश्न: ओम का नियम क्या है?
उत्तर: नियत तापमान पर किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है। इसका सूत्र V = IR है। - प्रश्न: प्रतिरोध का SI मात्रक क्या है?
उत्तर: प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है। - प्रश्न: प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: प्रतिरोध चालक की लंबाई, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल, पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है। - प्रश्न: घरों में विद्युत उपकरण समान्तर क्रम में क्यों जोड़े जाते हैं?
उत्तर: क्योंकि समान्तर क्रम में प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर मिलता है और किसी एक उपकरण को बंद करने पर दूसरे उपकरणों पर सामान्यतः इसका प्रभाव नहीं पड़ता। - प्रश्न: विद्युत शक्ति का सूत्र क्या है?
उत्तर: विद्युत शक्ति P = VI, P = I²R तथा P = V²/R से प्राप्त की जा सकती है। - प्रश्न: विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई क्या है?
उत्तर: विद्युत ऊर्जा की व्यावसायिक इकाई किलोवाट-घंटा (kWh) है, जिसे सामान्यतः एक यूनिट कहा जाता है। - प्रश्न: 1 यूनिट विद्युत ऊर्जा कितनी होती है?
उत्तर: 1 यूनिट = 1 kWh = 3.6 × 10⁶ J होती है। - प्रश्न: विद्युत बल्ब का फिलामेंट टंगस्टन का क्यों बनाया जाता है?
उत्तर: टंगस्टन का गलनांक बहुत अधिक होता है और यह उच्च तापमान पर गर्म होकर प्रकाश दे सकता है, इसलिए बल्ब के फिलामेंट के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12)
“विद्युत” अध्याय में विद्युत धारा और परिपथ से लेकर प्रतिरोध, ओम के नियम, प्रतिरोधों के संयोजन, विद्युत शक्ति और ऊर्जा तक की महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय दैनिक जीवन में विद्युत के उपयोग को वैज्ञानिक आधार पर समझने में सहायता करता है।
परीक्षा की दृष्टि से ओम का नियम, प्रतिरोध के कारक, श्रेणीक्रम और समान्तर क्रम में प्रतिरोधों का संयोजन, जूल का ऊष्मीय नियम, विद्युत शक्ति तथा विद्युत ऊर्जा के सूत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों को इन सूत्रों के साथ संख्यात्मक प्रश्नों का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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