अम्ल, क्षारक एवं लवण – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 2 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर

13 August 2026  |  By Ramnivas KT

Table of Contents

प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 2)

“अम्ल, क्षारक एवं लवण” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के रसायन विज्ञान खंड का दूसरा अध्याय है। यह अध्याय हमारे दैनिक जीवन में पाए जाने वाले अनेक पदार्थों के अम्लीय, क्षारीय और लवणीय गुणों को समझने का आधार प्रदान करता है। नींबू का रस, सिरका, दही, साबुन, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा और नमक जैसे पदार्थ हमारे आसपास आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन इनके रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं। इस अध्याय में इन्हीं गुणों को वैज्ञानिक दृष्टि से समझाया गया है।

इस अध्याय में विद्यार्थी अम्ल और क्षारक की पहचान, सूचक पदार्थों का उपयोग, अम्ल एवं क्षार की रासायनिक अभिक्रियाएँ, pH स्केल, उदासीनीकरण अभिक्रिया तथा अम्ल और क्षारक की जल में भूमिका का अध्ययन करते हैं। इसके साथ ही लवणों के निर्माण, उनके महत्वपूर्ण उपयोग तथा बेकिंग सोडा, धोने का सोडा, ब्लीचिंग पाउडर और प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसे महत्वपूर्ण यौगिकों के निर्माण एवं उपयोग को भी समझाया जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें परिभाषा, रासायनिक समीकरण, pH से संबंधित प्रश्न, सूचक, अम्ल-धातु अभिक्रिया, उदासीनीकरण, लवणों के उपयोग और विभिन्न यौगिकों के निर्माण से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को केवल परिभाषाएँ याद करने के बजाय प्रत्येक अवधारणा को उदाहरण और रासायनिक समीकरण के साथ समझना चाहिए।

अम्ल क्या हैं?

वे पदार्थ जो जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन उत्पन्न करते हैं, अम्ल कहलाते हैं। जल में अम्ल घुलने पर हाइड्रोजन आयन सीधे स्वतंत्र अवस्था में नहीं रहते, बल्कि जल के अणुओं के साथ मिलकर हाइड्रोनियम आयन का निर्माण करते हैं।

उदाहरण के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जल में घुलकर हाइड्रोनियम आयन बनाता है:

HCl + H2O → H3O+ + Cl

इसी प्रकार अम्लीय पदार्थों के जलीय विलयन में हाइड्रोनियम आयनों की उपस्थिति उनके अम्लीय गुणों का प्रमुख कारण होती है। नींबू और संतरे जैसे खट्टे फलों में उपस्थित अम्ल उन्हें खट्टा स्वाद प्रदान करते हैं।

क्षारक क्या हैं?

वे पदार्थ जो जल में घुलने पर हाइड्रॉक्साइड आयन उत्पन्न करते हैं, क्षारक कहलाते हैं। कुछ क्षारक जल में घुलनशील होते हैं। ऐसे घुलनशील क्षारकों को सामान्यतः क्षार कहा जाता है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

सोडियम हाइड्रॉक्साइड जल में आयनों में विभाजित होकर हाइड्रॉक्साइड आयन देता है:

NaOH → Na+ + OH

क्षारकीय विलयन सामान्यतः स्पर्श करने पर साबुन जैसे चिकने लग सकते हैं और लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं। हालांकि किसी पदार्थ की पहचान केवल स्पर्श या स्वाद से नहीं करनी चाहिए, क्योंकि प्रयोगशाला में कई अम्ल और क्षारक संक्षारक हो सकते हैं।

अम्ल और क्षारक की पहचान

अम्ल और क्षारक की पहचान करने के लिए सूचकों का उपयोग किया जाता है। सूचक ऐसे पदार्थ होते हैं जो अम्लीय या क्षारीय माध्यम में अपना रंग बदलते हैं। लिटमस, मिथाइल ऑरेंज और फिनॉल्फ्थेलीन प्रमुख सूचक हैं। सार्वत्रिक सूचक का उपयोग किसी विलयन की अम्लीयता या क्षारीयता का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।

लिटमस

अम्लीय विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है, जबकि क्षारीय विलयन लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है। इसलिए लिटमस अम्ल और क्षारक की प्रारंभिक पहचान के लिए उपयोगी सूचक है।

फिनॉल्फ्थेलीन

फिनॉल्फ्थेलीन अम्लीय माध्यम में सामान्यतः रंगहीन रहता है, जबकि क्षारीय माध्यम में गुलाबी रंग दिखाई देता है।

मिथाइल ऑरेंज

मिथाइल ऑरेंज अम्लीय माध्यम में लाल रंग तथा क्षारीय माध्यम में पीला रंग प्रदर्शित करता है।

अम्ल धातु के साथ अभिक्रिया कैसे करते हैं?

कई अम्ल सक्रिय धातुओं के साथ अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाते हैं। उदाहरण के लिए जिंक की तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया में जिंक सल्फेट और हाइड्रोजन गैस बनती है।

Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2

इस अभिक्रिया में निकलने वाली हाइड्रोजन गैस की पहचान ज्वाला परीक्षण से की जा सकती है। हाइड्रोजन गैस के पास जलती हुई तीली ले जाने पर विशिष्ट ध्वनि के साथ गैस जलती है।

अलग-अलग धातुओं की अम्लों के साथ अभिक्रियाशीलता अलग हो सकती है। इसलिए सभी धातुएँ सभी अम्लों के साथ समान गति से अभिक्रिया नहीं करतीं।

अम्ल धातु कार्बोनेट और हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ

अम्ल धातु कार्बोनेट तथा हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं। यही कारण है कि कार्बोनेट या हाइड्रोजनकार्बोनेट में अम्ल डालने पर बुलबुले निकलते दिखाई देते हैं।

उदाहरण के लिए सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया:

NaHCO3 + HCl → NaCl + H2O + CO2

इस अभिक्रिया में उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड गैस को चूने के पानी में प्रवाहित करने पर वह दूधिया हो जाता है।

Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O

अम्ल धातु के ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया

धातु के ऑक्साइड सामान्यतः क्षारकीय प्रकृति के होते हैं। जब कोई अम्ल धातु के ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, तो सामान्यतः लवण और जल बनते हैं।

उदाहरण:

CuO + 2HCl → CuCl2 + H2O

इस अभिक्रिया में कॉपर ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके कॉपर क्लोराइड और जल बनाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अम्ल और धातु ऑक्साइड की अभिक्रिया में उदासीनीकरण जैसी प्रक्रिया देखी जा सकती है।

क्षारक अम्ल के साथ कैसे अभिक्रिया करते हैं?

जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो सामान्यतः लवण और जल बनते हैं। इस प्रकार की अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण:

HCl + NaOH → NaCl + H2O

इस अभिक्रिया में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया से सोडियम क्लोराइड और जल बनता है।

उदासीनीकरण अभिक्रिया का महत्व हमारे दैनिक जीवन में भी है। उदाहरण के लिए पेट में अतिरिक्त अम्लता होने पर उपयुक्त एंटासिड अम्ल को उदासीन करने में सहायता करता है।

अम्ल और क्षारक जल में क्यों प्रभावी होते हैं?

अम्ल और क्षारक के अनेक गुण उनके जलीय विलयन में आयनों की उपस्थिति से संबंधित होते हैं। अम्ल जल में हाइड्रोनियम आयन उत्पन्न करते हैं और क्षारक हाइड्रॉक्साइड आयन उत्पन्न करते हैं। यही आयन इनके अम्लीय और क्षारीय गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं।

इसी कारण शुष्क हाइड्रोजन क्लोराइड गैस सूखे लिटमस पत्र का रंग नहीं बदलती। जब HCl जल में घुलता है, तभी हाइड्रोनियम आयन की पर्याप्त उपस्थिति होती है और अम्लीय गुण स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन क्यों करता है?

अम्ल के जलीय विलयन में आयन उपस्थित होते हैं। ये गतिशील आयन विद्युत धारा के प्रवाह में सहायता करते हैं। इसलिए अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन कर सकता है। शुद्ध आसवित जल में आयनों की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए उसका विद्युत चालन बहुत कमजोर होता है।

प्रबल और दुर्बल अम्ल

जो अम्ल जल में अधिक मात्रा में आयनित होकर अधिक हाइड्रोनियम आयन उत्पन्न करते हैं, उन्हें प्रबल अम्ल कहा जाता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जैसे अम्ल इसके उदाहरण हैं। दूसरी ओर, जो अम्ल जल में पूर्ण रूप से आयनित नहीं होते और अपेक्षाकृत कम हाइड्रोनियम आयन उत्पन्न करते हैं, वे दुर्बल अम्ल कहलाते हैं। ऐसीटिक अम्ल इसका सामान्य उदाहरण है।

समान सांद्रता वाले प्रबल और दुर्बल अम्लों की अभिक्रियाशीलता समान नहीं होती। उदाहरण के लिए समान परिस्थितियों में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम के साथ ऐसीटिक अम्ल की अपेक्षा अधिक तेजी से अभिक्रिया कर सकता है।

pH स्केल

किसी जलीय विलयन की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति को संख्यात्मक रूप से व्यक्त करने के लिए pH स्केल का उपयोग किया जाता है। सामान्यतः pH का मान 0 से 14 के बीच माना जाता है।

pH का मान जितना कम होता है, विलयन की अम्लीय प्रकृति सामान्यतः उतनी अधिक होती है। इसी प्रकार pH का मान बढ़ने पर विलयन की क्षारीय प्रकृति बढ़ती जाती है। सार्वत्रिक सूचक की सहायता से विभिन्न विलयनों के pH का अनुमान लगाया जा सकता है।

दैनिक जीवन में pH का महत्व

pH की अवधारणा केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। हमारे शरीर, कृषि, मिट्टी, भोजन और पर्यावरण में pH का महत्वपूर्ण स्थान है। पेट में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन के पाचन में सहायता करता है। यदि पेट में अम्ल की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाए तो जलन और अम्लता जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे समय पर एंटासिड अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करने में सहायता करता है।

मिट्टी का pH पौधों की वृद्धि को प्रभावित करता है। अलग-अलग फसलों के लिए मिट्टी की उपयुक्त अम्लीयता या क्षारीयता अलग हो सकती है। इसलिए कृषि में मिट्टी के pH की जाँच उपयोगी होती है।

दाँतों का क्षय और pH

दाँतों की बाहरी परत मुख्यतः कैल्शियम यौगिकों से बनी होती है। मुख में भोजन के कणों पर सूक्ष्मजीवों की क्रिया से अम्ल बन सकते हैं। जब मुख का pH एक निश्चित स्तर से नीचे चला जाता है, तो दाँतों के खनिजों को नुकसान पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए नियमित रूप से दाँतों की सफाई करना और मौखिक स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

लवण क्या हैं?

अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया से बनने वाले यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग लवण है। सामान्य उदासीनीकरण अभिक्रिया में अम्ल और क्षारक मिलकर लवण तथा जल बनाते हैं। उदाहरण के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड से सोडियम क्लोराइड बनता है।

HCl + NaOH → NaCl + H2O

सोडियम क्लोराइड सामान्य खाने का नमक है और इसका उपयोग भोजन में स्वाद तथा संरक्षण सहित विभिन्न कार्यों में होता है।

साधारण नमक और उसके उपयोग

सोडियम क्लोराइड को सामान्य नमक या साधारण नमक कहा जाता है। यह समुद्री जल और कई प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जाता है। भोजन में इसका उपयोग सबसे सामान्य है, लेकिन रासायनिक उद्योग में भी यह अत्यंत महत्वपूर्ण कच्चा पदार्थ है। इससे सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन और हाइड्रोजन जैसे महत्वपूर्ण पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं।

क्लोर-क्षार प्रक्रिया

सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन का विद्युत अपघटन करने पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन और हाइड्रोजन प्राप्त होते हैं। इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहा जाता है। इसका रासायनिक समीकरण है:

2NaCl + 2H2O → 2NaOH + Cl2 + H2

इस प्रक्रिया से प्राप्त उत्पाद उद्योगों में अनेक उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सोडियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग साबुन, कागज और कृत्रिम रेशों के निर्माण में किया जाता है। क्लोरीन का उपयोग जल को जीवाणुरहित करने तथा विभिन्न रासायनिक पदार्थ बनाने में किया जाता है।

ब्लीचिंग पाउडर

ब्लीचिंग पाउडर को विरंजक चूर्ण भी कहा जाता है। इसे सामान्यतः कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड के रूप में दर्शाया जाता है और इसका सूत्र CaOCl2 लिखा जाता है। इसका निर्माण सूखे बुझा हुआ चूना अर्थात कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड पर क्लोरीन की क्रिया से किया जाता है।

Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O

ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग वस्त्रों, कागज की लुगदी आदि को विरंजित करने तथा पेयजल को जीवाणुरहित करने में किया जाता है। इसके ऑक्सीकरण गुण के कारण इसका उपयोग कई स्थानों पर उपयोगी होता है।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट है और इसका सूत्र NaHCO3 है। यह एक महत्वपूर्ण लवण है जिसका उपयोग भोजन बनाने और कई घरेलू तथा औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।

बेकिंग सोडा को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट, जल और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं:

2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2

बेकिंग पाउडर में बेकिंग सोडा के साथ एक हल्का अम्लीय पदार्थ भी उपस्थित होता है। गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनने के कारण आटा या केक फूलता है। बेकिंग सोडा का उपयोग सोडा-अम्ल अग्निशामक में भी किया जाता है।

धावन सोडा

धावन सोडा का रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट है और इसका सूत्र Na2CO3·10H2O है। इसे सामान्यतः कपड़े धोने के सोडा के रूप में जाना जाता है। इसका उपयोग काँच, साबुन और कागज उद्योग में किया जाता है।

धावन सोडा का उपयोग कठोर जल को मृदु करने में भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त यह कई अन्य सोडियम यौगिकों के निर्माण में उपयोगी है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस

जिप्सम को नियंत्रित ताप पर गर्म करने से प्लास्टर ऑफ पेरिस प्राप्त किया जाता है। इसका रासायनिक सूत्र सामान्यतः CaSO4·½H2O लिखा जाता है। इसे जल के साथ मिलाने पर यह पुनः जिप्सम में बदलता है और कुछ समय में कठोर हो जाता है।

CaSO4·½H2O + 1½H2O → CaSO4·2H2O

प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग चिकित्सा में टूटी हुई हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने, मूर्तियाँ बनाने, सजावटी वस्तुएँ तैयार करने तथा साँचे बनाने में किया जाता है।

जल की कठोरता और लवण

जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम के कुछ घुलनशील लवण उपस्थित होने के कारण जल कठोर हो सकता है। कठोर जल में साबुन आसानी से झाग नहीं बनाता। धावन सोडा जैसे पदार्थ कठोर जल को मृदु बनाने में उपयोगी हो सकते हैं क्योंकि वे कुछ कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों को अघुलनशील यौगिकों के रूप में अलग करने में सहायता करते हैं।

अम्ल, क्षारक और लवण के महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. अम्ल नीले लिटमस पत्र को किस रंग में बदलते हैं?

    (a) नीला (b) लाल (c) हरा (d) पीला

    उत्तर: (b) लाल
  2. क्षारीय विलयन लाल लिटमस को किस रंग में बदलता है?

    (a) लाल (b) पीला (c) नीला (d) रंगहीन

    उत्तर: (c) नीला
  3. फिनॉल्फ्थेलीन क्षारीय माध्यम में सामान्यतः किस रंग की होती है?

    (a) गुलाबी (b) लाल (c) पीली (d) रंगहीन

    उत्तर: (a) गुलाबी
  4. अम्ल और धातु की अभिक्रिया में सामान्यतः कौन-सी गैस निकलती है?

    (a) ऑक्सीजन (b) नाइट्रोजन (c) हाइड्रोजन (d) कार्बन डाइऑक्साइड

    उत्तर: (c) हाइड्रोजन
  5. अम्ल और धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया से कौन-सी गैस निकलती है?

    (a) H2 (b) O2 (c) CO2 (d) Cl2

    उत्तर: (c) CO2
  6. उदासीनीकरण अभिक्रिया में सामान्यतः क्या बनता है?

    (a) केवल गैस (b) लवण और जल (c) केवल अम्ल (d) केवल क्षार

    उत्तर: (b) लवण और जल
  7. उदासीन विलयन का pH कितना होता है?

    (a) 1 (b) 5 (c) 7 (d) 14

    उत्तर: (c) 7
  8. pH 4 वाला विलयन कैसा होगा?

    (a) अम्लीय (b) क्षारीय (c) उदासीन (d) इनमें से कोई नहीं

    उत्तर: (a) अम्लीय
  9. pH 10 वाला विलयन कैसा होगा?

    (a) अम्लीय (b) क्षारीय (c) उदासीन (d) केवल जल

    उत्तर: (b) क्षारीय
  10. बेकिंग सोडा का रासायनिक सूत्र क्या है?

    (a) NaCl (b) NaHCO3 (c) Na2CO3 (d) CaCO3

    उत्तर: (b) NaHCO3
  11. ब्लीचिंग पाउडर का सूत्र क्या है?

    (a) CaOCl2 (b) NaCl (c) CaCO3 (d) NaHCO3

    उत्तर: (a) CaOCl2
  12. धावन सोडा का सूत्र क्या है?

    (a) NaHCO3 (b) Na2CO3·10H2O (c) NaCl (d) CaSO4

    उत्तर: (b) Na2CO3·10H2O
  13. प्लास्टर ऑफ पेरिस किससे प्राप्त किया जाता है?

    (a) चूना पत्थर (b) जिप्सम (c) नमक (d) ब्लीचिंग पाउडर

    उत्तर: (b) जिप्सम
  14. अम्लीय विलयन में किस आयन की उपस्थिति प्रमुख होती है?

    (a) OH (b) H3O+ (c) Na+ (d) Cl

    उत्तर: (b) H3O+
  15. क्षारकीय विलयन में कौन-सा आयन उपस्थित होता है?

    (a) H3O+ (b) OH (c) Cl (d) CO2

    उत्तर: (b) OH

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: अम्ल किसे कहते हैं?

    उत्तर: वे पदार्थ जो जलीय विलयन में हाइड्रोनियम आयन उत्पन्न करते हैं, अम्ल कहलाते हैं।
  2. प्रश्न: क्षारक किसे कहते हैं?

    उत्तर: वे पदार्थ जो जल में हाइड्रॉक्साइड आयन उत्पन्न करते हैं, क्षारक कहलाते हैं।
  3. प्रश्न: pH 7 किस प्रकार के विलयन को दर्शाता है?

    उत्तर: pH 7 सामान्यतः उदासीन विलयन को दर्शाता है।
  4. प्रश्न: बेकिंग सोडा का रासायनिक सूत्र क्या है?

    उत्तर: बेकिंग सोडा का सूत्र NaHCO3 है।
  5. प्रश्न: ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक सूत्र क्या है?

    उत्तर: ब्लीचिंग पाउडर का सूत्र CaOCl2 है।
  6. प्रश्न: धावन सोडा का सूत्र क्या है?

    उत्तर: धावन सोडा का सूत्र Na2CO3·10H2O है।
  7. प्रश्न: उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है?

    उत्तर: अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया से लवण और जल बनने की प्रक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है।
  8. प्रश्न: प्लास्टर ऑफ पेरिस का मुख्य उपयोग क्या है?

    उत्तर: इसका उपयोग चिकित्सा में हड्डियों पर प्लास्टर, साँचे, मॉडल तथा सजावटी वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन क्यों करता है?

    उत्तर: अम्ल जल में घुलकर आयन उत्पन्न करते हैं। इन गतिशील आयनों के कारण जलीय अम्लीय विलयन विद्युत का चालन करता है।
  2. प्रश्न: शुष्क HCl गैस शुष्क लिटमस पत्र का रंग क्यों नहीं बदलती?

    उत्तर: अम्लीय गुणों के लिए जल की उपस्थिति में हाइड्रोनियम आयनों का बनना आवश्यक है। शुष्क HCl गैस और शुष्क लिटमस में पर्याप्त जल नहीं होने के कारण अम्लीयता का प्रभाव दिखाई नहीं देता।
  3. प्रश्न: अम्ल और धातु की अभिक्रिया में कौन-सी गैस निकलती है? उदाहरण दीजिए।

    उत्तर: सक्रिय धातुओं के साथ अम्ल की अभिक्रिया में सामान्यतः हाइड्रोजन गैस निकलती है। उदाहरण: Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2
  4. प्रश्न: अम्ल और धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया में कौन-कौन से पदार्थ बनते हैं?

    उत्तर: अम्ल और धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया में सामान्यतः लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं।
  5. प्रश्न: pH स्केल का क्या महत्व है?

    उत्तर: pH स्केल किसी विलयन की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति को संख्यात्मक रूप से व्यक्त करता है। pH 7 उदासीन, 7 से कम अम्लीय तथा 7 से अधिक क्षारीय विलयन को दर्शाता है।
  6. प्रश्न: दाँतों के क्षय में pH की क्या भूमिका है?

    उत्तर: मुख का pH अधिक अम्लीय होने पर दाँतों के खनिजों को नुकसान पहुँच सकता है। इसलिए दाँतों की नियमित सफाई और मौखिक स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।
  7. प्रश्न: बेकिंग सोडा का एक महत्वपूर्ण उपयोग बताइए।

    उत्तर: बेकिंग सोडा का उपयोग बेकिंग पाउडर बनाने और सोडा-अम्ल अग्निशामक में किया जाता है।
  8. प्रश्न: ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग क्यों किया जाता है?

    उत्तर: ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग विरंजन तथा जल को जीवाणुरहित करने के लिए किया जाता है।
  9. प्रश्न: धावन सोडा का उपयोग क्या है?

    उत्तर: इसका उपयोग काँच, साबुन और कागज उद्योग में तथा कठोर जल को मृदु करने में किया जाता है।
  10. प्रश्न: प्लास्टर ऑफ पेरिस जल के साथ क्या करता है?

    उत्तर: प्लास्टर ऑफ पेरिस जल के साथ अभिक्रिया करके जिप्सम में बदलता है और कठोर होकर जम जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: अम्ल और क्षारक के प्रमुख गुणों को उदाहरण सहित समझाइए।

    उत्तर: अम्ल जलीय विलयन में हाइड्रोनियम आयन उत्पन्न करते हैं और सामान्यतः नीले लिटमस को लाल करते हैं। वे सक्रिय धातुओं के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस तथा लवण बना सकते हैं। धातु कार्बोनेट और हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ उनकी अभिक्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। दूसरी ओर क्षारक जल में हाइड्रॉक्साइड आयन उत्पन्न करते हैं और लाल लिटमस को नीला करते हैं। अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया से सामान्यतः लवण तथा जल बनते हैं। इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहा जाता है।
  2. प्रश्न: pH स्केल क्या है? दैनिक जीवन में इसका महत्व समझाइए।

    उत्तर: pH स्केल किसी जलीय विलयन की अम्लीयता या क्षारीयता को व्यक्त करने का पैमाना है। सामान्यतः pH 7 को उदासीन माना जाता है। इससे कम pH अम्लीय तथा इससे अधिक pH क्षारीय प्रकृति को दर्शाता है। pH का महत्व हमारे शरीर, पाचन, दाँतों, कृषि और पर्यावरण में है। पेट में अम्ल पाचन में सहायता करता है, जबकि अत्यधिक अम्लता को उपयुक्त एंटासिड द्वारा कम किया जा सकता है। मिट्टी का pH पौधों की वृद्धि को प्रभावित करता है।
  3. प्रश्न: ब्लीचिंग पाउडर का निर्माण, गुण और उपयोग लिखिए।

    उत्तर: ब्लीचिंग पाउडर को सूखे बुझा हुआ चूना पर क्लोरीन की क्रिया से तैयार किया जाता है। इसका सूत्र CaOCl2 लिखा जाता है। यह विरंजन गुण रखता है और जल को जीवाणुरहित करने में भी उपयोगी है। इसका उपयोग वस्त्रों और कागज की लुगदी के विरंजन तथा पेयजल के उपचार में किया जाता है। इसका निर्माण समीकरण है: Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O।
  4. प्रश्न: बेकिंग सोडा के निर्माण और उपयोग का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट है और इसका सूत्र NaHCO3 है। इसका उपयोग बेकिंग पाउडर में किया जाता है, जिससे गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनती है और खाद्य पदार्थ फूलते हैं। इसका उपयोग सोडा-अम्ल अग्निशामक में भी किया जाता है। गर्म करने पर यह सोडियम कार्बोनेट, जल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदलता है: 2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2
  5. प्रश्न: धावन सोडा क्या है? इसके प्रमुख उपयोग बताइए।

    उत्तर: धावन सोडा सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट है और इसका सूत्र Na2CO3·10H2O है। इसका उपयोग कपड़े धोने, कठोर जल को मृदु करने तथा काँच, साबुन और कागज उद्योग में किया जाता है। यह कई अन्य सोडियम यौगिकों के निर्माण में भी उपयोगी है।
  6. प्रश्न: प्लास्टर ऑफ पेरिस क्या है? इसके उपयोग लिखिए।

    उत्तर: जिप्सम को नियंत्रित ताप पर गर्म करने से प्लास्टर ऑफ पेरिस प्राप्त होता है। इसका सूत्र CaSO4·½H2O है। जल मिलाने पर यह पुनः जिप्सम में बदलकर कठोर हो जाता है। इसका उपयोग टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने, साँचे और मॉडल बनाने तथा मूर्तियाँ और सजावटी वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।

परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 2 कौन-सा है?

    उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 2 “अम्ल, क्षारक एवं लवण” है।
  2. प्रश्न: अम्ल नीले लिटमस को किस रंग में बदलता है?

    उत्तर: अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है।
  3. प्रश्न: pH 7 का क्या अर्थ है?

    उत्तर: pH 7 सामान्यतः उदासीन विलयन को दर्शाता है।
  4. प्रश्न: अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया को क्या कहते हैं?

    उत्तर: अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
  5. प्रश्न: बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम क्या है?

    उत्तर: बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट है।
  6. प्रश्न: ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक सूत्र क्या है?

    उत्तर: ब्लीचिंग पाउडर का सूत्र CaOCl2 है।
  7. प्रश्न: धावन सोडा का रासायनिक सूत्र क्या है?

    उत्तर: धावन सोडा का सूत्र Na2CO3·10H2O है।
  8. प्रश्न: प्लास्टर ऑफ पेरिस किससे बनाया जाता है?

    उत्तर: प्लास्टर ऑफ पेरिस जिप्सम को नियंत्रित ताप पर गर्म करके बनाया जाता है।
  9. प्रश्न: अम्ल और धातु की अभिक्रिया में कौन-सी गैस निकलती है?

    उत्तर: सक्रिय धातुओं के साथ अम्ल की अभिक्रिया में सामान्यतः हाइड्रोजन गैस निकलती है।
  10. प्रश्न: अम्ल और धातु कार्बोनेट की अभिक्रिया में कौन-सी गैस निकलती है?

    उत्तर: इस अभिक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।

निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 2)

“अम्ल, क्षारक एवं लवण” BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें अम्ल और क्षारक के गुणों से लेकर सूचक, pH स्केल, उदासीनीकरण अभिक्रिया तथा विभिन्न महत्वपूर्ण लवणों का अध्ययन किया जाता है। बेकिंग सोडा, धावन सोडा, ब्लीचिंग पाउडर और प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसे यौगिकों के गुण एवं उपयोग इस अध्याय को दैनिक जीवन से जोड़ते हैं।

परीक्षा की तैयारी करते समय विद्यार्थियों को अम्ल और क्षारक की परिभाषा, pH स्केल, महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण, उदासीनीकरण, ब्लीचिंग पाउडर, बेकिंग सोडा, धावन सोडा तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस से संबंधित प्रश्नों का विशेष अभ्यास करना चाहिए। साथ ही रासायनिक सूत्र और समीकरणों को सही ढंग से लिखना भी आवश्यक है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

Leave a Reply