धातु एवं अधातु – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3)
“धातु एवं अधातु” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के रसायन विज्ञान खंड का तीसरा अध्याय है। हमारे दैनिक जीवन में धातुओं और अधातुओं का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। लोहे से लेकर ताँबा, एल्युमिनियम, सोना और चाँदी तक अनेक धातुओं का उपयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता है। इसी प्रकार ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, कार्बन और क्लोरीन जैसे अधातु भी हमारे जीवन और उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस अध्याय में धातुओं और अधातुओं के भौतिक तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन किया जाता है। इसके साथ ही यह समझाया जाता है कि धातुएँ जल, ऑक्सीजन और अम्लों के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती हैं तथा विभिन्न धातुओं की अभिक्रियाशीलता में अंतर क्यों होता है। अध्याय का एक महत्वपूर्ण भाग धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी है, जिसकी सहायता से विस्थापन अभिक्रियाओं और धातुओं के निष्कर्षण को समझना आसान होता है।
इस अध्याय में आयनिक यौगिक, खनिज, अयस्क, धातुओं का निष्कर्षण, निस्तापन, भर्जन, प्रगलन, धातुओं का शोधन, संक्षारण और मिश्रधातुओं का भी अध्ययन किया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें परिभाषा, रासायनिक समीकरण, अभिक्रियाशीलता श्रेणी, धातु निष्कर्षण तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
धातु क्या हैं?
वे तत्व जिनमें सामान्यतः चमक, तन्यता, आघातवर्धनीयता और विद्युत तथा ऊष्मा के अच्छे चालक होने जैसे गुण पाए जाते हैं, धातु कहलाते हैं। लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम, सोना, चाँदी, जस्ता और मैग्नीशियम धातुओं के प्रमुख उदाहरण हैं।
धातुओं का उपयोग उनके विशेष गुणों के कारण अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। ताँबा और एल्युमिनियम विद्युत के तार बनाने में उपयोगी हैं, लोहा और उसकी मिश्रधातुएँ भवन तथा मशीन निर्माण में काम आती हैं, जबकि सोना और चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने में किया जाता है।
अधातु क्या हैं?
वे तत्व जिनमें सामान्यतः धातुओं के विपरीत गुण पाए जाते हैं, अधातु कहलाते हैं। ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, फॉस्फोरस, क्लोरीन और कार्बन अधातुओं के उदाहरण हैं। अधिकांश अधातु विद्युत और ऊष्मा के कुचालक होते हैं, हालांकि ग्रेफाइट इसका महत्वपूर्ण अपवाद है।
अधातुओं का भी जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। ऑक्सीजन श्वसन के लिए आवश्यक है, नाइट्रोजन पौधों के पोषण में महत्वपूर्ण है और क्लोरीन का उपयोग जल को जीवाणुरहित करने में किया जाता है।
धातुओं के भौतिक गुण
धातुओं में कई सामान्य भौतिक गुण पाए जाते हैं। हालांकि सभी धातुओं में प्रत्येक गुण समान रूप से नहीं पाया जाता। कुछ प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:
- चमक: अधिकांश धातुओं की सतह चमकीली होती है।
- आघातवर्धनीयता: धातुओं को पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है।
- तन्यता: धातुओं को खींचकर तार बनाया जा सकता है।
- विद्युत चालकता: अधिकांश धातुएँ विद्युत की अच्छी चालक होती हैं।
- ऊष्मा चालकता: धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं।
- ध्वानिकता: धातुओं को चोट करने पर ध्वनि उत्पन्न होती है।
- कठोरता: अनेक धातुएँ कठोर होती हैं, हालांकि कुछ धातुएँ अपेक्षाकृत नरम होती हैं।
धातुओं के कुछ अपवाद भी हैं। उदाहरण के लिए पारा कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है। सोडियम और पोटैशियम जैसी धातुएँ अपेक्षाकृत नरम होती हैं और उन्हें चाकू से काटा जा सकता है।
अधातुओं के भौतिक गुण
अधातुओं के भौतिक गुण सामान्यतः धातुओं से भिन्न होते हैं। अधिकांश अधातु चमकहीन और भंगुर होते हैं तथा विद्युत और ऊष्मा के कुचालक होते हैं। हालांकि इनके भी कुछ महत्वपूर्ण अपवाद हैं। आयोडीन चमकीला अधातु है और ग्रेफाइट विद्युत का चालक है।
- अधिकांश अधातु चमकहीन होते हैं।
- अधातु सामान्यतः भंगुर होते हैं।
- अधिकांश अधातु विद्युत के कुचालक होते हैं।
- अधातुओं के गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः धातुओं की तुलना में कम हो सकते हैं।
- अधातु ठोस, द्रव या गैस तीनों अवस्थाओं में पाए जा सकते हैं।
धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कैसे करते हैं?
धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः धातु ऑक्साइड बनाती हैं। अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं। उदाहरण के लिए मैग्नीशियम ऑक्सीजन में जलने पर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।
2Mg + O2 → 2MgO
मैग्नीशियम ऑक्साइड जल के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड बना सकता है:
MgO + H2O → Mg(OH)2
कुछ धातु ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं। एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं।
अधातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया
अधातु भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड बनाते हैं। अधातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः अम्लीय या उदासीन प्रकृति के होते हैं। उदाहरण के लिए कार्बन ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।
C + O2 → CO2
सल्फर ऑक्सीजन में जलने पर सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है:
S + O2 → SO2
सल्फर डाइऑक्साइड जल में घुलकर अम्लीय विलयन बना सकता है। इसलिए अधातु ऑक्साइडों की प्रकृति धातु ऑक्साइडों से सामान्यतः अलग होती है।
धातु जल के साथ अभिक्रिया
विभिन्न धातुओं की जल के साथ अभिक्रियाशीलता अलग-अलग होती है। कुछ धातुएँ ठंडे जल के साथ भी तीव्र अभिक्रिया करती हैं, जबकि कुछ केवल गर्म जल या भाप के साथ अभिक्रिया करती हैं।
सोडियम और पोटैशियम जल के साथ बहुत तीव्र अभिक्रिया करते हैं। कैल्शियम भी जल के साथ अभिक्रिया करके कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन बनाता है।
Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2
मैग्नीशियम गर्म जल के साथ अपेक्षाकृत धीमी गति से अभिक्रिया करता है। लोहा भाप के साथ अभिक्रिया कर सकता है:
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2
ताँबा सामान्य परिस्थितियों में जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता। इससे स्पष्ट होता है कि धातुओं की जल के प्रति अभिक्रियाशीलता समान नहीं होती।
धातु अम्ल के साथ अभिक्रिया
जो धातुएँ हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील होती हैं, वे सामान्यतः तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। उदाहरण के लिए जिंक की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया:
Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2↑
इसी प्रकार आयरन की तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से आयरन सल्फेट और हाइड्रोजन बनते हैं:
Fe + H2SO4 → FeSO4 + H2↑
ताँबा जैसे कम अभिक्रियाशील धातु सामान्यतः तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करते। इसलिए धातु की अम्ल के साथ अभिक्रिया उसकी सक्रियता पर निर्भर करती है।
विस्थापन अभिक्रिया
जब कोई अधिक अभिक्रियाशील धातु किसी कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित करती है, तो ऐसी अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण के लिए जिंक, कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है। इसलिए जिंक कॉपर सल्फेट के विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है:
Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu
इस अभिक्रिया में जिंक विलयन में घुलकर जिंक सल्फेट बनाता है और कॉपर अलग होकर प्राप्त होता है। विस्थापन अभिक्रियाओं के अध्ययन से धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलता की तुलना की जा सकती है।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी
धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर प्राप्त सूची को अभिक्रियाशीलता श्रेणी कहते हैं। इस श्रेणी की सहायता से यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सी धातु दूसरी धातु को उसके यौगिक से विस्थापित कर सकती है।
कक्षा 10 के स्तर पर सामान्य अभिक्रियाशीलता श्रेणी इस प्रकार याद की जा सकती है:
K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
श्रेणी में ऊपर स्थित धातुएँ सामान्यतः अधिक अभिक्रियाशील होती हैं, जबकि नीचे की धातुएँ कम अभिक्रियाशील होती हैं। हाइड्रोजन स्वयं धातु नहीं है, लेकिन इसकी स्थिति धातुओं की अम्लों से अभिक्रिया को समझने में उपयोगी होती है।
आयनिक यौगिक
धातु और अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बनने वाले यौगिकों को सामान्यतः आयनिक यौगिक कहा जाता है। धातु इलेक्ट्रॉन त्याग करके धनायन बनाती है, जबकि अधातु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती है। विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच वैद्युतस्थैतिक आकर्षण से आयनिक यौगिक का निर्माण होता है।
उदाहरण के लिए सोडियम और क्लोरीन से सोडियम क्लोराइड का निर्माण होता है। सोडियम एक इलेक्ट्रॉन त्याग करके Na+ बनाता है और क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl− बनाता है।
Na → Na+ + e−
Cl + e− → Cl−
आयनिक यौगिकों के गुण
आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के बीच मजबूत आकर्षण बल होता है। इसी कारण इनके गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं। ये सामान्यतः कठोर और भंगुर ठोस होते हैं।
- इनके गलनांक सामान्यतः अधिक होते हैं।
- ये कठोर लेकिन भंगुर हो सकते हैं।
- ठोस अवस्था में सामान्यतः विद्युत का चालन नहीं करते।
- गलित अवस्था या जलीय विलयन में विद्युत का चालन कर सकते हैं।
- कई आयनिक यौगिक जल में घुलनशील होते हैं।
खनिज और अयस्क
प्रकृति में पाए जाने वाले वे पदार्थ जिनमें धातु या उसके यौगिक उपस्थित होते हैं, खनिज कहलाते हैं। ऐसे खनिज जिनसे धातु का निष्कर्षण आर्थिक रूप से लाभदायक ढंग से किया जा सकता है, अयस्क कहलाते हैं।
अयस्क में धातु के यौगिक के साथ मिट्टी, बालू और अन्य अवांछित पदार्थ भी हो सकते हैं। धातु प्राप्त करने से पहले इन अशुद्धियों को अलग करना आवश्यक होता है।
धातुओं का निष्कर्षण
प्रकृति में अधिकांश धातुएँ स्वतंत्र अवस्था में नहीं बल्कि यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं। इसलिए अयस्क से धातु प्राप्त करने के लिए कई चरणों की आवश्यकता होती है। सामान्यतः धातु निष्कर्षण की प्रक्रिया में अयस्क का सांद्रण, धातु यौगिक में परिवर्तन, अपचयन और अंत में शोधन जैसे चरण शामिल होते हैं।
अयस्क का सांद्रण
अयस्क से मिट्टी, पत्थर और अन्य अशुद्धियों को अलग करके धातु यौगिक की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया को अयस्क का सांद्रण या शोधन कहा जाता है। इसके लिए अयस्क की प्रकृति के अनुसार विभिन्न भौतिक और रासायनिक विधियों का उपयोग किया जाता है।
निस्तापन
कार्बोनेट या जलयोजित अयस्क को सीमित या नियंत्रित वायु में गर्म करने की प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में अयस्क से कार्बन डाइऑक्साइड या जल निकल सकता है और धातु ऑक्साइड प्राप्त होता है।
उदाहरण के लिए:
ZnCO3 → ZnO + CO2
भर्जन
सल्फाइड अयस्क को अधिक मात्रा में वायु की उपस्थिति में गर्म करने की प्रक्रिया को भर्जन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में सल्फाइड अयस्क सामान्यतः धातु ऑक्साइड में बदलता है और सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकल सकती है।
उदाहरण:
2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2
अपचयन
धातु ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाकर मुक्त धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को अपचयन कहते हैं। कई धातुओं के निष्कर्षण में कार्बन या कार्बन मोनोऑक्साइड का उपयोग अपचायक के रूप में किया जाता है।
उदाहरण:
ZnO + C → Zn + CO
प्रगलन
अयस्क या धातु ऑक्साइड को उचित अपचायक और गालक के साथ उच्च ताप पर गर्म करके गलित धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को प्रगलन कहा जाता है। लोहे के निष्कर्षण में वात्या भट्ठी का महत्वपूर्ण उपयोग होता है।
गालक और धातुमल
अयस्क में उपस्थित अशुद्धियों को हटाने के लिए निष्कर्षण प्रक्रिया में एक उपयुक्त पदार्थ मिलाया जाता है जिसे गालक कहा जाता है। गालक अशुद्धियों के साथ अभिक्रिया करके एक गलनीय पदार्थ बनाता है, जिसे धातुमल कहते हैं।
उदाहरण के लिए लोहे के निष्कर्षण में सिलिका जैसी अशुद्धि को हटाने के लिए उपयुक्त गालक का प्रयोग किया जाता है। इससे बनने वाला धातुमल अलग हो जाता है और धातु को प्राप्त करना आसान होता है।
अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण
पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम जैसी अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं को उनके यौगिकों से सामान्य कार्बन अपचयन द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। इन धातुओं के निष्कर्षण में सामान्यतः उनके गलित यौगिकों का विद्युत अपघटन किया जाता है।
उदाहरण के लिए गलित सोडियम क्लोराइड के विद्युत अपघटन से सोडियम धातु प्राप्त की जा सकती है।
कम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण
कम अभिक्रियाशील धातुएँ कभी-कभी अपने अयस्कों से अपेक्षाकृत सरल विधियों द्वारा प्राप्त की जा सकती हैं। कुछ धातु ऑक्साइडों को गर्म करने पर ही धातु में परिवर्तित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए पारे के अयस्क से पारा प्राप्त करने में गर्म करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
सोने और चाँदी जैसी बहुत कम अभिक्रियाशील धातुएँ प्रकृति में कभी-कभी स्वतंत्र अवस्था में भी पाई जाती हैं।
लोहे का निष्कर्षण
लोहा मुख्यतः उसके ऑक्साइड अयस्कों से प्राप्त किया जाता है। लोहे के निष्कर्षण में वात्या भट्ठी का उपयोग किया जाता है। इसमें लौह अयस्क, कोक और चूना पत्थर जैसे पदार्थों को उपयुक्त परिस्थितियों में गर्म किया जाता है। कोक से बनने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड लौह ऑक्साइड का अपचयन करके लोहा बनाती है।
एक महत्वपूर्ण अभिक्रिया इस प्रकार है:
Fe2O3 + 3CO → 2Fe + 3CO2
चूना पत्थर से बनने वाला पदार्थ अशुद्धियों को धातुमल के रूप में अलग करने में सहायता करता है। इस प्रकार वात्या भट्ठी में प्राप्त कच्चा लोहा आगे विभिन्न प्रक्रियाओं से उपयोगी रूपों में बदला जाता है।
एल्युमिनियम का निष्कर्षण
एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क बॉक्साइट है। बॉक्साइट में एल्युमिनियम ऑक्साइड के साथ कई अशुद्धियाँ उपस्थित होती हैं। शुद्ध एल्युमिना प्राप्त करने के बाद उसका विद्युत अपघटन करके एल्युमिनियम धातु प्राप्त की जाती है।
एल्युमिना का गलनांक बहुत अधिक होने के कारण विद्युत अपघटन में क्रायोलाइट जैसे पदार्थ का उपयोग किया जाता है। इससे प्रक्रिया के लिए आवश्यक तापमान कम करने और विद्युत अपघटन को सुविधाजनक बनाने में सहायता मिलती है।
धातुओं का शोधन
निष्कर्षण के बाद प्राप्त धातु में कुछ अशुद्धियाँ रह सकती हैं। इन अशुद्धियों को हटाकर अधिक शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातु का शोधन कहते हैं। धातु की प्रकृति के अनुसार विभिन्न शोधन विधियाँ अपनाई जाती हैं।
ताँबे के शोधन के लिए विद्युत अपघटनी शोधन महत्वपूर्ण है। इसमें अशुद्ध ताँबे को एनोड और शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी को कैथोड बनाया जाता है। उचित विद्युत अपघटन के दौरान शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमा होता है और अशुद्धियाँ नीचे बैठकर एनोड मड का निर्माण कर सकती हैं।
संक्षारण क्या है?
वायु, नमी या अन्य रासायनिक पदार्थों की क्रिया के कारण धातु की सतह का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है। लोहे पर जंग लगना संक्षारण का सबसे सामान्य उदाहरण है।
लोहे पर जंग बनने के लिए ऑक्सीजन और नमी दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जंग लगने से लोहे की वस्तुओं की मजबूती और उपयोगिता कम हो सकती है। इसलिए लोहे को संक्षारण से बचाना आवश्यक है।
संक्षारण से बचाव के उपाय
धातुओं को संक्षारण से बचाने के लिए उनकी सतह को वायु और नमी के संपर्क से बचाया जाता है। इसके लिए कई विधियों का उपयोग किया जाता है:
- पेंट या वार्निश लगाना
- तेल या ग्रीस लगाना
- जस्तीकरण अर्थात जिंक की परत चढ़ाना
- विद्युत लेपन
- मिश्रधातु बनाना
लोहे पर जिंक की परत चढ़ाने की प्रक्रिया को जस्तीकरण कहते हैं। जिंक की परत लोहे को वायु और नमी से बचाने में सहायता करती है।
मिश्रधातु क्या है?
दो या दो से अधिक धातुओं अथवा किसी धातु और अधातु का समांगी मिश्रण मिश्रधातु कहलाता है। मिश्रधातु बनाने का उद्देश्य धातु के गुणों में आवश्यक सुधार करना होता है।
मिश्रधातुओं के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं:
- पीतल: ताँबा और जस्ता
- काँसा: ताँबा और टिन
- स्टील: मुख्यतः लोहा और कार्बन
- स्टेनलेस स्टील: लोहा, कार्बन, क्रोमियम आदि के आधार पर बनी मिश्रधातु
मिश्रधातुओं के गुण उनके घटक पदार्थों से अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए कुछ मिश्रधातुएँ अधिक कठोर, मजबूत और संक्षारण-रोधी होती हैं।
धातु एवं अधातु के रासायनिक गुणों में अंतर
| आधार | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| इलेक्ट्रॉन | सामान्यतः इलेक्ट्रॉन त्यागती हैं | सामान्यतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं |
| आयन | धनायन बनाती हैं | ऋणायन बना सकती हैं |
| ऑक्साइड | सामान्यतः क्षारीय ऑक्साइड | सामान्यतः अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड |
| अम्ल से अभिक्रिया | अधिक सक्रिय धातुएँ हाइड्रोजन विस्थापित कर सकती हैं | सामान्यतः ऐसी अभिक्रिया नहीं करतीं |
महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण
- 2Mg + O2 → 2MgO
- Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2
- 3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2
- Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2
- Fe + H2SO4 → FeSO4 + H2
- Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu
- C + O2 → CO2
- S + O2 → SO2
- ZnCO3 → ZnO + CO2
- 2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2
- Fe2O3 + 3CO → 2Fe + 3CO2
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाई जाने वाली धातु कौन-सी है?
(a) लोहा (b) पारा (c) ताँबा (d) जस्ता
उत्तर: (b) पारा - धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाने के गुण को क्या कहते हैं?
(a) तन्यता (b) आघातवर्धनीयता (c) ध्वानिकता (d) चालकता
उत्तर: (b) आघातवर्धनीयता - धातुओं को खींचकर तार बनाने के गुण को क्या कहते हैं?
(a) तन्यता (b) भंगुरता (c) कठोरता (d) चमक
उत्तर: (a) तन्यता - निम्नलिखित में से कौन अधातु है?
(a) ताँबा (b) लोहा (c) सल्फर (d) एल्युमिनियम
उत्तर: (c) सल्फर - निम्नलिखित में से कौन विद्युत का चालक अधातु है?
(a) सल्फर (b) फॉस्फोरस (c) ग्रेफाइट (d) ऑक्सीजन
उत्तर: (c) ग्रेफाइट - धातु और अम्ल की अभिक्रिया में सामान्यतः कौन-सी गैस निकलती है?
(a) ऑक्सीजन (b) हाइड्रोजन (c) नाइट्रोजन (d) क्लोरीन
उत्तर: (b) हाइड्रोजन - Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu किस प्रकार की अभिक्रिया है?
(a) संयोजन (b) विस्थापन (c) अपघटन (d) उदासीनीकरण
उत्तर: (b) विस्थापन - अभिक्रियाशीलता श्रेणी में सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातुओं में कौन शामिल है?
(a) सोना (b) चाँदी (c) पोटैशियम (d) ताँबा
उत्तर: (c) पोटैशियम - अयस्क किसे कहते हैं?
(a) कोई भी पत्थर (b) वह खनिज जिससे धातु का आर्थिक रूप से निष्कर्षण किया जा सके
(c) केवल शुद्ध धातु (d) मिश्रधातु
उत्तर: (b) वह खनिज जिससे धातु का आर्थिक रूप से निष्कर्षण किया जा सके - सल्फाइड अयस्क को वायु में गर्म करने की प्रक्रिया कहलाती है:
(a) निस्तापन (b) भर्जन (c) प्रगलन (d) शोधन
उत्तर: (b) भर्जन - कार्बोनेट अयस्क को नियंत्रित वायु में गर्म करने की प्रक्रिया कहलाती है:
(a) निस्तापन (b) भर्जन (c) विद्युत अपघटन (d) जस्तीकरण
उत्तर: (a) निस्तापन - लोहे को जंग से बचाने के लिए जिंक की परत चढ़ाने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
(a) मिश्रधातुकरण (b) जस्तीकरण (c) भर्जन (d) प्रगलन
उत्तर: (b) जस्तीकरण - पीतल किसकी मिश्रधातु है?
(a) Cu और Zn (b) Cu और Sn (c) Fe और C (d) Al और Cu
उत्तर: (a) Cu और Zn - काँसा किसकी मिश्रधातु है?
(a) Cu और Zn (b) Cu और Sn (c) Fe और Zn (d) Al और Mg
उत्तर: (b) Cu और Sn - धातु ऑक्साइड सामान्यतः किस प्रकृति के होते हैं?
(a) क्षारीय (b) केवल अम्लीय (c) केवल उदासीन (d) कोई नहीं
उत्तर: (a) क्षारीय
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: धातु किसे कहते हैं?
उत्तर: सामान्यतः वे तत्व जिनमें धात्विक गुण पाए जाते हैं, जैसे चमक, तन्यता, आघातवर्धनीयता और विद्युत चालकता, धातु कहलाते हैं। - प्रश्न: दो अधातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर: ऑक्सीजन और सल्फर। - प्रश्न: दो उपधातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर: आर्सेनिक और एंटिमनी। - प्रश्न: कमरे के ताप पर द्रव धातु का नाम लिखिए।
उत्तर: पारा या मरकरी। - प्रश्न: अभिक्रियाशीलता श्रेणी क्या है?
उत्तर: धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने वाली सूची को अभिक्रियाशीलता श्रेणी कहते हैं। - प्रश्न: संक्षारण क्या है?
उत्तर: वातावरण की ऑक्सीजन, नमी आदि की क्रिया से धातु की सतह के धीरे-धीरे नष्ट होने को संक्षारण कहते हैं। - प्रश्न: मिश्रधातु किसे कहते हैं?
उत्तर: दो या दो से अधिक धातुओं अथवा किसी धातु और अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। - प्रश्न: पीतल किन धातुओं से बनता है?
उत्तर: पीतल मुख्यतः ताँबा और जस्ता की मिश्रधातु है। - प्रश्न: काँसा किन धातुओं से बनता है?
उत्तर: काँसा मुख्यतः ताँबा और टिन की मिश्रधातु है। - प्रश्न: अयस्क किसे कहते हैं?
उत्तर: ऐसे खनिज जिनसे धातु का आर्थिक रूप से लाभदायक निष्कर्षण किया जा सके, अयस्क कहलाते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: धातु और अधातु के भौतिक गुणों में अंतर बताइए।
उत्तर: धातुएँ सामान्यतः चमकीली, तन्य, आघातवर्धनीय तथा ऊष्मा और विद्युत की अच्छी चालक होती हैं। इसके विपरीत अधातु सामान्यतः भंगुर, चमकहीन तथा विद्युत और ऊष्मा के कुचालक होते हैं। हालांकि कुछ अपवाद भी हैं, जैसे ग्रेफाइट विद्युत का चालक है और आयोडीन चमकीला अधातु है। - प्रश्न: धातुएँ अम्लों के साथ कैसे अभिक्रिया करती हैं?
उत्तर: हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। उदाहरण: Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2। - प्रश्न: विस्थापन अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: अधिक अभिक्रियाशील धातु जब कम अभिक्रियाशील धातु को उसके यौगिक से विस्थापित करती है, तो विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है। उदाहरण: Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu। - प्रश्न: आयनिक यौगिकों के गलनांक अधिक क्यों होते हैं?
उत्तर: आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन के बीच मजबूत वैद्युतस्थैतिक आकर्षण बल होता है। इन आकर्षण बलों को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए इनके गलनांक सामान्यतः अधिक होते हैं। - प्रश्न: धातुओं को संक्षारण से कैसे बचाया जा सकता है?
उत्तर: पेंट, तेल या ग्रीस लगाकर, जिंक की परत चढ़ाकर, विद्युत लेपन द्वारा तथा मिश्रधातु बनाकर धातुओं को संक्षारण से बचाया जा सकता है। - प्रश्न: निस्तापन और भर्जन में अंतर बताइए।
उत्तर: कार्बोनेट या जलयोजित अयस्क को नियंत्रित वायु में गर्म करना निस्तापन है, जबकि सल्फाइड अयस्क को अधिक मात्रा में वायु की उपस्थिति में गर्म करना भर्जन कहलाता है। - प्रश्न: मिश्रधातु बनाने का क्या लाभ है?
उत्तर: मिश्रधातु बनाने से धातु की कठोरता, मजबूती, संक्षारण-रोधिता और अन्य उपयोगी गुणों में सुधार किया जा सकता है। - प्रश्न: धातु ऑक्साइड और अधातु ऑक्साइड में अंतर बताइए।
उत्तर: अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं, जबकि अधातु ऑक्साइड सामान्यतः अम्लीय या उदासीन होते हैं। एल्युमिनियम ऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड जैसे कुछ धातु ऑक्साइड उभयधर्मी भी होते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी को समझाइए और इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर: धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर अभिक्रियाशीलता श्रेणी प्राप्त होती है। सामान्य क्रम K, Na, Ca, Mg, Al, Zn, Fe, Pb, H, Cu, Hg, Ag और Au है। इस श्रेणी की सहायता से धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलता की तुलना की जाती है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि कोई धातु दूसरी धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है या नहीं। इसके अतिरिक्त यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कौन-सी धातु तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित कर सकती है। धातु निष्कर्षण की विधि चुनने में भी इसकी उपयोगिता है। - प्रश्न: धातुओं के निष्कर्षण की सामान्य प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर: धातु निष्कर्षण में सबसे पहले उपयुक्त अयस्क का चयन और उसका सांद्रण किया जाता है। इसके बाद अयस्क को निस्तापन या भर्जन जैसी प्रक्रियाओं द्वारा धातु ऑक्साइड में बदला जा सकता है। धातु ऑक्साइड का उपयुक्त अपचायक द्वारा अपचयन करके धातु प्राप्त की जाती है। अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं के लिए विद्युत अपघटन का प्रयोग किया जाता है। प्राप्त धातु में अशुद्धियाँ होने पर विद्युत अपघटनी शोधन या अन्य उपयुक्त विधि से उसका शोधन किया जाता है। - प्रश्न: लोहे के निष्कर्षण की प्रक्रिया का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर: लोहे का निष्कर्षण उसके उपयुक्त अयस्क से वात्या भट्ठी में किया जाता है। अयस्क के साथ कोक और उपयुक्त गालक का प्रयोग किया जाता है। भट्ठी में कोक से कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है, जो लौह ऑक्साइड का अपचयन करके लोहा बनाती है। मुख्य अभिक्रिया Fe2O3 + 3CO → 2Fe + 3CO2 है। अयस्क में उपस्थित अशुद्धियाँ गालक के साथ अभिक्रिया करके धातुमल बनाती हैं। इस प्रकार धातु और अशुद्धियाँ अलग हो जाती हैं। - प्रश्न: संक्षारण क्या है? लोहे को जंग से बचाने के विभिन्न उपाय बताइए।
उत्तर: वातावरण में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी आदि की क्रिया से धातु के धीरे-धीरे नष्ट होने को संक्षारण कहते हैं। लोहे पर बनने वाली जंग इसका प्रमुख उदाहरण है। लोहे को जंग से बचाने के लिए उसकी सतह पर पेंट, तेल या ग्रीस लगाया जा सकता है। जिंक की परत चढ़ाकर जस्तीकरण किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त विद्युत लेपन और उपयुक्त मिश्रधातु निर्माण द्वारा भी संक्षारण को कम किया जा सकता है। - प्रश्न: आयनिक यौगिकों के प्रमुख गुणों को समझाइए।
उत्तर: आयनिक यौगिक धनायन और ऋणायन से बने होते हैं। इनमें विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच मजबूत आकर्षण बल होता है। इसलिए इनके गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः अधिक होते हैं। ये कठोर और भंगुर ठोस हो सकते हैं। ठोस अवस्था में आयन स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते, इसलिए सामान्यतः विद्युत का चालन नहीं करते। गलित अवस्था या जलीय विलयन में आयन गतिशील हो जाते हैं और विद्युत का चालन कर सकते हैं। - प्रश्न: मिश्रधातु क्या है? इसके प्रमुख उदाहरण और उपयोग बताइए।
उत्तर: दो या दो से अधिक धातुओं अथवा धातु और अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। पीतल ताँबा और जस्ता की मिश्रधातु है तथा काँसा ताँबा और टिन की मिश्रधातु है। स्टील मुख्यतः लोहे और कार्बन से बनी मिश्रधातु है। मिश्रधातुएँ कई मामलों में शुद्ध धातुओं से अधिक कठोर, मजबूत या संक्षारण-रोधी होती हैं। इसलिए इनका उपयोग भवन, मशीन, वाहन, विद्युत उपकरण और अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।
परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण प्रश्न
- धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणों की तुलना कीजिए।
- धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी क्या है?
- अभिक्रियाशीलता श्रेणी के दो उपयोग लिखिए।
- धातु जल के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती है?
- धातु और अम्ल की अभिक्रिया उदाहरण सहित समझाइए।
- विस्थापन अभिक्रिया क्या है? उदाहरण दीजिए।
- आयनिक यौगिक क्या हैं? इनके गुण लिखिए।
- खनिज और अयस्क में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- निस्तापन और भर्जन में अंतर बताइए।
- प्रगलन क्या है?
- गालक और धातुमल की परिभाषा दीजिए।
- लोहे के निष्कर्षण की प्रक्रिया समझाइए।
- अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?
- संक्षारण क्या है? लोहे को जंग से कैसे बचाया जा सकता है?
- मिश्रधातु क्या है? पीतल और काँसे की संरचना लिखिए।
- धातु एवं अधातु के रासायनिक गुणों में अंतर बताइए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- धातुओं में सामान्यतः तन्यता और आघातवर्धनीयता पाई जाती है।
- पारा कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।
- ग्रेफाइट विद्युत का चालक अधातु है।
- धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके सामान्यतः धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
- अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित कर सकती हैं।
- अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है।
- अभिक्रियाशीलता श्रेणी धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलता बताती है।
- आयनिक यौगिकों में धनायन और ऋणायन होते हैं।
- सल्फाइड अयस्कों के लिए भर्जन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
- कार्बोनेट अयस्कों के लिए निस्तापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
- लोहे के निष्कर्षण में वात्या भट्ठी का उपयोग किया जाता है।
- जिंक की परत चढ़ाकर लोहे को जंग से बचाया जा सकता है।
- पीतल ताँबा और जस्ता की मिश्रधातु है।
- काँसा ताँबा और टिन की मिश्रधातु है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 3 कौन-सा है?
उत्तर: BSEB कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 3 “धातु एवं अधातु” है। - प्रश्न: कमरे के तापमान पर द्रव धातु कौन-सी है?
उत्तर: पारा या मरकरी कमरे के तापमान पर द्रव अवस्था में पाया जाता है। - प्रश्न: अभिक्रियाशीलता श्रेणी क्या बताती है?
उत्तर: यह विभिन्न धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलता को दर्शाती है। - प्रश्न: धातु अम्ल के साथ अभिक्रिया करके कौन-सी गैस बनाती है?
उत्तर: हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं। - प्रश्न: जस्तीकरण क्या है?
उत्तर: लोहे या इस्पात की सतह पर जिंक की परत चढ़ाने की प्रक्रिया को जस्तीकरण कहते हैं। - प्रश्न: पीतल किसकी मिश्रधातु है?
उत्तर: पीतल मुख्यतः ताँबा और जस्ता की मिश्रधातु है। - प्रश्न: काँसा किसकी मिश्रधातु है?
उत्तर: काँसा मुख्यतः ताँबा और टिन की मिश्रधातु है। - प्रश्न: संक्षारण का सबसे सामान्य उदाहरण क्या है?
उत्तर: लोहे पर जंग लगना संक्षारण का सबसे सामान्य उदाहरण है। - प्रश्न: निस्तापन और भर्जन में क्या अंतर है?
उत्तर: कार्बोनेट या जलयोजित अयस्क को नियंत्रित वायु में गर्म करना निस्तापन है, जबकि सल्फाइड अयस्क को अधिक मात्रा में वायु में गर्म करना भर्जन कहलाता है। - प्रश्न: धातु निष्कर्षण में अयस्क का क्या महत्व है?
उत्तर: अयस्क वह खनिज है जिससे धातु का आर्थिक रूप से लाभदायक निष्कर्षण किया जा सकता है। इसलिए धातु निष्कर्षण के लिए उपयुक्त अयस्क का चयन आवश्यक होता है।
निष्कर्ष (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3)
“धातु एवं अधातु” अध्याय में धातुओं और अधातुओं के भौतिक एवं रासायनिक गुणों से लेकर उनके उपयोग, अभिक्रियाशीलता और धातु निष्कर्षण तक की महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है। अभिक्रियाशीलता श्रेणी इस अध्याय का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसकी सहायता से विस्थापन अभिक्रिया और धातुओं की अम्ल तथा जल के साथ अभिक्रिया को समझा जा सकता है।
इसके अतिरिक्त अयस्क, निस्तापन, भर्जन, प्रगलन, गालक, धातुमल और धातुओं के शोधन जैसी प्रक्रियाएँ परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। संक्षारण और मिश्रधातु का अध्ययन इस अध्याय को दैनिक जीवन से जोड़ता है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से अभिक्रियाशीलता श्रेणी, महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण, धातु निष्कर्षण, संक्षारण और मिश्रधातुओं से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करना चाहिए।
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री को विद्यार्थियों के लिए सरल, व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
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