रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण – BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 1
प्रस्तावना (BSEB कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 1)
“रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण” BSEB कक्षा 10 विज्ञान के रसायन विज्ञान खंड का पहला अध्याय है। इस अध्याय में विद्यार्थियों को रासायनिक परिवर्तन की मूल अवधारणा से परिचित कराया जाता है। जब कोई पदार्थ दूसरे पदार्थ के साथ अभिक्रिया करके नए पदार्थ का निर्माण करता है, तो उस प्रक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया कहा जाता है। इस अध्याय में रासायनिक अभिक्रियाओं को पहचानने के संकेत, रासायनिक समीकरण लिखने की विधि, समीकरणों को संतुलित करना तथा विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
अध्याय में संयोजन, वियोजन, विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रियाओं के साथ-साथ उपचयन और अपचयन की अवधारणा भी महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ, संक्षारण तथा विकृतगंधिता जैसी प्रक्रियाओं को भी समझाया जाता है। परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय का विशेष महत्व है, क्योंकि इसमें परिभाषा, रासायनिक समीकरण, समीकरण संतुलन, अभिक्रिया के प्रकार तथा कारण-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
रासायनिक अभिक्रिया क्या है?
जब एक या एक से अधिक पदार्थों में ऐसा रासायनिक परिवर्तन होता है जिसके परिणामस्वरूप नए पदार्थों का निर्माण होता है, तो इस प्रक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। रासायनिक अभिक्रिया में जिन पदार्थों से प्रक्रिया शुरू होती है, उन्हें अभिकारक कहा जाता है और अभिक्रिया के बाद बनने वाले नए पदार्थ उत्पाद कहलाते हैं।
उदाहरण के लिए मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने पर मैग्नीशियम ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। इसका समीकरण है:
2Mg + O2 → 2MgO
इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम और ऑक्सीजन अभिकारक हैं तथा मैग्नीशियम ऑक्साइड उत्पाद है। यहाँ पुराने पदार्थों के गुणों से भिन्न नए पदार्थ का निर्माण होता है, इसलिए यह रासायनिक परिवर्तन है।
रासायनिक अभिक्रिया के प्रमुख संकेत
किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान कई ऐसे परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं जिनसे यह पता चलता है कि कोई रासायनिक परिवर्तन हो रहा है। प्रत्येक अभिक्रिया में सभी संकेत दिखाई दें, यह आवश्यक नहीं है। फिर भी निम्न परिवर्तन महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं:
- किसी पदार्थ के रंग में परिवर्तन होना।
- गैस का निकलना।
- तापमान में परिवर्तन होना।
- ऊष्मा या प्रकाश का उत्पन्न होना।
- किसी अघुलनशील पदार्थ के रूप में अवक्षेप बनना।
- नए पदार्थ का निर्माण होना।
उदाहरण के लिए जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डाला जाता है, तो विलयन के रंग में परिवर्तन दिखाई देता है और कील की सतह पर कॉपर जमा हो सकता है। यह रासायनिक अभिक्रिया का संकेत है।
मैग्नीशियम रिबन को जलाने से पहले साफ क्यों किया जाता है?
मैग्नीशियम रिबन की सतह पर वायु के संपर्क में आने से मैग्नीशियम ऑक्साइड की पतली परत बन सकती है। यह परत मैग्नीशियम को आसानी से जलने से रोकती है। इसलिए मैग्नीशियम रिबन को जलाने से पहले रेगमाल से साफ किया जाता है। इससे ऑक्साइड की परत हट जाती है और मैग्नीशियम की सतह सीधे ऑक्सीजन के संपर्क में आती है। परिणामस्वरूप वह अधिक आसानी से जलता है और मैग्नीशियम ऑक्साइड का निर्माण होता है।
रासायनिक समीकरण
किसी रासायनिक अभिक्रिया को तत्वों के प्रतीकों और रासायनिक सूत्रों की सहायता से संक्षिप्त रूप में प्रदर्शित करने को रासायनिक समीकरण कहते हैं। इसमें अभिकारकों को सामान्यतः बाईं ओर तथा उत्पादों को दाईं ओर लिखा जाता है। दोनों के बीच तीर का चिह्न लगाया जाता है।
उदाहरण:
H2 + Cl2 → 2HCl
इस समीकरण में हाइड्रोजन और क्लोरीन अभिकारक हैं तथा हाइड्रोजन क्लोराइड उत्पाद है। रासायनिक समीकरण किसी अभिक्रिया को शब्दों की अपेक्षा अधिक संक्षिप्त और वैज्ञानिक रूप में व्यक्त करता है।
अभिकारक और उत्पाद
रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले प्रारंभिक पदार्थ अभिकारक कहलाते हैं। अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनने वाले नए पदार्थ उत्पाद कहलाते हैं। उदाहरण के लिए:
Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2
इस समीकरण में जिंक और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल अभिकारक हैं, जबकि जिंक क्लोराइड और हाइड्रोजन उत्पाद हैं।
संतुलित रासायनिक समीकरण
जिस रासायनिक समीकरण में अभिकारकों और उत्पादों की ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है, उसे संतुलित रासायनिक समीकरण कहते हैं। किसी रासायनिक समीकरण को संतुलित करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि रासायनिक अभिक्रिया के दौरान परमाणु नष्ट या उत्पन्न नहीं होते, बल्कि उनका पुनर्विन्यास होता है।
उदाहरण के लिए:
H2 + O2 → H2O
यह समीकरण असंतुलित है। इसे संतुलित करने पर:
2H2 + O2 → 2H2O
अब दोनों ओर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणुओं की संख्या समान है। इसलिए यह संतुलित समीकरण है।
रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
रासायनिक समीकरण को संतुलित करना द्रव्यमान संरक्षण के नियम के कारण आवश्यक है। इस नियम के अनुसार रासायनिक अभिक्रिया में कुल द्रव्यमान न तो उत्पन्न होता है और न ही नष्ट होता है। अभिक्रिया में केवल परमाणुओं का पुनर्विन्यास होता है। इसलिए अभिकारकों और उत्पादों की ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।
रासायनिक समीकरण में अवस्था संकेत
रासायनिक समीकरण को अधिक स्पष्ट बनाने के लिए पदार्थ की भौतिक अवस्था भी लिखी जाती है। इसके लिए निम्न संकेतों का प्रयोग किया जाता है:
- (s) – ठोस अवस्था
- (l) – द्रव अवस्था
- (g) – गैसीय अवस्था
- (aq) – जलीय विलयन
उदाहरण:
Zn(s) + 2HCl(aq) → ZnCl2(aq) + H2(g)
इससे यह स्पष्ट होता है कि जिंक ठोस अवस्था में है, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जलीय अवस्था में है, जिंक क्लोराइड जलीय अवस्था में बनता है और हाइड्रोजन गैस के रूप में निकलती है।
रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार
रासायनिक अभिक्रियाओं को उनके स्वरूप और उनमें होने वाले परिवर्तन के आधार पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जाता है। कक्षा 10 के लिए संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन तथा उपचयन-अपचयन अभिक्रियाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
संयोजन अभिक्रिया
वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक मुख्य उत्पाद बनाते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है। इसका सामान्य रूप है:
A + B → AB
उदाहरण:
2Mg + O2 → 2MgO
इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम और ऑक्सीजन मिलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाते हैं। इसी प्रकार कैल्शियम ऑक्साइड और जल की अभिक्रिया भी संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण है:
CaO + H2O → Ca(OH)2
वियोजन अभिक्रिया
जिस अभिक्रिया में एक यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक पदार्थों में बदल जाता है, उसे वियोजन अभिक्रिया कहते हैं। इसका सामान्य रूप है:
AB → A + B
उदाहरण:
CaCO3 → CaO + CO2
कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं। इसलिए यह वियोजन अभिक्रिया है।
ऊष्मीय वियोजन
जब ऊष्मा प्रदान करने पर कोई यौगिक टूटता है, तो उसे ऊष्मीय वियोजन कहते हैं। कैल्शियम कार्बोनेट का गर्म करने पर टूटना इसका उदाहरण है।
प्रकाशीय वियोजन
जब प्रकाश की ऊर्जा के प्रभाव से किसी यौगिक का विघटन होता है, तो उसे प्रकाशीय वियोजन कहते हैं। सिल्वर क्लोराइड का सूर्य के प्रकाश में विघटन इसका उदाहरण है:
2AgCl → 2Ag + Cl2
विद्युत वियोजन
जब विद्युत धारा के प्रभाव से किसी यौगिक का अपघटन होता है, तो इसे विद्युत वियोजन कहते हैं। जल का विद्युत अपघटन इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है:
2H2O → 2H2 + O2
इस प्रक्रिया में प्राप्त हाइड्रोजन गैस की मात्रा ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होती है।
विस्थापन अभिक्रिया
जब कोई अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक में उपस्थित कम क्रियाशील तत्व को उसके स्थान से हटा देता है, तो ऐसी अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu
इस अभिक्रिया में जिंक कॉपर से अधिक क्रियाशील होने के कारण कॉपर को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है। इसी कारण कॉपर अलग होकर प्राप्त होता है और जिंक सल्फेट का निर्माण होता है।
द्विविस्थापन अभिक्रिया
जब दो यौगिकों के घटक या आयन आपस में स्थान बदलते हैं और दो नए यौगिक बनते हैं, तो ऐसी अभिक्रिया को द्विविस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4 + 2NaCl
इस अभिक्रिया में बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट के आयनों का आदान-प्रदान होता है। बेरियम सल्फेट अघुलनशील होने के कारण सफेद अवक्षेप के रूप में दिखाई देता है।
अवक्षेपण अभिक्रिया
जिस अभिक्रिया में किसी अघुलनशील ठोस पदार्थ का निर्माण होता है और वह विलयन से अलग होकर दिखाई देने लगता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
BaCl2(aq) + Na2SO4(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq)
इस अभिक्रिया में बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप बनता है। इसलिए यह द्विविस्थापन के साथ-साथ अवक्षेपण अभिक्रिया का भी उदाहरण है।
उपचयन और अपचयन
रासायनिक अभिक्रियाओं में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के आधार पर उपचयन तथा अपचयन को समझना महत्वपूर्ण है। सामान्यतः किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का ह्रास उपचयन कहलाता है। इसके विपरीत ऑक्सीजन का ह्रास या हाइड्रोजन का योग अपचयन कहलाता है।
उदाहरण:
CuO + H2 → Cu + H2O
इस अभिक्रिया में CuO से ऑक्सीजन हटती है और कॉपर प्राप्त होता है, इसलिए कॉपर ऑक्साइड का अपचयन होता है। दूसरी ओर हाइड्रोजन ऑक्सीजन के साथ मिलकर जल बनाती है, इसलिए हाइड्रोजन का उपचयन होता है।
उपचायक और अपचायक
जो पदार्थ किसी दूसरे पदार्थ का उपचयन कराता है, उसे उपचायक कहा जाता है। जो पदार्थ किसी दूसरे पदार्थ का अपचयन कराता है, उसे अपचायक कहते हैं। उपचयन और अपचयन की प्रक्रियाएँ प्रायः एक साथ होती हैं। ऐसी अभिक्रियाओं को रेडॉक्स अभिक्रिया कहा जाता है।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पादों के निर्माण के साथ ऊष्मा बाहर निकलती है, उन्हें ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं। ईंधन का दहन इसका सामान्य उदाहरण है। प्राकृतिक गैस के दहन को इस प्रकार लिख सकते हैं:
CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + ऊष्मा
ऊष्माशोषी अभिक्रिया
जिन अभिक्रियाओं में अभिक्रिया के लिए बाहरी ऊर्जा या ऊष्मा का अवशोषण होता है, उन्हें ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहते हैं। कई वियोजन अभिक्रियाओं में यौगिक को तोड़ने के लिए ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहा जाता है?
श्वसन की प्रक्रिया में भोजन से प्राप्त ग्लूकोज ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा उत्पन्न करता है। इस प्रक्रिया में ऊर्जा मुक्त होती है, जिसका उपयोग शरीर विभिन्न कार्यों के लिए करता है। इसलिए श्वसन को ऊष्माक्षेपी रासायनिक प्रक्रिया के रूप में समझा जाता है।
ग्लूकोज + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
संक्षारण
जब धातुएँ अपने वातावरण में उपस्थित ऑक्सीजन, नमी या अन्य रासायनिक पदार्थों के साथ अभिक्रिया करके धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, तो इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। लोहे पर जंग लगना इसका सामान्य उदाहरण है। चाँदी की सतह पर काली परत तथा ताँबे की सतह पर हरी परत का बनना भी संक्षारण से संबंधित उदाहरण हैं।
लोहे की वस्तुओं पर पेंट करने से धातु की सतह वायु और नमी के सीधे संपर्क से बचती है। इसी कारण पेंट करने से जंग लगने की प्रक्रिया को कम किया जा सकता है।
विकृतगंधिता
तेल और वसा वाले खाद्य पदार्थों के लंबे समय तक वायु के संपर्क में रहने पर ऑक्सीकरण हो सकता है। इसके कारण खाद्य पदार्थों के स्वाद और गंध में खराब परिवर्तन होने लगता है। इस प्रक्रिया को विकृतगंधिता कहते हैं।
खाद्य पदार्थों को वायुरोधी पैकेट या डिब्बों में रखने, उचित तापमान पर रखने तथा ऑक्सीकरण को कम करने वाली परिस्थितियाँ बनाए रखने से विकृतगंधिता को धीमा किया जा सकता है। तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थों की पैकिंग में नाइट्रोजन जैसी निष्क्रिय गैस का उपयोग भी ऑक्सीकरण को कम करने के लिए किया जाता है।
महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण
- 2Mg + O2 → 2MgO – संयोजन अभिक्रिया
- CaO + H2O → Ca(OH)2 – संयोजन अभिक्रिया
- CaCO3 → CaO + CO2 – वियोजन अभिक्रिया
- 2AgCl → 2Ag + Cl2 – प्रकाशीय वियोजन
- 2H2O → 2H2 + O2 – विद्युत वियोजन
- Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu – विस्थापन अभिक्रिया
- BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4 + 2NaCl – द्विविस्थापन अभिक्रिया
- CuO + H2 → Cu + H2O – उपचयन-अपचयन अभिक्रिया
- Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2 – विस्थापन अभिक्रिया
- NaOH + HCl → NaCl + H2O – उदासीनीकरण अभिक्रिया
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- रासायनिक अभिक्रिया में प्रारंभिक पदार्थ क्या कहलाते हैं?(a) उत्पाद (b) अभिकारक (c) अवक्षेप (d) विलयन
उत्तर: (b) अभिकारक
- रासायनिक अभिक्रिया के बाद बनने वाले पदार्थ कहलाते हैं—(a) अभिकारक (b) उत्पाद (c) तत्व (d) मिश्रण
उत्तर: (b) उत्पाद
- 2Mg + O2 → 2MgO किस प्रकार की अभिक्रिया है?(a) वियोजन (b) संयोजन (c) विस्थापन (d) द्विविस्थापन
उत्तर: (b) संयोजन
- CaCO3 → CaO + CO2 किस प्रकार की अभिक्रिया है?(a) संयोजन (b) वियोजन (c) विस्थापन (d) द्विविस्थापन
उत्तर: (b) वियोजन
- Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu किस प्रकार की अभिक्रिया है?(a) संयोजन (b) वियोजन (c) विस्थापन (d) उदासीनीकरण
उत्तर: (c) विस्थापन
- BaCl2 + Na2SO4 की अभिक्रिया में कौन-सा अवक्षेप बनता है?(a) NaCl (b) BaSO4 (c) BaCl2 (d) Na2SO4
उत्तर: (b) BaSO4
- अपचयन में सामान्यतः क्या होता है?(a) ऑक्सीजन का योग (b) ऑक्सीजन का ह्रास (c) हाइड्रोजन का ह्रास (d) कोई परिवर्तन नहीं
उत्तर: (b) ऑक्सीजन का ह्रास
- जलीय विलयन के लिए कौन-सा संकेत प्रयोग होता है?(a) (s) (b) (l) (c) (g) (d) (aq)
उत्तर: (d) (aq)
- लोहे पर जंग लगना किसका उदाहरण है?(a) विकृतगंधिता (b) संक्षारण (c) संयोजन (d) वियोजन
उत्तर: (b) संक्षारण
- तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से होने वाली प्रक्रिया कहलाती है—(a) संक्षारण (b) विकृतगंधिता (c) विस्थापन (d) वियोजन
उत्तर: (b) विकृतगंधिता
- Fe2O3 + 2Al → Al2O3 + 2Fe किस प्रकार की अभिक्रिया है?(a) संयोजन (b) वियोजन (c) विस्थापन (d) द्विविस्थापन
उत्तर: (c) विस्थापन
- NaOH + HCl → NaCl + H2O किस प्रकार की अभिक्रिया है?(a) संयोजन (b) उदासीनीकरण (c) वियोजन (d) विस्थापन
उत्तर: (b) उदासीनीकरण
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं?उत्तर: वह प्रक्रिया जिसमें एक या अधिक पदार्थों में रासायनिक परिवर्तन होकर नए पदार्थों का निर्माण होता है, रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है।
- प्रश्न: अभिकारक किसे कहते हैं?उत्तर: रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले प्रारंभिक पदार्थ अभिकारक कहलाते हैं।
- प्रश्न: उत्पाद किसे कहते हैं?उत्तर: रासायनिक अभिक्रिया के बाद बनने वाले नए पदार्थ उत्पाद कहलाते हैं।
- प्रश्न: संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है?उत्तर: जिस रासायनिक समीकरण में दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान हो, उसे संतुलित रासायनिक समीकरण कहते हैं।
- प्रश्न: विद्युत वियोजन क्या है?उत्तर: विद्युत धारा के प्रभाव से किसी यौगिक के अपघटन की प्रक्रिया विद्युत वियोजन कहलाती है।
- प्रश्न: उपचायक किसे कहते हैं?उत्तर: जो पदार्थ किसी दूसरे पदार्थ का उपचयन कराता है, वह उपचायक कहलाता है।
- प्रश्न: अपचायक किसे कहते हैं?उत्तर: जो पदार्थ किसी दूसरे पदार्थ का अपचयन कराता है, वह अपचायक कहलाता है।
- प्रश्न: अवक्षेपण अभिक्रिया क्या है?उत्तर: जिस अभिक्रिया में विलयन से कोई अघुलनशील ठोस पदार्थ अलग होकर बनता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: मैग्नीशियम रिबन को जलाने से पहले साफ क्यों किया जाता है?उत्तर: मैग्नीशियम रिबन की सतह पर मैग्नीशियम ऑक्साइड की परत बन सकती है। यह परत दहन में बाधा डालती है। इसलिए रिबन को रेगमाल से साफ करके ऑक्साइड की परत हटाई जाती है, जिससे मैग्नीशियम आसानी से ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर सके।
- प्रश्न: रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?उत्तर: द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु नष्ट या उत्पन्न नहीं होते। इसलिए अभिकारकों और उत्पादों की ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए। इसी कारण रासायनिक समीकरण को संतुलित करना आवश्यक है।
- प्रश्न: संयोजन और वियोजन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है?उत्तर: संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं, जबकि वियोजन अभिक्रिया में एक यौगिक टूटकर दो या अधिक पदार्थ बनाता है। उदाहरण के लिए 2Mg + O2 → 2MgO संयोजन तथा CaCO3 → CaO + CO2 वियोजन अभिक्रिया है।
- प्रश्न: विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रिया में क्या अंतर है?उत्तर: विस्थापन अभिक्रिया में एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से हटा देता है। द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिकों के आयन या घटक आपस में स्थान बदलते हैं।
- प्रश्न: ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं में अंतर बताइए।उत्तर: जिन अभिक्रियाओं में ऊष्मा बाहर निकलती है, वे ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। जिन अभिक्रियाओं में ऊर्जा का अवशोषण होता है, वे ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
- प्रश्न: लोहे की वस्तुओं को पेंट क्यों किया जाता है?उत्तर: पेंट लोहे की सतह को वायु और नमी के संपर्क से बचाता है। इससे लोहे का ऑक्सीकरण कम होता है और जंग लगने की प्रक्रिया को रोका जा सकता है।
- प्रश्न: तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों की पैकिंग में नाइट्रोजन का उपयोग क्यों किया जाता है?उत्तर: नाइट्रोजन अपेक्षाकृत निष्क्रिय गैस है। पैकेट में ऑक्सीजन की मात्रा कम करने से तेल और वसा का ऑक्सीकरण घटता है और विकृतगंधिता की प्रक्रिया धीमी होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न: रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रमुख प्रकारों को उदाहरण सहित समझाइए।उत्तर: रासायनिक अभिक्रियाओं को उनके स्वरूप के आधार पर कई प्रकारों में बाँटा जाता है। संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं, जैसे 2Mg + O2 → 2MgO। वियोजन अभिक्रिया में एक यौगिक टूटकर दो या अधिक पदार्थों में बदलता है, जैसे CaCO3 → CaO + CO2। विस्थापन अभिक्रिया में अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करता है, जैसे Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu। द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिकों के घटकों का आदान-प्रदान होता है, जैसे BaCl2 + Na2SO4 → BaSO4 + 2NaCl।
- प्रश्न: संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है? इसे संतुलित करना क्यों आवश्यक है?उत्तर: जिस रासायनिक समीकरण में अभिकारकों और उत्पादों की ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है, वह संतुलित रासायनिक समीकरण कहलाता
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