BSEB Class 12 Political Science – सभी Chapters राजनीति शास्त्र Solutions
बिहार बोर्ड कक्षा 12 राजनीति शास्त्र की किताब दो भागों में बंटी हुई है — पहला भाग समकालीन विश्व राजनीति पर आधारित है और दूसरा भाग आजादी के बाद भारतीय राजनीति के सफर को दिखाता है। नीचे दोनों भागों के अध्याय क्रमवार अलग-अलग टेबल में दिए गए हैं ताकि आप आसानी से सही अध्याय तक पहुँच सकें।
Part 1: Contemporary World Politics (भाग-1: समकालीन विश्व राजनीति)
| क्रम | अध्याय का नाम | लिंक |
|---|---|---|
| 1 | शीत युद्ध का दौर | पढ़ें → |
| 2 | दो ध्रुवीयता का अन्त | पढ़ें → |
| 3 | समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व | पढ़ें → |
| 4 | सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र | पढ़ें → |
| 5 | समकालीन दक्षिण एशिया | पढ़ें → |
| 6 | अन्तराष्ट्रीय संगठन | पढ़ें → |
| 7 | समकालीन विश्व में सुरक्षा | पढ़ें → |
| 8 | पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन | पढ़ें → |
| 9 | वैश्वीकरण | पढ़ें → |
भाग-1: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय
1. शीत युद्ध का दौर: अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चले शीत युद्ध की उत्पत्ति और उसके वैश्विक असर को यह अध्याय समझाता है।
2. दो ध्रुवीयता का अन्त: सोवियत संघ के विघटन और उसके बाद बनी नई विश्व व्यवस्था को इस अध्याय में दर्शाया गया है।
3. समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व: शीत युद्ध के बाद अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व और उसकी चुनौतियों को यह अध्याय बताता है।
4. सत्ता के वैकल्पिक केन्द्र: यूरोपीय संघ और आसियान जैसे उभरते हुए वैकल्पिक शक्ति केंद्रों को इस अध्याय में कवर किया गया है।
5. समकालीन दक्षिण एशिया: दक्षिण एशियाई देशों के आपसी संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को यह अध्याय दर्शाता है।
6. अन्तराष्ट्रीय संगठन: संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका और उनके कामकाज को इस अध्याय में समझाया गया है।
7. समकालीन विश्व में सुरक्षा: पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर यह अध्याय चर्चा करता है।
8. पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन: वैश्विक पर्यावरण संकट और संसाधनों के बंटवारे से जुड़े मुद्दों को इस अध्याय में दिखाया गया है।
9. वैश्वीकरण: वैश्वीकरण के आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक असर को यह अध्याय समझाता है।
Part 2: Politics In India Since Independence (भाग-2: स्वतंत्रता के बाद भारतीय राजनीति)
| क्रम | अध्याय का नाम | लिंक |
|---|---|---|
| 1 | राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ | पढ़ें → |
| 2 | एक दल के प्रभुत्व का दौर | पढ़ें → |
| 3 | नियोजित विकास की राजनीति | पढ़ें → |
| 4 | भारत के विदेश संबंध | पढ़ें → |
| 5 | कांग्रेसी प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना | पढ़ें → |
| 6 | लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट | पढ़ें → |
| 7 | जन-आन्दोलन का उदय | पढ़ें → |
| 8 | क्षेत्रीय आकांक्षाएँ | पढ़ें → |
| 9 | भारतीय राजनीति : एक बदलाव | पढ़ें → |
भाग-2: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय
1. राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ: आजादी के तुरंत बाद देश के सामने आई एकता, विभाजन और शरणार्थी समस्याओं जैसी चुनौतियों को यह अध्याय दर्शाता है।
2. एक दल के प्रभुत्व का दौर: शुरुआती वर्षों में कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक दबदबे और उसके कारणों को इस अध्याय में समझाया गया है।
3. नियोजित विकास की राजनीति: पंचवर्षीय योजनाओं और आर्थिक नियोजन से जुड़ी राजनीतिक बहसों को यह अध्याय बताता है।
4. भारत के विदेश संबंध: गुटनिरपेक्षता की नीति और भारत के पड़ोसी देशों से रिश्तों को इस अध्याय में कवर किया गया है।
5. कांग्रेसी प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना: गैर-कांग्रेसवाद के उभार और कांग्रेस की वापसी की राजनीति को यह अध्याय दर्शाता है।
6. लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट: आपातकाल के दौर और उसके भारतीय राजनीति पर पड़े असर को इस अध्याय में समझाया गया है।
7. जन-आन्दोलन का उदय: किसान, महिला और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर उठे जन-आंदोलनों को यह अध्याय दर्शाता है।
8. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ: अलग-अलग राज्यों में उठी क्षेत्रीय पहचान और स्वायत्तता की मांगों को इस अध्याय में कवर किया गया है।
9. भारतीय राजनीति : एक बदलाव: 1990 के दशक के बाद भारतीय राजनीति में आए गठबंधन युग और अन्य बदलावों को यह अध्याय बताता है।