BSEB Class 11 Economics – सभी Chapters अर्थशास्त्र
Bihar Board Class 11 की Economics (अर्थशास्त्र) किताब दो भागों में बंटी है — भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास और अर्थशास्त्र में सांख्यिकी। इस पेज पर दोनों भागों के सभी अध्यायों का chapter-wise हल एक साथ उपलब्ध है। नीचे दी गई सूची से किसी भी chapter पर क्लिक करके आप उसका विस्तृत solution देख सकते हैं।
भाग 1: भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास
| क्रम | अध्याय का नाम | लिंक |
|---|---|---|
| 1 | स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था | पढ़ें → |
| 2 | भारतीय अर्थव्यवस्था (1950-1990) | पढ़ें → |
| 3 | उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण – एक समीक्षा | पढ़ें → |
| 4 | निर्धनता | पढ़ें → |
| 5 | भारत में मानव पूँजी का निर्माण | पढ़ें → |
| 6 | ग्रामीण विकास | पढ़ें → |
| 7 | रोजगार – संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे | पढ़ें → |
| 8 | आधारिक संरचना | पढ़ें → |
| 9 | पर्यावरण और धारणीय विकास | पढ़ें → |
| 10 | भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव | पढ़ें → |
भाग 2: अर्थशास्त्र में सांख्यिकी
| क्रम | अध्याय का नाम | लिंक |
|---|---|---|
| 1 | अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय | पढ़ें → |
| 2 | आँकड़ों का संग्रह | पढ़ें → |
| 3 | आँकड़ों का संगठन | पढ़ें → |
| 4 | आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण | पढ़ें → |
| 5 | केंद्रीय प्रवृत्ति की माप | पढ़ें → |
| 6 | परिक्षेपण के माप | पढ़ें → |
| 7 | सहसंबंध | पढ़ें → |
| 8 | सूचकांक | पढ़ें → |
| 9 | सांख्यिकीय विधियों के उपयोग | पढ़ें → |
अध्यायवार संक्षिप्त परिचय
भाग 1, अध्याय 1. स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था: इस अध्याय में ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति, कृषि, उद्योग और विदेश व्यापार को समझाया गया है।
भाग 1, अध्याय 2. भारतीय अर्थव्यवस्था (1950-1990): यहाँ स्वतंत्रता के बाद अपनाई गई आर्थिक नीतियों, पंचवर्षीय योजनाओं और औद्योगीकरण की रणनीति पर चर्चा की गई है।
भाग 1, अध्याय 3. उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण – एक समीक्षा: इस अध्याय में 1991 के आर्थिक सुधारों, उनके कारणों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभावों को समझाया गया है।
भाग 1, अध्याय 4. निर्धनता: यहाँ भारत में गरीबी के मापन, इसके कारणों और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की जानकारी दी गई है।
भाग 1, अध्याय 5. भारत में मानव पूँजी का निर्माण: इस अध्याय में मानव पूँजी की अवधारणा, शिक्षा व स्वास्थ्य में निवेश के महत्व को समझाया गया है।
भाग 1, अध्याय 6. ग्रामीण विकास: यहाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि विपणन, ग्रामीण साख और विविधीकरण जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।
भाग 1, अध्याय 7. रोजगार – संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे: इस अध्याय में रोजगार के प्रकार, अनौपचारिक क्षेत्र की समस्याएँ और रोजगार सृजन की नीतियों को समझाया गया है।
भाग 1, अध्याय 8. आधारिक संरचना: यहाँ ऊर्जा, परिवहन, संचार जैसी आधारभूत संरचनाओं की भूमिका और उनके विकास पर चर्चा की गई है।
भाग 1, अध्याय 9. पर्यावरण और धारणीय विकास: इस अध्याय में पर्यावरणीय क्षरण के कारणों तथा सतत विकास की अवधारणा को समझाया गया है।
भाग 1, अध्याय 10. भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव: यहाँ भारत, पाकिस्तान और चीन के विकास मॉडल की तुलना की गई है।
भाग 2, अध्याय 1. अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय: इस अध्याय में सांख्यिकी के अर्थ, उसके महत्व और अर्थशास्त्र में उसकी भूमिका को समझाया गया है।
भाग 2, अध्याय 2. आँकड़ों का संग्रह: यहाँ प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़ों के संग्रह की विधियों की जानकारी दी गई है।
भाग 2, अध्याय 3. आँकड़ों का संगठन: इस अध्याय में आँकड़ों को वर्गीकृत करने और बारंबारता वितरण बनाने की प्रक्रिया को समझाया गया है।
भाग 2, अध्याय 4. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण: यहाँ आँकड़ों को सारणी, आरेख और ग्राफ के माध्यम से प्रस्तुत करने के तरीकों को समझाया गया है।
भाग 2, अध्याय 5. केंद्रीय प्रवृत्ति की माप: इस अध्याय में माध्य, माध्यिका और बहुलक जैसी केंद्रीय प्रवृत्ति की मापों की गणना को समझाया गया है।
भाग 2, अध्याय 6. परिक्षेपण के माप: यहाँ प्रसरण, मानक विचलन जैसी परिक्षेपण मापने की विधियों पर चर्चा की गई है।
भाग 2, अध्याय 7. सहसंबंध: इस अध्याय में दो चरों के बीच संबंध मापने की विधि और सहसंबंध गुणांक की गणना को समझाया गया है।
भाग 2, अध्याय 8. सूचकांक: यहाँ सूचकांक की अवधारणा, उसकी गणना विधि और अर्थव्यवस्था में उसके उपयोग को समझाया गया है।
भाग 2, अध्याय 9. सांख्यिकीय विधियों के उपयोग: इस अध्याय में सांख्यिकीय विधियों की सीमाओं और आर्थिक विश्लेषण में उनके व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा की गई है।