BSEB Class 12 Hindi – सभी Chapters दिगंत भाग 2

बिहार बोर्ड कक्षा 12 की हिंदी विषय की किताब “दिगंत भाग 2” दो कोर्स में बंटी हुई है — 100 अंकों वाला और 50 अंकों वाला। इसमें गद्य, पद्य, प्रतिपूर्ति, रचना और व्याकरण के अलग-अलग भाग आते हैं। नीचे सभी खण्डों के अध्याय क्रमवार दिए गए हैं ताकि आप अपने कोर्स के हिसाब से जल्दी सही अध्याय ढूंढ सकें।

100 Marks – गद्य खण्ड

क्रमअध्याय का नामलिंक
1बातचीतपढ़ें →
2उसने कहा थापढ़ें →
3संपूर्ण क्रांतिपढ़ें →
4अर्द्धनारीश्वरपढ़ें →
5रोजपढ़ें →
6एक लेख और एक पत्रपढ़ें →
7ओ सदानीरापढ़ें →
8सिपाही की माँपढ़ें →
9प्रगीत और समाजपढ़ें →
10जूठनपढ़ें →
11हँसते हुए मेरा अकेलापनपढ़ें →
12तिरिछपढ़ें →
13शिक्षापढ़ें →

गद्य खण्ड: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय

1. बातचीत: लेखक ने इस पाठ में बताया है कि सही ढंग से बातचीत करना भी एक कला है, जो रिश्तों और समझ को मजबूत बनाती है।

2. उसने कहा था: बचपन की एक साधारण-सी दोस्ती आगे चलकर त्याग और वादे को निभाने की एक मार्मिक कहानी बन जाती है।

3. संपूर्ण क्रांति: यह भाषण समाज में जड़ से बदलाव लाने वाले क्रांतिकारी सोच और जनआंदोलन की जरूरत पर केंद्रित है।

4. अर्द्धनारीश्वर: लेखक स्त्री-पुरुष के बीच की बराबरी और एक-दूसरे के पूरक होने के विचार को गहराई से रखते हैं।

5. रोज: यह कहानी एक महिला की उबाऊ, रोज दोहराई जाने वाली जिंदगी को बड़ी संवेदनशीलता से पेश करती है।

6. एक लेख और एक पत्र: एक लेख और एक पत्र के जरिए देश-प्रेम और अपनी बात पर अडिग रहने के भाव को दिखाया गया है।

7. ओ सदानीरा: यह निबंध एक नदी से लेखक के पुराने रिश्ते और उससे जुड़ी यादों को समेटे हुए है।

8. सिपाही की माँ: नाटक के जरिए एक माँ के मन की हलचल से युद्ध और सैनिक जीवन की सच्चाई सामने आती है।

9. प्रगीत और समाज: इसमें गीत-काव्य की प्रकृति और समाज से उसके गहरे नाते पर चर्चा की गई है।

10. जूठन: यह आत्मकथा जाति के आधार पर हुए भेदभाव और तिरस्कार के अनुभवों को खुलकर बयां करती है।

11. हँसते हुए मेरा अकेलापन: इंसान के भीतर छिपे अकेलेपन और उसकी उलझी भावनाओं को इस पाठ में उभारा गया है।

12. तिरिछ: डर और व्यवस्था के आगे लाचारी को एक प्रतीक के सहारे इस कहानी में दिखाया गया है।

13. शिक्षा: यह निबंध शिक्षा के असली मकसद और आज की शिक्षा-व्यवस्था की खामियों पर सवाल उठाता है।

100 Marks – पद्य खण्ड

क्रमअध्याय का नामलिंक
1कड़बकपढ़ें →
2सूरदास के पदपढ़ें →
3तुलसीदास के पदपढ़ें →
4छप्पयपढ़ें →
5कवित्तपढ़ें →
6तुमुल कोलाहल कलह मेंपढ़ें →
7पुत्र वियोगपढ़ें →
8उषापढ़ें →
9जन-जन का चेहरा एकपढ़ें →
10अधिनायकपढ़ें →
11प्यारे नन्हें बेटे कोपढ़ें →
12हार-जीतपढ़ें →
13गाँव का घरपढ़ें →

पद्य खण्ड: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय

1. कड़बक: विद्यापति की इस रचना में उस दौर के जीवन और समाज से जुड़े भाव सरल शैली में उतारे गए हैं।

2. सूरदास के पद: इन पदों में कृष्ण के प्रति भक्ति और वात्सल्य का भाव बेहद मीठी भाषा में उतरा है।

3. तुलसीदास के पद: राम भक्ति के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी इन पदों में भक्ति-काव्य की शैली में पिरोया गया है।

4. छप्पय: यह छंद वीरता और शौर्य से भरे भावों को असरदार अंदाज़ में सामने लाता है।

5. कवित्त: रीतिकाल की काव्य-शैली और उसके शृंगारिक रंग इस रचना में झलकते हैं।

6. तुमुल कोलाहल कलह में: जीवन की उठापटक के बीच भी मन की शांति ढूंढने की बात यह कविता करती है।

7. पुत्र वियोग: बेटे से बिछड़ने के गहरे दर्द को माता-पिता की नजर से इस कविता में बयां किया गया है।

8. उषा: भोर के नज़ारे को खूबसूरत बिंबों और काव्यात्मक भाषा में इस कविता में चित्रित किया गया है।

9. जन-जन का चेहरा एक: आम आदमी के संघर्ष और सबकी एक-सी पीड़ा को इस कविता में उकेरा गया है।

10. अधिनायक: सत्ता और तानाशाही रवैये पर यह कविता तीखा व्यंग्य करती है।

11. प्यारे नन्हें बेटे को: एक पिता अपने बेटे को जीवन के जरूरी मूल्यों की सीख इस कविता के जरिए देता है।

12. हार-जीत: जीत और हार दोनों को समान भाव से स्वीकारने की सीख यह कविता देती है।

13. गाँव का घर: गाँव के घर से जुड़ी पुरानी यादों और उससे लगाव को इस कविता में सहेजा गया है।

100 Marks – प्रतिपूर्ति

क्रमअध्याय का नामलिंक
1रस्सी का टुकड़ापढ़ें →
2क्लर्क की मौतपढ़ें →
3पेशगीपढ़ें →

प्रतिपूर्ति: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय

1. रस्सी का टुकड़ा: यह अनुवादित कहानी इंसानी स्वभाव में छिपे लालच और उसके नतीजों को सामने लाती है।

2. क्लर्क की मौत: ज्यादा डर और सामाजिक दबाव किस तरह मन की हालत बिगाड़ देते हैं, यह इस अनुवादित कहानी में दिखता है।

3. पेशगी: पैसों की तंगी से उपजी सामाजिक दिक्कतों को इस कहानी में उकेरा गया है।

50 Marks – पद्य खण्ड

क्रमअध्याय का नामलिंक
1रहीम के दोहेपढ़ें →
2जीवन संदेशपढ़ें →
3भारत माता ग्रामवासिनीपढ़ें →
4हिमालय का संदेशपढ़ें →
5सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दरपढ़ें →
6जीवन का झरनापढ़ें →

50 Marks पद्य खण्ड: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय

1. रहीम के दोहे: रोजमर्रा की जिंदगी के व्यावहारिक ज्ञान और नैतिकता की बातें इन दोहों में सरल भाषा में कही गई हैं।

2. जीवन संदेश: सही ढंग से जीवन जीने और सकारात्मक सोच अपनाने की सीख इस कविता में मिलती है।

3. भारत माता ग्रामवासिनी: भारत माता को गाँव के जीवन के रूप में दिखाकर उसकी सादगी को इस कविता में उभारा गया है।

4. हिमालय का संदेश: हिमालय के जरिए दृढ़ता, तपस्या और राष्ट्रीय गौरव के भाव को इस कविता में पिरोया गया है।

5. सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर: सुंदरता के गहरे और सूक्ष्म मायनों पर यह कविता विचार करती है।

6. जीवन का झरना: जीवन को लगातार बहते झरने से जोड़कर इस कविता में समझाया गया है।

50 Marks – गद्य खण्ड

क्रमअध्याय का नामलिंक
1पंच परमेश्वरपढ़ें →
2गौरापढ़ें →
3मंगरपढ़ें →
4कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुरपढ़ें →
5ठिठुरता हुआ गणतंत्रपढ़ें →

50 Marks गद्य खण्ड: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय

1. पंच परमेश्वर: दोस्ती और इंसाफ के बीच पैदा होने वाले नैतिक द्वंद्व को यह कहानी बड़ी खूबसूरती से दिखाती है।

2. गौरा: एक गाँव की स्त्री की संवेदनशीलता और पशुओं के प्रति उसके लगाव को यह कहानी सामने रखती है।

3. मंगर: एक आम इंसान के संघर्ष और उसकी सहजता को यह कहानी दर्शाती है।

4. कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर: इस जीवनी में रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन-सफर और उनके साहित्यिक योगदान को समेटा गया है।

5. ठिठुरता हुआ गणतंत्र: आम जनता की परेशानियों और तंत्र की बेरुखी पर यह निबंध व्यंग्य के अंदाज़ में बात करता है।

रचना (100 & 50 Marks)

क्रमअध्याय का नामलिंक
1हिन्दी भाषा और साहित्य की कथापढ़ें →
2पत्र लेखनपढ़ें →
3निबंध लेखनपढ़ें →
4टिप्पण लेखनपढ़ें →

रचना: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय

1. हिन्दी भाषा और साहित्य की कथा: हिंदी भाषा किस तरह विकसित हुई और साहित्य की यात्रा कैसी रही, इसे इस भाग में समझाया गया है।

2. पत्र लेखन: औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह के पत्र किस ढांचे और शैली में लिखे जाते हैं, यह यहाँ बताया गया है।

3. निबंध लेखन: अलग-अलग विषयों पर सुव्यवस्थित तरीके से निबंध कैसे लिखा जाए, इसकी जानकारी यहाँ दी गई है।

4. टिप्पण लेखन: किसी विषय पर छोटी और स्पष्ट टिप्पणी लिखने का सही तरीका इस भाग में बताया गया है।

व्याकरण (100 & 50 Marks)

क्रमअध्याय का नामलिंक
1संधिपढ़ें →
2समासपढ़ें →
3वाक्य और उपवाक्यपढ़ें →
4परिभाशत एवं तकनीक शब्दपढ़ें →
5कोशीय और व्याकरणिक शब्दपढ़ें →
6पर्यायवाची शब्दपढ़ें →
7एकार्थक शब्दपढ़ें →
8अनेकार्थक शब्दपढ़ें →
9विलोम या विपरीतार्थक शब्दपढ़ें →
10लिंगपढ़ें →
11अनेक शब्दों के लिए एक शब्दपढ़ें →
12कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ (कहावतें)पढ़ें →
13मुहावरेपढ़ें →
14वाक्य संशोधनपढ़ें →
15संक्षेपणपढ़ें →

व्याकरण: अध्यायवार संक्षिप्त परिचय

1. संधि: दो शब्दों के जुड़ने से बनने वाली संधि के प्रकार और उसके नियम इस भाग में समझाए गए हैं।

2. समास: शब्दों को छोटा करने की प्रक्रिया और समास के अलग-अलग भेदों को यहाँ स्पष्ट किया गया है।

3. वाक्य और उपवाक्य: वाक्य कैसे बनता है और उपवाक्य के कौन-कौन से प्रकार होते हैं, यह उदाहरणों के साथ यहाँ बताया गया है।

4. परिभाशत एवं तकनीक शब्द: अलग-अलग विषयों में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी और परिभाषिक शब्दों को इस भाग में स्पष्ट किया गया है।

5. कोशीय और व्याकरणिक शब्द: शब्दों के शब्दकोश वाले अर्थ और उनके व्याकरणिक इस्तेमाल में क्या फर्क है, यह यहाँ समझाया गया है।

6. पर्यायवाची शब्द: एक जैसे अर्थ वाले शब्दों की सूची और उनके सही प्रयोग को यहाँ दिखाया गया है।

7. एकार्थक शब्द: एक ही भाव को व्यक्त करने वाले शब्दों का सही इस्तेमाल इस भाग में स्पष्ट किया गया है।

8. अनेकार्थक शब्द: एक शब्द के कई-कई अर्थ और संदर्भ के हिसाब से उनका प्रयोग यहाँ समझाया गया है।

9. विलोम या विपरीतार्थक शब्द: शब्दों के उल्टे अर्थ वाले शब्दों की सूची इस भाग में दी गई है।

10. लिंग: स्त्रीलिंग और पुल्लिंग शब्दों के नियम और उनके सही उपयोग को यहाँ समझाया गया है।

11. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द: कई शब्दों की जगह इस्तेमाल होने वाले एक शब्द की जानकारी इस भाग में दी गई है।

12. कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ (कहावतें): जानी-मानी कहावतों के अर्थ और उनके इस्तेमाल के संदर्भ यहाँ स्पष्ट किए गए हैं।

13. मुहावरे: हिंदी में इस्तेमाल होने वाले मुहावरों के अर्थ और वाक्यों में उनका प्रयोग इस भाग में समझाया गया है।

14. वाक्य संशोधन: गलत वाक्यों को पहचानकर उन्हें सही रूप देने के नियम यहाँ बताए गए हैं।

15. संक्षेपण: किसी बड़े गद्यांश को सही ढंग से संक्षेप में लिखने का तरीका इस भाग में बताया गया है।