Bihar Board Class 11 Hindi – अव्यय
Bihar Board Class 11 Hindi – अव्यय
अव्यय हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण भाग है। ऐसे शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन, पुरुष या काल के कारण सामान्यतः परिवर्तन नहीं होता, अव्यय कहलाते हैं। अव्यय का प्रयोग वाक्य में अर्थ और संबंध को अधिक स्पष्ट बनाने के लिए किया जाता है।
अव्यय की परिभाषा
जिन शब्दों के रूप में व्याकरणिक कारणों से परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहा जाता है।
अव्यय के प्रमुख भेद
1. क्रियाविशेषण
जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, वे क्रियाविशेषण कहलाते हैं।
उदाहरण: वह धीरे चलता है। बच्चा जल्दी आया।
यहाँ ‘धीरे’ और ‘जल्दी’ क्रिया की विशेषता बता रहे हैं।
2. संबंधबोधक
जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से स्थापित करते हैं, वे संबंधबोधक कहलाते हैं।
उदाहरण: घर के सामने पेड़ है। राम के पास पुस्तक है।
3. समुच्चयबोधक
जो शब्द दो शब्दों, पदों या वाक्यांशों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक कहते हैं।
उदाहरण: राम और मोहन आए। वह मेहनत करता है लेकिन सफल नहीं हुआ।
4. विस्मयादिबोधक
जो शब्द अचानक उत्पन्न होने वाले हर्ष, दुख, आश्चर्य, घृणा, क्रोध आदि भावों को प्रकट करते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक कहते हैं।
उदाहरण: अरे! तुम यहाँ कैसे? वाह! कितना सुंदर दृश्य है।
अव्यय पहचानने की सरल विधि
यदि किसी शब्द का रूप वाक्य में लिंग या वचन बदलने पर भी उसी प्रकार बना रहता है और वह क्रिया, संबंध, जोड़ या भाव को स्पष्ट करता है, तो उसके अव्यय होने की संभावना होती है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. अव्यय किसे कहते हैं?
उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष या काल के कारण परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं।
प्रश्न 2. अव्यय के प्रमुख भेद कौन-कौन से हैं?
उत्तर: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक इसके प्रमुख भेद हैं।
प्रश्न 3. ‘राम धीरे चलता है’ में ‘धीरे’ क्या है?
उत्तर: क्रियाविशेषण।
प्रश्न 4. ‘राम और मोहन’ में ‘और’ क्या है?
उत्तर: समुच्चयबोधक।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- क्रिया की विशेषता बताने वाला शब्द — क्रियाविशेषण
- दो वाक्यों को जोड़ने वाला शब्द — समुच्चयबोधक
- ‘वाह!’ — विस्मयादिबोधक
- ‘के सामने’ — संबंधबोधक
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Bihar Board Class 11 Hindi – विशेषण
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