Biology Class 11th

Bihar Board Class 11 Biology Chapter 10 – कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

24 August 2026  |  By Ramnivas KT

Table of Contents

कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

बहुकोशिकीय जीवों की वृद्धि, विकास और ऊतकों की मरम्मत के पीछे कोशिका विभाजन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक कोशिका जब विभाजन के लिए तैयार होती है, तो वह सीधे दो भागों में नहीं बँटती, बल्कि इसके पहले कई निश्चित चरणों से गुजरती है। कोशिका की वृद्धि, DNA की प्रतिकृति और अंततः विभाजन की इस क्रमबद्ध प्रक्रिया को कोशिका चक्र कहा जाता है।

इस अध्याय में कोशिका चक्र की विभिन्न अवस्थाओं, समसूत्री विभाजन (Mitosis), अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis), केन्द्रक विभाजन, कोशिकाद्रव्य विभाजन तथा दोनों प्रकार के विभाजन के जैविक महत्व का अध्ययन किया जाता है।

कोशिका चक्र क्या है?

एक कोशिका के बनने से लेकर उसके अगले विभाजन और नई पुत्री कोशिकाओं के निर्माण तक होने वाली घटनाओं के क्रम को कोशिका चक्र कहते हैं। इसमें कोशिका वृद्धि करती है, अपना DNA दोहराती है और फिर विभाजन के लिए आवश्यक संरचनाएँ तैयार करती है।

कोशिका चक्र की मुख्य अवस्थाएँ

कोशिका चक्र को मुख्य रूप से अंतरावस्था (Interphase) और विभाजन अवस्था (M phase) में बाँटा जाता है। अंतरावस्था को G₁, S और G₂ चरणों में समझा जाता है।

G₁ चरण

इस अवस्था में कोशिका सामान्य रूप से सक्रिय रहती है और उसका आकार तथा कोशिकीय पदार्थ बढ़ते हैं। विभाजन के लिए आवश्यक प्रोटीन और अन्य पदार्थों का निर्माण भी होता है।

S चरण

S चरण में DNA की प्रतिकृति होती है। इसके बाद प्रत्येक गुणसूत्र में दो समान अर्द्धगुणसूत्र या chromatids हो जाते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि DNA की मात्रा बढ़ती है, लेकिन गुणसूत्रों की संख्या अपने-आप दोगुनी नहीं होती।

G₂ चरण

इस चरण में कोशिका विभाजन की अंतिम तैयारी करती है। आवश्यक प्रोटीन और कोशिकीय संरचनाएँ तैयार की जाती हैं।

G₀ अवस्था

कुछ कोशिकाएँ G₁ के बाद सक्रिय रूप से विभाजित होने के बजाय एक शांत या प्रशान्त अवस्था में चली जाती हैं। इसे G₀ अवस्था कहते हैं। ऐसी कोशिकाएँ उपापचयी रूप से सक्रिय रह सकती हैं, लेकिन सामान्यतः तत्काल विभाजन नहीं करतीं।

केन्द्रक विभाजन और कोशिकाद्रव्य विभाजन

केन्द्रक के विभाजन को Karyokinesis तथा कोशिकाद्रव्य के विभाजन को Cytokinesis कहा जाता है। दोनों प्रक्रियाएँ मिलकर एक पूर्ण कोशिका विभाजन को पूरा करती हैं।

समसूत्री विभाजन

समसूत्री विभाजन या Mitosis ऐसा कोशिका विभाजन है जिसमें एक मातृ कोशिका से सामान्यतः दो ऐसी पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं जिनमें गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिका के बराबर रहती है। शरीर की वृद्धि और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की भरपाई में इसका विशेष महत्व है।

समसूत्री विभाजन की अवस्थाएँ

पूर्वावस्था

गुणसूत्र संघनित होकर स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। केन्द्रिका और केन्द्रक झिल्ली में परिवर्तन होने लगता है तथा स्पिंडल तंत्र विकसित होता है।

मध्यावस्था

गुणसूत्र कोशिका के मध्य तल पर व्यवस्थित हो जाते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र के kinetochore से spindle fibres जुड़ते हैं।

पश्चावस्था

अर्द्धगुणसूत्र अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर चले जाते हैं। इस अवस्था में प्रत्येक अलग अर्द्धगुणसूत्र स्वतंत्र गुणसूत्र के रूप में माना जाता है।

अंत्यावस्था

गुणसूत्र ध्रुवों पर पहुँच जाते हैं। इनके चारों ओर फिर से केन्द्रक झिल्ली बनने लगती है और गुणसूत्र धीरे-धीरे फैलने लगते हैं।

पादप और जन्तु कोशिका में Cytokinesis

जन्तु कोशिका में सामान्यतः कोशिका झिल्ली बीच से अंदर की ओर धँसकर cleavage furrow बनाती है। इसके विपरीत पादप कोशिका में कठोर कोशिका भित्ति के कारण बीच में cell plate का निर्माण होता है, जो बाद में नई कोशिका भित्ति का आधार बनती है।

अर्द्धसूत्री विभाजन

अर्द्धसूत्री विभाजन या Meiosis विशेष प्रकार का विभाजन है जिसमें गुणसूत्र संख्या आधी हो जाती है। यह मुख्यतः जनन कोशिकाओं के निर्माण से संबंधित है। इसमें दो क्रमिक विभाजन होते हैं—Meiosis I और Meiosis II।

Meiosis I

पहले विभाजन में समजात गुणसूत्र अलग होते हैं। इसकी पूर्वावस्था I अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें कई उप-अवस्थाएँ होती हैं।

युग्मन और crossing over

समजात गुणसूत्रों का आपस में जोड़ा बनाना synapsis कहलाता है। इनके बीच आनुवंशिक पदार्थ का विनिमय crossing over कहलाता है। यह आनुवंशिक विविधता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Meiosis II

दूसरे विभाजन में अर्द्धगुणसूत्र अलग होते हैं। इसकी प्रकृति कई मामलों में mitosis जैसी होती है, लेकिन इसका आरंभ पहले से ही गुणसूत्र संख्या आधी वाली कोशिकाओं से होता है।

Mitosis और Meiosis में अंतर

समसूत्री विभाजनअर्द्धसूत्री विभाजन
एक विभाजन होता है।दो क्रमिक विभाजन होते हैं।
सामान्यतः दो पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं।सामान्यतः चार पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं।
गुणसूत्र संख्या सामान्यतः समान रहती है।गुणसूत्र संख्या आधी हो जाती है।
सामान्यतः crossing over नहीं होता।Prophase I में crossing over हो सकता है।
वृद्धि और ऊतक मरम्मत में महत्वपूर्ण।युग्मक या बीजाणु निर्माण में महत्वपूर्ण।

अर्द्धसूत्री विभाजन का महत्व

  • युग्मकों में गुणसूत्र संख्या आधी करने में सहायता करता है।
  • निषेचन के बाद प्रजाति की गुणसूत्र संख्या बनाए रखने में मदद करता है।
  • Crossing over के कारण आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।
  • विभिन्न गुणसूत्रों के स्वतंत्र वर्गीकरण से नए आनुवंशिक संयोजन बन सकते हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. कोशिका चक्र क्या है?

उत्तर: कोशिका के निर्माण से लेकर उसकी वृद्धि, DNA प्रतिकृति और अगले विभाजन तक होने वाली घटनाओं के क्रम को कोशिका चक्र कहते हैं।

प्रश्न 2. S phase का प्रमुख कार्य क्या है?

उत्तर: S phase में DNA की प्रतिकृति होती है। इसके परिणामस्वरूप प्रत्येक गुणसूत्र के दो chromatids हो जाते हैं।

प्रश्न 3. G₀ अवस्था क्या है?

उत्तर: G₁ के बाद जब कोई कोशिका सक्रिय विभाजन चक्र से बाहर निकलकर ऐसी अवस्था में चली जाती है जिसमें वह सामान्यतः विभाजित नहीं करती, तो इसे G₀ या प्रशान्त अवस्था कहते हैं।

प्रश्न 4. Karyokinesis और Cytokinesis में अंतर बताइए।

उत्तर: केन्द्रक के विभाजन को Karyokinesis तथा कोशिकाद्रव्य के विभाजन को Cytokinesis कहा जाता है। दोनों के पूरा होने पर नई पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं।

प्रश्न 5. Crossing over क्या है?

उत्तर: अर्द्धसूत्री विभाजन की Prophase I में समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थ के संबंधित खंडों का आदान-प्रदान crossing over कहलाता है। इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है।

प्रश्न 6. Mitosis का क्या महत्व है?

उत्तर: यह शरीर की वृद्धि, विकास, क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत तथा कई जीवों में अलैंगिक प्रजनन में सहायता करता है।

प्रश्न 7. Meiosis का जैविक महत्व क्या है?

उत्तर: Meiosis युग्मकों में गुणसूत्र संख्या को आधा करता है और crossing over तथा स्वतंत्र वर्गीकरण द्वारा आनुवंशिक विविधता पैदा करता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. DNA की प्रतिकृति किस चरण में होती है? — S phase।
  2. G₁ के बाद विभाजन से बाहर रहने वाली अवस्था क्या कहलाती है? — G₀।
  3. केन्द्रक विभाजन को क्या कहते हैं? — Karyokinesis।
  4. कोशिकाद्रव्य विभाजन को क्या कहते हैं? — Cytokinesis।
  5. Crossing over किस विभाजन में होता है? — Meiosis।
  6. समसूत्री विभाजन में सामान्यतः कितनी पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं? — दो।
  7. अर्द्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्र संख्या का क्या होता है? — आधी हो जाती है।

अध्याय सार

कोशिका चक्र में वृद्धि, DNA प्रतिकृति और विभाजन की घटनाएँ क्रम से होती हैं। Mitosis शरीर की वृद्धि और मरम्मत से संबंधित है, जबकि Meiosis जनन कोशिकाओं के निर्माण और आनुवंशिक विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। G₁, S, G₂, M phase, mitotic stages, crossing over और mitosis-meiosis के अंतर इस अध्याय के सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं।

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