Biology Class 11th

Bihar Board Class 11 Biology Chapter 6 – पुष्पी पादपों का शारीर

24 August 2026  |  By Ramnivas KT

Table of Contents

पुष्पी पादपों का शारीर

पुष्पी पादपों का शारीर अध्याय पौधों के अंदर मौजूद ऊतकों और विभिन्न अंगों की आंतरिक संरचना को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। किसी पौधे को बाहर से देखने पर उसकी जड़, तना और पत्तियाँ दिखाई देती हैं, लेकिन इन अंगों के भीतर अलग-अलग प्रकार के ऊतक व्यवस्थित रूप से काम करते हैं। इन्हीं ऊतकों की सहायता से पौधे में वृद्धि, जल एवं खनिजों का परिवहन, भोजन का संचरण और यांत्रिक मजबूती जैसे कार्य होते हैं।

इस अध्याय में मेरिस्टेमेटिक ऊतक, स्थायी ऊतक, सरल एवं जटिल ऊतक, ऊतक तंत्र, संवहन बंडल तथा एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधों की जड़ एवं तने की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है। इसके अलावा द्वितीयक वृद्धि भी इस अध्याय का महत्वपूर्ण भाग है।

पादप ऊतक क्या है?

समान उत्पत्ति और लगभग समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहा जाता है। पौधों में कोशिकाओं की संरचना और कार्य के अनुसार कई प्रकार के ऊतक पाए जाते हैं। सामान्य रूप से पादप ऊतकों को विभज्योतक तथा स्थायी ऊतक में बाँटा जाता है।

मेरिस्टेमेटिक ऊतक

वे ऊतक जिनकी कोशिकाएँ लगातार विभाजित होने की क्षमता रखती हैं, मेरिस्टेमेटिक या विभज्योतक ऊतक कहलाते हैं। पौधे की वृद्धि मुख्यतः इन्हीं ऊतकों की सक्रियता के कारण होती है।

शीर्षस्थ मेरिस्टेम

यह जड़ और तने के अग्र भाग पर पाया जाता है। इसकी सहायता से पौधे की लंबाई में वृद्धि होती है।

अंतर्वेशी मेरिस्टेम

यह प्रायः पर्वसंधियों या उनके आसपास पाया जाता है। घास जैसे पौधों में कट जाने के बाद भी तने या पत्तियों की पुनः वृद्धि में इसकी भूमिका होती है।

पार्श्व मेरिस्टेम

यह पौधे की पार्श्व दिशा में वृद्धि करता है और तने तथा जड़ की मोटाई बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कैम्बियम और कॉर्क कैम्बियम इसके उदाहरण हैं।

स्थायी ऊतक

जब मेरिस्टेमेटिक कोशिकाएँ विभाजन की क्षमता कम या समाप्त करके विशेष आकार और कार्य ग्रहण कर लेती हैं, तब वे स्थायी ऊतक बनाती हैं। स्थायी ऊतक सरल और जटिल दोनों प्रकार के हो सकते हैं।

सरल स्थायी ऊतक

मृदूतक

मृदूतक की कोशिकाएँ सामान्यतः जीवित और पतली भित्ति वाली होती हैं। ये भोजन संग्रह, प्रकाश संश्लेषण तथा घाव भरने जैसे कार्यों में सहायता कर सकती हैं।

स्थूलकोण ऊतक

इस ऊतक की कोशिकाओं की भित्ति कोनों पर अधिक मोटी होती है। यह बढ़ते हुए पौधों के भागों को लचीलापन और यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।

दृढ़ोतक

दृढ़ोतक की कोशिकाओं की भित्तियाँ मोटी और प्रायः लिग्निनयुक्त होती हैं। इसका मुख्य कार्य पौधे को मजबूती देना है। इसकी कोशिकाएँ प्रायः परिपक्व अवस्था में मृत होती हैं।

जटिल स्थायी ऊतक

ऐसे ऊतक जिनमें विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ मिलकर एक प्रमुख कार्य करती हैं, जटिल ऊतक कहलाते हैं। जाइलम और फ्लोएम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

जाइलम

जाइलम जड़ से पौधे के ऊपरी भागों तक जल और खनिजों के परिवहन में मुख्य भूमिका निभाता है। इसके प्रमुख घटक ट्रैकीड, वाहिका, जाइलम पैरेंकाइमा और जाइलम तंतु हैं।

फ्लोएम

फ्लोएम पत्तियों में निर्मित भोजन को पौधे के दूसरे भागों तक पहुँचाने का कार्य करता है। इसके प्रमुख घटक चालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम पैरेंकाइमा और फ्लोएम तंतु हैं।

ट्रैकीड और वाहिका में अंतर

ट्रैकीडवाहिका
लंबी और अपेक्षाकृत संकरी कोशिकाएँ होती हैं।अधिक चौड़ी नलिकाकार संरचनाएँ बनाती हैं।
इनमें छिद्रयुक्त क्षेत्र होते हैं।वाहिका के सदस्य सिरों पर छिद्रों से जुड़े हो सकते हैं।
जिम्नोस्पर्म में प्रमुख जल-संवाहक तत्व हैं।आवृतबीजियों में विशेष रूप से विकसित पाए जाते हैं।

ऊतक तंत्र

पुष्पी पौधों में ऊतक मुख्यतः तीन तंत्रों में व्यवस्थित होते हैं—त्वचीय ऊतक तंत्र, मूलभूत ऊतक तंत्र और संवहन ऊतक तंत्र।

त्वचीय ऊतक तंत्र

यह पौधे की बाहरी सतह को ढकता है। एपिडर्मिस इसका प्रमुख भाग है। यह पौधे को बाहरी वातावरण से सुरक्षा प्रदान करता है।

मूलभूत ऊतक तंत्र

यह मुख्यतः मृदूतक, स्थूलकोण ऊतक और दृढ़ोतक से बना होता है। यह भोजन संग्रह, प्रकाश संश्लेषण और सहारा देने जैसे कार्य करता है।

संवहन ऊतक तंत्र

जाइलम और फ्लोएम मिलकर संवहन ऊतक तंत्र बनाते हैं। यह जल, खनिज और कार्बनिक पदार्थों के परिवहन के लिए आवश्यक है।

खुला और बंद संवहन बंडल

जिस संवहन बंडल में जाइलम और फ्लोएम के बीच कैम्बियम पाया जाता है, उसे खुला संवहन बंडल कहते हैं। जिस बंडल में कैम्बियम नहीं होता, वह बंद संवहन बंडल कहलाता है।

द्विबीजपत्री जड़ की आंतरिक संरचना

द्विबीजपत्री जड़ में बाहरी स्तर पर एपिब्लेमा, उसके भीतर कॉर्टेक्स और फिर एंडोडर्मिस पाया जाता है। एंडोडर्मिस के अंदर पेरीसाइकिल और संवहन ऊतक स्थित होते हैं। जाइलम सामान्यतः केन्द्र की ओर स्थित होता है और जाइलम की भुजाओं की संख्या सीमित हो सकती है।

एकबीजपत्री जड़ की विशेषताएँ

एकबीजपत्री जड़ में सामान्यतः अनेक जाइलम भुजाएँ होती हैं। मज्जा अधिक विकसित होती है और द्वितीयक वृद्धि सामान्यतः नहीं होती।

द्विबीजपत्री तना

द्विबीजपत्री तने में एपिडर्मिस के भीतर कॉर्टेक्स और एंडोडर्मिस के बाद पेरिसाइकिल तथा संवहन बंडल पाए जाते हैं। संवहन बंडल सामान्यतः एक वलय में व्यवस्थित और खुले होते हैं।

एकबीजपत्री तना

एकबीजपत्री तने में संवहन बंडल मूलभूत ऊतक में बिखरे हुए दिखाई देते हैं। ये सामान्यतः बंद होते हैं और इनमें कैम्बियम नहीं होता।

द्वितीयक वृद्धि

पौधे की लंबाई के बजाय उसकी मोटाई में होने वाली वृद्धि को द्वितीयक वृद्धि कहा जाता है। इसमें संवहन कैम्बियम और कॉर्क कैम्बियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। काष्ठीय पौधों में यह प्रक्रिया विशेष रूप से स्पष्ट होती है।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. मेरिस्टेमेटिक ऊतक क्या है?

उत्तर: विभाजन करने की सक्रिय क्षमता रखने वाली कोशिकाओं से बने ऊतक को मेरिस्टेमेटिक ऊतक कहते हैं। यह पौधे के विभिन्न भागों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता है।

प्रश्न 2. मेरिस्टेम कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: स्थिति के आधार पर मेरिस्टेम मुख्यतः शीर्षस्थ, अंतर्वेशी और पार्श्व मेरिस्टेम होते हैं।

प्रश्न 3. जाइलम का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर: जाइलम मुख्यतः जड़ से जल और खनिजों को पौधे के ऊपरी भागों तक पहुँचाता है तथा पौधे को यांत्रिक सहारा भी देता है।

प्रश्न 4. फ्लोएम का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर: फ्लोएम पत्तियों और अन्य स्रोत भागों में बने कार्बनिक भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।

प्रश्न 5. मृदूतक और स्थूलकोण ऊतक में अंतर बताइए।

उत्तर: मृदूतक की कोशिकाएँ सामान्यतः पतली भित्ति वाली होती हैं, जबकि स्थूलकोण ऊतक की कोशिकाओं की भित्ति विशेष रूप से कोनों पर मोटी होती है। मृदूतक मुख्यतः भंडारण और प्रकाश संश्लेषण में तथा स्थूलकोण ऊतक सहारा देने में उपयोगी है।

प्रश्न 6. रसदारु और अंतःकाष्ठ में अंतर बताइए।

उत्तर: बाहरी सक्रिय काष्ठ भाग, जिसमें जल का परिवहन होता है, रसदारु कहलाता है। अंदर का पुराना और अधिक गहरे रंग का भाग अंतःकाष्ठ कहलाता है, जो मुख्यतः यांत्रिक मजबूती देता है।

प्रश्न 7. एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री तने में एक प्रमुख अंतर लिखिए।

उत्तर: द्विबीजपत्री तने के संवहन बंडल सामान्यतः वलय में व्यवस्थित होते हैं और खुले होते हैं, जबकि एकबीजपत्री तने में संवहन बंडल मूलभूत ऊतक में बिखरे और सामान्यतः बंद होते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. पौधे की लंबाई बढ़ाने वाला मेरिस्टेम कौन-सा है? — शीर्षस्थ मेरिस्टेम।
  2. जाइलम का प्रमुख कार्य क्या है? — जल और खनिजों का परिवहन।
  3. फ्लोएम किसका परिवहन करता है? — भोजन का।
  4. जाइलम और फ्लोएम किस प्रकार के ऊतक हैं? — जटिल स्थायी ऊतक।
  5. कैम्बियम वाले संवहन बंडल को क्या कहते हैं? — खुला संवहन बंडल।
  6. एकबीजपत्री तने के संवहन बंडल कैसे होते हैं? — बिखरे हुए और सामान्यतः बंद।

अध्याय सार

इस अध्याय में पौधों के ऊतक संगठन और विभिन्न अंगों की आंतरिक रचना को समझा जाता है। मेरिस्टेम वृद्धि के लिए, जाइलम जल-खनिज परिवहन के लिए और फ्लोएम भोजन के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है। परीक्षा में ऊतकों के अंतर, संवहन बंडल तथा एकबीजपत्री-द्विबीजपत्री जड़ और तने की तुलना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

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