Chemistry Class 11th

Bihar Board Class 11 Chemistry Chapter 3 – तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

24 August 2026  |  By Ramnivas KT

तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता कक्षा 11 रसायन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय में यह समझाया जाता है कि अलग-अलग तत्त्वों को आवर्त सारणी में किस आधार पर व्यवस्थित किया गया है और किसी तत्त्व की स्थिति देखकर उसके गुणों के बारे में किस प्रकार अनुमान लगाया जा सकता है।

शुरुआत में तत्त्वों को व्यवस्थित करने के लिए डॉबेरेनर के त्रिक, न्यूलैंड के अष्टक नियम और मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी जैसे प्रयास किए गए। बाद में परमाणु क्रमांक को आधार बनाकर आधुनिक आवर्त नियम विकसित हुआ। आज की आवर्त सारणी में तत्त्वों को उनके परमाणु क्रमांक तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है।

इस अध्याय में केवल आवर्त सारणी याद करना पर्याप्त नहीं है। यहाँ से परमाणु त्रिज्या, आयनिक त्रिज्या, आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी, विद्युत ऋणात्मकता, धात्विक और अधात्विक गुण जैसे कई ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जिनमें कारण बताना पड़ता है। इसलिए नीचे प्रश्नों के उत्तर केवल एक-दो पंक्तियों में न देकर उनके पीछे का रासायनिक कारण भी सरल भाषा में समझाया गया है।

Table of Contents

तत्त्वों का वर्गीकरण क्यों आवश्यक है?

रसायन विज्ञान में बहुत बड़ी संख्या में तत्त्व ज्ञात हैं और प्रत्येक तत्त्व के अपने कुछ विशेष गुण होते हैं। यदि सभी तत्त्वों को बिना किसी क्रम के अलग-अलग पढ़ा जाए तो उनके गुणों को याद रखना कठिन हो जाएगा। इसलिए वैज्ञानिकों ने समान गुणों वाले तत्त्वों को एक निश्चित व्यवस्था में रखने का प्रयास किया। इसी क्रमिक विकास से आधुनिक आवर्त सारणी अस्तित्व में आई।

आवर्त सारणी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसी तत्त्व की स्थिति देखकर उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और कई रासायनिक गुणों के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है। यही कारण है कि आवर्त सारणी को रसायन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

आवर्त सारणी के विकास की प्रमुख अवस्थाएँ

डॉबेरेनर के त्रिक

डॉबेरेनर ने समान गुणों वाले कुछ तत्त्वों को तीन-तीन के समूह में रखने का प्रयास किया। ऐसे समूहों को त्रिक कहा गया। किसी त्रिक में बीच वाले तत्त्व का परमाणु द्रव्यमान लगभग पहले और तीसरे तत्त्व के परमाणु द्रव्यमान के औसत के बराबर पाया जाता था।

यह व्यवस्था सभी ज्ञात तत्त्वों पर लागू नहीं हो सकी, इसलिए इसका उपयोग सीमित रहा। फिर भी यह तत्त्वों के वर्गीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक प्रयास था।

न्यूलैंड का अष्टक नियम

न्यूलैंड ने तत्त्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखने पर पाया कि प्रत्येक आठवाँ तत्त्व पहले तत्त्व के समान गुण प्रदर्शित करता है। उन्होंने इसकी तुलना संगीत के सात स्वरों के बाद आठवें स्वर के दोहराव से की और इसे अष्टक का नियम कहा।

यह नियम हल्के तत्त्वों के लिए कुछ हद तक उपयोगी था, लेकिन भारी तत्त्वों के लिए इसकी सीमाएँ सामने आईं।

मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी

मेण्डेलीफ ने तत्त्वों को मुख्य रूप से उनके परमाणु द्रव्यमान और रासायनिक गुणों के आधार पर व्यवस्थित किया। उन्होंने समान गुण वाले तत्त्वों को एक ही समूह में रखा और कुछ स्थान भविष्य में खोजे जाने वाले तत्त्वों के लिए खाली छोड़े।

मेण्डेलीफ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह थी कि उन्होंने कुछ अज्ञात तत्त्वों के गुणों का अनुमान पहले ही लगा लिया था। बाद में जब ऐसे तत्त्व खोजे गए तो उनके गुण अनुमान के काफी निकट पाए गए।

आधुनिक आवर्त नियम

आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्त्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं। इसका अर्थ है कि परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ तत्त्वों के गुण एक निश्चित अंतराल के बाद फिर से समान प्रकार की प्रवृत्ति दिखाते हैं।

आधुनिक आवर्त सारणी की मूल संरचना

आधुनिक आवर्त सारणी में 7 आवर्त और 18 समूह होते हैं। समान समूह के तत्त्वों के संयोजकता इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में समानता होने के कारण उनके रासायनिक गुणों में भी समानता दिखाई देती है।

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर तत्त्वों को मुख्य रूप से चार blocks में बाँटा जाता है:

  • s-block
  • p-block
  • d-block
  • f-block

s-ब्लॉक तत्त्व

s-block में मुख्य रूप से समूह 1 और 2 के तत्त्व आते हैं। इनका बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास सामान्यतः ns1-2 होता है।

p-ब्लॉक तत्त्व

p-block में समूह 13 से 18 तक के तत्त्व आते हैं। इनका सामान्य बाह्य विन्यास ns2np1-6 होता है।

d-ब्लॉक तत्त्व

d-block के तत्त्व समूह 3 से 12 के बीच पाए जाते हैं। इनका सामान्य विन्यास (n−1)d1-10ns0-2 के रूप में लिखा जाता है। इन्हें संक्रमण तत्त्व भी कहा जाता है।

f-ब्लॉक तत्त्व

f-block में लैंथेनाइड और ऐक्टिनाइड श्रेणियाँ आती हैं। इनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन मुख्यतः f-subshell में प्रवेश करता है। इनका सामान्य विन्यास (n−2)f1-14(n−1)d0-1ns2 होता है।


अभ्यास के प्रश्न एवं विस्तृत उत्तर

प्रश्न 3.1 – आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?

उत्तर: आवर्त सारणी का मूल उद्देश्य ऐसे तत्त्वों को एक साथ रखना है जिनके भौतिक और रासायनिक गुण समान या मिलते-जुलते हों।

इन समानताओं का मुख्य कारण उनके बाहरी या संयोजकता कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है। एक ही समूह के तत्त्वों में संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या और उनका विन्यास सामान्यतः समान प्रकार का होता है। इसी कारण उनके रासायनिक व्यवहार में समानता दिखाई देती है।

इसलिए आवर्त सारणी में तत्त्वों की व्यवस्था का आधार केवल उनका नाम या परमाणु द्रव्यमान नहीं, बल्कि परमाणु क्रमांक और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से उत्पन्न आवर्तीय गुण हैं।

प्रश्न 3.2 – मेण्डेलीफ ने किस महत्त्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उस पर दृढ़ रह पाए?

उत्तर: मेण्डेलीफ ने तत्त्वों के परमाणु द्रव्यमान को वर्गीकरण का प्रमुख आधार बनाया था। उन्होंने तत्त्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया और समान रासायनिक गुण वाले तत्त्वों को एक समूह में रखा।

लेकिन बाद में कुछ ऐसे उदाहरण मिले जहाँ केवल परमाणु द्रव्यमान के आधार पर तत्त्वों को सही क्रम में रखना संभव नहीं था। समस्थानिकों की समस्या भी सामने आई। इसलिए आधुनिक आवर्त सारणी में परमाणु द्रव्यमान के स्थान पर परमाणु क्रमांक को आधार बनाया गया।

प्रश्न 3.3 – मेण्डेलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अन्तर क्या है?

उत्तर: दोनों नियमों में मुख्य अंतर उस राशि का है जिसे तत्त्वों की आवर्तिता का आधार माना गया।

मेण्डेलीफ का नियम: तत्त्वों के गुणधर्म उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन हैं।

आधुनिक आवर्त नियम: तत्त्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन हैं।

आधुनिक नियम अधिक वैज्ञानिक है क्योंकि परमाणु क्रमांक नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या बताता है और यही परमाणु के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को निर्धारित करता है।

प्रश्न 3.4 – क्वांटम संख्याओं के आधार पर सिद्ध कीजिए कि छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होने चाहिए।

उत्तर: छठवें आवर्त में जिन subshells में इलेक्ट्रॉन भरते हैं वे मुख्यतः 6s, 4f, 5d और 6p हैं।

इनकी अधिकतम इलेक्ट्रॉन क्षमता क्रमशः:

  • 6s → 2 इलेक्ट्रॉन
  • 4f → 14 इलेक्ट्रॉन
  • 5d → 10 इलेक्ट्रॉन
  • 6p → 6 इलेक्ट्रॉन

अतः कुल इलेक्ट्रॉन:

2 + 14 + 10 + 6 = 32

इसलिए छठवें आवर्त में अधिकतम 32 तत्त्व हो सकते हैं।

प्रश्न 3.5 – Z = 14 वाला तत्त्व आवर्त सारणी में कहाँ स्थित होगा?

उत्तर: परमाणु क्रमांक 14 वाला तत्त्व सिलिकॉन (Si) है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:

1s2 2s2 2p6 3s2 3p2

सबसे बाहरी कोश n = 3 है, इसलिए यह तीसरे आवर्त में होगा। इसका बाहरी विन्यास ns2np2 है, इसलिए यह समूह 14 में स्थित है।

प्रश्न 3.6 – तीसरे आवर्त और 17वें समूह के तत्त्व का परमाणु क्रमांक लिखिए।

उत्तर: तीसरे आवर्त के तत्त्व हैं Na, Mg, Al, Si, P, S, Cl और Ar। इनमें 17वें समूह का तत्त्व क्लोरीन (Cl) है।

क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 है।

प्रश्न 3.7 – लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला और सीबोर्ग समूह से जुड़े तत्त्वों के नाम लिखिए।

उत्तर:

  • परमाणु क्रमांक 103 वाला तत्त्व लॉरेन्सियम (Lr) है।
  • परमाणु क्रमांक 106 वाला तत्त्व सीबोर्गियम (Sg) है।

प्रश्न 3.8 – एक ही समूह में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुण समान क्यों होते हैं?

उत्तर: किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का आकार बदलता रहता है, लेकिन उनके बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान प्रकार का रहता है।

उदाहरण के लिए समूह 1 के तत्त्वों में सामान्य बाहरी विन्यास ns1 होता है। इसलिए Li, Na और K जैसे तत्त्व एक-एक इलेक्ट्रॉन आसानी से त्यागते हैं और इनके रासायनिक गुणों में समानता दिखाई देती है।

प्रश्न 3.9 – परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या से क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी परमाणु के आकार को व्यक्त करने के लिए परमाणु त्रिज्या का प्रयोग किया जाता है। सहसंयोजक अणु में दो समान परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी का आधा उस परमाणु की सहसंयोजक त्रिज्या माना जा सकता है।

आयनिक त्रिज्या किसी आयन के प्रभावी आकार को दर्शाती है। जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन खोता है तो धनायन बनता है और जब इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है तो ऋणायन बनता है। इनके आकार क्रमशः मूल परमाणु से कम और अधिक होते हैं।

प्रश्न 3.10 – किसी समूह या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार बदलती है?

उत्तर: आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु त्रिज्या सामान्यतः घटती है। इसका कारण यह है कि उसी मुख्य कोश में इलेक्ट्रॉन जुड़ते जाते हैं, जबकि नाभिकीय आवेश लगातार बढ़ता है। इससे नाभिक बाहरी इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से आकर्षित करता है।

समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि प्रत्येक अगले तत्त्व में एक नया इलेक्ट्रॉनिक कोश जुड़ जाता है। साथ ही shielding effect भी बढ़ता है।

प्रश्न 3.11 – समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज क्या हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर: ऐसी परमाण्विक या आयनिक स्पीशीज जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज कहते हैं।

उदाहरण के लिए F, Ne और Na+ सभी में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए ये तीनों समइलेक्ट्रॉनिक हैं।

  • F → 9 + 1 = 10 इलेक्ट्रॉन
  • Ne → 10 इलेक्ट्रॉन
  • Na+ → 11 − 1 = 10 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 3.12 – N3−, O2−, F, Na+, Mg2+ और Al3+ में क्या समानता है? इन्हें आयनिक त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

उत्तर: इन सभी आयनों में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए ये सभी समइलेक्ट्रॉनिक हैं।

इनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होने के कारण आकार का निर्धारण मुख्य रूप से नाभिकीय आवेश से होता है। जिसका परमाणु क्रमांक अधिक होगा, उसका नाभिक इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से आकर्षित करेगा और आयनिक त्रिज्या छोटी होगी।

इसलिए बढ़ते हुए आयनिक आकार का क्रम:

Al3+ < Mg2+ < Na+ < F < O2− < N3−

प्रश्न 3.13 – धनायन अपने मूल परमाणु से छोटे और ऋणायन बड़े क्यों होते हैं?

उत्तर: जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागता है तो धनायन बनता है। इलेक्ट्रॉनों की संख्या कम हो जाने से इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण घटता है और प्रति इलेक्ट्रॉन प्रभावी नाभिकीय आकर्षण बढ़ जाता है। कई बार बाहरी पूरा कोश भी समाप्त हो जाता है। इसलिए धनायन का आकार मूल परमाणु से छोटा हो जाता है।

दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऋणायन बनता है। इसमें इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ता है और प्रति इलेक्ट्रॉन प्रभावी आकर्षण अपेक्षाकृत घटता है। इसलिए इलेक्ट्रॉन बादल फैलता है और ऋणायन का आकार बढ़ जाता है।

प्रश्न 3.14 – आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की परिभाषा में विलगित गैसीय परमाणु और आद्य अवस्था का क्या महत्व है?

उत्तर: आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की तुलना तभी उचित होती है जब सभी तत्त्वों को समान अवस्था में माना जाए। इसलिए इनके लिए isolated gaseous atom को आधार बनाया जाता है।

विलगित गैसीय परमाणु: इसका अर्थ है कि परमाणु किसी दूसरे परमाणु या अणु के साथ बंधा हुआ नहीं है। इस स्थिति में इलेक्ट्रॉन हटाने या जोड़ने की ऊर्जा का अध्ययन स्वतंत्र परमाणु के लिए किया जाता है।

आद्य अवस्था: इसका अर्थ है परमाणु की सबसे कम ऊर्जा वाली सामान्य अवस्था। यदि किसी उत्तेजित परमाणु से इलेक्ट्रॉन हटाया जाए तो परिणाम अलग हो सकता है। इसलिए सामान्यतः ground state को reference माना जाता है।

प्रश्न 3.15 – हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी J mol−1 में ज्ञात कीजिए।

प्रश्न: हाइड्रोजन परमाणु की आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा −2.18 × 10−18 J है। हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी J mol−1 में ज्ञात कीजिए।

हल:

एक H atom को ionise करने के लिए आवश्यक ऊर्जा:

ΔE = 0 − (−2.18 × 10−18)

= 2.18 × 10−18 J

एक mole में 6.022 × 1023 atoms होते हैं। इसलिए:

ΔH = 2.18 × 10−18 × 6.022 × 1023

≈ 1.31 × 106 J mol−1

अर्थात लगभग 1312 kJ mol−1

प्रश्न 3.16 – Be की आयनन एन्थैल्पी B से अधिक और O की N से कम क्यों है?

उत्तर: Be और B का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास देखें:

Be: 1s22s2

B: 1s22s22p1

B का हटाया जाने वाला इलेक्ट्रॉन 2p orbital में है, जबकि Be का इलेक्ट्रॉन 2s orbital में है। 2s electron nucleus के अधिक निकट penetration करता है और अधिक मजबूती से बंधा होता है। इसलिए Be से इलेक्ट्रॉन निकालना B की तुलना में कठिन है।

अब N और O को देखें:

N: 1s22s22p3

O: 1s22s22p4

N में तीनों 2p orbitals में एक-एक electron होता है। यह half-filled arrangement अपेक्षाकृत स्थिर है। O में एक 2p orbital में electron pair बन जाता है, जिससे आपसी प्रतिकर्षण बढ़ता है। इसलिए O से electron निकालना N की तुलना में कुछ आसान हो जाता है और O की प्रथम आयनन एन्थैल्पी N से कम होती है।

प्रश्न 3.17 – Na की प्रथम आयनन एन्थैल्पी Mg से कम, लेकिन द्वितीय आयनन एन्थैल्पी अधिक क्यों है?

उत्तर: Na का विन्यास:

Na = [Ne]3s1

Mg का विन्यास:

Mg = [Ne]3s2

पहली आयनन प्रक्रिया में Na का एक 3s electron आसानी से निकल जाता है, जबकि Mg का पूर्ण 3s2 arrangement अपेक्षाकृत अधिक स्थिर है। इसलिए:

IE1(Na) < IE1(Mg)

लेकिन Na से पहला electron निकलने के बाद Na+ का stable noble-gas configuration [Ne] बन जाता है। अब दूसरा electron निकालना बहुत कठिन है।

Mg से पहला electron निकलने पर Mg+ = [Ne]3s1 बचता है, जिससे दूसरा 3s electron अपेक्षाकृत आसानी से निकाला जा सकता है। इसलिए:

IE2(Na) > IE2(Mg)

प्रश्न 3.18 – समूह में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी क्यों घटती है?

उत्तर: सामान्यतः किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • नया इलेक्ट्रॉनिक कोश जुड़ने से परमाणु का आकार बढ़ता है।
  • बाहरी electron nucleus से दूर हो जाता है।
  • आंतरिक electrons की संख्या बढ़ने से shielding effect बढ़ता है।
  • इन कारणों से valence electron पर nucleus का प्रभावी आकर्षण घटता है।

इसलिए बाहरी electron को हटाने के लिए कम ऊर्जा चाहिए।

प्रश्न 3.19 – समूह 13 में प्रथम आयनन एन्थैल्पी की सामान्य प्रवृत्ति में विचलन क्यों मिलता है?

उत्तर: सामान्यतः समूह में नीचे जाने पर atomic size बढ़ने के कारण ionisation enthalpy घटनी चाहिए। लेकिन कुछ भारी तत्त्वों में यह प्रवृत्ति पूरी तरह सीधी नहीं रहती।

Ga में 3d electrons का shielding प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर होता है। इसलिए nucleus का effective attraction अपेक्षा से अधिक रहता है और Ga की ionisation enthalpy सामान्य trend से अधिक दिखाई दे सकती है। इसी प्रकार भारी तत्वों में inner d और f electrons की कमजोर shielding भी effective nuclear charge को प्रभावित करती है।

प्रश्न 3.20 – निम्न में किसकी electron gain enthalpy अधिक ऋणात्मक होगी: O या F तथा F या Cl?

उत्तर:

(क) O और F: F की electron gain enthalpy अधिक ऋणात्मक होती है क्योंकि F को एक electron प्राप्त करने पर stable noble-gas configuration मिल जाता है।

(ख) F और Cl: यहाँ सामान्य अपेक्षा से महत्वपूर्ण अपवाद मिलता है। Cl की electron gain enthalpy F से अधिक ऋणात्मक होती है। F का आकार बहुत छोटा होने के कारण उसके compact 2p orbital में आने वाले नए electron को अधिक electron-electron repulsion का सामना करना पड़ता है। Cl में electron 3p orbital में प्रवेश करता है जो बड़ा होता है, इसलिए repulsion अपेक्षाकृत कम होता है।

प्रश्न 3.21 – O की दूसरी electron gain enthalpy पहली की तुलना में कैसी होगी?

उत्तर: O की दूसरी electron gain enthalpy धनात्मक होती है।

पहला electron neutral oxygen में जुड़कर O बनाता है। लेकिन दूसरे electron को पहले से ऋणावेशित O में डालना पड़ता है। दोनों ऋणावेशों के बीच प्रतिकर्षण के कारण दूसरे electron को जोड़ने के लिए बाहर से ऊर्जा देनी पड़ती है।

इसलिए दूसरी electron gain enthalpy positive होती है।

प्रश्न 3.22 – Electron gain enthalpy और electronegativity में क्या अंतर है?

उत्तर:

Electron gain enthalpy उस ऊर्जा परिवर्तन को दर्शाती है जो किसी isolated gaseous atom द्वारा एक electron ग्रहण करने पर होता है। यह एक measurable thermodynamic quantity है।

Electronegativity किसी bonded atom की वह प्रवृत्ति है जिसके द्वारा वह रासायनिक बंध में साझा electron pair को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह relative quantity है और इसे सीधे isolated atom के लिए उसी अर्थ में नहीं मापा जाता।

सरल शब्दों में, electron gain enthalpy में एक स्वतंत्र गैसीय atom द्वारा electron ग्रहण करना देखा जाता है, जबकि electronegativity में रासायनिक बंध में electron pair को आकर्षित करने की क्षमता देखी जाती है।

प्रश्न 3.23 – क्या सभी nitrogen compounds में N की electronegativity 3.0 होती है?

उत्तर: यह कथन पूरी तरह सही नहीं है। Pauling scale पर nitrogen की सामान्य electronegativity लगभग 3.0 बताई जाती है, लेकिन किसी compound में उसकी प्रभावी electronegativity bonding environment और hybridisation से प्रभावित हो सकती है।

Hybrid orbital में s-character बढ़ने पर electron nucleus के अपेक्षाकृत निकट रहता है और electronegativity भी बढ़ने की प्रवृत्ति दिखाती है। इसलिए compound के संदर्भ के बिना केवल एक संख्या को हर स्थिति में लागू करना उचित नहीं है।

प्रश्न 3.24 – इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने और इलेक्ट्रॉन त्यागने पर परमाणु की त्रिज्या में क्या परिवर्तन होता है?

उत्तर: इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर परमाणु ऋणायन में बदलता है। इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से electron-electron repulsion बढ़ता है और electron cloud फैलता है। इसलिए ऋणायन का आकार मूल परमाणु से बड़ा होता है।

इलेक्ट्रॉन त्यागने पर धनायन बनता है। इलेक्ट्रॉन संख्या घटने से repulsion कम होता है और effective nuclear attraction बढ़ जाता है। कभी-कभी पूरा बाहरी shell ही हट जाता है। इसलिए धनायन मूल परमाणु से छोटा होता है।

प्रश्न 3.25 – किसी तत्त्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न?

उत्तर: किसी तत्त्व के समस्थानिकों में protons की संख्या समान होती है और neutral atoms में electron configuration भी समान रहता है। इसलिए उनकी first ionisation enthalpy सामान्यतः लगभग समान होगी।

समस्थानिकों में मुख्य अंतर neutron की संख्या का होता है। यह electronic configuration को नहीं बदलता, इसलिए ionisation enthalpy में बड़ा अंतर अपेक्षित नहीं होता।

प्रश्न 3.26 – धातु और अधातु में मुख्य अंतर बताइए।

उत्तर:

धातुअधातु
आमतौर पर इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति अधिक होती है।आमतौर पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण या साझा करने की प्रवृत्ति अधिक होती है।
अधिकांश धातुएँ विद्युत और ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं।अधिकांश अधातुएँ विद्युत की खराब चालक होती हैं।
धनायन बनाने की प्रवृत्ति होती है।ऋणायन या covalent bond बनाने की प्रवृत्ति होती है।
सामान्यतः metallic lustre पाया जाता है।सामान्यतः metallic lustre नहीं होता।

प्रश्न 3.27 – आवर्त सारणी की सहायता से निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(क) किस तत्त्व के बाहरी उपकोश में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं?

उत्तर: समूह 15 के तत्त्वों का बाहरी विन्यास ns2np3 होता है। इसलिए N, P, As, Sb और Bi के बाहरी उपकोश में पाँच electrons होते हैं।

(ख) किस तत्त्व की दो electrons त्यागने की प्रवृत्ति होती है?

उत्तर: समूह 2 के तत्त्वों की सामान्य valence configuration ns2 होती है। इसलिए Be, Mg, Ca, Sr और Ba दो electrons त्यागकर stable configuration प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखते हैं।

(ग) किस तत्त्व की दो electrons प्राप्त करने की प्रवृत्ति होती है?

उत्तर: समूह 16 के तत्त्वों का बाहरी विन्यास ns2np4 होता है। इसलिए O, S, Se और Te सामान्यतः दो electrons प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखते हैं।

(घ) किस समूह में सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस जैसे अलग-अलग प्रकार के तत्त्व मिलते हैं?

उत्तर: समूह 17 में विभिन्न भौतिक अवस्थाओं और metallic/non-metallic character वाले तत्त्वों का उदाहरण मिलता है। Fluorine और chlorine गैस, bromine द्रव तथा iodine ठोस है।

प्रश्न 3.28 – समूह 1 में Li < Na < K < Rb < Cs और समूह 17 में F > Cl > Br > I की अभिक्रियाशीलता क्यों है?

उत्तर: समूह 1 के तत्त्वों की reactivity मुख्यतः electron खोने की क्षमता पर निर्भर करती है। ऊपर से नीचे जाने पर atomic size बढ़ता है और ionisation enthalpy घटती है। इसलिए electron आसानी से निकलता है और metallic reactivity बढ़ती है:

Li < Na < K < Rb < Cs

समूह 17 के halogens electron प्राप्त करके stable configuration प्राप्त करना चाहते हैं। ऊपर से नीचे जाने पर electron-gaining tendency सामान्यतः घटती है। इसलिए:

F > Cl > Br > I

प्रश्न 3.29 – s, p, d और f-block तत्त्वों का सामान्य बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

उत्तर:

  • s-block: ns1-2
  • p-block: ns2np1-6
  • d-block: (n−1)d1-10ns0-2
  • f-block: (n−2)f1-14(n−1)d0-1ns2

प्रश्न 3.30 – दिए गए बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से तत्त्व का आवर्त और समूह बताइए।

(क) ns2np4, n = 3

सबसे बड़ा n = 3 है, इसलिए तीसरा आवर्त। p4 होने के कारण समूह 16।

उत्तर: तीसरा आवर्त, समूह 16।

(ख) (n−1)d2ns2, n = 4

यह d-block configuration है। n = 4 होने से चौथा आवर्त और d-electrons तथा s-electrons की कुल संख्या 2 + 2 = 4 होने के कारण समूह 4।

उत्तर: चौथा आवर्त, समूह 4।

(ग) (n−2)f7(n−1)d1ns2, n = 6

यह f-block configuration है और n = 6 होने के कारण छठा आवर्त। f-block के बाद संबंधित स्थिति समूह 3 से जुड़ती है।

उत्तर: छठा आवर्त, समूह 3 से संबंधित f-block स्थिति।

प्रश्न 3.31 – दिए गए ionisation enthalpy और electron gain enthalpy के आधार पर तत्त्वों की पहचान कीजिए।

उत्तर: ऐसे प्रश्नों में केवल एक value देखकर निर्णय नहीं करना चाहिए। First और second ionisation enthalpy के बीच का अंतर तथा electron gain enthalpy को साथ में देखना आवश्यक है।

  • जिस धातु की first ionisation enthalpy सबसे कम होगी, वह electron सबसे आसानी से खोएगी और अधिक reactive metal होगी।
  • जिस धातु की ionisation enthalpy अधिक होगी, वह सामान्यतः कम reactive metal होगी।
  • Reactive non-metal में electron gain करने की प्रवृत्ति अधिक और ionisation enthalpy भी सामान्यतः अधिक होती है।
  • यदि first और second ionisation enthalpy के बीच बहुत बड़ा jump हो, तो यह संकेत देता है कि एक valence electron निकलने के बाद noble-gas configuration प्राप्त हो गई है।

प्रश्न 3.32 – निम्न तत्त्व-युग्मों से बनने वाले स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्र लिखिए।

(क) Lithium और oxygen

Li की valency 1 और O की valency 2 है। इसलिए:

Li2O

(ख) Magnesium और nitrogen

Mg की valency 2 और N की valency 3 है। इसलिए:

Mg3N2

(ग) Aluminium और iodine

Al की valency 3 और I की valency 1 है। इसलिए:

AlI3

(घ) Silicon और oxygen

सामान्य स्थायी compound:

SiO2

(ङ) Phosphorus और fluorine

एक सामान्य binary compound:

PF5

(च) 71वाँ तत्त्व और fluorine

71वाँ तत्त्व lutetium (Lu) है। इसके साथ fluorine का सामान्य ionic compound:

LuF3

प्रश्न 3.33 – आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त किसे व्यक्त करता है?

विकल्प:

  • (क) परमाणु संख्या
  • (ख) परमाणु द्रव्यमान
  • (ग) मुख्य क्वांटम संख्या
  • (घ) द्विगंशी क्वांटम संख्या

सही उत्तर: (ग) मुख्य क्वांटम संख्या

किसी आवर्त के तत्त्वों में सबसे बाहरी occupied shell की principal quantum number उस period number से संबंधित होती है।

प्रश्न 3.34 – आधुनिक आवर्त सारणी के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?

  • (क) p-block में 6 columns होते हैं।
  • (ख) d-block में 8 columns होते हैं।
  • (ग) किसी block में columns की संख्या संबंधित subshell की अधिकतम electron capacity से जुड़ी होती है।
  • (घ) अंतिम भरा जाने वाला subshell block की पहचान करने में मदद करता है।

सही उत्तर: (ख)

d-subshell में 5 orbitals होते हैं और प्रत्येक orbital में 2 electrons आ सकते हैं। इसलिए d-subshell में अधिकतम 10 electrons हो सकते हैं। इसी कारण d-block में 10 groups होते हैं, 8 नहीं।

प्रश्न 3.35 – कौन-सा कारक संयोजकता कोश को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक नहीं है?

  • (क) मुख्य क्वांटम संख्या (n)
  • (ख) नाभिकीय आवेश (Z)
  • (ग) नाभिकीय द्रव्यमान
  • (घ) क्रोड इलेक्ट्रॉनों की संख्या

सही उत्तर: (ग) नाभिकीय द्रव्यमान

Chemical behaviour मुख्य रूप से electronic configuration, nuclear charge, shielding और valence-shell structure से प्रभावित होता है। केवल neutron की संख्या यानी nuclear mass में परिवर्तन से valence electronic configuration नहीं बदलता।

प्रश्न 3.36 – F, Ne और Na+ जैसी समइलेक्ट्रॉनिक species का आकार किससे प्रभावित होता है?

  • (क) नाभिकीय आवेश
  • (ख) मुख्य क्वांटम संख्या
  • (ग) बाहरी electrons के बीच interaction
  • (घ) कोई नहीं

सही उत्तर: (क) नाभिकीय आवेश

तीनों species में electrons की संख्या 10 है। इसलिए जिस species का nuclear charge अधिक है, उसका nucleus समान electron cloud को अधिक मजबूती से खींचेगा और उसका आकार छोटा होगा।

अतः:

Na+ < Ne < F

प्रश्न 3.37 – आयनन एन्थैल्पी के संदर्भ में कौन-सा कथन असत्य है?

  • (क) क्रमिक ionisation enthalpies सामान्यतः बढ़ती हैं।
  • (ख) Noble-gas core से electron निकालना बहुत अधिक energy मांगता है।
  • (ग) Ionisation enthalpy में अचानक बहुत बड़ी वृद्धि valence electrons हट जाने का संकेत दे सकती है।
  • (घ) कम n वाले orbital के electrons अधिक n वाले orbital की तुलना में आसानी से निकलते हैं।

सही उत्तर: (घ)

कम n वाले orbitals के electrons nucleus के अधिक निकट होते हैं और सामान्यतः अधिक मजबूती से बंधे होते हैं। इसलिए उन्हें हटाना अधिक कठिन होता है।

प्रश्न 3.38 – B, Al, Mg और K में metallic character का सही क्रम क्या है?

  • (क) B > Al > Mg > K
  • (ख) Al > Mg > B > K
  • (ग) Mg > Al > K > B
  • (घ) K > Mg > Al > B

सही उत्तर: (घ) K > Mg > Al > B

Metallic character आवर्त में बाएँ से दाएँ घटता है और समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है। K एक अत्यधिक electropositive metal है, जबकि B अपेक्षाकृत अधिक non-metallic character दिखाता है।

प्रश्न 3.39 – B, C, N, F और Si में non-metallic character का सही क्रम क्या है?

  • (क) B > C > Si > N > F
  • (ख) Si > C > B > N > F
  • (ग) F > N > C > B > Si
  • (घ) F > N > C > Si > B

सही उत्तर: (ग) F > N > C > B > Si

एक ही period में left से right जाने पर non-metallic character बढ़ता है। Si, B के नीचे होने के कारण B की तुलना में अधिक metallic character दिखाता है। इसलिए दिया गया सही क्रम:

F > N > C > B > Si

प्रश्न 3.40 – F, Cl, O और N में oxidising character के आधार पर reactivity का सही क्रम क्या है?

  • (क) F > Cl > O > N
  • (ख) F > O > Cl > N
  • (ग) Cl > F > O > N
  • (घ) O > F > N > Cl

सही उत्तर: (ख) F > O > Cl > N

Oxidising character का संबंध electron स्वीकार करने की प्रवृत्ति से है। Fluorine की electronegativity और electron-attracting tendency बहुत अधिक होती है, इसलिए यह सबसे प्रबल oxidising element है। Oxygen भी अत्यधिक electron-attracting है। Nitrogen की तुलना में oxygen और fluorine की oxidising tendency अधिक होती है।


आवर्तीय गुणों की मुख्य प्रवृत्तियाँ

परमाणु त्रिज्या

आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर atomic radius सामान्यतः घटती है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर atomic radius बढ़ती है। इसे याद रखने का आसान तरीका है कि period में nucleus का खिंचाव बढ़ता है, जबकि group में नए shells जुड़ते जाते हैं।

आयनिक त्रिज्या

धनायन अपने parent atom से छोटे और ऋणायन अपने parent atom से बड़े होते हैं। समइलेक्ट्रॉनिक ions में nuclear charge बढ़ने के साथ ionic radius घटती है।

आयनन एन्थैल्पी

किसी isolated gaseous atom से सबसे loosely bound electron को हटाने के लिए आवश्यक enthalpy को ionisation enthalpy कहते हैं। सामान्यतः period में left to right यह बढ़ती है और group में top to bottom घटती है।

लेकिन Be-B और N-O जैसे कुछ स्थानों पर अपवाद दिखाई देते हैं। इनका कारण subshell energy, penetration और electron-electron repulsion है।

इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी

जब एक gaseous atom एक electron ग्रहण करता है तो energy change को electron gain enthalpy कहते हैं। Halogens में electron ग्रहण करने की प्रवृत्ति विशेष रूप से अधिक होती है। Fluorine के छोटे आकार के कारण उसका electron gain enthalpy chlorine से कम negative होती है—यह एक महत्वपूर्ण अपवाद है।

विद्युत ऋणात्मकता

किसी molecule में bonded electron pair को अपनी ओर आकर्षित करने की परमाणु की क्षमता को electronegativity कहते हैं। सामान्यतः यह period में बाएँ से दाएँ बढ़ती और group में ऊपर से नीचे घटती है। Fluorine सबसे अधिक electronegative element है।

धात्विक और अधात्विक गुण

Metallic character period में बाएँ से दाएँ घटता है और group में नीचे की ओर बढ़ता है। इसके विपरीत non-metallic character period में बढ़ता और group में नीचे की ओर घटता है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सूत्र और नियम

  • आयनन एन्थैल्पी: गैसीय परमाणु से electron हटाने की ऊर्जा।
  • Electron gain enthalpy: gaseous atom द्वारा electron ग्रहण करने पर energy change।
  • Electronegativity: chemical bond में shared electron pair को आकर्षित करने की क्षमता।
  • Atomic radius: period में सामान्यतः घटती, group में बढ़ती है।
  • Ionisation enthalpy: period में सामान्यतः बढ़ती, group में घटती है।
  • Electronegativity: period में बढ़ती, group में घटती है।
  • Metallic character: period में घटता, group में बढ़ता है।
  • Non-metallic character: period में बढ़ता, group में घटता है।
  • s-block: ns1-2
  • p-block: ns2np1-6
  • d-block: (n−1)d1-10ns0-2
  • f-block: (n−2)f1-14(n−1)d0-1ns2

अध्याय के महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. आधुनिक आवर्त नियम का आधार क्या है?

(क) परमाणु द्रव्यमान

(ख) परमाणु क्रमांक

(ग) न्यूट्रॉन संख्या

(घ) परमाणु त्रिज्या

उत्तर: (ख) परमाणु क्रमांक

प्रश्न 2. आधुनिक आवर्त सारणी में कुल कितने समूह हैं?

उत्तर: 18

प्रश्न 3. आधुनिक आवर्त सारणी में कुल कितने आवर्त हैं?

उत्तर: 7

प्रश्न 4. p-block में कितने समूह होते हैं?

उत्तर: 6 समूह

प्रश्न 5. d-block में कितने समूह होते हैं?

उत्तर: 10 समूह

प्रश्न 6. s-block का सामान्य बाहरी विन्यास क्या है?

उत्तर: ns1-2

प्रश्न 7. समूह में नीचे जाने पर atomic radius का क्या होता है?

उत्तर: बढ़ती है।

प्रश्न 8. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर ionisation enthalpy की सामान्य प्रवृत्ति क्या है?

उत्तर: बढ़ती है।

प्रश्न 9. सबसे अधिक electronegative element कौन-सा है?

उत्तर: Fluorine (F)

प्रश्न 10. F, Ne और Na+ किस प्रकार की species हैं?

उत्तर: समइलेक्ट्रॉनिक species

प्रश्न 11. धनायन का आकार parent atom की तुलना में कैसा होता है?

उत्तर: छोटा

प्रश्न 12. ऋणायन का आकार parent atom की तुलना में कैसा होता है?

उत्तर: बड़ा

प्रश्न 13. सबसे अधिक metallic character सामान्यतः आवर्त सारणी के किस क्षेत्र में मिलता है?

उत्तर: नीचे-बाएँ क्षेत्र में।

प्रश्न 14. सबसे अधिक non-metallic character किस क्षेत्र में मिलता है?

उत्तर: ऊपर-दाएँ क्षेत्र में, fluorine के पास।

प्रश्न 15. समूह 17 के तत्त्वों को क्या कहते हैं?

उत्तर: Halogens

प्रश्न 16. समूह 18 के तत्त्वों को क्या कहते हैं?

उत्तर: Noble gases

अध्याय को याद रखने की आसान रणनीति

इस chapter को तैयार करते समय सबसे पहले periodic table की basic structure समझना चाहिए। उसके बाद groups और blocks के electronic configurations याद करें। इसके बाद periodic trends पढ़ें। केवल यह याद करना कि “radius घटती है” या “ionisation enthalpy बढ़ती है” पर्याप्त नहीं है; परीक्षा में अक्सर इसका कारण पूछा जाता है। इसलिए nuclear charge, shielding effect, penetration और electron-electron repulsion को साथ में समझना जरूरी है।

विशेष रूप से Be-B, N-O, F-Cl, Na-Mg जैसे comparisons को अच्छी तरह तैयार करें। ये उदाहरण सामान्य periodic trends को समझने के साथ-साथ उनके exceptions की वजह भी स्पष्ट करते हैं।

अध्याय का सारांश

तत्त्वों का वर्गीकरण रसायन विज्ञान को व्यवस्थित ढंग से समझने का माध्यम है। आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों को परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया गया है। समान valence-shell electronic configuration वाले तत्त्वों को एक ही समूह में रखने से उनके रासायनिक गुणों में समानता दिखाई देती है।

इस अध्याय में atomic radius, ionic radius, ionisation enthalpy, electron gain enthalpy और electronegativity जैसे गुणों की आवर्तीय प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जाता है। इन गुणों को केवल याद करने के बजाय उनके पीछे मौजूद effective nuclear charge, shielding effect, atomic size, electronic configuration और electron-electron repulsion को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।

आवर्त सारणी की यही समझ आगे के अध्यायों में chemical bonding, oxidation states, reactivity और compound formation को समझने में बहुत उपयोगी होती है। इसलिए यह chapter पूरी Chemistry के लिए एक आधार की तरह काम करता है।

पिछला अध्याय: Bihar Board Class 11 Chemistry Chapter 2 – परमाणु की संरचना

अगला अध्याय: Bihar Board Class 11 Chemistry Chapter 4 – रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

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