Hindi Class 11th

Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 1 – पंच परमेश्वर

23 August 2026  |  By Ramnivas KT

Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 1 – पंच परमेश्वर मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। यह कहानी दो मित्रों—जुम्मन शेख और अलगू चौधरी—के माध्यम से न्याय, मित्रता, उत्तरदायित्व और मनुष्य के विवेक को समझाती है। कहानी का सबसे महत्वपूर्ण विचार यह है कि जब कोई व्यक्ति पंच के आसन पर बैठता है, तो उसे निजी संबंधों से ऊपर उठकर निष्पक्ष न्याय करना चाहिए।

Table of Contents

पंच परमेश्वर – लेखक परिचय

मुंशी प्रेमचंद हिंदी कथा-साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में गिने जाते हैं। उनका वास्तविक नाम धनपत राय था। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को लमही, वाराणसी में हुआ था। उन्होंने अपने साहित्य में ग्रामीण जीवन, गरीबी, शोषण, सामाजिक विषमता और सामान्य मनुष्य के संघर्ष को विशेष स्थान दिया।

प्रेमचंद ने लगभग 300 कहानियाँ लिखीं। उनके प्रमुख उपन्यासों में सेवासदन, निर्मला, गबन, रंगभूमि, कर्मभूमि और गोदान शामिल हैं। उनकी कहानियों में आदर्श और यथार्थ का संतुलन तथा सरल, प्रभावी भाषा विशेष रूप से दिखाई देती है।

पंच परमेश्वर का सारांश

जुम्मन शेख और अलगू चौधरी बचपन के घनिष्ठ मित्र थे। दोनों के बीच इतना विश्वास था कि वे एक-दूसरे के घर और जिम्मेदारियों को भी संभालते थे। उनकी मित्रता धर्म या खान-पान के कारण नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और विचारों की समानता के कारण मजबूत थी।

जुम्मन की बूढ़ी खाला ने अपनी थोड़ी-सी संपत्ति जुम्मन के नाम कर दी थी। बदले में जुम्मन से जीवनभर भरण-पोषण की अपेक्षा थी। संपत्ति मिलने के बाद जुम्मन और उनकी पत्नी करीमन का व्यवहार बदल गया। खाला को उपेक्षा और कटु बातें सहनी पड़ीं। अंततः उन्होंने पंचायत बुलाने का निर्णय लिया और अलगू चौधरी को पंच बनाया।

अलगू ने मित्रता से ऊपर उठकर न्याय किया और खाला के पक्ष में फैसला सुनाया। इससे जुम्मन को बहुत बुरा लगा और दोनों मित्रों के बीच दूरी पैदा हो गई।

कुछ समय बाद अलगू चौधरी ने अपना बैल समझू साहू को दिया। समझू ने बैल से बहुत अधिक काम लिया और उसकी उचित देखभाल नहीं की। बैल मर गया और समझू ने उसकी कीमत देने से इनकार कर दिया। पंचायत बैठी और समझू ने जुम्मन को पंच चुना।

जुम्मन के सामने बदला लेने का अवसर था, लेकिन पंच के आसन पर बैठते ही उनका विवेक जाग गया। उन्होंने निष्पक्ष फैसला देते हुए समझू साहू को बैल की कीमत चुकाने का आदेश दिया। इस निर्णय के बाद दोनों मित्रों को समझ आया कि न्याय के सामने निजी मित्रता और दुश्मनी का कोई महत्व नहीं होता।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘पंच परमेश्वर’ के लेखक कौन हैं?

उत्तर: ‘पंच परमेश्वर’ के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं।

प्रश्न 2. प्रेमचंद ने लगभग कितनी कहानियाँ लिखीं?

उत्तर: प्रेमचंद ने लगभग 300 कहानियाँ लिखीं।

प्रश्न 3. जुम्मन की पत्नी का नाम क्या था?

उत्तर: जुम्मन की पत्नी का नाम करीमन था।

प्रश्न 4. जुम्मन के पिता का नाम क्या था?

उत्तर: जुम्मन के पिता का नाम जुमराती शेख था।

प्रश्न 5. अलगू चौधरी के गुरु कौन थे?

उत्तर: अलगू चौधरी के गुरु जुमराती शेख थे।

प्रश्न 6. पंच के पद पर बैठा व्यक्ति किसके प्रति उत्तरदायी होता है?

उत्तर: पंच जाति, धर्म और व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर उठकर न्याय के प्रति उत्तरदायी होता है।

प्रश्न 7. पंच की वाणी को किसकी वाणी माना गया है?

उत्तर: पंच की वाणी को ईश्वर की वाणी के समान माना गया है।

प्रश्न 8. जुम्मन की खाला ने पंचायत क्यों बुलाई?

उत्तर: संपत्ति जुम्मन के नाम करने के बाद उन्हें उचित भरण-पोषण और सम्मान नहीं मिल रहा था, इसलिए उन्होंने पंचायत बुलाई।

प्रश्न 9. दूसरी पंचायत में पंच कौन बने?

उत्तर: दूसरी पंचायत में जुम्मन शेख पंच बने।

प्रश्न 10. अलगू ने अपना बैल किसे दिया था?

उत्तर: अलगू ने अपना बैल समझू साहू को दिया था।

प्रश्न 11. कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: न्याय के समय व्यक्ति को मित्रता और दुश्मनी से ऊपर उठकर सत्य का साथ देना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. जुम्मन और अलगू की मित्रता कैसी थी?

उत्तर: जुम्मन और अलगू बचपन के घनिष्ठ मित्र थे। दोनों एक-दूसरे पर बहुत विश्वास करते थे और आवश्यकता पड़ने पर एक-दूसरे के घर तथा काम की जिम्मेदारी संभालते थे। उनकी मित्रता धर्म या जाति पर नहीं, बल्कि विचारों और आपसी विश्वास पर आधारित थी।

प्रश्न 2. जुम्मन की खाला पंचायत के लिए क्यों मजबूर हुईं?

उत्तर: जुम्मन ने खाला की संपत्ति अपने नाम करा ली थी और उन्हें जीवनभर भोजन तथा सम्मान देने का आश्वासन दिया था। संपत्ति मिलने के बाद जुम्मन और करीमन का व्यवहार बदल गया। खाला को उपेक्षा और कटु बातें सहनी पड़ीं। इसलिए उन्होंने पंचायत का सहारा लिया।

प्रश्न 3. उत्तरदायित्व का ज्ञान मनुष्य को कैसे बदलता है?

उत्तर: उत्तरदायित्व व्यक्ति को निजी स्वार्थ से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। जुम्मन अलगू से नाराज थे, लेकिन पंच बनने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनका निर्णय न्याय से जुड़ा है। इसलिए उन्होंने पुरानी दुश्मनी भूलकर सही फैसला दिया।

प्रश्न 4. ‘पंचों का हुक्म अल्लाह का हुक्म है’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि न्याय के आसन पर बैठा पंच व्यक्तिगत पक्षपात से मुक्त होकर निर्णय करता है। उसका फैसला निजी इच्छा नहीं बल्कि सत्य और न्याय पर आधारित होना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘पंच परमेश्वर’ कहानी का सारांश लिखिए।

उत्तर: ‘पंच परमेश्वर’ प्रेमचंद की ऐसी कहानी है जिसमें मित्रता से अधिक न्याय की शक्ति को महत्व दिया गया है। जुम्मन शेख और अलगू चौधरी घनिष्ठ मित्र हैं। जुम्मन की खाला अपनी संपत्ति जुम्मन के नाम कर देती हैं, लेकिन बाद में उन्हें उचित सम्मान और भरण-पोषण नहीं मिलता। पंचायत में अलगू सरपंच बनते हैं और मित्रता के बावजूद खाला के पक्ष में फैसला करते हैं।

इस फैसले से जुम्मन अलगू से नाराज हो जाते हैं। बाद में अलगू का समझू साहू से बैल को लेकर विवाद होता है और पंचायत में जुम्मन सरपंच बनते हैं। जुम्मन पुरानी दुश्मनी भूलकर निष्पक्ष निर्णय देते हैं। इस प्रकार दोनों पात्र यह सिद्ध करते हैं कि पंच के आसन पर बैठने के बाद न्याय सर्वोपरि हो जाता है।

प्रश्न 2. प्रेमचंद के जीवन और साहित्यिक व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।

उत्तर: प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को लमही में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपत राय था। उन्होंने हिंदी और उर्दू दोनों में साहित्य लिखा और सामान्य मनुष्य के जीवन को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया।

उनकी कहानियों और उपन्यासों में किसान, मजदूर, स्त्री, गरीब और शोषित वर्गों की समस्याएँ प्रमुखता से आती हैं। उनकी भाषा सरल, सहज और जीवन के निकट है। गोदान, गबन, निर्मला, सेवासदन और रंगभूमि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।

प्रश्न 3. ‘पंच परमेश्वर’ कहानी की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: कहानी की प्रमुख विशेषताओं में ग्रामीण परिवेश, प्रभावी चरित्र-चित्रण, स्वाभाविक संवाद, मनोवैज्ञानिक दृष्टि तथा आदर्श और यथार्थ का संतुलन शामिल है। प्रेमचंद ने पंचायत की घटना के माध्यम से मनुष्य के भीतर मौजूद न्याय-बोध को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।

परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु

  • लेखक — मुंशी प्रेमचंद
  • मुख्य पात्र — जुम्मन शेख और अलगू चौधरी
  • जुम्मन की पत्नी — करीमन
  • जुम्मन के पिता — जुमराती शेख
  • मुख्य विषय — न्याय और उत्तरदायित्व
  • मुख्य संदेश — पंच को निजी संबंधों से ऊपर उठना चाहिए

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