Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 5 – ठिठुरता हुआ गणतंत्र
Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 5 – ठिठुरता हुआ गणतंत्र हरिशंकर परसाई की प्रसिद्ध व्यंग्य रचना है। इसमें लेखक ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाले समारोह और सरकारी उपलब्धियों के प्रदर्शन को आधार बनाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया है।
हरिशंकर परसाई – लेखक परिचय
हरिशंकर परसाई हिंदी के प्रमुख व्यंग्यकारों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 1924 ई. में इटारसी, मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने हिंदी में एम.ए. किया और स्वतंत्र लेखन को अपना प्रमुख क्षेत्र बनाया। उनकी रचनाओं में सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन की विसंगतियों पर तीखा प्रहार मिलता है।
परसाई की खासियत यह है कि वे साधारण घटनाओं के भीतर छिपे गंभीर विरोधाभास को पकड़ लेते हैं। उनकी भाषा सहज, व्यंग्यपूर्ण और पाठक को सोचने के लिए मजबूर करने वाली है।
‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ का अर्थ
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। लेखक इस दिन की ठंड को व्यंग्य का आधार बनाते हैं और कल्पना करते हैं कि केवल मौसम ही नहीं, बल्कि स्वयं गणतंत्र भी ठिठुर रहा है। यह ‘ठिठुरना’ लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमजोरी, संवेदनहीनता और राजनीतिक विसंगतियों का प्रतीक बन जाता है।
गणतंत्र दिवस और झाँकियाँ
गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों की झाँकियाँ निकाली जाती हैं। सामान्यतः इन झाँकियों में विकास, संस्कृति और उपलब्धियों को दिखाया जाता है। परसाई इसी पर व्यंग्य करते हैं। वे संकेत देते हैं कि यदि झाँकियों में देश की वास्तविक तस्वीर दिखाई जाए तो उसमें केवल उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक संघर्ष और प्रशासनिक कमियाँ भी दिखाई देंगी।
राजनीतिक बयान और व्यंग्य
लेखक मौसम की ठंड और सूर्य के न निकलने की समस्या पर अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों से तरह-तरह के तर्क करवाते हैं। कोई इसे सत्ता की विफलता से जोड़ता है, कोई विरोधियों की चाल बताता है और कोई विदेशी षड्यंत्र तक खोज लेता है।
इस हास्यपूर्ण प्रस्तुति के पीछे गंभीर बात छिपी है—राजनीति में वास्तविक समस्या का समाधान खोजने की जगह कई बार दोषारोपण और राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जाती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ किस प्रकार की रचना है?
उत्तर: यह एक व्यंग्यात्मक रचना है।
प्रश्न 2. हरिशंकर परसाई का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: उनका जन्म 1924 ई. में इटारसी, मध्य प्रदेश में हुआ था।
प्रश्न 3. गणतंत्र दिवस समारोह में राज्यों की ओर से क्या निकलता है?
उत्तर: राज्यों की ओर से झाँकियाँ निकलती हैं।
प्रश्न 4. लेखक ने दिल्ली में गणतंत्र दिवस का समारोह कितनी बार देखा था?
उत्तर: चार बार।
प्रश्न 5. हरिशंकर परसाई ने हिंदी में एम.ए. कहाँ से किया?
उत्तर: नागपुर विश्वविद्यालय से।
प्रश्न 6. ‘रानी नागफनी की कहानी’ किसकी रचना है?
उत्तर: हरिशंकर परसाई की।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. हरिशंकर परसाई ने गणतंत्र दिवस के मौसम को व्यंग्य का आधार क्यों बनाया?
उत्तर: लेखक ने मौसम की ठंड और बादलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की ‘ठंडक’ से जोड़ दिया है। सामान्य मौसम की घटना के बहाने वे राजनीतिक बहानों, दोषारोपण और व्यवस्था की संवेदनहीनता पर व्यंग्य करते हैं।
प्रश्न 2. गणतंत्र दिवस पर सूर्य के न निकलने के संबंध में मंत्री की बात क्या दर्शाती है?
उत्तर: मंत्री का तर्क राजनीतिक आश्वासनों और समस्या को टालने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य है। वास्तविक समस्या के समाधान के बजाय लंबे समय के वादे किए जाते हैं।
प्रश्न 3. अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं पर कैसे व्यंग्य किया गया है?
उत्तर: लेखक ने दिखाया है कि एक ही समस्या को अलग-अलग नेता अपनी राजनीतिक विचारधारा के अनुसार समझाते हैं। कोई सरकार को दोष देता है, कोई विरोधी विचारधारा को और कोई विदेशी षड्यंत्र खोजता है। इससे राजनीतिक दोषारोपण की प्रवृत्ति पर व्यंग्य होता है।
प्रश्न 4. गणतंत्र दिवस की झाँकियों पर लेखक का व्यंग्य क्या है?
उत्तर: झाँकियों में देश की सुंदर और सफल तस्वीर दिखाई जाती है, जबकि वास्तविक समाज में अनेक समस्याएँ मौजूद हैं। लेखक चाहते हैं कि यदि वास्तविक तस्वीर दिखाई जाए तो देश की कमियाँ भी सामने आएँ।
प्रश्न 5. रचना में ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ किसका प्रतीक है?
उत्तर: यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमजोर होती संवेदना, राजनीतिक विडंबना और जनता की समस्याओं से बढ़ती दूरी का प्रतीक है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ का सारांश लिखिए।
उत्तर: हरिशंकर परसाई ने इस व्यंग्य रचना में गणतंत्र दिवस के समारोह को आधार बनाया है। 26 जनवरी के दिन ठंड और खराब मौसम को लेखक राजनीतिक व्यवस्था से जोड़ देते हैं। वे कल्पना करते हैं कि गणतंत्र स्वयं ठंड से ठिठुर रहा है।
गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों की झाँकियाँ निकलती हैं। उनमें विकास और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जाता है। लेखक इस प्रदर्शन पर प्रश्न उठाते हैं, क्योंकि वास्तविक जीवन में देश को अनेक सामाजिक और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
लेखक विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों के माध्यम से दिखाते हैं कि किसी समस्या के समाधान की जगह उसे राजनीतिक दोषारोपण में बदल दिया जाता है। सूर्य क्यों नहीं निकल रहा है, इस साधारण प्रश्न के भी अलग-अलग राजनीतिक उत्तर दिए जाते हैं।
इस प्रकार रचना केवल मौसम पर व्यंग्य नहीं करती, बल्कि लोकतंत्र, राजनीति, प्रशासन और सरकारी दावों के बीच के विरोधाभास को सामने लाती है। शीर्षक इसी कारण अत्यंत प्रभावशाली है—गणतंत्र केवल मौसम में नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक लोकतांत्रिक भावना में भी ठिठुरता दिखाई देता है।
प्रश्न 2. हरिशंकर परसाई के साहित्यिक व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।
उत्तर: हरिशंकर परसाई हिंदी के महत्वपूर्ण व्यंग्यकार थे। उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों, राजनीतिक स्वार्थ, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कमियों और मानवीय कमजोरियों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया।
उनका व्यंग्य केवल हँसाने के लिए नहीं है। उसके पीछे सामाजिक चेतना और सुधार की भावना रहती है। वे सामान्य घटनाओं के माध्यम से बड़ी समस्याओं को सामने लाते हैं। उनकी भाषा सहज और प्रभावशाली है।
प्रश्न 3. ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शीर्षक में ‘ठिठुरता’ शब्द व्यंग्य का केंद्र है। 26 जनवरी की ठंड को लेखक लोकतंत्र की स्थिति से जोड़ते हैं। गणतंत्र का अर्थ जनता की भागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों से है, लेकिन यदि व्यवस्था केवल भाषणों, झाँकियों और सरकारी दावों तक सीमित हो जाए तो उसकी वास्तविक आत्मा कमजोर पड़ सकती है।
इसी विरोधाभास को लेखक ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ कहकर व्यक्त करते हैं। इसलिए यह शीर्षक रचना के विषय और व्यंग्य दोनों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है।
मुख्य संदेश
रचना का संदेश है कि लोकतंत्र केवल राष्ट्रीय पर्व मनाने या उपलब्धियों का प्रचार करने से मजबूत नहीं होता। उसकी वास्तविक सफलता जनता के जीवन में न्याय, पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक विकास से तय होती है।
भाषा-शैली
परसाई की शैली व्यंग्यपूर्ण, संवादधर्मी और सहज है। वे हास्य के माध्यम से गंभीर राजनीतिक और सामाजिक प्रश्न उठाते हैं। विडंबना, तंज और विरोधाभास उनके व्यंग्य को प्रभावशाली बनाते हैं।
पिछला अध्याय
Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 4 – कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर
अगला अध्याय
यह गद्य खंड का अंतिम अध्याय है।
Conclusion
Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 5 – ठिठुरता हुआ गणतंत्र हरिशंकर परसाई की व्यंग्य-दृष्टि को समझने के लिए महत्वपूर्ण पाठ है। यह हमें राष्ट्रीय समारोहों के पीछे छिपी वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों पर भी विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
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