Hindi Class 11th

Bihar Board Class 11 Hindi Chapter  4 – कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर

23 August 2026  |  By Ramnivas KT

Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 4 – कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का प्रेरक निबंध है। इसमें रवीन्द्रनाथ ठाकुर के व्यक्तित्व, साहित्य-साधना, संगीत-प्रेम, स्वाध्याय, देशप्रेम और मानवतावादी दृष्टिकोण को समझाया गया है। लेखक के अनुसार रवीन्द्रनाथ की महानता केवल उनकी प्रतिभा में नहीं, बल्कि उनकी निरंतर साधना और मनुष्यता की सेवा की भावना में भी थी।

Table of Contents

हजारी प्रसाद द्विवेदी – लेखक परिचय

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी के प्रमुख निबंधकार, आलोचक, इतिहासकार और उपन्यासकार थे। उन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास और भारतीय संस्कृति को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रमुख रचनाओं में कबीर, हिंदी साहित्य की भूमिका, बाणभट्ट की आत्मकथा और अशोक के फूल आदि शामिल हैं।

रवीन्द्रनाथ ठाकुर का व्यक्तित्व

रवीन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म 1861 ई. में हुआ था। उनके पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर थे। परिवार का वातावरण साहित्य, संगीत, दर्शन और धार्मिक चिंतन से जुड़ा हुआ था। औपचारिक शिक्षा से अधिक उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से अपना ज्ञान विकसित किया।

बचपन से ही उन्हें गीत और संगीत से विशेष लगाव था। वे अपने पिता को गीत सुनाते थे। उनके पिता ने उनकी संगीत प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें ‘बंग देश की बुलबुल’ कहा था।

साहित्य-साधना

रवीन्द्रनाथ ने कविता, गीत, कहानी, उपन्यास, नाटक और निबंध सहित अनेक विधाओं में लिखा। उनकी रचना गीतांजलि ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई और साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।

उनकी साहित्य-साधना का उद्देश्य केवल प्रसिद्धि पाना नहीं था। वे साहित्य को मानवता की सेवा का माध्यम मानते थे। उनका साहित्य व्यापक मानवीय दृष्टि और देशप्रेम से जुड़ा हुआ था।

रवीन्द्रनाथ और शिक्षा

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने शिक्षा को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं माना। उन्होंने शांतिनिकेतन के माध्यम से ऐसी शिक्षा की कल्पना की जिसमें प्रकृति, कला, साहित्य और स्वतंत्र चिंतन को स्थान मिले।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. रवीन्द्रनाथ ठाकुर को ‘बंग देश की बुलबुल’ किसने कहा?

उत्तर: उनके पिता देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने।

प्रश्न 2. रवीन्द्रनाथ बचपन में अपने पिता को किस प्रकार के गीत सुनाते थे?

उत्तर: वे पारमार्थिक भाव वाले गीत सुनाते थे।

प्रश्न 3. रवीन्द्रनाथ ने किन पत्रिकाओं का संपादन किया?

उत्तर: भारती, बालक, साधना और बंग-दर्शन जैसी पत्रिकाओं से उनका संपादकीय संबंध रहा।

प्रश्न 4. रवीन्द्रनाथ ने अंग्रेजी साहित्य की शिक्षा कहाँ प्राप्त की?

उत्तर: लंदन में।

प्रश्न 5. रवीन्द्रनाथ किसकी आराधना से महान बने?

उत्तर: सरस्वती की साधना अर्थात साहित्य-साधना से।

प्रश्न 6. रवीन्द्रनाथ का हृदय किस भावना से परिपूर्ण था?

उत्तर: स्वदेश-प्रेम और मानवता की भावना से।

प्रश्न 7. रवीन्द्रनाथ की वक्तृता कैसी थी?

उत्तर: प्रभावशाली और हृदय को आकर्षित करने वाली थी।

प्रश्न 8. ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ किसकी रचना है?

उत्तर: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की।

प्रश्न 9. रवीन्द्रनाथ का जन्म कब हुआ था?

उत्तर: 1861 ई. में।

प्रश्न 10. रवीन्द्रनाथ के पिता का नाम क्या था?

उत्तर: देवेन्द्रनाथ ठाकुर।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. रवीन्द्रनाथ ठाकुर की लोकप्रियता का क्या कारण था?

उत्तर: रवीन्द्रनाथ ने साहित्य की अनेक विधाओं में उत्कृष्ट रचनाएँ कीं। उनके गीत, कविताएँ, नाटक, उपन्यास और निबंध व्यापक रूप से पढ़े जाते थे। उनके साहित्य में देशप्रेम, मानवीय संवेदना और सौंदर्य-बोध का प्रभावशाली मेल था।

प्रश्न 2. गीत-प्रेमी के रूप में रवीन्द्रनाथ की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: रवीन्द्रनाथ को बचपन से ही गीत गाने और बनाने में रुचि थी। वे स्वयं गीत रचते और अलग-अलग धुनों में गाते थे। संगीत उनके साहित्यिक व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उनके गीतों में भाव और संगीत दोनों का सुंदर मेल मिलता है।

प्रश्न 3. साहित्य-सेवियों के कर्तव्य के बारे में रवीन्द्रनाथ के क्या विचार थे?

उत्तर: रवीन्द्रनाथ साहित्यकारों के बीच प्रेम और सहयोग के पक्षधर थे। वे मानते थे कि साहित्यकारों में ईर्ष्या, संकीर्णता और साम्प्रदायिकता नहीं होनी चाहिए। पारस्परिक सम्मान से साहित्य की गुणवत्ता और समाज का कल्याण दोनों बढ़ते हैं।

प्रश्न 4. रवीन्द्रनाथ को महान पुरुष क्यों कहा गया है?

उत्तर: वे महान साहित्य-साधक, संगीतज्ञ, देशभक्त और मानवतावादी थे। उन्होंने निरंतर अध्ययन और परिश्रम से विश्व साहित्य में स्थान बनाया तथा अपनी प्रतिभा को मानवता की सेवा से जोड़ा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर’ पाठ का सारांश लिखिए।

उत्तर: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इस निबंध में रवीन्द्रनाथ ठाकुर के व्यक्तित्व और साहित्यिक साधना को केंद्र में रखा है। रवीन्द्रनाथ बचपन से ही संगीत और साहित्य के प्रति आकर्षित थे। उन्होंने औपचारिक शिक्षा से अधिक स्वाध्याय और निरंतर अभ्यास के माध्यम से अपनी प्रतिभा विकसित की।

उन्होंने कविता, गीत, कहानी, उपन्यास और नाटक जैसी अनेक विधाओं में रचना की। ‘गीतांजलि’ ने उन्हें विश्व स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई। उनके साहित्य में देशप्रेम और व्यापक मानवतावादी दृष्टि दिखाई देती है।

रवीन्द्रनाथ ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रयोग किए। शांतिनिकेतन उनकी शिक्षा-दृष्टि का उदाहरण है। द्विवेदी जी उनकी महानता का आधार उनकी साहित्य-साधना, स्वाध्याय, परिश्रम और मनुष्यता की सेवा को मानते हैं।

प्रश्न 2. हजारी प्रसाद द्विवेदी के जीवन और व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।

उत्तर: हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा वाले साहित्यकार थे। वे निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक, इतिहासकार और शोधकर्ता के रूप में प्रसिद्ध हुए। भारतीय संस्कृति और साहित्य की परंपरा का उनका अध्ययन व्यापक था।

उनकी रचनाओं में इतिहास-बोध के साथ मानवीय संवेदना भी दिखाई देती है। ‘कबीर’, ‘हिंदी साहित्य की भूमिका’, ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ और ‘अशोक के फूल’ उनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं।

प्रश्न 3. ‘रवीन्द्रनाथ ठाकुर’ निबंध की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: निबंध की प्रमुख विशेषता यह है कि लेखक ने रवीन्द्रनाथ को केवल महान कवि के रूप में नहीं, बल्कि एक साधक, संगीतज्ञ, देशभक्त और मानवतावादी के रूप में देखा है। भाषा विचारपूर्ण होने के साथ-साथ प्रभावशाली है। लेखक ने उनके व्यक्तित्व के ऐसे पक्षों को भी सामने रखा है जो सामान्य परिचयों में अक्सर छूट जाते हैं।

मुख्य संदेश

यह पाठ बताता है कि महानता केवल प्रतिभा से नहीं मिलती। निरंतर साधना, स्वाध्याय, परिश्रम, व्यापक दृष्टि और मानवता के प्रति समर्पण व्यक्ति को वास्तव में महान बनाते हैं।

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