Biology Class 11th

Bihar Board Class 11 Biology Chapter 2 – जीव जगत का वर्गीकरण

24 August 2026  |  By Ramnivas KT

जीव जगत का वर्गीकरण

पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की संख्या और विविधता इतनी अधिक है कि प्रत्येक जीव का अलग-अलग अध्ययन करना आसान नहीं है। अलग-अलग जीवों में शरीर की बनावट, कोशिका की प्रकृति, पोषण, प्रजनन और जीवन-प्रक्रियाओं में काफी अंतर पाया जाता है। इसलिए जीवों को समान लक्षणों के आधार पर अलग-अलग समूहों में व्यवस्थित किया जाता है। इसी वैज्ञानिक व्यवस्था को जीवों का वर्गीकरण कहा जाता है।

वर्गीकरण की आवश्यकता

वर्गीकरण से जीवों की पहचान और अध्ययन व्यवस्थित हो जाता है। समान लक्षण वाले जीवों को एक समूह में रखने से उनके बीच संबंध समझने में आसानी होती है और किसी अज्ञात जीव की पहचान भी सरल हो जाती है।

वर्गीकरण की प्रमुख प्रणालियाँ

द्विजगत वर्गीकरण

लिनियस ने जीवों को मुख्यतः दो जगत—पादप जगत और जन्तु जगत—में बाँटने की व्यवस्था प्रस्तुत की। लेकिन बाद में यह व्यवस्था अनेक जीवों की वास्तविक विशेषताओं को समझाने में अपर्याप्त साबित हुई।

तीन जगत वर्गीकरण

एककोशिकीय जीवों को लेकर उत्पन्न कठिनाइयों को दूर करने के लिए प्रोटिस्टा नामक तीसरे जगत को शामिल किया गया।

पाँच जगत वर्गीकरण

आर. एच. व्हिटेकर ने पाँच जगत प्रणाली प्रस्तावित की। इसके अंतर्गत जीवों को Monera, Protista, Fungi, Plantae और Animalia में बाँटा गया। इसमें कोशिका की प्रकृति, संगठन, पोषण, प्रजनन तथा अन्य लक्षणों को आधार बनाया गया।

मोनेरा

मोनेरा में मुख्यतः प्रोकैरियोटिक जीव आते हैं। इनमें वास्तविक केन्द्रक तथा झिल्ली से घिरे कोशिकांग नहीं पाए जाते। जीवाणु इसका प्रमुख उदाहरण हैं।

जीवाणु

जीवाणु बहुत छोटे और एककोशिकीय जीव होते हैं। कुछ जीवाणु उपयोगी होते हैं, जबकि कुछ रोग उत्पन्न कर सकते हैं। कुछ जीवाणु नाइट्रोजन स्थिरीकरण, दही निर्माण तथा विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोगी हैं।

प्रोटिस्टा

प्रोटिस्टा में मुख्यतः एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीवों को रखा जाता है। इनमें केन्द्रक तथा झिल्ली-बद्ध कोशिकांग पाए जाते हैं। अमीबा, पैरामीशियम और यूग्लीना इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

कवक जगत

कवक सामान्यतः परपोषी होते हैं। इनमें क्लोरोफिल नहीं पाया जाता, इसलिए ये स्वयं प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन नहीं बना सकते। यीस्ट, मशरूम और राइजोपस इसके सामान्य उदाहरण हैं।

कवक मृत कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करने वाले अपघटक के रूप में पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुछ कवक खाद्य और औद्योगिक दृष्टि से उपयोगी हैं, जबकि कुछ रोग उत्पन्न कर सकते हैं।

लाइकेन

लाइकेन शैवाल और कवक के सहजीवी संबंध का उदाहरण है। शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाता है, जबकि कवक जल, खनिज और सुरक्षा उपलब्ध कराने में सहायता करता है।

वाइरस

वाइरस अकोशिकीय संरचनाएँ हैं। इनमें आनुवंशिक पदार्थ के रूप में DNA या RNA पाया जाता है और उसके चारों ओर प्रोटीन का आवरण हो सकता है। वाइरस सामान्यतः जीवित कोशिका के भीतर ही अपनी प्रतिकृति बना पाते हैं।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. जीवों का वर्गीकरण क्यों आवश्यक है?

उत्तर: जीवों की विशाल विविधता के कारण उनका सीधे-सीधे अध्ययन कठिन है। वर्गीकरण से समान लक्षण वाले जीवों को समूहों में रखकर उनकी पहचान, अध्ययन और पारस्परिक संबंधों को समझना आसान हो जाता है।

प्रश्न 2. पाँच जगत वर्गीकरण के नाम लिखिए।

उत्तर: मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया।

प्रश्न 3. प्रोकैरियोटिक कोशिका की प्रमुख विशेषता क्या है?

उत्तर: इसमें वास्तविक केन्द्रक नहीं होता तथा केन्द्रक झिल्ली से घिरा हुआ नहीं होता। झिल्ली-बद्ध कोशिकांग भी सामान्यतः अनुपस्थित रहते हैं।

प्रश्न 4. लाइकेन क्या है?

उत्तर: शैवाल और कवक के सहजीवी संघ को लाइकेन कहते हैं। शैवाल भोजन बनाता है और कवक जल, खनिज तथा सुरक्षा उपलब्ध कराने में सहायता करता है।

प्रश्न 5. वाइरस को जीवित और निर्जीव के बीच की कड़ी क्यों माना जाता है?

उत्तर: कोशिका के बाहर वाइरस निष्क्रिय रह सकता है, लेकिन जीवित कोशिका में प्रवेश करने पर वह अपनी प्रतिकृति बनाने लगता है। इसलिए उसमें जीवित और निर्जीव दोनों प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. पाँच जगत वर्गीकरण किसने दिया? — आर. एच. व्हिटेकर।
  2. जीवाणु किस प्रकार की कोशिका वाले होते हैं? — प्रोकैरियोटिक।
  3. लाइकेन में कौन-कौन से जीव सहजीवी रूप से रहते हैं? — शैवाल और कवक।
  4. प्रोटिस्टा के जीव किस प्रकार की कोशिका वाले होते हैं? — यूकैरियोटिक।
  5. वाइरस का आनुवंशिक पदार्थ क्या हो सकता है? — DNA या RNA।

अध्याय सार

इस अध्याय में जीवों की विविधता को वैज्ञानिक ढंग से व्यवस्थित करने की आवश्यकता तथा वर्गीकरण की प्रमुख प्रणालियों को समझा जाता है। मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया पाँच प्रमुख जगत हैं। इसके साथ जीवाणु, लाइकेन और वाइरस जैसे महत्वपूर्ण समूहों की विशेषताओं को भी समझना परीक्षा के लिए जरूरी है।

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अगला अध्याय: Bihar Board Class 11 Biology Chapter 3 – वनस्पति जगत

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