Bihar Board Class 11 Biology Chapter 3 – वनस्पति जगत
वनस्पति जगत
वनस्पति जगत में पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों का अध्ययन किया जाता है। पौधों की संरचना, प्रजनन, जीवन-चक्र और उनके निवास स्थान में काफी विविधता दिखाई देती है। कुछ पौधे अत्यंत सरल होते हैं, जबकि कुछ में जड़, तना, पत्ती, फूल और बीज जैसी जटिल संरचनाएँ विकसित होती हैं।
पौधों के प्रमुख समूह
पौधों को उनकी संरचना तथा प्रजनन की विशेषताओं के आधार पर मुख्यतः शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म जैसे समूहों में समझा जाता है।
शैवाल
शैवाल मुख्यतः जलीय तथा सरल पादप होते हैं। इनमें सामान्यतः क्लोरोफिल पाया जाता है और ये प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। इनका शरीर सामान्यतः थैलस जैसा होता है।
हरित शैवाल
हरित शैवाल में क्लोरोफिल a और b प्रमुख होते हैं। इनमें संचित भोजन सामान्यतः स्टार्च के रूप में पाया जाता है। क्लैमाइडोमोनास और स्पाइरोगाइरा इसके उदाहरण हैं।
भूरे शैवाल
भूरे शैवाल में फ्यूकोजैंथिन जैसे वर्णक पाए जाते हैं। ये मुख्यतः समुद्री वातावरण में मिलते हैं। लैमिनेरिया और सारगासम इसके उदाहरण हैं।
लाल शैवाल
लाल शैवाल में फाइकोएरिथ्रिन जैसे सहायक वर्णक पाए जाते हैं। पोरफाइरा और पॉलीसाइफोनिया इसके उदाहरण हैं।
ब्रायोफाइटा
ब्रायोफाइटा को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है, क्योंकि इनके जीवन-चक्र में जल की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इनमें वास्तविक जड़, तना और पत्ती का पूर्ण विकसित रूप नहीं मिलता। राइजोइड पौधे को आधार देने में सहायता करते हैं।
ब्रायोफाइटा में गैमेटोफाइट अवस्था प्रमुख होती है और निषेचन के लिए जल आवश्यक होता है।
टेरिडोफाइटा
टेरिडोफाइटा में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ विकसित होती हैं तथा संवहनी ऊतक भी पाए जाते हैं। इनमें बीज नहीं बनते; प्रजनन बीजाणुओं द्वारा होता है। फर्न इसके सामान्य उदाहरण हैं।
जिम्नोस्पर्म
जिम्नोस्पर्म में बीज बनते हैं, लेकिन बीजांड अंडाशय के भीतर बंद नहीं होते। इसी कारण इनके बीजों को नग्न बीज कहा जाता है। पाइन और साइकस इसके उदाहरण हैं।
एंजियोस्पर्म
एंजियोस्पर्म या आवृतबीजी पौधों में बीजांड अंडाशय के भीतर सुरक्षित रहता है। निषेचन के बाद अंडाशय फल में और बीजांड बीज में विकसित हो सकता है। यह पौधों का सबसे विविध समूह है।
एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री
| एकबीजपत्री | द्विबीजपत्री |
|---|---|
| एक बीजपत्र | दो बीजपत्र |
| समानांतर शिराविन्यास सामान्य | जालिकावत शिराविन्यास सामान्य |
| रेशेदार जड़ सामान्य | मूसला जड़ सामान्य |
| पुष्पीय भाग प्रायः तीन के गुणज | पुष्पीय भाग प्रायः चार या पाँच के गुणज |
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. शैवाल के वर्गीकरण का आधार क्या है?
उत्तर: शैवालों का वर्गीकरण मुख्यतः वर्णकों, संचित भोजन, कोशिका भित्ति तथा कशाभ की उपस्थिति और संरचना जैसे लक्षणों के आधार पर किया जाता है।
प्रश्न 2. ब्रायोफाइटा को पादप जगत का उभयचर क्यों कहते हैं?
उत्तर: ये मुख्यतः स्थलीय स्थानों पर पाए जाते हैं, लेकिन इनके लैंगिक प्रजनन में जल की आवश्यकता होती है। इसलिए इन्हें पादप जगत का उभयचर कहा जाता है।
प्रश्न 3. जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म में मुख्य अंतर बताइए।
उत्तर: जिम्नोस्पर्म में बीजांड अंडाशय से ढका नहीं रहता, जबकि एंजियोस्पर्म में बीजांड अंडाशय के भीतर सुरक्षित रहता है।
प्रश्न 4. विषमबीजाणुता क्या है?
उत्तर: जब किसी पौधे में दो अलग-अलग प्रकार के बीजाणु—लघुबीजाणु और गुरुबीजाणु—बनते हैं, तो इसे विषमबीजाणुता कहते हैं।
प्रश्न 5. एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री में एक प्रमुख अंतर लिखिए।
उत्तर: एकबीजपत्री में एक बीजपत्र होता है, जबकि द्विबीजपत्री में दो बीजपत्र होते हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- ब्रायोफाइटा में निषेचन के लिए क्या आवश्यक है? — जल।
- जिम्नोस्पर्म के बीज कैसे होते हैं? — नग्न।
- एंजियोस्पर्म में बीजांड कहाँ सुरक्षित रहता है? — अंडाशय में।
- एकबीजपत्री में कितने बीजपत्र होते हैं? — एक।
- फर्न किस समूह का उदाहरण है? — टेरिडोफाइटा।
अध्याय सार
वनस्पति जगत को समझने के लिए पौधों के संगठन और प्रजनन की जटिलता को क्रम से देखना चाहिए। शैवाल से लेकर एंजियोस्पर्म तक पौधों में संरचनात्मक और प्रजनन संबंधी विकास दिखाई देता है। परीक्षा में इनके लक्षण, उदाहरण और तुलनात्मक प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
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