Bihar Board Class 11 Biology Chapter 4 – प्राणि जगत
प्राणि जगत
प्राणि जगत में पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जंतुओं का अध्ययन किया जाता है। जंतुओं में आकार, शरीर की संरचना, भोजन, श्वसन, परिसंचरण, प्रजनन और आवास के आधार पर बहुत अधिक विविधता होती है। इसलिए इन्हें वैज्ञानिक लक्षणों के आधार पर अलग-अलग समूहों में बाँटा जाता है।
प्राणियों के वर्गीकरण के आधार
किसी प्राणी को वर्गीकृत करते समय कोशिकीय संगठन, शरीर का संगठन, सममिति, देहगुहा, शरीर का खंडीभवन, पाचन तंत्र और पृष्ठरज्जु जैसे लक्षण महत्वपूर्ण होते हैं।
शारीरिक सममिति
यदि शरीर को किसी विशेष तल से काटने पर समान भाग प्राप्त होते हैं तो उसे सममिति कहते हैं। प्राणियों में असममिति, त्रिज्य सममिति और द्विपार्श्वीय सममिति प्रमुख रूपों में मिलती है।
देहगुहा
शरीर भित्ति और आहारनाल के बीच स्थित गुहा को देहगुहा या सीलोम कहा जाता है। इसके आधार पर प्राणियों को अगुहीय, कूटगुहीय और प्रगुहीय समूहों में समझा जाता है।
पोरीफेरा
पोरीफेरा में शरीर पर अनेक छिद्र पाए जाते हैं। इनका शरीर जल प्रवाह तंत्र से जुड़ा रहता है। स्पंज इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
निडेरिया
इनमें डंक कोशिकाएँ विशेष पहचान हैं। ये मुख्यतः जलीय होते हैं। हाइड्रा, जेलीफिश और कोरल इसके उदाहरण हैं।
प्लेटीहेल्मिन्थीज
इनका शरीर चपटा होता है और अधिकांश सदस्य परजीवी जीवन बिताते हैं। टीनिया और फैसिओला इसके उदाहरण हैं।
ऐनेलिडा
ऐनेलिडा के शरीर में खंडीभवन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। केंचुआ और जोंक इसके उदाहरण हैं।
आर्थ्रोपोडा
यह प्राणि जगत का अत्यंत विविध समूह है। इनके शरीर पर बाह्य कंकाल और जोड़दार उपांग पाए जाते हैं। कीट, मकड़ी, बिच्छू, झींगा आदि इसके उदाहरण हैं।
मोलस्का
मोलस्क सामान्यतः कोमल शरीर वाले प्राणी होते हैं। कई सदस्यों में बाहरी कवच पाया जाता है। घोंघा, सीप और ऑक्टोपस इसके उदाहरण हैं।
इकाइनोडर्मेटा
ये मुख्यतः समुद्री प्राणी हैं। इनमें जल संवहन तंत्र पाया जाता है। स्टारफिश और सी ककम्बर इसके उदाहरण हैं।
कॉर्डेटा
कॉर्डेटा में जीवन की किसी अवस्था में पृष्ठरज्जु, पृष्ठीय खोखली तंत्रिका रज्जु, ग्रसनी छिद्र तथा पश्चगुदीय पूँछ जैसे लक्षण पाए जाते हैं। कशेरुकी इसी व्यापक समूह का प्रमुख भाग हैं।
कशेरुकी वर्ग
कशेरुकियों में मछलियाँ, उभयचर, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी प्रमुख समूह हैं। इनके शरीर में कशेरुक स्तंभ विकसित होता है।
महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. प्राणियों के वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: प्राणियों की संख्या और विविधता बहुत अधिक है। समान लक्षण वाले जीवों को समूहों में रखने से उनकी पहचान, अध्ययन और आपसी संबंध समझना सरल हो जाता है।
प्रश्न 2. देहगुहा क्या है?
उत्तर: शरीर भित्ति और आहारनाल के बीच स्थित तरल से भरी गुहा को देहगुहा या सीलोम कहते हैं।
प्रश्न 3. आर्थ्रोपोडा को सबसे बड़ा प्राणि संघ क्यों माना जाता है?
उत्तर: इसमें प्रजातियों की संख्या बहुत अधिक है और कीटों सहित अनेक प्रकार के स्थलीय तथा जलीय प्राणी इसमें आते हैं। इनके अनुकूलन और विविधता भी अत्यधिक है।
प्रश्न 4. सभी कशेरुकी कॉर्डेट हैं, लेकिन सभी कॉर्डेट कशेरुकी क्यों नहीं?
उत्तर: कशेरुकियों में कशेरुक स्तंभ विकसित होता है, जबकि कुछ कॉर्डेट समूहों में पृष्ठरज्जु जीवनभर बनी रह सकती है लेकिन वास्तविक कशेरुक स्तंभ विकसित नहीं होता।
प्रश्न 5. मछलियों में वायु आशय का क्या महत्त्व है?
उत्तर: अस्थिल मछलियों में वायु आशय शरीर के उछाल और संतुलन को बनाए रखने में सहायता करता है। इससे मछली को जल में अपनी स्थिति बनाए रखने में सुविधा होती है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
- जल संवहन तंत्र किस संघ की विशेषता है? — इकाइनोडर्मेटा।
- केंचुआ किस संघ का है? — ऐनेलिडा।
- टिड्डा किस संघ का है? — आर्थ्रोपोडा।
- स्टारफिश किस संघ का उदाहरण है? — इकाइनोडर्मेटा।
- मनुष्य किस संघ का सदस्य है? — कॉर्डेटा।
अध्याय सार
प्राणि जगत में वर्गीकरण के लिए शरीर की सममिति, संगठन, देहगुहा, खंडीभवन और पृष्ठरज्जु जैसे आधारों का प्रयोग किया जाता है। प्रमुख प्राणि संघों के लक्षण और उदाहरण परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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