Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 3 – मंगर
Bihar Board Class 11 Hindi Chapter 3 – मंगर रामवृक्ष बेनीपुरी का प्रभावशाली शब्द-चित्र है। इसमें लेखक ने मंगर नामक एक मेहनती कृषक-मजदूर के जीवन, स्वाभिमान, ईमानदारी और पशु-प्रेम को बहुत आत्मीयता से प्रस्तुत किया है। मंगर आर्थिक रूप से साधारण व्यक्ति है, लेकिन उसके चरित्र में आत्मसम्मान और मानवीय संवेदना की गहरी शक्ति दिखाई देती है।
मंगर – लेखक परिचय
रामवृक्ष बेनीपुरी हिंदी साहित्य के प्रमुख गद्यकार, पत्रकार और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े साहित्यकार थे। उनका जन्म 1902 ई. में बिहार में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा और उनके साहित्य पर भी इसका प्रभाव पड़ा।
बेनीपुरी की भाषा में ऊर्जा, चित्रात्मकता और जनजीवन से जुड़ी सहजता दिखाई देती है। उनकी प्रमुख रचनाओं में माटी की मूरतें, गेहूँ और गुलाब, चिता के फूल, कैदी की पत्नी, अम्बपाली और पतितों के देश में आदि शामिल हैं।
मंगर का चरित्र
मंगर एक मेहनती हलवाहा था। उसका शरीर लगातार श्रम करने के कारण मजबूत और गठीला हो गया था। वह दिखावे और बनावटी व्यवहार से दूर रहता था। कपड़ों के प्रति भी उसे विशेष आकर्षण नहीं था।
उसके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उसका स्वाभिमान था। वह किसी की अनुचित बात सहन नहीं करता था। वह अपने से बड़े व्यक्ति का सम्मान करता था, लेकिन केवल पद या धन के कारण किसी के सामने झुकता नहीं था। उसकी मेहनत और ईमानदारी के कारण लोग उसका सम्मान करते थे।
मंगर और बैल
मंगर के लिए बैल केवल खेती में काम आने वाले पशु नहीं थे। वह उन्हें महादेव के समान मानता था। उसे जो भोजन मिलता, उसमें से भी वह बैलों के लिए हिस्सा निकालता था। उसके लिए यह स्वाभाविक था कि जिस पशु के श्रम से खेती चलती है, उसके प्रति सम्मान और करुणा होनी चाहिए।
भकोलिया का चरित्र
भकोलिया मंगर की पत्नी थी। वह भी आत्मसम्मान रखने वाली और मेहनती स्त्री थी। पति के वृद्ध और असमर्थ हो जाने पर उसने परिवार को संभालने की जिम्मेदारी उठाई। वह अपने पति की सेवा करती थी और कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत बनाए रखती थी।
मंगर की अंतिम अवस्था
मंगर का अंतिम जीवन बहुत दुखद रहा। बीमारी और गलत घरेलू उपचार के कारण उसकी एक आँख की रोशनी चली गई। बाद में उसे लकवे का भी सामना करना पड़ा। जो व्यक्ति जीवनभर मेहनत और स्वाभिमान के साथ जीता रहा, वह अंत में शारीरिक रूप से असहाय हो गया।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मंगर कौन था?
उत्तर: मंगर एक स्वाभिमानी और मेहनती हलवाहा था।
प्रश्न 2. मंगर का स्वभाव कैसा था?
उत्तर: वह रूखा, स्पष्टवादी और बेलौस स्वभाव का था।
प्रश्न 3. भकोलिया कौन थी?
उत्तर: भकोलिया मंगर की पत्नी थी।
प्रश्न 4. मंगर का सम्मान क्यों होता था?
उत्तर: उसकी मेहनत, ईमानदारी और आत्मसम्मान के कारण लोग उसका सम्मान करते थे।
प्रश्न 5. मंगर बैलों को क्या मानता था?
उत्तर: वह बैलों को महादेव के समान मानता था।
प्रश्न 6. मंगर किस प्रकार की वेश-भूषा में रहता था?
उत्तर: वह सामान्यतः कमर में भगवा कपड़ा लपेटे रहता था।
प्रश्न 7. रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म कब हुआ था?
उत्तर: उनका जन्म 1902 ई. में हुआ था।
प्रश्न 8. बेनीपुरी का अधिकांश साहित्य कहाँ रचा गया?
उत्तर: उनके संघर्षपूर्ण जीवन के दौरान उनके साहित्य का बड़ा हिस्सा जेल में लिखा गया।
प्रश्न 9. ‘गेहूँ और गुलाब’ किसकी रचना है?
उत्तर: यह रामवृक्ष बेनीपुरी की रचना है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मंगर के रूप-रंग का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मंगर का शरीर मेहनत के कारण मजबूत और विकसित था। लगातार खेतों में काम करने से उसकी मांसपेशियों में उभार आ गया था। वह सामान्यतः साधारण वेश-भूषा में रहता था और अपने बाहरी रूप की सजावट पर ध्यान नहीं देता था।
प्रश्न 2. मंगर के स्वाभिमान का आधार क्या था?
उत्तर: मंगर अपने श्रम और ईमानदारी पर विश्वास करता था। वह किसी की अनुचित बात नहीं सहता था। वह दूसरों का सम्मान करता था लेकिन अपने आत्मसम्मान को भी उतना ही महत्व देता था। इसी कारण वह किसी के सामने अनावश्यक रूप से झुकता नहीं था।
प्रश्न 3. लेखक और मंगर के बीच कैसा संबंध था?
उत्तर: मंगर लेखक से विशेष स्नेह करता था। लेखक के माता-पिता के न रहने के कारण वह बचपन में लेखक के प्रति विशेष अपनापन रखता था। वह उसे अपने साथ घुमाता और उसकी देखभाल करता था।
प्रश्न 4. भकोलिया के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: भकोलिया मेहनती, आत्मसम्मानी, साहसी और पति की सेवा करने वाली स्त्री थी। मंगर के असमर्थ हो जाने पर उसने परिवार को संभाला। वह किसी की अनुचित बात सहन नहीं करती थी।
प्रश्न 5. मंगर के लिए बैल महादेव क्यों थे?
उत्तर: मंगर खेती में बैलों के महत्व को समझता था। वह मानता था कि बैल किसान के जीवन का आधार हैं। इसलिए वह उन्हें साधारण पशु न मानकर महादेव के समान सम्मान देता था और अपने भोजन में से भी उन्हें हिस्सा देता था।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ‘मंगर’ पाठ का सारांश लिखिए।
उत्तर: ‘मंगर’ रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा रचित एक मार्मिक शब्द-चित्र है। मंगर एक मेहनती कृषक-मजदूर है। उसका जीवन आर्थिक कठिनाइयों से भरा है, लेकिन वह अपने आत्मसम्मान और ईमानदारी से समझौता नहीं करता। उसके श्रम के कारण गाँव में उसका सम्मान है।
मंगर पशुओं के प्रति भी बहुत संवेदनशील है। वह बैलों को महादेव के समान मानता है और अपने भोजन में से उनके लिए हिस्सा निकालता है। उसकी पत्नी भकोलिया भी मेहनती और स्वाभिमानी स्त्री है। दोनों का जीवन कठिन होने के बावजूद उनमें आत्मसम्मान बना रहता है।
बुढ़ापे और बीमारी के कारण मंगर की स्थिति खराब होती जाती है। एक आँख की रोशनी चली जाती है और बाद में उसे लकवा मार देता है। लेखक उसके इस अंतिम रूप को देखकर भावुक हो जाते हैं। पाठ में मंगर के माध्यम से श्रमजीवी जीवन की कठिनाइयों और उसके भीतर छिपी मानवीय गरिमा को सामने रखा गया है।
प्रश्न 2. रामवृक्ष बेनीपुरी के जीवन और व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।
उत्तर: रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 1902 ई. में हुआ था। वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे और इसी कारण उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा। वे पत्रकार, संपादक और साहित्यकार के रूप में सक्रिय रहे।
उनकी भाषा ओजपूर्ण और चित्रात्मक है। उन्होंने किसान, मजदूर, ग्रामीण समाज और सामाजिक विषमता को अपनी रचनाओं में स्थान दिया। उनकी प्रमुख रचनाओं में माटी की मूरतें, गेहूँ और गुलाब, चिता के फूल, कैदी की पत्नी और अम्बपाली आदि शामिल हैं।
प्रश्न 3. मंगर के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: मंगर मेहनती, ईमानदार, स्वाभिमानी, स्पष्टवादी और पशु-प्रेमी व्यक्ति था। वह अपने श्रम पर विश्वास करता था और किसी की अनुचित बात सहन नहीं करता था। उसकी गरीबी उसके आत्मसम्मान को कमजोर नहीं कर सकी। बैलों के प्रति उसका व्यवहार उसके संवेदनशील हृदय को दिखाता है।
परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु
- लेखक — रामवृक्ष बेनीपुरी
- मुख्य पात्र — मंगर
- मंगर की पत्नी — भकोलिया
- मुख्य विषय — श्रम, स्वाभिमान और मानवीयता
- मंगर बैलों को — महादेव के समान मानता था
- मुख्य विधा — शब्द-चित्र
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