अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता– कक्षा 10 संस्कृत पीयूषम् द्वितीयो भागः, द्रुतपाठाय भाग 2, पाठ 9

12 August 2026  |  By Ramnivas KT

Table of Contents

प्रस्तावना (कक्षा 10 संस्कृत, पीयूषम् भाग 2, पाठ 9 अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता)

“अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता” बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत की अनुपूरक पाठ्यपुस्तक “पीयूषम् द्वितीयो भागः” (पीयूषम् द्रुतपाठाय भाग 2) का नौवाँ पाठ है। यह पाठ एक अत्यंत सुंदर राजकुमार की कथा के माध्यम से यह शिक्षा देता है कि शारीरिक सौंदर्य स्थायी नहीं होता, जबकि उत्तम कार्यों से प्राप्त यश सदा स्थिर रहता है।

पाठ का सारांश (अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता, कक्षा 10 संस्कृत पीयूषम् भाग 2)

इस पाठ में एक राजकुमार की कथा वर्णित है, जो अत्यंत सुंदर था। उसे अपने इस असाधारण सौंदर्य पर बहुत गर्व था, और इसी गर्व के कारण वह प्रारंभ में राजकाज (राज्य के कार्यों) में अपने पिता की सहायता नहीं करता था। वह अपने सुंदर रूप में ही मग्न रहता था और राज्य-कर्तव्यों की उपेक्षा करता था।

किंतु सौंदर्य स्वभाव से ही अस्थिर होता है — यह न तो सदा एक-सा रहता है और न ही सदा के लिए स्थायी रहता है। इसके विपरीत, उत्तम कार्यों से प्राप्त यश सुस्थिर होता है, अर्थात वह सदा बना रहता है। इस सत्य का बोध होने पर राजकुमार (युवराज) के मन में परिवर्तन आया और उसने प्रजा की सेवा में अपना मन लगाना आरंभ किया। इस प्रकार यह कथा हमें यह शिक्षा देती है कि शरीर का सौंदर्य अस्थिर है, जबकि सत्कर्मों से अर्जित यश और कीर्ति ही चिरस्थायी होती है।

केंद्रीय भाव (अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता, कक्षा 10 संस्कृत पीयूषम् भाग 2)

इस पाठ का केंद्रीय भाव यह है कि शारीरिक सौंदर्य क्षणभंगुर और अस्थिर होता है, इसलिए इस पर घमंड करना उचित नहीं है। इसके विपरीत, उत्तम कार्यों और प्रजा-सेवा से अर्जित यश तथा कीर्ति ही स्थायी होते हैं और मनुष्य को सच्चा गौरव प्रदान करते हैं। यह पाठ मनुष्य को बाह्य सौंदर्य के मोह से दूर रहकर सत्कर्मों की ओर प्रवृत्त होने की प्रेरणा देता है।

शब्दार्थ (Word Meanings)

व्याख्या (Explanation)

इस पाठ में एक अत्यंत सुंदर राजकुमार के माध्यम से सौंदर्य की क्षणभंगुरता का मार्मिक चित्रण किया गया है। राजकुमार अपने सौंदर्य पर इतना गर्वित था कि वह राजकाज में सहयोग करना भी आवश्यक नहीं समझता था। यह उसके अहंकार और कर्तव्य-विमुखता को दर्शाता है, जो सुंदरता के मोह में उत्पन्न होती है।

पाठ का मूल संदेश यह है कि सौंदर्य स्वभाव से ही अस्थिर है — यह समय, परिस्थिति और आयु के साथ परिवर्तित होता रहता है और अंततः क्षीण हो जाता है। इसके विपरीत, उत्तम कार्यों से अर्जित यश सुस्थिर होता है, अर्थात वह सदा के लिए बना रहता है और व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात भी उसकी कीर्ति को जीवित रखता है। इसी सत्य को समझकर युवराज ने अपना दृष्टिकोण बदला और प्रजा की सेवा में तत्परता से जुट गया। इस प्रकार यह पाठ स्पष्ट करता है कि बाह्य सौंदर्य पर गर्व करने के बजाय सत्कर्मों और सेवा के माध्यम से चिरस्थायी यश अर्जित करना ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य होना चाहिए।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)

हिन्दी में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

  1. कौन बहुत सुन्दर था?
    (क) राजकुमार (ख) महामंत्री (ग) कर्मचारी (घ) छात्र
    उत्तर: (क) राजकुमार
  2. यश किससे प्राप्त होता है?
    (क) मध्यम कार्य (ख) निम्न कार्य (ग) उत्तम कार्य (घ) इनमें से सभी
    उत्तर: (ग) उत्तम कार्य
  3. राजकार्य में कौन मदद नहीं करता था?
    (क) राजा (ख) महामंत्री (ग) मंत्री (घ) युवराज
    उत्तर: (घ) युवराज
  4. कौन स्थायी नहीं रहता है?
    (क) सुन्दरता (ख) कुरूपता (ग) (क) और (ख) दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं
    उत्तर: (क) सुन्दरता
  5. प्रजा की सेवा में मन लगाना किसने प्रारंभ किया?
    (क) राजा (ख) युवराज (ग) मंत्री (घ) महामंत्री
    उत्तर: (ख) युवराज
  6. सौन्दर्य कैसा होता है?
    (क) चंचल (ख) सुसुप्त (ग) अस्थिर (घ) स्थिर
    उत्तर: (ग) अस्थिर
  7. राजकुमार का गर्व क्या था?
    (क) विद्वता (ख) महानता (ग) प्रतिष्ठा (घ) सौन्दर्य
    उत्तर: (घ) सौन्दर्य

संस्कृत में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

  1. कः अति सुन्दरः आसीत्?
    (क) साधुः (ख) ब्राह्मणः (ग) कश्चन राजकुमारः (घ) द्वारपालः
    उत्तर: (ग) कश्चन राजकुमारः
  2. किं न स्थिरम्?
    (क) लोभः (ख) मोहः (ग) क्रोधः (घ) सौन्दर्यम्
    उत्तर: (घ) सौन्दर्यम्
  3. यशः सुस्थिरम् न तु ………।
    (क) शिक्षम् (ख) सौन्दर्यम् (ग) कीर्तिः (घ) वृक्षः
    उत्तर: (ख) सौन्दर्यम्
  4. ‘शरीरस्य सौन्दर्य अस्थिरं अस्ति’ — अनया कथया का शिक्षा प्राप्यते?
    (क) अच्युताष्टकम् (ख) वृक्षैः समं भवतु मे जीवनम् (ग) संसारमोहः (घ) अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता
    उत्तर: (घ) अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. प्रश्न: राजकुमार को किस बात का गर्व था?
    उत्तर: राजकुमार को अपने सौंदर्य पर गर्व था।
  2. प्रश्न: राजकार्य में सहायता कौन नहीं करता था और क्यों?
    उत्तर: राजकार्य में युवराज सहायता नहीं करता था, क्योंकि वह अपने सौंदर्य के गर्व में मग्न रहता था।
  3. प्रश्न: इस पाठ के अनुसार यश किससे प्राप्त होता है और वह कैसा होता है?
    उत्तर: इस पाठ के अनुसार यश उत्तम कार्यों से प्राप्त होता है और वह सुस्थिर अर्थात सदा स्थायी रहता है, जबकि सौंदर्य अस्थिर होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

  1. प्रश्न: “अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता” पाठ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
    उत्तर: इस पाठ में एक अत्यंत सुंदर राजकुमार की कथा वर्णित है, जिसे अपने सौंदर्य पर बहुत गर्व था। इसी गर्व के कारण वह राजकाज में अपने पिता की सहायता नहीं करता था और अपने रूप-सौंदर्य में ही लीन रहता था। किंतु सौंदर्य स्वभाव से ही अस्थिर होता है — यह सदा एक-सा नहीं रहता। इसके विपरीत, उत्तम कार्यों से प्राप्त यश सुस्थिर होता है, अर्थात वह सदा के लिए बना रहता है। इस सत्य को समझकर युवराज के विचारों में परिवर्तन आया और उसने प्रजा की सेवा में मन लगाना आरंभ किया। इस प्रकार यह पाठ हमें सिखाता है कि शारीरिक सौंदर्य क्षणभंगुर है, जबकि सत्कर्मों से अर्जित कीर्ति ही चिरस्थायी होती है।
  2. प्रश्न: इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है? स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर: इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शरीर का सौंदर्य अस्थिर और क्षणभंगुर होता है, इसलिए इस पर अभिमान करना उचित नहीं है। सच्चा और स्थायी गौरव उत्तम कार्यों तथा प्रजा एवं समाज की सेवा से ही प्राप्त होता है। राजकुमार का उदाहरण हमें यह सिखाता है कि जब मनुष्य को यह बोध हो जाता है कि बाह्य सौंदर्य अस्थायी है, तो उसे अपने कर्तव्यों की ओर, विशेषकर सेवा और सत्कर्म की ओर, प्रवृत्त होना चाहिए, क्योंकि यही यश और कीर्ति को चिरस्थायी बनाता है।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता, कक्षा 10 संस्कृत पीयूषम् भाग 2)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: “अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता” पाठ किस पुस्तक और पाठ क्रमांक से संबंधित है?
    उत्तर: यह पाठ बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत की अनुपूरक पुस्तक “पीयूषम् द्वितीयो भागः” (पीयूषम् द्रुतपाठाय भाग 2) का पाठ 9 है।
  2. प्रश्न: राजकुमार में क्या परिवर्तन आया?
    उत्तर: प्रारंभ में सौंदर्य के गर्व में राजकाज से दूर रहने वाला राजकुमार बाद में प्रजा की सेवा में मन लगाने लगा।
  3. प्रश्न: इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
    उत्तर: इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि शारीरिक सौंदर्य अस्थिर होता है, जबकि उत्तम कार्यों से प्राप्त यश सुस्थिर और चिरस्थायी होता है।

निष्कर्ष (अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता, कक्षा 10 संस्कृत पीयूषम् भाग 2)

“अहो, सौन्दर्यस्य अस्थिरता” पाठ एक सुंदर राजकुमार की कथा के माध्यम से यह गहरा संदेश देता है कि शारीरिक सौंदर्य क्षणभंगुर है, जबकि सत्कर्मों और सेवा से अर्जित यश ही स्थायी और चिरकालीन होता है। यह पाठ छात्रों में विनम्रता, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा-भावना जैसे उच्च आदर्शों को विकसित करने में सहायक है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 संस्कृत (पीयूषम् द्वितीयो भागः / द्रुतपाठाय भाग 2) पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है। इस लेख की संपूर्ण सामग्री मौलिक रूप से लिखी गई है और किसी भी स्रोत से सीधे कॉपी नहीं की गई है।

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