कक्षा 12 गृह विज्ञान (Class 12 Home Science) में वस्त्रों का चयन, सिले-सिलाए वस्त्रों का चयन तथा वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव का विशेष महत्व है। वस्त्र केवल शरीर को ढकने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्ति के व्यक्तित्व, व्यवसाय, अवसर, सामाजिक मान्यताओं और जीवनशैली को भी व्यक्त करते हैं। इन अध्यायों के माध्यम से विद्यार्थियों को वस्त्रों के वैज्ञानिक चयन, विभिन्न तंतुओं की विशेषताओं, शरीर की बनावट के अनुसार वस्त्रों के चुनाव, रेडीमेड वस्त्रों की गुणवत्ता की जाँच तथा वस्त्रों की धुलाई एवं रखरखाव के बारे में जानकारी मिलती है।
इस अध्ययन सामग्री में अध्याय 20, 21, 22 एवं 23 के प्रमुख विषयों को व्यवस्थित रूप से समझाया गया है, ताकि विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ दैनिक जीवन में भी इनका उपयोग कर सकें।
अध्याय 20, 21, 22 एवं 23 का संक्षिप्त परिचय
इन चार अध्यायों में वस्त्रों से संबंधित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित विषय शामिल हैं—
- अध्याय 20 – वस्त्रों का चयन
- अध्याय 21 – सिले-सिलाए वस्त्रों का चयन
- अध्याय 22 – वस्त्रों की देखभाल
- अध्याय 23 – वस्त्रों की धुलाई एवं रखरखाव
इन अध्यायों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को वस्त्रों के चयन, विभिन्न प्रकार के तंतुओं, शरीर की बनावट एवं अवसर के अनुसार वस्त्रों के चुनाव, रेडीमेड कपड़ों की गुणवत्ता तथा कपड़ों की धुलाई और इस्त्री आदि के बारे में वैज्ञानिक जानकारी देना है।
मुख्य अवधारणाएँ
- वस्त्रों का चयन करते समय टिकाऊपन, सिकुड़न प्रतिरोध, धुलाई की सुविधा और रंग की स्थिरता को ध्यान में रखना चाहिए।
- तंतुओं को मुख्य रूप से प्राकृतिक तथा कृत्रिम तंतुओं में बाँटा जाता है।
- वस्त्रों का चयन शरीर की बनावट, आयु, मौसम, अवसर और व्यवसाय के अनुसार किया जाता है।
- सिले-सिलाए वस्त्र खरीदते समय सिलाई, हेमिंग, प्लैकेट, बटन और कपड़े की गिरावट की जाँच करनी चाहिए।
- कपड़ों की धुलाई के लिए पानी, साबुन, डिटर्जेंट और स्टार्च का उचित प्रयोग किया जाता है।
- वस्त्रों की देखभाल में वाशिंग मशीन तथा विभिन्न प्रकार की इस्त्रियों का महत्वपूर्ण स्थान है।
1. वस्त्रों के चयन के प्रमुख आधार
वस्त्र खरीदते समय केवल उनका रंग और डिजाइन देखना पर्याप्त नहीं है। वस्त्र की गुणवत्ता, टिकाऊपन, धुलाई की सुविधा और रंग की स्थिरता आदि को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
छोटी और बड़ी दुकानों से वस्त्रों का चयन
छोटी दुकानों में वस्त्रों का चयन अपेक्षाकृत आसानी से और कम समय में किया जा सकता है। इसके विपरीत बड़े स्टोर या मॉल में वस्त्रों की बहुत अधिक विविधता उपलब्ध होती है। इससे विकल्प तो अधिक मिलते हैं, लेकिन उचित गुणवत्ता का चयन करने में अधिक समय लग सकता है।
वस्त्रों का टिकाऊपन
वस्त्र खरीदते समय उसके मजबूत होने की जाँच करनी चाहिए। मजबूत वस्त्र अधिक समय तक उपयोग में आते हैं। कपड़े की मजबूती को देखते समय उसके तंतु तथा सिलाई की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए।
सिकुड़न एवं सलवट प्रतिरोध
वस्त्र में जल्दी सलवट पड़ती है या नहीं, इसकी जाँच करना भी आवश्यक है। कपड़े या उसके किनारे को हाथ में लेकर उसमें बनने वाली सिलवटों को देखा जा सकता है। साथ ही सिलाई वाले स्थानों को भी देखना चाहिए कि कहीं कपड़े में कटाव, खराब सिलाई या धागे की समस्या तो नहीं है।
धुलाई में सुविधा
दैनिक उपयोग के कपड़े ऐसे होने चाहिए जिन्हें आसानी से साफ किया जा सके। ऐसे वस्त्र जिनकी सफाई में बहुत अधिक समय और मेहनत लगती है, उनका दैनिक उपयोग कठिन हो सकता है।
रंग की स्थिरता
वस्त्र खरीदते समय यह देखना आवश्यक है कि उसका रंग धुलाई के बाद जल्दी फीका तो नहीं पड़ता। रंग स्थिरता वाले वस्त्र लंबे समय तक अच्छे दिखाई देते हैं।
2. वस्त्रों में प्रयुक्त तंतु
तंतु वस्त्र की सबसे छोटी मूल इकाई है। विभिन्न प्रकार के तंतुओं से धागे तथा उनसे वस्त्र बनाए जाते हैं। तंतुओं को मुख्य रूप से दो वर्गों में बाँटा जाता है—
- प्राकृतिक तंतु
- कृत्रिम या मानव निर्मित तंतु
प्राकृतिक तंतु
सूती तंतु
सूती वस्त्र टिकाऊ, मुलायम और पसीना सोखने वाले होते हैं। ये मजबूत होने के साथ-साथ शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में सूती वस्त्र अधिक उपयोगी माने जाते हैं।
लीनन
लीनन नमी को सोखने वाला तथा ठंडक प्रदान करने वाला तंतु है। यह टिकाऊ होता है, लेकिन इसमें जल्दी सलवटें पड़ सकती हैं। इसे विभिन्न प्रकार के फिनिश देकर उपयोगी बनाया जा सकता है।
रेशम
रेशम रेशम के कीड़ों से प्राप्त होता है। रेशम के कीड़े मुख्य रूप से शहतूत के पेड़ों पर पाए जाते हैं। रेशम की खोज चीन में हुई थी। रेशम गर्म होता है, लेकिन लंबे समय तक नमी और अधिक गर्मी के संपर्क में रहने पर इसकी मजबूती प्रभावित हो सकती है।
ऊन
ऊन पशु-जनित तंतु है। यह गर्म, आरामदायक और मजबूत होता है। ठंड के मौसम में ऊनी वस्त्र विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।
रेमी
रेमी लीनन के समान दिखाई देने वाला तंतु है। इसका प्रयोग कई बार पॉलिएस्टर, सूती, लीनन या ऐक्रेलिक तंतुओं के साथ मिश्रित करके किया जाता है।
कृत्रिम या मानव निर्मित तंतु
एसीटेट और ट्राईएसीटेट
एसीटेट और ट्राईएसीटेट रासायनिक रूप से निर्मित तंतु हैं। ये धुलाई के दौरान कमजोर हो सकते हैं और जल्दी सूखने वाले होते हैं।
रेयॉन
रेयॉन एक कृत्रिम तंतु है। यह शरीर को ठंडक और आराम प्रदान करने के लिए उपयोग किया जाता है।
नायलॉन
नायलॉन बहुत मजबूत, हल्का और टिकाऊ तंतु है। यह जल्दी सूखता है और इसलिए विभिन्न प्रकार के वस्त्रों में इसका उपयोग किया जाता है।
3. वस्त्रों के चयन को प्रभावित करने वाले कारक
वस्त्रों का चयन करते समय व्यक्ति की शारीरिक बनावट, आयु, मौसम, अवसर और व्यवसाय को ध्यान में रखना चाहिए।
व्यवसाय
व्यक्ति का व्यवसाय उसके वस्त्रों के चयन को प्रभावित करता है। अधिकारी, कर्मचारी, होटल कर्मचारी, डॉक्टर, वकील और शिक्षक आदि अपने व्यवसाय के अनुरूप वस्त्र पहनते हैं।
मौसम
गर्मी में सूती वस्त्र तथा सर्दी में ऊनी वस्त्र अधिक उपयोगी होते हैं। मौसम के अनुरूप वस्त्र पहनने से शरीर को आराम मिलता है।
शरीर की बनावट
वस्त्रों का चुनाव शरीर की बनावट के अनुसार करना चाहिए। भारी शरीर वाले व्यक्तियों को ऐसे वस्त्र चुनने चाहिए जो शरीर को अधिक भारी दिखाई देने से बचाएँ। स्रोत के अनुसार हल्के रंग, जैसे हल्का आसमानी रंग, तथा ऐसी डिजाइन उपयोगी मानी जाती है जो शरीर को अधिक चौड़ा न दिखाए। चौड़ी क्षैतिज रेखाओं से बचना चाहिए क्योंकि वे शरीर को अधिक चौड़ा दिखा सकती हैं।
लंबे और भारी शरीर वाले व्यक्तियों के लिए रेडीमेड वस्त्रों का सही आकार प्राप्त करना कठिन हो सकता है। ऐसे में सावधानीपूर्वक चयन या शरीर के माप के अनुसार वस्त्र तैयार करवाना उपयोगी हो सकता है।
4. अवसर, आयु और व्यवसाय के अनुसार वस्त्रों का चयन
विवाह एवं उत्सव
विवाह, त्योहार और आनंद के अवसरों पर चमकीले, आकर्षक और सजावटी वस्त्र पहने जाते हैं। इनमें जरी-गोटा तथा तीव्र रंगों का प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे अवसरों पर महंगे और आकर्षक वस्त्र भी पहने जाते हैं।
सार्वजनिक समारोह
सार्वजनिक कार्यक्रमों में सादे, शालीन और गरिमापूर्ण वस्त्र पहनना उचित माना जाता है। हल्के रंग के साधारण वस्त्र औपचारिक वातावरण के लिए उपयोगी होते हैं।
शोक का अवसर
शोक के अवसर पर सादे, साफ और सफेद वस्त्र पहनने की परंपरा बताई गई है।
यात्रा
यात्रा के समय कम संख्या में हल्के, आरामदायक और सुविधाजनक वस्त्र रखने चाहिए।
खेलकूद
खेलकूद के समय सूती, ढीले और पसीना सोखने वाले वस्त्र अधिक सुविधाजनक होते हैं। उदाहरण के लिए क्रिकेट के खिलाड़ियों की पोशाक।
विश्राम एवं अवकाश
विश्राम के समय साफ, धुले हुए और ढीले वस्त्र पहनने चाहिए। बहुत तंग जूते और बेल्ट से बचना चाहिए।
शिशुओं के वस्त्र
शिशुओं के वस्त्र चुनते समय आकर्षण, सही फिटिंग और टिकाऊपन को ध्यान में रखना चाहिए।
विद्यालय जाने वाले बच्चे
विद्यालय जाने वाले बच्चों के वस्त्र मजबूत, मौसम के अनुकूल तथा ऐसे होने चाहिए जिनमें बच्चे आसानी से चल-फिर सकें।
वयस्कों के वस्त्र
पुरुषों के वस्त्र मजबूत, ढीले तथा आसानी से धुलने और इस्त्री होने वाले होने चाहिए। महिलाओं के वस्त्रों का चयन आयु, शरीर की बनावट और व्यवसाय के अनुसार किया जाना चाहिए।
वृद्धों के वस्त्र
वृद्ध व्यक्तियों के लिए ढीले, आरामदायक तथा हल्के या सफेद रंग के वस्त्र उपयोगी माने जाते हैं।
व्यवसाय के अनुसार वस्त्र
डॉक्टर और नर्स सामान्यतः सफेद कोट या एप्रन का प्रयोग करते हैं। इसे स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। विद्यालयों में यूनिफॉर्म विद्यार्थियों में समानता की भावना बनाए रखने में सहायक होती है।
5. सिले-सिलाए वस्त्रों का चयन
आज के समय में रेडीमेड अर्थात सिले-सिलाए वस्त्र बहुत लोकप्रिय हैं। इनसे सिलाई करवाने की परेशानी और समय दोनों की बचत होती है।
रेडीमेड वस्त्रों की श्रेणियाँ
| श्रेणी | विशेषता |
|---|---|
| निम्न श्रेणी | कम आय वाले लोगों के लिए सामान्य वस्त्र |
| मध्यम श्रेणी | मध्यम आय वर्ग के लिए वस्त्र |
| उच्च श्रेणी | ब्रांडेड एवं उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्र |
बाहरी वस्त्र
बाहरी वस्त्रों में कार्यस्थल के कपड़े, यूनिफॉर्म, कोट, सूट, पैंट, जैकेट, ब्लाउज और ड्रेस आदि शामिल किए जाते हैं।
अंतःवस्त्र
अंतःवस्त्रों में जर्सी, मोजे, पैंटी तथा अन्य इनरवियर शामिल होते हैं।
रेडीमेड वस्त्रों में माप
रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय शरीर के उचित माप को ध्यान में रखना चाहिए। प्रमुख माप हैं—
- ऊँचाई
- छाती
- कमर
- तीरा – एक कंधे के सिरे से दूसरे कंधे के सिरे तक का माप
रेडीमेड वस्त्रों की गुणवत्ता की जाँच
रेडीमेड कपड़े खरीदते समय कपड़े को उलटकर उसकी अंदरूनी सिलाई की जाँच करनी चाहिए।
- सिलाई मजबूत और साफ होनी चाहिए।
- हेमिंग अच्छी तरह की गई होनी चाहिए।
- प्लैकेट ढीला नहीं होना चाहिए।
- बटन, हुक और आई उचित दूरी पर लगे होने चाहिए।
- कपड़े की चौड़ाई उचित होनी चाहिए।
- सिलाई और डिजाइन में कारीगरी साफ दिखाई देनी चाहिए।
- वस्त्र की ड्रेप अर्थात गिरावट प्राकृतिक होनी चाहिए।
6. वस्त्रों की देखभाल एवं धुलाई
वस्त्रों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनकी उचित देखभाल और धुलाई आवश्यक है। धुलाई में पानी, साबुन, डिटर्जेंट, स्टार्च आदि का उचित प्रयोग किया जाता है।
पानी
वस्त्रों की धुलाई के लिए सामान्यतः मुलायम पानी अधिक उपयोगी माना जाता है। कठोर पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण पाए जाते हैं। कठोर पानी में साबुन आसानी से झाग नहीं बनाता और गंदा अवक्षेप बन सकता है।
अस्थायी कठोरता
अस्थायी कठोरता कैल्शियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट के कारण होती है।
स्थायी कठोरता
स्थायी कठोरता मुख्य रूप से सल्फेट लवणों के कारण होती है।
7. साबुन एवं डिटर्जेंट
साबुन वसा तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया से बनता है। इस प्रक्रिया को सैपोनिफिकेशन कहा जाता है। साबुन की क्षारीयता बढ़ाने के लिए सोडियम सिलिकेट का प्रयोग किया जाता है।
स्टार्च का प्रयोग
धुलाई के बाद सूती वस्त्रों और साड़ियों में स्टार्च का प्रयोग किया जाता है। इससे वस्त्रों में कड़ापन आता है और वे नए जैसे दिखाई दे सकते हैं।
अच्छे साबुन के गुण
- साबुन का रंग साफ होना चाहिए।
- साबुन की टिकिया पर सफेद परत नहीं होनी चाहिए।
- साबुन अत्यधिक कठोर नहीं होना चाहिए।
- पानी में आसानी से घुलना चाहिए।
- अच्छा झाग बनना चाहिए।
8. साबुन बनाने की विधियाँ
गरम विधि
गरम विधि का प्रयोग कारखानों में किया जाता है। इसमें वसा को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया में सैपोनिफिकेशन होता है। इसके बाद salting out की प्रक्रिया द्वारा साबुन को अलग किया जाता है। इस विधि से मजबूत और कठोर साबुन बनाया जाता है।
ठंडी विधि
ठंडी विधि सरल घरेलू विधि के रूप में बताई गई है। इसमें कास्टिक सोडा, पानी, नारियल तेल, बेसन तथा मिट्टी या लकड़ी के बड़े बर्तन और लकड़ी के चम्मच आदि सामग्री का प्रयोग किया जाता है।
9. धुलाई के उपकरण एवं इस्त्री
वाशिंग मशीन
वाशिंग मशीन कपड़ों की धुलाई में समय तथा शारीरिक ऊर्जा की बचत करती है। यह विद्युत ऊर्जा से संचालित होती है। स्रोत के अनुसार वाशिंग मशीन के विभिन्न रूपों में डॉली मशीन, सिलेंडर/रोटरी, बेलनाकार तथा प्रेशर/सक्शन प्रकार शामिल हैं। इनमें रगड़, दबाव और सक्शन के सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है।
अन्य धुलाई उपकरण
- चौड़े मुँह वाला टब
- वॉशबोर्ड
- हैंड प्लंजर
- रिंजर
- भारी कंबल और रजाई आदि के लिए उबालने का उपकरण
हैंड प्लंजर
हैंड प्लंजर का उपयोग पानी को दबाव और वैक्यूम के माध्यम से कपड़ों से गंदगी निकालने तथा उन्हें साफ करने में किया जाता है।
10. इस्त्री के प्रकार
कोयले की इस्त्री
कोयले की इस्त्री भारी होती है और इसे उपयोग करने में अधिक सुविधा नहीं होती। इसमें कोयले की आवश्यकता होती है।
स्टोव से गर्म की जाने वाली इस्त्री
इस प्रकार की इस्त्री को स्टोव पर गर्म किया जाता है। इसमें लकड़ी का हैंडल लगाया जाता है।
विद्युत इस्त्री
विद्युत इस्त्री आधुनिक समय में अधिक उपयोग की जाने वाली इस्त्री है। यह हल्की, सुविधाजनक और उपयोग में सरल होती है।
महत्वपूर्ण शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| तीरा | एक कंधे के सिरे से दूसरे कंधे के सिरे तक का माप |
| Wrinkle Resistance | सलवटों का प्रतिरोध करने की क्षमता |
| Sericulture | रेशम के कीड़ों से रेशम उत्पादन की प्रक्रिया |
| Saponification | वसा और क्षार की अभिक्रिया से साबुन बनने की प्रक्रिया |
| Salting Out | साबुन को अलग करने की प्रक्रिया |
| Drape | वस्त्र की शरीर पर स्वाभाविक गिरावट |
| Hand Plunger | धुलाई में दबाव/वैक्यूम द्वारा सफाई करने वाला उपकरण |
| Starch | वस्त्रों में कड़ापन लाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला पदार्थ |
अध्याय का सारांश
वस्त्रों का चयन करते समय टिकाऊपन, रंग की स्थिरता, धुलाई की सुविधा और सलवट प्रतिरोध जैसे गुणों को ध्यान में रखना चाहिए। वस्त्रों में प्राकृतिक तथा कृत्रिम दोनों प्रकार के तंतुओं का प्रयोग होता है। सूती वस्त्र गर्मी के लिए, जबकि ऊनी वस्त्र ठंड के लिए उपयोगी होते हैं।
वस्त्रों का चयन शरीर की बनावट, आयु, मौसम, अवसर और व्यवसाय के अनुसार किया जाता है। रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय सिलाई, हेमिंग, प्लैकेट, बटन, हुक तथा कपड़े की गिरावट की जाँच करनी चाहिए।
वस्त्रों की उचित देखभाल के लिए मुलायम पानी, उचित साबुन या डिटर्जेंट तथा आवश्यकतानुसार स्टार्च का प्रयोग किया जाता है। वाशिंग मशीन और विद्युत इस्त्री आधुनिक समय में वस्त्रों की धुलाई एवं रखरखाव को सरल बनाते हैं।
त्वरित पुनरावृत्ति
- गर्मी के मौसम में सूती वस्त्र उपयोगी होते हैं।
- रेशम की खोज चीन में हुई थी।
- रेशम उत्पादन को सेरीकल्चर कहा जाता है।
- भारी शरीर वाले व्यक्ति को ऐसी डिजाइन से बचना चाहिए जो शरीर को अधिक चौड़ा दिखाए।
- सार्वजनिक समारोह में शालीन एवं गरिमापूर्ण वस्त्र उपयोगी होते हैं।
- शोक के अवसर पर सादे और सफेद वस्त्र पहनने की परंपरा बताई गई है।
- तीरा एक कंधे के सिरे से दूसरे कंधे के सिरे तक का माप है।
- रेडीमेड वस्त्रों में सिलाई, हेमिंग और प्लैकेट की जाँच करनी चाहिए।
- साबुन बनने की रासायनिक प्रक्रिया को सैपोनिफिकेशन कहते हैं।
- स्टार्च का प्रयोग वस्त्रों में कड़ापन लाने के लिए किया जाता है।
- गरम विधि से साबुन का निर्माण कारखानों में किया जाता है।
- ठंडी विधि घरेलू स्तर पर साबुन बनाने के लिए बताई गई है।
- वाशिंग मशीन समय और शारीरिक ऊर्जा की बचत करती है।
- कोयले की इस्त्री भारी और असुविधाजनक होती है।
- विद्युत इस्त्री आधुनिक और सुविधाजनक इस्त्री है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. गर्मी के मौसम के लिए कौन-सा तंतु अधिक उपयोगी है?
(A) ऊन
(B) सूती
(C) रेशम
(D) नायलॉन
सही उत्तर: (B) सूती
व्याख्या: सूती वस्त्र पसीना सोखते हैं और शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं, इसलिए गर्मी के मौसम में उपयोगी होते हैं।
2. रेशम की खोज किस देश में हुई थी?
(A) भारत
(B) चीन
(C) जापान
(D) अमेरिका
सही उत्तर: (B) चीन
व्याख्या: स्रोत के अनुसार रेशम की खोज चीन में हुई थी।
3. भारी शरीर वाले व्यक्ति को किस प्रकार की रेखाओं से बचना चाहिए?
(A) लंबवत रेखाएँ
(B) चौड़ी क्षैतिज रेखाएँ
(C) तिरछी रेखाएँ
(D) छोटी रेखाएँ
सही उत्तर: (B) चौड़ी क्षैतिज रेखाएँ
व्याख्या: चौड़ी क्षैतिज रेखाएँ शरीर को अधिक चौड़ा दिखा सकती हैं।
4. शोक के अवसर पर सामान्यतः किस रंग के सादे वस्त्र बताए गए हैं?
(A) लाल
(B) पीला
(C) सफेद
(D) नीला
सही उत्तर: (C) सफेद
व्याख्या: स्रोत के अनुसार शोक के अवसर पर सफेद और सादे वस्त्र पहनने की परंपरा बताई गई है।
5. तीरा किसे कहा जाता है?
(A) कमर का माप
(B) छाती का माप
(C) एक कंधे से दूसरे कंधे तक का माप
(D) पैर का माप
सही उत्तर: (C) एक कंधे से दूसरे कंधे तक का माप
व्याख्या: रेडीमेड वस्त्रों के चयन में तीरा कंधे के एक सिरे से दूसरे सिरे तक का माप है।
6. डॉक्टर और नर्स के सफेद वस्त्र किसके प्रतीक बताए गए हैं?
(A) धन
(B) स्वच्छता और पवित्रता
(C) शक्ति
(D) मनोरंजन
सही उत्तर: (B) स्वच्छता और पवित्रता
व्याख्या: डॉक्टर और नर्स द्वारा सफेद कोट या एप्रन का प्रयोग स्वच्छता और पवित्रता के प्रतीक के रूप में बताया गया है।
7. निम्नलिखित में से कौन-सा तंतु मजबूत, हल्का और जल्दी सूखने वाला है?
(A) नायलॉन
(B) ऊन
(C) लीनन
(D) रेशम
सही उत्तर: (A) नायलॉन
व्याख्या: नायलॉन मजबूत, हल्का और जल्दी सूखने वाला कृत्रिम तंतु है।
8. स्रोत के अनुसार खराब रेडीमेड वस्त्र पहली धुलाई में लगभग कितने प्रतिशत रंग खो सकते हैं?
(A) 10%
(B) 25%
(C) 40%
(D) 60%
सही उत्तर: (D) 60%
व्याख्या: स्रोत में खराब रेडीमेड वस्त्रों के पहली धुलाई में लगभग 60% रंग खोने की बात कही गई है।
9. साबुन बनने की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
(A) ऑक्सीकरण
(B) सैपोनिफिकेशन
(C) वाष्पीकरण
(D) आसवन
सही उत्तर: (B) सैपोनिफिकेशन
व्याख्या: वसा और क्षार की अभिक्रिया से साबुन बनने की प्रक्रिया को सैपोनिफिकेशन कहते हैं।
10. घर में साबुन बनाने के लिए कौन-सी विधि बताई गई है?
(A) गरम विधि
(B) ठंडी विधि
(C) भाप विधि
(D) सुखाने की विधि
सही उत्तर: (B) ठंडी विधि
व्याख्या: स्रोत में ठंडी विधि को सरल घरेलू विधि के रूप में बताया गया है।
11. साबुन की टिकिया पर सफेद परत किसकी अधिकता का संकेत बताई गई है?
(A) पानी
(B) तेल
(C) क्षार
(D) नमक
सही उत्तर: (C) क्षार
व्याख्या: स्रोत के अनुसार साबुन पर सफेद परत अधिक क्षार की उपस्थिति का संकेत है।
12. वस्त्रों में कड़ापन लाने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है?
(A) स्टार्च
(B) तेल
(C) नमक
(D) मिट्टी
सही उत्तर: (A) स्टार्च
व्याख्या: धुलाई के बाद सूती वस्त्रों और साड़ियों में स्टार्च का प्रयोग कड़ापन लाने के लिए किया जाता है।
13. वाशिंग मशीन में कौन-से सिद्धांत बताए गए हैं?
(A) केवल गर्मी
(B) रगड़, दबाव और सक्शन
(C) केवल प्रकाश
(D) केवल ताप
सही उत्तर: (B) रगड़, दबाव और सक्शन
व्याख्या: स्रोत में वाशिंग मशीन के विभिन्न प्रकारों में रगड़, दबाव और सक्शन के सिद्धांतों का उल्लेख है।
14. कोयले की इस्त्री की प्रमुख कमी क्या है?
(A) बहुत हल्की होती है
(B) भारी और असुविधाजनक होती है
(C) बिजली से चलती है
(D) इसमें गर्मी नहीं होती
सही उत्तर: (B) भारी और असुविधाजनक होती है
व्याख्या: कोयले की इस्त्री भारी होती है और इसके उपयोग में अधिक सुविधा नहीं होती।
15. शिशुओं के वस्त्रों का चयन करते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
(A) केवल रंग
(B) केवल कीमत
(C) आकर्षण, फिटिंग और टिकाऊपन
(D) केवल डिजाइन
सही उत्तर: (C) आकर्षण, फिटिंग और टिकाऊपन
व्याख्या: शिशुओं के वस्त्रों में आकर्षण के साथ सही फिटिंग और टिकाऊपन भी महत्वपूर्ण है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. वस्त्र खरीदते समय किन चार प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए?
वस्त्र खरीदते समय टिकाऊपन, सलवट प्रतिरोध, धुलाई में सुविधा और रंग की स्थिरता का ध्यान रखना चाहिए।
2. प्राकृतिक और कृत्रिम तंतुओं में अंतर बताइए।
प्राकृतिक तंतु प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते हैं, जैसे सूती, लीनन, रेशम और ऊन। कृत्रिम तंतु रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा बनाए जाते हैं, जैसे रेयॉन और नायलॉन।
3. भारी शरीर वाले व्यक्ति को वस्त्रों का चयन किस प्रकार करना चाहिए?
भारी शरीर वाले व्यक्ति को ऐसी डिजाइन चुननी चाहिए जो शरीर को अधिक चौड़ा न दिखाए। स्रोत के अनुसार हल्के रंगों का प्रयोग तथा चौड़ी क्षैतिज रेखाओं से बचना उपयोगी है।
4. सार्वजनिक समारोह और शोक के अवसर के वस्त्रों में क्या अंतर है?
सार्वजनिक समारोह में शालीन, सरल और गरिमापूर्ण वस्त्र पहने जाते हैं, जबकि शोक के अवसर पर सादे और सफेद वस्त्र पहनने की परंपरा बताई गई है।
5. रेडीमेड वस्त्रों में प्लैकेट की जाँच क्यों करनी चाहिए?
रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय प्लैकेट को देखना चाहिए कि वह ढीला न हो तथा उसकी सिलाई उचित और मजबूत हो। इससे वस्त्र की गुणवत्ता का पता चलता है।
6. ठंडी विधि से साबुन बनाने में किन सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है?
ठंडी विधि में कास्टिक सोडा, पानी, नारियल तेल, बेसन तथा मिट्टी या लकड़ी का बड़ा बर्तन और लकड़ी का चम्मच आदि सामग्री का प्रयोग बताया गया है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. वस्त्रों के चयन को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों की व्याख्या कीजिए।
वस्त्रों का चयन व्यक्ति की शारीरिक बनावट, आयु, मौसम, अवसर और व्यवसाय आदि विभिन्न कारकों से प्रभावित होता है।
शरीर की बनावट: व्यक्ति को अपनी शारीरिक बनावट के अनुसार वस्त्र चुनने चाहिए। भारी शरीर वाले व्यक्ति ऐसी डिजाइन से बचें जो शरीर को अधिक चौड़ा दिखाए।
आयु: बच्चों, वयस्कों और वृद्धों की आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं। बच्चों के वस्त्र मजबूत और आरामदायक होने चाहिए, जबकि वृद्धों के वस्त्र ढीले और सुविधाजनक होने चाहिए।
मौसम: गर्मी में सूती और सर्दी में ऊनी वस्त्र उपयोगी होते हैं।
अवसर: विवाह और त्योहारों पर आकर्षक तथा सजावटी वस्त्र, जबकि सार्वजनिक समारोह में शालीन वस्त्र पहने जाते हैं।
व्यवसाय: डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, अधिकारी आदि अपने व्यवसाय के अनुरूप वस्त्र पहनते हैं।
2. रेडीमेड वस्त्रों की श्रेणियाँ, लाभ और गुणवत्ता जाँच के प्रमुख बिंदु बताइए।
रेडीमेड वस्त्रों को सामान्यतः निम्न, मध्यम और उच्च श्रेणी में रखा जाता है। रेडीमेड वस्त्रों का प्रमुख लाभ यह है कि इससे सिलाई करवाने का समय और मेहनत बचती है।
रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय अंदर की सिलाई, हेमिंग, प्लैकेट, बटन, हुक, वस्त्र की चौड़ाई, डिजाइन और ड्रेप की जाँच करनी चाहिए। सिलाई साफ तथा मजबूत होनी चाहिए और वस्त्र की गिरावट स्वाभाविक होनी चाहिए।
3. वस्त्रों की धुलाई एवं देखभाल, साबुन बनाने की विधियों तथा धुलाई उपकरणों की व्याख्या कीजिए।
वस्त्रों की उचित देखभाल के लिए पानी की गुणवत्ता, साबुन या डिटर्जेंट तथा धुलाई की विधि का ध्यान रखना आवश्यक है। मुलायम पानी धुलाई के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है। कठोर पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम के लवण पाए जाते हैं।
साबुन वसा और क्षार की अभिक्रिया से बनता है और इस प्रक्रिया को सैपोनिफिकेशन कहा जाता है। साबुन बनाने की गरम विधि कारखानों में तथा ठंडी विधि घरेलू स्तर पर बताई गई है।
धुलाई में वाशिंग मशीन, वॉशबोर्ड, हैंड प्लंजर, रिंजर तथा अन्य उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। इस्त्री के लिए कोयले की इस्त्री, स्टोव से गर्म की जाने वाली इस्त्री तथा विद्युत इस्त्री का उपयोग किया जाता है।
बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- प्राकृतिक एवं मानव निर्मित तंतुओं में अंतर स्पष्ट कीजिए तथा सूती और नायलॉन के गुण लिखिए।
- विभिन्न शारीरिक बनावट वाले व्यक्तियों के लिए वस्त्र चयन के नियम लिखिए।
- रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय सिलाई, हेमिंग और प्लैकेट की जाँच कैसे की जाती है?
- डॉक्टर, शिक्षक और विद्यालय के बच्चों के वस्त्रों में यूनिफॉर्म का क्या महत्व है?
- ठंडी विधि से साबुन बनाने की सामग्री एवं प्रक्रिया लिखिए।
- वाशिंग मशीन के विभिन्न प्रकार और उनके कार्य करने के सिद्धांत लिखिए।
- कोयले की इस्त्री तथा विद्युत इस्त्री की तुलना कीजिए।
अंतिम पुनरावृत्ति के महत्वपूर्ण बिंदु
- सूती तंतु – मजबूत, मुलायम, नमी सोखने वाला और गर्मी के लिए उपयोगी।
- रेशम – रेशम के कीड़ों से प्राप्त होता है और इसकी खोज चीन में बताई गई है।
- ऊन – पशु-जनित तथा गर्म तंतु।
- नायलॉन – मजबूत, हल्का और जल्दी सूखने वाला कृत्रिम तंतु।
- तीरा – एक कंधे के सिरे से दूसरे कंधे तक का माप।
- सैपोनिफिकेशन – साबुन बनने की प्रक्रिया।
- स्टार्च – वस्त्रों में कड़ापन लाने के लिए।
- गरम साबुन विधि – कारखानों में उपयोग।
- ठंडी साबुन विधि – घरेलू स्तर पर बताई गई विधि।
- वाशिंग मशीन – समय और शारीरिक ऊर्जा की बचत करती है।
- कोयले की इस्त्री – भारी और असुविधाजनक।
- विद्युत इस्त्री – आधुनिक और सुविधाजनक।
निष्कर्ष
कक्षा 12 गृह विज्ञान के अध्याय 20, 21, 22 एवं 23 में वस्त्रों के चयन, सिले-सिलाए वस्त्रों की गुणवत्ता, विभिन्न प्राकृतिक एवं कृत्रिम तंतुओं तथा वस्त्रों की धुलाई और रखरखाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। वस्त्रों का सही चयन व्यक्ति की शारीरिक बनावट, आयु, मौसम, अवसर और व्यवसाय के अनुसार किया जाना चाहिए।
साथ ही रेडीमेड वस्त्र खरीदते समय उनकी सिलाई, हेमिंग, प्लैकेट, बटन, हुक और ड्रेप की जाँच करना आवश्यक है। उचित धुलाई, साबुन, स्टार्च, वाशिंग मशीन तथा इस्त्री के सही प्रयोग से वस्त्रों को लंबे समय तक उपयोगी और आकर्षक बनाए रखा जा सकता है।
परीक्षा की दृष्टि से तंतुओं के गुण, वस्त्र चयन के आधार, शरीर की बनावट के अनुसार वस्त्र, रेडीमेड वस्त्रों की गुणवत्ता, साबुन निर्माण, कठोर एवं मुलायम पानी, वाशिंग मशीन तथा इस्त्री से संबंधित प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।