कक्षा 12 गृह विज्ञान (Class 12 Home Science) के अध्याय 24, 25 तथा 26 में वस्त्रों की धुलाई, दाग-धब्बों को छुड़ाने, वस्त्रों के रख-रखाव एवं संग्रहण तथा बिहार की पारंपरिक सुई कला का अध्ययन किया जाता है। इन अध्यायों में वस्त्रों पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के धब्बों की पहचान, उन्हें हटाने की विधियाँ, वस्त्रों की सही धुलाई तथा लंबे समय तक सुरक्षित रखने के नियमों को विस्तार से समझाया गया है।
अध्याय के अंतिम भाग में बिहार की प्रसिद्ध पारंपरिक हस्तशिल्प कलाओं सूजनी तथा एल्पिक के इतिहास, विशेषताओं, निर्माण प्रक्रिया और उपयोग का वर्णन किया गया है। यह सामग्री विद्यार्थियों के लिए बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अध्याय परिचय
वस्त्र मानव जीवन की आवश्यक वस्तुओं में से एक हैं। दैनिक जीवन में प्रयोग के दौरान वस्त्रों पर विभिन्न प्रकार के दाग-धब्बे लग जाते हैं। इन धब्बों को सही विधि से हटाना आवश्यक है, क्योंकि गलत विधि अपनाने से वस्त्र खराब हो सकते हैं।
इस अध्ययन-सामग्री में वस्त्रों से धब्बे छुड़ाने की प्रमुख तकनीकों जैसे घोलक, चूसक तथा रासायनिक विधि एवं अम्लीय और क्षारीय अभिकर्मकों के प्रयोग को समझाया गया है। इसके साथ ही सूती एवं रेशमी वस्त्रों की धुलाई, देखभाल और संग्रहण के व्यावहारिक नियमों का वर्णन किया गया है।
अंत में बिहार की सांस्कृतिक विरासत सूजनी एवं एल्पिक कला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विशेषताओं तथा उपयोगों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview
इस संयुक्त अध्ययन में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों को शामिल किया गया है—
- वस्त्रों पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के धब्बे।
- दाग-धब्बे छुड़ाने की विभिन्न विधियाँ।
- अम्लीय एवं क्षारीय अभिकर्मकों का प्रयोग।
- वस्त्रों की धुलाई की प्रक्रिया।
- सूती तथा रेशमी वस्त्रों का रख-रखाव एवं संग्रहण।
- रंगीन साड़ियों की देखभाल।
- बिहार की पारंपरिक सूजनी कला।
- एल्पिक या कशीदा कला।
- इन पारंपरिक कलाओं का ऐतिहासिक एवं व्यावहारिक महत्व।
मुख्य अवधारणाएँ
विषय 1: धब्बे छुड़ाना और धुलाई प्रक्रिया (Stain Removal and Laundering Process)
1. धब्बों के प्रकार (Types of Stains)
वस्त्रों पर लगने वाले दाग-धब्बों को मुख्य रूप से पाँच श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
प्राणिज धब्बा (Animal Stains)
जीव-जंतुओं या प्राणियों के शरीर तथा उनके उत्पादों से लगने वाले धब्बे प्राणिज धब्बे कहलाते हैं।
उदाहरण: दूध, अंडा, मांस, मछली तथा रक्त के धब्बे।
वानस्पतिक धब्बा (Vegetable Stains)
पेड़-पौधों तथा वनस्पतिजन्य पदार्थों से लगने वाले धब्बे वानस्पतिक धब्बे कहलाते हैं।
उदाहरण: चाय, कॉफी, फल, फूल तथा सब्जियों के दाग।
खनिज धब्बा (Mineral Stains)
खनिज पदार्थों एवं धातुओं के संपर्क से लगने वाले धब्बे खनिज धब्बे कहलाते हैं।
उदाहरण: जंग, स्याही तथा औषधियों के दाग।
चिकनाई धब्बा (Grease Stains)
तैलीय तथा वसायुक्त पदार्थों से लगने वाले धब्बे चिकनाई वाले धब्बे कहलाते हैं।
उदाहरण: घी, तेल, मक्खन, क्रीम, पेंट, वार्निश, तारकोल तथा रसदार सब्जी के दाग।
अन्य धब्बे
जो धब्बे उपर्युक्त किसी भी श्रेणी में सीधे शामिल नहीं होते, उन्हें अन्य धब्बों की श्रेणी में रखा जाता है।
2. दाग-धब्बे छुड़ाने की विधियाँ (Methods of Stain Removal)
वस्त्रों से दाग हटाने के लिए मुख्य रूप से तीन विधियों का प्रयोग किया जाता है।
घोलक विधि (Solvent Method)
इस विधि का उपयोग घुलनशील धब्बों को छुड़ाने के लिए किया जाता है। इसमें विभिन्न घोलकों का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण: ईथर, बेंजीन, एसीटोन, पेट्रोल तथा स्पिरिट आदि।
नोट: ऐसे रासायनिक घोलक ज्वलनशील अथवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं, इसलिए इनके प्रयोग में उचित सावधानी आवश्यक है।
चूसक विधि (Absorbent Method)
जिन वस्त्रों या सामग्रियों को पानी में नहीं धोया जा सकता अथवा बिना धोए केवल धब्बा हटाना हो, वहाँ चूसक विधि अपनाई जाती है। इसमें द्रव को अवशोषक माध्यम द्वारा चूसकर या सुखाकर हटाया जाता है।
रासायनिक विधि (Chemical Method)
जब धब्बे सामान्य पानी से नहीं छूटते, तो उन्हें हटाने के लिए रासायनिक पदार्थों या अभिकर्मकों का प्रयोग किया जाता है।
3. दाग-धब्बे मिटाने के अभिकर्मक (Reagents for Stain Removal)
जिस पदार्थ की सहायता से दाग-धब्बा मिटाया जाता है, उसे अभिकर्मक (Reagent) कहते हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं—
अम्लीय अभिकर्मक (Acidic Reagents)
अम्लीय अभिकर्मकों का उपयोग मुख्य रूप से जंग, स्याही तथा खनिज धब्बों को हटाने के लिए किया जाता है।
- नींबू का रस: यह ऑक्सिलिक अम्ल की भांति कार्य करने वाला पदार्थ बताया गया है और जिद्दी दागों को छुड़ाने में प्रयोग किया जाता है।
- एसिटिक अम्ल: वस्त्रों पर लगी अत्यधिक नील को हटाने के लिए इसका प्रयोग बताया गया है।
- सिरका: इसमें 4% से 6% एसिटिक अम्ल बताया गया है और इसका उपयोग धब्बे छुड़ाने हेतु किया जाता है।
क्षारीय अभिकर्मक (Alkaline Reagents)
- बोरेक्स: इसे हल्के ब्लीच के रूप में बताया गया है और जैविकीय दागों को मिटाने में इसका उपयोग किया जाता है।
- अमोनिया: यह हल्का क्षार है और मुख्य रूप से ऊनी वस्त्रों के धब्बे छुड़ाने के लिए बताया गया है।
- वाशिंग सोडा: इसका प्रयोग अम्लीय प्रकृति के दागों को मिटाने के लिए किया जाता है।
- साबुन: यह क्षारीय अभिकर्मक के एक रूप के रूप में बताया गया है।
4. दाग छुड़ाने की तकनीकी प्रविधियाँ
डुबोकर विधि
इस विधि में वस्त्र के दाग वाले भाग को अभिकर्मक के घोल में डुबोया जाता है।
स्पंज विधि (Sponge Method)
इस विधि में दाग वाले स्थान पर ब्लोटिंग पेपर रखकर स्पंज की सहायता से अभिकर्मक लगाया जाता है और दाग वाले स्थान को साफ किया जाता है।
ड्रॉप विधि (Drop Method)
इस विधि में कपड़े को खींचकर किसी बर्तन पर रखा जाता है और ड्रॉपर की सहायता से अभिकर्मक की बूंदें दाग वाले स्थान पर डाली जाती हैं।
5. दाग-धब्बे छुड़ाने के सामान्य नियम
- धब्बा लगते ही उसे ताजा अवस्था में ही छुड़ा लेना चाहिए।
- अभिकर्मकों का हल्का घोल प्रयोग करना चाहिए।
- धब्बे की प्रकृति के अनुसार ही सही अभिकर्मक का चुनाव करना चाहिए।
- दाग छूटते ही वस्त्र को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए।
- सूती या लीनन वस्त्र पर चाय या कॉफी का ताजा धब्बा होने पर स्रोत के अनुसार उस पर उबलता हुआ गर्म पानी डालने से धब्बा छूट जाता है।
विषय 2: वस्त्रों का रख-रखाव एवं संग्रहण (Maintenance and Storage of Clothes)
1. वस्त्रों की धुलाई प्रक्रिया (Laundering Process)
मैले वस्त्रों को अधिक समय तक बिना धोए नहीं रखना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक रखने पर मैल जम सकती है।
सूती वस्त्रों की धुलाई के चरण
1. पूर्व तैयारी
धुलाई से पहले कपड़ों को छांटकर अलग करना चाहिए तथा धब्बेदार कपड़ों को अलग रखना चाहिए।
2. भिगोना तथा धोना
सूती कपड़ों को हल्के गुनगुने पानी तथा साबुन या डिटर्जेंट के घोल में भिगोना चाहिए। अधिक गंदे कपड़ों के पानी में थोड़ा-सा नमक या कपड़ा धोने का सोडा डालने से वे अधिक साफ होने की बात बताई गई है।
डिटर्जेंट में कपड़ों को बहुत अधिक देर तक नहीं भिगोना चाहिए। रंगीन कपड़ों को भी लंबे समय तक भिगोकर नहीं रखना चाहिए।
3. खंगालना
धुलाई के बाद कपड़ों को स्वच्छ पानी में बार-बार डुबोकर डिटर्जेंट का पूरा झाग निकाल लेना चाहिए।
2. विभिन्न प्रकार के वस्त्रों का संग्रहण (Storage of Clothing)
सूती वस्त्रों का संग्रहण
सूती वस्त्रों को अलमारी या बक्से में रखने से पहले पूरी तरह सुखा लेना चाहिए। इसके बाद उन्हें सुव्यवस्थित ढंग से तह करके रखना चाहिए।
संग्रहण के समय वस्त्रों में स्टार्च या कलफ नहीं लगाना चाहिए। दुर्गंध से बचाने के लिए सुगंधित साधनों का प्रयोग किया जा सकता है।
रंगीन साड़ियों का रख-रखाव
- अनेक रंगीन साड़ियों को एक साथ धोना या एक-दूसरे से सटाकर नहीं रखना चाहिए, ताकि रंग आपस में न चढ़े।
- साड़ियों को अत्यधिक तेज धूप में नहीं सुखाना चाहिए।
- साड़ियों को बार-बार धोने से बचना चाहिए।
- साड़ियों में अत्यधिक स्टार्च लगाने से बचना चाहिए।
रेशमी वस्त्रों का संग्रहण
- रेशमी वस्त्रों को अलमारी में तह लगाकर या हैंगर पर टांगकर रखना चाहिए।
- लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वस्त्रों को अच्छी तरह सुखाकर रखना चाहिए।
- कीड़ों से बचाव के लिए नेफ्थलीन की गोलियों का प्रयोग बताया गया है।
विषय 3: बिहार की सुई कला – सूजनी एवं एल्पिक
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बिहार में शिल्पकला का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। मौर्य काल में बिहार की शिल्पकला अपने चरम पर होने की बात इस अध्ययन-सामग्री में बताई गई है।
ग्रीक यात्री मेगस्थनीज जब पाटलिपुत्र आए थे, तब वे यहाँ की उत्कृष्ट शिल्पकला को देखकर प्रभावित हुए थे। स्रोत के अनुसार उन्होंने इसकी अत्यधिक प्रशंसा की थी।
2. बिहार की सुई कला एवं उत्पाद
बिहार की सुई कला से दैनिक उपयोग की अनेक सुंदर वस्तुएँ बनाई जाती हैं। इसके प्रमुख उत्पादों में निम्नलिखित शामिल हैं—
- कुशन कवर
- बेडशीट
- झोला
- मोबाइल हैंडसेट कवर
- कप कवर
- टीवी कवर
- तकिया कवर
- हैंडबैग
सूजनी कला (Sujani Art)
सूजनी कला बिहार की प्रसिद्ध पारंपरिक लोक कला है, जो विशेष रूप से मधुबनी या मिथिला क्षेत्र में प्रचलित बताई गई है। यह कपड़ों पर की जाने वाली एक हस्तशिल्प कला है जिसमें कढ़ाई और एल्पिक का समावेश होता है।
सूजनी कला के उपयोग
सूजनी कला का प्रयोग रजाई, चादर, दीवार की सजावट तथा कपड़ों पर सुंदर चित्र उकेरने के लिए किया जाता है। आधुनिक समय में इससे विभिन्न दैनिक उपयोग की वस्तुएँ भी बनाई जाती हैं।
सूजनी कला की प्रमुख विशेषताएँ
1. पुराने कपड़ों का पुनर्चक्रण / उपयोग
इस कला में पुरानी साड़ियों, दुपट्टों तथा अन्य कपड़ों को एक के ऊपर एक परतदार रूप में रखा जाता है। इन परतों को सिलने के बाद उन पर कढ़ाई की जाती है।
2. सुई-धागे से चित्रकारी
सूजनी कला में सुई और धागे की सहायता से विभिन्न टांके लगाकर मनमोहक आकृतियाँ बनाई जाती हैं। यह कार्य हाथ से किया जाता है।
सूजनी कला का इतिहास एवं मूल उद्देश्य
स्रोत के अनुसार कशीदाकारी सूजनी रजाई बनाने की सबसे पुरानी पारंपरिक प्रथा 18वीं शताब्दी में प्राप्त होती है। बिहार में इस कला के विकास का मूल उद्देश्य नवजात शिशुओं के जन्म के तुरंत बाद उन्हें सुलाने के लिए एक मुलायम कवर या बिस्तर प्रदान करना था।
एल्पिक या कशीदा कला (Applique / Kashida Art)
एल्पिक कला बिहार के ग्रामीण अंचलों में लोकप्रिय पारंपरिक वस्त्र शिल्प है। इसमें एक मुख्य कपड़े के ऊपर विभिन्न रंगों के कपड़ों को अलग-अलग आकार में काटकर सिला जाता है। इससे छोटे-बड़े आकर्षक डिजाइन तैयार होते हैं।
एल्पिक कला की प्रक्रिया
सबसे पहले मुख्य कपड़े का चयन किया जाता है। इसके बाद अलग-अलग रंगों के कपड़ों को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न आकारों में काटा जाता है। कटे हुए कपड़ों को मुख्य कपड़े पर व्यवस्थित करके सिल दिया जाता है। इस प्रकार सुंदर और आकर्षक डिजाइन तैयार होते हैं।
एल्पिक में सिलाई के तरीके
- सीधी सिलाई (Straight Stitch)
- साटन स्टिच (Satin Stitch)
- उल्टाइल पे (Ultail Pe)
एल्पिक कला के पारंपरिक उपयोग
पूर्व में एल्पिक का कार्य कनातों, शामियाना अर्थात टेंट, झालरों तथा हाथी-घोड़ों को सजाने वाले वस्त्रों पर विशेष रूप से किया जाता था।
शब्दावली / Key Terms
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्राणिज धब्बा (Animal Stain) | जीव-जंतुओं के दूध, रक्त, मांस आदि से लगने वाले दाग। |
| वानस्पतिक धब्बा (Vegetable Stain) | चाय, कॉफी, फल, सब्जी आदि से लगने वाले दाग। |
| खनिज धब्बा (Mineral Stain) | जंग, स्याही आदि धातुओं या खनिजों से लगने वाले दाग। |
| चिकनाई धब्बा (Grease Stain) | तेल, घी, मक्खन, क्रीम, ग्रीस आदि से लगने वाले दाग। |
| अभिकर्मक (Reagents) | वह रसायन या पदार्थ जिसकी सहायता से कपड़ों के दाग छुड़ाए जाते हैं। |
| घोलक (Solvents) | दाग को घोलकर दूर करने वाले पदार्थ। |
| सूजनी कला (Sujani Art) | बिहार की पारंपरिक सुई कला जिसमें पुराने वस्त्रों को परतदार करके सुई-धागे से कढ़ाई की जाती है। |
| एल्पिक (Applique) | कपड़े के ऊपर दूसरे रंग-बिरंगे कपड़ों को काटकर सिलने की कला। |
अध्याय का सारांश
इस अध्याय में वस्त्र धुलाई, रख-रखाव तथा बिहार की सुई कला का अध्ययन किया गया है। वस्त्रों पर लगने वाले धब्बों को प्राणिज, वानस्पतिक, खनिज, चिकनाई तथा अन्य श्रेणियों में बाँटा गया है। इन्हें छुड़ाने हेतु घोलक, चूसक तथा रासायनिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।
धब्बे छुड़ाने के लिए अम्लीय तथा क्षारीय अभिकर्मकों का प्रयोग बताया गया है। अम्लीय अभिकर्मकों में नींबू का रस, एसिटिक अम्ल और सिरका तथा क्षारीय अभिकर्मकों में बोरेक्स, अमोनिया, वाशिंग सोडा और साबुन का उल्लेख किया गया है।
वस्त्रों के दीर्घकालिक प्रयोग हेतु उनकी उचित धुलाई तथा संग्रहण आवश्यक है। सूती वस्त्रों को उचित ढंग से धोकर पूरी तरह सुखाना चाहिए। रंगीन साड़ियों को एक-दूसरे से सटाकर रखने से बचना चाहिए। रेशमी वस्त्रों को कीड़ों से बचाने के लिए नेफ्थलीन की गोलियों का प्रयोग बताया गया है।
अंत में बिहार की सांस्कृतिक विरासत सूजनी एवं एल्पिक कला के इतिहास, निर्माण प्रक्रिया और उपयोगों का अध्ययन किया गया है।
त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision
- धब्बों के 5 प्रकार: प्राणिज, वानस्पतिक, खनिज, चिकनाई और अन्य।
- धब्बा छुड़ाने की 3 मुख्य विधियाँ: घोलक विधि, चूसक विधि और रासायनिक विधि।
- अम्लीय अभिकर्मक: नींबू का रस, एसिटिक अम्ल और सिरका।
- क्षारीय अभिकर्मक: बोरेक्स, अमोनिया, वाशिंग सोडा और साबुन।
- सूती कपड़े: स्रोत के अनुसार भिगोते समय पानी में थोड़ा नमक मिलाने से अधिक साफ होते हैं।
- चाय का ताजा धब्बा: स्रोत के अनुसार सूती या लीनन वस्त्र पर उबलता हुआ गर्म पानी डालने से हटता है।
- रेशमी वस्त्र: कीड़ों से सुरक्षा के लिए नेफ्थलीन की गोलियों का प्रयोग बताया गया है।
- मेगस्थनीज: पाटलिपुत्र की शिल्पकला की प्रशंसा करने वाले ग्रीक यात्री के रूप में वर्णित हैं।
- सूजनी का मूल उद्देश्य: नवजात शिशुओं के लिए मुलायम आवरण या बिस्तर बनाना।
- एल्पिक की तीन सिलाई तकनीकें: सीधी सिलाई, साटन स्टिच और उल्टाइल पे।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
प्रश्न 1: अंडे या दूध से वस्त्र पर लगा दाग किस प्रकार के धब्बे के अंतर्गत आता है?
(A) वानस्पतिक धब्बा
(B) प्राणिज धब्बा
(C) खनिज धब्बा
(D) चिकनाई धब्बा
सही उत्तर: (B) प्राणिज धब्बा
Explanation: प्राणी या जंतुजन्य पदार्थों जैसे अंडा, दूध, मांस तथा रक्त से लगने वाले दाग प्राणिज धब्बे कहलाते हैं।
प्रश्न 2: चाय या कॉफी से कपड़े पर लगने वाले दाग को किस श्रेणी में रखा जाता है?
(A) प्राणिज धब्बा
(B) वानस्पतिक धब्बा
(C) खनिज धब्बा
(D) चिकनाई धब्बा
सही उत्तर: (B) वानस्पतिक धब्बा
Explanation: पेड़-पौधों तथा वनस्पतियों से प्राप्त पदार्थों जैसे चाय, कॉफी, फल और सब्जियों के दाग वानस्पतिक धब्बे कहलाते हैं।
प्रश्न 3: जंग तथा स्याही से वस्त्रों पर लगने वाले दाग किस श्रेणी में आते हैं?
(A) खनिज धब्बा
(B) चिकनाई धब्बा
(C) प्राणिज धब्बा
(D) वानस्पतिक धब्बा
सही उत्तर: (A) खनिज धब्बा
Explanation: खनिज पदार्थों तथा धातुओं के संपर्क से लगने वाले दाग जैसे जंग और स्याही खनिज धब्बे कहलाते हैं।
प्रश्न 4: मक्खन, घी या पेंट से लगने वाले धब्बे कहलाते हैं:
(A) वानस्पतिक धब्बा
(B) खनिज धब्बा
(C) चिकनाई धब्बा
(D) प्राणिज धब्बा
सही उत्तर: (C) चिकनाई धब्बा
Explanation: वसा और तैलीय पदार्थों जैसे घी, तेल, मक्खन, क्रीम, पेंट और वार्निश से लगने वाले दाग चिकनाई धब्बे के अंतर्गत आते हैं।
प्रश्न 5: ईथर, बेंजीन तथा एसीटोन का प्रयोग किस विधि में धब्बा छुड़ाने हेतु किया जाता है?
(A) चूसक विधि
(B) घोलक विधि
(C) रासायनिक विधि
(D) स्पंज विधि
सही उत्तर: (B) घोलक विधि
Explanation: घुलनशील धब्बों को छुड़ाने के लिए घोलक विधि में ईथर, बेंजीन, एसीटोन तथा पेट्रोल जैसे घोलकों का प्रयोग बताया गया है।
प्रश्न 6: किस विधि का उपयोग उन वस्तुओं पर किया जाता है जिन्हें पानी में भिगोया नहीं जा सकता?
(A) घोलक विधि
(B) ड्रॉप विधि
(C) चूसक विधि
(D) डुबोकर विधि
सही उत्तर: (C) चूसक विधि
Explanation: जिन्हें पानी में धोया नहीं जा सकता या बिना धोए धब्बा हटाना हो, वहाँ चूसक विधि का प्रयोग बताया गया है।
प्रश्न 7: सिरके में कितने प्रतिशत एसिटिक अम्ल बताया गया है?
(A) 2% से 4%
(B) 4% से 6%
(C) 8% से 10%
(D) 10% से 12%
सही उत्तर: (B) 4% से 6%
Explanation: स्रोत के अनुसार सिरके में 4 से 6 प्रतिशत एसिटिक अम्ल पाया जाता है।
प्रश्न 8: ऊनी वस्त्रों पर लगे दाग-धब्बे छुड़ाने के लिए किस हल्के क्षार का प्रयोग बताया गया है?
(A) वाशिंग सोडा
(B) अमोनिया
(C) नींबू का रस
(D) ईथर
सही उत्तर: (B) अमोनिया
Explanation: अमोनिया एक हल्का क्षार है जिसका प्रयोग मुख्य रूप से ऊनी वस्त्रों के दाग छुड़ाने के लिए बताया गया है।
प्रश्न 9: सूती वस्त्रों को धोते समय पानी में क्या मिला देने से वे अधिक साफ होते हैं?
(A) चीनी
(B) सिरका
(C) नमक
(D) नींबू रस
सही उत्तर: (C) नमक
Explanation: स्रोत के अनुसार अधिक गंदे सूती कपड़ों को भिगोते समय पानी में थोड़ा-सा नमक डालने से वे अधिक साफ होते हैं।
प्रश्न 10: सूती वस्त्र पर लगा चाय का ताजा धब्बा छुड़ाने के लिए किसका प्रयोग बताया गया है?
(A) ठंडा पानी
(B) उबलता हुआ गर्म पानी
(C) केरोसिन तेल
(D) अमोनिया
सही उत्तर: (B) उबलता हुआ गर्म पानी
Explanation: स्रोत के अनुसार सूती या लीनन कपड़े पर चाय का ताजा धब्बा होने पर उबलता हुआ पानी डालने से वह छूट जाता है।
प्रश्न 11: रेशमी वस्त्रों को अलमारी में कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए किसकी गोलियों का प्रयोग बताया गया है?
(A) सल्फर की गोलियाँ
(B) नेफ्थलीन की गोलियाँ
(C) सोडियम की गोलियाँ
(D) बोरेक्स की गोलियाँ
सही उत्तर: (B) नेफ्थलीन की गोलियाँ
Explanation: रेशमी वस्त्रों को कीड़ों से बचाने के लिए नेफ्थलीन की गोलियों का प्रयोग बताया गया है।
प्रश्न 12: मौर्य काल में पाटलिपुत्र की शिल्पकला की प्रशंसा किस ग्रीक यात्री ने की थी?
(A) फाहियान
(B) मेगस्थनीज
(C) ह्वेनसांग
(D) इत्सिंग
सही उत्तर: (B) मेगस्थनीज
Explanation: स्रोत के अनुसार ग्रीक यात्री मेगस्थनीज ने पाटलिपुत्र की शिल्पकला को देखकर उसकी प्रशंसा की थी।
प्रश्न 13: बिहार की सूजनी कला मुख्य रूप से किस क्षेत्र में प्रचलित बताई गई है?
(A) मगध क्षेत्र
(B) मधुबनी (मिथिला) क्षेत्र
(C) भोजपुर क्षेत्र
(D) सारण क्षेत्र
सही उत्तर: (B) मधुबनी (मिथिला) क्षेत्र
Explanation: स्रोत में सूजनी कला को विशेष रूप से मधुबनी/मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक कला बताया गया है।
प्रश्न 14: सूजनी कला का मूल ऐतिहासिक उद्देश्य क्या बताया गया है?
(A) राजाओं के वस्त्र बनाना
(B) नवजात शिशुओं हेतु मुलायम कवर/बिस्तर बनाना
(C) टेंट व शामियाना सजाना
(D) व्यापारिक निर्यात करना
सही उत्तर: (B) नवजात शिशुओं हेतु मुलायम कवर/बिस्तर बनाना
Explanation: स्रोत के अनुसार सूजनी कला के विकास का मूल उद्देश्य नवजात शिशुओं के लिए मुलायम आवरण या बिस्तर प्रदान करना था।
प्रश्न 15: एल्पिक कला में निम्नलिखित में से कौन-से सिलाई के तरीके अपनाए जाते हैं?
(A) सीधी सिलाई
(B) साटन स्टिच
(C) उल्टाइल पे
(D) उपर्युक्त सभी
सही उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी
Explanation: स्रोत के अनुसार एल्पिक कला में सीधी सिलाई, साटन स्टिच और उल्टाइल पे तीन प्रमुख सिलाई तकनीकें हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: धब्बा (Stain) किसे कहते हैं और इसके प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर: वस्त्र पर किसी बाहरी पदार्थ के लगने से बना अवांछित निशान धब्बा कहलाता है। इसके मुख्य प्रकार हैं—प्राणिज धब्बा, वानस्पतिक धब्बा, खनिज धब्बा, चिकनाई धब्बा तथा अन्य धब्बा।
प्रश्न 2: प्राणिज धब्बे और वानस्पतिक धब्बे में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- प्राणिज धब्बा: यह प्राणियों या जीवों के शरीर अथवा उनके उत्पादों से लगता है, जैसे दूध, अंडा, रक्त और मांस।
- वानस्पतिक धब्बा: यह पेड़-पौधों एवं वनस्पतियों से लगता है, जैसे चाय, कॉफी, सब्जी और फल।
प्रश्न 3: चूसक विधि (Absorbent Method) का प्रयोग कब किया जाता है?
उत्तर: चूसक विधि का प्रयोग उन वस्तुओं या कपड़ों पर किया जाता है जिन्हें पानी में धोया नहीं जा सकता या बिना धोए धब्बा हटाना हो। इसमें द्रव को अवशोषक माध्यम द्वारा चूसकर या सुखाकर धब्बा हटाने की प्रक्रिया बताई गई है।
प्रश्न 4: सूती वस्त्रों की धुलाई में नमक का क्या उपयोग है?
उत्तर: स्रोत के अनुसार सूती वस्त्रों को धोते समय भिगोने वाले पानी में थोड़ा-सा नमक मिला देने से वस्त्र अधिक साफ होते हैं।
प्रश्न 5: एल्पिक (Applique) कला किसे कहते हैं?
उत्तर: एल्पिक एक वस्त्र शिल्प कला है जिसमें एक मुख्य कपड़े के ऊपर विभिन्न रंगों के कपड़ों को अलग-अलग आकार में काटकर सिल दिया जाता है। इससे आकर्षक डिजाइन तैयार होते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: वस्त्रों से दाग-धब्बे छुड़ाने की प्रमुख विधियों एवं अभिकर्मकों का विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर: वस्त्रों से दाग-धब्बे छुड़ाने की प्रमुख विधियों को तीन भागों में विभाजित किया गया है—
1. घोलक विधि
इस विधि में घुलनशील धब्बों को विभिन्न घोलकों की सहायता से हटाने की बात बताई गई है। स्रोत में ईथर, बेंजीन, एसीटोन, स्पिरिट तथा पेट्रोल जैसे पदार्थों का उल्लेख है। ऐसे पदार्थों के प्रयोग में सुरक्षा सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है।
2. चूसक विधि
इस विधि का प्रयोग बिना धोए धब्बा हटाने या ऐसी सामग्री के लिए किया जाता है जिसे पानी में नहीं धोया जा सकता। इसमें द्रव को चूसकर या सुखाकर हटाने की प्रक्रिया बताई गई है।
3. रासायनिक विधि
जिद्दी दागों को छुड़ाने के लिए रासायनिक अभिकर्मकों का प्रयोग किया जाता है।
अभिकर्मकों के प्रकार
अम्लीय अभिकर्मक: जंग, स्याही एवं खनिज दागों के लिए नींबू का रस, एसिटिक अम्ल और सिरका आदि का उल्लेख है।
क्षारीय अभिकर्मक: बोरेक्स, अमोनिया, वाशिंग सोडा और साबुन आदि का उल्लेख किया गया है।
तकनीकी रूप से वस्त्रों को डुबोकर, स्पंज विधि अथवा ड्रॉप विधि से साफ करने की प्रक्रिया भी बताई गई है।
प्रश्न 2: बिहार की सूजनी कला के इतिहास, विशेषताओं एवं उपयोग का विस्तृत विवरण दीजिए।
उत्तर: सूजनी कला बिहार की एक प्रसिद्ध पारंपरिक हस्तशिल्प लोक कला है, जो विशेष रूप से मधुबनी या मिथिला क्षेत्र में प्रचलित बताई गई है।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बिहार में शिल्पकला का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। मौर्य काल में पाटलिपुत्र की शिल्पकला की प्रसिद्धि का वर्णन स्रोत में किया गया है। ग्रीक यात्री मेगस्थनीज द्वारा यहाँ की शिल्पकला की प्रशंसा किए जाने का उल्लेख मिलता है।
सूजनी रजाई बनाने की पारंपरिक प्रथा का उल्लेख 18वीं शताब्दी से किया गया है। इसका मूल उद्देश्य नवजात शिशुओं के लिए मुलायम आवरण या बिस्तर उपलब्ध कराना बताया गया है।
2. प्रमुख विशेषताएँ
- पुरानी साड़ियों, दुपट्टों और अन्य कपड़ों का उपयोग।
- कपड़ों को परतदार रूप में रखकर सिलना।
- सुई-धागे से हाथ की कढ़ाई करना।
- कपड़े पर विभिन्न आकर्षक चित्राकृतियाँ बनाना।
3. उपयोग
सूजनी कला का प्रयोग रजाई, चादर, दीवार सजावट, बेडशीट, कुशन कवर, तकिया कवर, मोबाइल हैंडसेट कवर और हैंडबैग आदि बनाने में किया जाता है।
बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- प्राणिज, वानस्पतिक तथा खनिज धब्बों में उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट कीजिए।
- घोलक विधि तथा चूसक विधि में क्या अंतर है?
- सूती वस्त्रों की धुलाई एवं संग्रहण करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- रंगीन साड़ियों के रख-रखाव में क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
- बिहार की सूजनी कला तथा एल्पिक कला पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points
- दाग-धब्बे छुड़ाने हेतु ताजे धब्बों पर तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए।
- स्रोत के अनुसार सूती या लीनन कपड़े पर चाय/कॉफी का ताजा धब्बा उबलते गर्म पानी से छूटता है।
- एसिटिक अम्ल को कपड़ों से अतिरिक्त नील हटाने के लिए बताया गया है।
- सूती कपड़ों को धोते समय पानी में नमक मिलाने से अधिक साफ होने की बात स्रोत में दी गई है।
- रेशमी वस्त्रों को कीड़ों से बचाने के लिए नेफ्थलीन की गोलियाँ रखी जाती हैं।
- मौर्य काल की पाटलिपुत्र शिल्पकला की प्रशंसा मेगस्थनीज द्वारा किए जाने का उल्लेख है।
- सूजनी कला को बिहार के मधुबनी/मिथिला क्षेत्र की प्रमुख लोक कला बताया गया है।
- एल्पिक कला में सीधी सिलाई, साटन स्टिच और उल्टाइल पे तीन तकनीकों का उल्लेख है।
अध्याय का निष्कर्ष
निष्कर्षतः, कक्षा 12 गृह विज्ञान के अध्याय 24, 25 एवं 26 में वस्त्रों की स्वच्छता, धुलाई, दाग-धब्बे छुड़ाने की तकनीक, उचित अभिकर्मकों का चयन तथा वस्त्रों के सुरक्षित संग्रहण का व्यावहारिक ज्ञान दिया गया है।
इसके साथ ही बिहार की बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर सूजनी एवं एल्पिक कला के ऐतिहासिक महत्व, निर्माण प्रक्रिया, विशेषताओं और उपयोगों को समझाया गया है। परीक्षा की दृष्टि से धब्बों के प्रकार, धब्बे छुड़ाने की विधियाँ, अभिकर्मक, वस्त्रों की धुलाई, संग्रहण, सूजनी कला तथा एल्पिक कला से संबंधित प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
यह अध्ययन-सामग्री विद्यार्थियों को विषय की अवधारणाओं को समझने, महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करने तथा बोर्ड परीक्षा की तैयारी को व्यवस्थित करने में सहायता प्रदान करती है।