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Bihar Board Class 12 Home Science Chapter 14 – आंतरिक सजावट

गृह विज्ञान (Home Science) कक्षा 12 के इस अध्याय “आंतरिक सजावट” में घर के आंतरिक भागों को सुंदर, व्यवस्थित, आकर्षक और उपयोगी बनाने की कला तथा तकनीकों का अध्ययन किया जाता है। आंतरिक सजावट केवल वस्तुओं को सजाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घर में रहने वाले सदस्यों को मानसिक संतोष, आराम और सकारात्मक वातावरण प्रदान करती है। इस अध्याय में गृह सज्जा की परिभाषा, इसके उद्देश्य, इसमें प्रयुक्त होने वाले विभिन्न प्रकार के डिजाइन, रंगों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव, प्रकाश व्यवस्था और फर्नीचर के चयन का विस्तार से वर्णन किया गया है।

Table of Contents

अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview

कक्षा 12 गृह विज्ञान के अध्याय 14 “आंतरिक सजावट” में घर के आंतरिक भागों को सुंदर, व्यवस्थित, आकर्षक और उपयोगी बनाने की प्रक्रिया को समझाया गया है। आंतरिक सजावट का उद्देश्य केवल घर को सुंदर बनाना नहीं है, बल्कि घर में रहने वाले सदस्यों को आराम, मानसिक संतोष और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना भी है।

इस अध्याय में गृह सज्जा की परिभाषा, डिजाइन के प्रकार, रंगों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव, प्रकाश व्यवस्था, फर्नीचर का चयन तथा सजावट के विभिन्न सिद्धांतों का अध्ययन किया गया है।

मुख्य अवधारणाएँ

  • आंतरिक सजावट की परिभाषा: घर के आंतरिक कक्षों, दीवारों, प्रकाश और वस्तुओं का ऐसा संयोजन जिससे स्थान सुंदर, आरामदायक और उपयोगी लगे।
  • गृह सज्जा में डिजाइन के प्रकार: सजावट हेतु मुख्यतः दो प्रकार के डिजाइन प्रयोग किए जाते हैं—संरचनात्मक डिजाइन (Structural Design) और अलंकारिक डिजाइन (Decorative Design)।
  • अलंकारिक डिजाइन के वर्गीकरण: अलंकारिक डिजाइन को चार भागों में बाँटा गया है—प्राकृतिक, रूढ़िवादी, ज्यामितीय और अमूर्त डिजाइन।
  • आंतरिक सजावट के आधारभूत स्तंभ: सौंदर्यता, आराम, मनोवैज्ञानिक प्रभाव और व्यक्तिकरण।
  • सजावट के सिद्धांत एवं तत्व: अनुपात, लय, संगति, प्रकाश व्यवस्था और रंगों का सही चयन।

विषय 1: आंतरिक सजावट का अर्थ एवं परिभाषा

विस्तृत व्याख्या

आंतरिक सजावट (Internal Decoration) का शाब्दिक अर्थ घर के अंदरूनी स्थानों की सजावट और सुंदरता से है। मनुष्य अपने निवास स्थान को अपनी पसंद और रुचि की वस्तुओं से सजाता है ताकि उसे देखने में सुख और आनंद प्राप्त हो सके।

तकनीकी रूप से, घर के अंदर की दीवारों, रंग योजना, प्रकाश व्यवस्था, फर्नीचर और सजावटी सामानों को इस प्रकार व्यवस्थित करना कि कमरा सुंदर, आकर्षक, आरामदायक और कार्य-उपयोगी बने, आंतरिक गृह सज्जा कहलाती है।

सजावट का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी भी वस्तु को कहीं भी रख दिया जाए। उदाहरण के तौर पर, यदि बेड पर बर्तन या भोजन का सामान रख दिया जाए और मूर्तियों को फर्श पर छोड़ दिया जाए, तो यह घर को अव्यवस्थित और तनावपूर्ण बना देता है। इसके विपरीत, मूर्तियों को सही स्थान पर रखना, चित्रों को दीवारों पर लटकाना और खिड़कियों पर पर्दे लगाना आंतरिक सजावट के सही संतुलन को दर्शाता है।

विषय 2: गृह सजावट के मुख्य उद्देश्य एवं आवश्यकता

गृह सज्जा का मूल उद्देश्य घर को केवल बाहर से ही नहीं, बल्कि अंदर से भी जीवन जीने योग्य और सुखद बनाना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. सुंदरता और आकर्षण में वृद्धि: घर के आंतरिक स्थान को अपनी पसंद के रंगों, चित्रों और सजावटी वस्तुओं से सजाकर उसे आकर्षक रूप देना।
  2. आरामदायक वातावरण का निर्माण: उपयुक्त फर्नीचर और प्रकाश की व्यवस्था करके सदस्यों को शारीरिक और मानसिक विश्राम प्रदान करना।
  3. मनोवैज्ञानिक संतोष और तनावमुक्ति: सुंदर और व्यवस्थित कमरे को देखने से मस्तिष्क को मनोवैज्ञानिक सुख मिलता है और दिनभर का तनाव दूर होता है।
  4. स्थान का सही उपयोग: उपलब्ध स्थान में वस्तुओं को इस प्रकार व्यवस्थित करना जिससे चलने-फिरने के लिए खुला स्थान बना रहे।

विषय 3: गृह सजावट में प्रयुक्त डिजाइन के प्रकार

गृह सजावट में मुख्य रूप से दो प्रकार के डिजाइन का प्रयोग किया जाता है:

1. संरचनात्मक डिजाइन (Structural Design)

परिभाषा: जब किसी वस्तु की आकृति, आकार, रेखाएँ, बनावट और रंग का प्रयोग उसकी उपयोगिता और आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाता है, तो उसे संरचनात्मक डिजाइन कहते हैं।

इसमें वस्तु पर कोई अलग से बाहरी सजावट नहीं की जाती। इसका मुख्य उद्देश्य वस्तु को मजबूत, उपयोगी और टिकाऊ बनाना होता है।

उदाहरण: मेज, कुर्सी, अलमारी, खिड़की या दूध डालने वाले जग का मूल ढाँचा। यदि दूध के जग से दूध बाहर टपक जाए, तो उसका संरचनात्मक डिजाइन सही नहीं माना जाता।

2. अलंकारिक डिजाइन (Decorative Design)

परिभाषा: किसी वस्तु या संरचना को अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए उस पर चित्रकारी, कड़ाई, नक्काशी या रंगाई द्वारा जो सजावटी कार्य किया जाता है, उसे अलंकारिक डिजाइन कहते हैं।

इसका मुख्य ध्यान उपयोगिता पर नहीं, बल्कि सौंदर्य बढ़ाने पर होता है।

उदाहरण: दीवारों पर भित्ति चित्र (पेंटिंग), कड़ाई किए हुए पर्दे, फूलदान, नक्काशीदार मूर्तियाँ और सजावटी लैंप।

संरचनात्मक बनाम अलंकारिक डिजाइन

आधारसंरचनात्मक डिजाइन (Structural Design)अलंकारिक डिजाइन (Decorative Design)
मुख्य उद्देश्यवस्तु को मजबूत, टिकाऊ और उपयोगी बनाना।वस्तु को सुंदर और आकर्षक बनाना।
सजावट का स्तरइसमें अलग से कोई बाहरी सजावट नहीं होती।इसमें चित्रकारी, नक्काशी या कड़ाई की जाती है।
प्रमुख घटकआकार, बनावट, रेखाएँ और उपयोगिता।रंग, चित्र, फूल, मूर्तियाँ और नक्काशी।
उदाहरणकुर्सी, मेज, खिड़की का मूल ढाँचा।फूलदान, दीवार पर पेंटिंग, नक्काशीदार लैंप।

विषय 4: अलंकारिक डिजाइन के उप-प्रकार

अलंकारिक डिजाइन को चार प्रमुख उप-प्रकारों में विभाजित किया जाता है:

1. प्राकृतिक डिजाइन (Natural Design)

प्राकृतिक वस्तुओं जैसे फूल, पत्ती, बेल, पहाड़, नदी, पशु-पक्षियों और तितलियों से प्रेरित होकर बनाए गए डिजाइन प्राकृतिक डिजाइन कहलाते हैं।

उदाहरण: दीवारों पर प्राकृतिक दृश्य जैसे नदी और पहाड़ का चित्र बनाना या पर्दों पर फूलों की छपाई।

2. रूढ़िवादी / पारंपरिक डिजाइन (Conventional Design)

जब प्राकृतिक आकृतियों को सरल बनाकर पारंपरिक या लोक कला की शैली में प्रदर्शित किया जाता है, तो उसे रूढ़िवादी डिजाइन कहते हैं।

उदाहरण: कपड़ों की छपाई, कालीन की बुनाई और पारंपरिक लोकचित्र।

3. ज्यामितीय डिजाइन (Geometrical Design)

गणितीय और ज्यामितीय आकृतियों जैसे त्रिभुज, वृत्त, वर्ग, आयत और घनाकार रेखाओं के प्रयोग से बनने वाले डिजाइन ज्यामितीय डिजाइन कहलाते हैं।

उदाहरण: इमारतों की नक्काशी, आयताकार खिड़कियाँ और छत पर गोल फूलों के डिजाइन।

4. अमूर्त डिजाइन (Abstract Design)

जिस डिजाइन में कोई स्पष्ट या वास्तविक आकृति नहीं होती, बल्कि रेखाओं, बिंदुओं और रंगों के काल्पनिक मेल से कलाकृति बनाई जाती है, उसे अमूर्त डिजाइन कहते हैं।

इसे समझना कठिन होता है और आधुनिक चित्र कला (Modern Art) में इसका प्रमुख स्थान है।

विषय 5: आंतरिक सजावट का महत्व

आंतरिक सजावट का मानव जीवन और घर के वातावरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसके महत्व को निम्नलिखित चार बिंदुओं में समझा जा सकता है:

1. सौंदर्यता (Aesthetics)

  • सही आंतरिक सजावट से कमरे का वातावरण सुंदर और आकर्षक बनता है।
  • सामान को सही तरीके से सजाने पर कमरे में चलने-फिरने के लिए पर्याप्त खुला स्थान उपलब्ध रहता है।
  • पलंग, अलमारी, स्टूल, लैंप और श्रृंगार मेज को सही संयोजन में रखने से कमरे का सौंदर्य बढ़ जाता है।

2. आराम और सुकून (Comfort)

  • अच्छी गृह सज्जा से सुकून भरा वातावरण मिलता है।
  • पर्याप्त प्राकृतिक प्रकाश और उचित फर्नीचर शरीर को विश्राम देते हैं और स्थान में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

3. मनोवैज्ञानिक प्रभाव (Psychological Impact)

  • सजावट व्यक्ति के स्वभाव, व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
  • बाहर से तनाव झेलकर आने के बाद सुंदर सजा हुआ कमरा व्यक्ति को मानसिक विश्राम और रचनात्मकता प्रदान करता है।

4. व्यक्तिकरण (Personalization)

  • आंतरिक सजावट के माध्यम से व्यक्ति अपनी रचनात्मकता, शैली और व्यक्तित्व को प्रदर्शित करता है।
  • कमरे की सजावट, किताबों का रखरखाव और फर्नीचर का चयन देखकर ही रहने वाले व्यक्ति के स्वभाव का पता चल जाता है।

विषय 6: गृह सजावट के सिद्धांत, रंग संयोजन एवं प्रकाश व्यवस्था

गृह सजावट को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित सिद्धांतों और तत्वों का ध्यान रखना आवश्यक है:

डिजाइन के सिद्धांत

डिजाइन बनाते समय अनुपात (Ratio), लय (Rhythm), संगति (Harmony) और प्रभुता (Dominance) के सिद्धांतों का पालन किया जाता है।

रंगों का मनोवैज्ञानिक संयोजन

  • नीला रंग: शांत और संतुलित माना जाता है, जो मन को सुकून देता है।
  • लाल रंग: संघर्ष, खतरा, बलिदान और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
  • काला रंग: अशुभ या किसी अप्रिय घटना के संकेत के रूप में देखा जाता है।

प्रकाश व्यवस्था (Lighting)

कमरे में सूर्य की प्राकृतिक रोशनी का आना अत्यंत आवश्यक है। प्रकाश व्यवस्था कमरे को आकर्षक और उपयोगी बनाती है।

फर्निशिंग एवं दीवार सजावट

फर्नीचर का चयन कमरे के आकार और उपयोगिता के आधार पर करना चाहिए। दीवारों की सुंदरता बढ़ाने के लिए वॉलपेंट, वॉलपेपर, पोस्टर और सजावटी चित्रों, विशेषकर ड्राइंग रूम में, का प्रयोग किया जाता है।

शब्दावली / Key Terms

  • आंतरिक सजावट (Internal Decoration): घर के अंदरूनी भागों को सुंदर, सुविधाजनक और उपयोगी रूप में व्यवस्थित करने की कला।
  • संरचनात्मक डिजाइन (Structural Design): वस्तु की उपयोगिता, आकार और स्थायित्व को ध्यान में रखकर बनाया गया मूल ढाँचा।
  • अलंकारिक डिजाइन (Decorative Design): वस्तु की सौंदर्यता बढ़ाने हेतु उस पर की गई कड़ाई, पेंटिंग या नक्काशी।
  • प्राकृतिक डिजाइन (Natural Design): प्रकृति के घटकों जैसे फूल, पत्ती, पहाड़ और पशु पर आधारित डिजाइन।
  • रूढ़िवादी डिजाइन (Conventional Design): प्राकृतिक रूपों को लोक कला या पारंपरिक शैली में ढालकर बनाया गया डिजाइन।
  • ज्यामितीय डिजाइन (Geometrical Design): त्रिभुज, वर्ग, आयत आदि गणितीय आकृतियों से निर्मित डिजाइन।
  • अमूर्त डिजाइन (Abstract Design): बिना किसी स्पष्ट आकृति वाला, रेखाओं और रंगों का आधुनिक कलात्मक संयोजन।
  • व्यक्तिकरण (Personalization): सजावट के माध्यम से अपने व्यक्तिगत विचारों और पसंद को प्रकट करना।

अध्याय का सारांश

आंतरिक सजावट घर के अंदरूनी वातावरण को सुंदर, सुसंगठित और आरामदायक बनाने की एक प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत दो मुख्य प्रकार के डिजाइन आते हैं: संरचनात्मक डिजाइन, जो वस्तु को उपयोगी और मजबूत बनाता है, और अलंकारिक डिजाइन, जो सौंदर्य बढ़ाता है। अलंकारिक डिजाइन को चार भागों—प्राकृतिक, रूढ़िवादी, ज्यामितीय और अमूर्त में बाँटा गया है। सजावट का मानव मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रंगों में नीला शांत वातावरण निर्मित करता है, जबकि लाल प्रेम व संघर्ष का प्रतीक है। कमरों में फर्नीचर का चुनाव आकार के अनुसार तथा चित्रों का प्रयोग ड्राइंग रूम में करना उत्तम माना जाता है।

त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision

  • आंतरिक सजावट: स्थानों की सजावट और सुंदरता से संबंधित कला।
  • मुख्य उद्देश्य: सुंदरता, सुसंगठित वातावरण और आराम प्रदान करना।
  • डिजाइन के मुख्य प्रकार: 2 — संरचनात्मक और अलंकारिक।
  • अलंकारिक डिजाइन के प्रकार: 4 — प्राकृतिक, रूढ़िवादी, ज्यामितीय और अमूर्त।
  • डिजाइन के सिद्धांत: अनुपात, लय, संगति तथा प्रभुता।
  • शांत व संतुलित रंग: नीला रंग।
  • प्रेम व खतरे का रंग: लाल रंग।
  • सजावटी चित्रों का स्थान: ड्राइंग रूम।
  • फर्नीचर चयन का आधार: कमरे का आकार एवं उपयोगिता।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: घर की सज्जा में प्रयुक्त होने वाले मुख्य डिजाइन कितने प्रकार के होते हैं?

(A) एक
(B) दो
(C) तीन
(D) चार

सही उत्तर: (B) दो

Explanation: गृह सज्जा में मुख्य रूप से दो प्रकार के डिजाइन प्रयोग होते हैं—संरचनात्मक और अलंकारिक डिजाइन।

प्रश्न 2: किस डिजाइन का मुख्य उद्देश्य वस्तु को मजबूत, उपयोगी और टिकाऊ बनाना होता है?

(A) अलंकारिक डिजाइन
(B) संरचनात्मक डिजाइन
(C) अमूर्त डिजाइन
(D) प्राकृतिक डिजाइन

सही उत्तर: (B) संरचनात्मक डिजाइन

Explanation: संरचनात्मक डिजाइन में वस्तु की रेखाओं, आकार और बनावट को उपयोगिता के आधार पर ढाला जाता है।

प्रश्न 3: वस्तु की सौंदर्यता बढ़ाने के लिए किस प्रकार के डिजाइन का प्रयोग किया जाता है?

(A) संरचनात्मक डिजाइन
(B) अलंकारिक डिजाइन
(C) ज्यामितीय डिजाइन
(D) रूढ़िवादी डिजाइन

सही उत्तर: (B) अलंकारिक डिजाइन

Explanation: अलंकारिक डिजाइन का उद्देश्य वस्तु को सुंदर और आकर्षक बनाना होता है।

प्रश्न 4: फूल, पत्ती, पहाड़ और नदी की आकृतियों से प्रेरित डिजाइन को क्या कहा जाता है?

(A) ज्यामितीय डिजाइन
(B) अमूर्त डिजाइन
(C) प्राकृतिक डिजाइन
(D) रूढ़िवादी डिजाइन

सही उत्तर: (C) प्राकृतिक डिजाइन

Explanation: प्रकृति की वस्तुओं से प्रेरित होकर बनाए गए डिजाइन प्राकृतिक डिजाइन कहलाते हैं।

प्रश्न 5: प्राकृतिक आकृतियों को सरल बनाकर लोक कला शैली में प्रदर्शित करने वाला डिजाइन कौन सा है?

(A) अमूर्त डिजाइन
(B) ज्यामितीय डिजाइन
(C) रूढ़िवादी डिजाइन
(D) संरचनात्मक डिजाइन

सही उत्तर: (C) रूढ़िवादी डिजाइन

Explanation: रूढ़िवादी डिजाइन में प्राकृतिक आकृतियों को पारंपरिक लोक कला रूप दिया जाता है।

प्रश्न 6: त्रिभुज, वृत्त और वर्ग जैसी आकृतियों से बनने वाले डिजाइन को क्या कहते हैं?

(A) ज्यामितीय डिजाइन
(B) प्राकृतिक डिजाइन
(C) अमूर्त डिजाइन
(D) संरचनात्मक डिजाइन

सही उत्तर: (A) ज्यामितीय डिजाइन

Explanation: गणितीय या ज्यामितीय आकृतियों के मेल से बने डिजाइन ज्यामितीय डिजाइन कहलाते हैं।

प्रश्न 7: जिस डिजाइन में कोई स्पष्ट आकृति नहीं होती और जो केवल रेखाओं व रंगों से बनता है, उसे क्या कहते हैं?

(A) प्राकृतिक डिजाइन
(B) अमूर्त डिजाइन
(C) रूढ़िवादी डिजाइन
(D) संरचनात्मक डिजाइन

सही उत्तर: (B) अमूर्त डिजाइन

Explanation: अमूर्त (Abstract) डिजाइन में कोई वास्तविक आकृति नहीं होती, यह आधुनिक चित्रकला का रूप है।

प्रश्न 8: डिजाइन निर्माण में किस सिद्धांत का ध्यान रखा जाता है?

(A) अनुपात
(B) लय
(C) संगति तथा प्रभुता
(D) इनमें से सभी

सही उत्तर: (D) इनमें से सभी

Explanation: डिजाइन बनाते समय अनुपात, लय, संगति तथा प्रभुता के सिद्धांतों का ध्यान रखा जाता है।

प्रश्न 9: रंगों के संयोजन में कौन सा रंग शांत और संतुलित माना जाता है?

(A) लाल रंग
(B) नीला रंग
(C) काला रंग
(D) पीला रंग

सही उत्तर: (B) नीला रंग

Explanation: गृह सज्जा और मनोविज्ञान में नीला रंग शांति और संतुलन का प्रतीक है।

प्रश्न 10: सजावटी चित्रों को मुख्य रूप से किस कमरे में लगाना चाहिए?

(A) रसोईघर
(B) ड्राइंग रूम
(C) शयनकक्ष
(D) स्नानघर

सही उत्तर: (B) ड्राइंग रूम

Explanation: सजावटी चित्र और कलाकृतियाँ ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

प्रश्न 11: गृह सज्जा का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

(A) केवल अत्यधिक सामान एकत्र करना
(B) घर को सुंदर, सुसंगठित और आरामदायक बनाना
(C) महंगे सामान का प्रदर्शन करना
(D) केवल दीवारें रंगना

सही उत्तर: (B) घर को सुंदर, सुसंगठित और आरामदायक बनाना

Explanation: गृह सज्जा का उद्देश्य निवास स्थान को व्यवस्थित, उपयोगी और सुंदर बनाना है।

प्रश्न 12: गृह सज्जा में प्रकाश व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य क्या है?

(A) घर को आकर्षक और उपयोगी बनाना
(B) बिजली का बिल बढ़ाना
(C) केवल रात में रोशनी करना
(D) कमरे को बंद रखना

सही उत्तर: (A) घर को आकर्षक और उपयोगी बनाना

Explanation: उचित प्रकाश व्यवस्था स्थान में सकारात्मक ऊर्जा लाती है और उसे आकर्षक बनाती है।

प्रश्न 13: कमरों में फर्नीचर का चयन किस बात को ध्यान में रखकर करना चाहिए?

(A) केवल रंग के आधार पर
(B) कमरे के आकार और उपयोगिता के अनुसार
(C) केवल कीमत के आधार पर
(D) बिना किसी माप के

सही उत्तर: (B) कमरे के आकार और उपयोगिता के अनुसार

Explanation: कमरे के क्षेत्रफल और आवश्यकता के अनुसार फर्नीचर चुनना चाहिए ताकि चलने की जगह बनी रहे।

प्रश्न 14: घर की दीवारों को सुंदर बनाने के लिए किसका उपयोग किया जाता है?

(A) वॉलपेंट
(B) वॉलपेपर
(C) पोस्टर
(D) इनमें से सभी

सही उत्तर: (D) इनमें से सभी

Explanation: वॉलपेंट, वॉलपेपर और पोस्टर सभी दीवारों की सजावट में उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 15: लाल रंग गृह सज्जा में किसका प्रतीक माना जाता है?

(A) शांति और संतुलन
(B) संघर्ष, खतरा और प्रेम
(C) अशुभीकरण
(D) उदासी

सही उत्तर: (B) संघर्ष, खतरा और प्रेम

Explanation: लाल रंग को प्रेम, संघर्ष और खतरे का निशानी माना जाता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: आंतरिक गृह सज्जा किसे कहते हैं?

उत्तर: घर के अंदर की दीवारों, फर्नीचर, रंग, प्रकाश और वस्तुओं को इस प्रकार संयोजित करना कि घर सुंदर, आरामदायक और उपयोगी लगे, आंतरिक गृह सज्जा कहलाता है।

प्रश्न 2: संरचनात्मक डिजाइन की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: जब किसी वस्तु की आकृति, आकार और बनावट उसके उपयोग तथा आवश्यकता के अनुसार हो और उस पर अलग से कोई सजावट न की गई हो, तो उसे संरचनात्मक डिजाइन कहते हैं; जैसे मेज या कुर्सी का मूल ढाँचा।

प्रश्न 3: अलंकारिक डिजाइन किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी वस्तु या संरचना को सुंदर और आकर्षक दिखाने के लिए उस पर चित्रकारी, कड़ाई, नक्काशी या रंगाई से किया गया कार्य अलंकारिक डिजाइन कहलाता है।

प्रश्न 4: प्राकृतिक डिजाइन से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: प्राकृतिक वस्तुओं जैसे फूल, पत्ती, बेल, पहाड़, नदी और पशु-पक्षियों की आकृतियों से प्रेरित होकर बनाए गए डिजाइन को प्राकृतिक डिजाइन कहते हैं।

प्रश्न 5: अमूर्त डिजाइन की मुख्य विशेषता क्या है?

उत्तर: अमूर्त (Abstract) डिजाइन में कोई स्पष्ट या वास्तविक आकृति नहीं होती, बल्कि यह रेखाओं, बिंदुओं और रंगों के काल्पनिक मेल से बनता है जिसे समझना कठिन होता है।

प्रश्न 6: गृह सज्जा में नीले और लाल रंग का क्या महत्व है?

उत्तर: नीला रंग वातावरण को शांत और संतुलित बनाए रखने के लिए प्रयोग होता है, जबकि लाल रंग प्रेम, संघर्ष और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: गृह सज्जा में प्रयुक्त होने वाले डिजाइन के प्रकारों का सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर: गृह सजावट में मुख्य रूप से दो प्रकार के डिजाइन प्रयोग किए जाते हैं:

  1. संरचनात्मक डिजाइन (Structural Design): यह वस्तु का मौलिक आकार होता है। इसमें रेखाओं, आकारों और रंगों का उपयोग वस्तु की मजबूती, टिकाऊपन और उपयोगिता को ध्यान में रखकर किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक कुर्सी या अलमारी का ऐसा ढाँचा जो बैठने या सामान रखने में सुविधाजनक हो।
  2. अलंकारिक डिजाइन (Decorative Design): यह संरचनात्मक डिजाइन के ऊपर सौंदर्य बढ़ाने हेतु किया जाने वाला कार्य है। इसे चार उप-भागों में बाँटा जाता है:

    • प्राकृतिक डिजाइन: पेड़-पौधों, फूलों, नदियों और पहाड़ों के चित्रों पर आधारित।
    • रूढ़िवादी डिजाइन: प्राकृतिक आकृतियों को पारंपरिक लोक कला शैली में सरल बनाकर प्रस्तुत करना।
    • ज्यामितीय डिजाइन: त्रिभुज, वर्ग, आयत और वृत्त जैसी आकृतियों से बना डिजाइन।
    • अमूर्त डिजाइन: बिना किसी निश्चित आकृति के केवल रेखाओं व रंगों से बनी आधुनिक कला।

प्रश्न 2: आंतरिक सजावट के महत्व और इसके मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: आंतरिक सजावट का मानव जीवन पर गहरा सौंदर्यशास्त्रीय और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  1. सौंदर्य एवं सुव्यवस्था: सजावट से घर का प्रत्येक कमरा आकर्षक दिखता है। सामान सही ढंग से व्यवस्थित रहने से चलने-फिरने हेतु खुला स्थान मिलता है।
  2. शारीरिक एवं मानसिक आराम: सही फर्नीचर और प्रकाश व्यवस्था से शरीर को विश्राम मिलता है और मन प्रसन्न रहता है।
  3. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: दिनभर के तनाव के बाद एक सुंदर और सजा हुआ घर व्यक्ति के मस्तिष्क को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
  4. व्यक्तित्व का प्रदर्शन: घर की सजावट और किताबों तथा सामान का रखरखाव रहने वाले व्यक्ति की रुचि, शैली और स्वभाव को दर्शाता है।

बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. आंतरिक गृह सज्जा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके प्रमुख उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।
  2. संरचनात्मक और अलंकारिक डिजाइन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  3. अलंकारिक डिजाइन के चारों उप-प्रकार (प्राकृतिक, रूढ़िवादी, ज्यामितीय, अमूर्त) को उदाहरण सहित समझाइए।
  4. गृह सजावट में रंगों और प्रकाश व्यवस्था के महत्व पर प्रकाश डालिए।
  5. कमरों में फर्नीचर का चुनाव करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points

  • आंतरिक सजावट का मुख्य ध्येय स्थान को उपयोगी, सुंदर और आरामदायक बनाना है।
  • संरचनात्मक डिजाइन उपयोगिता एवं स्थायित्व पर केंद्रित होता है, जबकि अलंकारिक डिजाइन सुंदरता पर।
  • प्राकृतिक डिजाइन में नदी, पहाड़, फूल-पत्तियों का चित्रण होता है।
  • ज्यामितीय डिजाइन में गणितीय आकृतियों जैसे वर्ग, वृत्त, त्रिभुज का प्रयोग होता है।
  • अमूर्त डिजाइन में कोई स्पष्ट आकृति नहीं होती।
  • नीला रंग शांति व संतुलन का प्रतीक है, लाल रंग प्रेम व संघर्ष का।
  • सजावटी चित्र मुख्य रूप से ड्राइंग रूम में लगाए जाने चाहिए।

अध्याय का निष्कर्ष

कक्षा 12 गृह विज्ञान का अध्याय 14 “आंतरिक सजावट” हमें यह सिखाता है कि किस प्रकार सीमित संसाधनों और सही सिद्धांतों के प्रयोग से घर को एक सुंदर, सुखद और स्वास्थ्यवर्धक स्थान में बदला जा सकता है। संरचनात्मक और अलंकारिक डिजाइनों का सही संतुलन, उपयुक्त रंगों का चयन और प्रकाश की समुचित व्यवस्था गृह सज्जा को पूर्णता प्रदान करती है। परीक्षा के दृष्टिकोण से इन सिद्धांतों, परिभाषाओं और डिजाइनों के वर्गीकरण को समझना अत्यंत आवश्यक है।