Bihar Board Class 10 Economics Chapter 6 वैश्वीकरण – सम्पूर्ण व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर
वैश्वीकरण अध्याय में विश्व की अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध, उदारीकरण, निजीकरण, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विदेशी निवेश और विश्व व्यापार संगठन की भूमिका का अध्ययन किया जाता है।
वैश्वीकरण का अर्थ
जब विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ व्यापार, निवेश, तकनीक और उत्पादन के माध्यम से एक-दूसरे से अधिक जुड़ती हैं, तो इस प्रक्रिया को वैश्वीकरण कहा जाता है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
वे कंपनियाँ जो एक से अधिक देशों में उत्पादन या व्यापार की गतिविधियाँ संचालित करती हैं, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कहलाती हैं। ये कंपनियाँ निवेश, तकनीक और उत्पादन के माध्यम से विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ती हैं।
भारत में वैश्वीकरण
भारत में 1991 के बाद आर्थिक सुधारों के साथ उदारीकरण और वैश्वीकरण की प्रक्रिया को गति मिली। व्यापार और विदेशी निवेश से संबंधित कई प्रतिबंधों को कम किया गया।
उदारीकरण
व्यापार और उद्योग पर लगाए गए अनावश्यक सरकारी प्रतिबंधों को कम करने की प्रक्रिया उदारीकरण कहलाती है। इससे घरेलू और विदेशी कंपनियों के लिए व्यापारिक गतिविधियों के अवसर बढ़े।
निजीकरण
आर्थिक गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने और सरकारी क्षेत्र के कुछ कार्यों को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की प्रक्रिया निजीकरण से संबंधित है।
विश्व व्यापार संगठन
विश्व व्यापार संगठन अर्थात WTO अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों और व्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। इसका उद्देश्य देशों के बीच व्यापार को व्यवस्थित करना और व्यापारिक बाधाओं को कम करना है।
वैश्वीकरण के लाभ
- विदेशी निवेश में वृद्धि।
- नई तकनीक का प्रवेश।
- उत्पादों की विविधता।
- बाजारों का विस्तार।
- कुछ क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
वैश्वीकरण की चुनौतियाँ
वैश्वीकरण का लाभ सभी वर्गों और सभी क्षेत्रों को समान रूप से नहीं मिलता। छोटी कंपनियों और छोटे उत्पादकों को बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है। इसलिए वैश्वीकरण के साथ समावेशी नीतियों की आवश्यकता होती है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. वैश्वीकरण का अर्थ क्या है?
उत्तर: विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं का परस्पर अधिक जुड़ना।
प्रश्न 2. WTO का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: World Trade Organization.
प्रश्न 3. भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत किस वर्ष हुई?
उत्तर: 1991 में।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न: बहुराष्ट्रीय कंपनी क्या है?
उत्तर: जो कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन या व्यापार की गतिविधियाँ संचालित करती है, उसे बहुराष्ट्रीय कंपनी कहा जाता है।
प्रश्न: उदारीकरण क्या है?
उत्तर: व्यापार और उद्योग से संबंधित सरकारी प्रतिबंधों को कम करने की प्रक्रिया उदारीकरण कहलाती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न: वैश्वीकरण के प्रमुख प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: वैश्वीकरण से विदेशी निवेश, तकनीकी हस्तांतरण, बाजारों का विस्तार और उत्पादों की विविधता बढ़ सकती है। इसके साथ घरेलू उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। बड़ी कंपनियों को अधिक अवसर मिल सकते हैं, जबकि छोटे उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
प्रश्न: भारत में वैश्वीकरण को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण क्या हैं?
उत्तर: आर्थिक सुधार, उदारीकरण, विदेशी निवेश के लिए अवसर, व्यापारिक प्रतिबंधों में कमी, तकनीकी विकास और परिवहन-संचार के विस्तार ने भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया को गति दी।
Important Points
- वैश्वीकरण से देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंध बढ़ते हैं।
- बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- भारत में 1991 के बाद आर्थिक सुधारों से वैश्वीकरण को गति मिली।
- WTO अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित महत्वपूर्ण संस्था है।
- वैश्वीकरण के लाभ और चुनौतियाँ दोनों हैं।
FAQs
वैश्वीकरण क्या है?
विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों की प्रक्रिया वैश्वीकरण कहलाती है।
बहुराष्ट्रीय कंपनी क्या है?
एक से अधिक देशों में उत्पादन या व्यापार करने वाली कंपनी बहुराष्ट्रीय कंपनी कहलाती है।
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.