प्रेम अयनि श्री राधिका / करील के कुंजन ऊपर वारौं (सवैया) – रसखान | गोधूलि भाग 2, कक्षा 10 हिंदी पद्य पाठ 2
प्रस्तावना (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 2)
“प्रेम अयनि श्री राधिका” और “करील के कुंजन ऊपर वारौं” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक “गोधूलि भाग 2” के पद्य खंड का दूसरा पाठ है। यह पाठ भक्तिकालीन कृष्ण-भक्त कवि रसखान द्वारा रचित सवैयों का संकलन है, जिसमें कवि की श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति गहन आसक्ति तथा अनन्य भक्ति-भावना अभिव्यक्त हुई है। एक मुस्लिम कवि होते हुए भी रसखान ने कृष्ण-भक्ति में जो तन्मयता दिखाई, वह हिंदी काव्य-परंपरा में अद्वितीय मानी जाती है।
कवि परिचय
रसखान का वास्तविक नाम सैयद इब्राहीम था। उनका जन्म लगभग 1548 ई. में दिल्ली के एक संपन्न पठान परिवार में हुआ था, हालाँकि कुछ विद्वान उनका जन्मस्थान पिहानी (हरदोई, उत्तर प्रदेश) भी मानते हैं। इस विषय में विद्वानों में मतभेद है। रसखान गोसाईं विट्ठलनाथ के शिष्य बने और वल्लभ संप्रदाय की भक्ति-परंपरा से जुड़ गए, जिसके बाद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रीकृष्ण-भक्ति में समर्पित कर दिया और मथुरा-ब्रज क्षेत्र में निवास करने लगे। उनकी प्रमुख रचनाओं में “सुजान रसखान” (दोहे, सोरठे, सवैयों का संग्रह) और “प्रेमवाटिका” उल्लेखनीय हैं। रसखान का काव्य भक्ति और शृंगार रस दोनों से परिपूर्ण है।
पदों का सारांश (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 2)
“प्रेम अयनि श्री राधिका” शीर्षक के अंतर्गत संकलित दोहों में रसखान श्रीराधा और श्रीकृष्ण के प्रति अपनी अनन्य भक्ति व्यक्त करते हैं। कवि यह कामना करते हैं कि यदि उन्हें पुनर्जन्म लेना पड़े, तो वे ब्रजभूमि में ही जन्म लें – चाहे वे इंसान बनें, पशु-पक्षी बनें, पत्थर बनें अथवा कोई अन्य वस्तु बनें, उन्हें ब्रज की धरती से दूर कहीं और जाना स्वीकार नहीं। यह ब्रजभूमि और कृष्ण-लीला के प्रति उनकी असीम आसक्ति को दर्शाता है।
“करील के कुंजन ऊपर वारौं” शीर्षक के अंतर्गत संकलित सवैयों में रसखान श्रीकृष्ण की उन साधारण वस्तुओं के प्रति भी अपार प्रेम प्रकट करते हैं, जिनका कृष्ण उपयोग करते थे। कवि कहते हैं कि यदि उन्हें कृष्ण की वह लकुटी (लाठी) और कामरिया (कंबल) मिल जाए, जिसे लेकर वे गउएँ चराने जाते हैं, तो वे तीनों लोकों का राज्य भी त्याग देंगे। यदि यह भी संभव न हो और केवल नंद बाबा की गायों को चराने का अवसर ही मिल जाए, तो वे आठों सिद्धियों और नवों निधियों को भी त्यागने के लिए तैयार हैं। कवि की यह भावना दर्शाती है कि उनके लिए भौतिक ऐश्वर्य और सांसारिक सुख-संपत्ति का कोई महत्व नहीं, बल्कि कृष्ण-सान्निध्य और ब्रज-भूमि की सेवा ही सर्वोपरि है। कवि ब्रज के वन-बाग और तालाबों को निहारने की तथा करील के कुंजों पर करोड़ों स्वर्ण-भवन न्योछावर करने की भावुक कामना व्यक्त करते हैं।
केंद्रीय भाव (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 2)
इन सवैयों का केंद्रीय भाव यह है कि सच्ची भक्ति में भौतिक सुख-संपत्ति और सांसारिक ऐश्वर्य का कोई महत्व नहीं रह जाता। रसखान अपने आराध्य श्रीकृष्ण और उनकी लीला-भूमि ब्रज के प्रति इतने आसक्त हैं कि वे तीनों लोकों का राज्य, आठों सिद्धियाँ और नवों निधियाँ तक त्यागने को तत्पर हैं। यह कवि की अनन्य, निश्छल और तन्मय भक्ति-भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
शब्दार्थ (Word Meanings)
- अयनि – आश्रयदाता, आश्रय-स्थल
- लकुटी – छोटी लाठी
- कामरिया – कंबल
- तिहूँ पुर – तीनों लोक (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल)
- आठहुँ सिद्धि नवोनिधि – आठों सिद्धियाँ और नवों निधियाँ (योग-साधना से प्राप्त शक्तियाँ और ऐश्वर्य)
- करील – एक प्रकार का कँटीला वृक्ष, जो ब्रज क्षेत्र में पाया जाता है
- कुंजन – कुंज, लताओं और वृक्षों से घिरा हुआ स्थान
- कलधौत – सोना, स्वर्ण
- तड़ाग – तालाब
व्याख्या (Explanation)
प्रेम अयनि श्री राधिका: इन दोहों में रसखान अपनी भावुक कामना व्यक्त करते हैं कि यदि उन्हें पुनर्जन्म मिले, तो वे ब्रजभूमि से दूर कहीं और जन्म न लें। चाहे वे मनुष्य बनें या पशु-पक्षी, पत्थर बनें या वृक्ष, बस उन्हें ब्रज की धरती और कृष्ण-लीला से जुड़े रहने का अवसर मिलता रहे। यह कवि की अपने आराध्य के प्रति असीम आसक्ति और समर्पण को प्रकट करता है।
करील के कुंजन ऊपर वारौं: इस सवैये में रसखान कहते हैं कि श्रीकृष्ण जिस लकुटी और कामरिया के सहारे गउएँ चराने जाते हैं, यदि वह उन्हें मिल जाए, तो वे तीनों लोकों का राज्य भी त्याग देंगे। यदि यह भी न हो, तो केवल नंद बाबा की गउएँ चराने का अवसर पाने के लिए वे आठों सिद्धियों और नवों निधियों को भी छोड़ने को तैयार हैं। आगे कवि ब्रज के वन-बाग और तालाबों को निहारने की लालसा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि करील के कुंजों पर वे करोड़ों स्वर्ण-भवन न्योछावर कर सकते हैं। यह पंक्तियाँ कवि की भौतिक ऐश्वर्य के प्रति उदासीनता और कृष्ण-भक्ति के प्रति उनकी गहन तन्मयता को दर्शाती हैं।
महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 2)
- “प्रेम अयनि श्री राधिका” के रचयिता कौन हैं?
(a) सूरदास (b) रसखान (c) मीराबाई (d) तुलसीदास
उत्तर: (b) रसखान
- रसखान का वास्तविक नाम क्या था?
(a) सैयद इब्राहीम (b) अब्दुल रहीम (c) मलिक मोहम्मद (d) कुतुबन
उत्तर: (a) सैयद इब्राहीम
- रसखान किसके शिष्य थे?
(a) रामानंद के (b) गोसाईं विट्ठलनाथ के (c) रामानुज के (d) कबीरदास के
उत्तर: (b) गोसाईं विट्ठलनाथ के
- रसखान की रचना “सुजान रसखान” में क्या-क्या संकलित है?
(a) केवल दोहे (b) केवल सवैये (c) कवित्त, दोहा, सोरठा और सवैये (d) केवल गीत
उत्तर: (c) कवित्त, दोहा, सोरठा और सवैये
- रसखान किस रस के कवि माने जाते हैं?
(a) वीर रस (b) भक्ति और शृंगार रस (c) करुण रस (d) हास्य रस
उत्तर: (b) भक्ति और शृंगार रस
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)
- प्रश्न: रसखान की प्रमुख रचनाओं के नाम बताइए।
उत्तर: रसखान की प्रमुख रचनाएँ “सुजान रसखान” और “प्रेमवाटिका” हैं।
- प्रश्न: रसखान किस भक्ति-धारा के कवि हैं?
उत्तर: रसखान सगुण भक्ति-धारा की कृष्ण-भक्ति शाखा के कवि हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
- प्रश्न: रसखान ब्रजभूमि में पुनर्जन्म क्यों चाहते हैं?
उत्तर: रसखान श्रीकृष्ण की लीला-भूमि ब्रज के प्रति इतने आसक्त हैं कि वे चाहे किसी भी रूप में जन्म लें – मनुष्य, पशु-पक्षी, पत्थर या वृक्ष – उन्हें बस ब्रजभूमि से जुड़े रहने का अवसर चाहिए, ताकि वे सदैव कृष्ण-लीला के समीप रह सकें।
- प्रश्न: “करील के कुंजन ऊपर वारौं” सवैये में कवि क्या त्याग करने को तैयार हैं?
उत्तर: कवि श्रीकृष्ण की लकुटी और कामरिया पाने के लिए तीनों लोकों का राज्य त्यागने को तैयार हैं, और नंद बाबा की गउएँ चराने के अवसर के लिए आठों सिद्धियों और नवों निधियों को भी छोड़ने को तत्पर हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
- प्रश्न: रसखान की कृष्ण-भक्ति की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: रसखान की कृष्ण-भक्ति अत्यंत निश्छल, तन्मय और अनन्य है। एक मुस्लिम कवि होते हुए भी उन्होंने श्रीकृष्ण के प्रति ऐसी गहन आसक्ति व्यक्त की, जो हिंदी काव्य-परंपरा में विरल है। वे भौतिक ऐश्वर्य, राजपाट और योग-सिद्धियों तक को कृष्ण-प्रेम के आगे तुच्छ मानते हैं। उनकी भक्ति में कृष्ण की साधारण वस्तुओं – लकुटी, कामरिया – के प्रति भी अपार श्रद्धा है, जो दर्शाती है कि उनके लिए कृष्ण का व्यक्तित्व और उनसे जुड़ी हर वस्तु समान रूप से पूजनीय है। इसी प्रकार वे ब्रजभूमि में ही बार-बार जन्म लेने की कामना करते हैं, चाहे किसी भी रूप में। यह उनकी भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
- प्रश्न: “प्रेम अयनि श्री राधिका” और “करील के कुंजन ऊपर वारौं” शीर्षकों की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: “प्रेम अयनि श्री राधिका” शीर्षक इस बात का प्रतीक है कि श्री राधिका प्रेम की आश्रयदाता हैं, और कवि उन्हीं की शरण में बार-बार जन्म लेना चाहते हैं। यह शीर्षक कवि की राधा-कृष्ण के प्रति समर्पित भक्ति-भावना को दर्शाता है। दूसरी ओर, “करील के कुंजन ऊपर वारौं” शीर्षक का अर्थ है कि कवि करील के छोटे-छोटे कुंजों (झाड़ियों) पर भी करोड़ों स्वर्ण-भवन न्योछावर करने को तैयार हैं। यह शीर्षक कवि की इस भावना को व्यक्त करता है कि ब्रज की साधारण-सी वस्तुएँ भी उनके लिए किसी भी भौतिक ऐश्वर्य से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।
महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 2)
- रसखान के जीवन परिचय पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
- रसखान की भक्ति-भावना में शृंगार रस के दर्शन कैसे होते हैं?
- रसखान को कृष्ण-भक्त कवियों में विशिष्ट स्थान क्यों प्राप्त है?
- “आठहुँ सिद्धि नवोनिधि” पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: यह पद्य पाठ किस पुस्तक और पाठ संख्या से संबंधित है?
उत्तर: यह पाठ “गोधूलि भाग 2” पुस्तक के पद्य खंड का पाठ 2 है।
- प्रश्न: रसखान किस काल के कवि हैं?
उत्तर: रसखान भक्तिकाल की सगुण कृष्ण-भक्ति शाखा के कवि हैं।
- प्रश्न: इन सवैयों से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इन सवैयों से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची भक्ति में भौतिक सुख-संपत्ति का कोई मोल नहीं होता, और अपने आराध्य के प्रति निश्छल प्रेम ही सर्वोच्च मूल्य है।
निष्कर्ष (गोधूलि भाग 2, पद्य पाठ 2)
“प्रेम अयनि श्री राधिका” और “करील के कुंजन ऊपर वारौं” रसखान की अनन्य कृष्ण-भक्ति और काव्य-कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ये सवैये हमें सिखाते हैं कि सच्चा प्रेम और भक्ति धर्म, जाति अथवा भौतिक सीमाओं से परे होते हैं। रसखान का काव्य आज भी हिंदी साहित्य में कृष्ण-भक्ति की सबसे मार्मिक अभिव्यक्तियों में गिना जाता है।
यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 पाठ्यक्रम (गोधूलि भाग 2) के आधार पर तैयार किया गया है।
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