अलंकार – परिभाषा, भेद और उदाहरण सहित सम्पूर्ण व्याख्या | कक्षा 10 हिंदी व्याकरण

12 August 2026  |  By Ramnivas KT

प्रस्तावना

“अलंकार” बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी व्याकरण का एक अत्यंत रोचक और काव्य-सौंदर्य से जुड़ा अध्याय है। अलंकार काव्य को सजाने और अधिक प्रभावशाली, आकर्षक तथा चमत्कारपूर्ण बनाने वाले साधन हैं। जिस प्रकार आभूषण किसी व्यक्ति की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं। इस लेख में अलंकार की परिभाषा, उसके भेद (शब्दालंकार और अर्थालंकार), प्रत्येक भेद के उपभेदों की विस्तृत तालिका, अनेक उदाहरण, दोनों में अंतर तथा परीक्षा-उपयोगी टिप्स दिए गए हैं।

अलंकार की परिभाषा

“अलंकार” शब्द ‘अलम्’ + ‘कार’ के मेल से बना है, जिसका अर्थ है ‘आभूषण’ या ‘सजावट’। काव्य में शब्दों तथा अर्थों के माध्यम से जो चमत्कार, सौंदर्य और आकर्षण उत्पन्न किया जाता है, उसे अलंकार कहते हैं। दूसरे शब्दों में, जो साधन काव्य की शोभा को बढ़ाते हैं, अर्थात कविता को अधिक प्रभावशाली और सुंदर बनाते हैं, उन्हें अलंकार कहा जाता है।

अलंकार के भेद

अलंकार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं —

क्रमभेदआधार
1शब्दालंकारशब्दों की ध्वनि (उच्चारण) पर आधारित चमत्कार
2अर्थालंकारशब्दों के अर्थ (भाव) पर आधारित चमत्कार

इसके अतिरिक्त कुछ स्थानों पर उभयालंकार का भी उल्लेख मिलता है, जिसमें शब्द और अर्थ दोनों स्तरों पर काव्य-सौंदर्य उत्पन्न होता है।

शब्दालंकार और अर्थालंकार में अंतर

बिंदुशब्दालंकारअर्थालंकार
आधारशब्दों की ध्वनि/उच्चारणशब्दों का अर्थ/भाव
पहचानशब्द बदलने पर चमत्कार समाप्त हो जाता हैपर्यायवाची शब्द रखने पर भी चमत्कार बना रहता है
उदाहरणचारु चंद्र की चंचल किरणें (अनुप्रास)चरण-कमल-सम कोमल (उपमा)

1. शब्दालंकार (विस्तृत विवरण)

जब काव्य में चमत्कार शब्द की विशेष ध्वनि या रचना के कारण उत्पन्न होता है, और उस शब्द के स्थान पर समानार्थी शब्द रखने से वह चमत्कार समाप्त हो जाता है, तो वहाँ शब्दालंकार होता है। शब्दालंकार के तीन प्रमुख भेद हैं — अनुप्रास, यमक और श्लेष।

शब्दालंकार का भेदपरिभाषाउदाहरणस्पष्टीकरण
अनुप्रास अलंकारजहाँ एक ही व्यंजन वर्ण की बार-बार आवृत्ति होचारु चंद्र की चंचल किरणें‘च’ वर्ण की बार-बार आवृत्ति से ध्वनि-सौंदर्य उत्पन्न हुआ है
यमक अलंकारजहाँ एक ही शब्द दो या अधिक बार आए, परंतु हर बार उसका अर्थ भिन्न होकाली घटा का घमंड घटापहला ‘घटा’ संज्ञा (बादलों की माला) है, दूसरा ‘घटा’ क्रिया (कम होना) है
श्लेष अलंकारजहाँ एक ही शब्द का प्रयोग एक ही बार हो, परंतु उसके एक से अधिक अर्थ निकलेंरहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून॥‘पानी’ शब्द के तीन अलग-अलग अर्थ हैं — मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए स्वाभिमान, आटे के लिए जल

2. अर्थालंकार (विस्तृत विवरण)

जब काव्य में चमत्कार शब्द के अर्थ अथवा भाव के कारण उत्पन्न होता है, और उस शब्द के स्थान पर समानार्थी शब्द रखने पर भी वह चमत्कार बना रहता है, तो वहाँ अर्थालंकार होता है। इसमें सौंदर्य ‘भाव’ से जुड़ा होता है, ‘शब्द’ से नहीं। उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति और अन्योक्ति प्रमुख अर्थालंकार हैं।

अर्थालंकार का भेदपरिभाषाउदाहरणस्पष्टीकरण
उपमा अलंकारजहाँ किसी वस्तु (उपमेय) की तुलना उसके गुणों में समान किसी अन्य वस्तु (उपमान) से की जाएमुख चंद्रमा के समान सुंदर है‘मुख’ (उपमेय) की तुलना ‘चंद्रमा’ (उपमान) से ‘सुंदरता’ के गुण के आधार पर की गई है
रूपक अलंकारजहाँ उपमेय और उपमान में इतनी अधिक समानता मान ली जाए कि दोनों को एक ही मान लिया जाए (अभेद आरोप)मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहोंयहाँ चंद्रमा (उपमेय) और खिलौने (उपमान) में कोई अंतर नहीं रखा गया, दोनों को एक मान लिया गया है
उत्प्रेक्षा अलंकारजहाँ उपमेय में उपमान होने की संभावना या कल्पना व्यक्त की जाए (मनो, जनु, जानो जैसे शब्दों का प्रयोग)सोहत ओढ़े पीत पट स्याम, मनो नीलमणि शैल पर आतप पर्यो प्रभातश्रीकृष्ण के पीले वस्त्र पहनने पर मानो नीलमणि पर्वत पर प्रातःकालीन धूप पड़ी हो, ऐसी कल्पना की गई है
अतिशयोक्ति अलंकारजहाँ किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर, लोक-सीमा से परे कहा जाएहनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग, लंका सारी जल गई गए निशाचर भागवास्तविकता से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है
अन्योक्ति अलंकारजहाँ किसी एक (सामान्यतः पशु-पक्षी या वस्तु) के बहाने किसी दूसरे (सामान्यतः मनुष्य) पर व्यंग्य किया जाएमाली आवत देखकर, कलियन करे पुकार। फूली-फूली चुन लई, कालि हमारी बार॥फूलों के बहाने मनुष्य के जीवन की नश्वरता पर व्यंग्य किया गया है

अलंकार पहचानने की विधि (Step-by-Step)

चरणक्या देखें
1पहले देखें कि चमत्कार शब्द की ध्वनि से है या अर्थ से — इसी से शब्दालंकार/अर्थालंकार तय होगा
2यदि एक ही व्यंजन बार-बार आ रहा है, तो अनुप्रास समझें
3यदि एक ही शब्द दो बार आए और अर्थ अलग-अलग हों, तो यमक समझें
4यदि एक ही शब्द एक बार आए पर एक से अधिक अर्थ निकलें, तो श्लेष समझें
5यदि दो वस्तुओं की तुलना ‘सा’, ‘सम’, ‘जैसा’, ‘तुल्य’ शब्दों से हो, तो उपमा समझें
6यदि उपमेय और उपमान को पूर्णतः एक मान लिया जाए, तो रूपक समझें
7यदि ‘मनो’, ‘जनु’, ‘जानो’ जैसे संभावना-सूचक शब्द हों, तो उत्प्रेक्षा समझें
8यदि बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया हो, तो अतिशयोक्ति समझें

अलंकार याद रखने के महत्वपूर्ण टिप्स

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. अलंकार के मुख्यतः कितने भेद हैं?

    (a) एक (b) दो (c) तीन (d) चार

    उत्तर: (b) दो (शब्दालंकार और अर्थालंकार)

  2. “चारु चंद्र की चंचल किरणें” में कौन-सा अलंकार है?

    (a) यमक (b) श्लेष (c) अनुप्रास (d) उपमा

    उत्तर: (c) अनुप्रास

  3. “काली घटा का घमंड घटा” में कौन-सा अलंकार है?

    (a) उपमा (b) यमक (c) रूपक (d) उत्प्रेक्षा

    उत्तर: (b) यमक

  4. “मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों” में कौन-सा अलंकार है?

    (a) उपमा (b) रूपक (c) अतिशयोक्ति (d) अन्योक्ति

    उत्तर: (b) रूपक

  5. अर्थालंकार में सौंदर्य किससे संबंधित होता है?

    (a) शब्द से (b) भाव से (c) व्याकरण से (d) वर्तनी से

    उत्तर: (b) भाव से

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: अलंकार किसे कहते हैं?

    उत्तर: काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्द और अर्थ संबंधी साधनों को अलंकार कहते हैं।

  2. प्रश्न: शब्दालंकार किसे कहते हैं?

    उत्तर: जिस अलंकार में चमत्कार शब्द की ध्वनि पर आधारित हो और शब्द बदलने पर वह चमत्कार समाप्त हो जाए, उसे शब्दालंकार कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: यमक और श्लेष अलंकार में क्या अंतर है?

    उत्तर: यमक अलंकार में एक ही शब्द दो या अधिक बार आता है और हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है, जबकि श्लेष अलंकार में शब्द एक ही बार आता है, परंतु उसके एक से अधिक अर्थ निकलते हैं।

  2. प्रश्न: उपमा अलंकार को उदाहरण सहित समझाइए।

    उत्तर: जहाँ किसी वस्तु (उपमेय) की तुलना उसके समान गुण वाली किसी अन्य वस्तु (उपमान) से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है; जैसे “मुख चंद्रमा के समान सुंदर है” में मुख की तुलना चंद्रमा से की गई है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न: शब्दालंकार और अर्थालंकार में अंतर स्पष्ट करते हुए दोनों के भेदों को उदाहरण सहित समझाइए।

    उत्तर: शब्दालंकार वह अलंकार है, जिसमें काव्य का चमत्कार शब्द की विशेष ध्वनि या रचना पर आधारित होता है, और उस शब्द के स्थान पर समानार्थी शब्द रखने से वह चमत्कार समाप्त हो जाता है। इसके तीन प्रमुख भेद हैं — अनुप्रास (एक ही व्यंजन की बार-बार आवृत्ति, जैसे “चारु चंद्र की चंचल किरणें”), यमक (एक ही शब्द बार-बार भिन्न अर्थों में, जैसे “काली घटा का घमंड घटा”) और श्लेष (एक शब्द के एक से अधिक अर्थ, जैसे “रहिमन पानी राखिए”)। इसके विपरीत, अर्थालंकार में चमत्कार शब्द के अर्थ या भाव पर आधारित होता है, और समानार्थी शब्द रखने पर भी चमत्कार बना रहता है। इसके प्रमुख भेद हैं — उपमा (दो वस्तुओं की तुलना, जैसे “मुख चंद्रमा के समान”), रूपक (उपमेय-उपमान को पूर्णतः एक मान लेना, जैसे “चंद्र-खिलौना”), उत्प्रेक्षा (संभावना की कल्पना, “मनो/जनु” शब्दों सहित) और अतिशयोक्ति (बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। इस प्रकार दोनों भेद काव्य को अलग-अलग स्तरों पर सुंदर और चमत्कारपूर्ण बनाते हैं।

  2. प्रश्न: उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकार में अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: उपमा अलंकार में दो भिन्न वस्तुओं (उपमेय और उपमान) के बीच किसी समान गुण के आधार पर तुलना की जाती है, और यह तुलना ‘सा’, ‘सम’, ‘जैसा’ जैसे शब्दों के माध्यम से स्पष्ट होती है; जैसे “मुख चंद्रमा के समान सुंदर है।” रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच इतनी अधिक समानता मान ली जाती है कि दोनों को पूर्णतः एक ही मान लिया जाता है, कोई तुलनासूचक शब्द नहीं आता; जैसे “मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों” में चंद्रमा और खिलौने में कोई भेद नहीं रखा गया। उत्प्रेक्षा अलंकार में उपमेय में उपमान होने की मात्र संभावना या कल्पना व्यक्त की जाती है, जिसके लिए ‘मनो’, ‘जनु’, ‘जानो’ जैसे शब्दों का प्रयोग होता है; जैसे “मनो नीलमणि शैल पर आतप पर्यो प्रभात।” इस प्रकार तीनों अलंकारों में तुलना का स्तर क्रमशः बढ़ता जाता है — उपमा में तुलना, रूपक में अभेद और उत्प्रेक्षा में कल्पना।

महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. प्रश्न: ‘अलंकार’ शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई है?

    उत्तर: ‘अलंकार’ शब्द ‘अलम्’ (आभूषण) और ‘कार’ के मेल से बना है, जिसका अर्थ है ‘सजावट’ या ‘आभूषण’।

  2. प्रश्न: कक्षा 10 की परीक्षा में अलंकार से जुड़े प्रश्न किस प्रकार पूछे जाते हैं?

    उत्तर: प्रायः दी गई काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार को पहचानने और उसकी परिभाषा स्पष्ट करने से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

  3. प्रश्न: क्या एक ही काव्य-पंक्ति में एक से अधिक अलंकार हो सकते हैं?

    उत्तर: हाँ, कई बार एक ही पंक्ति में शब्दालंकार और अर्थालंकार दोनों की उपस्थिति संभव होती है, जिसे ‘उभयालंकार’ कहा जाता है।

निष्कर्ष

अलंकार हिंदी काव्य को सुंदर, प्रभावशाली और चमत्कारपूर्ण बनाने वाला महत्वपूर्ण व्याकरणिक विषय है। शब्दालंकार और अर्थालंकार के भेदों तथा उनके उपभेदों को उदाहरण सहित समझने से विद्यार्थी न केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि काव्य-सौंदर्य की गहरी समझ भी विकसित कर सकते हैं। नियमित अभ्यास और उदाहरणों के विश्लेषण से यह विषय अत्यंत रोचक और सरल हो जाता है।

यह लेख केवल शैक्षणिक उद्देश्य से BSEB कक्षा 10 हिंदी व्याकरण पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है।

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