Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व में आवर्त सारणी के s-ब्लॉक के महत्वपूर्ण तत्वों का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में मुख्य रूप से क्षार धातु (Alkali Metals) तथा क्षारीय मृदा धातु (Alkaline Earth Metals) के सामान्य गुण, आवर्तिता, रासायनिक अभिक्रियाएँ, महत्वपूर्ण यौगिक, उपयोग तथा जैविक महत्व को समझाया गया है।
इस अध्याय में लिथियम, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम आदि तत्वों के गुणों के साथ-साथ उनके ऑक्साइड, हाइड्रॉक्साइड, कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट और अन्य यौगिकों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए इस chapter के परिभाषा, कारण बताइए, रासायनिक समीकरण, तुलना और वस्तुनिष्ठ प्रश्न विशेष रूप से उपयोगी हैं।
अगर आपने पिछला अध्याय नहीं पढ़ा है, तो पहले Chapter 9 – हाइड्रोजन पढ़ सकते हैं।
s-ब्लॉक तत्त्व क्या हैं?
आवर्त सारणी में जिन तत्वों का अंतिम इलेक्ट्रॉन s-कक्षक में प्रवेश करता है, उन्हें s-ब्लॉक के तत्व कहा जाता है। इस ब्लॉक में मुख्य रूप से वर्ग 1 और वर्ग 2 के तत्व शामिल होते हैं।
वर्ग 1 के तत्वों को क्षार धातु तथा वर्ग 2 के तत्वों को क्षारीय मृदा धातु कहा जाता है।
वर्ग 1 के तत्व – क्षार धातु
| तत्व | प्रतीक | परमाणु क्रमांक |
|---|---|---|
| लिथियम | Li | 3 |
| सोडियम | Na | 11 |
| पोटैशियम | K | 19 |
| रुबिडियम | Rb | 37 |
| सीजियम | Cs | 55 |
| फ्रैंशियम | Fr | 87 |
इन तत्वों का सामान्य संयोजकता-कोश विन्यास ns1 होता है। ये सामान्यतः अपना एक संयोजकता इलेक्ट्रॉन खोकर M+ आयन बनाते हैं।
क्षार धातुओं के सामान्य भौतिक गुण
1. परमाणु त्रिज्या
क्षार धातुओं की परमाणु त्रिज्या वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है। इसका प्रमुख कारण प्रत्येक अगले तत्व में एक नया इलेक्ट्रॉन कोश जुड़ना है।
क्रम: Li < Na < K < Rb < Cs
2. आयनिक त्रिज्या
क्षार धातु एक इलेक्ट्रॉन खोकर M+ आयन बनाती हैं। वर्ग में नीचे जाने पर इन धनायनों की आयनिक त्रिज्या बढ़ती जाती है।
3. आयनन एन्थैल्पी
क्षार धातुओं की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती है। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार और आवरण प्रभाव बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी सामान्यतः घटती है।
क्रम: Li > Na > K > Rb > Cs
4. विद्युत-ऋणात्मकता
क्षार धातुओं की विद्युत-ऋणात्मकता कम होती है और सामान्यतः वर्ग में नीचे जाने पर इसमें कमी आती है।
5. धनविद्युती गुण
क्षार धातुएँ अत्यधिक धनविद्युती होती हैं। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर उनका धनविद्युती गुण बढ़ता है।
6. गलनांक और क्वथनांक
क्षार धातुओं के गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः कम होते हैं। वर्ग में नीचे जाने पर धात्विक बंध की प्रभावी प्रबलता में कमी के कारण इनके गलनांक सामान्यतः घटते हैं।
7. घनत्व
क्षार धातुएँ अपेक्षाकृत हल्की होती हैं। लिथियम, सोडियम और पोटैशियम का घनत्व जल की तुलना में कम होता है।
8. जलयोजन एन्थैल्पी
छोटे आकार के आयन जल अणुओं को अधिक मजबूती से आकर्षित करते हैं। इसलिए क्षार धातु आयनों की जलयोजन एन्थैल्पी का परिमाण सामान्यतः Li+ से Cs+ की ओर घटता है।
क्रम: Li+ > Na+ > K+ > Rb+ > Cs+
क्षार धातुओं के रासायनिक गुण
वायु के साथ अभिक्रिया
क्षार धातुएँ वायु में ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करती हैं। लिथियम मुख्यतः ऑक्साइड, सोडियम परॉक्साइड तथा पोटैशियम, रुबिडियम और सीजियम सुपरऑक्साइड बना सकते हैं।
4Li + O2 → 2Li2O
2Na + O2 → Na2O2
K + O2 → KO2
अत्यधिक क्रियाशीलता के कारण क्षार धातुओं को सामान्यतः केरोसिन जैसे पदार्थों के नीचे सुरक्षित रखा जाता है।
जल के साथ अभिक्रिया
क्षार धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया करके संबंधित हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2↑
पोटैशियम और उससे नीचे की धातुएँ जल के साथ बहुत तीव्र अभिक्रिया कर सकती हैं। अभिक्रिया से उत्पन्न ऊष्मा के कारण हाइड्रोजन गैस के जलने की संभावना रहती है।
डाइहाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया
क्षार धातुएँ गर्म करने पर डाइहाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करके आयनिक हाइड्राइड बनाती हैं।
2Na + H2 → 2NaH
इन हाइड्राइडों में H− आयन पाया जाता है।
हैलोजन के साथ अभिक्रिया
क्षार धातुएँ हैलोजन के साथ अभिक्रिया करके आयनिक हैलाइड बनाती हैं।
2Na + Cl2 → 2NaCl
लिथियम के कुछ हैलाइडों में अपेक्षाकृत अधिक सहसंयोजक गुण पाए जाते हैं। इसका संबंध Li+ आयन की छोटी त्रिज्या और अधिक ध्रुवण क्षमता से है।
क्षार धातुओं की ज्वाला परीक्षण
क्षार धातुओं के कुछ यौगिक ज्वाला को विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं। गर्म करने पर इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं। जब वे वापस निम्न ऊर्जा स्तर पर आते हैं तो ऊर्जा प्रकाश के रूप में निकलती है।
| तत्व | ज्वाला का सामान्य रंग |
|---|---|
| Li | कार्मिन लाल |
| Na | पीला |
| K | बैंगनी |
| Rb | लाल-बैंगनी |
| Cs | नीला-बैंगनी |
लिथियम का असामान्य व्यवहार
लिथियम अन्य क्षार धातुओं की तुलना में कई मामलों में अलग व्यवहार करता है। इसका प्रमुख कारण Li+ आयन का बहुत छोटा आकार, अधिक आयनन एन्थैल्पी और अधिक ध्रुवण क्षमता है।
लिथियम और मैग्नीशियम की विकर्ण समानता
लिथियम और मैग्नीशियम आवर्त सारणी में विकर्ण रूप से स्थित हैं और इनके कुछ गुणों में समानता पाई जाती है। इसे विकर्ण संबंध (Diagonal Relationship) कहा जाता है।
- दोनों नाइट्राइड बना सकते हैं।
- दोनों के कार्बोनेट गर्म करने पर अपघटित होते हैं।
- LiCl और MgCl2 में अपेक्षाकृत अधिक सहसंयोजक गुण पाए जाते हैं।
- दोनों के कुछ लवण जलयोजित रूप में प्राप्त होते हैं।
लिथियम नाइट्रोजन से सीधे अभिक्रिया करके नाइट्राइड बनाता है:
6Li + N2 → 2Li3N
क्षारीय मृदा धातु
वर्ग 2 के तत्वों को क्षारीय मृदा धातु कहा जाता है। इनके प्रमुख तत्व हैं:
| तत्व | प्रतीक | परमाणु क्रमांक |
|---|---|---|
| बेरिलियम | Be | 4 |
| मैग्नीशियम | Mg | 12 |
| कैल्शियम | Ca | 20 |
| स्ट्रॉन्शियम | Sr | 38 |
| बेरियम | Ba | 56 |
| रेडियम | Ra | 88 |
इनका सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 होता है। ये सामान्यतः दो इलेक्ट्रॉन खोकर M2+ आयन बनाते हैं।
क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य गुण
परमाणु और आयनिक त्रिज्या
वर्ग 2 में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु तथा आयनिक त्रिज्या बढ़ती है। इसका कारण नए इलेक्ट्रॉन कोशों का जुड़ना और आवरण प्रभाव का बढ़ना है।
आयनन एन्थैल्पी
वर्ग में नीचे जाने पर सामान्यतः प्रथम और द्वितीय आयनन एन्थैल्पी घटती है। इसका कारण बढ़ती परमाणु त्रिज्या और आवरण प्रभाव है।
ऑक्सीकरण अवस्था
क्षारीय मृदा धातुएँ सामान्यतः अपने यौगिकों में +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती हैं।
क्षारीय मृदा धातुओं की वायु के साथ अभिक्रिया
बेरिलियम और मैग्नीशियम की सतह पर ऑक्साइड की परत बन जाने के कारण वे सामान्य परिस्थितियों में अपेक्षाकृत कम क्रियाशील दिखाई देते हैं। मैग्नीशियम को जलाने पर चमकीली लौ के साथ मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है।
2Mg + O2 → 2MgO
मैग्नीशियम नाइट्रोजन के साथ भी अभिक्रिया कर सकता है:
3Mg + N2 → Mg3N2
क्षारीय मृदा धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया
बेरिलियम जल के साथ सामान्य परिस्थितियों में बहुत कम अभिक्रिया करता है। कैल्शियम, स्ट्रॉन्शियम और बेरियम जल के साथ अधिक आसानी से अभिक्रिया करते हैं।
Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2↑
हैलोजन के साथ अभिक्रिया
क्षारीय मृदा धातुएँ हैलोजन के साथ अभिक्रिया करके MX2 प्रकार के हैलाइड बनाती हैं।
Mg + Cl2 → MgCl2
Ca + Cl2 → CaCl2
अम्ल के साथ अभिक्रिया
क्षारीय मृदा धातुएँ अम्ल के साथ अभिक्रिया करके संबंधित लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
Mg + 2HCl → MgCl2 + H2↑
क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्राइड
बेरिलियम को छोड़कर अधिकांश क्षारीय मृदा धातुएँ गर्म करने पर हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करके हाइड्राइड बना सकती हैं।
Ca + H2 → CaH2
CaH2 को कैल्शियम हाइड्राइड या हाइड्रोलिथ भी कहा जाता है। यह जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस देता है।
CaH2 + 2H2O → Ca(OH)2 + 2H2↑
Be और Mg का विशेष व्यवहार
बेरिलियम और मैग्नीशियम में कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं जो इन्हें वर्ग के अन्य तत्वों से अलग करते हैं। छोटे आकार, अधिक आयनन एन्थैल्पी तथा अधिक ध्रुवण क्षमता के कारण बेरिलियम के अनेक यौगिकों में सहसंयोजक गुण अधिक होते हैं।
BeCl2 की संरचना
वाष्प अवस्था में BeCl2 मुख्यतः रैखिक संरचना प्रदर्शित करता है। ठोस अवस्था में यह बहुलकीय संरचना की ओर जाता है जिसमें क्लोरीन परमाणु ब्रिजिंग करते हैं।
लिथियम के लवण जलयोजित क्यों होते हैं?
Li+ आयन का आकार बहुत छोटा होता है और इसकी जलयोजन एन्थैल्पी अधिक होती है। इसलिए लिथियम के कई लवण जल के अणुओं को आसानी से आकर्षित करके जलयोजित लवण बनाते हैं।
उदाहरण के लिए LiCl जलयोजित रूप में प्राप्त हो सकता है।
LiF और LiCl की विलेयता
LiF की जालक एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है, क्योंकि F− आयन छोटा होता है। इसलिए LiF जल में कम विलेय है। दूसरी ओर Cl− का आकार बड़ा होने के कारण LiCl की जालक एन्थैल्पी तुलनात्मक रूप से कम होती है और इसकी विलेयता अधिक होती है।
सोडियम के महत्वपूर्ण यौगिक
सोडियम क्लोराइड (NaCl)
सोडियम क्लोराइड एक महत्वपूर्ण आयनिक यौगिक है। इसका उपयोग भोजन में नमक के रूप में तथा विभिन्न रासायनिक उद्योगों में कच्चे पदार्थ के रूप में किया जाता है।
सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH)
सोडियम हाइड्रॉक्साइड एक प्रबल क्षार है। इसका उपयोग साबुन, कागज, कृत्रिम रेशे और विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।
सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3)
सोडियम कार्बोनेट को सामान्यतः वाशिंग सोडा के निर्माण से जोड़ा जाता है। इसका उपयोग काँच, साबुन, कागज और जल को मृदु करने जैसी प्रक्रियाओं में किया जाता है।
सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3)
सोडियम बाइकार्बोनेट को बेकिंग सोडा कहा जाता है। गर्म करने पर यह सोडियम कार्बोनेट, जल और कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।
2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2↑
सॉल्वे प्रक्रम
सॉल्वे प्रक्रम द्वारा सोडियम कार्बोनेट का औद्योगिक निर्माण किया जाता है। इसमें ब्राइन, अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में पहले सोडियम बाइकार्बोनेट का अवक्षेप प्राप्त होता है और उसे गर्म करके सोडियम कार्बोनेट बनाया जाता है।
2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2↑
अमोनिया को पुनः प्राप्त करने के लिए अमोनियम क्लोराइड की कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है:
2NH4Cl + Ca(OH)2 → CaCl2 + 2H2O + 2NH3↑
सोडियम क्लोराइड से विभिन्न पदार्थों का निर्माण
सोडियम धातु
गलित NaCl के विद्युत-अपघटन द्वारा सोडियम धातु प्राप्त की जाती है।
कैथोड: Na+ + e− → Na
ऐनोड: 2Cl− → Cl2 + 2e−
सोडियम कार्बोनेट
सॉल्वे प्रक्रम के माध्यम से NaCl से सोडियम कार्बोनेट का औद्योगिक निर्माण किया जा सकता है।
लाइमस्टोन, सीमेंट और प्लास्टर ऑफ पेरिस
चूना पत्थर
चूना पत्थर का मुख्य घटक CaCO3 है। इसका उपयोग निर्माण कार्य, चूना निर्माण और विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है।
सीमेंट
सीमेंट निर्माण उद्योग में अत्यंत महत्वपूर्ण पदार्थ है। इसका उपयोग कंक्रीट, भवन, सड़क, पुल और अन्य निर्माण कार्यों में किया जाता है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस
प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र CaSO4·½H2O है। इसका उपयोग भवन निर्माण, सजावटी कार्य और चिकित्सा क्षेत्र में प्लास्टर बनाने में किया जाता है।
जैव-द्रवों में Na, K, Mg और Ca का महत्व
सोडियम और पोटैशियम शरीर में आयनिक संतुलन तथा तंत्रिका संकेतों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मैग्नीशियम अनेक जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं में आवश्यक है। कैल्शियम हड्डियों और दाँतों के निर्माण के साथ-साथ मांसपेशियों और अन्य जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Na2CO3 का जलीय विलयन क्षारीय क्यों होता है?
सोडियम कार्बोनेट एक प्रबल क्षार और दुर्बल अम्ल से बने लवण के रूप में व्यवहार करता है। जल में CO32− आयन का जल अपघटन होने से OH− आयन की मात्रा बढ़ती है।
CO32− + H2O ⇌ HCO3− + OH−
इसी कारण Na2CO3 का जलीय विलयन क्षारीय होता है।
Li2CO3 कम ताप पर क्यों विघटित होता है?
Li+ आयन का आकार बहुत छोटा होता है और इसकी ध्रुवण क्षमता अधिक होती है। इसके कारण लिथियम कार्बोनेट अन्य क्षार धातु कार्बोनेटों की तुलना में अपेक्षाकृत कम ताप पर विघटित हो जाता है।
Li2CO3 → Li2O + CO2↑
क्षार धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में क्यों नहीं मिलतीं?
क्षार धातुओं की आयनन एन्थैल्पी कम और क्रियाशीलता बहुत अधिक होती है। वे वायु, जल तथा अन्य पदार्थों के साथ आसानी से अभिक्रिया कर लेती हैं। इसलिए ये प्रकृति में सामान्यतः मुक्त अवस्था के बजाय यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं।
क्षार धातुओं को उनके क्लोराइड से कैसे प्राप्त किया जाता है?
क्षार धातुओं को उनके गलित क्लोराइडों के विद्युत-अपघटन द्वारा प्राप्त किया जाता है। जलीय विलयन में जल का अपचयन होने की संभावना के कारण धातु प्राप्त करना उपयुक्त नहीं होता।
महत्वपूर्ण अंतर
| क्षार धातु | क्षारीय मृदा धातु |
|---|---|
| वर्ग 1 में होती हैं। | वर्ग 2 में होती हैं। |
| सामान्य विन्यास ns1 है। | सामान्य विन्यास ns2 है। |
| सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +1 है। | सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। |
| सामान्यतः एक इलेक्ट्रॉन खोती हैं। | सामान्यतः दो इलेक्ट्रॉन खोती हैं। |
| हाइड्रॉक्साइड सामान्यतः अधिक विलेय होते हैं। | हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता अपेक्षाकृत कम होती है। |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. क्षार धातुओं का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
उत्तर: क्षार धातुओं का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1 होता है।
प्रश्न 2. क्षारीय मृदा धातुओं का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
उत्तर: इनका सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 होता है।
प्रश्न 3. क्षार धातुएँ प्रबल अपचायक क्यों होती हैं?
उत्तर: इनके संयोजकता कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है और इनकी आयनन एन्थैल्पी कम होती है। इसलिए ये इलेक्ट्रॉन आसानी से खोकर M+ आयन बनाती हैं और प्रबल अपचायक की तरह कार्य करती हैं।
प्रश्न 4. LiF जल में कम विलेय क्यों है?
उत्तर: Li+ और F− दोनों छोटे आयन हैं, इसलिए LiF की जालक एन्थैल्पी अधिक होती है। इस कारण LiF की जल में विलेयता कम होती है।
प्रश्न 5. लिथियम और मैग्नीशियम में विकर्ण समानता क्या है?
उत्तर: लिथियम और मैग्नीशियम के कुछ भौतिक तथा रासायनिक गुण समान होते हैं। दोनों के बीच इस समानता को विकर्ण संबंध कहा जाता है। दोनों नाइट्राइड बनाते हैं तथा इनके कुछ कार्बोनेट गर्म करने पर अपघटित होते हैं।
प्रश्न 6. सोडियम को केरोसिन में क्यों रखा जाता है?
उत्तर: सोडियम वायु और जल के साथ बहुत तेजी से अभिक्रिया करता है। केरोसिन उसे वायु और नमी के सीधे संपर्क से बचाता है।
प्रश्न 7. Na2CO3 का विलयन क्षारीय क्यों होता है?
उत्तर: CO32− जल का जल अपघटन करके OH− आयन उत्पन्न करता है। इसलिए Na2CO3 का जलीय विलयन क्षारीय होता है।
प्रश्न 8. BeCl2 वाष्प अवस्था में कैसी संरचना रखता है?
उत्तर: वाष्प अवस्था में BeCl2 मुख्यतः रैखिक संरचना प्रदर्शित करता है।
प्रश्न 9. प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र लिखिए।
उत्तर: प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र CaSO4·½H2O है।
प्रश्न 10. सॉल्वे प्रक्रम का उपयोग किसके निर्माण में होता है?
उत्तर: सॉल्वे प्रक्रम का उपयोग मुख्य रूप से सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) के औद्योगिक निर्माण में किया जाता है।
अध्याय 10 के महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण
| अभिक्रिया | समीकरण |
|---|---|
| लिथियम का ऑक्सीकरण | 4Li + O2 → 2Li2O |
| सोडियम का ऑक्सीकरण | 2Na + O2 → Na2O2 |
| सोडियम की जल से अभिक्रिया | 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2↑ |
| सोडियम का क्लोरीन से संयोग | 2Na + Cl2 → 2NaCl |
| लिथियम नाइट्राइड निर्माण | 6Li + N2 → 2Li3N |
| मैग्नीशियम का ऑक्सीकरण | 2Mg + O2 → 2MgO |
| मैग्नीशियम नाइट्राइड निर्माण | 3Mg + N2 → Mg3N2 |
| कैल्शियम की जल से अभिक्रिया | Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2↑ |
| मैग्नीशियम की HCl से अभिक्रिया | Mg + 2HCl → MgCl2 + H2↑ |
| कैल्शियम हाइड्राइड की जल से अभिक्रिया | CaH2 + 2H2O → Ca(OH)2 + 2H2↑ |
| NaHCO3 का अपघटन | 2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2↑ |
| NaCl से Na का निर्माण | Na+ + e− → Na |
अध्याय 10 के महत्वपूर्ण MCQ
- क्षार धातुओं का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
(A) ns1 (B) ns2 (C) np1 (D) np5
उत्तर: (A) ns1
- क्षारीय मृदा धातुओं का सामान्य बाह्य विन्यास है—
(A) ns1 (B) ns2 (C) np2 (D) nd2
उत्तर: (B) ns2
- क्षार धातुओं की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
(A) −1 (B) +1 (C) +2 (D) +3
उत्तर: (B) +1
- क्षारीय मृदा धातुओं की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था है—
(A) +1 (B) +2 (C) −2 (D) +3
उत्तर: (B) +2
- सबसे अधिक जलयोजन एन्थैल्पी वाला आयन कौन-सा है?
(A) Li+ (B) Na+ (C) K+ (D) Cs+
उत्तर: (A) Li+
- Na2O2 में Na की ऑक्सीकरण अवस्था क्या है?
(A) 0 (B) +1 (C) +2 (D) −1
उत्तर: (B) +1
- प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र है—
(A) CaCO3 (B) CaO (C) CaSO4·½H2O (D) CaSO4
उत्तर: (C) CaSO4·½H2O
- सॉल्वे प्रक्रम से मुख्यतः कौन-सा पदार्थ बनाया जाता है?
(A) NaOH (B) Na2CO3 (C) CaCO3 (D) MgO
उत्तर: (B) Na2CO3
- लिथियम और मैग्नीशियम के संबंध को क्या कहते हैं?
(A) समस्थानिक संबंध (B) विकर्ण संबंध (C) समावयवी संबंध (D) ध्रुवीय संबंध
उत्तर: (B) विकर्ण संबंध
- जल के साथ अत्यधिक क्रियाशील क्षार धातुओं में कौन-सी धातु शामिल है?
(A) K (B) Cu (C) Fe (D) Ag
उत्तर: (A) K
अध्याय 10 का संक्षिप्त सारांश
- s-ब्लॉक में मुख्य रूप से वर्ग 1 और वर्ग 2 के तत्व आते हैं।
- वर्ग 1 के तत्वों को क्षार धातु कहा जाता है।
- क्षार धातुओं का सामान्य बाह्य विन्यास ns1 होता है।
- वर्ग 2 के तत्वों को क्षारीय मृदा धातु कहा जाता है।
- क्षारीय मृदा धातुओं का सामान्य बाह्य विन्यास ns2 होता है।
- क्षार धातुओं की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +1 होती है।
- क्षारीय मृदा धातुओं की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +2 होती है।
- क्षार धातुएँ अत्यधिक क्रियाशील और प्रबल अपचायक होती हैं।
- लिथियम कई मामलों में अन्य क्षार धातुओं से अलग व्यवहार करता है।
- लिथियम और मैग्नीशियम में विकर्ण समानता पाई जाती है।
- सोडियम कार्बोनेट का औद्योगिक निर्माण सॉल्वे प्रक्रम द्वारा किया जाता है।
- Na2CO3 का जलीय विलयन क्षारीय होता है।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र CaSO4·½H2O है।
अध्याय 10 से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक
पिछला अध्याय – Chapter 9 हाइड्रोजन
अगला अध्याय – Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व में क्षार धातु और क्षारीय मृदा धातुओं के गुणों तथा उनके महत्वपूर्ण यौगिकों का अध्ययन किया जाता है। परीक्षा में इस अध्याय से आवर्तीय प्रवृत्तियाँ, लिथियम का असामान्य व्यवहार, विकर्ण संबंध, रासायनिक अभिक्रियाएँ, सॉल्वे प्रक्रम, सोडियम के यौगिक, कैल्शियम के यौगिक तथा महत्वपूर्ण कारण-आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को सिद्धांत के साथ-साथ रासायनिक समीकरणों और वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का भी अभ्यास करना चाहिए।