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Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व

Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व में p-ब्लॉक के महत्वपूर्ण तत्वों तथा उनके यौगिकों का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में मुख्य रूप से समूह 13 के बोरॉन परिवार और समूह 14 के कार्बन परिवार के तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, परमाणु गुण, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, भौतिक एवं रासायनिक गुण तथा महत्वपूर्ण यौगिकों का अध्ययन किया जाता है।

इस अध्याय में बोरॉन के असामान्य गुण, बोरेक्स, बोरिक अम्ल, डाइबोरेन, ऐलुमिनियम के गुण एवं उपयोग, कार्बन की श्रृंखलन प्रवृत्ति, हीरा, ग्रेफाइट, फुलरीन, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, सिलिकॉन डाइऑक्साइड, सिलिकोन, सिलिकेट और जियोलाइट जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

अगर आपने पिछला अध्याय नहीं पढ़ा है, तो पहले Chapter 10 – s-ब्लॉक तत्त्व पढ़ सकते हैं।

Table of Contents

p-ब्लॉक तत्त्व क्या हैं?

आवर्त सारणी के वे तत्व जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन p-कक्षक में प्रवेश करता है, p-ब्लॉक के तत्व कहलाते हैं। इनके संयोजकता कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np1-6 होता है।

Class 11 Chemistry के इस अध्याय में मुख्य रूप से समूह 13 और समूह 14 के तत्वों का अध्ययन किया जाता है।

समूह 13 – बोरॉन परिवार

समूह 13 के प्रमुख तत्व हैं:

तत्वप्रतीकपरमाणु क्रमांक
बोरॉनB5
ऐलुमिनियमAl13
गैलियमGa31
इंडियमIn49
थैलियमTl81

इन तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np1 होता है।

समूह 13 के तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ

समूह 13 के तत्वों में सामान्यतः +3 ऑक्सीकरण अवस्था पाई जाती है। भारी तत्वों में +1 ऑक्सीकरण अवस्था भी अधिक स्थायी होने लगती है। इसका प्रमुख कारण अक्रिय युग्म प्रभाव (Inert Pair Effect) है।

बोरॉन और ऐलुमिनियम मुख्य रूप से +3 अवस्था प्रदर्शित करते हैं, जबकि गैलियम, इंडियम और थैलियम में +1 अवस्था भी देखी जाती है। थैलियम में +1 अवस्था अपेक्षाकृत अधिक स्थायी होती है।

अक्रिय युग्म प्रभाव

भारी p-ब्लॉक तत्वों के संयोजकता कोश में उपस्थित ns2 इलेक्ट्रॉन युग्म का बंध निर्माण में भाग लेने की प्रवृत्ति कम हो जाती है। इस प्रभाव को अक्रिय युग्म प्रभाव कहा जाता है।

समूह में नीचे जाने पर यह प्रभाव अधिक स्पष्ट होता है। इसी कारण भारी तत्वों में निम्न ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता बढ़ती है।

BCl3 और TlCl3 की स्थिरता

BCl3 में बोरॉन के तीनों संयोजकता इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग लेते हैं, इसलिए +3 अवस्था स्थायी रहती है। थैलियम में अक्रिय युग्म प्रभाव अधिक होने के कारण +1 अवस्था अधिक स्थायी हो जाती है। इसलिए TlCl की स्थिरता TlCl3 की तुलना में अधिक होती है।

बोरॉन के असामान्य गुण

समूह 13 का पहला तत्व बोरॉन अन्य तत्वों से कई मामलों में अलग व्यवहार करता है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  • बोरॉन का बहुत छोटा परमाणु आकार।
  • उच्च आयनन एन्थैल्पी।
  • उच्च विद्युत-ऋणात्मकता।
  • उच्च गलनांक।
  • सहसंयोजक यौगिक बनाने की प्रवृत्ति।
  • अपूर्ण अष्टक वाले यौगिक बनाने की क्षमता।

बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड (BF3)

BF3 में बोरॉन के चारों ओर केवल छह संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए यह एक इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक है और इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकता है। इस कारण BF3 लूईस अम्ल की तरह व्यवहार करता है।

BF3 की संरचना त्रिकोणीय समतलीय होती है तथा बोरॉन में sp2 संकरण पाया जाता है। बंध कोण लगभग 120° होता है।

BF3 का NH3 के साथ व्यवहार

BF3 एक लूईस अम्ल है, जबकि NH3 एक लूईस क्षार है। NH3 अपने एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को BF3 को प्रदान करता है और योगात्मक यौगिक बनता है।

BF3 + NH3 → F3B←NH3

BCl3 का जल-अपघटन

BCl3 में बोरॉन का अष्टक पूर्ण नहीं होता। इसलिए जल का इलेक्ट्रॉन युग्म बोरॉन द्वारा ग्रहण किया जा सकता है और BCl3 जल के साथ अभिक्रिया करता है।

BCl3 + 3H2O → H3BO3 + 3HCl

इसके विपरीत CCl4 में कार्बन का अष्टक पूर्ण होता है और इसका जल-अपघटन सामान्य परिस्थितियों में नहीं होता।

बोरिक अम्ल (H3BO3)

बोरिक अम्ल को ऑर्थोबोरिक अम्ल भी कहा जाता है। यह सामान्य प्रोटोनी अम्ल की तरह सीधे H+ प्रदान करने के बजाय जल से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है। इसलिए इसे लूईस अम्ल के रूप में समझा जाता है।

B(OH)3 + 2H2O → [B(OH)4]− + H3O+

बोरिक अम्ल को गर्म करने पर

बोरिक अम्ल को गर्म करने पर क्रमशः मेटाबोरिक अम्ल और आगे बोरॉन ऑक्साइड प्राप्त हो सकता है।

H3BO3 → HBO2 + H2O

2HBO2 → B2O3 + H2O

बोरेक्स (Borax)

बोरेक्स सोडियम का एक महत्वपूर्ण बोरॉन यौगिक है। इसका सूत्र Na2B4O7·10H2O है। इसके जलीय विलयन की प्रकृति क्षारीय होती है।

बोरेक्स को अधिक गर्म करने पर यह क्रिस्टलन जल खो देता है और आगे गर्म करने पर बोरेक्स मनका बनने की प्रक्रिया से संबंधित परिवर्तन दिखाई देते हैं।

बोरेक्स मनका परीक्षण

बोरेक्स को गर्म करने पर पहले यह अपना क्रिस्टलन जल खोता है। अधिक गर्म करने पर एक पारदर्शी द्रव जैसा पदार्थ बनता है, जो ठंडा होने पर काँच के समान ठोस बन सकता है। इसे बोरेक्स मनका कहा जाता है।

डाइबोरेन (B2H6)

डाइबोरेन बोरॉन का एक महत्वपूर्ण हाइड्राइड है। इसका आणविक सूत्र B2H6 है। इसमें चार terminal B–H बंधों के साथ दो bridging hydrogen atoms पाए जाते हैं।

डाइबोरेन की संरचना में कुछ बंध सामान्य दो-केंद्र-दो-इलेक्ट्रॉन बंधों से अलग होते हैं। bridging hydrogen के कारण इसमें तीन-केंद्र-दो-इलेक्ट्रॉन बंध की अवधारणा महत्वपूर्ण है।

बोरॉन के हाइड्राइड इलेक्ट्रॉन-न्यून क्यों होते हैं?

बोरॉन के पास सहसंयोजक बंध बनाने के लिए तीन संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए उसके कुछ यौगिकों में पूर्ण अष्टक प्राप्त नहीं होता। इस कारण ऐसे यौगिक इलेक्ट्रॉन-न्यून प्रकृति प्रदर्शित कर सकते हैं।

BH4− की आकृति

BH4− में बोरॉन के चारों ओर चार बंध युग्म होते हैं। इसलिए इसमें sp3 संकरण पाया जाता है और इसकी आकृति समचतुष्फलकीय (tetrahedral) होती है।

बंध कोण लगभग 109°28′ होता है।

ऐलुमिनियम के उभयधर्मी गुण

ऐलुमिनियम तथा इसके कुछ यौगिक अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं। इसलिए ऐलुमिनियम के ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड में उभयधर्मी गुण महत्वपूर्ण हैं।

अम्ल के साथ

Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O

क्षार के साथ

Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O

ऐलुमिनियम की NaOH के साथ अभिक्रिया

ऐलुमिनियम NaOH के जलीय विलयन के साथ अभिक्रिया करके विलेय ऐलुमिनेट संकुल और हाइड्रोजन गैस बना सकता है।

2Al + 2NaOH + 6H2O → 2Na[Al(OH)4] + 3H2↑

समूह 14 – कार्बन परिवार

समूह 14 के प्रमुख तत्व हैं:

तत्वप्रतीकपरमाणु क्रमांक
कार्बनC6
सिलिकॉनSi14
जर्मेनियमGe32
टिनSn50
लेडPb82

इन तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np2 होता है।

समूह 14 की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ

समूह 14 के तत्व मुख्यतः +4 और +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। कार्बन कुछ यौगिकों में ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है।

समूह में नीचे जाने पर +2 अवस्था की स्थिरता बढ़ती है। भारी तत्वों में इसका संबंध अक्रिय युग्म प्रभाव से है।

लेड की +2 ऑक्सीकरण अवस्था

लेड में +2 ऑक्सीकरण अवस्था अपेक्षाकृत अधिक स्थायी होती है। इसलिए Pb(IV) के कुछ यौगिक ऊष्मा के प्रति अस्थायी हो सकते हैं और Pb(II) यौगिकों में परिवर्तित हो सकते हैं।

PbCl4 की अस्थिरता

लेड की +2 अवस्था की अधिक स्थिरता के कारण PbCl4 ऊष्मा के प्रति अस्थायी होता है। इसके अपघटन में PbCl2 और Cl2 बन सकते हैं।

PbCl4 → PbCl2 + Cl2

लेड PbI4 क्यों नहीं बनाता?

आयोडाइड आयन I− एक अच्छा अपचायक है। यह Pb4+ को Pb2+ में अपचयित कर सकता है। इसलिए PbI4 का स्थायी बनना संभव नहीं होता और Pb(II) का आयोडाइड अधिक स्थायी होता है।

कार्बन की श्रृंखलन प्रवृत्ति

कार्बन की अपने ही परमाणुओं के साथ मजबूत सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखला, शाखित श्रृंखला तथा वलय बनाने की क्षमता को श्रृंखलन (Catenation) कहते हैं।

कार्बन में मजबूत C–C बंध और छोटे परमाणु आकार के कारण श्रृंखलन की प्रवृत्ति बहुत अधिक होती है।

कार्बन के अपररूप

एक ही तत्व के ऐसे विभिन्न रूप जिनकी संरचना अलग-अलग होती है और जिनके भौतिक गुण अलग हो सकते हैं, अपररूप (Allotropes) कहलाते हैं। कार्बन के प्रमुख अपररूपों में हीरा, ग्रेफाइट और फुलरीन शामिल हैं।

हीरा

हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा रहता है। इसमें कार्बन की sp3 संकरण अवस्था होती है और एक मजबूत त्रिविमीय जालक बनता है।

हीरे की संरचना बहुत कठोर होती है। इसलिए इसका उपयोग अपघर्षक तथा कठोर पदार्थों को काटने और घिसने वाले उपकरणों में किया जाता है।

ग्रेफाइट

ग्रेफाइट में कार्बन की sp2 संकरण अवस्था होती है। कार्बन परमाणु परतदार संरचना बनाते हैं। परतों के बीच आकर्षण अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण ग्रेफाइट की परतें आसानी से एक-दूसरे पर फिसल सकती हैं।

ग्रेफाइट में विस्थानीकृत इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण यह विद्युत का सुचालक होता है। इसका उपयोग शुष्क स्नेहक के रूप में भी किया जाता है।

हीरा और ग्रेफाइट में अंतर

हीराग्रेफाइट
sp3 संकरणsp2 संकरण
त्रिविमीय जालकपरतदार संरचना
बहुत कठोरअपेक्षाकृत नरम
विद्युत का कुचालकविद्युत का सुचालक
अपघर्षक के रूप में उपयोगशुष्क स्नेहक के रूप में उपयोग

CO32− में कार्बन का संकरण

कार्बोनेट आयन CO32− में कार्बन की संकरण अवस्था sp2 होती है। इसकी संरचना त्रिकोणीय समतलीय होती है।

कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)

कार्बन मोनोऑक्साइड एक महत्वपूर्ण कार्बन ऑक्साइड है। यह रंगहीन गैस है और विभिन्न औद्योगिक रासायनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

CO की प्रयोगशाला विधि

फॉर्मिक अम्ल का निर्जलीकरण करके कार्बन मोनोऑक्साइड प्राप्त की जा सकती है।

HCOOH → CO + H2O

CO की औद्योगिक प्राप्ति

कार्बन पदार्थों पर भाप प्रवाहित करने से CO और H2 युक्त गैस प्राप्त की जा सकती है। कार्बन मोनोऑक्साइड विभिन्न औद्योगिक अपचयन प्रक्रियाओं में अपचायक के रूप में भी कार्य कर सकती है।

कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)

CO2 कार्बन का महत्वपूर्ण ऑक्साइड है। यह सामान्य परिस्थितियों में रंगहीन गैस है और अनेक प्राकृतिक तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

CO2 की प्रयोगशाला विधि

कैल्शियम कार्बोनेट और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया से CO2 प्राप्त की जाती है।

CaCO3 + 2HCl → CaCl2 + CO2↑ + H2O

CO2 की प्रकृति

CO2 एक अम्लीय ऑक्साइड है। यह क्षारों के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनेट या बाइकार्बोनेट बना सकता है।

CO2 + NaOH → NaHCO3

2NaOH + CO2 → Na2CO3 + H2O

CO और CO2 में अंतर

COCO2
कार्बन मोनोऑक्साइडकार्बन डाइऑक्साइड
एक ऑक्सीजन परमाणुदो ऑक्सीजन परमाणु
महत्वपूर्ण अपचायक गुणअम्लीय ऑक्साइड
CO का प्रयोग औद्योगिक अपचयन में होता हैCO2 का प्रयोग अनेक औद्योगिक एवं रासायनिक प्रक्रियाओं में होता है

सिलिकॉन

सिलिकॉन समूह 14 का महत्वपूर्ण तत्व है। यह पृथ्वी की पर्पटी में विभिन्न सिलिकेट और सिलिकॉन डाइऑक्साइड यौगिकों के रूप में पाया जाता है। सिलिकॉन के यौगिकों का निर्माण सामग्री और उद्योग में महत्वपूर्ण उपयोग है।

सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO2)

सिलिकॉन डाइऑक्साइड का एक विस्तृत सहसंयोजक जालकीय ढाँचा होता है। यह कठोर पदार्थ है और प्रकृति में क्वार्ट्ज जैसे खनिजों के रूप में पाया जाता है।

SiO2 + 4HF → SiF4 + 2H2O

यह अभिक्रिया सिलिकॉन डाइऑक्साइड की हाइड्रोजन फ्लुओराइड के साथ अभिक्रियाशीलता को दर्शाती है।

सिलिकोन

सिलिकोन सिलिकॉन-ऑक्सीजन की मुख्य श्रृंखला वाले बहुलक पदार्थ हैं जिनमें सिलिकॉन से कार्बनिक समूह जुड़े होते हैं। इनके गुणों के कारण इनका उपयोग सीलेंट, स्नेहक, जलरोधी पदार्थ तथा अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।

सिलिकोन का निर्माण

सिलिकॉन की मेथिल क्लोराइड के साथ कॉपर की उपस्थिति में उच्च ताप पर अभिक्रिया से ऑर्गेनोसिलिकॉन यौगिक प्राप्त किए जा सकते हैं। इनके जल-अपघटन और संघनन से सिलिकोन बहुलक बन सकते हैं।

सिलिकेट

सिलिकेट वे यौगिक हैं जिनमें सिलिकॉन और ऑक्सीजन से बनी संरचनात्मक इकाइयाँ होती हैं। प्राकृतिक खनिजों और विभिन्न औद्योगिक पदार्थों में सिलिकेट व्यापक रूप से पाए जाते हैं।

जियोलाइट

जियोलाइट जलयोजित एल्युमिनोसिलिकेट पदार्थ होते हैं। इनके छिद्रयुक्त ढाँचे के कारण ये आयन-विनिमय और अवशोषण जैसी प्रक्रियाओं में उपयोगी होते हैं।

ऐलुमिनियम का सान्द्र HNO3 के साथ व्यवहार

ऐलुमिनियम सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के संपर्क में आने पर अपनी सतह पर एक सुरक्षात्मक परत विकसित कर सकता है। इसे निष्क्रियता (Passivation) कहा जाता है। इस कारण सान्द्र HNO3 को ऐलुमिनियम के पात्र में रखने या परिवहन करने की स्थिति संभव होती है।

ऐलुमिनियम का उपयोग वायुयान में क्यों?

ऐलुमिनियम की मिश्रधातुएँ कम घनत्व और पर्याप्त मजबूती के कारण हल्की संरचनाएँ बनाने में उपयोगी होती हैं। इसलिए वायुयान निर्माण में ऐलुमिनियम आधारित मिश्रधातुओं का महत्वपूर्ण उपयोग है।

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

शब्दअर्थ
अक्रिय युग्म प्रभावभारी p-ब्लॉक तत्वों के ns2 इलेक्ट्रॉन युग्म की बंध निर्माण में कम भागीदारी।
अपररूपएक ही तत्व के विभिन्न संरचनात्मक रूप।
श्रृंखलनकार्बन द्वारा अपने ही परमाणुओं से लंबी श्रृंखला या वलय बनाने की प्रवृत्ति।
इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिकऐसे यौगिक जिनमें केंद्रीय परमाणु इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखता है।
लूईस अम्लइलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाली प्रजाति।
लूईस क्षारइलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करने वाली प्रजाति।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. p-ब्लॉक तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?

उत्तर: p-ब्लॉक तत्वों का सामान्य संयोजकता कोश विन्यास ns2np1-6 होता है।

प्रश्न 2. BF3 लूईस अम्ल की तरह क्यों व्यवहार करता है?

उत्तर: BF3 में बोरॉन के चारों ओर केवल छह संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए यह इलेक्ट्रॉन-न्यून है और इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके स्थिरता प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न 3. BF3 की आकृति क्या है?

उत्तर: BF3 की आकृति त्रिकोणीय समतलीय है। इसमें बोरॉन की संकरण अवस्था sp2 होती है और बंध कोण लगभग 120° होता है।

प्रश्न 4. बोरिक अम्ल को प्रोटोनी अम्ल क्यों नहीं माना जाता?

उत्तर: बोरिक अम्ल सीधे प्रोटॉन प्रदान करने के बजाय जल से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है। इसलिए इसे लूईस अम्ल के रूप में समझा जाता है।

प्रश्न 5. समूह 13 में नीचे जाने पर +1 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता क्यों बढ़ती है?

उत्तर: नीचे जाने पर अक्रिय युग्म प्रभाव बढ़ता है। इससे ns2 इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में कम भाग लेते हैं और +1 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती जाती है।

प्रश्न 6. समूह 14 के तत्व कौन-कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं?

उत्तर: समूह 14 के तत्व मुख्यतः +4 और +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। भारी तत्वों में +2 अवस्था की स्थिरता बढ़ती जाती है।

प्रश्न 7. कार्बन में श्रृंखलन की प्रवृत्ति अधिक क्यों होती है?

उत्तर: कार्बन का परमाणु आकार छोटा होता है और C–C बंध मजबूत होता है। इसलिए कार्बन अपने ही परमाणुओं से लंबी श्रृंखला तथा वलय बनाने में सक्षम होता है।

प्रश्न 8. हीरा बहुत कठोर क्यों होता है?

उत्तर: हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से मजबूत सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा रहता है। इससे एक कठोर त्रिविमीय जालक बनता है।

प्रश्न 9. ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक क्यों है?

उत्तर: ग्रेफाइट में कार्बन की sp2 संकरण अवस्था होती है और π-इलेक्ट्रॉन परत में विस्थानीकृत रहते हैं। इन गतिशील इलेक्ट्रॉनों के कारण ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है।

प्रश्न 10. ग्रेफाइट शुष्क स्नेहक के रूप में क्यों उपयोग होता है?

उत्तर: ग्रेफाइट की परतें एक-दूसरे के ऊपर आसानी से फिसल सकती हैं। इसलिए यह घर्षण कम करने में सहायता करता है और शुष्क स्नेहक के रूप में उपयोगी होता है।

प्रश्न 11. CO2 अम्लीय ऑक्साइड क्यों है?

उत्तर: CO2 क्षारों के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनेट या बाइकार्बोनेट बनाता है। इसलिए इसे अम्लीय ऑक्साइड माना जाता है।

प्रश्न 12. ऐलुमिनियम उभयधर्मी क्यों कहलाता है?

उत्तर: ऐलुमिनियम के ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं। इसलिए इनमें उभयधर्मी गुण पाया जाता है।

महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण

विषयरासायनिक समीकरण
BCl3 का जल-अपघटनBCl3 + 3H2O → H3BO3 + 3HCl
बोरिक अम्ल का प्रथम अपघटनH3BO3 → HBO2 + H2O
बोरिक अम्ल का आगे अपघटन2HBO2 → B2O3 + H2O
BF3 और NH3BF3 + NH3 → F3B←NH3
ऐलुमिनियम और NaOH2Al + 2NaOH + 6H2O → 2Na[Al(OH)4] + 3H2↑
Al2O3 और HClAl2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
Al2O3 और NaOHAl2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
PbCl4 का अपघटनPbCl4 → PbCl2 + Cl2
CO2 की CaCO3 से प्राप्तिCaCO3 + 2HCl → CaCl2 + CO2↑ + H2O
CO2 और NaOHCO2 + NaOH → NaHCO3
CO2 और NaOH2NaOH + CO2 → Na2CO3 + H2O
SiO2 और HFSiO2 + 4HF → SiF4 + 2H2O

अध्याय 11 के महत्वपूर्ण MCQ

  1. समूह 13 के तत्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?

    (A) ns1   (B) ns2np1   (C) ns2np2   (D) ns2np5

    उत्तर: (B) ns2np1

  2. BF3 में बोरॉन का संकरण क्या है?

    (A) sp   (B) sp2   (C) sp3   (D) dsp2

    उत्तर: (B) sp2

  3. BF3 की आकृति है—

    (A) रैखिक   (B) त्रिकोणीय समतलीय   (C) समचतुष्फलकीय   (D) कोणीय

    उत्तर: (B) त्रिकोणीय समतलीय

  4. बोरिक अम्ल का सूत्र क्या है?

    (A) H2BO3   (B) H3BO3   (C) HBO2   (D) H2B4O7

    उत्तर: (B) H3BO3

  5. बोरेक्स के जलीय विलयन की प्रकृति कैसी होती है?

    (A) अम्लीय   (B) उदासीन   (C) क्षारीय   (D) उभयधर्मी

    उत्तर: (C) क्षारीय

  6. कार्बन की श्रृंखलन प्रवृत्ति को क्या कहते हैं?

    (A) कैटेनेशन   (B) आयनीकरण   (C) जलयोजन   (D) उदासीनीकरण

    उत्तर: (A) कैटेनेशन

  7. हीरे में कार्बन की संकरण अवस्था क्या है?

    (A) sp   (B) sp2   (C) sp3   (D) dsp2

    उत्तर: (C) sp3

  8. ग्रेफाइट में कार्बन की संकरण अवस्था है—

    (A) sp   (B) sp2   (C) sp3   (D) d2sp3

    उत्तर: (B) sp2

  9. समूह 14 के तत्व मुख्यतः कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं?

    (A) +1 और +3   (B) +2 और +4   (C) −1 और +1   (D) +3 और +5

    उत्तर: (B) +2 और +4

  10. CO2 किस प्रकार का ऑक्साइड है?

    (A) क्षारीय   (B) अम्लीय   (C) उदासीन   (D) केवल उभयधर्मी

    उत्तर: (B) अम्लीय

अध्याय 11 के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • p-ब्लॉक तत्वों का सामान्य संयोजकता कोश विन्यास ns2np1-6 होता है।
  • इस अध्याय में मुख्य रूप से समूह 13 और 14 का अध्ययन किया जाता है।
  • समूह 13 के तत्वों को बोरॉन परिवार कहा जाता है।
  • समूह 14 के तत्वों को कार्बन परिवार कहा जाता है।
  • BF3 एक इलेक्ट्रॉन-न्यून तथा लूईस अम्ल है।
  • BF3 की आकृति त्रिकोणीय समतलीय है।
  • BF3 में बोरॉन की संकरण अवस्था sp2 है।
  • बोरिक अम्ल लूईस अम्ल की तरह व्यवहार करता है।
  • बोरेक्स का जलीय विलयन क्षारीय होता है।
  • डाइबोरेन का सूत्र B2H6 है।
  • कार्बन में श्रृंखलन की प्रवृत्ति बहुत अधिक होती है।
  • हीरे में कार्बन sp3 संकरित होता है।
  • ग्रेफाइट में कार्बन sp2 संकरित होता है।
  • ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है।
  • समूह 14 के तत्व +2 और +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
  • भारी तत्वों में अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण +2 अवस्था की स्थिरता बढ़ती है।
  • CO2 अम्लीय ऑक्साइड है।
  • SiO2 एक विस्तृत सहसंयोजक जालकीय पदार्थ है।

अध्याय 11 का संक्षिप्त सारांश

इस अध्याय में p-ब्लॉक तत्वों के अंतर्गत मुख्य रूप से बोरॉन परिवार और कार्बन परिवार का अध्ययन किया जाता है। समूह 13 के तत्वों का सामान्य विन्यास ns2np1 तथा समूह 14 के तत्वों का सामान्य विन्यास ns2np2 होता है। भारी तत्वों में अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण निम्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ अधिक स्थायी हो सकती हैं।

बोरॉन अपने छोटे आकार और उच्च आयनन एन्थैल्पी के कारण असामान्य व्यवहार करता है। BF3, बोरिक अम्ल, बोरेक्स और डाइबोरेन इस भाग के महत्वपूर्ण यौगिक हैं। ऐलुमिनियम के उभयधर्मी गुण भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

कार्बन परिवार में कार्बन की श्रृंखलन क्षमता, हीरा, ग्रेफाइट और फुलरीन महत्वपूर्ण विषय हैं। कार्बन तथा सिलिकॉन के ऑक्साइड, सिलिकोन, सिलिकेट और जियोलाइट भी इस अध्याय के महत्वपूर्ण भाग हैं।

अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक

निष्कर्ष

Bihar Board Class 11 Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें बोरॉन और कार्बन परिवार के तत्वों की आवर्तीय प्रवृत्तियाँ, ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, अक्रिय युग्म प्रभाव, बोरॉन के महत्वपूर्ण यौगिक, ऐलुमिनियम के गुण, कार्बन के अपररूप तथा सिलिकॉन के महत्वपूर्ण यौगिकों का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से परिभाषाएँ, कारण-आधारित प्रश्न, संरचनाएँ और रासायनिक समीकरणों का अभ्यास करना चाहिए।

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