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Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 1 अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय

Bihar Board Class 11 Economics Chapter 1 – अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय में सांख्यिकी के अर्थ, स्वरूप, विशेषताओं, कार्यों और सीमाओं के साथ-साथ अर्थशास्त्र में इसके उपयोग का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में यह भी समझाया गया है कि आर्थिक समस्याओं को समझने, आँकड़ों का विश्लेषण करने, तुलना करने, पूर्वानुमान लगाने और उचित नीतियाँ बनाने में सांख्यिकी किस प्रकार सहायता करती है।

Table of Contents

अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय – महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

सांख्यिकी और आर्थिक समस्याओं की मूल अवधारणा

प्रश्न 1. निम्नलिखित कथन सही हैं अथवा गलत? इन्हें तदनुसार चिह्नित करें।

(क) सांख्यिकी केवल मात्रात्मक आँकड़ों का अध्ययन करती है।

(ख) सांख्यिकी आर्थिक समस्याओं का समाधान करती है।

(ग) आँकड़ों के बिना अर्थशास्त्र में सांख्यिकी का कोई उपयोग नहीं है।

उत्तर:

  • (क) गलत – सांख्यिकी में संख्यात्मक आँकड़ों के साथ विभिन्न प्रकार के वर्गीकृत तथ्यों का अध्ययन किया जाता है।
  • (ख) सही – सांख्यिकी आर्थिक समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए आवश्यक तथ्य उपलब्ध कराने में सहायता करती है।
  • (ग) गलत – आँकड़े सांख्यिकी का आधार हैं, इसलिए इनके माध्यम से आर्थिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 2. जीवन के सामान्य कारोबार के अंग बनने वाली क्रियाओं की सूची बनाइए। क्या ये आर्थिक क्रियाएँ हैं?

उत्तर: जीवन के सामान्य कारोबार में अनेक ऐसी क्रियाएँ होती हैं जिनसे आय या आर्थिक गतिविधि जुड़ी होती है। उदाहरण के लिए—

  1. बैंक में नौकरी करना।
  2. अध्यापक द्वारा विद्यालय में पढ़ाना।
  3. डॉक्टर द्वारा रोगी का इलाज करना।
  4. टैक्सी चलाना।
  5. भुगतान के बदले वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना।
  6. विद्युत बोर्ड द्वारा बिजली की आपूर्ति करना।
  7. जल बोर्ड द्वारा पानी की आपूर्ति करना।
  8. किसान द्वारा खेत में खेती करना।
  9. लाभ कमाने के लिए दुकानदार द्वारा वस्तुओं को बेचना।

इनमें से वे क्रियाएँ जिनका उद्देश्य आय अर्जित करना, वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन करना अथवा आर्थिक लाभ प्राप्त करना है, आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं।

प्रश्न 3. सरकार और नीति-निर्माता आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त नीतियों के निर्माण में सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग कैसे करते हैं? दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर: सरकार और नीति-निर्माता किसी आर्थिक समस्या के बारे में निर्णय लेने से पहले उससे संबंधित आँकड़ों का अध्ययन करते हैं। आँकड़े समस्या की वास्तविक स्थिति को समझने और उचित नीति बनाने में सहायता करते हैं।

उदाहरण 1: यदि देश में तेल की माँग और घरेलू उत्पादन के आँकड़े उपलब्ध हों, तो सरकार यह अनुमान लगा सकती है कि देश को विदेशों से कितनी मात्रा में तेल आयात करना पड़ेगा।

उदाहरण 2: खाद्यान्न उत्पादन, रोजगार और जनसंख्या से संबंधित आँकड़ों के आधार पर सरकार यह तय कर सकती है कि देश के विकास के लिए कितने खाद्यान्न उत्पादन और रोजगार अवसरों की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 4. आपकी आवश्यकताएँ असीमित हैं तथा उनकी पूर्ति करने के लिए आपके पास संसाधन सीमित हैं। दो उदाहरणों द्वारा समझाइए।

उत्तर: मनुष्य की आवश्यकताएँ लगातार बढ़ती रहती हैं, जबकि उन्हें पूरा करने के लिए उपलब्ध आय और संसाधन सीमित होते हैं। इसलिए मनुष्य को अपनी आवश्यकताओं में चुनाव करना पड़ता है।

उदाहरण 1: यदि किसी विद्यार्थी को ₹2,000 मासिक जेब खर्च मिलता है और उसे किताबें खरीदने, मनोरंजन करने तथा मित्रों को उपहार देने जैसी अनेक आवश्यकताएँ हैं, तो वह ₹2,000 में अपनी सभी आवश्यकताएँ पूरी नहीं कर सकता। उसे प्राथमिकता के आधार पर चुनाव करना होगा।

उदाहरण 2: यदि किसी परिवार के पास सीमित आय और सीमित आवासीय स्थान है, तो वह एक साथ अलग अध्ययन कक्ष, बड़ा शयनकक्ष और अन्य सभी सुविधाएँ नहीं बना सकता। इसलिए उसे उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अपनी आवश्यकताओं का चुनाव करना पड़ता है।

प्रश्न 5. उन आवश्यकताओं का चुनाव आप कैसे करेंगे, जिनकी आप पूर्ति करना चाहेंगे?

उत्तर: आवश्यकताओं की पूर्ति करते समय पहले उन आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाती है जो सबसे अधिक आवश्यक और महत्वपूर्ण हैं। सामान्यतः आवश्यकताओं को निम्न प्रकार समझा जा सकता है—

  1. अनिवार्य आवश्यकताएँ: जीवन और अस्तित्व के लिए आवश्यक वस्तुएँ।
  2. आरामदायक आवश्यकताएँ: जीवन को अधिक आरामदायक बनाने वाली वस्तुएँ।
  3. सुविधाजनक आवश्यकताएँ: जीवन में अतिरिक्त सुविधा प्रदान करने वाली वस्तुएँ।

सीमित संसाधनों की स्थिति में पहले अधिक तीव्र और आवश्यक जरूरतों को पूरा करना चाहिए।

प्रश्न 6. आप अर्थशास्त्र का अध्ययन क्यों करना चाहते हैं?

उत्तर: अर्थशास्त्र का अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे सामने गरीबी, बेरोजगारी, महँगाई, जनसंख्या वृद्धि और आय की असमानता जैसी अनेक आर्थिक समस्याएँ होती हैं। अर्थशास्त्र इन समस्याओं को समझने और उनके समाधान के उपायों का अध्ययन करता है। इसके अतिरिक्त सरकार की आर्थिक नीतियों और देश की आर्थिक स्थिति को समझने में भी अर्थशास्त्र सहायता करता है।

प्रश्न 7. “सांख्यिकीय विधियाँ सामान्य बुद्धि का स्थानापन्न नहीं होतीं।” टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: सांख्यिकीय विधियाँ आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के अध्ययन में बहुत उपयोगी हैं, लेकिन केवल आँकड़ों के आधार पर सही निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं है। आँकड़ों को समझने के लिए सामान्य बुद्धि, विषय का ज्ञान और उचित विवेक भी आवश्यक है।

यदि किसी व्यक्ति द्वारा आँकड़ों का गलत तरीके से प्रयोग किया जाए, तो वह सही आँकड़ों से भी गलत निष्कर्ष निकाल सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में अधिक डॉक्टरों वाले स्थान पर मृत्यु की संख्या भी अधिक हो, तो केवल इन दोनों आँकड़ों को देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मृत्यु का कारण डॉक्टर हैं। संभव है कि वहाँ गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या अधिक हो और इसलिए अधिक डॉक्टर नियुक्त किए गए हों।

इसी प्रकार केवल औसत गहराई और औसत ऊँचाई की तुलना करके नदी पार करना सुरक्षित मान लेना उचित नहीं है। वास्तविक स्थिति को समझना भी आवश्यक है। इसलिए सांख्यिकी सामान्य बुद्धि और तार्किक विवेक का स्थान नहीं ले सकती।

सांख्यिकी की मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 8. मार्शल ने अर्थशास्त्र को कैसे परिभाषित किया है?

उत्तर: मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय में मानव की क्रियाओं का अध्ययन है।

प्रश्न 9. जीवन के साधारण व्यवसाय से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जीवन के साधारण व्यवसाय से आशय उन सामान्य आर्थिक क्रियाओं से है जिनके माध्यम से मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आय अर्जित करता है। जैसे कार्यालय में काम करना, टैक्सी चलाना या विद्यालय में पढ़ाना।

प्रश्न 10. ए. मार्शल कौन थे?

उत्तर: ए. मार्शल प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थे और आधुनिक अर्थशास्त्र के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

प्रश्न 11. उपभोग के अध्ययन की विषय-वस्तु क्या है?

उत्तर: उपभोग के अध्ययन में यह देखा जाता है कि उपभोक्ता अपनी निश्चित आय और विभिन्न वस्तुओं की कीमतों को ध्यान में रखते हुए किन वस्तुओं और सेवाओं का चयन करता है तथा अपनी आवश्यकताओं को किस प्रकार पूरा करता है।

प्रश्न 12. उत्पादन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: वस्तुओं और सेवाओं में उपयोगिता का सृजन करना या उनकी उपयोगिता में वृद्धि करना उत्पादन कहलाता है। सरल शब्दों में वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण या उपलब्ध कराना उत्पादन है।

प्रश्न 13. उत्पादन में हम क्या अध्ययन करते हैं?

उत्तर: उत्पादन के अध्ययन में यह देखा जाता है कि उत्पादक उपलब्ध संसाधनों, लागत और कीमतों को ध्यान में रखते हुए किन वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करे तथा उत्पादन की मात्रा कितनी हो।

प्रश्न 14. वितरण किसे कहते हैं?

उत्तर: वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन से प्राप्त आय को उत्पादन के साधनों के बीच मजदूरी, ब्याज, किराया और लाभ के रूप में बाँटना वितरण कहलाता है।

प्रश्न 15. हमें दुर्लभता का सामना क्यों करना पड़ता है?

उत्तर: हमें दुर्लभता का सामना इसलिए करना पड़ता है क्योंकि हमारी आवश्यकताएँ अधिक और उपलब्ध संसाधन सीमित होते हैं। सीमित संसाधनों से सभी आवश्यकताओं को एक साथ पूरा नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 16. संसाधनों की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  1. संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
  2. संसाधनों के अनेक वैकल्पिक उपयोग हो सकते हैं।

प्रश्न 17. साधन के वैकल्पिक प्रयोग को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: किसी साधन का एक से अधिक कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है, तो उसे साधन का वैकल्पिक प्रयोग कहते हैं। उदाहरण के लिए भूमि का प्रयोग गेहूँ या अन्य खाद्यान्न उगाने, वाणिज्यिक फसल उगाने या भवन बनाने के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 18. उपभोग से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करना उपभोग कहलाता है। वस्तुओं के उपभोग से उनकी उपयोगिता कम या समाप्त हो सकती है।

प्रश्न 19. आर्थिक समस्याओं के बारे में आँकड़े एकत्रित करने का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: आर्थिक समस्याओं से संबंधित आँकड़े एकत्रित करने का उद्देश्य समस्या की वास्तविक स्थिति को समझना, उसके कारणों का अध्ययन करना तथा उसके समाधान के लिए उचित उपाय और नीतियाँ तैयार करना है।

प्रश्न 20. अर्थशास्त्र में नीतियाँ किसे कहते हैं?

उत्तर: आर्थिक समस्याओं को समझने और उनके समाधान में सहायता करने वाले उपायों तथा निर्णयों को आर्थिक नीतियाँ कहा जाता है।

प्रश्न 21. Statistics शब्द लैटिन भाषा के किस शब्द से संबंधित माना जाता है?

उत्तर: दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार Statistics शब्द लैटिन शब्द Stat Status से संबंधित बताया गया है।

प्रश्न 22. बहुवचन में सांख्यिकी का क्या अर्थ है?

उत्तर: बहुवचन के रूप में सांख्यिकी का अर्थ व्यवस्थित रूप से एकत्रित और संख्याओं में व्यक्त तथ्यों या आँकड़ों से है। उदाहरण के लिए जनसंख्या, उत्पादन, रोजगार और कीमतों से संबंधित आँकड़े।

प्रश्न 23. समंकों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: समंक या आँकड़े उन तथ्यों और सूचनाओं को कहते हैं जिन्हें आर्थिक अध्ययन के लिए व्यवस्थित रूप से एकत्र किया जाता है।

प्रश्न 24. मात्रात्मक तथ्यों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जिन तथ्यों को संख्याओं के रूप में व्यक्त या मापा जा सकता है, उन्हें मात्रात्मक तथ्य कहते हैं। जैसे उत्पादन की मात्रा, जनसंख्या, आय और कीमत।

प्रश्न 25. समंक या आँकड़े किसे कहते हैं?

उत्तर: आर्थिक घटनाओं से संबंधित ऐसे तथ्यों को आँकड़े या समंक कहते हैं जिन्हें संख्यात्मक रूप में व्यक्त किया जा सकता है। जैसे जनसंख्या, कीमत, उत्पादन और रोजगार के आँकड़े।

प्रश्न 26. आर्थिक समस्या क्या है?

उत्तर: आर्थिक समस्या मूल रूप से चयन की समस्या है। यह इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित होती हैं, जबकि उन्हें पूरा करने के साधन सीमित और वैकल्पिक उपयोग वाले होते हैं।

प्रश्न 27. साधनों की मितव्ययिता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: उपलब्ध सीमित साधनों का बुद्धिमत्तापूर्ण और उचित ढंग से उपयोग करना साधनों की मितव्ययिता कहलाता है। इसका उद्देश्य सीमित संसाधनों से अधिकतम आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।

प्रश्न 28. आर्थिक समस्या के उत्पन्न होने के मुख्य कारण कौन-कौन से हैं?

उत्तर: आर्थिक समस्या के तीन प्रमुख कारण हैं—

  1. असीमित आवश्यकताएँ।
  2. सीमित साधन।
  3. साधनों के वैकल्पिक प्रयोग।

प्रश्न 29. सीमित साधन अथवा साधनों की दुर्लभता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब आवश्यकताओं की तुलना में उनकी पूर्ति के लिए उपलब्ध साधन कम होते हैं, तो इसे साधनों की दुर्लभता कहते हैं।

प्रश्न 30. साधनों के वैकल्पिक प्रयोग से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब किसी एक साधन का प्रयोग एक से अधिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, तो उसे साधन का वैकल्पिक प्रयोग कहते हैं। उदाहरण के लिए भूमि का उपयोग खाद्यान्न, वाणिज्यिक फसल या भवन निर्माण के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 31. सांख्यिकी का प्रयोग विभिन्न कारकों में संबंध स्थापित करने के लिए किन्हीं दो उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

  1. वस्तु की कीमत और उसकी माँग के बीच संबंध।
  2. वस्तु की कीमत और उसकी पूर्ति के बीच संबंध।

प्रश्न 32. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अधिक विश्वसनीय है?

(1) सन् 2000 में गेहूँ का उत्पादन 2001 की तुलना में कम था।

(2) सन् 2000 में गेहूँ का उत्पादन 100 मिलियन टन था, जबकि 2001 में यह 121 मिलियन टन था।

उत्तर: दूसरा कथन अधिक विश्वसनीय है क्योंकि इसमें तुलना करने के लिए स्पष्ट संख्यात्मक आँकड़े दिए गए हैं।

प्रश्न 33. निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य अधिक विश्वसनीय है?

(1) हाल के भूकंप में कश्मीर में सैकड़ों व्यक्ति मरे।

(2) हाल के भूकंप में कश्मीर में 310 व्यक्ति मरे।

उत्तर: दूसरा तथ्य अधिक विश्वसनीय है क्योंकि इसमें मृत्यु की स्पष्ट संख्या दी गई है, जबकि पहले कथन में केवल “सैकड़ों” शब्द का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 34. निम्नलिखित में से गुणात्मक समंक कौन-कौन से हैं?

  1. सुन्दरता
  2. समझदारी
  3. अर्जित आय
  4. एक विषय में प्राप्त अंक
  5. गाने की योग्यता
  6. सीखने की कला

उत्तर: गुणात्मक विशेषताओं के उदाहरण सुन्दरता, समझदारी, गाने की योग्यता और सीखने की कला हैं। आय और प्राप्त अंक संख्यात्मक रूप में व्यक्त किए जा सकते हैं।

प्रश्न 35. वस्तु की कीमत और उसकी माँग में क्या संबंध है?

उत्तर: अन्य बातें समान रहने पर सामान्यतः वस्तु की कीमत और उसकी माँग में विपरीत संबंध होता है। कीमत बढ़ने पर माँग घट सकती है और कीमत घटने पर माँग बढ़ सकती है।

प्रश्न 36. सांख्यिकी का प्रयोग किन गंभीर आर्थिक समस्याओं के विश्लेषण तथा समाधान के लिए किया जाता है?

उत्तर: सांख्यिकी का प्रयोग निम्नलिखित आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में किया जाता है—

  • कीमतों में वृद्धि।
  • जनसंख्या वृद्धि।
  • बेरोजगारी।
  • निर्धनता।
  • आय और असमानता से संबंधित समस्याएँ।

सांख्यिकी के कार्य, विशेषताएँ और सीमाएँ

प्रश्न 37. आर्थिक समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण लिखिए।

उत्तर: आर्थिक समस्याओं के तीन प्रमुख कारण हैं—

  1. असीमित आवश्यकताएँ: मनुष्य की आवश्यकताएँ लगातार बढ़ती रहती हैं।
  2. सीमित साधन: आवश्यकताओं को पूरा करने वाले संसाधन सीमित होते हैं।
  3. वैकल्पिक प्रयोग: सीमित साधनों के अनेक उपयोग होते हैं, इसलिए उनके बीच चुनाव करना पड़ता है।

प्रश्न 38. एक कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या 2,500 है। क्या इसे सांख्यिकीय कहा जाएगा?

उत्तर: केवल यह तथ्य कि किसी कॉलेज में 2,500 विद्यार्थी हैं, अपने आप में सांख्यिकी नहीं माना जाएगा क्योंकि यह एक अकेला तथ्य है। सांख्यिकी सामान्यतः तथ्यों के समूह और उनके बीच तुलना या संबंध के अध्ययन से जुड़ी होती है।

यदि हमें बताया जाए कि पिछले वर्ष कॉलेज में 2,300 विद्यार्थी थे और वर्तमान वर्ष में 2,500 विद्यार्थी हैं, तो इन आँकड़ों की तुलना करके विद्यार्थियों की संख्या में परिवर्तन का अध्ययन किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आँकड़े सांख्यिकीय अध्ययन के लिए अधिक उपयोगी होंगे।

प्रश्न 39. सांख्यिकी के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

1. जटिल तथ्यों को सरल बनाना: सांख्यिकी बड़ी मात्रा में उपलब्ध जटिल आँकड़ों को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने में सहायता करती है।

2. नीति निर्माण में सहायता करना: सरकार और संस्थाएँ आर्थिक नीतियाँ बनाने के लिए सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करती हैं। उदाहरण के लिए पेट्रोल की घरेलू माँग और उत्पादन के आँकड़ों के आधार पर आयात संबंधी नीति बनाई जा सकती है।

प्रश्न 40. सांख्यिकी का बहुवचन तथा एकवचन रूप में अर्थ समझाइए।

उत्तर: सांख्यिकी शब्द का प्रयोग सामान्यतः दो अर्थों में किया जाता है—

बहुवचन अर्थ: बहुवचन में सांख्यिकी से व्यवस्थित रूप से एकत्रित संख्यात्मक तथ्यों या आँकड़ों का अर्थ लिया जाता है। जैसे जनसंख्या, रोजगार और उत्पादन के आँकड़े।

एकवचन अर्थ: एकवचन में सांख्यिकी से उस विज्ञान या विधि का अर्थ लिया जाता है जिसके द्वारा आँकड़ों का संकलन, संगठन, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण और निर्वचन किया जाता है।

प्रश्न 41. सांख्यिकी के महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।

उत्तर: सांख्यिकी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

  1. जटिल तथ्यों को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करना।
  2. आँकड़ों की तुलना को आसान बनाना।
  3. पूर्वानुमान लगाने में सहायता करना।
  4. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता करना।
  5. दो या अधिक तथ्यों के बीच संबंध का अध्ययन करना।
  6. तथ्यों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करना।
  7. आर्थिक विश्लेषण को अधिक व्यवस्थित बनाना।

प्रश्न 42. सांख्यिकी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: सांख्यिकीय आँकड़ों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  1. समंक तथ्यों के समूह होते हैं।
  2. समंक संख्याओं में व्यक्त किए जा सकते हैं।
  3. समंक अनेक कारणों से प्रभावित होते हैं।
  4. समंकों का संकलन गणना या अनुमान द्वारा किया जा सकता है।
  5. समंकों का संग्रह किसी पूर्व निर्धारित उद्देश्य से किया जाता है।
  6. समंकों को सुव्यवस्थित ढंग से एकत्र किया जाता है।
  7. समंकों को एक-दूसरे से संबंधित रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

प्रश्न 43. सांख्यिकी अर्थशास्त्री तथा प्रशासक के लिए किस प्रकार उपयोगी है?

उत्तर:

अर्थशास्त्री के लिए: अर्थशास्त्री राष्ट्रीय आय, उपभोग, बचत, निवेश, कीमत और मुद्रा के मूल्य जैसे आर्थिक तथ्यों में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए आँकड़ों पर निर्भर करता है। आर्थिक सिद्धांतों की जाँच और परिकल्पनाओं के परीक्षण में भी सांख्यिकीय विधियाँ उपयोगी हैं।

प्रशासक के लिए: एक प्रशासक को जनसंख्या, आय, व्यापार, आयात-निर्यात, कृषि एवं औद्योगिक उत्पादन, श्रम तथा कीमतों से संबंधित जानकारी की आवश्यकता होती है। ये आँकड़े प्रशासनिक नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में सहायता करते हैं।

प्रश्न 44. सांख्यिकी एक व्यापार के लिए किस प्रकार उपयोगी है?

उत्तर: व्यापार में सांख्यिकी का प्रयोग माँग का अनुमान लगाने, उत्पादन की योजना बनाने, कीमत निर्धारित करने, खरीद-बिक्री की नीति बनाने और विज्ञापन की योजना तैयार करने में किया जाता है। व्यापारी ग्राहकों की पसंद, मौसम, व्यापार चक्र और जीवन-स्तर से संबंधित आँकड़ों का अध्ययन करके भविष्य की माँग का अनुमान लगा सकता है।

प्रश्न 45. सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ क्या हैं?

उत्तर: सांख्यिकी की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं—

  1. सांख्यिकी मुख्यतः समूहों का अध्ययन करती है, व्यक्तिगत इकाइयों का नहीं।
  2. इसका मुख्य आधार संख्यात्मक तथ्य होते हैं।
  3. सांख्यिकीय नियम अनेक कारणों से प्रभावित हो सकते हैं।
  4. सांख्यिकी किसी समस्या का हमेशा एकमात्र या सर्वश्रेष्ठ समाधान नहीं देती।
  5. आँकड़ों का गलत या पक्षपातपूर्ण प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 46. “झूठ तीन प्रकार के होते हैं—झूठ, सफेद झूठ और सांख्यिकी।” इस कथन को समझाइए।

उत्तर: इस कथन का आशय यह है कि यदि आँकड़ों का चयन या प्रस्तुतीकरण गलत तरीके से किया जाए, तो सही तथ्य भी भ्रामक दिखाई दे सकते हैं। किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा केवल अपने पक्ष के अनुकूल आँकड़े प्रस्तुत करके किसी नीति या घटना को अधिक सफल या कम सफल दिखाया जा सकता है।

इसलिए सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करते समय आँकड़ों की प्रकृति, स्रोत, संदर्भ, समय और तुलना के आधार को समझना आवश्यक है। सही तरीके से प्रयोग की गई सांख्यिकी उपयोगी होती है, जबकि गलत प्रयोग से भ्रम पैदा हो सकता है।

प्रश्न 47. आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त सांख्यिकीय विधियों के नाम लिखिए।

उत्तर: आर्थिक विश्लेषण में सांख्यिकी की प्रमुख विधियाँ हैं—

  1. आँकड़ों का संकलन।
  2. आँकड़ों का संगठन।
  3. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण।
  4. आँकड़ों का विश्लेषण।
  5. आँकड़ों का निर्वचन।
  6. पूर्वानुमान।

प्रश्न 48. सांख्यिकी को अंकों में प्रकट तथ्यों के समूह के रूप में परिभाषित किया जाता है। उदाहरण दीजिए।

उत्तर: सांख्यिकी में किसी विषय से संबंधित अनेक तथ्यों को संख्यात्मक रूप में व्यवस्थित करके अध्ययन किया जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी कक्षा में दो विद्यार्थियों के अंक क्रमशः 80 और 90 हैं, तो इन अंकों की तुलना की जा सकती है। इसी प्रकार किसी देश की अलग-अलग वर्षों की जनसंख्या, उत्पादन या आय के आँकड़ों की तुलना सांख्यिकीय अध्ययन का उदाहरण है।

प्रश्न 49. होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार सांख्यिकी की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: होरेस सेक्राइस्ट के अनुसार समंक उन तथ्यों का समूह है जो अनेक कारणों से पर्याप्त सीमा तक प्रभावित होते हैं, अंकों में व्यक्त किए जाते हैं, उचित शुद्धता के साथ गणना या अनुमान द्वारा प्राप्त किए जाते हैं, किसी पूर्व-निर्धारित उद्देश्य के लिए सुव्यवस्थित विधि से एकत्र किए जाते हैं तथा तुलना के लिए एक-दूसरे से संबंधित रूप में रखे जा सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 50. आर्थिक विश्लेषण में प्रयुक्त सांख्यिकीय विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर: आर्थिक विश्लेषण में सांख्यिकीय विधियों का महत्वपूर्ण स्थान है। आर्थिक समस्याओं से संबंधित आँकड़ों को एकत्र करने से लेकर उनसे निष्कर्ष निकालने तक कई चरणों का प्रयोग किया जाता है। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं—

1. आँकड़ों का संकलन

सबसे पहले आर्थिक समस्या से संबंधित आवश्यक आँकड़ों को एकत्र किया जाता है। आँकड़े प्राथमिक या द्वितीयक हो सकते हैं। इनके संकलन के लिए गणना या नमूना जैसी विधियों का प्रयोग किया जा सकता है।

2. आँकड़ों का संगठन

एकत्र किए गए आँकड़ों को व्यवस्थित किया जाता है। इसमें वर्गीकरण और सारणीकरण जैसी प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। इससे बड़े आँकड़ा समूह को समझना आसान हो जाता है।

3. आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण

व्यवस्थित आँकड़ों को तालिका, चार्ट या अन्य उपयुक्त रूपों में प्रस्तुत किया जाता है ताकि उनसे आवश्यक जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सके।

4. आँकड़ों का विश्लेषण

आँकड़ों का विश्लेषण करने के लिए विभिन्न सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग किया जाता है। केन्द्रीय प्रवृत्ति, सहसंबंध और सूचकांक जैसी विधियाँ आर्थिक विश्लेषण में उपयोगी होती हैं।

5. आँकड़ों का निर्वचन

निर्वचन का अर्थ आँकड़ों से उचित अर्थ निकालना है। केवल आँकड़े उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है; उनसे सही निष्कर्ष निकालना भी आवश्यक है।

6. पूर्वानुमान

पिछले आँकड़ों के आधार पर भविष्य की संभावित स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। रोजगार, आय, उत्पादन और जनसंख्या जैसे क्षेत्रों में पूर्वानुमान आर्थिक नीतियों के निर्माण में सहायता कर सकता है।

प्रश्न 51. सांख्यिकी के प्रमुख कार्य बताइए।

उत्तर: सांख्यिकी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

1. तथ्यों को स्पष्ट बनाना

संख्यात्मक आँकड़ों के माध्यम से किसी घटना या स्थिति को अधिक स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

2. जटिल तथ्यों को सरल बनाना

माध्य, माध्यिका, प्रतिशत, अनुपात आदि सांख्यिकीय विधियों से जटिल और बड़े आँकड़ा समूह को सरल रूप में समझा जा सकता है।

3. तथ्यों की तुलना आसान करना

प्रतिशत, अनुपात और अन्य सांख्यिकीय उपायों की सहायता से अलग-अलग समय, स्थान या समूहों के आँकड़ों की तुलना की जा सकती है।

4. व्यक्तिगत अनुभव में वृद्धि

सांख्यिकीय आँकड़ों के अध्ययन से व्यक्ति को विभिन्न आर्थिक और सामाजिक घटनाओं के बारे में व्यापक जानकारी प्राप्त होती है।

5. उचित नीतियों के निर्माण में सहायता

सरकार और अन्य संस्थाएँ नीतियाँ बनाने के लिए सांख्यिकीय आँकड़ों का प्रयोग करती हैं।

6. पूर्वानुमान में सहायता

पिछले आँकड़ों के आधार पर भविष्य की संभावित परिस्थितियों का अनुमान लगाया जा सकता है।

7. तथ्यों के बीच संबंध का अध्ययन

सांख्यिकी दो या अधिक आर्थिक चरों के बीच संबंध का अध्ययन करने में सहायता करती है।

प्रश्न 52. सांख्यिकी की सीमाएँ क्या हैं?

उत्तर: सांख्यिकी बहुत उपयोगी है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं—

  1. व्यक्तिगत इकाई का अध्ययन नहीं: सांख्यिकी मुख्यतः समूहों का अध्ययन करती है।
  2. संख्यात्मक तथ्यों पर निर्भरता: इसका अध्ययन मुख्य रूप से संख्यात्मक तथ्यों पर आधारित होता है।
  3. पूर्ण शुद्धता का अभाव: सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में अनेक कारण काम करते हैं, इसलिए सांख्यिकीय निष्कर्ष हमेशा पूर्ण रूप से निश्चित नहीं होते।
  4. एकमात्र समाधान नहीं: सांख्यिकी किसी समस्या का समाधान खोजने में सहायता कर सकती है, लेकिन यह हमेशा समस्या का सर्वोत्तम समाधान स्वयं निर्धारित नहीं करती।
  5. दुरुपयोग की संभावना: गलत चयन, प्रस्तुतीकरण या व्याख्या के कारण आँकड़ों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 53. सांख्यिकी का क्या महत्व है? अथवा आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में सांख्यिकी की उपयोगिता बताइए।

उत्तर: आर्थिक नियोजन और विकास में सांख्यिकी का महत्वपूर्ण स्थान है। इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—

1. व्यापार में

व्यापारी उत्पादन, खरीद, बिक्री, कीमत और माँग से संबंधित निर्णय लेने के लिए आँकड़ों का प्रयोग करते हैं।

2. अर्थशास्त्र में

गरीबी, बेरोजगारी, आय, असमानता, उत्पादन, उपभोग और बचत जैसी आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में सांख्यिकी उपयोगी है।

3. बैंकिंग में

बैंकर ऋण, जमा, निवेश और भविष्य की आर्थिक परिस्थितियों से संबंधित अनुमान लगाने में आँकड़ों का उपयोग करते हैं।

4. बीमा कंपनियों में

बीमा कंपनियाँ जीवन प्रत्याशा, मृत्यु दर और जोखिम से संबंधित आँकड़ों के आधार पर बीमा दर निर्धारित करती हैं।

5. अनुसंधान में

अनुसंधानकर्ता आँकड़ों के संकलन और विश्लेषण के लिए सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग करते हैं।

6. सरकार में

सरकार कृषि, उद्योग, व्यापार, आयात-निर्यात, जनसंख्या, रोजगार और अन्य क्षेत्रों से संबंधित आँकड़ों के आधार पर नीतियाँ और योजनाएँ तैयार करती है।

7. मानव कल्याण में

गरीबी, बेरोजगारी और अन्य सामाजिक-आर्थिक समस्याओं की स्थिति समझने तथा उनके समाधान के लिए सांख्यिकी उपयोगी है।

8. पूर्वानुमान में

सांख्यिकी का उपयोग भविष्य की संभावित आर्थिक परिस्थितियों का अनुमान लगाने में किया जाता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 54. ऑक्सफोर्ड शब्दकोष के अनुसार सांख्यिकी शब्द का प्रयोग बहुवचन में हो तो इसका अर्थ है—

(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य

(b) अप्रायोगिक विज्ञान

(c) प्रायोगिक विज्ञान

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य

व्याख्या: बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ व्यवस्थित रूप से एकत्र किए गए संख्यात्मक तथ्यों या आँकड़ों से लिया जाता है।

प्रश्न 55. रैन्डम हाउस डिक्शनरी सांख्यिकी का अर्थ बनाती है—

(a) क्रमबद्ध एकत्रित संख्यात्मक तथ्य

(b) अप्रायोगिक विज्ञान

(c) प्रायोगिक विज्ञान

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) अप्रायोगिक विज्ञान

प्रश्न 56. सांख्यिकी आँकड़ों के विश्लेषण की विधियाँ हो सकती हैं—

(a) अविवरणात्मक या अप्रायिकतात्मक

(b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) विवरणात्मक या प्रायिकतात्मक

प्रश्न 57. इस पाठ्य पुस्तक की विषय-वस्तु है—

(a) विवरणात्मक विधियाँ

(b) प्रायिकतात्मक विधियाँ

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) विवरणात्मक विधियाँ

प्रश्न 58. जिन चरों को संख्याओं द्वारा मापा जाता है, वे कहलाते हैं—

(a) मात्रात्मक आँकड़े

(b) गुणात्मक आँकड़े

(c) मात्रात्मक व गुणात्मक दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) मात्रात्मक आँकड़े

प्रश्न 59. गुणात्मक आँकड़ों को दर्शाया जाता है—

(a) संख्याओं में

(b) कोटियों में

(c) संख्याओं व कोटियों दोनों में

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) संख्याओं में

प्रश्न 60. अर्थशास्त्री सांख्यिकी का प्रयोग करते हैं—

(a) मौद्रिक नीति बनाने में

(b) राजकोषीय नीति बनाने में

(c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (c) उपभोग व उत्पादन का विश्लेषण करने में

व्याख्या: उपभोग और उत्पादन से संबंधित आँकड़ों का अध्ययन आर्थिक विश्लेषण में सांख्यिकी का महत्वपूर्ण उपयोग है।

प्रश्न 61. सांख्यिकी की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है—

(a) प्रायोगिक विज्ञानों में

(b) अप्रायोगिक विज्ञानों में

(c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (c) प्रायोगिक व अप्रायोगिक दोनों विज्ञानों में

प्रश्न 62. प्रयोगात्मक आँकड़े आविष्कारक—

(a) स्वयं तैयार करता है

(b) स्वयं या गणकों से एकत्र करवाता है

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) स्वयं तैयार करता है

प्रश्न 63. सांख्यिकीय संबंधों में—

(a) शत प्रतिशत शुद्धता होती है

(b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) त्रुटियाँ भी हो सकती हैं

व्याख्या: सांख्यिकीय संबंध अनेक परिस्थितियों और कारकों से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए उनमें त्रुटि या अनिश्चितता की संभावना रहती है।

अध्याय का संक्षिप्त सार

  • सांख्यिकी का प्रयोग आँकड़ों के संकलन, संगठन, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण और निर्वचन में किया जाता है।
  • आर्थिक समस्याएँ मुख्यतः असीमित आवश्यकताओं, सीमित साधनों और साधनों के वैकल्पिक प्रयोग के कारण उत्पन्न होती हैं।
  • बहुवचन में सांख्यिकी का अर्थ व्यवस्थित रूप से एकत्रित संख्यात्मक तथ्यों से होता है।
  • सांख्यिकी आर्थिक समस्याओं को समझने और उनका विश्लेषण करने में सहायता करती है।
  • सांख्यिकी सरकार को नीतियाँ बनाने और योजनाएँ तैयार करने में उपयोगी आँकड़े उपलब्ध कराती है।
  • व्यापार में सांख्यिकी का प्रयोग माँग, उत्पादन, कीमत और बिक्री के पूर्वानुमान में किया जाता है।
  • सांख्यिकी जटिल आँकड़ों को सरल और तुलनात्मक रूप में प्रस्तुत करती है।
  • सांख्यिकी भविष्य के संबंध में पूर्वानुमान लगाने में सहायता करती है।
  • सांख्यिकी की अपनी सीमाएँ हैं और आँकड़ों का गलत प्रयोग भ्रामक निष्कर्ष दे सकता है।
  • इसलिए सांख्यिकीय विधियों के साथ उचित विवेक और सामान्य बुद्धि का प्रयोग भी आवश्यक है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

  • आर्थिक समस्या: दुर्लभ साधनों के कारण उत्पन्न चयन की समस्या।
  • दुर्लभता: आवश्यकताओं की तुलना में संसाधनों का सीमित होना।
  • सांख्यिकी: आँकड़ों के संकलन, संगठन, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण और निर्वचन से संबंधित विज्ञान/विधि।
  • मात्रात्मक तथ्य: जिन्हें संख्याओं में व्यक्त किया जा सकता है।
  • सांख्यिकी का प्रमुख उपयोग: आर्थिक विश्लेषण, तुलना, नीति निर्माण और पूर्वानुमान।
  • मुख्य सीमा: आँकड़ों का गलत प्रयोग गलत निष्कर्ष दे सकता है।

निष्कर्ष

अर्थशास्त्र में सांख्यिकी परिचय अध्याय से यह समझने में सहायता मिलती है कि आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में आँकड़ों का कितना महत्वपूर्ण स्थान है। सांख्यिकी के माध्यम से जटिल आर्थिक तथ्यों को सरल बनाया जा सकता है, विभिन्न तथ्यों की तुलना की जा सकती है, उनके बीच संबंधों का अध्ययन किया जा सकता है और भविष्य के लिए पूर्वानुमान लगाए जा सकते हैं। हालांकि, सांख्यिकीय परिणामों को समझते समय विषय-ज्ञान और उचित विवेक का प्रयोग करना भी आवश्यक है।

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