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Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 2 आँकड़ों का संग्रह

बिहार बोर्ड कक्षा 11 अर्थशास्त्र अध्याय 2 – आँकड़ों का संग्रह में हम सीखते हैं कि किसी आर्थिक या सामाजिक समस्या के अध्ययन के लिए आँकड़ों को कैसे एकत्र किया जाता है। इस अध्याय में प्राथमिक आँकड़े, द्वितीयक आँकड़े, जनगणना विधि, प्रतिचयन विधि, प्रश्नावली, सर्वेक्षण, यादृच्छिक प्रतिचयन तथा आँकड़ों में होने वाली त्रुटियों का अध्ययन किया जाता है।

इस अध्याय को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी आर्थिक अध्ययन की गुणवत्ता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आँकड़े किस प्रकार और कितनी सावधानी से एकत्र किए गए हैं।

Table of Contents

अध्याय 2: आँकड़ों का संग्रह – महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. जब आप एक नई पोशाक खरीदें तो इनमें से किसे सबसे महत्त्वपूर्ण मानते हैं?

उत्तर: इस प्रश्न के लिए निम्नलिखित विकल्प दिए जा सकते हैं:

  • कीमत
  • कपड़ा
  • डिजाइन
  • फिटिंग

प्रश्न 2. आप कम्प्यूटर का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं?

उत्तर: इस प्रश्न के संभावित विकल्प इस प्रकार हो सकते हैं:

  • एक बार
  • दो बार
  • तीन बार
  • चार या उससे अधिक बार

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से आप किस समाचार-पत्र को नियमित रूप से पढ़ते हैं?

उत्तर: इसके लिए उदाहरण के रूप में निम्न विकल्प दिए जा सकते हैं:

  • हिन्दुस्तान
  • नवभारत टाइम्स
  • दैनिक जागरण
  • पंजाब केसरी

प्रश्न 4. पेट्रोल की कीमत में वृद्धि न्यायोचित है?

उत्तर: इस प्रश्न के संभावित विकल्प हो सकते हैं:

  • न्यायोचित है
  • न्यायोचित नहीं है
  • कह नहीं सकते
  • अन्य

प्रश्न 5. आपके परिवार की मासिक आमदनी कितनी है?

उत्तर: इसके लिए आय की विभिन्न श्रेणियाँ बनाई जा सकती हैं, जैसे:

  • ₹2,000 से ₹5,000 तक
  • ₹5,000 से ₹10,000 तक
  • ₹10,000 से ₹15,000 तक
  • ₹15,000 से अधिक

प्रश्न 6. पाँच द्विमार्गी प्रश्नों की रचना करें, जिनके उत्तर हाँ या नहीं में दिए जा सकें।

उत्तर:

  1. क्या आप प्रतिदिन समाचार-पत्र पढ़ते हैं? — हाँ / नहीं
  2. क्या आपके घर में इंटरनेट की सुविधा है? — हाँ / नहीं
  3. क्या आप बैंक खाते का उपयोग करते हैं? — हाँ / नहीं
  4. क्या आप ऑनलाइन खरीदारी करते हैं? — हाँ / नहीं
  5. क्या आपके घर में बिजली का कनेक्शन है? — हाँ / नहीं

प्रश्न 7. निम्नलिखित कथनों को सही या गलत बताइए।

(क) आँकड़ों के अनेक स्रोत होते हैं।

उत्तर: सही।

(ख) आँकड़ा-संग्रह के लिए टेलीफोन सर्वेक्षण कुछ परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है, विशेषकर जब क्षेत्र बहुत बड़ा हो।

उत्तर: सही।

(ग) सर्वेक्षक या शोधकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र किए गए आँकड़े द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं।

उत्तर: गलत। ऐसे आँकड़े प्राथमिक आँकड़े कहलाते हैं।

(घ) प्रतिदर्श के अयादृच्छिक चयन में पक्षपात की संभावना रहती है।

उत्तर: सही।

(ङ) अप्रतिचयन त्रुटियों को केवल प्रतिदर्श का आकार बढ़ाकर समाप्त किया जा सकता है।

उत्तर: गलत। प्रतिदर्श का आकार बढ़ाने से मुख्यतः प्रतिचयन त्रुटि को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 8. निम्नलिखित प्रश्नों में क्या समस्या है? समझाइए।

(क) आप अपने सबसे नजदीक के बाजार से कितनी दूर रहते हैं?

उत्तर: प्रश्न अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन उत्तर को स्पष्ट बनाने के लिए दूरी की इकाई बताना उचित होगा। जैसे – “आपके घर से निकटतम बाजार कितनी किलोमीटर दूर है?”

(ख) यदि हमारे कूड़े में प्लास्टिक थैलियों की मात्रा 5 प्रतिशत है तो क्या इन्हें निषेधित किया जाना चाहिए?

उत्तर: यह प्रश्न एक निश्चित स्थिति मानकर राय पूछता है। बेहतर प्रश्न होगा – “क्या आप प्लास्टिक थैलियों के उपयोग पर प्रतिबंध के पक्ष में हैं?”

(ग) क्या आप पेट्रोल की कीमत में वृद्धि का विरोध नहीं करेंगे?

उत्तर: यह प्रश्न नकारात्मक और प्रेरित करने वाला है। इसे सरल रूप में पूछना चाहिए – “क्या आप पेट्रोल की कीमत में वृद्धि के पक्ष में हैं?”

(घ) क्या आप रासायनिक उर्वरक के उपयोग के पक्ष में हैं?

उत्तर: यह प्रश्न अपेक्षाकृत स्पष्ट है, लेकिन आवश्यकता के अनुसार विकल्प दिए जा सकते हैं – पक्ष में, विरोध में, निश्चित नहीं।

(ङ) क्या आप अपने खेतों में उर्वरक इस्तेमाल करते हैं और आपके खेत में प्रति हेक्टेयर कितनी उपज होती है?

उत्तर: यहाँ दो अलग-अलग बातों को एक ही प्रश्न में पूछा गया है। इन्हें दो प्रश्नों में बाँटना चाहिए:

  1. क्या आप अपने खेतों में उर्वरक का प्रयोग करते हैं?
  2. आपके खेत में प्रति हेक्टेयर औसत उपज कितनी होती है?

प्रश्न 9. बच्चों के बीच शाकाहारी आटा नूडल की लोकप्रियता जानने के लिए एक उपयुक्त प्रश्नावली बनाइए।

उत्तर: इसके लिए निम्नलिखित प्रश्नावली तैयार की जा सकती है:

  1. क्या आप शाकाहारी आटा नूडल खाते हैं?
  2. आप इसे कितनी बार खाते हैं?
  3. आपको इसका स्वाद कैसा लगता है?
  4. आप इसे किस कारण से पसंद करते हैं?
  5. आप एक बार में कितनी मात्रा खाते हैं?
  6. क्या आप इसे अन्य नूडल्स की तुलना में अधिक पसंद करते हैं?
  7. क्या आप भविष्य में भी इसका सेवन करना चाहेंगे?

प्रश्न 10. 200 फार्म वाले एक गाँव में 50 फार्मों का सर्वेक्षण किया गया। समष्टि और प्रतिदर्श को पहचानिए।

उत्तर:

  • समष्टि: गाँव के सभी 200 फार्म।
  • प्रतिदर्श: सर्वेक्षण के लिए चुने गए 50 फार्म।

अर्थात अध्ययन का पूरा समूह समष्टि और उसमें से चुना गया छोटा प्रतिनिधि समूह प्रतिदर्श कहलाता है।

प्रश्न 11. प्रतिदर्श, समष्टि तथा चर के दो-दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर:

अवधारणाउदाहरण
प्रतिदर्शकिसी विद्यालय के 2,000 विद्यार्थियों में से चुने गए 100 विद्यार्थी
प्रतिदर्शकिसी गाँव के 30 खेतों में से चुने गए 5 खेत
समष्टिविद्यालय के सभी 2,000 विद्यार्थी
समष्टिगाँव के सभी 30 खेत
चरविद्यार्थियों की ऊँचाई
चरकिसी शहर में प्रतिदिन होने वाली वर्षा

प्रश्न 12. गणना और प्रतिदर्श विधि में से कौन-सी विधि अधिक उपयोगी है?

उत्तर: दोनों विधियों का उपयोग परिस्थिति के अनुसार किया जाता है। बड़े क्षेत्र और बड़ी समष्टि के अध्ययन में प्रतिदर्श विधि अधिक सुविधाजनक हो सकती है। इसके प्रमुख लाभ हैं:

  • समय की बचत होती है।
  • धन की बचत होती है।
  • कम श्रम की आवश्यकता होती है।
  • कम संख्या में गणकों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
  • आँकड़ों का संकलन और विश्लेषण अपेक्षाकृत जल्दी किया जा सकता है।

प्रश्न 13. प्रतिचयन त्रुटि और अप्रतिचयन त्रुटि में कौन अधिक गंभीर हो सकती है?

उत्तर: अप्रतिचयन त्रुटियाँ कई परिस्थितियों में अधिक गंभीर हो सकती हैं क्योंकि ये आँकड़ों के संग्रह, मापन, रिकॉर्डिंग, प्रश्नों की गलत समझ या उत्तर न मिलने जैसी विभिन्न समस्याओं से उत्पन्न हो सकती हैं। प्रतिचयन त्रुटि को उपयुक्त प्रतिचयन पद्धति और पर्याप्त प्रतिदर्श आकार से कम किया जा सकता है।

प्रश्न 14. 10 छात्रों में से 3 छात्रों को चुनने पर कितने प्रतिदर्श संभव हैं?

उत्तर:

यहाँ कुल छात्रों की संख्या N = 10 और चुने जाने वाले छात्रों की संख्या r = 3 है।

सूत्र:

ⁿCᵣ = n! / [r!(n-r)!]

अतः,

¹⁰C₃ = 10! / [3! × 7!]

= (10 × 9 × 8) / (3 × 2 × 1)

= 720 / 6 = 120

अतः 10 छात्रों में से 3 छात्रों को चुनने के 120 संभावित प्रतिदर्श हो सकते हैं।

प्रश्न 15. लॉटरी विधि से 10 छात्रों में से 3 छात्रों का यादृच्छिक चयन कैसे करेंगे?

उत्तर:

  1. 10 विद्यार्थियों के नाम अलग-अलग पर्चियों पर लिखेंगे।
  2. सभी पर्चियों का आकार और रूप समान रखेंगे।
  3. सभी पर्चियों को एक डिब्बे में डालकर अच्छी तरह मिलाएँगे।
  4. बिना किसी पक्षपात के एक-एक करके 3 पर्चियाँ निकालेंगे।
  5. जिन तीन विद्यार्थियों के नाम निकलेंगे, उन्हें प्रतिदर्श के रूप में चुना जाएगा।

प्रश्न 16. क्या लॉटरी विधि यादृच्छिक प्रतिदर्श प्राप्त करने में सहायक है?

उत्तर: हाँ। यदि सभी इकाइयों को समान अवसर देकर निष्पक्ष तरीके से पर्चियाँ चुनी जाएँ, तो लॉटरी विधि यादृच्छिक प्रतिदर्श के चयन में सहायक होती है। इसमें शोधकर्ता की व्यक्तिगत पसंद के आधार पर चयन नहीं किया जाता।

प्रश्न 17. यादृच्छिक संख्या सारणी की सहायता से 10 छात्रों में से 3 छात्रों का चयन कैसे करेंगे?

उत्तर: पहले 10 छात्रों को 01 से 10 तक क्रमांक दिए जाएँगे। इसके बाद यादृच्छिक संख्या सारणी से ऐसी तीन अलग-अलग संख्याएँ चुनी जाएँगी जो 01 से 10 के बीच हों। जिन क्रमांकों का चयन होगा, उनसे संबंधित तीन विद्यार्थी प्रतिदर्श में शामिल किए जाएँगे।

प्रश्न 18. क्या प्रतिदर्श सर्वेक्षण के परिणाम उपयोगी होते हैं?

उत्तर: हाँ, यदि प्रतिदर्श का चयन वैज्ञानिक और प्रतिनिधित्वपूर्ण तरीके से किया गया हो, तो प्रतिदर्श सर्वेक्षण से उपयोगी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त इसमें समय, धन और श्रम की बचत होती है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. संपूर्ण सर्वेक्षण क्या है?

उत्तर: संपूर्ण सर्वेक्षण में समष्टि की प्रत्येक इकाई से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है। इसे जनगणना या संगणना विधि भी कहा जाता है।

प्रश्न 2. प्रतिदर्श सर्वेक्षण का एक प्रमुख लाभ बताइए।

उत्तर: इसमें समय, धन और श्रम की बचत होती है।

प्रश्न 3. लॉटरी विधि क्या है?

उत्तर: लॉटरी विधि में समष्टि की इकाइयों के नाम या क्रमांक समान पर्चियों पर लिखकर उनमें से संयोग के आधार पर कुछ पर्चियाँ चुनी जाती हैं।

प्रश्न 4. सामान्य विकल्प प्रश्न क्या हैं?

उत्तर: ऐसे प्रश्न जिनके उत्तर सीमित विकल्पों में दिए जाते हैं, जैसे हाँ/नहीं या सही/गलत, सामान्य विकल्प प्रश्न कहलाते हैं।

प्रश्न 5. बहुविकल्पीय प्रश्न से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ऐसे प्रश्न जिनके लिए दो या दो से अधिक संभावित उत्तर दिए जाते हैं और उत्तरदाता उनमें से उपयुक्त विकल्प चुनता है, बहुविकल्पीय प्रश्न कहलाते हैं।

प्रश्न 6. आँकड़ों की शुद्धता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: आँकड़ों की शुद्धता का अर्थ है कि आँकड़े जिस तथ्य या घटना को दर्शाते हैं, उसका सही और यथार्थ चित्र प्रस्तुत करें।

प्रश्न 7. आँकड़े पूर्णतः शुद्ध न होने के दो कारण बताइए।

उत्तर:

  • मापन यंत्र या मापन प्रक्रिया में कमी।
  • अनुसंधानकर्ता या गणक की गलती।

प्रश्न 8. अभिनत त्रुटि के दो कारण लिखिए।

उत्तर:

  • सूचना एकत्र करने की दोषपूर्ण विधि।
  • आँकड़ों के चयन या व्यवस्थितकरण में पक्षपात।

प्रश्न 9. आवृत्ति विन्यास से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बाँटकर प्रत्येक वर्ग में आने वाली इकाइयों की संख्या लिखना आवृत्ति विन्यास कहलाता है।

प्रश्न 10. प्रवेश-पत्रिका के दो लाभ लिखिए।

उत्तर:

  • वर्गांतर में हुई अशुद्धियों को पहचानने में सहायता मिलती है।
  • आँकड़ों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने में सुविधा होती है।

प्रश्न 11. अनुरोध-पत्र क्या है?

उत्तर: अनुरोध-पत्र वह पत्र है जिसमें अनुसंधानकर्ता अपना परिचय, अध्ययन का उद्देश्य तथा सूचना देने से संबंधित आवश्यक निर्देश देता है।

प्रश्न 12. व्यवस्थित प्रतिचयन विधि क्या है?

उत्तर: व्यवस्थित प्रतिचयन में समष्टि की इकाइयों को किसी निश्चित क्रम में व्यवस्थित करके एक निश्चित अंतराल के आधार पर इकाइयों का चयन किया जाता है।

प्रश्न 13. प्रतिचयन अंतराल का सूत्र लिखिए।

उत्तर:

प्रतिचयन अंतराल = समष्टि का आकार ÷ प्रतिदर्श का आकार

अर्थात यदि समष्टि का आकार N और प्रतिदर्श का आकार n हो, तो:

k = N/n

प्रश्न 14. प्राथमिक आँकड़े किसे कहते हैं?

उत्तर: वे आँकड़े जिन्हें अनुसंधानकर्ता अपने अध्ययन के उद्देश्य के लिए पहली बार स्वयं या अपने गणकों की सहायता से एकत्र करता है, प्राथमिक आँकड़े कहलाते हैं।

प्रश्न 15. द्वितीयक आँकड़े क्या होते हैं?

उत्तर: वे आँकड़े जो पहले किसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा एकत्र किए जा चुके हों और बाद में किसी दूसरे अध्ययन में उपयोग किए जाएँ, द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं।

प्रश्न 16. प्रश्नावली किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी अध्ययन के लिए आवश्यक सूचनाएँ प्राप्त करने हेतु तैयार किए गए प्रश्नों की व्यवस्थित सूची को प्रश्नावली कहते हैं।

प्रश्न 17. द्वितीयक आँकड़े प्रयोग करते समय तीन सावधानियाँ बताइए।

उत्तर:

  • विश्वसनीयता
  • अनुकूलता
  • पर्याप्तता

प्रश्न 18. प्रश्नावली में कितने प्रश्न होने चाहिए?

उत्तर: प्रश्नावली में उतने ही प्रश्न होने चाहिए जितने अध्ययन के उद्देश्य के लिए आवश्यक हों। प्रश्नों की संख्या इतनी अधिक नहीं होनी चाहिए कि उत्तरदाता उत्तर देने में रुचि खो दे।

प्रश्न 19. प्रतिदर्श सर्वेक्षण क्या है?

उत्तर: समष्टि की कुछ चुनी हुई प्रतिनिधि इकाइयों से जानकारी प्राप्त करके पूरी समष्टि के बारे में निष्कर्ष निकालने की विधि प्रतिदर्श सर्वेक्षण कहलाती है।

प्रश्न 20. प्रतिचयन की प्रमुख विधियाँ लिखिए।

उत्तर:

  1. यादृच्छिक प्रतिचयन
  2. स्तरित प्रतिचयन
  3. बहु-स्तरीय प्रतिचयन
  4. गुच्छा प्रतिचयन

प्रश्न 21. यादृच्छिक प्रतिचयन क्या है?

उत्तर: ऐसी प्रतिचयन विधि जिसमें समष्टि की प्रत्येक इकाई को प्रतिदर्श में चुने जाने का समान अवसर मिलता है, यादृच्छिक प्रतिचयन कहलाती है।

प्रश्न 22. समष्टि से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: अध्ययन के क्षेत्र की सभी संबंधित इकाइयों के पूर्ण समूह को समष्टि कहते हैं।

प्रश्न 23. प्रतिदर्श से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: समष्टि में से अध्ययन के लिए चुनी गई प्रतिनिधि इकाइयों के समूह को प्रतिदर्श कहते हैं।

प्रश्न 24. प्रतिदर्श सर्वेक्षण कब अधिक उपयोगी होता है?

उत्तर: प्रतिदर्श सर्वेक्षण विशेष रूप से तब उपयोगी होता है जब:

  • अध्ययन का क्षेत्र बहुत बड़ा हो।
  • समष्टि बहुत बड़ी या अनंत हो।
  • हर इकाई की जाँच करना समय और धन की दृष्टि से कठिन हो।
  • किसी इकाई की जाँच करने पर वह नष्ट हो जाती हो।

प्रश्न 25. आँकड़ों के संकलन में त्रुटि के प्रमुख स्रोत क्या हैं?

उत्तर:

  • मापन की त्रुटि
  • गणितीय त्रुटि
  • प्रश्न को गलत समझना
  • आँकड़ों को गलत दर्ज करना
  • उत्तर न मिलना

प्रश्न 26. जनगणना के प्रकाशित आँकड़े प्राथमिक होंगे या द्वितीयक?

उत्तर: यदि किसी अन्य संस्था द्वारा पहले एकत्र किए गए और प्रकाशित आँकड़ों का उपयोग किया जा रहा है, तो वे उपयोगकर्ता के लिए द्वितीयक आँकड़े होंगे।

प्रश्न 27. अप्रतिचयन त्रुटि का एक कारण बताइए।

उत्तर: उत्तरदाता या गणक की लापरवाही अथवा भूल अप्रतिचयन त्रुटि का एक कारण हो सकती है।

प्रश्न 28. प्रतिदर्श अभिनति क्या है?

उत्तर: जब प्रतिदर्श का चयन इस प्रकार किया जाता है कि उसमें किसी विशेष समूह को अनुचित रूप से अधिक या कम प्रतिनिधित्व मिले, तो इससे उत्पन्न पक्षपात को प्रतिदर्श अभिनति कहा जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. मापन अशुद्धि तथा दर्ज गलतियाँ क्या हैं?

उत्तर:

मापन अशुद्धि: माप लेने की प्रक्रिया, मापन यंत्र या मापन की शुद्धता में कमी के कारण उत्पन्न गलती को मापन अशुद्धि कहते हैं।

दर्ज गलती: प्राप्त सूचना को गलत स्थान पर लिखना, संख्या उलट देना या सूचना को अधूरा दर्ज करना दर्ज गलती कहलाता है। उदाहरण के लिए 13 के स्थान पर 31 लिख देना दर्ज गलती है।

प्रश्न 2. प्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधान तथा अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान में अंतर बताइए।

आधारप्रत्यक्ष वैयक्तिक अनुसंधानअप्रत्यक्ष मौखिक अनुसंधान
सूचना का स्रोतसूचना सीधे संबंधित व्यक्ति से प्राप्त की जाती है।सूचना किसी अन्य जानकार व्यक्ति से प्राप्त की जाती है।
संपर्कअनुसंधानकर्ता संबंधित व्यक्ति से प्रत्यक्ष संपर्क करता है।अनुसंधानकर्ता अप्रत्यक्ष रूप से सूचना प्राप्त करता है।
विश्वसनीयताउचित तरीके से किया जाए तो सूचना अधिक प्रत्यक्ष और उपयोगी हो सकती है।सूचना की विश्वसनीयता सूचना देने वाले व्यक्ति के ज्ञान पर निर्भर करती है।
उपयोगछोटे और सीमित क्षेत्र के अध्ययन में उपयोगी।जब प्रत्यक्ष सूचना प्राप्त करना कठिन हो, तब उपयोगी।

प्रश्न 3. अनुसंधानकर्ता, गणक तथा सूचक को परिभाषित कीजिए।

उत्तर:

  • अनुसंधानकर्ता: जो व्यक्ति अध्ययन या अनुसंधान की पूरी प्रक्रिया की योजना बनाता और उसका संचालन करता है, उसे अनुसंधानकर्ता कहते हैं।
  • गणक: जो व्यक्ति क्षेत्र में जाकर उत्तरदाताओं से जानकारी एकत्र करता है, उसे गणक कहते हैं।
  • सूचक/उत्तरदाता: जो व्यक्ति अनुसंधानकर्ता या गणक को आवश्यक जानकारी देता है, उसे सूचक या उत्तरदाता कहते हैं।

प्रश्न 4. संगणना विधि की अपेक्षा प्रतिचयन विधि के लाभ बताइए।

उत्तर:

  1. मितव्ययी: कम इकाइयों का अध्ययन होने के कारण समय और धन की बचत होती है।
  2. समय की बचत: पूरे समूह का अध्ययन नहीं करना पड़ता।
  3. सरल प्रबंधन: कम संख्या में गणकों और पर्यवेक्षकों की आवश्यकता होती है।
  4. बेहतर प्रशिक्षण: छोटे दल को अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जा सकता है।
  5. शीघ्र परिणाम: आँकड़ों का संकलन और विश्लेषण अपेक्षाकृत जल्दी किया जा सकता है।

प्रश्न 5. यादृच्छिक प्रतिचयन को परिभाषित कीजिए। यह मनमाने प्रतिचयन से किस प्रकार अलग है?

उत्तर: यादृच्छिक प्रतिचयन वह विधि है जिसमें समष्टि की प्रत्येक इकाई को प्रतिदर्श में चुने जाने का समान अवसर दिया जाता है।

आधारयादृच्छिक प्रतिचयनमनमाना प्रतिचयन
चयन का आधारसंयोग या निर्धारित यादृच्छिक प्रक्रियाअनुसंधानकर्ता की पसंद या सुविधा
समान अवसरप्रत्येक इकाई को समान अवसर देने का प्रयास किया जाता है।सभी इकाइयों को समान अवसर मिलना आवश्यक नहीं है।
पक्षपातव्यक्तिगत पक्षपात को कम किया जाता है।पक्षपात की संभावना अधिक रहती है।

प्रश्न 6. प्राथमिक आँकड़ों को एकत्र करने की प्रश्नावली विधि समझाइए।

उत्तर: प्रश्नावली विधि में अनुसंधानकर्ता अध्ययन के उद्देश्य से संबंधित प्रश्नों की एक सूची तैयार करता है। उत्तरदाता उन प्रश्नों के उत्तर देता है और इन्हीं उत्तरों से आवश्यक प्राथमिक आँकड़े प्राप्त होते हैं।

प्रश्नावली विधि के प्रमुख रूप हैं:

  1. डाक द्वारा प्रश्नावली: प्रश्नावली उत्तरदाता को भेजी जाती है और वह उसे भरकर वापस करता है।
  2. गणकों द्वारा प्रश्नावली: गणक उत्तरदाता के पास जाकर प्रश्न पूछता है और स्वयं प्रश्नावली भरता है।

प्रश्न 7. एक अच्छी प्रश्नावली के गुण बताइए।

उत्तर: एक अच्छी प्रश्नावली में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:

  • प्रश्न सरल और स्पष्ट हों।
  • प्रश्नों की संख्या उचित हो।
  • प्रश्नों का क्रम तार्किक हो।
  • अनावश्यक या दोहराए गए प्रश्न न हों।
  • प्रश्न अध्ययन के उद्देश्य से संबंधित हों।
  • उत्तरदाता की गरिमा और गोपनीयता का ध्यान रखा जाए।
  • प्रश्नावली का पूर्व परीक्षण किया जाए।

प्रश्न 8. द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं?

उत्तर: द्वितीयक आँकड़ों के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:

  1. सरकारी प्रकाशन
  2. जनगणना प्रकाशन
  3. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रकाशन
  4. अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं के प्रकाशन
  5. समितियों और आयोगों की रिपोर्ट
  6. व्यापारिक संस्थाओं की रिपोर्ट
  7. समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ
  8. अनुसंधान संस्थाओं के प्रकाशन
  9. इंटरनेट और वेबसाइट

प्रश्न 9. द्वितीयक आँकड़ों का प्रयोग करते समय किन सावधानियों की आवश्यकता होती है?

उत्तर: द्वितीयक आँकड़ों का उपयोग करते समय निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  1. उद्देश्य और क्षेत्र: आँकड़े जिस उद्देश्य के लिए एकत्र किए गए थे, वे हमारे वर्तमान अध्ययन के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
  2. शुद्धता: आँकड़ों की विश्वसनीयता और शुद्धता की जाँच करनी चाहिए।
  3. स्रोत की विश्वसनीयता: आँकड़े किस संस्था या अनुसंधानकर्ता ने किस विधि से एकत्र किए, यह देखना चाहिए।
  4. पर्याप्तता: उपलब्ध आँकड़े हमारे अध्ययन के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा डाक द्वारा प्रश्नावली भेजने के गुण एवं दोष बताइए।

उत्तर:

व्यक्तिगत साक्षात्कार के गुण

  • सूचना सीधे उत्तरदाता से प्राप्त होती है।
  • जटिल प्रश्नों को समझाकर पूछा जा सकता है।
  • आवश्यकतानुसार अतिरिक्त प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • सूचना अपेक्षाकृत स्पष्ट रूप में प्राप्त हो सकती है।
  • सीमित क्षेत्र के अध्ययन में यह उपयोगी है।

व्यक्तिगत साक्षात्कार के दोष

  • इसमें अधिक समय लग सकता है।
  • यात्रा और कर्मचारियों के कारण खर्च अधिक हो सकता है।
  • गणक या अनुसंधानकर्ता के व्यक्तिगत पक्षपात का प्रभाव पड़ सकता है।
  • प्रशिक्षित और कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।

डाक द्वारा प्रश्नावली के गुण

  • बड़े क्षेत्र में उपयोगी हो सकती है।
  • अपेक्षाकृत कम खर्च में सूचना प्राप्त की जा सकती है।
  • उत्तरदाता अपने समय के अनुसार उत्तर दे सकता है।
  • एक ही प्रश्नावली को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचाया जा सकता है।

डाक द्वारा प्रश्नावली के दोष

  • उत्तरदाता प्रश्न को गलत समझ सकता है।
  • प्रश्नावली वापस न मिलने की संभावना रहती है।
  • उत्तर की सत्यता की प्रत्यक्ष जाँच कठिन होती है।
  • कम शिक्षित उत्तरदाताओं के लिए यह विधि कठिन हो सकती है।

प्रश्न 2. प्राथमिक तथा द्वितीयक आँकड़ों में अंतर बताइए। द्वितीयक आँकड़ों के कम-से-कम तीन स्रोत लिखिए।

उत्तर:

आधारप्राथमिक आँकड़ेद्वितीयक आँकड़े
संग्रहअनुसंधानकर्ता स्वयं या अपने गणकों के माध्यम से एकत्र करता है।पहले किसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा एकत्र किए जा चुके होते हैं।
उद्देश्यविशेष वर्तमान अध्ययन के उद्देश्य से एकत्र किए जाते हैं।किसी अन्य उद्देश्य से पहले एकत्र किए गए आँकड़ों का पुनः उपयोग किया जाता है।
समयसंग्रह में अधिक समय लग सकता है।पहले से उपलब्ध होने के कारण समय बच सकता है।
खर्चसंग्रह में अधिक खर्च हो सकता है।अक्सर अपेक्षाकृत कम खर्च में प्राप्त हो जाते हैं।

द्वितीयक आँकड़ों के स्रोत:

  1. सरकारी प्रकाशन
  2. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रकाशन
  3. जनगणना रिपोर्ट
  4. अनुसंधान संस्थाओं के प्रकाशन
  5. समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ

प्रश्न 3. क्षेत्र सर्वेक्षण की योजना के मुख्य चरणों को समझाइए।

उत्तर: क्षेत्र सर्वेक्षण को सफल बनाने के लिए व्यवस्थित योजना आवश्यक होती है। इसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:

1. प्रश्नावली तैयार करना

सबसे पहले अध्ययन के उद्देश्य के अनुसार आवश्यक प्रश्नों की सूची तैयार की जाती है। प्रश्न सरल, स्पष्ट और उद्देश्य से संबंधित होने चाहिए।

2. पूछताछ की विधि तय करना

यह तय किया जाता है कि जानकारी डाक द्वारा प्रश्नावली, व्यक्तिगत साक्षात्कार या गणकों की सहायता से प्राप्त की जाएगी।

3. गणकों को प्रशिक्षण देना

गणकों को प्रश्नों, उत्तर दर्ज करने की प्रक्रिया और उत्तरदाताओं से व्यवहार करने का उचित प्रशिक्षण दिया जाता है।

4. पायलट सर्वेक्षण

बड़े स्तर पर सर्वेक्षण शुरू करने से पहले छोटे स्तर पर परीक्षण किया जाता है। इससे प्रश्नावली की कमियों का पता चलता है और आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं।

प्रश्न 4. जनगणना विधि द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण में किस प्रकार की त्रुटियाँ हो सकती हैं?

उत्तर: जनगणना में समष्टि की सभी इकाइयों का अध्ययन किया जाता है, फिर भी त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रमुख त्रुटियाँ हैं:

  1. मापन त्रुटि: आयु, आय या अन्य जानकारी का गलत मापन या अनुमान।
  2. प्रश्न को गलत समझना: गणक या उत्तरदाता द्वारा प्रश्न का गलत अर्थ समझ लेना।
  3. लेखन त्रुटि: सही जानकारी को गलत संख्या या कॉलम में दर्ज करना।
  4. उत्तर न मिलने की त्रुटि: उत्तरदाता द्वारा जानकारी न देना या उपलब्ध न होना।

प्रश्न 5. प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियों में अंतर बताइए।

उत्तर:

आधारप्रतिचयन त्रुटिअप्रतिचयन त्रुटि
अर्थप्रतिदर्श के आधार पर पूरी समष्टि का अनुमान लगाने से उत्पन्न अंतर।आँकड़ों के संग्रह, मापन, रिकॉर्डिंग या उत्तर न मिलने जैसी समस्याओं से उत्पन्न त्रुटि।
मुख्य कारणसमष्टि के स्थान पर प्रतिदर्श का अध्ययन करना।मापन, प्रश्नावली, गणक, उत्तरदाता या रिकॉर्डिंग में गलती।
कम करने का उपायउचित प्रतिचयन और पर्याप्त प्रतिदर्श आकार से कम की जा सकती है।प्रशिक्षण, बेहतर प्रश्नावली और सावधानी से कम की जा सकती है।

प्रश्न 6. निम्न दोषपूर्ण प्रश्नों के स्थान पर अच्छे प्रश्न बनाइए।

प्रश्न 1: आप एक महीने में पुस्तकों पर कितने रुपए खर्च करते हैं?

अच्छा प्रश्न: पिछले महीने आपने पुस्तकों की खरीद पर लगभग कितनी राशि खर्च की?

प्रश्न 2: आप अच्छा लगने के लिए अपनी आय का कितना प्रतिशत कपड़ों पर खर्च करते हैं?

अच्छा प्रश्न: आपकी मासिक आय का लगभग कितना प्रतिशत कपड़ों पर खर्च होता है?

प्रश्न 3: क्या आप नहीं सोचते कि धूम्रपान निषेध होना चाहिए?

अच्छा प्रश्न: क्या आप धूम्रपान पर प्रतिबंध के पक्ष में हैं?

प्रश्न 4: क्या आप कॉलेज के बाद नौकरी करेंगी या गृहिणी बनेंगी?

अच्छा प्रश्न: कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद आपकी वर्तमान पसंद क्या है?

  • नौकरी करना
  • व्यवसाय करना
  • आगे की पढ़ाई करना
  • अन्य

प्रश्न 5: आपको इस उच्च कोटि की चाय की सुगंध कैसी लगी?

अच्छा प्रश्न: आपको इस चाय की सुगंध कैसी लगी?

  • बहुत अच्छी
  • अच्छी
  • सामान्य
  • अच्छी नहीं

प्रश्न 7. एक आदर्श प्रश्नावली की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: एक आदर्श प्रश्नावली में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए:

  1. प्रश्नों की संख्या सीमित और आवश्यक हो।
  2. प्रश्न सरल और स्पष्ट भाषा में हों।
  3. प्रश्नों का उचित और तार्किक क्रम हो।
  4. प्रश्न अध्ययन के उद्देश्य से संबंधित हों।
  5. प्रश्नों में पक्षपातपूर्ण भाषा का प्रयोग न हो।
  6. व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी के संबंध में उचित सावधानी रखी जाए।
  7. उत्तर देने के लिए स्पष्ट विकल्प दिए जाएँ जहाँ आवश्यक हो।
  8. प्रश्नावली का पूर्व परीक्षण किया जाए।
  9. उत्तरदाता को आवश्यक निर्देश दिए जाएँ।
  10. प्राप्त जानकारी की गोपनीयता का ध्यान रखा जाए।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. यदि हम किसी आर्थिक या सामाजिक समस्या का अध्ययन करना चाहते हैं तो हमें क्या आवश्यकता होती है?

(a) रुपयों की आवश्यकता होती है

(b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की आवश्यकता होती है

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) कुछ चरों से संबंधित आँकड़ों की आवश्यकता होती है।

व्याख्या: आर्थिक या सामाजिक समस्या का अध्ययन करने के लिए संबंधित चर और उनसे जुड़े आँकड़ों की आवश्यकता होती है। इन्हीं आँकड़ों के आधार पर विश्लेषण और निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

प्रश्न 2. क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा संग्रहीत आँकड़े कहलाते हैं –

(a) प्राथमिक आँकड़े

(b) द्वितीयक आँकड़े

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) प्राथमिक आँकड़े।

व्याख्या: जब अनुसंधानकर्ता क्षेत्र में जाकर अपने अध्ययन के लिए पहली बार सूचना एकत्र करता है, तो प्राप्त आँकड़े प्राथमिक आँकड़े होते हैं।

प्रश्न 3. प्राथमिक आँकड़े अन्वेषणकर्ता द्वारा –

(a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं

(b) स्वयं एकत्र नहीं करवाए जाते हैं

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) स्वयं एकत्र किए जाते हैं।

व्याख्या: प्राथमिक आँकड़े वर्तमान अध्ययन के लिए पहली बार अनुसंधानकर्ता द्वारा स्वयं या उसके गणकों की सहायता से एकत्र किए जाते हैं।

प्रश्न 4. जो आँकड़े अन्वेषणकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र नहीं किए जाते, कहलाते हैं –

(a) मौलिक आँकड़े

(b) द्वितीयक आँकड़े

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) द्वितीयक आँकड़े।

व्याख्या: पहले से किसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा एकत्र किए गए आँकड़ों का पुनः उपयोग करने पर वे उपयोगकर्ता के लिए द्वितीयक आँकड़े कहलाते हैं।

प्रश्न 5. सभी प्रकाशित आँकड़े कहलाते हैं –

(a) द्वितीयक आँकड़े

(b) प्राथमिक आँकड़े

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) द्वितीयक आँकड़े।

व्याख्या: प्रकाशित आँकड़े सामान्यतः पहले किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा एकत्र किए जा चुके होते हैं। इसलिए किसी नए अनुसंधानकर्ता के लिए वे द्वितीयक आँकड़े होते हैं।

प्रश्न 6. जो वास्तविक आँकड़े एकत्र करने के क्षेत्र में जाता है, उसे कहते हैं –

(a) गणनाकार

(b) पर्यवेक्षक

(c) अन्वेषक

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) गणनाकार।

व्याख्या: गणनाकार क्षेत्र में जाकर उत्तरदाताओं से आवश्यक जानकारी एकत्र करता है और उसे निर्धारित प्रारूप में दर्ज करता है।

प्रश्न 7. उत्तरदाता प्रश्नावली के प्रश्नों का उत्तर देकर –

(a) वास्तविक आँकड़े प्रदान नहीं करता है

(b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) वास्तविक आँकड़े प्रदान करता है।

व्याख्या: उत्तरदाता प्रश्नावली में पूछे गए प्रश्नों के आधार पर आवश्यक सूचना उपलब्ध कराता है।

प्रश्न 8. जनगणना विधि में दिए गए क्षेत्र की –

(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं।

व्याख्या: जनगणना विधि में अध्ययन की समष्टि की प्रत्येक इकाई से जानकारी प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 9. प्रतिदर्शी विधि में दिए गए क्षेत्र की –

(a) सभी व्यक्तिगत इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

(b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) विशिष्ट इकाइयाँ शामिल की जाती हैं।

व्याख्या: प्रतिदर्श विधि में पूरी समष्टि के स्थान पर उसकी कुछ चुनी हुई प्रतिनिधि इकाइयों का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 10. क्षेत्रीय कार्य की योजना में आँकड़ों के संग्रह के लिए अपनाई जाती है –

(a) गणना विधि

(b) प्रतिदर्श विधि

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (c) (a) और (b) दोनों।

व्याख्या: क्षेत्रीय अध्ययन की आवश्यकता और उद्देश्य के अनुसार गणना विधि या प्रतिदर्श विधि में से उपयुक्त विधि अपनाई जा सकती है।

अध्याय का त्वरित पुनरावलोकन

अवधारणाअर्थ
प्राथमिक आँकड़ेअनुसंधानकर्ता द्वारा वर्तमान अध्ययन के लिए पहली बार एकत्र किए गए आँकड़े।
द्वितीयक आँकड़ेपहले से किसी अन्य व्यक्ति या संस्था द्वारा एकत्र किए गए आँकड़े।
समष्टिअध्ययन की सभी संबंधित इकाइयों का पूरा समूह।
प्रतिदर्शसमष्टि में से अध्ययन के लिए चुना गया प्रतिनिधि भाग।
जनगणनासमष्टि की प्रत्येक इकाई का अध्ययन।
प्रतिचयनसमष्टि में से कुछ इकाइयों का चयन करके अध्ययन करना।
प्रश्नावलीसूचना प्राप्त करने के लिए तैयार किए गए प्रश्नों की व्यवस्थित सूची।
यादृच्छिक प्रतिचयनऐसा प्रतिचयन जिसमें प्रत्येक इकाई को चुने जाने का समान अवसर मिलता है।
प्रतिचयन त्रुटिप्रतिदर्श के आधार पर समष्टि का अनुमान लगाने से उत्पन्न अंतर।
अप्रतिचयन त्रुटिमापन, रिकॉर्डिंग, प्रश्नावली, उत्तर न मिलने आदि से उत्पन्न त्रुटि।

निष्कर्ष

आँकड़ों का संग्रह सांख्यिकी का एक महत्वपूर्ण चरण है। सही आँकड़ों के बिना किसी आर्थिक या सामाजिक समस्या का सही विश्लेषण करना कठिन हो जाता है। इसलिए आँकड़े एकत्र करते समय उचित विधि, सही प्रश्नावली, उपयुक्त प्रतिदर्श और त्रुटियों से बचने की सावधानी आवश्यक है।

इस अध्याय में प्राथमिक एवं द्वितीयक आँकड़े, जनगणना एवं प्रतिचयन, प्रश्नावली, यादृच्छिक प्रतिचयन तथा प्रतिचयन और अप्रतिचयन त्रुटियों को अच्छी तरह समझना परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

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