Bihar Board Class 11 Economics Chapter 2 – भारतीय अर्थव्यवस्था (1950–1990) में स्वतंत्रता के बाद भारत द्वारा अपनाई गई आर्थिक विकास की रणनीति, पंचवर्षीय योजनाओं, भूमि सुधार, हरित क्रांति, औद्योगिक नीति, सार्वजनिक क्षेत्र, आत्मनिर्भरता और आयात प्रतिस्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।
स्वतंत्रता के समय भारत की अर्थव्यवस्था अनेक समस्याओं से जूझ रही थी। कृषि की उत्पादकता कम थी, उद्योगों का विकास सीमित था और देश को कई आवश्यक वस्तुओं के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। इन समस्याओं को दूर करने के लिए भारत ने आर्थिक नियोजन और मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग अपनाया।
इस अध्याय में पंचवर्षीय योजनाओं के चार प्रमुख उद्देश्य—संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और समानता को विशेष रूप से समझाया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि कृषि और उद्योग के विकास में सरकार ने किस प्रकार भूमिका निभाई।
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भारतीय अर्थव्यवस्था (1950–1990): संक्षिप्त परिचय
1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भारत के सामने आर्थिक विकास की बड़ी चुनौती थी। देश में गरीबी, बेरोजगारी, कृषि की कम उत्पादकता, औद्योगिक पिछड़ापन और क्षेत्रीय असमानता जैसी समस्याएँ थीं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने योजनाबद्ध आर्थिक विकास का रास्ता चुना।
भारत ने न तो पूरी तरह पूँजीवादी व्यवस्था अपनाई और न ही पूरी तरह समाजवादी व्यवस्था। इसके बजाय मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया गया, जिसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों में भूमिका दी गई।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. योजना की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: योजना से आशय निश्चित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पहले से तैयार की गई व्यवस्थित कार्य-रणनीति से है। इसमें देश के उपलब्ध संसाधनों का आकलन करके यह तय किया जाता है कि उनका उपयोग किस प्रकार किया जाए ताकि निर्धारित आर्थिक और सामाजिक उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके।
प्रश्न 2. भारत ने योजना को क्यों चुना?
उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारत की अर्थव्यवस्था पिछड़ी हुई थी। देश में गरीबी, बेरोजगारी, आय की असमानता, कृषि की कम उत्पादकता और औद्योगिक पिछड़ापन जैसी समस्याएँ थीं। इसलिए केवल बाजार की शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय सरकार ने योजनाबद्ध विकास का रास्ता चुना।
योजना अपनाने के प्रमुख कारण थे:
- आर्थिक विकास की गति को तेज करना।
- गरीबी और बेरोजगारी को कम करना।
- आय और संपत्ति की असमानता को घटाना।
- कृषि और उद्योग का विकास करना।
- आधारभूत संरचना का निर्माण करना।
- देश को आत्मनिर्भर बनाना।
प्रश्न 3. योजना का लक्ष्य क्या होना चाहिए?
उत्तर: भारतीय नियोजन के मुख्य लक्ष्य चार माने गए हैं:
- संवृद्धि – वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि।
- आधुनिकीकरण – नई तकनीक और आधुनिक सामाजिक दृष्टिकोण को अपनाना।
- आत्मनिर्भरता – विदेशी निर्भरता को कम करना।
- समानता – आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को कम करना।
इन सभी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उचित और प्राथमिकता के आधार पर उपयोग आवश्यक है।
प्रश्न 4. चमत्कारी बीज क्या होते हैं?
उत्तर: उच्च उपज देने वाली किस्मों के बीजों को सामान्यतः उच्च उपज किस्म (HYV) के बीज कहा जाता है। इन बीजों से पारंपरिक बीजों की तुलना में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। गेहूँ और चावल के उत्पादन में इनका विशेष महत्व रहा। इनके साथ सिंचाई, उर्वरक और अन्य आधुनिक कृषि साधनों की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 5. विक्रय अधिशेष क्या है?
उत्तर: किसान द्वारा अपने परिवार की आवश्यकताओं के लिए उपयोग करने के बाद कृषि उत्पादन का जो भाग बाजार में बेच दिया जाता है, उसे विक्रय अधिशेष या विपणित अधिशेष कहा जाता है।
प्रश्न 6. कृषि क्षेत्रक में लागू किए गए भूमि सुधारों की आवश्यकता और उनके प्रकारों की व्याख्या करें।
उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारतीय कृषि कई समस्याओं से प्रभावित थी। भूमि का असमान वितरण, छोटी और बिखरी हुई जोतें, पुरानी भू-धारण व्यवस्थाएँ तथा किसानों का शोषण कृषि विकास में बाधक थे। इसलिए कृषि उत्पादन बढ़ाने और सामाजिक न्याय स्थापित करने के लिए भूमि सुधार आवश्यक थे।
भूमि सुधार के प्रमुख प्रकार:
- मध्यस्थों या जमींदारों की समाप्ति: किसानों और सरकार के बीच मौजूद बिचौलियों को हटाकर किसानों का सरकार से सीधा संबंध स्थापित करने का प्रयास किया गया।
- जोतों की अधिकतम सीमा: किसी व्यक्ति के पास रखी जा सकने वाली कृषि भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई। अतिरिक्त भूमि को भूमिहीनों में बाँटने का उद्देश्य रखा गया।
- चकबंदी: बिखरी हुई भूमि को एक स्थान पर व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया ताकि कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक हो सके।
- काश्तकारी सुधार: किसानों को अधिक सुरक्षा देने और उनके शोषण को कम करने के लिए काश्तकारी व्यवस्था में सुधार किए गए।
प्रश्न 7. हरित क्रांति क्या है? इसे क्यों लागू किया गया और इसे किसानों को कैसे लाभ पहुँचा?
उत्तर: कृषि उत्पादन में आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग करके उत्पादन में तेजी से वृद्धि करने की प्रक्रिया को हरित क्रांति कहा जाता है।
भारत में हरित क्रांति का प्रमुख उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना और खाद्यान्न के लिए विदेशी निर्भरता कम करना था।
किसानों को प्रमुख लाभ:
- गेहूँ और चावल जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ी।
- कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।
- कई किसानों की कृषि आय में वृद्धि हुई।
- कृषि में आधुनिक तकनीक का प्रयोग बढ़ा।
- खाद्यान्न उपलब्धता में सुधार हुआ।
प्रश्न 8. योजना उद्देश्य के रूप में समानता के साथ संवृद्धि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: केवल उत्पादन और आय बढ़ जाना ही आर्थिक विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि देश की आय बढ़े लेकिन उसका लाभ केवल कुछ धनी लोगों तक सीमित रह जाए, तो समाज में असमानता बनी रहेगी।
इसलिए योजनाओं का उद्देश्य ऐसा विकास होना चाहिए जिसमें आर्थिक संवृद्धि का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे। गरीब लोगों को भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हों तथा आय और संपत्ति की असमानता कम हो। यही समानता के साथ संवृद्धि का अर्थ है।
प्रश्न 9. क्या रोजगार सृजन की दृष्टि से योजना उद्देश्य के रूप में आधुनिकीकरण विरोधाभास पैदा करता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि मशीनों और आधुनिक तकनीक के प्रयोग से श्रमिकों की आवश्यकता कम हो जाएगी और बेरोजगारी बढ़ सकती है। लेकिन व्यापक अर्थ में आधुनिकीकरण केवल मशीनों के प्रयोग तक सीमित नहीं है।
नई तकनीक से उत्पादन बढ़ता है, नए उद्योग विकसित होते हैं और नई प्रकार की नौकरियाँ पैदा होती हैं। उदाहरण के लिए आधुनिक उद्योगों के विकास से तकनीकी, प्रबंधन, परिवहन, बैंकिंग और सेवा क्षेत्र में नए रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं। इसलिए उचित योजना और प्रशिक्षण के साथ आधुनिकीकरण रोजगार के नए अवसर पैदा करने में सहायक हो सकता है।
प्रश्न 10. भारत जैसे विकासशील देश के रूप में आत्मनिर्भरता का पालन करना क्यों आवश्यक था?
उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारत अनेक आवश्यक वस्तुओं के लिए विदेशी देशों पर निर्भर था। खाद्यान्न, मशीनरी, पूँजीगत वस्तुओं और तकनीक के क्षेत्र में विदेशी निर्भरता अधिक थी। इसलिए भारत ने आत्मनिर्भरता को आर्थिक नियोजन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाया।
आत्मनिर्भरता का उद्देश्य था कि जिन वस्तुओं का उत्पादन देश में संभव है, उनका उत्पादन देश के अंदर बढ़ाया जाए और अनावश्यक विदेशी निर्भरता को कम किया जाए। इससे आर्थिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय स्वायत्तता को मजबूत करने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 11. किसी अर्थव्यवस्था का क्षेत्रक गठन क्यों होता है? क्या यह आवश्यक है कि अर्थव्यवस्था के GDP में सेवा क्षेत्रक को सबसे अधिक योगदान करना चाहिए? टिप्पणी करें।
उत्तर: किसी अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियों को सामान्यतः तीन क्षेत्रों में बाँटा जाता है:
- प्राथमिक क्षेत्र: कृषि, मछली पालन, वानिकी आदि।
- द्वितीयक क्षेत्र: विनिर्माण और उद्योग।
- तृतीयक क्षेत्र: बैंकिंग, परिवहन, संचार, शिक्षा आदि सेवाएँ।
आर्थिक विकास के साथ अर्थव्यवस्था की संरचना बदलती रहती है। विकास के प्रारंभिक चरण में कृषि का योगदान अधिक हो सकता है। बाद में उद्योग और उसके बाद सेवा क्षेत्र का योगदान बढ़ सकता है। इसलिए विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सेवा क्षेत्र का योगदान अधिक होना सामान्य बात है।
प्रश्न 12. योजना अवधि के दौरान औद्योगिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्रक को ही अग्रणी भूमिका क्यों सौंपी गई थी?
उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारत में निजी क्षेत्र के पास बड़े और आधारभूत उद्योगों में निवेश करने के लिए पर्याप्त पूँजी और क्षमता नहीं थी। कई उद्योगों में बहुत अधिक निवेश और लंबी अवधि की आवश्यकता होती थी। इसलिए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र को प्रमुख भूमिका दी।
इसके प्रमुख कारण थे:
- भारी निवेश वाले उद्योगों का विकास।
- आधारभूत संरचना का निर्माण।
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना।
- आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उद्योगों का विकास।
- सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता देना।
प्रश्न 13. इस कथन की व्याख्या करें—“हरित क्रांति ने सरकार को खाद्यान्न के प्रति प्रापण द्वारा विशाल सुरक्षित भण्डार बनाने के योग्य बनाया ताकि वह कमी के समय उसका उपयोग कर सके।”
उत्तर: हरित क्रांति के बाद खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। किसानों के पास अपनी आवश्यकताओं से अधिक अनाज उपलब्ध होने पर उसका एक भाग बाजार में बेचने की क्षमता बढ़ी।
सरकार किसानों से निर्धारित समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न खरीदकर उसका भंडारण कर सकती थी। इस प्रकार बफर स्टॉक तैयार हुआ। खाद्यान्न की कमी, प्राकृतिक आपदा या कीमतों में असामान्य वृद्धि जैसी परिस्थितियों में इस भंडार का उपयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 14. भारत में कृषि-अनुदान के पक्ष और विपक्ष में तर्क दें।
उत्तर: कृषि-अनुदान से आशय किसानों को सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता से है। इसके पक्ष और विपक्ष में दोनों प्रकार के तर्क दिए जाते हैं।
कृषि-अनुदान के पक्ष में तर्क:
- छोटे और गरीब किसान महँगे कृषि इनपुट खरीद सकते हैं।
- किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने में सहायता मिलती है।
- कृषि जोखिम को कम करने में सहायता मिलती है।
- कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
कृषि-अनुदान के विपक्ष में तर्क:
- सरकार के वित्त पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
- अनुदान का लाभ हमेशा सबसे जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुँचता।
- कुछ क्षेत्रों और बड़े किसानों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिल सकता है।
- लंबे समय तक अत्यधिक अनुदान से संसाधनों के कुशल उपयोग में समस्या हो सकती है।
प्रश्न 15. हरित क्रांति के बाद भी 1990 तक हमारी 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि क्षेत्रक में ही क्यों लगी रही?
उत्तर: 1950 से 1990 के बीच कृषि का GDP में योगदान घटा, लेकिन कृषि पर निर्भर लोगों का अनुपात उतनी तेजी से कम नहीं हुआ। इसका प्रमुख कारण यह था कि उद्योग और सेवा क्षेत्र कृषि से निकलने वाले श्रमिकों को पर्याप्त संख्या में रोजगार नहीं दे पाए।
इस कारण 1990 तक लगभग 65 प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक संरचना में बदलाव के लिए केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी पर्याप्त रोजगार अवसर पैदा करना आवश्यक है।
प्रश्न 16. सार्वजनिक क्षेत्रक के अनेक उपक्रम भारी हानि उठा रहे थे। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों की उपयोगिता पर चर्चा करें।
उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ उपक्रमों को आर्थिक हानि हुई, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र का मूल्यांकन केवल लाभ के आधार पर करना उचित नहीं है। इसका उद्देश्य कई बार सामाजिक और राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करना भी होता है।
सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख उपयोगिताएँ हैं:
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना।
- आधारभूत संरचना विकसित करना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित उद्योगों को विकसित करना।
- आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकना।
- रोजगार उपलब्ध कराना।
- सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना।
प्रश्न 17. आयात प्रतिस्थापन किस प्रकार घरेलू उद्योगों को संरक्षण प्रदान करता है?
उत्तर: आयात प्रतिस्थापन का अर्थ है ऐसी वस्तुओं का देश में उत्पादन बढ़ाना जिन्हें पहले विदेशों से आयात किया जाता था। इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतियोगिता से बचाकर विकसित होने का अवसर देना था।
घरेलू उद्योगों को मुख्य रूप से दो तरीकों से संरक्षण दिया गया:
- प्रशुल्क (Tariff): आयातित वस्तुओं पर कर लगाया जाता है, जिससे वे महँगी हो जाती हैं और घरेलू वस्तुओं को प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलता है।
- कोटा (Quota): किसी वस्तु के आयात की मात्रा पर सीमा निर्धारित की जाती है।
प्रश्न 18. औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 में निजी क्षेत्रक का नियमन क्यों और कैसे किया गया था?
उत्तर: औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 का उद्देश्य भारत में औद्योगिक विकास को योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ाना और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों की भूमिकाएँ निर्धारित करना था।
उद्योगों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया। कुछ उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित किया गया, कुछ में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख भूमिका रखी गई और अन्य उद्योगों में निजी क्षेत्र को कार्य करने की अनुमति दी गई।
निजी क्षेत्र के विस्तार और नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को औद्योगिक लाइसेंसिंग के माध्यम से नियंत्रित किया गया। इसका उद्देश्य औद्योगिक विकास को योजनाओं के अनुरूप रखना, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना और आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकना था।
प्रश्न 19. निम्नलिखित युग्मों को सुमेलित कीजिए।
| स्तम्भ ‘A’ | स्तम्भ ‘B’ |
|---|---|
| 1. प्रधानमंत्री | (क) अधिक अनुपात में उत्पादन देने वाले बीज |
| 2. सकल घरेलू उत्पाद | (ख) आयात की जा सकने वाली मात्रा |
| 3. कोटा | (ग) योजना आयोग के अध्यक्ष |
| 4. भूमि सुधार | (घ) किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में उत्पादित की गई सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य |
| 5. उच्च उत्पादकता वाले बीज | (ङ) कृषि क्षेत्र की उत्पादकता वृद्धि के लिए किए गए सुधार |
| 6. सहायिकी | (च) उत्पादक कार्यों के लिए सरकार द्वारा दी गई मौद्रिक सहायता |
उत्तर:
| क्रमांक | सही मिलान | अर्थ |
|---|---|---|
| 1. प्रधानमंत्री | (ग) | योजना आयोग के अध्यक्ष |
| 2. सकल घरेलू उत्पाद | (घ) | किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में उत्पादित की गई सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य |
| 3. कोटा | (ख) | आयात की जा सकने वाली मात्रा |
| 4. भूमि सुधार | (ङ) | कृषि क्षेत्र की उत्पादकता वृद्धि के लिए किए गए सुधार |
| 5. उच्च उत्पादकता वाले बीज | (क) | अधिक अनुपात में उत्पादन देने वाले बीज |
| 6. सहायिकी | (च) | उत्पादक कार्यों के लिए सरकार द्वारा दी गई मौद्रिक सहायता |
सही मिलान: 1–(ग), 2–(घ), 3–(ख), 4–(ङ), 5–(क), 6–(च)
अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था मुख्यतः कितने प्रकार की हैं?
उत्तर: अर्थव्यवस्था मुख्यतः तीन प्रकार की मानी जाती हैं—पूँजीवादी, समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्था।
प्रश्न 2. उस अर्थव्यवस्था का नाम लिखिए जो पूँजीवादी और समाजवादी दोनों की विशेषताएँ रखती है।
उत्तर: मिश्रित अर्थव्यवस्था।
प्रश्न 3. बाजार अर्थव्यवस्था का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर: बाजार अर्थव्यवस्था को सामान्यतः पूँजीवादी अर्थव्यवस्था कहा जाता है।
प्रश्न 4. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में किन उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है?
उत्तर: ऐसी वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है जिनकी बाजार में माँग हो और जिन्हें लाभ के उद्देश्य से बेचा जा सके।
प्रश्न 5. समाजवादी अर्थव्यवस्था से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें उत्पादन के प्रमुख साधनों और आर्थिक निर्णयों पर सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा उत्पादन का उद्देश्य सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है।
प्रश्न 6. मिश्रित अर्थव्यवस्था से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र दोनों साथ-साथ कार्य करते हैं तथा सरकार और बाजार दोनों आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 7. योजना आयोग की स्थापना कब की गई?
उत्तर: योजना आयोग की स्थापना वर्ष 1950 में की गई थी।
प्रश्न 8. आर्थिक नियोजन क्या है?
उत्तर: उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग करके निश्चित समय में निर्धारित आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रक्रिया आर्थिक नियोजन कहलाती है।
प्रश्न 9. भारतीय योजना की अवधि क्या है?
उत्तर: भारतीय पंचवर्षीय योजना की सामान्य अवधि पाँच वर्ष रही है।
प्रश्न 10. श्रम-प्रधान तकनीक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जिस उत्पादन तकनीक में पूँजी की तुलना में श्रम का अधिक उपयोग किया जाता है, उसे श्रम-प्रधान तकनीक कहते हैं।
प्रश्न 11. जिस तकनीक में श्रम की अपेक्षा पूँजी का अधिक प्रयोग किया जाता है, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर: पूँजी-प्रधान तकनीक।
प्रश्न 12. भूमि सुधार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: कृषि भूमि के स्वामित्व, वितरण और भू-धारण व्यवस्था में सुधार लाने के लिए किए गए संस्थागत परिवर्तनों को भूमि सुधार कहते हैं।
प्रश्न 13. भूमि सीमा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसी व्यक्ति या परिवार द्वारा रखी जा सकने वाली कृषि भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित करना भूमि सीमा कहलाता है।
प्रश्न 14. भूमि सीमा का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: इसका उद्देश्य भूमि के कुछ लोगों के हाथों में अत्यधिक केंद्रीकरण को कम करना और अतिरिक्त भूमि का पुनर्वितरण करना था।
प्रश्न 15. भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग क्यों अपनाया?
उत्तर: भारत ने आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय और सार्वजनिक हित को बनाए रखने के लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग अपनाया।
प्रश्न 16. पंचवर्षीय योजना बनाने में योगदान देने वाले एक प्रमुख विचारक का नाम लिखिए।
उत्तर: प्रो. पी. सी. महालनोबिस।
प्रश्न 17. पहली पंचवर्षीय योजना कब आरम्भ हुई?
उत्तर: पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 से आरम्भ हुई।
प्रश्न 18. पहली पंचवर्षीय योजना में किस क्षेत्र को अधिक महत्व दिया गया?
उत्तर: कृषि क्षेत्र को अधिक महत्व दिया गया।
प्रश्न 19. पंचवर्षीय योजनाओं में औद्योगिक विकास को क्यों महत्व दिया गया?
उत्तर: औद्योगिक विकास से रोजगार, उत्पादन, आधुनिकीकरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
प्रश्न 20. चकबंदी से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसान की अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई भूमि को व्यवस्थित करके एक या कुछ समेकित भू-खंडों में बदलने की प्रक्रिया चकबंदी कहलाती है।
प्रश्न 21. चकबंदी से क्या लाभ है?
उत्तर: इससे खेती करना आसान होता है, कृषि साधनों का बेहतर उपयोग होता है और उत्पादन लागत कम करने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 22. भूमि सुधार से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: भूमि के स्वामित्व और वितरण में सुधार करके कृषि व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और उत्पादक बनाना भूमि सुधार कहलाता है।
प्रश्न 23. भूमि सुधार क्यों अपनाया गया?
उत्तर: कृषि उत्पादन बढ़ाने, भूमि के असमान वितरण को कम करने और सामाजिक न्याय स्थापित करने के लिए भूमि सुधार अपनाया गया।
प्रश्न 24. पंचवर्षीय योजनाओं के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर: पंचवर्षीय योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और न्याय/समानता थे।
प्रश्न 25. GDP का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: GDP का पूरा नाम Gross Domestic Product (सकल घरेलू उत्पाद) है।
प्रश्न 26. भारत के लिए किस प्रकार की अर्थव्यवस्था उपयुक्त समझी गई?
उत्तर: मिश्रित अर्थव्यवस्था को भारत के लिए उपयुक्त माना गया।
प्रश्न 27. जवाहरलाल नेहरू पूर्व सोवियत संघ की समाजवादी व्यवस्था को पूरी तरह क्यों नहीं अपनाना चाहते थे?
उत्तर: भारत लोकतांत्रिक व्यवस्था वाला देश था। इसलिए ऐसी व्यवस्था उपयुक्त मानी गई जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के साथ निजी क्षेत्र को भी स्थान मिले।
प्रश्न 28. सकल घरेलू उत्पाद क्या है?
उत्तर: किसी देश की सीमा के भीतर एक निश्चित अवधि, सामान्यतः एक वर्ष, में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं।
प्रश्न 29. आधुनिकीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर: नई तकनीक, आधुनिक उत्पादन विधियों और आधुनिक सामाजिक दृष्टिकोण को अपनाने की प्रक्रिया आधुनिकीकरण कहलाती है।
प्रश्न 30. प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं में किस उद्देश्य को महत्व दिया गया?
उत्तर: आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण उद्देश्य माना गया।
प्रश्न 31. आत्मनिर्भरता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: देश में जिन वस्तुओं का उत्पादन संभव हो, उनके लिए अनावश्यक रूप से विदेशों पर निर्भर न रहना आत्मनिर्भरता कहलाता है।
प्रश्न 32. औद्योगिक नीति को कार्य रूप कौन-सी नीति प्रदान करती है?
उत्तर: औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति।
प्रश्न 33. हरित क्रांति से खाद्यान्नों की कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: खाद्यान्न उत्पादन बढ़ने से उनकी उपलब्धता बेहतर हुई और कीमतों पर नियंत्रण रखने में सहायता मिली।
प्रश्न 34. हरित क्रांति से सरकार को क्या लाभ हुआ?
उत्तर: अधिक खाद्यान्न उपलब्ध होने से सरकार के लिए खाद्यान्न खरीदकर सुरक्षित भंडार तैयार करना आसान हुआ।
प्रश्न 35. हरित क्रांति के विषय में दो भ्रांतियाँ क्या थीं?
उत्तर: एक आशंका थी कि इसका लाभ मुख्यतः बड़े किसानों को मिलेगा और दूसरी आशंका उन्नत बीजों से जुड़ी फसलों पर कीटों के अधिक प्रकोप की थी।
प्रश्न 36. एक अर्थव्यवस्था की प्रमुख समस्याएँ कौन-सी हैं?
उत्तर: क्या उत्पादन किया जाए, कैसे उत्पादन किया जाए और किसके लिए उत्पादन किया जाए—ये तीन प्रमुख आर्थिक समस्याएँ हैं।
प्रश्न 37. योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष कौन होता था?
उत्तर: भारत का प्रधानमंत्री योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष होता था।
प्रश्न 38. वास्तविक रूप में भारत में योजना काल कब आरम्भ हुआ?
उत्तर: दूसरी पंचवर्षीय योजना से भारतीय नियोजन को अधिक स्पष्ट और औद्योगिक विकास केंद्रित रूप मिला।
प्रश्न 39. ब्रिटिश शासन काल में कृषि किस अवस्था में थी?
उत्तर: कृषि की उत्पादकता कम थी और विकास की गति बहुत धीमी थी। कृषि में संरचनात्मक समस्याएँ और असमानताएँ भी मौजूद थीं।
प्रश्न 40. कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए क्या प्रयास किए गए?
उत्तर: भूमि सुधार, सिंचाई विस्तार, उन्नत बीजों का प्रयोग, उर्वरकों का उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया गया।
प्रश्न 41. जमींदारी उन्मूलन से होने वाले दो लाभ लिखिए।
उत्तर: इससे किसानों का शोषण कम हुआ और कई किसानों का सरकार से सीधा संबंध स्थापित हुआ। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को अधिक प्रोत्साहन मिला।
प्रश्न 42. जमींदारी उन्मूलन से क्या न्याय का उद्देश्य पूर्णतः प्राप्त हो गया?
उत्तर: नहीं। जमींदारी उन्मूलन महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन भूमि का समान वितरण पूरी तरह नहीं हो सका।
प्रश्न 43. दूसरी योजना के आरम्भ में विकास पद्धति तैयार करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
उत्तर: प्रो. पी. सी. महालनोबिस को।
प्रश्न 44. योजना की विकास पद्धति में औद्योगीकरण पर बल क्यों दिया गया?
उत्तर: औद्योगीकरण से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ती है तथा गैर-कृषि रोजगार के अवसरों का विस्तार होता है।
प्रश्न 45. योजना काल में ग्रामीण क्षेत्र में आय की विषमताओं के बढ़ने का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर: कृषि विकास की नई तकनीकों और सुविधाओं का लाभ बड़े किसानों को अपेक्षाकृत अधिक मिला, जबकि छोटे किसानों को सीमित लाभ मिला।
प्रश्न 46. किस अर्थव्यवस्था में लोगों की आवश्यकतानुसार वस्तुओं का वितरण किया जाता है?
उत्तर: समाजवादी अर्थव्यवस्था में।
प्रश्न 47. औद्योगिक विकास का महत्व क्या है?
उत्तर: औद्योगिक विकास से उत्पादन, रोजगार, मशीनरी, तकनीक और आधारभूत संरचना का विस्तार होता है तथा अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण को गति मिलती है।
प्रश्न 48. औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 का क्या उद्देश्य था?
उत्तर: औद्योगिक विकास को योजनाबद्ध बनाना, सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका तय करना और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल था।
प्रश्न 49. औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ऐसी व्यवस्था जिसमें उद्योग की स्थापना, विस्तार या उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होता था।
प्रश्न 50. ब्रिटिश सरकार ने भारत के विदेशी व्यापार को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर: औपनिवेशिक नीतियों ने भारत के उत्पादन, व्यापार और शुल्क व्यवस्था को इस प्रकार प्रभावित किया कि भारत मुख्यतः कच्चे माल और प्राथमिक वस्तुओं का निर्यातक तथा निर्मित वस्तुओं का आयातक बन गया।
प्रश्न 51. ब्रिटिश नीतियों के परिणामस्वरूप भारत किन वस्तुओं का निर्यातक बना?
उत्तर: भारत मुख्यतः कच्चे रेशम, सूत, ऊन, चीनी, पटसन आदि प्राथमिक वस्तुओं के निर्यात से जुड़ गया था।
प्रश्न 52. उपनिवेश शासन में कृषि की गतिहीनता को किस क्रांति ने तोड़ा?
उत्तर: हरित क्रांति ने कृषि उत्पादन में तकनीकी परिवर्तन और तीव्र वृद्धि को बढ़ावा दिया।
प्रश्न 53. हरित क्रांति के प्रथम चरण की समयावधि लिखें।
उत्तर: इसका पहला चरण मध्य-1960 के दशक से लगभग 1970 तक माना जाता है। इस चरण में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में HYV बीजों का विशेष प्रयोग हुआ।
प्रश्न 54. कोटा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसी वस्तु की आयात की जाने वाली मात्रा पर निर्धारित सीमा को कोटा कहते हैं।
प्रश्न 55. 1990-91 में GDP में औद्योगिक क्षेत्र का कितना योगदान था?
उत्तर: 1990-91 में औद्योगिक क्षेत्र का GDP में योगदान लगभग 24.6% था।
प्रश्न 56. उन्नत किस्म के बीज से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ऐसे बीज जो उचित कृषि परिस्थितियों में पारंपरिक बीजों की तुलना में अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखते हैं, उन्नत किस्म के बीज कहलाते हैं।
प्रश्न 57. जोतों की अधिकतम सीमा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: एक व्यक्ति या परिवार द्वारा रखी जा सकने वाली कृषि भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित करना जोतों की अधिकतम सीमा कहलाता है।
प्रश्न 58. बाजार में कीमतों का निर्धारण किसके द्वारा होता है?
उत्तर: बाजार में कीमतें मुख्यतः माँग और पूर्ति की शक्तियों से प्रभावित होती हैं।
प्रश्न 59. कीमतें किस बात की संकेतक हैं?
उत्तर: कीमतें वस्तुओं की सापेक्ष कमी या उपलब्धता और बाजार की माँग की स्थिति के बारे में संकेत देती हैं।
प्रश्न 60. वस्तुओं की उपलब्धता में कमी कीमतों में क्या परिवर्तन लाती है?
उत्तर: सामान्य परिस्थितियों में उपलब्धता कम होने पर कीमतों में वृद्धि होती है।
प्रश्न 61. कीमतों में वृद्धि का वस्तुओं के उपभोग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: कीमत बढ़ने पर उपभोक्ता सामान्यतः वस्तु का अधिक सावधानी और कुशलता से उपयोग करते हैं तथा अनावश्यक खपत कम करते हैं।
प्रश्न 62. लोग वस्तुओं का कुशलता से प्रयोग करने को कब प्रेरित होते हैं?
उत्तर: जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है या वह सीमित मात्रा में उपलब्ध होती है, तब लोग उसका अधिक सावधानी से उपयोग करने के लिए प्रेरित होते हैं।
प्रश्न 63. यदि विद्युत निःशुल्क कर दी जाए तो उसका प्रयोग किस प्रकार किया जाएगा?
उत्तर: यदि बिजली पूरी तरह निःशुल्क हो और उसके उपयोग पर कोई सीमा न हो, तो उसके अपव्यय की संभावना बढ़ सकती है।
प्रश्न 64. यदि किसानों को जल की आपूर्ति निःशुल्क की जाए तो वे जल का प्रयोग किस प्रकार करेंगे?
उत्तर: ऐसी स्थिति में जल की वास्तविक लागत का ध्यान कम रहने के कारण पानी के अत्यधिक या कम कुशल उपयोग की संभावना बढ़ सकती है।
प्रश्न 65. ब्रिटिश शासन में भारत किन-किन वस्तुओं का आयात करता था?
उत्तर: भारत ब्रिटेन से विभिन्न निर्मित वस्तुओं, विशेषकर कपड़ा और अन्य औद्योगिक वस्तुओं का आयात करता था।
प्रश्न 66. HYV बीजों का प्रयोग किन राज्यों में किया गया?
उत्तर: HYV बीजों का प्रारंभिक व्यापक प्रयोग पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में हुआ। बाद में इसका विस्तार अन्य राज्यों में भी हुआ।
प्रश्न 67. हरित क्रांति के दूसरे चरण का कार्यकाल लिखें।
उत्तर: हरित क्रांति के दूसरे चरण का विस्तार लगभग 1970 से 1980 के दशक में माना जाता है।
प्रश्न 68. विपणित अधिशेष किसे कहते हैं?
उत्तर: कृषि उत्पादन का वह भाग जो किसान अपनी आवश्यकताओं से अधिक होने पर बाजार में बेचता है, विपणित अधिशेष कहलाता है।
प्रश्न 69. उद्योग के दो लाभ लिखिए।
उत्तर: उद्योग रोजगार के अवसर पैदा करता है और आधुनिकीकरण तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
प्रश्न 70. औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 ने उद्योगों को कितनी श्रेणियों में बाँटा?
उत्तर: उद्योगों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया था। पहली श्रेणी में प्रमुख रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित उद्योग शामिल थे।
प्रश्न 71. औद्योगिक नीति 1956 में द्वितीय श्रेणी में कौन-कौन से उद्योग रखे गए थे?
उत्तर: दूसरी श्रेणी में ऐसे महत्वपूर्ण उद्योग रखे गए जिनके विकास में सरकार की प्रमुख भूमिका होनी थी और जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार महत्वपूर्ण था।
प्रश्न 72. आयात प्रतिस्थापन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जिन वस्तुओं का आयात किया जाता है, उनका देश के अंदर उत्पादन करके आयात पर निर्भरता कम करना आयात प्रतिस्थापन कहलाता है।
प्रश्न 73. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें उत्पादन और वितरण के निर्णयों में निजी स्वामित्व, बाजार शक्तियों, लाभ और क्रयशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, पूँजीवादी अर्थव्यवस्था कहलाती है।
प्रश्न 74. औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 में तृतीय श्रेणी में कौन-कौन से उद्योग रखे गए थे?
उत्तर: तीसरी श्रेणी में मुख्यतः वे उद्योग शामिल थे जिन्हें निजी क्षेत्र के लिए खुला रखा गया था। निजी क्षेत्र इन उद्योगों का विकास कर सकता था, जबकि आवश्यकता पड़ने पर राज्य भी उद्योग स्थापित कर सकता था।
प्रश्न 75. 1990 में देश की जनसंख्या का कितना प्रतिशत भाग कृषि में कार्यरत था?
उत्तर: लगभग 65% कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी।
प्रश्न 76. GDP में कृषि का योगदान घटने के बावजूद कृषि पर निर्भर जनसंख्या में कमी क्यों नहीं आई?
उत्तर: उद्योग और सेवा क्षेत्र पर्याप्त गति से नए रोजगार नहीं पैदा कर सके। इसलिए कृषि से अतिरिक्त श्रम को अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित होने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
प्रश्न 77. निर्धन राष्ट्र कैसे उन्नति कर सकते हैं?
उत्तर: निर्धन राष्ट्र कृषि के साथ उद्योग, आधारभूत संरचना, शिक्षा, कौशल और तकनीक के विकास पर ध्यान देकर आर्थिक उन्नति कर सकते हैं।
प्रश्न 78. पहली पंचवर्षीय योजना को छोड़कर अन्य योजनाओं में औद्योगिक विकास को क्यों अधिक महत्व दिया गया?
उत्तर: उद्योगों से रोजगार, उत्पादन, तकनीकी विकास और आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलता है। इसलिए बाद की योजनाओं में औद्योगिक विकास को अधिक महत्व दिया गया।
प्रश्न 79. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की निरंतर प्रक्रिया कब से चली?
उत्तर: पहली पंचवर्षीय योजना के साथ 1951 से योजनाबद्ध आर्थिक विकास की प्रक्रिया शुरू हुई।
प्रश्न 80. आर्थिक विकास के उच्चतर स्तर पर किस क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक होता है?
उत्तर: आर्थिक विकास के उच्चतर स्तर पर सामान्यतः तृतीयक या सेवा क्षेत्र का योगदान अधिक हो जाता है।
प्रश्न 81. 1990 में GDP में सेवा क्षेत्र का योगदान कितना था?
उत्तर: 1990 में सेवा क्षेत्र का योगदान लगभग 40.59% बताया गया है।
प्रश्न 82. किस तकनीक ने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता की?
उत्तर: हरित क्रांति के अंतर्गत अपनाई गई आधुनिक कृषि तकनीक ने खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 83. वस्तु की कीमत में वृद्धि होने से उसके उपयोग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: सामान्यतः कीमत बढ़ने पर उपभोक्ता उस वस्तु का उपयोग अधिक सावधानी से करते हैं और अनावश्यक खपत कम करने का प्रयास करते हैं।
प्रश्न 84. व्यावसायिक संरचना तथा आर्थिक विकास में क्या संबंध है?
उत्तर: आर्थिक विकास के साथ अर्थव्यवस्था की व्यावसायिक संरचना में परिवर्तन आता है। सामान्यतः विकास के साथ कृषि पर निर्भरता घटती है और उद्योग तथा सेवा क्षेत्र का महत्व बढ़ता है।
प्रश्न 85. स्वतंत्रता के बाद भारत में पंचवर्षीय योजनाओं का क्रम क्यों शुरू किया गया?
उत्तर: देश की गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक पिछड़ेपन और संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने तथा उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग करने के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ शुरू की गईं।
प्रश्न 86. औद्योगिक नीति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: उद्योगों की स्थापना, स्वामित्व, विकास, निवेश, उत्पादन और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों की भूमिका से संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों को औद्योगिक नीति कहते हैं।
प्रश्न 87. आर्थिक संवृद्धि को परिभाषित करें।
उत्तर: किसी अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक वास्तविक उत्पादन या प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में वृद्धि को आर्थिक संवृद्धि कहा जाता है।
प्रश्न 88. आर्थिक संवृद्धि को किन दो तरीकों से समझा जा सकता है?
उत्तर:
- कुल GDP में वृद्धि।
- प्रति व्यक्ति GDP में वृद्धि।
प्रश्न 89. देश के GDP में योगदान देने वाले क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर: प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र।
प्रश्न 90. प्राथमिक क्षेत्र में किन आर्थिक क्रियाओं को सम्मिलित किया जाता है?
उत्तर: कृषि, मछली पालन, वानिकी और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित अन्य गतिविधियाँ प्राथमिक क्षेत्र में शामिल होती हैं।
प्रश्न 91. द्वितीयक क्षेत्र में कौन-कौन से व्यवसाय आते हैं?
उत्तर: विनिर्माण और प्रसंस्करण से जुड़े व्यवसाय द्वितीयक क्षेत्र में आते हैं। जैसे कपड़ा निर्माण, चीनी उद्योग और मशीन निर्माण।
प्रश्न 92. तृतीयक क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर: बैंकिंग, परिवहन, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसी सेवाओं से संबंधित आर्थिक गतिविधियाँ तृतीयक या सेवा क्षेत्र में आती हैं।
प्रश्न 93. आर्थिक संवृद्धि का अच्छा संकेतक कौन है?
उत्तर: वास्तविक GDP में निरंतर वृद्धि आर्थिक संवृद्धि का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
प्रश्न 94. प्रति व्यक्ति GDP की गणना कैसे की जाती है?
उत्तर:
प्रति व्यक्ति GDP = कुल GDP ÷ कुल जनसंख्या
प्रश्न 95. आर्थिक विकास से GDP में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान में क्या परिवर्तन आते हैं?
उत्तर: आर्थिक विकास के साथ सामान्यतः GDP में कृषि का हिस्सा घटता है तथा विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों का हिस्सा बढ़ता है।
प्रश्न 96. संरचनात्मक परिवर्तन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों—कृषि, उद्योग और सेवा—के उत्पादन तथा रोजगार में आने वाले परिवर्तन को संरचनात्मक परिवर्तन कहा जाता है।
प्रश्न 97. स्वतंत्रता के समय प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर थी। औद्योगिक क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा था और आधुनिक सेवा क्षेत्र भी सीमित था।
प्रश्न 98. भूमि सुधार की दिशा में कौन-कौन से महत्वपूर्ण कदम उठाए गए?
उत्तर:
- मध्यस्थों और जमींदारी व्यवस्था का उन्मूलन।
- जोतों की अधिकतम सीमा निर्धारित करना।
- चकबंदी।
प्रश्न 99. किन राज्यों में भूमि सुधारों ने सफलता प्राप्त की और क्यों?
उत्तर: केरल और पश्चिम बंगाल में भूमि सुधारों को अपेक्षाकृत अधिक सफलता मिली। वहाँ भूमि सुधारों को लागू करने के लिए राज्य सरकारों की सक्रिय भूमिका और राजनीतिक प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण रही।
लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था और समाजवादी अर्थव्यवस्था में कोई दो अंतर बताइए।
उत्तर:
| आधार | पूँजीवादी अर्थव्यवस्था | समाजवादी अर्थव्यवस्था |
|---|---|---|
| स्वामित्व | निजी स्वामित्व की प्रमुख भूमिका | सार्वजनिक/सरकारी स्वामित्व की प्रमुख भूमिका |
| निर्णय | बाजार की शक्तियाँ महत्वपूर्ण | सरकार/केंद्रीय योजना की महत्वपूर्ण भूमिका |
| वितरण | क्रयशक्ति और बाजार माँग महत्वपूर्ण | सामाजिक आवश्यकता और योजनाबद्ध वितरण पर जोर |
प्रश्न 2. पूँजीवाद किन उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन करता है? वह किस उत्पादन विधि को अपनाता है और किस आधार पर वस्तुओं तथा सेवाओं का वितरण करता है?
उत्तर: पूँजीवादी व्यवस्था में सामान्यतः उन वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन अधिक होता है जिनकी बाजार में माँग और लाभ की संभावना होती है। उत्पादन की ऐसी तकनीक अपनाई जाती है जो लागत और उपलब्ध संसाधनों की दृष्टि से उपयुक्त हो। वस्तुओं और सेवाओं का वितरण मुख्यतः लोगों की क्रयशक्ति तथा बाजार की माँग के माध्यम से होता है।
प्रश्न 3. समाजवादी अर्थव्यवस्था में किन वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन किया जाता है? वितरण किस आधार पर होता है?
उत्तर: समाजवादी व्यवस्था में उत्पादन का उद्देश्य सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति पर अधिक केंद्रित होता है। वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन तथा वितरण में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और वितरण में सामाजिक आवश्यकता को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रश्न 4. प्रत्येक समाज को किन तीन प्रश्नों का उत्तर देना पड़ता है?
उत्तर:
- क्या और कितनी मात्रा में उत्पादन किया जाए?
- वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन कैसे किया जाए?
- उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का वितरण किसके लिए किया जाए?
प्रश्न 5. लघु उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर: लघु उद्योगों की पहचान मुख्यतः उनके निवेश और उत्पादन की प्रकृति जैसी निर्धारित कसौटियों के आधार पर की जाती रही है। समय के साथ सरकार द्वारा इनके लिए निर्धारित सीमा में परिवर्तन किया गया है।
प्रश्न 6. लघु उद्योगों को विकसित करने के लिए भारत सरकार द्वारा किए गए चार उपाय लिखिए।
उत्तर:
- लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता और ऋण उपलब्ध कराना।
- कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा देना।
- औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक बस्तियों का विकास करना।
- कुछ वस्तुओं के उत्पादन में लघु उद्योगों को संरक्षण देना।
प्रश्न 7. घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतियोगिता से किन दो रूपों में संरक्षण दिया गया?
उत्तर: घरेलू उद्योगों को मुख्यतः प्रशुल्क और कोटा के माध्यम से संरक्षण दिया गया। प्रशुल्क से आयातित वस्तुएँ महँगी हो जाती हैं, जबकि कोटा द्वारा आयात की मात्रा सीमित की जाती है। इससे घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से विकसित होने का अवसर मिलता है।
प्रश्न 8. हरित क्रांति के विषय में कौन-कौन सी आशंकाएँ थीं? क्या वे आशंकाएँ सच निकलीं?
उत्तर: यह आशंका थी कि हरित क्रांति का लाभ बड़े किसानों को अधिक मिलेगा और छोटे किसान पीछे रह जाएंगे। दूसरी आशंका उन्नत किस्म के बीजों के प्रयोग से फसल पर कीटों के प्रभाव को लेकर थी।
व्यवहार में हरित क्रांति ने उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सरकार ने ऋण, उर्वरक, सिंचाई और अन्य सुविधाओं के माध्यम से छोटे किसानों को भी आधुनिक तकनीक अपनाने का अवसर देने का प्रयास किया।
प्रश्न 9. सार्वजनिक उपक्रम से क्या अभिप्राय है? इसकी विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: ऐसे व्यावसायिक या औद्योगिक संस्थान जिनका स्वामित्व या नियंत्रण केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी सार्वजनिक संस्था के पास हो, सार्वजनिक उपक्रम कहलाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
- सरकार का स्वामित्व या नियंत्रण।
- सार्वजनिक हित की प्रमुख भूमिका।
- बड़े और आधारभूत उद्योगों में भागीदारी।
- राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास में योगदान।
- सामाजिक उद्देश्यों को महत्व।
प्रश्न 10. संरक्षण की नीति किस अवधारणा पर आधारित है?
उत्तर: संरक्षण की नीति इस विचार पर आधारित है कि विकासशील देशों के नए उद्योग विकसित देशों के स्थापित उद्योगों से तुरंत प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते। इसलिए घरेलू उद्योगों को कुछ समय तक संरक्षण देकर उन्हें मजबूत होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
प्रश्न 11. विदेशी प्रतियोगिता से संरक्षण की आलोचना किस आधार पर की जाती है?
उत्तर: लंबे समय तक संरक्षण मिलने पर घरेलू उद्योगों में प्रतिस्पर्धा का दबाव कम हो सकता है। इससे गुणवत्ता सुधारने, लागत घटाने और नई तकनीक अपनाने की प्रेरणा कम होने की संभावना रहती है।
प्रश्न 12. सार्वजनिक उपक्रमों के औचित्य में चार तर्क लिखिए।
उत्तर:
- सार्वजनिक उपक्रमों का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि जनकल्याण भी है।
- ये आधारभूत और भारी उद्योगों के विकास में सहायक होते हैं।
- ये क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में सहायता करते हैं।
- ये आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकने में भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 13. सार्वजनिक संस्थाओं के महत्व को दर्शाने वाले किन्हीं दो बिंदुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: सार्वजनिक संस्थाओं का महत्व सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय संतुलन के संदर्भ में विशेष है। सरकार ऐसे क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापित कर सकती है जहाँ निजी क्षेत्र निवेश करने में रुचि नहीं दिखाता। इससे पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विकास होता है।
प्रश्न 14. GDP की गणना कीजिए।
प्रश्न: एक देश में केवल तीन वस्तुओं का उत्पादन होता है—दूध, लकड़ी और कपड़ा। दूध का उत्पादन 10,000 लीटर, लकड़ी का उत्पादन 20,000 क्विंटल और कपड़े का उत्पादन 30,000 मीटर है। कीमतें क्रमशः ₹8 प्रति लीटर, ₹5 प्रति क्विंटल और ₹10 प्रति मीटर हैं। GDP की गणना कीजिए।
उत्तर:
दूध का मूल्य:
10,000 × ₹8 = ₹80,000
लकड़ी का मूल्य:
20,000 × ₹5 = ₹1,00,000
कपड़े का मूल्य:
30,000 × ₹10 = ₹3,00,000
GDP = ₹80,000 + ₹1,00,000 + ₹3,00,000
GDP = ₹4,80,000
अतः देश का सकल घरेलू उत्पाद ₹4,80,000 होगा।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि विकास का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद कृषि को भारत के आर्थिक विकास का आधार माना गया। पहली पंचवर्षीय योजना में कृषि को विशेष प्राथमिकता दी गई और बाद की योजनाओं में भी कृषि विकास के लिए भूमि सुधार तथा तकनीकी सुधारों पर जोर दिया गया।
भूमि सुधार:
- जमींदारी और अन्य मध्यस्थों का उन्मूलन।
- जोतों की अधिकतम सीमा निर्धारित करना।
- चकबंदी।
- काश्तकारी व्यवस्था में सुधार।
तकनीकी सुधार:
कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत बीज, सिंचाई, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और कृषि मशीनों के प्रयोग को बढ़ावा दिया गया। इसी प्रक्रिया ने आगे चलकर हरित क्रांति का आधार तैयार किया।
हरित क्रांति से गेहूँ और चावल जैसे प्रमुख खाद्यान्नों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इससे खाद्यान्न उपलब्धता में सुधार हुआ और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता मिली।
प्रश्न 2. पंचवर्षीय योजना के चार लक्ष्यों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
1. संवृद्धि
संवृद्धि का अर्थ वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन की क्षमता तथा वास्तविक उत्पादन में वृद्धि करना है। उत्पादन बढ़ने से आय और जीवन स्तर में सुधार की संभावना बढ़ती है।
2. आधुनिकीकरण
नई तकनीक, आधुनिक उत्पादन विधियों और आधुनिक सामाजिक दृष्टिकोण को अपनाना आधुनिकीकरण है।
3. आत्मनिर्भरता
जिन वस्तुओं का उत्पादन देश में किया जा सकता है, उनके लिए विदेशी निर्भरता को कम करना आत्मनिर्भरता का उद्देश्य है।
4. न्याय या समानता
आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे और आय तथा संपत्ति की असमानता कम हो, यह न्याय का उद्देश्य है।
प्रश्न 3. एक अर्थव्यवस्था की मुख्य समस्याएँ विस्तारपूर्वक समझाइए।
उत्तर: संसाधन सीमित होते हैं जबकि मानव आवश्यकताएँ अनेक और बढ़ती रहती हैं। इसलिए हर अर्थव्यवस्था को चुनाव करना पड़ता है। मुख्य आर्थिक समस्याएँ तीन हैं:
1. क्या और कितनी मात्रा में उत्पादन किया जाए?
अर्थव्यवस्था को तय करना पड़ता है कि उपभोक्ता वस्तुओं, पूँजीगत वस्तुओं तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं में से किनका उत्पादन किया जाए और कितनी मात्रा में किया जाए।
2. कैसे उत्पादन किया जाए?
उत्पादन में श्रम-प्रधान या पूँजी-प्रधान तकनीक में से कौन-सी तकनीक अपनाई जाए, यह तय करना पड़ता है। निर्णय संसाधनों की उपलब्धता और उनकी लागत पर निर्भर करता है।
3. किसके लिए उत्पादन किया जाए?
यह समस्या उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के वितरण से संबंधित है। इसमें यह तय होता है कि समाज के अलग-अलग लोगों तक उत्पादन का लाभ किस प्रकार पहुँचेगा।
प्रश्न 4. क्या सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का सामाजिक दायित्व लाभ-उपार्जन से अधिक आवश्यक है?
उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं है। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य सामाजिक और राष्ट्रीय हितों की पूर्ति भी है।
सार्वजनिक क्षेत्र रोजगार उपलब्ध कराने, आधारभूत संरचना विकसित करने, क्षेत्रीय असमानता कम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाने में योगदान दे सकता है।
इसलिए यदि किसी सार्वजनिक उपक्रम का कोई सामाजिक या रणनीतिक महत्व है, तो उसका मूल्यांकन केवल उसके लाभ या हानि से नहीं बल्कि उसके व्यापक सामाजिक योगदान से भी किया जाना चाहिए।
प्रश्न 5. पंचवर्षीय योजना के उद्देश्य के रूप में समानता या न्याय से क्या अभिप्राय है? क्या भारत इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हुआ?
उत्तर: समानता या न्याय का अर्थ है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे और आय तथा संपत्ति की असमानता कम हो। इसका उद्देश्य गरीबों, किसानों, श्रमिकों और कमजोर वर्गों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है।
इसके लिए भूमि सुधार, सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार, लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और रोजगार कार्यक्रम जैसे उपाय किए गए।
फिर भी इस लक्ष्य को पूरी तरह प्राप्त नहीं किया जा सका। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आय और संपत्ति की असमानता बनी रही। कई भूमि सुधारों का कार्यान्वयन धीमा रहा और विकास का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँच सका।
प्रश्न 6. आत्मनिर्भरता के लिए भारत में क्या प्रयास किए गए और उसमें हम कहाँ तक सफल हुए?
उत्तर: आत्मनिर्भरता का उद्देश्य विदेशी निर्भरता को कम करना और देश की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना था। इसके लिए कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में कई कदम उठाए गए।
कृषि क्षेत्र में:
- भूमि सुधार किए गए।
- जमींदारी व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया गया।
- सिंचाई और कृषि तकनीक का विस्तार किया गया।
- हरित क्रांति के माध्यम से खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाया गया।
औद्योगिक क्षेत्र में:
- भारी और आधारभूत उद्योग विकसित किए गए।
- सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार हुआ।
- आयात प्रतिस्थापन नीति अपनाई गई।
- घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतियोगिता से संरक्षण दिया गया।
इन प्रयासों से खाद्यान्न और कई औद्योगिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई, हालांकि सभी क्षेत्रों में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त नहीं हुई।
प्रश्न 7. औद्योगिक नीति 1956 ने भारत के उद्योगों को कितनी श्रेणियों में बाँटा? इन वर्गों में किन उद्योगों को रखा गया?
उत्तर: औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 में उद्योगों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था।
प्रथम श्रेणी
इस श्रेणी में ऐसे उद्योग रखे गए जिनमें राज्य की प्रमुख और प्रत्यक्ष भूमिका निर्धारित की गई। इनमें रक्षा, परमाणु ऊर्जा और रेल परिवहन जैसे रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्र शामिल थे।
द्वितीय श्रेणी
इस श्रेणी में ऐसे उद्योग शामिल थे जिनके विकास में राज्य की प्रमुख भूमिका होनी थी। निजी क्षेत्र को भी कुछ क्षेत्रों में भागीदारी का अवसर था।
तृतीय श्रेणी
इस श्रेणी में मुख्यतः निजी क्षेत्र के लिए खुले उद्योग शामिल थे। राज्य आवश्यकता के अनुसार इन क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापित कर सकता था।
प्रश्न 8. भारत में औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति के प्रमुख उद्देश्य क्या रहे हैं?
उत्तर: औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति के प्रमुख उद्देश्य थे:
- औद्योगिक निवेश और उत्पादन को योजनाओं के लक्ष्यों के अनुरूप रखना।
- लघु उद्योगों को संरक्षण और प्रोत्साहन देना।
- आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकना।
- पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देना।
- औद्योगिक विकास में क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करना।
प्रश्न 9. व्यापार नीतियों का औद्योगिक विकास पर पड़ने वाला प्रभाव समझाइए।
उत्तर: भारत ने स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक आयात प्रतिस्थापन पर आधारित व्यापार नीति अपनाई। विदेशी वस्तुओं के आयात पर प्रशुल्क और कोटा जैसे नियंत्रण लगाए गए।
इससे घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतियोगिता से सुरक्षा मिली और देश में विभिन्न उद्योगों के विकास का अवसर मिला। औद्योगिक क्षेत्र में विविधता आई तथा घरेलू उत्पादन बढ़ा।
लेकिन लंबे समय तक संरक्षण के कारण कुछ उद्योगों में प्रतिस्पर्धा का दबाव कम हुआ। इससे गुणवत्ता, लागत और तकनीकी दक्षता सुधारने की गति प्रभावित हो सकती थी। इसलिए व्यापार संरक्षण के साथ प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना भी आवश्यक था।
प्रश्न 10. भारत में व्यापार नीति पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: भारत की व्यापार नीति को व्यापक रूप से बाह्यमुखी और अंतर्मुखी दृष्टिकोणों में समझा जा सकता है। 1950 से 1990 के बीच भारत की नीति मुख्यतः अंतर्मुखी और आयात प्रतिस्थापन आधारित रही।
इस नीति के अंतर्गत देश में उन वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया गया जिनका आयात किया जाता था। घरेलू उद्योगों को प्रशुल्क और कोटा द्वारा संरक्षण दिया गया तथा आयात और विदेशी प्रतिस्पर्धा पर नियंत्रण रखा गया।
इस नीति से घरेलू उद्योगों के विकास को प्रारंभिक सुरक्षा मिली, लेकिन लंबे समय तक संरक्षण के कारण प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता और गुणवत्ता में सुधार की चुनौती भी बनी रही।
प्रश्न 11. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विभिन्न उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकताओं की पूर्ति।
- रोजगार उपलब्ध कराना।
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना।
- आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकना।
- आधारभूत उद्योगों का विकास।
- आधारभूत संरचना का निर्माण।
- आय की असमानता कम करना।
- सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना।
- आत्मनिर्भरता को मजबूत करना।
प्रश्न 12. महालनोबिस के जीवन तथा उपलब्धियों पर प्रकाश डालें।
उत्तर: प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस भारत के प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् और आर्थिक नियोजन से जुड़े प्रमुख विचारकों में से एक थे। उन्होंने भारत में सांख्यिकी और आर्थिक नियोजन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सांख्यिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। दूसरी पंचवर्षीय योजना की औद्योगिक विकास रणनीति पर उनके विचारों का महत्वपूर्ण प्रभाव रहा।
महालनोबिस ने भारत में भारी उद्योगों और पूँजीगत वस्तुओं के विकास पर बल दिया। उनका मानना था कि दीर्घकालीन आर्थिक विकास के लिए देश को औद्योगिक आधार मजबूत करना आवश्यक है। इसलिए भारतीय आर्थिक नियोजन के इतिहास में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रश्न 13. भू-धारण प्रणाली से क्या अभिप्राय है? स्वतंत्रता के समय भारत में कितने प्रकार की भू-स्वामित्व प्रणालियाँ थीं? प्रत्येक का वर्णन करें।
उत्तर: भूमि के स्वामित्व, काश्तकारों के अधिकार और सरकार के साथ उनके संबंधों को निर्धारित करने वाली व्यवस्था को भू-धारण प्रणाली कहा जाता है। स्वतंत्रता के समय भारत में मुख्यतः तीन प्रकार की भू-धारण प्रणालियाँ थीं:
1. जमींदारी प्रथा
इस व्यवस्था में जमींदार किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते थे। किसान भूमि पर खेती करते थे और जमींदार उनसे लगान वसूल करते थे। कई क्षेत्रों में किसानों का शोषण और असुरक्षा इस व्यवस्था की प्रमुख समस्या थी। स्वतंत्रता के बाद जमींदारी उन्मूलन के लिए कानून बनाए गए।
2. महालवाड़ी प्रथा
इस व्यवस्था में भूमि और लगान निर्धारण में ग्राम समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। भूमि राजस्व की जिम्मेदारी सामूहिक या बाद में व्यक्तिगत रूप से भी निर्धारित की जा सकती थी। यह व्यवस्था उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में प्रचलित थी।
3. रैयतवाड़ी प्रथा
इस व्यवस्था में किसान का संबंध सीधे सरकार से होता था। किसान व्यक्तिगत रूप से भूमि पर अधिकार रखता था और सरकार को सीधे भूमि-राजस्व देता था। इसमें जमींदार जैसे मध्यस्थ की भूमिका नहीं होती थी।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन योजना आयोग का अध्यक्ष था?
(a) वित्त मंत्री
(b) योजना मंत्री
(c) प्रधानमंत्री
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) प्रधानमंत्री
व्याख्या: योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता था।
प्रश्न 2. स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में किस आर्थिक प्रणाली को अपनाया गया?
(a) पूँजीवादी
(b) मिश्रित
(c) समाजवादी
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) मिश्रित
व्याख्या: भारत में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को स्थान दिया गया, इसलिए मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई गई।
प्रश्न 3. किस आर्थिक प्रणाली में उत्पादन के सभी साधनों पर सरकार का स्वामित्व होता है?
(a) समाजवादी
(b) मिश्रित
(c) पूँजीवादी
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) समाजवादी
व्याख्या: समाजवादी व्यवस्था में उत्पादन के प्रमुख साधनों पर सार्वजनिक या सरकारी स्वामित्व को प्रमुखता दी जाती है।
प्रश्न 4. ब्रिटिशकाल में मुख्यतः कितनी भू-धारण प्रणालियाँ थीं?
(a) दो
(b) तीन
(c) एक
(d) चार
सही उत्तर: (b) तीन
व्याख्या: प्रमुख प्रणालियाँ जमींदारी, महालवाड़ी और रैयतवाड़ी थीं।
प्रश्न 5. जमींदारी प्रथा के उन्मूलन से कितने काश्तकारों का सरकार से प्रत्यक्ष संबंध हो गया?
(a) 300 लाख
(b) 200 लाख
(c) 250 लाख
(d) 350 लाख
सही उत्तर: (b) 200 लाख
व्याख्या: जमींदारी उन्मूलन के बाद बड़ी संख्या में काश्तकारों का सरकार से सीधा संबंध स्थापित हुआ।
प्रश्न 6. 1990 में देश का लगभग कितना प्रतिशत भाग कृषि कार्य में कार्यरत था?
(a) 80%
(b) 65%
(c) 70%
(d) 40%
सही उत्तर: (b) 65%
व्याख्या: 1990 के आसपास लगभग 65% कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी।
प्रश्न 7. औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 ने भारत के उद्योगों को कितनी श्रेणियों में वर्गीकृत किया?
(a) चार
(b) दो
(c) तीन
(d) पाँच
सही उत्तर: (c) तीन
व्याख्या: उद्योगों को तीन श्रेणियों में बाँटकर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भूमिकाएँ निर्धारित की गईं।
प्रश्न 8. 1990-91 में औद्योगिक क्षेत्र का GDP में योगदान कितना था?
(a) 26%
(b) 23%
(c) 28%
(d) 24.6%
सही उत्तर: (d) 24.6%
व्याख्या: 1990-91 में औद्योगिक क्षेत्र का GDP में योगदान लगभग 24.6% बताया गया है।
प्रश्न 9. भारत में आर्थिक नियोजन का काल कब आरम्भ हुआ?
(a) 1 अप्रैल 1961
(b) 1 अप्रैल 1980
(c) 1 अप्रैल 1951
(d) 14 अप्रैल 1974
सही उत्तर: (c) 1 अप्रैल 1951
व्याख्या: पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 से शुरू हुई थी।
प्रश्न 10. 1979–80 का वर्ष किस योजना व्यवस्था के अंतर्गत योजना अवकाश से संबंधित था?
(a) प्रथम पंचवर्षीय योजना
(b) योजना का अवकाश काल
(c) द्वितीय पंचवर्षीय योजना
(d) पाँचवीं पंचवर्षीय योजना
सही उत्तर: (b) योजना का अवकाश काल
व्याख्या: इस अवधि को योजना अवकाश के संदर्भ में जाना जाता है।
प्रश्न 11. योजना काल में निर्मित वस्तुओं का उत्पादन निर्धारित लक्ष्यों से कम रहने के कौन-कौन से कारण थे?
(a) बिजली की कमी
(b) कच्चे माल की कमी
(c) औद्योगिक अशांति
(d) उपर्युक्त सभी
सही उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: बिजली और कच्चे माल की कमी तथा औद्योगिक अशांति जैसी समस्याएँ उत्पादन को प्रभावित कर सकती थीं।
प्रश्न 12. भारत में आर्थिक आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य था—
(a) सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक विकास
(b) हिन्दी को प्रोत्साहन देना
(c) सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर
(d) आर्थिक विषमता को बढ़ाना
सही उत्तर: (a) सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक विकास
व्याख्या: भारत की योजनाबद्ध विकास व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक विकास के साथ सामाजिक और आर्थिक न्याय को बढ़ावा देना था।
अध्याय का सारांश
भारतीय अर्थव्यवस्था (1950–1990) का दौर योजनाबद्ध आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण काल था। स्वतंत्रता के बाद भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास का प्रयास किया।
पंचवर्षीय योजनाओं के चार प्रमुख उद्देश्य संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और समानता थे। कृषि क्षेत्र में भूमि सुधार और हरित क्रांति के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया गया।
औद्योगिक क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई। औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 के माध्यम से उद्योगों का वर्गीकरण किया गया और औद्योगिक लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की गई।
भारत ने विदेशी प्रतियोगिता से घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए आयात प्रतिस्थापन, प्रशुल्क और कोटा जैसी नीतियों का प्रयोग किया। इससे घरेलू उद्योगों को विकास का अवसर मिला, लेकिन लंबे समय तक संरक्षण के कारण प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता की कुछ समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।
इस प्रकार 1950 से 1990 का काल भारत में कृषि, उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र और आर्थिक नियोजन की नींव मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण चरण रहा।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई।
- योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई।
- पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 से शुरू हुई।
- पहली योजना में कृषि को विशेष प्राथमिकता दी गई।
- पंचवर्षीय योजनाओं के प्रमुख लक्ष्य संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और समानता थे।
- भूमि सुधार का उद्देश्य कृषि विकास और सामाजिक न्याय दोनों था।
- हरित क्रांति ने खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 ने उद्योगों को तीन श्रेणियों में बाँटा।
- आयात प्रतिस्थापन के लिए प्रशुल्क और कोटा का प्रयोग किया गया।
- सार्वजनिक क्षेत्र को भारी उद्योग, आधारभूत संरचना और राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका दी गई।
- 1990 के आसपास लगभग 65% कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी।
- 1990 में सेवा क्षेत्र का GDP में योगदान लगभग 40.59% बताया गया।
अध्याय से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पाठ
Chapter 1 – स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था
Bihar Board Class 11 Economics – सभी Chapters
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Economics Chapter 2 – भारतीय अर्थव्यवस्था (1950–1990) भारत के आर्थिक नियोजन और विकास की दिशा को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें पंचवर्षीय योजनाओं, भूमि सुधार, हरित क्रांति, औद्योगिक नीति, सार्वजनिक क्षेत्र और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समझाया गया है।
बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते समय विशेष रूप से चार योजना उद्देश्य, भूमि सुधार, हरित क्रांति, औद्योगिक नीति 1956, सार्वजनिक क्षेत्र, आयात प्रतिस्थापन और GDP से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास जरूर करें।