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Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 3 उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण – एक समीक्षा

Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण तथा भारत में 1991 के आर्थिक सुधारों का अध्ययन किया गया है। इस अध्याय में नई आर्थिक नीति की आवश्यकता, उसके प्रमुख तत्व, WTO, व्यापार नीति, निजीकरण, विनिवेश, विदेशी निवेश, कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्र पर सुधारों के प्रभाव और सामाजिक न्याय से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को समझाया गया है।

Table of Contents

उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण : संक्षिप्त परिचय

भारत ने 1991 में गंभीर आर्थिक संकट का सामना किया। बढ़ती कीमतें, राजकोषीय घाटा, भुगतान संतुलन की समस्या और विदेशी मुद्रा भंडार में कमी जैसी परिस्थितियों के कारण आर्थिक नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए। जुलाई 1991 में नई आर्थिक नीति की घोषणा की गई। इसके प्रमुख आधार थे—उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. भारत में आर्थिक सुधार क्यों आरम्भ किए गए?

उत्तर: भारत में आर्थिक सुधार आरम्भ करने के पीछे कई आर्थिक समस्याएँ थीं। देश में कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा था, विदेशी मुद्रा भंडार घट रहा था तथा व्यापार और भुगतान संतुलन की स्थिति कमजोर हो रही थी। विदेशी ऋण का बोझ भी बढ़ रहा था। इन परिस्थितियों ने भारत को आर्थिक नीतियों में व्यापक परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया।

प्रश्न 2. विश्व व्यापार संगठन के कितने सदस्य देश हैं?

उत्तर: इस प्रश्न का उत्तर पाठ्यपुस्तक के निर्धारित संदर्भ के अनुसार लिखा जाना चाहिए। WTO की सदस्य संख्या समय के साथ बदलती रहती है।

प्रश्न 3. नई आर्थिक नीति की घोषणा कब की गई?

उत्तर: भारत में नई आर्थिक नीति की घोषणा जुलाई 1991 में की गई।

प्रश्न 4. रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों पर किस प्रकार नियंत्रण रखता है?

उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक विभिन्न नियमों और नियामक व्यवस्थाओं के माध्यम से व्यावसायिक बैंकों के कार्यों को नियंत्रित करता है। वह बैंकों की ऋण देने की व्यवस्था, नकदी एवं आरक्षित निधि संबंधी आवश्यकताओं तथा बैंकिंग गतिविधियों की निगरानी करता है। इसका उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखना है।

प्रश्न 5. रुपयों के अवमूल्यन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब सरकार किसी उद्देश्य से अपनी मुद्रा का विदेशी मुद्राओं की तुलना में आधिकारिक मूल्य कम करती है, तो इसे अवमूल्यन कहा जाता है। इससे विदेशी मुद्रा की तुलना में घरेलू मुद्रा का बाहरी मूल्य कम हो जाता है और निर्यात को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।

प्रश्न 6. इसमें भेद करें।

(1) युक्तियुक्त और अल्पांश विक्रय

आधारयुक्तियुक्त/रणनीतिक विक्रयअल्पांश विक्रय
अर्थउद्यम के महत्वपूर्ण या नियंत्रक हिस्से की बिक्री, जिससे स्वामित्व/प्रबंधन पर प्रभाव पड़ सकता है।सरकार या संस्था द्वारा अपने कुछ शेयर बेच देना, जबकि नियंत्रण आवश्यक रूप से हस्तांतरित नहीं होता।
नियंत्रणनियंत्रण हस्तांतरण की संभावना अधिक होती है।नियंत्रण सामान्यतः मूल स्वामी के पास रह सकता है।

(2) द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार

आधारद्विपक्षीय व्यापारबहुपक्षीय व्यापार
पक्षों की संख्यादो देशों के बीच व्यापार।दो से अधिक देशों के बीच व्यापार।
उदाहरणभारत और किसी एक देश के बीच व्यापार।कई देशों के बीच होने वाला अंतरराष्ट्रीय व्यापार।

(3) प्रशुल्क एवं अप्रशुल्क अवरोधक

आधारप्रशुल्क अवरोधअप्रशुल्क अवरोध
अर्थआयातित वस्तुओं पर लगाया गया शुल्क।शुल्क के अलावा लगाए जाने वाले व्यापारिक प्रतिबंध।
उदाहरणआयात शुल्क।आयात कोटा, लाइसेंस आदि।

प्रश्न 7. प्रशुल्क क्यों लगाए जाते हैं?

उत्तर: प्रशुल्क मुख्य रूप से घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण देने के लिए लगाए जाते हैं। आयातित वस्तुओं पर शुल्क लगाने से उनकी कीमत बढ़ सकती है और घरेलू उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा करने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 8. परिमाणात्मक प्रतिबंधों का क्या अर्थ होता है?

उत्तर: जब किसी वस्तु के आयात की मात्रा या मूल्य की अधिकतम सीमा सरकार द्वारा निर्धारित कर दी जाती है, तो इसे परिमाणात्मक प्रतिबंध कहा जाता है। इसका उद्देश्य आयात को नियंत्रित करना और घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना हो सकता है।

प्रश्न 9. लाभ कमा रहे सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर देना चाहिए?

उत्तर: लाभ कमाने वाले सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का निर्णय सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। यदि कोई सार्वजनिक उपक्रम अच्छी तरह काम कर रहा है और सरकार को नियमित आय दे रहा है, तो केवल निजीकरण के उद्देश्य से उसका स्वामित्व बदलना आवश्यक नहीं है। दूसरी ओर, यदि निजी प्रबंधन से कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धा में पर्याप्त सुधार की संभावना हो, तो सीमित विनिवेश पर विचार किया जा सकता है। इसलिए निर्णय लेते समय सार्वजनिक हित, कार्यकुशलता, रोजगार और सरकारी आय सभी पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।

प्रश्न 10. क्या आपके विचार से बाह्य प्रापण भारत के लिए अच्छा है? विकसित देशों में इसका विरोध क्यों हो रहा है?

उत्तर: बाह्य प्रापण (Outsourcing) भारत के लिए रोजगार, विदेशी मुद्रा आय और सेवा क्षेत्र के विस्तार की दृष्टि से उपयोगी रहा है। भारत में कुशल और अपेक्षाकृत कम लागत वाला श्रम उपलब्ध होने के कारण विदेशी कंपनियाँ कई सेवाओं का कार्य भारतीय कंपनियों को देती हैं।

विकसित देशों में इसका विरोध इसलिए होता है क्योंकि वहाँ की कुछ कंपनियाँ कम लागत के लिए काम दूसरे देशों में भेज देती हैं। इससे विकसित देशों में कुछ कर्मचारियों के रोजगार पर दबाव पड़ सकता है।

प्रश्न 11. भारत को बाह्य केंद्र बनाने वाली अनुकूल परिस्थितियाँ क्या हैं?

उत्तर: भारत को बाह्य प्रापण का प्रमुख केंद्र बनाने वाली परिस्थितियाँ हैं—

  • कुशल एवं शिक्षित मानव संसाधन।
  • अंग्रेजी भाषा का व्यापक ज्ञान।
  • तुलनात्मक रूप से कम श्रम लागत।
  • सूचना एवं संचार तकनीक का विकास।
  • 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराने की क्षमता।
  • सॉफ्टवेयर और IT सेवाओं का मजबूत आधार।

प्रश्न 12. क्या नवरत्न नीति सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन को सुधारने में सहायक रही?

उत्तर: हाँ, नवरत्न नीति का उद्देश्य चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता देकर उनकी कार्यकुशलता बढ़ाना था। इससे इन उपक्रमों को व्यावसायिक निर्णय लेने, निवेश करने और प्रतिस्पर्धी वातावरण में काम करने की अधिक स्वतंत्रता मिली। इस प्रकार नवरत्न नीति ने सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक सक्षम बनाने में सहायता की।

प्रश्न 13. सेवा क्षेत्र के तीव्र विकास के प्रमुख कारण क्या हैं?

उत्तर: सेवा क्षेत्र के विकास के प्रमुख कारण हैं—संचार एवं परिवहन सुविधाओं का विस्तार, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का विकास, सूचना प्रौद्योगिकी का विस्तार, विदेशी निवेश में वृद्धि और आर्थिक उदारीकरण। भारत में IT, BPO, बैंकिंग, बीमा, पर्यटन और संचार जैसी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ।

प्रश्न 14. सुधार प्रक्रिया से कृषि क्षेत्र दुष्प्रभावित क्यों हुआ?

उत्तर: सुधार काल में कृषि क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कृषि आधारभूत संरचना में पर्याप्त निवेश न होना, सिंचाई और ग्रामीण बाजारों की समस्याएँ, कृषि लागत में वृद्धि तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा जैसे कारण महत्वपूर्ण रहे। छोटे और सीमांत किसानों पर इन समस्याओं का प्रभाव अधिक पड़ा।

प्रश्न 15. सुधार काल में औद्योगिक क्षेत्र के निराशाजनक निष्पादन के कारण क्या रहे?

उत्तर:

  • विदेशी वस्तुओं से घरेलू उद्योगों को बढ़ती प्रतिस्पर्धा।
  • आधारभूत संरचना की अपर्याप्तता।
  • बिजली की समस्या।
  • कुछ उद्योगों में तकनीकी पिछड़ापन।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा की कठिनाइयाँ।
  • निवेश और मांग से संबंधित समस्याएँ।

प्रश्न 16. सामाजिक न्याय और जन कल्याण के परिप्रेक्ष्य में आर्थिक सुधारों पर चर्चा करें।

उत्तर: आर्थिक सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा, विदेशी निवेश, विदेशी मुद्रा भंडार और सेवा क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिला। कई क्षेत्रों में उत्पादन और कार्यकुशलता में सुधार हुआ।

लेकिन आर्थिक सुधारों के लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचे। कृषि क्षेत्र, छोटे उत्पादक, असंगठित श्रमिक और कमजोर आय वर्ग के सामने कई चुनौतियाँ बनी रहीं। इसलिए आर्थिक सुधारों के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर भी पर्याप्त ध्यान देना आवश्यक है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. विनिवेश से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: सरकारी उपक्रम में सरकार द्वारा अपने कुछ शेयर या हिस्सेदारी बेचने को विनिवेश कहते हैं।

प्रश्न 2. वैश्वीकरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और सेवाओं के माध्यम से बढ़ते आर्थिक एकीकरण को वैश्वीकरण कहते हैं।

प्रश्न 3. आर्थिक सुधारों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: अर्थव्यवस्था की नीतियों और व्यवस्थाओं में आवश्यक परिवर्तन करके उसकी कार्यकुशलता और विकास को बढ़ाने की प्रक्रिया आर्थिक सुधार कहलाती है।

प्रश्न 4. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब कोई विदेशी कंपनी या निवेशक किसी दूसरे देश में व्यवसाय या उत्पादन के उद्देश्य से प्रत्यक्ष रूप से पूँजी लगाता है, तो उसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कहते हैं।

प्रश्न 5. नई आर्थिक नीति की घोषणा कब की गई?

उत्तर: जुलाई 1991 में।

प्रश्न 6. आर्थिक उदारीकरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: सरकारी नियंत्रणों और अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करके आर्थिक गतिविधियों में व्यक्तियों एवं निजी संस्थाओं को अधिक स्वतंत्रता देना आर्थिक उदारीकरण कहलाता है।

प्रश्न 7. निजीकरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को अपेक्षाकृत कम करना निजीकरण कहलाता है।

प्रश्न 8. विराष्ट्रीयकरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों के स्वामित्व या प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की प्रक्रिया को विराष्ट्रीयकरण कहा जाता है।

प्रश्न 9. नई आर्थिक नीति से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: 1991 में भारत द्वारा अपनाई गई आर्थिक सुधार नीति को नई आर्थिक नीति कहा जाता है। इसके प्रमुख आधार उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण थे।

प्रश्न 10. नई आर्थिक नीति बनाने की क्यों आवश्यकता पड़ी?

उत्तर: राजकोषीय घाटा, भुगतान संतुलन का संकट, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, बढ़ती कीमतें और सार्वजनिक क्षेत्र की समस्याओं के कारण नई आर्थिक नीति की आवश्यकता पड़ी।

प्रश्न 11. आर्थिक सुधार के मुख्य तत्व लिखें।

उत्तर:

  1. उदारीकरण
  2. निजीकरण
  3. वैश्वीकरण

प्रश्न 12. व्यापार नीति सुधार 1991 के क्या उद्देश्य थे?

उत्तर: आयात-निर्यात प्रतिबंधों को कम करना, प्रशुल्क दरों को घटाना और आयात लाइसेंस प्रणाली को सरल/समाप्त करना इसके प्रमुख उद्देश्य थे।

प्रश्न 13. क्या श्रम को स्वतंत्र रूप से प्रवास होने की अनुमति दी जानी चाहिए?

उत्तर: श्रम का प्रवास रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे उचित कानूनी, सामाजिक और श्रम सुरक्षा व्यवस्था के साथ होना चाहिए।

प्रश्न 14. प्रशुल्क एवं अप्रशुल्क अवरोधक में भेद करें।

प्रशुल्क अवरोधअप्रशुल्क अवरोध
आयात पर शुल्क लगाकर व्यापार को प्रभावित करता है।कोटा, लाइसेंस आदि के माध्यम से व्यापार को प्रभावित करता है।

प्रश्न 15. भारत ने आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध क्यों लगा रखा था?

उत्तर: नई आर्थिक नीति से पहले भारत ने घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और आयात को नियंत्रित रखने के लिए मात्रात्मक प्रतिबंध लगाए थे।

प्रश्न 16. उदारीकरण के कोई तीन उपाय लिखें।

उत्तर:

  1. औद्योगिक लाइसेंसिंग में कमी।
  2. एकाधिकार संबंधी प्रतिबंधों में कमी।
  3. आयात नीति को सरल बनाना।

प्रश्न 17. आंशिक परिवर्तनशीलता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब विदेशी मुद्रा को कुछ निश्चित प्रकार के विदेशी लेन-देन के लिए बाजार निर्धारित दर पर खरीदा या बेचा जा सकता है, तो इसे आंशिक परिवर्तनशीलता कहा जाता है।

प्रश्न 18. स्वतंत्र परिवर्तनशीलता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब विदेशी मुद्रा के लेन-देन पर व्यापक रूप से बाजार की माँग और पूर्ति के आधार पर विनिमय दर निर्धारित होती है, तो उसे स्वतंत्र परिवर्तनशीलता कहा जाता है।

प्रश्न 19. विश्व व्यापार संगठन की स्थापना कब हुई?

उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 1995 में हुई।

प्रश्न 20. विश्व व्यापार संगठन का प्रधान कार्यालय कहाँ है?

उत्तर: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।

प्रश्न 21. भारत का केंद्रीय बैंक कौन-सा है?

उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)।

प्रश्न 22. ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक को किस नाम से पुकारा जाता है?

उत्तर: बैंक ऑफ इंग्लैंड।

प्रश्न 23. 1991 से पूर्व की आर्थिक नीतियों के प्रमुख उद्देश्य लिखें।

उत्तर: उच्च आर्थिक संवृद्धि, राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता, पूर्ण रोजगार तथा आय की असमानता को कम करना प्रमुख उद्देश्य थे।

प्रश्न 24. स्थिर विनिमय दर क्या है?

उत्तर: ऐसी विनिमय दर जिसे सरकार या केंद्रीय बैंक निर्धारित या नियंत्रित करता है, स्थिर विनिमय दर कहलाती है।

प्रश्न 25. भुगतान शेष से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: एक निश्चित अवधि में देश के निवासियों और विदेशों के बीच होने वाले सभी आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित विवरण भुगतान संतुलन कहलाता है।

प्रश्न 26. विदेशी पूँजी से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: दूसरे देशों के निवेशकों द्वारा किसी देश में लगाई गई पूँजी को विदेशी पूँजी कहते हैं। इससे पूँजी, तकनीक और प्रबंधन कौशल प्राप्त हो सकता है।

प्रश्न 27. स्थिर विदेशी विनिमय दर से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: जब किसी देश की मुद्रा की विदेशी मुद्राओं के साथ विनिमय दर केंद्रीय बैंक या सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है, तो उसे स्थिर विदेशी विनिमय दर कहते हैं।

प्रश्न 28. वैश्वीकरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार, पूँजी, तकनीक और सेवाओं के आदान-प्रदान तथा आर्थिक एकीकरण में वृद्धि को वैश्वीकरण कहते हैं।

प्रश्न 29. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में सरकार के विनिवेश से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार द्वारा अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने को विनिवेश कहते हैं। इसका उद्देश्य संसाधन जुटाना और कुछ मामलों में उपक्रमों की कार्यकुशलता बढ़ाना होता है।

प्रश्न 30. निजीकरण के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए किसी एक उपाय को लिखें।

उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या कम करना निजीकरण की दिशा में अपनाया गया एक प्रमुख उपाय था।

प्रश्न 31. राजकोषीय सुधारों के कोई तीन बिंदु लिखें।

उत्तर:

  1. कर प्रणाली में सुधार।
  2. अनावश्यक आर्थिक सहायता में कमी।
  3. सरकारी आय और व्यय को अधिक तर्कसंगत बनाना।

प्रश्न 32. ई-बिजनेस का क्या अर्थ है?

उत्तर: इंटरनेट और अन्य डिजिटल माध्यमों का प्रयोग करके व्यवसाय की गतिविधियों को संचालित करना ई-बिजनेस कहलाता है।

प्रश्न 33. ई-कॉमर्स की मुख्यधारा के तीन क्षेत्र कौन-से हैं?

उत्तर:

  1. इलेक्ट्रॉनिक मार्केट।
  2. इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज।
  3. इंटरनेट कॉमर्स।

प्रश्न 34. ई-कॉमर्स से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री तथा अन्य व्यावसायिक लेन-देन को ई-कॉमर्स कहते हैं।

प्रश्न 35. टाटा टी ने 2000 में किस कंपनी का अधिग्रहण किया?

उत्तर: टाटा टी ने 2000 में Tetley कंपनी का अधिग्रहण किया था।

प्रश्न 36. टाटा मोटर्स कंपनी ने दक्षिण कोरिया की Daewoo की भारी वाणिज्यिक वाहन इकाई कितने में खरीदी?

उत्तर: टाटा मोटर्स ने Daewoo Commercial Vehicle Company का अधिग्रहण किया था।

प्रश्न 37. 2004 में भारत की किस कंपनी ने सिंगापुर की NatSteel कंपनी को खरीदा था?

उत्तर: टाटा स्टील ने 2004 में सिंगापुर की NatSteel कंपनी का अधिग्रहण किया था।

प्रश्न 38. निजीकरण का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में निजी क्षेत्र की स्वामित्व और प्रबंधन संबंधी भूमिका बढ़ाने की प्रक्रिया निजीकरण कहलाती है।

प्रश्न 39. निजीकरण के पक्ष में कोई दो तर्क दें।

उत्तर:

  1. निजी क्षेत्र कार्यकुशलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
  2. प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उत्पादन और प्रबंधन में सुधार हो सकता है।

प्रश्न 40. व्यापार शेष से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: वस्तुओं के निर्यात और वस्तुओं के आयात के मूल्य के अंतर को व्यापार शेष कहते हैं।

प्रश्न 41. भुगतान शेष से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: विदेशों से होने वाली सभी प्रमुख प्राप्तियों और विदेशों को किए जाने वाले भुगतानों का व्यवस्थित विवरण भुगतान संतुलन कहलाता है।

प्रश्न 42. भारत में दूसरे विश्व युद्ध से पूर्व भुगतान शेष कैसा था?

उत्तर: पाठ्यपुस्तक के संदर्भ में भारत का भुगतान संतुलन अपेक्षाकृत अनुकूल/संतुलित बताया गया है।

प्रश्न 43. 1991 के अंत में भारत में विदेशी मुद्रा का भंडार कितना था?

उत्तर: विदेशी मुद्रा भंडार केवल लगभग दो सप्ताह के आयात के लिए पर्याप्त रह गया था।

प्रश्न 44. द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय व्यापार में क्या अंतर है?

द्विपक्षीय व्यापारबहुपक्षीय व्यापार
दो देशों के बीच होने वाला व्यापार।दो से अधिक देशों के बीच होने वाला व्यापार।

प्रश्न 45. द्वितीय महायुद्ध के पश्चात और विशेष रूप से स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत का भुगतान शेष कैसा रहा?

उत्तर: भारत का भुगतान संतुलन कई अवधियों में प्रतिकूल रहा, अर्थात् विदेशी भुगतान का दबाव बना रहा।

प्रश्न 46. विनिवेश के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर:

  1. वित्तीय अनुशासन में सुधार।
  2. आधुनिकीकरण और निवेश के लिए संसाधन जुटाना।

प्रश्न 47. आर्थिक सुधारों के विपक्ष में कोई दो बिंदु दें।

उत्तर:

  1. कमजोर वर्गों और कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है।
  2. निजीकरण से रोजगार सुरक्षा और सार्वजनिक नियंत्रण से जुड़े प्रश्न उत्पन्न हो सकते हैं।

प्रश्न 48. उदारीकरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: उद्योग और व्यापार पर लगाए गए अनावश्यक सरकारी नियंत्रणों को कम करके निजी उद्यमियों को अधिक आर्थिक स्वतंत्रता देना उदारीकरण कहलाता है।

प्रश्न 49. विश्व व्यापार संगठन क्या है? इससे क्या अपेक्षा की जाती है?

उत्तर: WTO एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो वैश्विक व्यापार के नियमों और व्यापारिक संबंधों के लिए संस्थागत ढाँचा प्रदान करता है। इससे निष्पक्ष और अधिक व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा की जाती है।

प्रश्न 50. नई आर्थिक नीति का प्रमुख उद्देश्य क्या है? इसके तीन आधार स्तंभ लिखें।

उत्तर: नई आर्थिक नीति का प्रमुख उद्देश्य अर्थव्यवस्था की कार्यकुशलता और उत्पादन क्षमता बढ़ाना था। इसके तीन आधार स्तंभ हैं—

  1. उदारीकरण
  2. निजीकरण
  3. वैश्वीकरण

प्रश्न 51. स्वावलंबन की दिशा में किन बातों पर जोर दिया गया?

उत्तर: विज्ञान एवं तकनीक के प्रयोग में वृद्धि तथा देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया गया।

प्रश्न 52. उदारीकरण का विदेशी निवेश अंतःप्रवाह पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: उदारीकरण के बाद विदेशी निवेश के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक खुली हुई, जिससे विदेशी निवेश के अंतःप्रवाह में वृद्धि हुई।

प्रश्न 53. संस्थागत निवेशकों में मुख्य कौन हैं?

उत्तर: म्युचुअल फंड, पेंशन फंड और अन्य वित्तीय संस्थाएँ प्रमुख संस्थागत निवेशक हैं।

प्रश्न 54. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत का भुगतान शेष अनुकूल क्यों रहा?

उत्तर: युद्ध के दौरान भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ी और आयात अपेक्षाकृत कम हुए। इससे भारत की विदेशी प्राप्तियों की स्थिति बेहतर रही।

प्रश्न 55. कोरियर सेवाओं से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: पत्र, दस्तावेज और छोटे पार्सल एक स्थान से दूसरे स्थान तक शीघ्र पहुँचाने वाली सेवाओं को कोरियर सेवा कहते हैं।

प्रश्न 56. कोर क्षेत्र किसे कहते हैं?

उत्तर: अर्थव्यवस्था के ऐसे महत्वपूर्ण आधारभूत उद्योगों के समूह को कोर क्षेत्र कहा जाता है जो आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक होते हैं, जैसे ऊर्जा, पेट्रोलियम, इस्पात आदि।

प्रश्न 57. FEMA कब लागू हुआ और इसने किस कानून का स्थान लिया?

उत्तर: FEMA को 1 जून 2000 से लागू किया गया। इसने FERA 1973 का स्थान लिया।

प्रश्न 58. आयात प्रतिस्थापन तथा निर्यात संवर्धन में अंतर बताइए।

आयात प्रतिस्थापननिर्यात संवर्धन
विदेश से आने वाली वस्तुओं का उत्पादन देश में ही करने पर जोर।देश में उत्पादित वस्तुओं को विदेशी बाजारों में अधिक बेचने पर जोर।
उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना।उद्देश्य निर्यात बढ़ाना और विदेशी मुद्रा अर्जित करना।

प्रश्न 59. पूँजीगत खाते में दिखाई जाने वाली कोई तीन मदें लिखें।

उत्तर: पूँजीगत लेन-देन, विदेशी निवेश तथा विदेशी ऋण आदि इसके प्रमुख घटक हैं।

प्रश्न 60. भुगतान संतुलन के चालू खाते में दिखाई जाने वाली कोई तीन मदें लिखें।

उत्तर:

  1. वस्तुओं का आयात और निर्यात।
  2. सेवाओं से संबंधित प्राप्तियाँ और भुगतान।
  3. एकपक्षीय हस्तांतरण जैसे दान आदि।

प्रश्न 61. भारतीय रिजर्व बैंक किस प्रकार वाणिज्यिक बैंकों पर नियंत्रण रखता है?

उत्तर: RBI नियमों, बैंकिंग विनियमन, आरक्षित निधि संबंधी आवश्यकताओं और निरीक्षण के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 62. भारतीय रिजर्व बैंक का सबसे प्रमुख कार्य क्या है?

उत्तर: RBI का प्रमुख कार्य देश की मौद्रिक और बैंकिंग व्यवस्था का नियमन करना तथा वित्तीय स्थिरता बनाए रखना है।

प्रश्न 63. बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को कैसे बढ़ावा दिया गया?

उत्तर: निजी क्षेत्र के नए बैंकों को स्थापित होने की अनुमति देकर बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया गया।

प्रश्न 64. भारत में निर्धन खाद्य उपभोक्ता कौन है?

उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन श्रमिक और छोटे किसान तथा शहरी क्षेत्रों में असंगठित क्षेत्र के कम आय वाले श्रमिक निर्धन खाद्य उपभोक्ताओं में प्रमुख हैं।

प्रश्न 65. कृषि उपज के समर्थित मूल्य से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: किसानों को उनकी कृषि उपज के लिए एक न्यूनतम सुनिश्चित मूल्य उपलब्ध कराने की व्यवस्था को समर्थित मूल्य कहा जाता है।

प्रश्न 66. देश में खाद्यान्नों की घरेलू कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: खाद्यान्नों की कीमतों में वृद्धि के पीछे उत्पादन लागत, समर्थन मूल्य, वितरण व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और बाजार में मांग-पूर्ति जैसी परिस्थितियाँ महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

प्रश्न 67. उदारीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कोई दो उपाय लिखें।

उत्तर:

  1. औद्योगिक लाइसेंसिंग में कमी।
  2. एकाधिकार संबंधी प्रतिबंधों में कमी।

प्रश्न 68. निजीकरण के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी कंपनियों को निजी कंपनियों में कितने तरीकों से बदला जा सकता है?

उत्तर: मुख्यतः दो तरीकों से—

  1. सरकार के स्वामित्व और प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना।
  2. सरकारी हिस्सेदारी या उद्यम का पूर्ण/बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र को बेचना।

प्रश्न 69. भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसे तीन उपक्रमों के नाम लिखें जिन्हें नवरत्न कहा जाता है।

उत्तर: उदाहरण के रूप में NTPC, SAIL और GAIL के नाम लिखे जा सकते हैं।

प्रश्न 70. भारत में निजीकरण के लिए कौन-से उपाय अपनाए गए? कोई तीन बताइए।

उत्तर:

  1. सार्वजनिक क्षेत्र का संकुचन।
  2. सरकारी उपक्रमों में विनिवेश।
  3. सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों की बिक्री।

प्रश्न 71. मर्चेंट बैंकिंग से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: मर्चेंट बैंकिंग में कंपनियों और व्यापारिक संस्थाओं को वित्तीय एवं निवेश संबंधी विशेष सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जैसे पूँजी जुटाने और वित्तीय सलाह में सहायता।

प्रश्न 72. म्युचुअल फंड से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: म्युचुअल फंड एक निवेश माध्यम है जिसमें अनेक निवेशकों की राशि एकत्र करके विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है।

प्रश्न 73. अवमूल्यन तथा मूल्य ह्रास में अंतर बताइए।

आधारअवमूल्यनमूल्य ह्रास
अर्थसरकार/केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा मुद्रा का आधिकारिक मूल्य कम करना।बाजार की मांग और पूर्ति के कारण मुद्रा के मूल्य में कमी होना।
सरकारी निर्णयमुख्य भूमिका होती है।बाजार की शक्तियाँ मुख्य भूमिका निभाती हैं।

प्रश्न 74. नई आर्थिक नीति में निजीकरण को क्यों अधिक महत्व दिया गया?

उत्तर: निजीकरण के माध्यम से कार्यकुशलता, प्रतिस्पर्धा और प्रबंधन में सुधार की अपेक्षा की गई। निजी क्षेत्र को अधिक व्यावसायिक स्वतंत्रता मिलने से उत्पादन और निवेश बढ़ाने का अवसर मिलता है।

प्रश्न 75. मौद्रिक नीति से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: मुद्रा की आपूर्ति, ब्याज दर और ऋण की उपलब्धता को प्रभावित करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा अपनाई जाने वाली नीति को मौद्रिक नीति कहते हैं।

प्रश्न 76. 1991 की आर्थिक नीति को U-Turn की संज्ञा क्यों दी जाती है?

उत्तर: 1991 के बाद भारत ने अपनी पूर्व की अधिक नियंत्रित आर्थिक व्यवस्था से हटकर उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की दिशा अपनाई। इसलिए इसे पूर्व नीति से महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में U-Turn कहा गया।

प्रश्न 77. अमेरिका के केंद्रीय बैंक का क्या नाम है?

उत्तर: फेडरल रिजर्व सिस्टम (Federal Reserve System)।

प्रश्न 78. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण का काम कब आरम्भ हुआ?

उत्तर: भारत में सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण और विनिवेश की प्रक्रिया 1991-92 के आर्थिक सुधारों के बाद शुरू हुई।

प्रश्न 79. उद्योगों में सरकार विनिवेश कर रही है—इस कथन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी कुछ हिस्सेदारी या शेयर बेच रही है। इसे विनिवेश कहा जाता है।

प्रश्न 80. रुपये के अवमूल्यन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: विदेशी मुद्रा की तुलना में रुपये का आधिकारिक मूल्य कम करना रुपये का अवमूल्यन कहलाता है। इसके बाद विदेशी मुद्रा खरीदना अपेक्षाकृत महँगा हो जाता है।

प्रश्न 81. राजकोषीय सुधारों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: सरकार की कर-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यय में ऐसे सुधार करना जिससे सरकारी वित्त अधिक प्रभावी और संतुलित हो तथा आर्थिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़े, राजकोषीय सुधार कहलाते हैं।

प्रश्न 82. केंद्रीय उत्पाद शुल्क के स्थान पर कौन-सा कर लगाया गया था?

उत्तर: पाठ्यपुस्तक के संदर्भ में केंद्रीय उत्पाद शुल्क से संबंधित सुधारों में CENVAT का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 83. आर्थिक सुधारों के अंतर्गत निजीकरण का क्या अर्थ है?

उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित आर्थिक गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना तथा सरकारी उद्यमों के स्वामित्व या प्रबंधन में निजी क्षेत्र को अधिक भूमिका देना निजीकरण कहलाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. चालू खाते तथा पूँजीगत खाते में अंतर बताएँ।

आधारचालू खातापूँजीगत खाता
मुख्य विषयवस्तुओं, सेवाओं, आय और हस्तांतरण से जुड़े लेन-देन।पूँजी एवं वित्तीय लेन-देन।
उदाहरणवस्तुओं का आयात-निर्यात, सेवाएँ, हस्तांतरण।विदेशी निवेश, ऋण आदि।

प्रश्न 2. भुगतान संतुलन तथा व्यापार संतुलन में अंतर बताएँ।

आधारव्यापार संतुलनभुगतान संतुलन
अर्थवस्तुओं के निर्यात और आयात के मूल्य का अंतर।विदेशों के साथ सभी प्रमुख आर्थिक लेन-देन का व्यापक विवरण।
क्षेत्रमुख्यतः वस्तुओं के व्यापार तक सीमित।वस्तुएँ, सेवाएँ, आय, हस्तांतरण तथा पूँजीगत लेन-देन शामिल हो सकते हैं।

प्रश्न 3. आयात अभ्यांश (Import Quota) किसे कहते हैं? आयात अभ्यांश के उद्देश्य लिखें।

उत्तर: किसी निश्चित अवधि में किसी वस्तु के आयात की अधिकतम मात्रा या मूल्य निर्धारित करना आयात अभ्यांश कहलाता है। इसके उद्देश्य हैं—घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना, आयात नियंत्रित करना, भुगतान संतुलन में सुधार करना और घरेलू बाजार को अत्यधिक विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना।

प्रश्न 4. नई आर्थिक नीति के अंतर्गत कौन-से वित्तीय सुधार किए गए थे?

उत्तर: बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, ब्याज दरों को अधिक बाजार-आधारित बनाना, बैंकिंग प्रणाली के पुनर्गठन तथा निजी बैंकों को प्रोत्साहन जैसे कदम उठाए गए।

प्रश्न 5. नई आर्थिक नीति के अंतर्गत करों में कौन-कौन से सुधार किए गए?

उत्तर:

  • आयकर दरों को अधिक तर्कसंगत बनाया गया।
  • निगम कर में सुधार किए गए।
  • अप्रत्यक्ष करों में सुधार किया गया।
  • CENVAT जैसी व्यवस्थाओं को लागू किया गया।
  • राज्यों में VAT व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया।

प्रश्न 6. सुधार नीति के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र में सुधार लिखें।

उत्तर: औद्योगिक लाइसेंसिंग में कमी, MRTP संबंधी नियंत्रणों में ढील, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या में कमी तथा विदेशी निवेश को प्रोत्साहन जैसे प्रमुख सुधार किए गए।

प्रश्न 7. WTO की स्थापना कब की गई थी? इसका मुख्य कार्यालय कहाँ है? इसके उद्देश्य लिखें।

उत्तर: WTO की स्थापना 1995 में हुई और इसका मुख्यालय जिनेवा में है। इसके प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को व्यवस्थित करना, वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देना, व्यापारिक बाधाओं को कम करना तथा विश्व संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करना हैं।

प्रश्न 8. नई आर्थिक नीति के अंतर्गत व्यापार और निवेश नीति के सुधार लिखें।

उत्तर: आयात लाइसेंसिंग में कमी, आयात प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाना, निर्यात को प्रोत्साहन देना तथा विदेशी विनिमय व्यवस्था में सुधार करना प्रमुख कदम थे। FEMA ने विदेशी विनिमय नियंत्रण की व्यवस्था को अधिक प्रबंधन-आधारित स्वरूप दिया।

प्रश्न 9. अर्थव्यवस्था की कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए नई नीतियाँ अपनाई गईं। उनको समूहों में बाँट सकते हैं? प्रत्येक का संक्षेप में वर्णन करें।

उत्तर: इन्हें दो समूहों में बाँटा जा सकता है—

  1. स्थिरीकरण उपाय: इनका उद्देश्य मुद्रास्फीति और भुगतान संतुलन जैसी अल्पकालीन समस्याओं को नियंत्रित करना था।
  2. संरचनात्मक सुधार: इनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की कार्यकुशलता बढ़ाना, नियंत्रणों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ाना था।

प्रश्न 10. विनिवेश से क्या अभिप्राय है? इस कार्यक्रम में भारत कहाँ तक सफल रहा है?

उत्तर: सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार द्वारा अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने को विनिवेश कहते हैं। भारत में विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों में समय-समय पर विनिवेश किया गया। इससे सरकार को संसाधन जुटाने और कुछ उपक्रमों में निजी भागीदारी बढ़ाने का अवसर मिला। हालांकि विनिवेश की सफलता का आकलन केवल प्राप्त धन से नहीं, बल्कि कार्यकुशलता, सार्वजनिक हित और दीर्घकालीन आर्थिक परिणामों से भी किया जाना चाहिए।

प्रश्न 11. नई आर्थिक नीति के अंतर्गत बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए सरकार द्वारा कौन-कौन से कदम उठाए गए?

उत्तर:

  1. सरकारी व्यय को नियंत्रित करना।
  2. मुद्रा आपूर्ति की वृद्धि पर नियंत्रण।
  3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करना।
  4. उत्पादन को बढ़ावा देना।
  5. आधारभूत उद्योगों की क्षमता और कार्यकुशलता बढ़ाना।

प्रश्न 12. एकाधिकारी एवं प्रतिबंधक व्यवहार अधिनियम के विषय में आप क्या जानते हैं?

उत्तर: MRTP अधिनियम का उद्देश्य आर्थिक शक्ति के अत्यधिक केंद्रीकरण और एकाधिकारवादी तथा प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहारों पर नियंत्रण रखना था। 1991 की नई औद्योगिक नीति के बाद औद्योगिक विस्तार और निवेश से संबंधित कई पूर्व प्रतिबंधों में ढील दी गई।

प्रश्न 13. पूरे संसार में निजीकरण की लहर के क्या कारण हैं?

उत्तर:

  • सरकार के पास सभी क्षेत्रों में बड़े निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते।
  • निजी क्षेत्र की प्रबंधकीय और तकनीकी दक्षता का उपयोग किया जा सकता है।
  • प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर कार्यकुशलता में सुधार किया जा सकता है।

प्रश्न 14. पारस्परिक कोष पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: म्युचुअल फंड एक निवेश संस्था है जिसमें अनेक निवेशकों की बचत एकत्र की जाती है और उसे विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है। इससे छोटे निवेशकों को भी विविध निवेश साधनों में भाग लेने का अवसर मिलता है।

प्रश्न 15. किन समस्याओं के कारण हमें 1991 में नई आर्थिक नीति अपनानी पड़ी?

उत्तर: 1991 के आर्थिक संकट में भुगतान संतुलन की समस्या, राजकोषीय घाटा, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, बढ़ती कीमतें, सार्वजनिक क्षेत्र की कमजोर कार्यकुशलता, विदेशी ऋण का दबाव और अंतरराष्ट्रीय विश्वास में कमी जैसी समस्याएँ प्रमुख थीं।

प्रश्न 16. सार्वजनिक क्षेत्र के नवरत्न उपक्रमों के नाम लिखें।

उत्तर: पाठ्यपुस्तक के संदर्भ में नवरत्न सार्वजनिक उपक्रमों के उदाहरण के रूप में SAIL, IOCL, HPCL, BPCL, ONGC, BHEL, NTPC, GAIL और MTNL आदि के नाम दिए जाते हैं।

प्रश्न 17. सार्वजनिक उपक्रमों में निजीकरण एवं विनिवेश प्रक्रिया को किन बिंदुओं के आधार पर औचित्यपूर्ण कहा जा सकता है?

उत्तर:

  • निजी प्रबंधन की कार्यकुशलता का उपयोग।
  • सरकार को अतिरिक्त संसाधन प्राप्त होना।
  • घाटे में चलने वाले उपक्रमों पर सरकारी वित्तीय बोझ कम होना।
  • लालफीताशाही और अनावश्यक हस्तक्षेप में कमी।
  • उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. बाह्यस्रोत से क्या अभिप्राय है? सेवाओं के बाह्यकरण के विभिन्न प्रकार समझाइए।

उत्तर: जब कोई संस्था अपने कुछ नियमित या विशेष कार्य किसी बाहरी विशेषज्ञ संस्था से करवाती है, तो इसे बाह्यस्रोत या Outsourcing कहा जाता है। इससे संस्था मुख्य व्यवसाय पर अधिक ध्यान दे सकती है और विशेषज्ञ सेवाओं का लाभ उठा सकती है।

बाह्यकरण के प्रमुख प्रकार

  1. वित्तीय सेवाएँ: वित्तीय सलाह, पूँजी जुटाने और संबंधित विशेषज्ञ कार्य।
  2. विज्ञापन सेवाएँ: उत्पादों और सेवाओं के प्रचार-प्रसार से संबंधित कार्य।
  3. ग्राहक सेवा: कॉल सेंटर और ग्राहक सहायता जैसी सेवाएँ।
  4. IT सेवाएँ: सॉफ्टवेयर, डेटा और तकनीकी सहायता से संबंधित कार्य।

प्रश्न 2. शुल्क का केसकेडिंग प्रभाव समझाएँ। इस प्रभाव से बचने के लिए कौन-सा कर लगाया गया है?

उत्तर: जब उत्पादन और बिक्री की प्रत्येक अवस्था पर पहले से दिए गए कर का उचित समायोजन न हो और अगले चरण में पूरी कीमत पर फिर कर लग जाए, तो कर का भार लगातार बढ़ता जाता है। इसे कर का केसकेडिंग प्रभाव कहते हैं।

उदाहरण के लिए कच्चे माल पर कर लगने के बाद उससे बने उत्पाद की बिक्री पर फिर कर लगाया जाए और अंतिम वस्तु की बिक्री पर भी कर लगे, तो कर का प्रभाव वस्तु की अंतिम कीमत में जुड़ता जाता है।

इस प्रभाव को कम करने के लिए मूल्य वर्धित कर (VAT) जैसी व्यवस्था अपनाई गई, जिसमें उत्पादन के प्रत्येक चरण पर जोड़े गए मूल्य के आधार पर कर व्यवस्था की जाती है।

प्रश्न 3. नीचे तालिका में 1993-94 कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि दर दी गई है। तालिका में दिए गए आँकड़ों को काल श्रेणी आरेख द्वारा दिखाएँ।

उत्तर: इस प्रश्न में दिए गए वर्षों और GDP संवृद्धि दर के आँकड़ों को क्रमवार लेकर X-अक्ष पर वर्ष तथा Y-अक्ष पर संवृद्धि दर (%) दर्शाई जाएगी। प्रत्येक वर्ष के संबंधित बिंदु को अंकित करके उन्हें क्रम से जोड़ने पर काल-श्रेणी आरेख प्राप्त होगा।

Bihar Board Class 11 Economics Chapter 3 GDP संवृद्धि दर का काल-श्रेणी आरेख 1991-92 से 1998-99

आरेख का स्थान: GDP संवृद्धि दर का काल-श्रेणी आरेख

प्रश्न 4. 1991 की नई आर्थिक नीति में क्या परिवर्तन किए गए?

उत्तर: 1991 की नई आर्थिक नीति में मुख्यतः तीन क्षेत्रों में परिवर्तन किए गए—औद्योगिक नीति, विदेशी व्यापार एवं विनिमय नीति तथा राजकोषीय नीति।

1. औद्योगिक नीति में परिवर्तन

  • औद्योगिक लाइसेंसिंग में व्यापक कमी की गई।
  • विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया गया।
  • कई उद्योगों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई।
  • बड़े उद्योगों पर लगे कई पुराने प्रतिबंधों में ढील दी गई।

2. विदेशी व्यापार एवं विनिमय नीति में परिवर्तन

  • आयात शुल्कों में कमी की गई।
  • आयात लाइसेंसिंग में कमी की गई।
  • विदेशी विनिमय व्यवस्था में सुधार किया गया।
  • निर्यात को बढ़ावा देने के लिए व्यापार नीति को अधिक खुला बनाया गया।

3. राजकोषीय नीति में परिवर्तन

  • उत्पाद शुल्क में सुधार।
  • अनुत्पादक सरकारी व्यय में कमी।
  • प्रत्यक्ष करों की दरों को अधिक तर्कसंगत बनाना।
  • सरकारी उपक्रमों में विनिवेश।

प्रश्न 5. प्रतीत होता है कि सुधार प्रक्रिया से कृषि क्षेत्र को कोई लाभ नहीं हुआ है। समझाइए।

उत्तर: आर्थिक सुधारों के दौरान कृषि क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कृषि में सार्वजनिक निवेश, सिंचाई, ग्रामीण आधारभूत संरचना, अनुसंधान और बाजार सुविधाओं की कमी ने कृषि विकास को प्रभावित किया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ने से किसानों के सामने नई चुनौतियाँ आईं। उत्पादन लागत बढ़ने और बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव के कारण छोटे एवं सीमांत किसानों की स्थिति अधिक कठिन हो सकती है। इसलिए आर्थिक सुधारों के साथ कृषि क्षेत्र में सिंचाई, तकनीक, ऋण, भंडारण और बाजार व्यवस्था में निवेश आवश्यक है।

प्रश्न 6. प्रत्यक्ष करों तथा अप्रत्यक्ष करों में भेद करें।

आधारप्रत्यक्ष करअप्रत्यक्ष कर
अर्थजिस कर का भार उसी व्यक्ति पर रहता है जो कर देता है।जिस कर का भार दूसरे व्यक्ति पर स्थानांतरित किया जा सकता है।
उदाहरणआयकर।वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगाए जाने वाले अप्रत्यक्ष कर।
भार का हस्तांतरणसामान्यतः दूसरे व्यक्ति पर स्थानांतरित नहीं होता।वस्तु की कीमत के माध्यम से आगे स्थानांतरित किया जा सकता है।

प्रश्न 7. विकास योजना की प्रारंभिक अवस्थाओं में सार्वजनिक क्षेत्र में क्यों अधिक महत्व दिया गया था?

उत्तर: भारत के प्रारंभिक विकास काल में सार्वजनिक क्षेत्र को महत्वपूर्ण स्थान देने के प्रमुख कारण थे—

  1. विशाल निवेश: भारी उद्योगों के लिए बहुत अधिक पूँजी की आवश्यकता थी।
  2. लाभ प्राप्ति में लंबा समय: कई आधारभूत उद्योगों में लाभ देर से प्राप्त होता है।
  3. राष्ट्रीय हित: रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार की भूमिका आवश्यक थी।
  4. आधारभूत संरचना: बिजली, परिवहन, इस्पात आदि क्षेत्रों का विकास राष्ट्रीय विकास के लिए जरूरी था।

प्रश्न 8. व्यावसायिक संचार के विभिन्न साधनों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: व्यावसायिक संचार का उद्देश्य व्यापारिक सूचनाओं को शीघ्र और प्रभावी ढंग से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना है। इसके प्रमुख साधन हैं—

  • टेलीकॉम: तत्काल बातचीत और सूचना आदान-प्रदान।
  • फैक्स: दस्तावेज और चित्र भेजने का माध्यम।
  • इंटरनेट: वैश्विक स्तर पर सूचना एवं संचार का प्रमुख माध्यम।
  • ई-मेल: इलेक्ट्रॉनिक रूप से संदेश और दस्तावेज भेजना।
  • एक्स्ट्रानेट: व्यापारिक साझेदारों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान।
  • वर्ल्ड वाइड वेब: इंटरनेट आधारित सूचना और व्यावसायिक सेवाओं का माध्यम।
  • वॉइस मेल: आवाज के संदेशों को रिकॉर्ड और प्राप्त करने की व्यवस्था।
  • यूनिफाइड मैसेजिंग: विभिन्न संचार माध्यमों को एकीकृत करके संदेशों का आदान-प्रदान।

प्रश्न 9. प्रशुल्क और अभ्यांश में अंतर बताएँ।

आधारप्रशुल्क (Tariff)अभ्यांश/कोटा (Quota)
अर्थआयातित वस्तु पर लगाया गया शुल्क।आयात की मात्रा या मूल्य की निर्धारित सीमा।
प्रभावआयातित वस्तु की कीमत बढ़ सकती है।आयात की मात्रा सीधे सीमित हो जाती है।
सरकार की आयसरकार को शुल्क के रूप में आय प्राप्त होती है।सिर्फ कोटा लगाने से प्रत्यक्ष शुल्क आय आवश्यक नहीं होती।

प्रश्न 10. मूल्य वर्धित कर (VAT) क्या है? समझाइए। यह विक्रय कर से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: मूल्य वर्धित कर ऐसी कर व्यवस्था है जिसमें उत्पादन या वितरण की प्रत्येक अवस्था पर जोड़े गए मूल्य के आधार पर कर लगाया जाता है।

सूत्र:

वर्धित मूल्य = वस्तु का कुल मूल्य − खरीदी गई कच्ची सामग्री एवं अन्य सामग्री का मूल्य

आधारविक्रय करVAT
कर का आधारबिक्री मूल्य पर कर लगाया जाता है।प्रत्येक चरण में जोड़े गए मूल्य पर कर की व्यवस्था।
कर का प्रभावकर के दोहराव की संभावना हो सकती है।पहले चरण में दिए गए कर का समायोजन संभव होता है।
केसकेडिंग प्रभावहो सकता है।इसे कम करने में सहायता करता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. भारतवर्ष में 1991 तक की आर्थिक नीतियाँ थीं—

(a) प्रतिबंधात्मक

(b) उदारवादी

(c) स्वतंत्र

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) प्रतिबंधात्मक

व्याख्या: 1991 से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था में लाइसेंस, आयात नियंत्रण और अन्य सरकारी प्रतिबंधों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

प्रश्न 2. 1991 के आर्थिक सुधारों को कहते हैं—

(a) पहली पीढ़ी के आर्थिक सुधार

(b) दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधार

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधार

व्याख्या: पाठ्यपुस्तक के अनुसार 1991 के सुधारों को दूसरी पीढ़ी के आर्थिक सुधार कहा गया है।

प्रश्न 3. 1991 के आर्थिक सुधारों के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकारी क्षेत्र के हिस्से की शेयर-पूँजी कुल-स्टॉक की होनी चाहिए—

(a) 51 प्रतिशत

(b) 49 प्रतिशत

(c) 50 प्रतिशत

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) 51 प्रतिशत

व्याख्या: दिए गए पाठ्यपुस्तक प्रश्न के संदर्भ में सरकारी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत मानी गई है।

प्रश्न 4. भारत में नए आर्थिक सुधारों ने सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों में कुल स्टॉक में निजी क्षेत्र की शेयर पूँजी की इजाजत दी—

(a) 51 प्रतिशत

(b) 49 प्रतिशत

(c) 50 प्रतिशत

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) 49 प्रतिशत

व्याख्या: प्रश्न के निर्धारित संदर्भ में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत दी गई है।

प्रश्न 5. WTO का विस्तार रूप है—

(a) विश्व व्यापार संगठन

(b) विश्व यातायात संगठन

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) विश्व व्यापार संगठन

व्याख्या: WTO का पूरा नाम World Trade Organization अर्थात् विश्व व्यापार संगठन है।

प्रश्न 6. विश्व व्यापार संगठन पूरे विश्व के लिए सिफारिश करता है—

(a) मुक्त व्यापार की

(b) प्रतिबंधात्मक व्यापार की

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) मुक्त व्यापार की

व्याख्या: WTO का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करके नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना है।

प्रश्न 7. अस्सी के दशक में वार्षिक वृद्धि दर थी—

(a) 3.5 प्रतिशत

(b) 5.5 प्रतिशत

(c) 4.5 प्रतिशत

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) 5.5 प्रतिशत

व्याख्या: प्रश्न के पाठ्यपुस्तक संदर्भ में 5.5 प्रतिशत उत्तर दिया गया है।

प्रश्न 8. वर्ष 1981-82 में राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद का था—

(a) 14

(b) 6

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) 14

व्याख्या: यह प्रश्न दिए गए स्रोत के निर्धारित विकल्प के अनुसार है।

प्रश्न 9. राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति, विनिमय दर नीति व मजदूरी आय नीति में परिवर्तन को कहते हैं—

(a) व्यष्टि आर्थिक उपाय

(b) समष्टि आर्थिक उपाय

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) समष्टि आर्थिक उपाय

व्याख्या: ये नीतियाँ पूरी अर्थव्यवस्था की आय, रोजगार, कीमतों, मुद्रा और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती हैं, इसलिए इन्हें समष्टि आर्थिक उपाय कहा जाता है।

अध्याय का सारांश

इस अध्याय में भारत की 1991 की नई आर्थिक नीति और उससे जुड़े आर्थिक सुधारों का अध्ययन किया गया है। आर्थिक संकट के कारण भारत ने अपनी आर्थिक नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए। इन सुधारों के तीन प्रमुख आधार उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण थे।

उदारीकरण का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों से अनावश्यक सरकारी नियंत्रण कम करना था। निजीकरण के माध्यम से निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाई गई और विनिवेश द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की प्रक्रिया अपनाई गई। वैश्वीकरण के कारण भारत का विश्व अर्थव्यवस्था के साथ व्यापार, निवेश और तकनीक के माध्यम से संबंध मजबूत हुआ।

आर्थिक सुधारों से सेवा क्षेत्र, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिला, लेकिन कृषि, रोजगार, असमानता और छोटे उत्पादकों से संबंधित चुनौतियाँ भी सामने आईं। इसलिए आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय और जन कल्याण को बनाए रखना आवश्यक है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • नई आर्थिक नीति — जुलाई 1991।
  • नई आर्थिक नीति के तीन आधार — उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण।
  • WTO की स्थापना — 1995।
  • WTO का मुख्यालय — जिनेवा।
  • भारत का केंद्रीय बैंक — RBI।
  • विनिवेश — सरकारी हिस्सेदारी/शेयर की बिक्री।
  • आयात कोटा — आयात की मात्रा या मूल्य की सीमा।
  • प्रशुल्क — आयात पर लगाया जाने वाला शुल्क।
  • VAT — मूल्य वर्धित कर।
  • 1991 के सुधारों का प्रमुख उद्देश्य — अर्थव्यवस्था की कार्यकुशलता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार।

निष्कर्ष

उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण भारत की आर्थिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं। 1991 के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी और विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ी। इस अध्याय को समझने के लिए आर्थिक सुधारों के कारण, LPG के तीनों तत्व, WTO, विनिवेश, निजीकरण, व्यापार नीति तथा सुधारों के कृषि और उद्योग पर प्रभाव को विशेष रूप से याद रखना चाहिए।

इसी अध्याय के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों की तैयारी के लिए Bihar Board Class 11 Economics के सभी अध्याय भी पढ़ें।

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