Bihar Board Class 11 Economics Chapter 4 में निर्धनता की अवधारणा, उसके कारण, निर्धनता रेखा, सापेक्ष एवं निरपेक्ष निर्धनता, ग्रामीण और शहरी निर्धनता तथा निर्धनता उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों का अध्ययन किया गया है। इस अध्याय में बेरोजगारी और निर्धनता के संबंध तथा गरीबी दूर करने के उपायों को भी सरल भाषा में समझाया गया है।
निर्धनता क्या है?
निर्धनता वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी जीवन, स्वास्थ्य और कार्यकुशलता के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ रहता है। इसमें पर्याप्त भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की कमी शामिल हो सकती है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. निर्धनता की परिभाषा दें।
उत्तर: निर्धनता को न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थता के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, जीवन, स्वास्थ्य तथा कार्यकुशलता के लिए आवश्यक न्यूनतम साधनों को प्राप्त करने में असमर्थ होना निर्धनता कहलाता है।
प्रश्न 2. काम के बदले अनाज कार्यक्रम का क्या अर्थ है?
उत्तर: काम के बदले अनाज कार्यक्रम ऐसी व्यवस्था थी जिसमें श्रमिकों को किए गए काम के बदले नकद भुगतान के स्थान पर या उसके साथ निश्चित मात्रा में अनाज दिया जाता था। इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार तथा खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना था।
प्रश्न 3. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक-एक उदाहरण दें।
उत्तर:
- ग्रामीण क्षेत्र: मुर्गीपालन।
- शहरी क्षेत्र: फोटोस्टेट की दुकान।
प्रश्न 4. आय अर्जित करने वाली परिसम्पत्तियों के सृजन से निर्धनता की समस्या का समाधान किस प्रकार हो सकता है?
उत्तर: आय अर्जित करने वाली परिसम्पत्तियों के निर्माण से लोगों को स्थायी या नियमित आय का साधन मिल सकता है। उदाहरण के लिए दुकान, सिंचाई साधन, पशुधन या छोटे व्यवसाय के लिए परिसम्पत्ति उपलब्ध होने से व्यक्ति रोजगार और आय प्राप्त कर सकता है। इससे परिवार की क्रय-शक्ति बढ़ती है और निर्धनता कम करने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 5. भारत सरकार द्वारा निर्धनता पर त्रि-आयामी प्रहार की संक्षेप में व्याख्या करें।
उत्तर: निर्धनता दूर करने के लिए तीन प्रमुख दृष्टिकोण अपनाए गए—
1. आर्थिक संवृद्धि
आर्थिक विकास के माध्यम से उत्पादन, रोजगार और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने का प्रयास किया गया। यह विचार था कि आर्थिक विकास का लाभ धीरे-धीरे समाज के कमजोर वर्गों तक पहुँचेगा।
2. निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम
जिन लोगों को सामान्य आर्थिक विकास का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाया, उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार आधारित विशेष कार्यक्रम चलाए गए।
3. न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम
गरीब लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
प्रश्न 6. सरकार ने बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं के सहायतार्थ कौन से कार्यक्रम अपनाये हैं?
उत्तर: बुजुर्गों, निर्धनों और असहाय महिलाओं की सहायता के लिए सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से पेंशन तथा अन्य सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
प्रश्न 7. क्या निर्धनता और बेरोजगारी के बीच कोई सम्बन्ध है? समझाएँ।
उत्तर: निर्धनता और बेरोजगारी के बीच गहरा संबंध है। बेरोजगार व्यक्ति अपनी श्रम-शक्ति का उपयोग करके नियमित आय प्राप्त नहीं कर पाता। आय कम होने पर उसकी क्रय-शक्ति घटती है और वह भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यकताओं पर पर्याप्त खर्च नहीं कर पाता। इस प्रकार बेरोजगारी निर्धनता को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण परिस्थितियों में से एक है।
प्रश्न 8. सापेक्ष और निरपेक्ष निर्धनता में क्या अन्तर है?
| आधार | सापेक्ष निर्धनता | निरपेक्ष निर्धनता |
|---|---|---|
| अर्थ | दूसरे व्यक्ति, वर्ग या क्षेत्र की तुलना में कम आर्थिक स्थिति को दर्शाती है। | न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधनों के अभाव को दर्शाती है। |
| आधार | आय और जीवन-स्तर की तुलना। | न्यूनतम आवश्यक उपभोग और संसाधनों की उपलब्धता। |
प्रश्न 9. मान लीजिए आप एक निर्धन परिवार से हैं और छोटी सी दुकान खोलने के लिए सरकारी सहायता प्राप्त करना चाहते हैं। आप किस योजना के अन्तर्गत आवेदन देंगे और क्यों?
उत्तर: मैं ऐसी सरकारी स्वरोजगार योजना के अंतर्गत सहायता के लिए आवेदन करूँगा जिसके माध्यम से छोटे व्यवसाय के लिए ऋण तथा सरकारी सहायता मिलती हो। छोटी दुकान शुरू करने से मुझे नियमित आय का साधन प्राप्त होगा और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में सहायता मिलेगी।
प्रश्न 10. ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी में अन्तर स्पष्ट करें।
| आधार | ग्रामीण बेरोजगारी | शहरी बेरोजगारी |
|---|---|---|
| मुख्य स्वरूप | अल्प रोजगार, मौसमी और प्रच्छन्न बेरोजगारी अधिक दिखाई देती है। | खुली तथा शिक्षित बेरोजगारी अधिक दिखाई देती है। |
| मुख्य कारण | कृषि पर अधिक निर्भरता, मौसमी काम और भूमि पर अधिक जनसंख्या का दबाव। | शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ना तथा पर्याप्त रोजगार अवसरों की कमी। |
| उदाहरण | कृषि कार्य समाप्त होने के बाद काम न मिलना। | शिक्षित व्यक्ति को योग्यता के अनुसार नौकरी न मिलना। |
ग्रामीण निर्धनता और शहरी निर्धनता का संबंध
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने पर अनेक लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जाते हैं। यदि शहरों में भी पर्याप्त रोजगार और आवास उपलब्ध नहीं हों, तो वहाँ झुग्गी-बस्तियों तथा असंगठित रोजगार की समस्या बढ़ सकती है। इस प्रकार ग्रामीण निर्धनता और शहरी निर्धनता एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं।
प्रश्न 11. भारत के कुछ राज्यों में निर्धनता रेखा के नीचे की जनसंख्या का प्रयोग करके सापेक्ष निर्धनता की आवश्यकता स्पष्ट करें।
उत्तर: अलग-अलग राज्यों में निर्धनता का अनुपात समान नहीं रहा है। नीचे दिए गए आँकड़े ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्धनता अनुपात की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
| वर्ष | ग्रामीण क्षेत्र (%) | शहरी क्षेत्र (%) |
|---|---|---|
| 1973-74 | 56.4 | 49.0 |
| 1977-78 | 53.1 | 45.2 |
| 1983 | 45.7 | 40.8 |
| 1987-88 | 39.1 | 38.2 |
| 1993-94 | 37.3 | 32.4 |
| 1999-2000 | 27.1 | 23.6 |
| 2007 | 21.1 | 15.1 |
इन आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि समय के साथ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निर्धनता अनुपात में कमी आई। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में कमी की गति समान नहीं रही, इसलिए क्षेत्रीय स्तर पर निर्धनता का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 12. मान लीजिए कि आप किसी गाँव के निवासी हैं। अपने गाँव से निर्धनता निवारण के कुछ प्रस्ताव दीजिए।
उत्तर: गाँव में निर्धनता कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं—
- सिंचाई और कृषि सुविधाओं का विकास किया जाए।
- कृषि में आधुनिक तकनीक का प्रयोग बढ़ाया जाए।
- पशुपालन, मत्स्यपालन और अन्य सहायक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए।
- कृषि का विविधीकरण किया जाए।
- लघु और कुटीर उद्योग विकसित किए जाएँ।
- गाँव में शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
- ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाए।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएँ।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. निर्धनता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: न्यूनतम मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थता की स्थिति निर्धनता कहलाती है।
प्रश्न 2. न्यूनतम मानवीय आवश्यकताओं में किन-किन को शामिल किया जाता है?
उत्तर: भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताएँ न्यूनतम मानवीय आवश्यकताओं में शामिल हैं।
प्रश्न 3. न्यूनतम मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति न होने से मनुष्य पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्यकुशलता और जीवन-स्तर प्रभावित होता है। व्यक्ति के लिए निर्धनता से बाहर निकलना भी कठिन हो सकता है।
प्रश्न 4. निर्धनता शब्द का प्रयोग किन दो अर्थों में किया जाता है?
उत्तर: निर्धनता को मुख्यतः दो रूपों में समझा जाता है—सापेक्ष निर्धनता और निरपेक्ष निर्धनता।
प्रश्न 5. सापेक्ष निर्धनता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जब किसी व्यक्ति या वर्ग की आर्थिक स्थिति की तुलना दूसरे व्यक्ति, वर्ग या क्षेत्र से की जाती है और उसकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर पाई जाती है, तो उसे सापेक्ष निर्धनता कहा जाता है।
प्रश्न 6. निरपेक्ष निर्धनता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जब व्यक्ति न्यूनतम जीवन-आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन प्राप्त नहीं कर पाता, तो उसे निरपेक्ष निर्धनता की स्थिति कहा जाता है।
प्रश्न 7. अधिकांश देशों में किस आधार पर निर्धनता का अनुमान लगाने का प्रयत्न किया जाता है?
उत्तर: न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं और उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक व्यय के आधार पर निर्धनता का अनुमान लगाया जाता है।
प्रश्न 8. भारत में निरपेक्ष निर्धनता का अनुमान लगाने के लिए किस धारणा का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: निर्धनता रेखा की धारणा का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 9. निर्धनता रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर: निर्धनता रेखा वह न्यूनतम सीमा है जिसके आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि व्यक्ति या परिवार न्यूनतम आवश्यक उपभोग स्तर प्राप्त कर पा रहा है या नहीं।
प्रश्न 10. भारत में किस आधार पर निर्धनता रेखा को परिभाषित किया गया है?
उत्तर: ऐतिहासिक रूप से भारत में निर्धनता रेखा निर्धारित करने में न्यूनतम उपभोग और कैलोरी आवश्यकता जैसे मानकों का प्रयोग किया गया है।
प्रश्न 11. भारत के कितने लोग निर्धनता रेखा से नीचे रह रहे हैं?
उत्तर: इस प्रश्न में पाठ्यपुस्तक के पुराने संदर्भ के अनुसार निर्धनता रेखा के नीचे रहने वाली जनसंख्या का उल्लेख किया गया है। अलग-अलग वर्षों में यह अनुपात बदलता रहा है।
प्रश्न 12. भारत के किस राज्य में निर्धनता रेखा से नीचे जनसंख्या का प्रतिशत सबसे कम है?
उत्तर: दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ में पंजाब का नाम दिया गया है।
प्रश्न 13. उन राज्यों के नाम बताइए जहाँ निर्धनता रेखा से नीचे जनसंख्या का प्रतिशत अधिक रहा है।
उत्तर: उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा ऐसे राज्यों में शामिल रहे हैं जहाँ दिए गए ऐतिहासिक संदर्भ में निर्धनता का अनुपात अधिक था।
प्रश्न 14. 1999-2000 में किन दो राज्यों में निर्धनता का अनुपात अधिक था?
उत्तर: बिहार और ओडिशा।
प्रश्न 15. 1973 में गुजरात में कितने प्रतिशत लोग निर्धनता रेखा के नीचे रहते थे?
उत्तर: 1973 के दिए गए संदर्भ में गुजरात में लगभग 48 प्रतिशत लोग निर्धनता रेखा के नीचे थे।
प्रश्न 16. 1973-2000 में निर्धनता रेखा के नीचे रहने वाले लोगों में कितना प्रतिशत की कमी आई?
उत्तर: दिए गए संदर्भ में लगभग 15 प्रतिशत की कमी बताई गई है।
प्रश्न 17. शहरी क्षेत्र में निर्धारित कैलोरी की मात्रा बताइए।
उत्तर: 2100 कैलोरी प्रतिदिन।
प्रश्न 18. ग्रामीण क्षेत्र में निर्धारित कैलोरी की मात्रा बताइए।
उत्तर: 2400 कैलोरी प्रतिदिन।
प्रश्न 19. भारत में दो निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रमों के नाम बताइए।
उत्तर:
- जवाहर रोजगार योजना।
- एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम।
प्रश्न 20. भारत में फैली भयंकर गरीबी के संकेत लिखिए।
उत्तर: झुग्गी-झोपड़ियों की वृद्धि, असुरक्षित आवास, पर्याप्त भोजन एवं स्वच्छ पानी की कमी, कुपोषण और मूलभूत सुविधाओं का अभाव गरीबी के गंभीर संकेत हैं।
प्रश्न 21. किस व्यक्ति को निर्धन व्यक्ति कहते हैं?
उत्तर: जो व्यक्ति जीवन, स्वास्थ्य और कार्यकुशलता के लिए आवश्यक न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होता है, उसे निर्धन कहा जाता है।
प्रश्न 22. अप्रैल 1989 में किन दो कार्यक्रमों को मिलाकर जवाहर रोजगार योजना आरम्भ की गई?
उत्तर: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP) और ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम (RLEGP) को मिलाकर जवाहर रोजगार योजना शुरू की गई।
प्रश्न 23. निर्धनता उन्मूलन के निम्नलिखित उपक्रम कब आरंभ किए गए?
उत्तर: दिए गए पाठ्यक्रम-संदर्भ में इनके आरंभ होने की तिथियाँ क्रमशः 15 अगस्त 1983, अगस्त 1983 तथा अप्रैल 1989 दी गई हैं।
प्रश्न 24. राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में 100 दिन का रोजगार कब कानूनी अधिकार बना?
उत्तर: 2 फरवरी 2006 को ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार की कानूनी गारंटी लागू हुई।
प्रश्न 25. शहरी निर्धनता उन्मूलन के दो कार्यक्रम बताइए।
उत्तर:
- प्रधानमंत्री रोजगार योजना।
- स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना।
प्रश्न 26. शहरी क्षेत्रों में कौन-से लोग निरंतर निर्धनता की स्थिति में रह सकते हैं?
उत्तर: ठेला चलाने वाले, छोटे फुटपाथ विक्रेता, मोची, भिखारी, घरेलू या असंगठित क्षेत्र के कम आय वाले श्रमिक और कचरा बीनने वाले लोग लंबे समय तक आर्थिक असुरक्षा का सामना कर सकते हैं।
प्रश्न 27. 1999-2000 में ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र के लिए निर्धनता रेखा कैसे परिभाषित की गई थी?
उत्तर: दिए गए ऐतिहासिक संदर्भ में ग्रामीण क्षेत्र के लिए लगभग ₹328 और शहरी क्षेत्र के लिए ₹454 प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय का उल्लेख है।
प्रश्न 28. शहरी क्षेत्र में पाँच सदस्य वाले एक परिवार का मासिक उपभोग व्यय ₹2,000 है। क्या यह परिवार निर्धनता रेखा के नीचे रह रहा है?
उत्तर:
कुल मासिक उपभोग व्यय = ₹2,000
परिवार के सदस्य = 5
प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय = ₹2,000 ÷ 5 = ₹400
दिए गए संदर्भ में शहरी निर्धनता रेखा ₹454 है। ₹400, ₹454 से कम है। इसलिए यह परिवार निर्धनता रेखा के नीचे है।
प्रश्न 29. निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम किस पंचवर्षीय योजना से आरम्भ किया गया था?
उत्तर: दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ में निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम को तृतीय पंचवर्षीय योजना से जोड़ा गया है।
प्रश्न 30. प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) का क्या उद्देश्य था?
उत्तर: PMRY का उद्देश्य शिक्षित बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार शुरू करने में सहायता करना था।
प्रश्न 31. स्वर्ण जयंती रोजगार योजना (SJSRY) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: शहरी गरीबों को स्वरोजगार तथा मजदूरी आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना इसका प्रमुख उद्देश्य था।
प्रश्न 32. ग्रामीण रोजगार उत्पन्न कार्यक्रम (REGP) का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर पैदा करना और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देना इसका प्रमुख उद्देश्य था।
प्रश्न 33. स्वरोजगार कार्यक्रम के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
- स्वर्ण जयंती रोजगार योजना।
- प्रधानमंत्री रोजगार योजना।
- ग्रामीण रोजगार उत्पन्न कार्यक्रम।
प्रश्न 34. स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 1990 से पूर्व वित्तीय सहायता किनको प्रदान की जाती थी?
उत्तर: दिए गए संदर्भ में वित्तीय सहायता मुख्य रूप से व्यक्तिगत लाभार्थियों या व्यक्तिगत परिवारों को प्रदान की जाती थी।
प्रश्न 35. भारत में निर्धनता की कोई दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
- निर्धनता का स्वरूप अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग होता है।
- ग्रामीण निर्धनता से जुड़ी समस्याएँ शहरी क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
प्रश्न 36. कोई दो शहरी निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम लिखें।
उत्तर:
- प्रधानमंत्री रोजगार योजना।
- स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना।
प्रश्न 37. बेरोजगारी किस प्रकार निर्धनता से संबंधित है?
उत्तर: बेरोजगारी से व्यक्ति की आय कम या समाप्त हो जाती है। इससे परिवार की प्रति व्यक्ति उपभोग क्षमता घटती है और भोजन, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता है। इसलिए बेरोजगारी निर्धनता को बढ़ा सकती है।
प्रश्न 38. वृद्ध लोगों तथा निर्धन महिलाओं की सहायता के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा कौन-सा कार्यक्रम आरंभ किया गया?
उत्तर: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme) आरंभ किया गया।
प्रश्न 39. देश में निर्धनता उन्मूलन के लिए सरकार ने अब तक कौन-कौन सी विधियाँ अपनाई हैं?
उत्तर:
- आर्थिक विकास।
- निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम।
- न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम।
प्रश्न 40. न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य लिखें।
उत्तर: इसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराकर जीवन-स्तर में सुधार करना था।
लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. आजकल किसान आत्महत्याएँ क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: किसानों की गंभीर आर्थिक समस्याओं में ऋण का बोझ, फसल की कम उपज, उत्पादन लागत में वृद्धि, उचित मूल्य न मिलना और प्राकृतिक आपदाओं से फसल का नुकसान शामिल हो सकते हैं। जब किसान लगातार आर्थिक नुकसान और ऋण के दबाव में रहता है, तो उसकी स्थिति अत्यंत कठिन हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए सस्ती संस्थागत ऋण व्यवस्था, फसल बीमा, सिंचाई, बाजार सुविधा और उचित मूल्य जैसी सहायता महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. निर्धनता को दूर करने के लिए छः सुझाव दीजिए।
उत्तर:
- आय और संपत्ति की असमानता को कम किया जाए।
- लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
- स्वरोजगार और कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए।
- गरीब परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा मजबूत की जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए।
प्रश्न 3. हमारे निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम इच्छित परिणाम क्यों नहीं प्राप्त कर सके? कारण लिखें।
उत्तर:
- दूरस्थ क्षेत्रों तक योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं पहुँचना।
- प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी।
- भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ।
- पर्याप्त संसाधनों का अभाव।
- भूमि और संपत्ति का असमान वितरण।
- लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पूरी तरह न पहुँच पाना।
- संसाधनों का उचित उपयोग न होना।
- प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी।
- स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के दबाव।
प्रश्न 4. मान लो शहरी क्षेत्र में निर्धनता रेखा प्रतिमास प्रति व्यक्ति ₹454 है। शहर में रहने वाले एक 10 सदस्यीय परिवार की कुल मासिक आय ₹75,000 है। बताइए कि वह परिवार निर्धनता रेखा के नीचे है या ऊपर?
उत्तर:
कुल मासिक आय = ₹75,000
परिवार के सदस्य = 10
प्रति व्यक्ति मासिक आय = ₹75,000 ÷ 10 = ₹7,500
प्रति व्यक्ति ₹7,500, दिए गए ₹454 के निर्धनता-रेखा मान से अधिक है। इसलिए दिए गए प्रश्न के अनुसार यह परिवार निर्धनता रेखा से ऊपर है।
प्रश्न 5. निर्धनों के बच्चे दीर्घायु क्यों नहीं होते हैं?
उत्तर: निर्धन परिवारों में बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल और उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं मिल पातीं। गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त देखभाल और बच्चों के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा का अभाव भी स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। कुपोषण और उपचार की कमी से बच्चों में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
प्रश्न 6. अधिसूचित जिलों के परिवार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत किन अधिकारों का उपभोग कर सकते हैं?
उत्तर:
- रोजगार की मांग करने का अधिकार।
- निर्धारित अवधि में रोजगार प्राप्त करने का अधिकार।
- समय पर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते का अधिकार।
- निर्धारित मजदूरी पाने का अधिकार।
- कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएँ प्राप्त करने का अधिकार।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की विशेषताएँ लिखें।
उत्तर: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार का कानूनी अधिकार प्रदान करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना था। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- रोजगार उपलब्ध कराने की कानूनी गारंटी।
- पंचायती राज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका।
- पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर।
- सामाजिक लेखा-परीक्षा की व्यवस्था।
- शिकायत निवारण की व्यवस्था।
- महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा।
- ग्रामीण श्रमिकों का पंजीकरण और जॉब कार्ड।
- रोजगार की मांग करने का अधिकार।
- निर्धारित दूरी के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास।
प्रश्न 2. भारत में निर्धनता के मुख्य कारण समझाइए।
उत्तर: भारत में निर्धनता के पीछे आर्थिक, सामाजिक और ऐतिहासिक कारणों का योगदान रहा है। प्रमुख कारण इस प्रकार हैं—
1. बेरोजगारी
रोजगार के पर्याप्त अवसर न मिलने से लोगों की आय कम रहती है और वे अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते।
2. जनसंख्या वृद्धि
यदि रोजगार और उत्पादन की वृद्धि जनसंख्या वृद्धि की तुलना में कम हो, तो प्रति व्यक्ति उपलब्ध आय और संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
3. आय का असमान वितरण
राष्ट्रीय आय का असमान वितरण होने पर आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचता।
4. उत्पादन की धीमी वृद्धि
कृषि और उद्योग में पर्याप्त उत्पादन वृद्धि न होने पर रोजगार और आय के अवसर सीमित हो सकते हैं।
5. कीमतों में वृद्धि
वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने पर समान आय से कम वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं। इससे गरीब परिवारों की वास्तविक क्रय-शक्ति प्रभावित होती है।
6. कृषि का पिछड़ापन
कृषि पर बड़ी आबादी की निर्भरता और कृषि उत्पादकता की कम वृद्धि ग्रामीण निर्धनता का महत्वपूर्ण कारण रही है।
7. सामाजिक कारण
निरक्षरता, शिक्षा की कमी, सामाजिक रूढ़ियाँ और अंधविश्वास आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
8. ऐतिहासिक कारण
औपनिवेशिक काल में भारतीय अर्थव्यवस्था के शोषण और पारंपरिक उद्योगों के कमजोर होने का प्रभाव स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर पड़ा।
प्रश्न 3. जवाहर रोजगार योजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर: जवाहर रोजगार योजना अप्रैल 1989 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों के लिए अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करना था। यह योजना ग्रामीण बेरोजगारी और अल्प रोजगार को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यक्रम थी।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ थीं—
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन।
- गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों पर विशेष ध्यान।
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को प्राथमिकता।
- महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना।
- ग्रामीण आधारभूत संरचना के निर्माण को बढ़ावा देना।
प्रश्न 4. गरीबी निवारण कार्यक्रमों को लागू करने की क्या आवश्यकता थी? इन्हें पहले क्यों नहीं आरम्भ किया गया?
उत्तर: प्रारंभिक योजना काल में यह विश्वास था कि आर्थिक विकास और उत्पादन में वृद्धि के लाभ धीरे-धीरे समाज के कमजोर वर्गों तक पहुँचेंगे। रोजगार, मजदूरी और उत्पादन में वृद्धि के माध्यम से निर्धनता कम होने की अपेक्षा की गई थी।
लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि केवल आर्थिक संवृद्धि से समाज के सभी वर्गों को समान लाभ नहीं मिल रहा है। कुछ परिवारों और सामाजिक वर्गों को विशेष सहायता की आवश्यकता बनी रही। इसलिए रोजगार, स्वरोजगार, न्यूनतम आवश्यकताओं और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विशेष गरीबी निवारण कार्यक्रमों की आवश्यकता महसूस हुई।
प्रश्न 5. भारत में गरीबी उन्मूलन के लिए सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए हैं? उनका संक्षेप में वर्णन दें।
उत्तर: निर्धनता कम करने के लिए सरकार ने विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से कई उपाय किए। प्रमुख उपाय हैं—
1. लघु एवं कुटीर उद्योग
छोटे उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का प्रयास किया गया।
2. ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम
ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न रोजगार योजनाएँ लागू की गईं।
3. न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम
शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बढ़ावा दिया गया।
4. प्रधानमंत्री रोजगार योजना
शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता देने का प्रयास किया गया।
5. रोजगार आश्वासन कार्यक्रम
ग्रामीण गरीबों को विशेष रूप से कृषि के मंदी वाले मौसम में रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
6. सामाजिक सहायता कार्यक्रम
वृद्ध, विधवा और अन्य कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सहायता की व्यवस्था की गई।
प्रश्न 6. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर: स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। इसके अंतर्गत गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करके प्रशिक्षण, बैंक ऋण और सरकारी सहायता के माध्यम से छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
मुख्य विशेषताएँ
- ग्रामीण गरीबों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
- स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना।
- बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराना।
- सरकारी सहायता के माध्यम से छोटे उद्यम स्थापित करने में मदद करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और लघु उद्योगों को बढ़ावा देना।
प्रश्न 7. निर्धन परिवारों की कुछ विशेषताएँ लिखें।
उत्तर: निर्धन परिवारों में मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधनों का अभाव रहता है। उनकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- आवास की समस्या: घर कमजोर या असुरक्षित हो सकता है।
- संपत्ति की कमी: भूमि और अन्य आय-सृजन करने वाली परिसंपत्तियाँ कम होती हैं।
- खराब स्वास्थ्य: पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी रहती है।
- ऋणग्रस्तता: आवश्यकताओं के लिए ऋण लेने के कारण कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
- शिक्षा की कमी: बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
- बड़ा परिवार: आश्रित सदस्यों की संख्या अधिक होने पर प्रति व्यक्ति उपलब्ध संसाधन कम हो सकते हैं।
- मूलभूत सुविधाओं का अभाव: बिजली, स्वच्छ पानी और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएँ सीमित हो सकती हैं।
- लैंगिक असमानता: गरीब परिवारों में लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा निर्णय लेने के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
- सामाजिक एवं आर्थिक कमजोरी: कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण सरकारी और सामाजिक संसाधनों तक पहुँच सीमित हो सकती है।
प्रश्न 8. निर्धनता रेखा को कैसे निर्धारित किया जाता है?
उत्तर: निर्धनता रेखा निर्धारित करने का उद्देश्य यह पहचानना है कि कौन-से व्यक्ति या परिवार न्यूनतम जीवन-आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। इसके लिए न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं और उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक व्यय को आधार बनाया जाता है।
ऐतिहासिक रूप से भारत में निर्धनता मापने के लिए कैलोरी आवश्यकता और प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय जैसे मानकों का प्रयोग किया गया। दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ में ग्रामीण क्षेत्र के लिए 2400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्र के लिए 2100 कैलोरी प्रतिदिन का उल्लेख है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी पाँच सदस्यीय शहरी परिवार का मासिक उपभोग व्यय ₹2,000 है, तो प्रति व्यक्ति व्यय ₹400 होगा। यदि निर्धारित गरीबी-रेखा ₹454 है, तो ₹400 का प्रति व्यक्ति व्यय उस सीमा से कम होने के कारण परिवार निर्धनता रेखा के नीचे माना जाएगा।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. नीति/योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए गरीबी रेखा का निर्धारण होना चाहिए—
(a) बहुत ऊँचा
(b) बहुत नीचा
(c) न बहुत ऊँचा न बहुत नीचा
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) न बहुत ऊँचा न बहुत नीचा
व्याख्या: गरीबी रेखा ऐसी होनी चाहिए जिससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों की सही पहचान हो सके और योजनाओं का लाभ लक्षित वर्ग तक पहुँच सके।
प्रश्न 2. भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण करने के लिए प्रयोग किया जाता है—
(a) आय को
(b) उपभोग को
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) उपभोग को
व्याख्या: दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ में निर्धनता मापने के लिए उपभोग व्यय को आधार माना गया है।
प्रश्न 3. भारत में ग्रामीण लोगों के लिए आवश्यक कैलोरी मान है—
(a) 2400
(b) 2100
(c) 2500
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) 2400
व्याख्या: दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ में ग्रामीण क्षेत्र के लिए 2400 कैलोरी प्रतिदिन का मान दिया गया है।
प्रश्न 4. शहरी भारतीयों के लिए आवश्यक औसत कैलोरी मान है—
(a) 2400
(b) 2100
(c) 2500
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) 2100
व्याख्या: दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ में शहरी क्षेत्र के लिए 2100 कैलोरी प्रतिदिन का मान दिया गया है।
प्रश्न 5. 1999-00 में ग्रामीण गरीबी का प्रतिशत था—
(a) 27.1
(b) 27.6
(c) 26.1
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) 27.1
व्याख्या: दिए गए ऐतिहासिक आँकड़ों के अनुसार 1999-2000 में ग्रामीण निर्धनता अनुपात 27.1 प्रतिशत था।
प्रश्न 6. 1999-00 में भारत में गरीबी का स्तर था—
(a) 27.1
(b) 27.6
(c) 26.1
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) 26.1
व्याख्या: दिए गए प्रश्न के ऐतिहासिक संदर्भ में भारत का निर्धनता अनुपात 26.1 प्रतिशत दिया गया है।
प्रश्न 7. भारतवर्ष में विकास प्रखण्डों की संख्या है—
(a) 4000
(b) 5000
(c) 6000
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) 4000
व्याख्या: यह उत्तर दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ के अनुसार है।
प्रश्न 8. समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम शुरू किया गया—
(a) 1983 में
(b) 1980 में
(c) 1989 में
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (b) 1980 में
व्याख्या: दिए गए पाठ्यपुस्तक संदर्भ में IRDP के लिए 1980 का वर्ष दिया गया है।
प्रश्न 9. मजदूरी रोजगार कार्यक्रम एवं मजदूरी रोजगार योजना का एकीकरण किया गया—
(a) 1983 में
(b) 1980 में
(c) 1989 में
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (c) 1989 में
व्याख्या: 1989 में संबंधित ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों को मिलाकर जवाहर रोजगार योजना शुरू की गई।
प्रश्न 10. मजदूरी रोजगार कार्यक्रम एवं मजदूरी रोजगार योजना के एकीकरण के बाद नाम रखा गया—
(a) जवाहर रोजगार
(b) ग्रामीण समृद्धि योजना
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (a) जवाहर रोजगार
व्याख्या: संबंधित कार्यक्रमों के एकीकरण के बाद जवाहर रोजगार योजना का गठन किया गया।
अध्याय का सारांश
निर्धनता केवल कम आय की समस्या नहीं है, बल्कि यह भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, रोजगार और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की कमी से भी जुड़ी होती है। निर्धनता को समझने के लिए सापेक्ष और निरपेक्ष दोनों दृष्टिकोण महत्वपूर्ण हैं।
बेरोजगारी, आय की असमानता, कृषि का पिछड़ापन, कम उत्पादकता, कीमतों में वृद्धि, शिक्षा की कमी और सामाजिक कारण निर्धनता को प्रभावित कर सकते हैं। निर्धनता दूर करने के लिए आर्थिक विकास के साथ रोजगार, स्वरोजगार, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- निर्धनता — न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थता।
- निर्धनता के दो प्रमुख रूप — सापेक्ष और निरपेक्ष।
- निर्धनता रेखा — न्यूनतम उपभोग स्तर की पहचान का आधार।
- ग्रामीण क्षेत्र की ऐतिहासिक कैलोरी आवश्यकता — 2400 कैलोरी प्रतिदिन।
- शहरी क्षेत्र की ऐतिहासिक कैलोरी आवश्यकता — 2100 कैलोरी प्रतिदिन।
- जवाहर रोजगार योजना — 1989।
- राष्ट्रीय रोजगार गारंटी व्यवस्था — ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी।
- गरीबी उन्मूलन के प्रमुख तरीके — आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम।
- ग्रामीण निर्धनता में कृषि और रोजगार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- शहरी निर्धनता में रोजगार, आवास और असंगठित क्षेत्र की समस्याएँ महत्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष
निर्धनता एक बहुआयामी आर्थिक और सामाजिक समस्या है। इसे केवल आय बढ़ाकर समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए रोजगार के अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास और आय के बेहतर वितरण जैसे उपायों की आवश्यकता होती है। आर्थिक विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उसका लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक भी पहुँचे।
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