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Bihar Board Class 11 Economics Solutions Chapter 9 पर्यावरण और धारणीय विकास

Bihar Board Class 11 Economics Chapter 9 – पर्यावरण और धारणीय विकास में पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण संकट, प्रदूषण तथा धारणीय विकास की महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों, पर्यावरण के कार्यों, भू-क्षय, प्रदूषण तथा वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच संसाधनों के संतुलित उपयोग को समझाया गया है।

Table of Contents

पर्यावरण और धारणीय विकास के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

पर्यावरण की मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 1. पर्यावरण को कैसे परिभाषित किया जा सकता है? पर्यावरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: पर्यावरण से आशय हमारे चारों ओर उपस्थित उन सभी जैविक और अजैविक तत्वों के समग्र रूप से है, जो एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। इसमें मनुष्य, पशु, पौधे, वायु, जल, भूमि तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन शामिल होते हैं।

प्रश्न 2. जब संसाधन निस्सरण की दर उनके पुनर्जनन की दर से बढ़ जाती है तो क्या होता है?

उत्तर: जब प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग या निष्कर्षण की दर उनके पुनर्जनन की दर से अधिक हो जाती है, तब संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे संसाधनों की कमी होने लगती है और पर्यावरण जीवन-समर्थन का अपना कार्य प्रभावी ढंग से नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप पर्यावरण संकट उत्पन्न हो सकता है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में वर्गीकृत करें।

संसाधनवर्ग
वृक्षनवीकरणीय संसाधन
मछलीनवीकरणीय संसाधन
पेट्रोलियमगैर-नवीकरणीय संसाधन
कोयलागैर-नवीकरणीय संसाधन
लौह अयस्कगैर-नवीकरणीय संसाधन
जलनवीकरणीय संसाधन

प्रश्न 4. आजकल विश्व के सामने दो प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ कौन-सी हैं?

उत्तर: आज विश्व के सामने प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं में तेजी से बढ़ती जनसंख्या तथा विकसित देशों के उच्च उपभोग और उत्पादन स्तर से उत्पन्न पर्यावरणीय दबाव प्रमुख हैं। इनसे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव तथा प्रदूषण की समस्या बढ़ती है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित कारक भारत में पर्यावरण संकट में किस प्रकार योगदान करते हैं?

कारकपर्यावरणीय प्रभाव
बढ़ती जनसंख्याआवास, स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु और अन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
वायु प्रदूषणवायु की गुणवत्ता खराब होती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ती हैं।
जल प्रदूषणजल की गुणवत्ता प्रभावित होती है और जलजनित रोगों का खतरा बढ़ता है।
उच्च उपभोग स्तरप्राकृतिक संसाधनों की मांग और अपशिष्ट की मात्रा बढ़ती है।
निरक्षरतापर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता की कमी समस्या को बढ़ा सकती है।
औद्योगीकरणशहरीकरण, औद्योगिक अपशिष्ट और विभिन्न प्रकार के प्रदूषण में वृद्धि हो सकती है।
वन क्षेत्र में कमीजैव विविधता, मृदा संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है।
अवैध वन कटाईवनों की कमी, मृदा क्षरण और जैव विविधता की हानि होती है।
वैश्विक उष्णताजलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन की समस्या बढ़ती है।

प्रश्न 6. पर्यावरण के क्या कार्य हैं?

उत्तर: पर्यावरण के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

  1. यह नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों की पूर्ति करता है।
  2. यह विभिन्न प्रकार के अवशेषों को समाहित करता है।
  3. यह जैव विविधता को बनाए रखते हुए जीवन का पोषण करता है।
  4. यह प्राकृतिक सौंदर्य और मनोरंजन जैसी सेवाएँ प्रदान करता है।

प्रश्न 7. भारत में भू-क्षय के लिए उत्तरदायी छह कारकों की पहचान करें।

उत्तर: भारत में भू-क्षय के प्रमुख कारण हैं—

  1. वनों का विनाश।
  2. जलाऊ लकड़ी और चारे का अत्यधिक निष्कर्षण।
  3. अत्यधिक या अनुचित खेती।
  4. वन भूमि पर अतिक्रमण।
  5. वनों में आग और अत्यधिक चराई।
  6. रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अनुचित प्रयोग।

प्रश्न 8. नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों की अवसर लागत अधिक क्यों होती है?

उत्तर: पर्यावरणीय क्षति की अवसर लागत अधिक होती है क्योंकि पर्यावरण के खराब होने से केवल प्राकृतिक संसाधनों को ही नुकसान नहीं पहुँचता, बल्कि स्वास्थ्य, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियाँ भी प्रभावित होती हैं। जल स्रोतों के प्रदूषित होने, संसाधनों के समाप्त होने और वायु की गुणवत्ता खराब होने से सरकार तथा समाज को अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। नए संसाधनों की खोज, प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अधिक धन खर्च होता है। इसलिए नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों की अवसर लागत काफी अधिक हो सकती है।

प्रश्न 9. भारत में धारणीय विकास की प्राप्ति के लिए उपयुक्त उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: भारत में धारणीय विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—

  1. LPG और गोबर गैस का प्रयोग: स्वच्छ ईंधन के प्रयोग से पारंपरिक ईंधनों पर दबाव और वायु प्रदूषण कम किया जा सकता है।
  2. CNG का प्रयोग: सार्वजनिक परिवहन में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन के प्रयोग से वायु प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलती है।
  3. पवन ऊर्जा: उपयुक्त क्षेत्रों में पवन चक्कियों द्वारा बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।
  4. सौर ऊर्जा: फोटोवोल्टिक तकनीक के माध्यम से सूर्य की ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है।
  5. लघु जल विद्युत परियोजनाएँ: पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे जल स्रोतों से स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पन्न की जा सकती है।
  6. पारंपरिक ज्ञान का प्रयोग: स्थानीय और पारंपरिक पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  7. जैविक खाद: जैविक कंपोस्ट खाद के प्रयोग से मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
  8. जैविक कीट नियंत्रण: रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग को कम करके पर्यावरण-अनुकूल कीट नियंत्रण विधियों को अपनाया जा सकता है।

प्रश्न 10. “भारत में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है।” इस कथन के समर्थन में तर्क दें।

उत्तर: भारत में प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त विविधता पाई जाती है। देश में उपजाऊ भूमि, अनेक नदियाँ और उपनदियाँ, वन, खनिज तथा समुद्री संसाधन उपलब्ध हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लौह-अयस्क, बॉक्साइट, ताँबा, मैंगनीज, जस्ता, यूरेनियम आदि खनिज पाए जाते हैं। पर्वतीय क्षेत्र, वन और विस्तृत समुद्री क्षेत्र भी देश के प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

प्रश्न 11. क्या पर्यावरण संकट एक नवीन परिघटना है? यदि हाँ तो क्यों?

उत्तर: आधुनिक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में पर्यावरण संकट को अपेक्षाकृत नवीन समस्या माना जाता है। विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं में संसाधनों की मांग और प्रदूषण का स्तर पर्यावरण की क्षमता के भीतर था। औद्योगीकरण, जनसंख्या वृद्धि और उत्पादन एवं उपभोग में तेजी के कारण प्राकृतिक संसाधनों की मांग बढ़ी तथा प्रदूषण भी बढ़ा। जब संसाधनों का उपयोग उनकी पुनर्जनन क्षमता से अधिक होने लगा और अपशिष्ट पर्यावरण की अवशोषी क्षमता से अधिक हो गया, तब पर्यावरण संकट गंभीर रूप से सामने आया।

प्रश्न 12. पर्यावरणीय संसाधनों के अति प्रयोग और दुरुपयोग के दो-दो उदाहरण दें।

श्रेणीउदाहरण
अति प्रयोगकोयला, पेट्रोलियम
दुरुपयोगजल, पेट्रोलियम

पर्यावरण संकट और अवसर लागत

प्रश्न 13. पर्यावरण की चार प्रमुख क्रियाओं का वर्णन कीजिए। पर्यावरणीय हानि की भरपाई की अवसर लागत भी समझाइए।

उत्तर: पर्यावरण की चार प्रमुख क्रियाएँ निम्नलिखित हैं—

  1. संसाधनों की पूर्ति: पर्यावरण नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय दोनों प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराता है।
  2. अवशेषों का समाहार: पर्यावरण विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट और अवशेषों को एक सीमा तक समाहित करता है।
  3. जीवन का पोषण: पर्यावरण जैव विविधता को बनाए रखता है और जीवों के जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ प्रदान करता है।
  4. सौंदर्यात्मक सेवाएँ: प्राकृतिक दृश्य, वन, नदियाँ और अन्य प्राकृतिक स्थल मानव को सौंदर्य एवं मनोरंजन संबंधी सेवाएँ प्रदान करते हैं।

जब संसाधनों का निष्कर्षण उनकी पुनर्जनन क्षमता से अधिक हो जाता है या प्रदूषण पर्यावरण की अवशोषी क्षमता से अधिक हो जाता है, तब पर्यावरणीय क्षति उत्पन्न होती है। इस क्षति को दूर करने के लिए स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और नई तकनीक पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। यही पर्यावरणीय क्षति की अवसर लागत को बढ़ाता है।

प्रश्न 14. पर्यावरणीय संसाधनों की पूर्ति-माँग के अतिक्रमण की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: जब प्राकृतिक संसाधनों की मांग उनकी उपलब्ध आपूर्ति या पुनर्जनन क्षमता से अधिक हो जाती है, तब पर्यावरणीय संसाधनों की मांग और पूर्ति के बीच असंतुलन उत्पन्न होता है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और उच्च उपभोग के कारण संसाधनों की मांग बढ़ती है। यदि यह मांग प्राकृतिक संसाधनों की पुनःपूर्ति की क्षमता से अधिक हो जाए, तो संसाधनों की कमी और पर्यावरण संकट उत्पन्न होने लगता है।

प्रश्न 15. वर्तमान पर्यावरण संकट का वर्णन करें।

उत्तर: वर्तमान पर्यावरण संकट के प्रमुख रूपों में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा क्षरण, प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन, वनों की कमी, वैश्विक उष्णता और जैव विविधता पर दबाव शामिल हैं। नदियों और अन्य जल स्रोतों के प्रदूषण से स्वच्छ जल की उपलब्धता प्रभावित होती है। वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ती हैं। प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से उनकी उपलब्धता पर भी दबाव पड़ता है।

प्रश्न 16. भारत में विकास के दो गंभीर नकारात्मक प्रभावों को उजागर करें। भारत की पर्यावरण समस्याओं में एक विरोधाभास है—एक तो यह निर्धनता जनित है और दूसरे जीवन स्तर में संपन्नता का कारण भी है। क्या यह सत्य है?

उत्तर: भारत में विकास और जनसंख्या वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। इसके प्रमुख नकारात्मक प्रभावों में भूमि क्षरण और शहरी वायु प्रदूषण शामिल हैं। वन, जल और भूमि जैसे संसाधनों पर बढ़ते दबाव से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है।

भारत की पर्यावरणीय समस्याओं का संबंध निर्धनता और समृद्धि दोनों से हो सकता है। निर्धनता की स्थिति में लोग अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक निर्भर हो सकते हैं, जबकि उच्च उपभोग और औद्योगिक गतिविधियाँ भी संसाधनों के अधिक उपयोग तथा प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं।

धारणीय विकास

प्रश्न 17. धारणीय विकास क्या है?

उत्तर: धारणीय विकास से आशय ऐसे विकास से है जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार की जाए कि भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता प्रभावित न हो। इसमें आर्थिक विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण की गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है।

प्रश्न 18. अपने आस-पास के क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए धारणीय विकास की चार रणनीतियाँ सुझाइए।

उत्तर: धारणीय विकास के लिए निम्नलिखित रणनीतियाँ अपनाई जा सकती हैं—

  1. गैर-पारंपरिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का प्रयोग।
  2. सार्वजनिक परिवहन में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन का उपयोग।
  3. पवन एवं सौर ऊर्जा का विकास।
  4. लघु जल विद्युत परियोजनाओं का उपयोग।

प्रश्न 19. धारणीय विकास की परिभाषा में वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच समता के विचार की व्याख्या करें।

उत्तर: धारणीय विकास का मूल विचार यह है कि वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते समय प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा अत्यधिक उपयोग न करे जिससे भावी पीढ़ियों के लिए संसाधन और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध न रहें। इसलिए वर्तमान और भावी पीढ़ियों के बीच संसाधनों और पर्यावरणीय अवसरों के उपयोग में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 20. संसाधनों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?

उत्तर: संसाधनों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जा सकता है—नवीकरणीय संसाधन और गैर-नवीकरणीय संसाधन।

प्रश्न 21. नवीकरणीय संसाधन किन्हें कहते हैं? उदाहरण दें।

उत्तर: ऐसे संसाधन जिनकी प्राकृतिक परिस्थितियों में पुनःपूर्ति हो सकती है, नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं। उदाहरण—वन, जल और सूर्य का प्रकाश।

प्रश्न 22. गैर-नवीकरणीय संसाधन किन्हें कहते हैं? उदाहरण दें।

उत्तर: ऐसे संसाधन जिनका भंडार सीमित होता है और जिनके उपयोग के साथ उनका भंडार कम होता जाता है, गैर-नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं। उदाहरण—कोयला, पेट्रोलियम और लौह अयस्क।

प्रश्न 23. पर्यावरण अध्ययन की विषय-वस्तु क्या है?

उत्तर: पर्यावरण अध्ययन की विषय-वस्तु मुख्यतः जैविक और अजैविक घटकों तथा उनके बीच के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन है।

प्रश्न 24. जैविक और अजैविक तत्वों के तीन-तीन उदाहरण दें।

जैविक तत्वअजैविक तत्व
पक्षीहवा
पशुपानी
पौधेभूमि

प्रश्न 25. पर्यावरण के कोई दो कार्य लिखें।

उत्तर: पर्यावरण संसाधनों की पूर्ति करता है तथा प्राकृतिक सौंदर्य एवं अन्य पर्यावरणीय सेवाएँ प्रदान करता है।

प्रश्न 26. वायु प्रदूषण तथा जल प्रदूषण से होने वाली एक-एक बीमारी का नाम लिखें।

उत्तर: वायु प्रदूषण से दमा तथा जल प्रदूषण से हैजा जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं।

प्रश्न 27. पर्यावरण की अवशोषी क्षमता का क्या अर्थ है?

उत्तर: पर्यावरण की अवशोषी क्षमता से आशय पर्यावरण की एक सीमा तक अपशिष्ट और प्रदूषकों को समाहित करने की क्षमता से है।

प्रश्न 28. पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा से क्या अर्थ है?

उत्तर: पर्यावरण की धारण क्षमता की सीमा वह स्थिति है जिसमें संसाधनों का निष्कर्षण उनकी पुनर्जनन क्षमता से अधिक नहीं होता और उत्पन्न अपशिष्ट पर्यावरण की समाहार क्षमता के भीतर रहता है।

प्रश्न 29. किस परिस्थिति में पर्यावरण अपना तीसरा कार्य करने में असफल होता है?

उत्तर: जब संसाधनों का निष्कर्षण उनकी पुनर्जनन क्षमता से अधिक हो जाता है और उत्पन्न अपशिष्ट पर्यावरण की समाहार क्षमता से बाहर चला जाता है, तब पर्यावरण अपना जीवन-पोषण संबंधी कार्य प्रभावी ढंग से नहीं कर पाता।

प्रश्न 30. बढ़ती जनसंख्या और विकसित देशों के समृद्ध उपभोग तथा उत्पादन मानकों ने पर्यावरण के किन कार्यों पर दबाव डाला है?

उत्तर: इनसे मुख्यतः संसाधनों की पूर्ति और अपशिष्टों के समाहार संबंधी कार्यों पर दबाव बढ़ता है।

प्रश्न 31. आर्थिक विकास का मुख्य लक्ष्य क्या है?

उत्तर: आर्थिक विकास का मुख्य लक्ष्य लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन तथा उपलब्धता में वृद्धि करना है।

प्रश्न 32. विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं में पर्यावरण संकट क्यों नहीं उत्पन्न हुआ?

उत्तर: विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं में संसाधनों की मांग अपेक्षाकृत कम थी और प्रदूषण का स्तर पर्यावरण की अवशोषी क्षमता के भीतर था। इसलिए गंभीर पर्यावरण संकट उत्पन्न नहीं हुआ।

प्रश्न 33. धारणीय विकास का लक्ष्य किस प्रकार के विकास का संवर्धन है?

उत्तर: धारणीय विकास का लक्ष्य ऐसा विकास करना है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे और भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को प्रभावित न करे।

प्रश्न 34. भारत में पर्यावरण पर कितने प्रकार के संकट मंडरा रहे हैं?

उत्तर: भारत में पर्यावरण संकट के दो प्रमुख रूप बताए जाते हैं—निर्धनता से उत्पन्न पर्यावरणीय क्षय तथा समृद्धि और तेजी से बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न प्रदूषण।

प्रश्न 35. धारणीय विकास कैसे संभव हो पाएगा?

उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, उनका विवेकपूर्ण उपयोग, पारिस्थितिक पुनर्जनन क्षमता को बनाए रखने और पर्यावरणीय संकटों को कम करने से धारणीय विकास संभव हो सकता है।

प्रश्न 36. भारत में वनों की कटाई स्वीकार्य सीमा से कितने घन मीटर अधिक होती है?

उत्तर: दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार भारत में एक वर्ष की वन कटाई स्वीकार्य सीमा से लगभग 15 मिलियन घन मीटर अधिक बताई गई है।

प्रश्न 37. भारत में प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से पोषक तत्वों की कितनी क्षति होती है?

उत्तर: दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार प्रत्येक वर्ष भूमि क्षय से लगभग 5.8 मिलियन टन से 8.4 मिलियन टन पोषक तत्वों की क्षति बताई गई है।

प्रश्न 38. भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मुख्यतः किन कारणों से होता है?

उत्तर: शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण वाहनों का उत्सर्जन, उद्योगों का अधिक जमाव और ताप विद्युत संयंत्र हैं।

प्रश्न 39. वाहन उत्सर्जन चिंता का प्रमुख कारण क्यों है?

उत्तर: वाहन उत्सर्जन शहरी वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण इससे बड़ी आबादी सीधे प्रभावित होती है।

प्रश्न 40. भारत में विश्व के लौह-अयस्क भंडार का कितना प्रतिशत उपलब्ध है?

उत्तर: दिए गए अध्ययन-सामग्री के अनुसार भारत में विश्व के लौह-अयस्क भंडार का लगभग 20 प्रतिशत उपलब्ध बताया गया है।

प्रश्न 41. भारत में पाए जाने वाले कोई पाँच खनिज पदार्थ लिखें।

उत्तर: ताँबा, लोहा, सोना, सीसा और मैंगनीज भारत में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज पदार्थों के उदाहरण हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 42. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्य लिखें।

उत्तर: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख कार्य हैं—

  1. जल, वायु और भूमि प्रदूषण से संबंधित सूचनाओं का संकलन और प्रसार करना।
  2. जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  3. वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्य करना।
  4. वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकारों को तकनीकी सहायता देना।

प्रश्न 43. धारणीय विकास क्या है? उन तीन प्रकार की पूँजियों के नाम बताइए जिनका धारणीय विकास के अंतर्गत संरक्षण किया जाता है।

उत्तर: धारणीय विकास ऐसा विकास है जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता सुरक्षित रखी जाती है। इसके अंतर्गत प्रमुख रूप से निम्न तीन प्रकार की पूँजियों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाता है—

  1. प्राकृतिक पूँजी: प्राकृतिक संसाधन, स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल आदि।
  2. भौतिक पूँजी: मशीनें, औजार और पूँजीगत उपकरण आदि।
  3. मानवीय पूँजी: शिक्षा, कौशल और तकनीकी क्षमता आदि।

प्रश्न 44. हमें भावी पीढ़ी के हितों का संरक्षण क्यों करना चाहिए?

उत्तर: प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और उनका अत्यधिक उपयोग भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वर्तमान पीढ़ी को संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन, स्वच्छ पर्यावरण और विकास के अवसर मिल सकें।

प्रश्न 45. प्राकृतिक संसाधनों में तेजी से बढ़ती माँग के प्रभाव से कौन-सी दो समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं?

उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों की तेजी से बढ़ती मांग से मुख्यतः दो समस्याएँ उत्पन्न होती हैं—

  1. संसाधनों की कमी: संसाधनों का उपयोग उनकी पुनर्जनन क्षमता से अधिक होने पर उनकी उपलब्धता कम होने लगती है।
  2. प्रदूषण: प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग और उत्पादन गतिविधियों से जल, वायु तथा भूमि प्रदूषण बढ़ता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 46. धारणीय विकास से आपका क्या अभिप्राय है? क्या यह वर्तमान पीढ़ी को प्रभावित करने वाली प्रदूषण की समस्या है या भावी पीढ़ी को प्रभावित करने वाली संसाधनों की समाप्ति की समस्या?

उत्तर: धारणीय विकास ऐसी विकास प्रक्रिया है जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते समय भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता नहीं किया जाता।

आर्थिक विकास के दौरान प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग और औद्योगिक तथा परिवहन गतिविधियों से होने वाला प्रदूषण पर्यावरण को प्रभावित करता है। इसलिए धारणीय विकास का संबंध केवल वर्तमान पीढ़ी की प्रदूषण समस्या से नहीं है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने से भी है।

धारणीय विकास का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का कुशल उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और वर्तमान तथा भावी पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता को बनाए रखना है। इसलिए यह प्रदूषण और संसाधनों की कमी दोनों समस्याओं को ध्यान में रखता है।

प्रश्न 47. धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ लिखें।

उत्तर: धारणीय विकास की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

1. पर्यावरण का संरक्षण

धारणीय विकास आर्थिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण की सुरक्षा पर जोर देता है।

2. वर्तमान और भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं पर ध्यान

इसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भावी पीढ़ियों के हितों का भी संरक्षण किया जाता है।

3. वितरणात्मक समानता

धारणीय विकास विभिन्न पीढ़ियों तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संसाधनों और अवसरों के उचित वितरण पर जोर देता है।

4. प्राकृतिक, भौतिक और मानवीय पूँजी का संरक्षण

प्राकृतिक संसाधनों के साथ भौतिक और मानवीय पूँजी को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है ताकि भविष्य में विकास की क्षमता बनी रहे।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 48. जैविक घटक में शामिल किया जाता है—

(a) सभी जीव

(b) सभी निर्जीव

(c) जीव एवं निर्जीव दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) सभी जीव

व्याख्या: जैविक घटक में सभी जीवित तत्व जैसे मनुष्य, पशु, पक्षी और पौधे शामिल होते हैं।

प्रश्न 49. अजैविक घटक में शामिल करते हैं—

(a) सभी जीव

(b) सभी निर्जीव चीजें

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) सभी निर्जीव चीजें

व्याख्या: वायु, जल, भूमि, तापमान और खनिज आदि अजैविक घटक के उदाहरण हैं।

प्रश्न 50. वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता बढ़ी है—

(a) 31 प्रतिशत

(b) 149 प्रतिशत

(c) 200 प्रतिशत

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) 31 प्रतिशत

प्रश्न 51. वायुमंडल में मिथेन की सांद्रता बढ़ी है—

(a) 31 प्रतिशत

(b) 149 प्रतिशत

(c) 200 प्रतिशत

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) 149 प्रतिशत

प्रश्न 52. पिछली सदी में वायुमंडल का औसत ताप बढ़ा है—

(a) 0.6°C

(b) 1.1°C

(c) 1.0°C

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) 0.6°C

प्रश्न 53. ओजोन परत के क्षय से कौन-सी किरण पृथ्वी पर पहुँच जाती है?

(a) अवरक्त

(b) दृश्य

(c) पराबैंगनी

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (c) पराबैंगनी

व्याख्या: ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को काफी हद तक रोकने में सहायता करती है। इसके क्षरण से इन किरणों का पृथ्वी तक पहुँचना बढ़ सकता है।

प्रश्न 54. Montreal Protocol किसके प्रयोग पर पाबंदी लगाता है?

(a) कार्बोनेट यौगिक

(b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक

(c) कार्बन यौगिक

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) क्लोरो-फ्लोरो यौगिक

प्रश्न 55. चिपको आंदोलन का संबंध है—

(a) हिमालय में वनों का संरक्षण

(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण

(c) गुजरात में वनों का संरक्षण

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) हिमालय में वनों का संरक्षण

प्रश्न 56. अप्पिको आंदोलन संबंधित है—

(a) हिमालय में वनों का संरक्षण

(b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण

(c) गुजरात में वनों का संरक्षण

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (b) कर्नाटक में वनों का संरक्षण

प्रश्न 57. भारत दुनिया की कितनी प्रतिशत आबादी का आश्रय है?

(a) 16 प्रतिशत

(b) 20 प्रतिशत

(c) 25 प्रतिशत

(d) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (a) 16 प्रतिशत

अध्याय का संक्षिप्त सार

  • पर्यावरण में जैविक और अजैविक दोनों प्रकार के तत्व शामिल होते हैं।
  • प्राकृतिक संसाधनों को नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में बाँटा जाता है।
  • अत्यधिक संसाधन दोहन और प्रदूषण पर्यावरण संकट को बढ़ाते हैं।
  • वनों की कटाई, भू-क्षय, जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ हैं।
  • धारणीय विकास वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करता है।
  • सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैविक खाद, CNG और लघु जल विद्युत जैसी विधियाँ पर्यावरण-अनुकूल विकास में सहायक हो सकती हैं।
  • प्राकृतिक, भौतिक और मानवीय पूँजी का संरक्षण दीर्घकालीन विकास के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष

पर्यावरण और धारणीय विकास अध्याय हमें यह समझाता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, प्रदूषण में कमी और भावी पीढ़ियों के हितों का संरक्षण ही दीर्घकालीन और संतुलित विकास का आधार है।

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