Bihar Board Class 11 Geography Chapter 2 – संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान में भारत की भू-वैज्ञानिक संरचना और विभिन्न भौतिक स्थलरूपों का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय में हिमालय पर्वत, उत्तरी भारत का मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, तटीय मैदान तथा द्वीप समूहों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
भारत की धरातलीय बनावट एक जैसी नहीं है। कहीं ऊँचे-ऊँचे हिमालय पर्वत हैं, कहीं विशाल मैदान हैं और कहीं प्राचीन पठारी क्षेत्र हैं। इन सभी स्थलरूपों का निर्माण लंबे भूगर्भिक इतिहास के दौरान हुआ है।
इस पोस्ट में प्रश्न source के अनुसार रखे गए हैं और उनके उत्तर Teacher जैसी आसान, साफ और समझाने वाली भाषा में दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थी विषय को समझकर परीक्षा में उत्तर लिख सकें।
अध्याय 2 के मुख्य विषय
- भारत की भू-वैज्ञानिक संरचना
- हिमालय पर्वत
- उत्तरी भारत का मैदान
- प्रायद्वीपीय पठार
- पश्चिमी एवं पूर्वी तटीय मैदान
- द्वीप समूह
- भाबर और तराई
- बांगर और खादर
- दोआब
- दून घाटियाँ
- भ्रंश घाटियाँ
- नदी घाटियाँ और डेल्टा
बहुविकल्पीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. हिमालय के किस भाग में करेवा मिलते हैं?
(क) उत्तर-पूर्व
(ख) पूर्वी
(ग) हिमाचल-उत्तरांचल
(घ) कश्मीर हिमालय
उत्तर: (घ) कश्मीर हिमालय।
समझिए: कश्मीर घाटी में पाए जाने वाले करेवा पुराने झील निक्षेपों से बने ऊँचे मैदानी भाग हैं। इनका उपयोग कृषि के लिए भी किया जाता है।
प्रश्न 2. लोकटक झील किस राज्य में स्थित है?
(क) केरल
(ख) मणिपुर
(ग) उत्तराखंड
(घ) राजस्थान
उत्तर: (ख) मणिपुर।
समझिए: लोकटक झील मणिपुर की महत्वपूर्ण प्राकृतिक झील है। यह अपनी तैरती हुई वनस्पति संरचनाओं के लिए भी प्रसिद्ध है।
प्रश्न 3. अंडमान द्वीप तथा निकोबार द्वीप को कौन-सी रेखा पृथक करती है?
(क) 11° चैनल
(ख) 10° चैनल
(ग) मन्नार की खाड़ी
(घ) अंडमान सागर
उत्तर: (क) 11° चैनल।
प्रश्न 4. डोडाबेट्टा चोटी निम्नलिखित में से किस पहाड़ी श्रृंखला में स्थित है?
(क) नीलगिरि
(ख) कार्डमम
(ग) अनामलाई
(घ) नल्लामलाई
उत्तर: (क) नीलगिरि।
प्रश्न 5. हिमालय किस प्रकार का पर्वत है?
(क) ज्वालामुखी पर्वत
(ख) मोड़दार पर्वत
(ग) अवशिष्ट पर्वत
(घ) भ्रंश पर्वत
उत्तर: (ख) मोड़दार पर्वत।
आसान भाषा में: हिमालय का निर्माण मुख्य रूप से प्लेटों के अभिसरण और चट्टानों के मुड़ने से हुआ है। इसलिए इसे मोड़दार पर्वत कहा जाता है।
लगभग 30 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. यदि एक व्यक्ति को लक्षद्वीप जाना हो तो वह कौन-से तटीय मैदान होकर जाएगा और क्यों?
उत्तर: लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित है और केरल तट के निकट है। इसलिए लक्षद्वीप जाने के लिए पश्चिमी तटीय मैदान, विशेषकर केरल के मालाबार तट से जाना उचित होगा।
प्रश्न 2. भारत में ठंडा मरुस्थल कहाँ स्थित है? इस क्षेत्र की मुख्य श्रेणियों के नाम बताएँ।
उत्तर: भारत का ठंडा मरुस्थल मुख्यतः लद्दाख क्षेत्र में पाया जाता है। इसके आसपास कराकोरम, लद्दाख तथा हिमालय की ऊँची पर्वत श्रेणियाँ स्थित हैं।
प्रश्न 3. पश्चिमी तटीय मैदान पर कोई डेल्टा क्यों नहीं है?
उत्तर: पश्चिमी तट संकरा और अपेक्षाकृत अधिक ढाल वाला है। यहाँ की अधिकांश नदियाँ छोटी और तेज बहाव वाली हैं, इसलिए वे बड़े पैमाने पर तलछट जमा करके डेल्टा नहीं बना पाती हैं।
लगभग 125 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूहों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करें।
उत्तर: भारत के प्रमुख द्वीप समूह दो समुद्री क्षेत्रों में पाए जाते हैं—बंगाल की खाड़ी और अरब सागर।
बंगाल की खाड़ी के द्वीप: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित हैं। ये द्वीप मुख्य भूमि से दूर समुद्र में फैले हुए हैं। बैरन द्वीप भारत का प्रसिद्ध सक्रिय ज्वालामुखीय द्वीप है।
अरब सागर के द्वीप: अरब सागर में लक्षद्वीप द्वीप समूह स्थित है। ये मुख्यतः प्रवाल निर्मित द्वीप हैं। लक्षद्वीप में छोटे-छोटे द्वीप, प्रवाल भित्तियाँ और लैगून पाए जाते हैं।
इस प्रकार दोनों द्वीप समूहों की भौगोलिक स्थिति, निर्माण और प्राकृतिक विशेषताओं में अंतर है। अंडमान-निकोबार का संबंध मुख्यतः पर्वतीय एवं ज्वालामुखीय प्रकृति से है, जबकि लक्षद्वीप मुख्यतः प्रवाल द्वीपों का समूह है।
प्रश्न 2. नदी घाटी मैदान में पाए जाने वाली महत्वपूर्ण स्थलाकृतियाँ कौन-सी हैं? इनका विवरण दें।
उत्तर: भारत के नदी घाटी मैदानों में नदियों के अपरदन और निक्षेपण से अनेक स्थलाकृतियाँ बनती हैं। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में गॉर्ज और V-आकार की घाटियाँ बनाती हैं। जहाँ ढाल अधिक होती है वहाँ जलप्रपात और तीव्र प्रवाह दिखाई देता है।
मैदानी भाग में पहुँचने के बाद नदी की गति कम हो जाती है और वह अपने साथ लाई हुई मिट्टी तथा अन्य तलछट जमा करने लगती है। इससे जलोढ़ मैदान, बालू-रोधिका, विसर्प, गोखुर झील तथा बाढ़ के मैदान बनते हैं।
बड़ी नदियाँ अपने मुहाने पर डेल्टा बनाती हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र का सुंदरवन डेल्टा इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
प्रश्न 3. यदि आप बद्रीनाथ से सुंदरवन डेल्टा तक गंगा नदी के साथ-साथ चलते हैं तो आपके रास्ते में कौन-सी स्थलाकृतियाँ आएँगी?
उत्तर: बद्रीनाथ से आगे गंगा का क्षेत्र हिमालयी पर्वतीय भूभाग से जुड़ा है। पर्वतीय भाग में नदी गहरी घाटियों और गॉर्ज से होकर बहती है। नीचे आने पर नदी हरिद्वार के पास मैदानी भाग में प्रवेश करती है।
इसके बाद गंगा का मार्ग विस्तृत जलोढ़ मैदान से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में बाढ़ के मैदान, विसर्प, बालू-रोधिका और अन्य नदीय स्थलरूप दिखाई देते हैं। प्रयागराज के पास यमुना गंगा में मिलती है। आगे गंगा की अनेक सहायक नदियाँ इसमें मिलती हैं। अंत में बंगाल की खाड़ी के पास गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र विशाल सुंदरवन डेल्टा का निर्माण करता है।
परियोजना कार्य
प्रश्न 1. एटलस की सहायता से पश्चिम से पूर्व की ओर स्थित हिमालय की चोटियों की एक सूची बनाएँ।
उत्तर: पश्चिम से पूर्व की ओर हिमालय क्षेत्र की प्रमुख चोटियों में काराकोरम क्षेत्र की चोटियाँ, नंगा पर्वत, कंचनजंगा, मकालू, एवरेस्ट तथा नामचा बरवा आदि प्रमुख हैं।
प्रश्न 2. अपने राज्य में पाई जाने वाली स्थलाकृतियों की पहचान करें और उन पर चलाए जा रहे मुख्य आर्थिक कार्यों का विश्लेषण करें।
उत्तर: बिहार मुख्यतः उत्तरी भारत के विशाल मैदान का हिस्सा है। यहाँ गंगा तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा बनाए गए जलोढ़ मैदान पाए जाते हैं। इन मैदानों की मिट्टी कृषि के लिए बहुत उपयोगी है।
इस क्षेत्र में गेहूँ, धान, मक्का, गन्ना, दलहन और अन्य फसलों की खेती की जाती है। नदियों और जल संसाधनों के कारण सिंचाई तथा मछली पालन भी महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधियाँ हैं।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. अरब सागर कब अस्तित्व में आया?
उत्तर: स्रोत में प्लायसीन युग दिया गया है।
प्रश्न 2. उस सागर का नाम बताइए जो हिमालय के किनारे पर स्थित था।
उत्तर: टेथिस सागर।
प्रश्न 3. हिमालय किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर: तृतीयक (Tertiary) युग में।
प्रश्न 4. हिमालय के उत्तर में कौन-सा भू-खण्ड स्थित है?
उत्तर: स्रोत में अंगारालैंड दिया गया है।
प्रश्न 5. तृतीयक युग में हिमालय के दक्षिण में स्थित भू-खण्ड का नाम बताएँ।
उत्तर: गोंडवानालैंड।
प्रश्न 6. कश्मीर घाटी में पाई जाने वाली झील निक्षेप का नाम लिखिए।
उत्तर: करेवा।
प्रश्न 7. दक्कन पठार की पश्चिमी सीमा का नाम बताएँ।
उत्तर: पश्चिमी घाट।
प्रश्न 8. हिमालय के निचले भागों में पाई जाने वाली निक्षेप बताइए।
उत्तर: जलोढ़ निक्षेप।
प्रश्न 9. चो के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र का नाम बताएँ।
उत्तर: होशियारपुर क्षेत्र।
प्रश्न 10. भारत में पाई जाने वाली दो रिफ्ट घाटियों के नाम लिखें।
उत्तर: नर्मदा और ताप्ती घाटियाँ।
प्रश्न 11. दक्कन पठार में निर्मित लावा की सतहें कैसे बनीं?
उत्तर: बड़े पैमाने पर लावा के फैलने और ठंडा होकर जमने से।
प्रश्न 12. अरावली पर्वत किस युग में ऊपर उठे?
उत्तर: स्रोत में विंध्य युग दिया गया है।
प्रश्न 13. भारत के प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण कब हुआ?
उत्तर: पूर्व-कैम्ब्रियन काल में।
प्रश्न 14. दक्कन पठार की पूर्वी सीमाओं के नाम बताएँ।
उत्तर: राजमहल की पहाड़ियाँ स्रोत में दी गई हैं।
प्रश्न 15. भारत का सबसे प्राचीन पठार कौन-सा है?
उत्तर: प्रायद्वीपीय पठार।
प्रश्न 16. वृहत् स्तर पर भारत के धरातल को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर: तीन प्रमुख भागों में।
प्रश्न 17. पूर्वी घाट पर सबसे अधिक ऊँचाई कितनी है?
उत्तर: लगभग 900 मीटर, जैसा source में दिया गया है।
प्रश्न 18. अरब सागर में पाए जाने वाले मूंगे के द्वीपों के समूह का नाम बताएँ।
उत्तर: लक्षद्वीप समूह।
प्रश्न 19. प्रायद्वीपीय भारत में सबसे ऊँची चोटी का नाम बताएँ।
उत्तर: अनाईमुडी।
प्रश्न 20. पश्चिमी तटीय मैदान के दो विभागों के नाम लिखें।
उत्तर: कोंकण तट और मालाबार तट।
प्रश्न 21. यदि आपको लक्षद्वीप तक यात्रा करनी है तो किस तटीय मैदान से गुजरेंगे?
उत्तर: पश्चिमी तटीय मैदान।
प्रश्न 22. भारत में शीत मरुस्थल कहाँ है?
उत्तर: लद्दाख क्षेत्र में।
प्रश्न 23. पश्चिमी तट पर डेल्टा क्यों नहीं हैं?
उत्तर: पश्चिमी तट संकरा और ढाल वाला है तथा यहाँ की नदियाँ अपेक्षाकृत छोटी और तेज बहने वाली हैं। इसलिए बड़े डेल्टा का निर्माण नहीं हो पाता।
प्रश्न 24. सिंधु गॉर्ज तथा ब्रह्मपुत्र गॉर्ज के मध्य हिमालय का क्या विस्तार है?
उत्तर: लगभग 2400 किलोमीटर।
प्रश्न 25. हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर: source में 3200 किलोमीटर लिखा गया है, जो स्पष्ट रूप से इकाई/टाइपिंग त्रुटि है। प्रश्न का आशय एवरेस्ट की ऊँचाई से है।
प्रश्न 26. गंगा के मैदान में तलछट की अधिकतम गहराई कितनी है?
उत्तर: लगभग 2000 मीटर तक, जैसा source में दिया गया है।
प्रश्न 27. भारत के प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊँचाई बताइए।
उत्तर: लगभग 600–900 मीटर।
प्रश्न 28. बरखान किस क्षेत्र में पाए जाते हैं?
उत्तर: राजस्थान के थार मरुस्थल में।
लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. हिमालय पर्वत में मिलने वाले ऊँचे पर्वत शिखर तथा उनकी ऊँचाई बताइए।
उत्तर: हिमालय में विश्व की अनेक ऊँची चोटियाँ स्थित हैं। प्रमुख चोटियों के उदाहरण हैं:
- माउंट एवरेस्ट – लगभग 8,849 मीटर
- कंचनजंगा – लगभग 8,586 मीटर
- नंगा पर्वत – लगभग 8,126 मीटर
- नंदा देवी – लगभग 7,816 मीटर
- नामचा बरवा – लगभग 7,782 मीटर
- धौलागिरी – लगभग 8,167 मीटर
प्रश्न 2. हिमालय पर्वत को किन-किन श्रेणियों में बाँटा जाता है?
उत्तर: हिमालय की पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे के लगभग समानांतर स्थित हैं। इन्हें मुख्यतः तीन समानांतर श्रेणियों में बाँटा जाता है:
- वृहत् हिमालय (हिमाद्रि)
- लघु हिमालय (हिमाचल)
- शिवालिक या बाह्य हिमालय
इन पर्वत श्रेणियों के बीच कई लंबी घाटियाँ मिलती हैं, जिन्हें दून घाटियाँ कहा जाता है।
प्रश्न 3. भारतीय पठार के प्रमुख भौतिक विभागों के नाम बताइए।
उत्तर: प्रायद्वीपीय पठार को कई भौतिक भागों में बाँटा जा सकता है। प्रमुख भाग हैं:
- दक्षिणी पठारी खंड
- दक्कन का लावा पठार
- मालवा का पठार
- अरावली पहाड़ियाँ
- नर्मदा और ताप्ती की द्रोणियाँ
- महानदी, गोदावरी तथा कावेरी की नदी घाटियाँ
- तटीय मैदान
प्रश्न 4. वृहत् स्तर पर भारत को कितनी भू-आकृतिक इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है? उनके नाम लिखिए।
उत्तर: भारत को वृहत् स्तर पर तीन प्रमुख भौतिक विभागों में बाँटा जाता है:
- उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र
- उत्तरी भारत का विशाल मैदान
- प्रायद्वीपीय पठार
इन तीनों के अतिरिक्त तटीय मैदान और द्वीप भी भारत की भौतिक संरचना के महत्वपूर्ण भाग हैं।
प्रश्न 5. दोआब से आप क्या समझते हैं? भारतीय उपमहाद्वीप से पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर: दो नदियों के बीच स्थित भूमि को दोआब कहते हैं। ‘दो’ का अर्थ दो और ‘आब’ का अर्थ जल होता है। इसलिए दो नदियों के बीच का क्षेत्र दोआब कहलाता है।
उदाहरण:
- गंगा-यमुना दोआब
- ब्यास-सतलुज दोआब
- ब्यास-रावी दोआब
- रावी-चिनाब दोआब
- चिनाब-झेलम दोआब
प्रश्न 6. तराई से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: भाबर के दक्षिण में स्थित दलदली और नम क्षेत्र को तराई कहा जाता है। भाबर क्षेत्र में जो नदियाँ भूमि के अंदर चली जाती हैं, उनका जल तराई क्षेत्र में फिर सतह पर आ जाता है।
इसी कारण तराई क्षेत्र में भूमि अधिक नम होती है और यहाँ घास तथा वनस्पति अच्छी तरह विकसित होती है। बाद में इन क्षेत्रों को कृषि के लिए भी विकसित किया गया।
प्रश्न 7. भाबर क्या है? भाबर पट्टी के दो प्रमुख लक्षण बताइए।
उत्तर: शिवालिक पर्वतों के दक्षिणी गिरिपद में कंकड़-पत्थरों से बनी संकरी पट्टी को भाबर कहा जाता है।
इसके दो प्रमुख लक्षण हैं:
- यहाँ नदियाँ कंकड़ और बजरी में रिसकर कुछ दूरी तक दिखाई नहीं देतीं।
- यह क्षेत्र मोटे और पारगम्य निक्षेपों से बना होता है।
प्रश्न 8. डेल्टा किसे कहते हैं? भारत से चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर: नदी जब समुद्र में मिलने से पहले अपने साथ लाई हुई तलछट को जमा करती है, तो नदी के मुहाने पर बनने वाला त्रिभुजाकार या पंखाकार निक्षेपित भू-रूप डेल्टा कहलाता है।
भारत के प्रमुख डेल्टा हैं:
- गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा
- महानदी डेल्टा
- गोदावरी डेल्टा
- कृष्णा डेल्टा
- कावेरी डेल्टा
प्रश्न 9. दून किसे कहते हैं? हिमालय पर्वत से तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर: हिमालय की समानांतर पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित लंबी और अपेक्षाकृत समतल घाटियों को दून कहा जाता है।
उदाहरण:
- देहरादून
- कोथरी दून
- पाटली दून
प्रश्न 10. भारत में भ्रंशन क्रिया (Faulting) के प्रमाण किन क्षेत्रों में मिलते हैं?
उत्तर: भारत में भ्रंशन क्रिया के प्रमाण मुख्यतः प्रायद्वीपीय पठार के कुछ हिस्सों में मिलते हैं। नर्मदा और ताप्ती की घाटियाँ इसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। गोदावरी, महानदी और दामोदर घाटियों में भी भ्रंशन से संबंधित संरचनाएँ पाई जाती हैं।
प्रश्न 11. भांगर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: उत्तरी मैदान के पुराने जलोढ़ निक्षेप से बने ऊँचे मैदानों को भांगर कहा जाता है। ये क्षेत्र सामान्यतः बाढ़ के नए निक्षेप से अपेक्षाकृत ऊँचे होते हैं।
भांगर की मिट्टी में पुराने जलोढ़ निक्षेप पाए जाते हैं। इसके विपरीत नदी के नए बाढ़ मैदान को खादर कहा जाता है।
प्रश्न 12. भारत के किसी एक भौतिक विभाग का वर्णन करें।
उत्तर: उत्तरी भारत का मैदान भारत का एक प्रमुख भौतिक विभाग है। इसका निर्माण मुख्यतः सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से हुआ है।
यह मैदान बहुत उपजाऊ है और यहाँ कृषि का व्यापक विकास हुआ है। गेहूँ, धान, गन्ना, जूट तथा अनेक अन्य फसलों की खेती की जाती है। यहाँ घनी आबादी और अनेक बड़े नगर भी पाए जाते हैं।
प्रश्न 13. हिमालय से निकलने वाली नदियाँ सततवाहिनी क्यों हैं?
उत्तर: हिमालयी नदियों को बारहमासी या सततवाहिनी नदियाँ कहा जाता है क्योंकि उन्हें वर्ष भर जल मिलता रहता है।
- इन नदियों का उद्गम हिमनदों और बर्फीले क्षेत्रों में होता है।
- गर्मी के मौसम में हिम और बर्फ के पिघलने से जल मिलता है।
- मानसून के दौरान वर्षा से नदी में अतिरिक्त जल आता है।
गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र इसकी प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 14. बांगर तथा खादर प्रदेश में क्या अंतर है?
| बांगर | खादर |
|---|---|
| पुराने जलोढ़ से बना होता है। | नए जलोढ़ से बना होता है। |
| यह अपेक्षाकृत ऊँचा क्षेत्र होता है। | यह नदी के बाढ़ क्षेत्र में अपेक्षाकृत नीचा होता है। |
| हर वर्ष बाढ़ का प्रभाव कम होता है। | बाढ़ के दौरान नए निक्षेप जमा होते हैं। |
प्रश्न 15. तराई तथा भाबर प्रदेश में अंतर स्पष्ट करें।
| भाबर | तराई |
|---|---|
| शिवालिक के गिरिपद में स्थित है। | भाबर के दक्षिण में स्थित है। |
| कंकड़ और बजरी के मोटे निक्षेप पाए जाते हैं। | बारीक जलोढ़ और अधिक नमी पाई जाती है। |
| कई छोटी नदियाँ भूमि में लुप्त हो जाती हैं। | भूमिगत जल फिर सतह पर आ सकता है। |
| अपेक्षाकृत शुष्क होता है। | अधिक नम और दलदली हो सकता है। |
प्रश्न 16. भारतीय पठार तथा हिमालय पर्वत के उच्चावच के लक्षणों में वैषम्य बताइए।
उत्तर: हिमालय और प्रायद्वीपीय पठार की भू-आकृति में काफी अंतर है। हिमालय अपेक्षाकृत युवा और ऊँचे मोड़दार पर्वत हैं, जबकि प्रायद्वीपीय पठार बहुत प्राचीन और कठोर चट्टानों से बना भू-भाग है।
| हिमालय | प्रायद्वीपीय पठार |
|---|---|
| भूगर्भिक दृष्टि से अपेक्षाकृत युवा पर्वत। | बहुत प्राचीन भू-भाग। |
| ऊँची और तीखी पर्वत चोटियाँ। | अपेक्षाकृत घिसे और पुराने उच्च भूभाग। |
| अनेक गहरी घाटियाँ और गॉर्ज। | पठार, पहाड़ियाँ और नदी घाटियाँ। |
| भूस्खलन और अपरदन अधिक सक्रिय। | अपक्षय और अपरदन लंबे समय से प्रभावी। |
प्रश्न 17. “पश्चिमी हिमालय में पर्वत श्रेणियों की एक क्रमिक श्रृंखला पाई जाती है।” समझाइए।
उत्तर: पश्चिमी हिमालय में पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे के लगभग समानांतर क्रम में स्थित हैं। दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ने पर शिवालिक, लघु हिमालय तथा वृहत् हिमालय के बाद लद्दाख और कराकोरम जैसी ऊँची पर्वत श्रेणियाँ मिलती हैं।
इन पर्वत श्रेणियों के बीच कश्मीर घाटी और सिंधु जैसी नदी घाटियाँ स्थित हैं। इस प्रकार पश्चिमी हिमालय में पर्वत श्रेणियों का क्रम स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
प्रश्न 18. पश्चिमी तट पर अच्छी बंदरगाहें तथा पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा क्यों हैं?
उत्तर: पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों की बनावट में अंतर होने के कारण दोनों तटों की विशेषताएँ अलग हैं।
- पश्चिमी तटीय मैदान अपेक्षाकृत संकरा है।
- पश्चिमी तट अधिक कटा-फटा है, जिससे प्राकृतिक बंदरगाहों के विकास में सहायता मिलती है।
- पश्चिमी तट की नदियाँ छोटी और तेज बहने वाली हैं।
- पूर्वी तटीय मैदान अपेक्षाकृत चौड़ा है।
- पूर्वी तट पर महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ बड़ी मात्रा में तलछट जमा करती हैं।
इसी कारण पश्चिमी तट पर अच्छे प्राकृतिक बंदरगाह और पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा अधिक पाए जाते हैं।
प्रश्न 19. जलचक्र का सचित्र वर्णन करें।
उत्तर: सूर्य की गर्मी से समुद्र, नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों का जल वाष्प बनकर वायुमंडल में पहुँचता है। ऊपर जाकर जलवाष्प ठंडी होती है और संघनन के कारण बादल बनते हैं।
बादलों से वर्षा, हिमपात आदि के रूप में जल फिर पृथ्वी की सतह पर आता है। इसका कुछ भाग नदियों और झीलों में जाता है, कुछ भूजल के रूप में जमा होता है और फिर अंततः समुद्र तक पहुँचता है। यही लगातार चलने वाली प्रक्रिया जलचक्र कहलाती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1. भारत के मानचित्र में निम्नलिखित की स्थिति दिखाएँ:
- थार मरुस्थल
- तटीय मैदान
- कंचनजंगा
- नाथू ला और काराकोरम
- शिवालिक पर्वत श्रेणी
- मेघालय का पठार
- दक्कन ट्रैप
- विंध्य और सतपुड़ा की पर्वत श्रेणियाँ
उत्तर: यह प्रश्न मानचित्र आधारित है। मानचित्र में निम्न स्थानों को पहचानकर चिह्नित करें:
- थार मरुस्थल: पश्चिमी राजस्थान।
- तटीय मैदान: भारत के पश्चिमी और पूर्वी समुद्री तट के साथ।
- कंचनजंगा: सिक्किम-नेपाल सीमा क्षेत्र।
- नाथू ला: सिक्किम में।
- काराकोरम: भारत के उत्तरी उच्च पर्वतीय क्षेत्र में।
- शिवालिक: हिमालय की सबसे बाहरी पर्वत श्रेणी।
- मेघालय पठार: पूर्वोत्तर भारत में।
- दक्कन ट्रैप: मुख्यतः महाराष्ट्र और आसपास के प्रायद्वीपीय क्षेत्र में।
- विंध्य: मध्य भारत में।
- सतपुड़ा: मध्य भारत में विंध्य के दक्षिण में।
प्रश्न 2. “उपमहाद्वीप के वर्तमान भू-आकृति विभाग एक लंबे भूगर्भिक इतिहास के दौरान विकसित हुए हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भारत की वर्तमान भू-आकृति अचानक नहीं बनी है। इसे बनने में करोड़ों वर्षों का भूगर्भिक समय लगा है। पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों, प्लेटों की गति, उत्थान, धंसाव, भ्रंशन, ज्वालामुखीय गतिविधियों, अपक्षय और अपरदन जैसी प्रक्रियाओं ने भारत की वर्तमान स्थलाकृति को विकसित किया है।
1. प्रायद्वीपीय पठार
प्रायद्वीपीय पठार भारत के सबसे प्राचीन भू-भागों में से एक है। यह कठोर और प्राचीन चट्टानों से बना है। लंबे समय तक अपक्षय और अपरदन के कारण इसके धरातल में विभिन्न प्रकार की पहाड़ियाँ, पठार और नदी घाटियाँ विकसित हुईं।
2. हिमालय
हिमालय अपेक्षाकृत युवा मोड़दार पर्वत हैं। भारतीय प्लेट के उत्तर की ओर बढ़ने और यूरेशियाई प्लेट से टकराने के कारण पर्वत निर्माण की प्रक्रिया हुई। इसके परिणामस्वरूप हिमालय की विशाल पर्वत श्रेणियाँ विकसित हुईं।
3. उत्तरी मैदान
हिमालय और प्रायद्वीपीय पठार के बीच स्थित उत्तरी मैदान का निर्माण मुख्यतः सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों से हुआ। लंबे समय तक हुए निक्षेपण से यह विशाल और उपजाऊ मैदान विकसित हुआ।
इस प्रकार भारत की वर्तमान भू-आकृतिक संरचना भूगर्भिक इतिहास और विभिन्न आंतरिक तथा बाहरी भू-आकृतिक प्रक्रियाओं के लंबे प्रभाव का परिणाम है।
अध्याय को आसान भाषा में समझें
अगर आपको पूरा Chapter 2 याद करने में कठिनाई हो रही है, तो भारत की भौतिक संरचना को सबसे पहले इन तीन बड़े भागों में समझिए:
1. हिमालय
भारत के उत्तर में ऊँची और युवा मोड़दार पर्वत श्रेणियाँ हैं। यहाँ हिमनद, ऊँची चोटियाँ, गहरी घाटियाँ और कई महत्वपूर्ण दर्रे पाए जाते हैं।
2. उत्तरी मैदान
हिमालय से निकलने वाली नदियाँ अपने साथ मिट्टी और अन्य तलछट लाती हैं। इन्हीं निक्षेपों से विशाल उत्तरी मैदान बना है। यह क्षेत्र बहुत उपजाऊ है और यहाँ घनी आबादी पाई जाती है।
3. प्रायद्वीपीय पठार
यह भारत का प्राचीन और कठोर चट्टानों वाला भू-भाग है। दक्कन का पठार, मालवा का पठार, अरावली, विंध्य, सतपुड़ा और अनेक नदी घाटियाँ इसी क्षेत्र का हिस्सा हैं।
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण तथ्य
- हिमालय: युवा मोड़दार पर्वत।
- शिवालिक: हिमालय की बाहरी श्रेणी।
- दून: पर्वत श्रेणियों के बीच की लंबी घाटियाँ।
- भाबर: शिवालिक के दक्षिण में कंकड़-बजरी वाली पट्टी।
- तराई: भाबर के दक्षिण में नम क्षेत्र।
- भांगर: पुराना जलोढ़।
- खादर: नया जलोढ़।
- दोआब: दो नदियों के बीच का क्षेत्र।
- डेल्टा: नदी के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से बना स्थलरूप।
- नर्मदा और ताप्ती: प्रमुख भ्रंश/रिफ्ट घाटियों से संबंधित नदियाँ।
- लक्षद्वीप: अरब सागर में स्थित प्रमुख प्रवाल द्वीप समूह।
- अंडमान-निकोबार: बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न
- भारत की प्रमुख भू-आकृतिक इकाइयों का वर्णन कीजिए।
- हिमालय की प्रमुख पर्वत श्रेणियों का वर्णन कीजिए।
- भाबर और तराई में अंतर बताइए।
- बांगर और खादर में अंतर बताइए।
- दोआब क्या है? उदाहरण दीजिए।
- दून घाटी क्या है?
- पश्चिमी तट पर डेल्टा क्यों नहीं पाए जाते?
- पूर्वी तट पर बड़े डेल्टा क्यों पाए जाते हैं?
- हिमालय से निकलने वाली नदियाँ बारहमासी क्यों हैं?
- प्रायद्वीपीय पठार की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
- अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के द्वीपों की तुलना कीजिए।
- भारत के वर्तमान भू-आकृतिक स्वरूप के विकास की व्याख्या कीजिए।
अध्याय का सारांश
संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान अध्याय में भारत के धरातलीय स्वरूप और उसके निर्माण की प्रक्रिया को समझाया गया है। भारत को व्यापक रूप से उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र, उत्तरी मैदान और प्रायद्वीपीय पठार जैसे प्रमुख भौतिक भागों में समझा जाता है।
हिमालय युवा मोड़दार पर्वत हैं, जबकि प्रायद्वीपीय पठार भारत के प्राचीन भू-भागों में शामिल है। हिमालय से निकलने वाली नदियाँ उत्तरी मैदान में जलोढ़ निक्षेप जमा करके विस्तृत मैदान का निर्माण करती हैं। इसी मैदान में भाबर, तराई, भांगर, खादर, दोआब और डेल्टा जैसे विभिन्न स्थलरूप पाए जाते हैं।
भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटीय मैदानों की संरचना अलग-अलग है। पश्चिमी तट अपेक्षाकृत संकरा और अधिक कटा-फटा है, जबकि पूर्वी तट अधिक चौड़ा है और बड़ी नदियों द्वारा बनाए गए डेल्टा यहाँ प्रमुख हैं।
इस अध्याय में हिमालय, उत्तरी मैदान, प्रायद्वीपीय पठार, भाबर, तराई, बांगर, खादर, दोआब, दून, तटीय मैदान और द्वीप समूह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
Part 2 के अन्य अध्याय
Chapter 7 – प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Geography Chapter 2 – संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान को समझने के लिए भारत के तीन प्रमुख भौतिक भागों—हिमालय, उत्तरी मैदान और प्रायद्वीपीय पठार—को अच्छी तरह समझना सबसे जरूरी है। इसके बाद भाबर-तराई, बांगर-खादर, दोआब, दून, तटीय मैदान और द्वीप समूह को समझना आसान हो जाता है।
विद्यार्थियों को इस अध्याय में केवल परिभाषाएँ याद करने के बजाय यह समझना चाहिए कि किस स्थलरूप का निर्माण कैसे हुआ, वह कहाँ पाया जाता है और उसकी क्या विशेषता है। इससे परीक्षा में छोटे और बड़े दोनों प्रकार के प्रश्नों का उत्तर आसानी से लिखा जा सकता है।