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Bihar Board Class 11 Geography Solutions Chapter 3 अपवाह तंत्र

Bihar Board Class 11 Geography Chapter 3 – अपवाह तंत्र में भारत की नदियों, नदी तंत्र, अपवाह प्रारूप, जल-संभर, हिमालयी नदियों, प्रायद्वीपीय नदियों, डेल्टा, ज्वारनदमुख, बाढ़ तथा नदियों के आर्थिक महत्व का अध्ययन किया जाता है। इस पोस्ट में अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, MCQ, अतिलघु, लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आसान भाषा में दिए गए हैं।

Table of Contents

अध्याय 3 – अपवाह तंत्र का संक्षिप्त परिचय

किसी क्षेत्र में नदियों तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा जल के बहाव की व्यवस्था को अपवाह तंत्र कहा जाता है। भारत का अपवाह तंत्र मुख्य रूप से दो बड़े भागों में समझा जाता है—हिमालयी नदी तंत्र और प्रायद्वीपीय नदी तंत्र। इनके अतिरिक्त तटीय तथा अंतर्देशीय अपवाह से संबंधित नदियाँ भी महत्वपूर्ण हैं।

इस अध्याय में सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र के साथ-साथ महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा और ताप्ती जैसी प्रायद्वीपीय नदियों का अध्ययन किया जाता है।

बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल अध्याय 3 के महत्वपूर्ण MCQ

प्रश्न 1. किस नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था?

उत्तर: दामोदर नदी।

प्रश्न 2. कौन-सी नदी पंचनद में सम्मिलित नहीं है?

उत्तर: सिंधु।

प्रश्न 3. कौन-सी नदी दरार घाटी में बहती है?

उत्तर: नर्मदा।

प्रश्न 4. अलकनंदा तथा भागीरथी के संगम को क्या कहा जाता है?

उत्तर: देवप्रयाग।

प्रश्न 5. तिब्बत में ब्रह्मपुत्र को किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: सांगपो।

प्रश्न 6. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी कौन-सी है?

उत्तर: गोदावरी।

प्रश्न 7. किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है?

उत्तर: कोसी।

लगभग 10 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. नदी द्रोणी और जल-संभर में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को नदी द्रोणी कहते हैं, जबकि दो अपवाह द्रोणियों को अलग करने वाली ऊँची सीमा को जल-संभर कहा जाता है।

प्रश्न 2. वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रारूप में अंतर बताइए।

उत्तर: पेड़ की शाखाओं जैसा अपवाह वृक्षाकार कहलाता है। मुख्य नदियों के समानांतर बहने और सहायक नदियों के लगभग समकोण पर मिलने से जालीनुमा प्रारूप बनता है।

प्रश्न 3. अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रारूप क्या हैं?

उत्तर: किसी ऊँचे भाग से नदियों का चारों दिशाओं में बहना अपकेंद्रीय तथा चारों दिशाओं से नदियों का किसी निम्न भाग या झील की ओर बहना अभिकेंद्रीय अपवाह कहलाता है।

प्रश्न 4. डेल्टा और ज्वारनदमुख में अंतर बताइए।

उत्तर: नदी के मुहाने पर तलछट के निक्षेप से बनने वाला स्थलरूप डेल्टा कहलाता है। ज्वारनदमुख नदी का ऐसा चौड़ा मुहाना है जहाँ नदी समुद्र में मिलती है और डेल्टा जैसा निक्षेपित स्थलरूप नहीं बनता।

लगभग 30 शब्दों में उत्तर

प्रश्न 1. भारत में नदियों को आपस में जोड़ने के सामाजिक-आर्थिक लाभ क्या हैं?

उत्तर: नदी जोड़ने से जल की क्षेत्रीय असमानता कम करने, सिंचाई बढ़ाने, बाढ़ और सूखे की समस्या को नियंत्रित करने, पेयजल उपलब्ध कराने तथा कृषि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।

प्रश्न 2. प्रायद्वीपीय नदी के तीन लक्षण लिखिए।

उत्तर:

  • प्रायद्वीपीय नदियाँ सामान्यतः निश्चित और पुराने मार्गों में बहती हैं।
  • इनकी घाटियाँ अपेक्षाकृत परिपक्व होती हैं।
  • इनका जल प्रवाह मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर करता है।

उत्तर भारतीय और प्रायद्वीपीय नदियों में अंतर

प्रश्न. उत्तर भारतीय नदियों की महत्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं? ये प्रायद्वीपीय नदियों से किस प्रकार भिन्न हैं?

उत्तर: उत्तर भारत की प्रमुख नदियाँ मुख्यतः हिमालय से निकलती हैं। सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र इसके प्रमुख नदी तंत्र हैं। हिमालयी नदियों को जल वर्षा के साथ-साथ हिम एवं हिमनदों के पिघलने से भी प्राप्त होता है। इसलिए इनमें वर्ष के अधिकांश समय जल उपलब्ध रहता है। ये नदियाँ लंबी दूरी तय करती हैं तथा अपने मार्ग में अनेक सहायक नदियों को ग्रहण करती हैं।

इसके विपरीत प्रायद्वीपीय नदियाँ पुराने पठारी भूभाग से होकर बहती हैं। इनमें से अनेक नदियाँ मानसूनी वर्षा पर अधिक निर्भर रहती हैं। गोदावरी, कृष्णा, महानदी और कावेरी सामान्यतः पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में मिलती हैं।

हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक प्रमुख नदियाँ

प्रश्न. हिमालय के गिरिपद के साथ हरिद्वार से सिलीगुड़ी तक यात्रा करने पर कौन-कौन-सी प्रमुख नदियाँ मिलती हैं?

उत्तर: इस क्षेत्र में गंगा तंत्र से संबंधित अनेक नदियाँ और सहायक नदियाँ मिलती हैं। इनमें गंगा, यमुना, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक और कोसी प्रमुख हैं। इनमें गंगा सबसे महत्वपूर्ण नदी तंत्रों में से एक है।

गंगा की प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, गोमती और रामगंगा आदि शामिल हैं। दक्षिण की ओर से सोन नदी भी गंगा में मिलती है। आगे चलकर गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र बंगाल की खाड़ी की ओर विस्तृत डेल्टा क्षेत्र बनाता है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. प्रायद्वीपीय नदियों का मुख्य जल विभाजक क्या है?

उत्तर: पश्चिमी घाट।

प्रश्न 2. सिंधु नदी की एक प्रमुख सहायक नदी का नाम बताइए।

उत्तर: सतलुज।

प्रश्न 3. गंगा की दक्षिणी सहायक नदी का नाम बताइए।

उत्तर: सोन नदी।

प्रश्न 4. सिंधु नदी का उद्गम कहाँ से होता है?

उत्तर: तिब्बत के मानसरोवर क्षेत्र से।

प्रश्न 5. दरार घाटी में बहने वाली दो नदियों के नाम लिखिए।

उत्तर: नर्मदा और ताप्ती।

प्रश्न 6. भारत के दो प्रमुख जल-प्रवाह तंत्र कौन-से हैं?

उत्तर: हिमालयी नदी तंत्र और प्रायद्वीपीय नदी तंत्र।

प्रश्न 7. पूर्ववर्ती अपवाह की एक नदी का नाम बताइए।

उत्तर: सिंधु।

प्रश्न 8. गंगा नदी द्वारा निर्मित प्रसिद्ध डेल्टा का नाम क्या है?

उत्तर: सुंदरवन डेल्टा।

प्रश्न 9. तिब्बत में ब्रह्मपुत्र को किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: सांगपो।

प्रश्न 10. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी कौन-सी है?

उत्तर: गोदावरी।

प्रश्न 11. कृष्णा नदी का उद्गम कहाँ से होता है?

उत्तर: महाबलेश्वर क्षेत्र से।

प्रश्न 12. बांग्लादेश में गंगा को किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: पद्मा।

प्रश्न 13. हिमालयी नदी तंत्र की तीन प्रमुख नदियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर: सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र।

प्रश्न 14. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियों के नाम लिखिए।

उत्तर: महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी।

प्रश्न 15. खंभात की खाड़ी में गिरने वाली प्रमुख नदी कौन-सी है?

उत्तर: माही नदी।

प्रश्न 16. अरावली से निकलने वाली एक नदी का नाम बताइए।

उत्तर: साबरमती।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. डेल्टा किसे कहते हैं? भारत के चार उदाहरण दीजिए।

उत्तर: जब नदी समुद्र या झील के निकट पहुँचकर अपनी गति खो देती है, तो उसके साथ आया तलछट नदी के मुहाने पर जमा होने लगता है। इस निक्षेप से बनने वाले स्थलरूप को डेल्टा कहते हैं।

भारत में डेल्टा के प्रमुख उदाहरण हैं:

  • गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा
  • महानदी डेल्टा
  • गोदावरी डेल्टा
  • कृष्णा डेल्टा

प्रश्न 2. गंगा की दो शीर्ष नदियों के नाम बताइए जो देवप्रयाग में मिलती हैं।

उत्तर: देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा का संगम होता है। इस संगम के बाद संयुक्त धारा को गंगा कहा जाता है।

प्रश्न 3. प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियों के नाम बताइए।

उत्तर: प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियों में महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, पेनार, नर्मदा और ताप्ती शामिल हैं। इनमें अधिकांश पूर्व की ओर बहती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती प्रमुख रूप से पश्चिम की ओर बहती हैं।

प्रश्न 4. गार्ज क्या है? दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर: पर्वतीय क्षेत्र में नदी द्वारा निर्मित बहुत गहरी और संकरी घाटी को गार्ज कहा जाता है। इसके किनारे बहुत खड़े हो सकते हैं। हिमालयी क्षेत्र में सिंधु, सतलुज तथा ब्रह्मपुत्र की गहरी घाटियाँ इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 5. हिमालय की नदियों के तीन प्रमुख नदी तंत्र कौन-से हैं?

उत्तर:

  1. सिंधु नदी तंत्र
  2. गंगा नदी तंत्र
  3. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

प्रश्न 6. राजस्थान में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताइए।

उत्तर: राजस्थान की प्रमुख नदियों में लूनी, साबरमती और माही शामिल हैं। पश्चिमी राजस्थान में अनेक छोटी नदियाँ शुष्क परिस्थितियों के कारण मार्ग में ही लुप्त हो जाती हैं।

प्रश्न 7. उत्पत्ति के आधार पर भारत की नदियों को कितने वर्गों में बाँटा जाता है?

उत्तर: उत्पत्ति और भौगोलिक संरचना के आधार पर भारत की नदियों को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है—

  1. हिमालयी नदियाँ
  2. प्रायद्वीपीय नदियाँ

प्रश्न 8. पश्चिमी तट पर नदियाँ डेल्टा क्यों नहीं बनाती हैं?

उत्तर: पश्चिमी तट का तटीय मैदान अपेक्षाकृत संकरा है और कई नदियाँ तीव्र ढाल के कारण तेजी से समुद्र की ओर बढ़ती हैं। इसलिए नदी के मुहाने पर तलछट के व्यापक निक्षेप के लिए परिस्थितियाँ सीमित रहती हैं। नर्मदा और ताप्ती इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 9. गोदावरी को दक्षिणी गंगा क्यों कहा जाता है?

उत्तर: गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदियों में प्रमुख है। इसका विस्तृत अपवाह क्षेत्र और अनेक सहायक नदियाँ हैं। दक्षिण भारत में इसके व्यापक भौगोलिक और आर्थिक महत्व के कारण इसे दक्षिणी गंगा या वृद्ध गंगा कहा जाता है।

प्रश्न 10. पश्चिमी घाट से निकलने वाली प्रमुख प्रायद्वीपीय नदियों के नाम लिखिए।

उत्तर: पश्चिमी घाट से निकलने वाली प्रमुख नदियों में गोदावरी, कृष्णा और कावेरी प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त पश्चिम की ओर बहने वाली कई छोटी नदियाँ भी पश्चिमी घाट से निकलती हैं।

प्रश्न 11. गंगा तंत्र में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम बताइए।

उत्तर: गंगा तंत्र की प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी, महानंदा और सोन शामिल हैं। ये नदियाँ गंगा के जलग्रहण क्षेत्र को विस्तृत बनाती हैं।

प्रश्न 12. सिंधु तंत्र में बहने वाली प्रमुख नदियों के नाम लिखिए।

उत्तर: सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदियों में झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज शामिल हैं। ये नदियाँ सिंधु नदी तंत्र का महत्वपूर्ण भाग हैं।

प्रश्न 13. जल-संभर और नदी द्रोणी में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: नदी तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को नदी द्रोणी कहते हैं। दो नदी द्रोणियों को अलग करने वाली ऊँची भूमि या सीमा को जल-संभर कहते हैं। इसलिए नदी द्रोणी एक अपवाहित क्षेत्र है, जबकि जल-संभर दो अपवाह क्षेत्रों के बीच विभाजक का कार्य करता है।

प्रश्न 14. पूर्ववर्ती अपवाह तथा अनुवर्ती अपवाह में अंतर बताइए।

उत्तर: जिस नदी का मार्ग भू-भाग के उत्थान से पहले स्थापित हो और बाद में भी वह अपनी घाटी को काटते हुए प्रवाहित होती रहे, उसे पूर्ववर्ती अपवाह कहते हैं। इसके विपरीत जो नदी सामान्यतः भूमि की ढाल के अनुरूप विकसित होती है, उसे अनुवर्ती अपवाह कहा जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. भारत में बाढ़ प्रवण क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत में बाढ़ मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में अधिक आती है जहाँ भारी वर्षा, कम ढाल, नदी तल में अधिक तलछट और विस्तृत बाढ़ मैदान पाए जाते हैं। उत्तरी भारत के विशाल मैदान तथा बड़ी नदियों के आसपास के क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं।

बिहार, असम घाटी तथा पश्चिम बंगाल के कुछ भाग बाढ़ की समस्या से विशेष रूप से प्रभावित रहे हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों में मानसून के दौरान जल की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा क्षेत्रों में भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

बाढ़ के प्रमुख कारणों में अत्यधिक वर्षा, नदी तल में गाद का जमाव, जलग्रहण क्षेत्रों में वनों की कमी, नदी घाटियों की कम ढाल तथा प्राकृतिक जल निकासी में बाधा शामिल हैं। तटीय क्षेत्रों में चक्रवात भी बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।

प्रश्न 2. भारत की नदियाँ देश के लिए किस प्रकार उपयोगी हैं?

उत्तर: भारत की नदियाँ प्राकृतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्राचीन काल से ही मानव बस्तियाँ और सभ्यताएँ नदी घाटियों के आसपास विकसित होती रही हैं। आज भी नदियाँ कृषि, पेयजल, उद्योग और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं।

भारत में नदी जल का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग सिंचाई में होता है। नदियों के जल से कृषि भूमि की सिंचाई करके खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाया जाता है। इसके अलावा नदियों में जलविद्युत उत्पादन की भी पर्याप्त संभावनाएँ हैं।

कुछ नदियाँ आंतरिक जल परिवहन के लिए भी उपयोगी हैं। गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसे नदी तंत्रों में नौवहन की महत्वपूर्ण संभावनाएँ हैं। इस प्रकार भारतीय नदियाँ कृषि, उद्योग, पेयजल, ऊर्जा, परिवहन और मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

प्रश्न 3. नदी प्रवृत्ति से क्या अभिप्राय है? हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की प्रवृत्तियों की तुलना कीजिए।

उत्तर: किसी नदी में अलग-अलग ऋतुओं के दौरान जल प्रवाह में होने वाले परिवर्तन के प्रतिरूप को नदी प्रवृत्ति कहा जाता है। नदी के जल प्रवाह पर वर्षा, हिम पिघलने, तापमान और भौगोलिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है।

हिमालयी नदियाँ सामान्यतः बारहमासी होती हैं क्योंकि इन्हें वर्षा के साथ हिम एवं हिमनदों के पिघलने से भी जल मिलता है। मानसून के समय इनमें जल की मात्रा काफी बढ़ जाती है।

इसके विपरीत प्रायद्वीपीय नदियों का प्रवाह मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर करता है। वर्षा ऋतु में इनका जल प्रवाह बढ़ता है और शुष्क मौसम में घट जाता है। इसलिए इनके प्रवाह में मौसमी परिवर्तन अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।

प्रश्न 4. भारत की तटीय नदियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत की तटीय नदियाँ मुख्यतः पश्चिमी तट और पूर्वी तट के साथ बहती हैं। पश्चिमी तट की अनेक छोटी नदियाँ पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में मिलती हैं। पूर्वी तट की प्रमुख नदियाँ सामान्यतः पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं।

पूर्वी तट की प्रमुख नदियों में महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी महत्वपूर्ण हैं। पश्चिमी तट पर नर्मदा और ताप्ती जैसी नदियाँ प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त पश्चिमी तटीय क्षेत्र में अनेक छोटी नदियाँ भी पाई जाती हैं।

तटीय नदियों की विशेषताओं में अपेक्षाकृत छोटी लंबाई, कई क्षेत्रों में तीव्र ढाल तथा मानसूनी वर्षा के कारण जल प्रवाह में तेजी से परिवर्तन शामिल हैं। ये नदियाँ तटीय कृषि और स्थानीय जल आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अध्याय 3 अपवाह तंत्र – महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारत के प्रमुख नदी तंत्रों में सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र शामिल हैं।
  • प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख लंबी नदी गोदावरी है।
  • नर्मदा और ताप्ती प्रमुख पश्चिमवाहिनी प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं।
  • भागीरथी और अलकनंदा का संगम देवप्रयाग में होता है।
  • तिब्बत में ब्रह्मपुत्र को सांगपो कहा जाता है।
  • बांग्लादेश में गंगा की मुख्य धारा को पद्मा कहा जाता है।
  • नदी द्रोणी किसी नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र है।
  • जल-संभर दो नदी द्रोणियों के बीच विभाजक का कार्य करता है।
  • गंगा-ब्रह्मपुत्र तंत्र का डेल्टा क्षेत्र सुंदरवन कहलाता है।
  • नदियाँ सिंचाई, पेयजल, उद्योग, जलविद्युत और परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अध्याय 3 से परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  • अपवाह तंत्र किसे कहते हैं?
  • नदी द्रोणी और जल-संभर में अंतर लिखिए।
  • हिमालयी तथा प्रायद्वीपीय नदियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  • भारत के प्रमुख हिमालयी नदी तंत्रों का वर्णन कीजिए।
  • गंगा नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदियाँ कौन-कौन-सी हैं?
  • सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदियों के नाम लिखिए।
  • प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियों का वर्णन कीजिए।
  • नर्मदा और ताप्ती की विशेषताएँ बताइए।
  • डेल्टा और ज्वारनदमुख में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  • भारत में बाढ़ के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।
  • भारत की नदियों के आर्थिक महत्व को समझाइए।
  • हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की नदी प्रवृत्तियों की तुलना कीजिए।

बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल के अन्य अध्याय

अपवाह तंत्र के बाद भारत-भौतिक पर्यावरण के अगले अध्यायों की तैयारी के लिए नीचे दिए गए अध्यायों को भी पढ़ें:

Chapter 1 – भारत-स्थिति

Chapter 2 – संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान

Chapter 4 – जलवायु

Chapter 5 – प्राकृतिक वनस्पति

Chapter 6 – मृदा

Chapter 7 – प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

निष्कर्ष

बिहार बोर्ड कक्षा 11 भूगोल अध्याय 3 – अपवाह तंत्र परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें भारत के प्रमुख नदी तंत्र, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताएँ, अपवाह प्रारूप, जल-संभर, डेल्टा, बाढ़ तथा नदियों के आर्थिक महत्व जैसे विषय शामिल हैं। परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए MCQ के साथ-साथ लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का भी अभ्यास करें।

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