Bihar Board Class 11 Geography Chapter 7 – प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ में हम भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन तथा आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और इससे MCQ, अतिलघु, लघु तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
अध्याय 7 : प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ का परिचय
प्रकृति में अनेक ऐसी घटनाएँ होती हैं जो अचानक मानव जीवन, संपत्ति, कृषि, परिवहन और पर्यावरण को प्रभावित कर सकती हैं। भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात और भूस्खलन ऐसी ही प्रमुख प्राकृतिक घटनाएँ हैं। जब किसी संकट के कारण समाज की सामान्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है और बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि होती है, तब वह स्थिति आपदा का रूप ले सकती है।
इसे आसान भाषा में समझें तो संकट संभावित खतरा है, जबकि जब उस खतरे से वास्तविक रूप से व्यापक नुकसान होता है तो वह आपदा बन सकता है।
प्राकृतिक संकट और आपदा में अंतर
प्राकृतिक संकट का अर्थ ऐसी प्राकृतिक घटना या परिस्थिति से है जिसमें नुकसान की संभावना मौजूद होती है। उदाहरण के लिए किसी भूकंपीय क्षेत्र में भूकंप का खतरा बना रहना एक प्राकृतिक संकट है। लेकिन यदि भूकंप आता है और उससे घर, सड़कें, पुल तथा जनजीवन प्रभावित होता है, तो वह घटना आपदा का रूप ले सकती है।
प्राकृतिक आपदाओं के प्रमुख प्रकार
- भूकंप
- बाढ़
- सूखा
- चक्रवात
- भूस्खलन
- सुनामी
- बादल फटना
- हिमधाव और बर्फानी तूफान
भूकंप
पृथ्वी की सतह या उसके भीतर अचानक होने वाली हलचल को भूकंप कहा जाता है। भूकंप के दौरान उत्पन्न ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में विभिन्न दिशाओं में फैलती है। भूकंप मुख्य रूप से प्लेट विवर्तनिकी से संबंधित प्रक्रियाओं, भ्रंशों और अन्य भूगर्भीय हलचलों के कारण उत्पन्न हो सकते हैं।
भूकंपीय तरंगें
भूकंप से उत्पन्न प्रमुख तरंगों में P-Waves, S-Waves और Surface/L-Waves का अध्ययन किया जाता है। ये तरंगें पृथ्वी के भीतर तथा सतह पर अलग-अलग प्रकार से गति करती हैं।
भारत में भूकंप की संभावना वाले क्षेत्र
भारत का हिमालयी क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी भारत भूकंपीय दृष्टि से अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं। इसका प्रमुख कारण भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की परस्पर गति और टकराव से संबंधित भूगर्भीय गतिविधियाँ हैं।
दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत अपेक्षाकृत स्थिर भूभाग माना जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वहाँ भूकंप बिल्कुल नहीं आते। कोयना, लातूर और भुज जैसे भूकंप इसके उदाहरण हैं।
बाढ़
जब किसी नदी, जलाशय या अन्य जलस्रोत का जल अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से बाहर फैलकर आसपास के क्षेत्रों को जलमग्न कर देता है, तो इसे बाढ़ कहते हैं। भारत में मानसूनी वर्षा, नदियों में अत्यधिक जल, चक्रवात और अपर्याप्त जल निकासी बाढ़ के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
भारत के प्रमुख बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
भारत में गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र से जुड़े मैदान बाढ़ की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। बिहार, असम, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अनेक क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इसके अतिरिक्त पूर्वी तट के डेल्टाई क्षेत्रों में चक्रवात के कारण भी बाढ़ और तूफानी लहरों का प्रभाव हो सकता है।
बाढ़ के प्रमुख कारण
- अत्यधिक या लगातार वर्षा
- नदियों में जलस्तर का बढ़ना
- चक्रवात
- नदी तल में अवसाद का जमाव
- अपर्याप्त जल निकासी
- वनों की कटाई
- बाढ़ मैदानों में अनियोजित मानव बसाव
सूखा
जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक उपलब्ध जल की मात्रा सामान्य आवश्यकता से काफी कम हो जाती है, तो सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है। सूखा केवल वर्षा की कमी से ही संबंधित नहीं है; मिट्टी की नमी, जलाशयों का जल, भूजल और कृषि की आवश्यकताएँ भी इसकी गंभीरता को प्रभावित करती हैं।
भारत में सूखे के प्रमुख क्षेत्र
पश्चिमी राजस्थान, गुजरात के कच्छ क्षेत्र तथा पश्चिमी और मध्य भारत के कई भाग सूखे की दृष्टि से संवेदनशील हैं। दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ आंतरिक भागों में भी वर्षा की अनिश्चितता के कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सूखे के प्रभाव
- फसल उत्पादन में कमी
- पेयजल की कमी
- पशुओं के लिए चारे की कमी
- कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- मानव और पशुधन का पलायन
- भोजन और रोजगार की समस्या
चक्रवात
चक्रवात कम वायुदाब के आसपास तीव्र गति से घूमने वाली वायुमंडलीय प्रणाली है। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का निर्माण गर्म समुद्री जल, पर्याप्त नमी और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों से जुड़ा होता है। इनके साथ तेज हवाएँ, भारी वर्षा और समुद्री तूफानी लहरें उत्पन्न हो सकती हैं।
भारत में चक्रवात के प्रमुख क्षेत्र
भारत में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों चक्रवातों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। पूर्वी तट के ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्र विशेष रूप से चक्रवाती तूफानों से प्रभावित हो सकते हैं।
भूस्खलन
ढाल पर स्थित चट्टान, मिट्टी या मलबे का गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नीचे की ओर खिसकना भूस्खलन कहलाता है। भारी वर्षा, भूकंप, तीव्र ढाल, चट्टानों की कमजोरी और मानव द्वारा किए गए निर्माण कार्य इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र
हिमालय, उत्तर-पूर्वी भारत, पश्चिमी घाट, नीलगिरी तथा अधिक ढाल और वर्षा वाले पर्वतीय क्षेत्र भूस्खलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। खनन, सड़क निर्माण और अनियोजित ढाल कटाई जैसे मानव कार्य भी कुछ क्षेत्रों में जोखिम बढ़ा सकते हैं।
भूस्खलन से होने वाली हानि
- सड़क और रेल मार्ग अवरुद्ध होना
- मकानों और पुलों का क्षतिग्रस्त होना
- कृषि भूमि का नष्ट होना
- नदियों का मार्ग अवरुद्ध होना
- मानव एवं पशुधन की हानि
लगभग 30 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. संकट किस दशा में आपदा बन जाता है?
उत्तर: जब किसी प्राकृतिक या मानव निर्मित संकट के कारण बड़े पैमाने पर जन-धन, संपत्ति और सामान्य जीवन को गंभीर क्षति पहुँचती है तथा समाज की सामान्य व्यवस्था प्रभावित होती है, तब संकट आपदा बन जाता है।
प्रश्न 2. हिमालय और भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अधिक भूकंप क्यों आते हैं?
उत्तर: भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की परस्पर गति तथा टकराव से हिमालयी क्षेत्र में भूगर्भीय तनाव उत्पन्न होता है। इस सक्रिय प्लेट सीमा के कारण भूकंप की संभावना अधिक रहती है।
प्रश्न 3. उष्ण कटिबंधीय तूफान की उत्पत्ति के लिए कौन-सी परिस्थितियाँ अनुकूल हैं?
उत्तर: गर्म समुद्री जल, पर्याप्त नमी, निम्न वायुदाब, अनुकूल कोरियोलिस बल और कम ऊर्ध्वाधर पवन कर्तन जैसी परिस्थितियाँ उष्ण कटिबंधीय चक्रवात के विकास में सहायक होती हैं।
प्रश्न 4. पूर्वी भारत की बाढ़, पश्चिमी भारत की बाढ़ से अलग कैसे होती है?
उत्तर: पूर्वी भारत में भारी मानसूनी वर्षा, बड़ी नदियों और बाढ़ मैदानों के कारण बाढ़ सामान्य है। पश्चिमी भारत में कम वर्षा के बावजूद अचानक भारी वर्षा, जलनिकासी की कमी और चक्रवात से बाढ़ हो सकती है।
प्रश्न 5. पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज्यादा क्यों पड़ते हैं?
उत्तर: इन क्षेत्रों में वर्षा कम और अनिश्चित है। अधिक वाष्पीकरण, वर्षा की असमानता और कुछ क्षेत्रों में जल संसाधनों पर अधिक दबाव सूखे की स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।
लगभग 125 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. भारत में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करें और इस आपदा के निवारण के कुछ उपाय बताएँ।
उत्तर: भारत में भूस्खलन मुख्यतः युवा और अस्थिर पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। हिमालय, उत्तर-पूर्वी भारत, पश्चिमी घाट तथा नीलगिरी इसके प्रमुख संवेदनशील क्षेत्र हैं। अधिक वर्षा वाले ढाल क्षेत्र, भूकंप प्रभावित क्षेत्र और कुछ खनन क्षेत्र भी भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील हो सकते हैं।
भूस्खलन रोकने के लिए अत्यधिक संवेदनशील ढालों पर अनियोजित निर्माण को नियंत्रित करना चाहिए। वृक्षारोपण और वन संरक्षण से मिट्टी तथा ढाल को स्थिर रखने में सहायता मिलती है। जल निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए ताकि वर्षा का पानी ढाल के भीतर अत्यधिक न पहुँचे। पर्वतीय क्षेत्रों में उचित ढाल प्रबंधन, वैज्ञानिक सड़क निर्माण और जहाँ आवश्यक हो वहाँ सीढ़ीनुमा खेती अपनाई जा सकती है।
प्रश्न 2. सुभेद्यता क्या है? सूखे के आधार पर भारत को प्राकृतिक आपदा सुभेद्यता क्षेत्रों में विभाजित करें और इसके निवारण के उपाय बताएँ।
उत्तर: किसी प्राकृतिक संकट से किसी व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र के प्रभावित होने की संभावना को सुभेद्यता कहा जाता है। सूखे की दृष्टि से भारत के कुछ क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में सूखे की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।
पश्चिमी राजस्थान और कच्छ क्षेत्र अत्यधिक सूखा-संवेदनशील क्षेत्रों के उदाहरण हैं। राजस्थान के अन्य भागों, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, कर्नाटक के पठारी क्षेत्रों और आंतरिक दक्षिण भारत में भी सूखे की समस्या देखी जा सकती है।
सूखे से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, सूखा-सहिष्णु फसलें, सिंचाई की दक्षता और जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन महत्वपूर्ण उपाय हैं।
प्रश्न 3. किस स्थिति में विकास कार्य आपदा का कारण बन सकता है?
उत्तर: विकास कार्य सामान्यतः मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए जाते हैं, लेकिन यदि उनका निर्माण प्राकृतिक जोखिमों को ध्यान में रखे बिना किया जाए तो वे आपदा के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं।
उदाहरण के लिए बाढ़ मैदानों में अनियोजित शहरीकरण से बाढ़ का नुकसान बढ़ सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में बिना उचित भूगर्भीय अध्ययन के सड़क, बाँध या भवन निर्माण करने से ढाल अस्थिर हो सकती है। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी से रासायनिक रिसाव, आग या विस्फोट जैसी मानव-जनित आपदाएँ हो सकती हैं।
इसलिए विकास योजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव, भूकंपीय जोखिम, बाढ़ जोखिम और भू-स्खलन की संभावना को ध्यान में रखना आवश्यक है।
परियोजना कार्य (Project Work)
इस अध्याय के Project Work में आठ विषय दिए गए हैं। इनमें मालपा भूस्खलन, सुनामी, ओडिशा एवं गुजरात चक्रवात, नदियों को जोड़ना, टिहरी या सरदार सरोवर बाँध, भुज/लातूर भूकंप, डेल्टा या नदीय द्वीप में जीवन और छत वर्षा जल संचयन का मॉडल शामिल हैं।
प्रश्न 1. मालपा भूस्खलन पर परियोजना रिपोर्ट तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: परियोजना में घटना का स्थान, घटना के कारण, भूस्खलन का प्रभाव, जन-धन की हानि, राहत कार्य और भविष्य में रोकथाम के उपायों को क्रमवार लिखें।
प्रश्न 2. सुनामी पर परियोजना रिपोर्ट तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: सुनामी की परिभाषा, समुद्र के भीतर भूकंप से इसका संबंध, 2004 की हिंद महासागर सुनामी, प्रभावित तटीय क्षेत्रों तथा चेतावनी और बचाव उपायों को रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।
प्रश्न 3. ओडिशा चक्रवात और गुजरात चक्रवात पर परियोजना रिपोर्ट तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: दोनों घटनाओं का समय, प्रभावित क्षेत्र, चक्रवात की प्रकृति, जन-धन की हानि, राहत एवं पुनर्वास तथा आपदा प्रबंधन की भूमिका की तुलना करें।
प्रश्न 4. नदियों को आपस में जोड़ने पर परियोजना तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: नदी जोड़ परियोजना का उद्देश्य, संभावित लाभ, जल की उपलब्धता, सिंचाई, बाढ़ और सूखे से संबंधित संभावित प्रभाव तथा पर्यावरणीय चुनौतियों को संतुलित रूप से लिखें।
प्रश्न 5. टिहरी बाँध या सरदार सरोवर बाँध पर परियोजना तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: बाँध का स्थान, नदी, निर्माण का उद्देश्य, सिंचाई/जलविद्युत/जलापूर्ति में उपयोग, संभावित लाभ और विस्थापन तथा पर्यावरण से संबंधित मुद्दों को शामिल करें।
प्रश्न 6. भुज या लातूर भूकंप पर परियोजना तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: घटना का स्थान, समय, भूकंप की प्रकृति, जन-धन की हानि, भवनों पर प्रभाव, राहत कार्य और भूकंपरोधी निर्माण के महत्व को लिखें।
प्रश्न 7. डेल्टा या नदीय द्वीप में जीवन पर परियोजना तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: नदीय द्वीप/डेल्टा का निर्माण, वहाँ के लोगों की आजीविका, कृषि, मत्स्य पालन, बाढ़ का जोखिम, परिवहन और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित जीवन का वर्णन करें।
प्रश्न 8. छत वर्षा जल संचयन का मॉडल तैयार करें।
उत्तर लिखने का तरीका: छत से वर्षा जल को पाइप द्वारा एकत्र करके फिल्टर से गुजारें और टैंक या भूजल पुनर्भरण संरचना तक पहुँचाएँ। मॉडल में छत, पाइप, फिल्टर, संग्रह टैंक और जल के प्रवाह की दिशा स्पष्ट रूप से दिखाएँ।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भूकंपमापक यंत्र को क्या कहते हैं?
उत्तर: सिस्मोग्राफ।
प्रश्न 2. भूकंप की तीव्रता किस पैमाने पर मापी जाती है?
उत्तर: पारंपरिक रूप से भूकंप के परिमाण के लिए रिक्टर स्केल का उल्लेख किया जाता है। आधुनिक भूकंप विज्ञान में मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल भी व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 3. लातूर भूकंप का क्या कारण था?
उत्तर: लातूर भूकंप एक अंतर्प्लेट भूकंप था। यह भारतीय प्लेट के भीतर मौजूद भूगर्भीय भ्रंशों और तनाव से संबंधित था।
प्रश्न 4. भूकंप किस सिद्धांत से संबंधित है?
उत्तर: भूकंप की व्याख्या में प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत का महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रश्न 5. भारत में प्रभाव डालने वाली प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं के नाम लिखें।
उत्तर: बाढ़, सूखा, भूकंप, चक्रवात, भूस्खलन और सुनामी प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ हैं।
प्रश्न 6. प्राकृतिक आपदाओं का एक प्रमुख भूगर्भीय कारण क्या हो सकता है?
उत्तर: अचानक होने वाली भूगर्भीय हलचलें, जैसे भूकंपीय गतिविधियाँ, प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकती हैं।
प्रश्न 7. भुज भूकंप कब आया था?
उत्तर: भुज क्षेत्र का विनाशकारी भूकंप 26 जनवरी 2001 को गुजरात में आया था।
प्रश्न 8. विभिन्न भूकंपीय तरंगों के नाम लिखें।
उत्तर: P-Waves, S-Waves और Surface/L-Waves।
प्रश्न 9. भूस्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर: ढाल पर स्थित चट्टान, मिट्टी या मलबे का गुरुत्वाकर्षण के कारण अचानक या धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकना भूस्खलन कहलाता है।
प्रश्न 10. चक्रवात से प्रभावित तीन भारतीय तटीय प्रदेश बताइए।
उत्तर: ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु।
प्रश्न 11. प्राकृतिक आपदाएँ किसे कहते हैं?
उत्तर: प्राकृतिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न ऐसी घटनाएँ जो मानव जीवन, संपत्ति और पर्यावरण को व्यापक नुकसान पहुँचा सकती हैं, प्राकृतिक आपदाएँ कहलाती हैं।
प्रश्न 12. कुछ सामान्य प्राकृतिक आपदाओं के नाम बताइए।
उत्तर: भूकंप, ज्वालामुखी, बाढ़, सूखा, चक्रवात, सुनामी, भूस्खलन और हिमधाव आदि।
प्रश्न 13. संकट किसे कहते हैं?
उत्तर: ऐसी परिस्थिति जिसमें किसी प्राकृतिक या मानव-जनित घटना से नुकसान होने की संभावना हो और समाज या पर्यावरण उसके प्रति संवेदनशील हो, उसे संकट कहा जा सकता है।
प्रश्न 14. भूकंप का परिणाम क्या होता है?
उत्तर: भूकंप से धरातल में दरारें, भवनों का गिरना, सड़क-पुलों की क्षति, भूस्खलन, आग, सुनामी और जन-धन की हानि हो सकती है।
प्रश्न 15. भूकंप की तीव्रता किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी स्थान पर भूकंप के कारण हुई क्षति और महसूस किए गए प्रभाव की मात्रा को भूकंप की तीव्रता (Intensity) कहा जाता है।
प्रश्न 16. भारत के अधिक तथा अत्यधिक भूकंपीय खतरे वाले क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर: हिमालय, उत्तर-पूर्वी भारत, कच्छ क्षेत्र और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्र अधिक भूकंपीय संवेदनशील हैं। गंगा के मैदान और कुछ अन्य क्षेत्र भी भूकंप के प्रभाव से प्रभावित हो सकते हैं।
प्रश्न 17. रिक्टर पैमाने का उपयोग किसके लिए किया जाता है?
उत्तर: रिक्टर स्केल का उपयोग भूकंप के परिमाण को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 18. कोयना भूकंप किस घटना से संबंधित माना जाता है?
उत्तर: कोयना क्षेत्र में जलाशय-प्रेरित भूकंपीयता (Reservoir-induced seismicity) से भूकंप गतिविधि का संबंध माना जाता है।
प्रश्न 19. सूखा किसे कहते हैं?
उत्तर: जब लंबे समय तक किसी क्षेत्र में जल की उपलब्धता सामान्य आवश्यकता से बहुत कम हो जाती है, तो सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
प्रश्न 20. भारत में सूखे का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: वर्षा की कमी और उसका असमान तथा अनिश्चित वितरण भारत में सूखे के प्रमुख कारण हैं।
प्रश्न 21. भारत में बाढ़ और सूखे से प्रभावित क्षेत्र के बारे में क्या कहा गया है?
उत्तर: Reference में पुराने अनुमान दिए गए हैं। इन्हें वर्तमान आँकड़े मानकर याद नहीं करना चाहिए; परीक्षा में पाठ्यपुस्तक द्वारा दिए गए आँकड़े को प्राथमिकता दें।
प्रश्न 22. भारत में बाढ़ का मुख्य प्राकृतिक कारण क्या है?
उत्तर: भारी और लगातार मानसूनी वर्षा बाढ़ का प्रमुख प्राकृतिक कारण है। इसके साथ चक्रवात और नदी की जलधारा में वृद्धि भी बाढ़ को बढ़ा सकती है।
प्रश्न 23. दक्षिणी प्रायद्वीप में बाढ़ अपेक्षाकृत कम क्यों आती है?
उत्तर: प्रायद्वीपीय नदियाँ सामान्यतः अपेक्षाकृत छोटी और मौसमी होती हैं तथा कई क्षेत्रों में उनका जल शीघ्र समुद्र तक पहुँच जाता है। फिर भी भारी वर्षा या चक्रवात के समय यहाँ बाढ़ आ सकती है।
प्रश्न 24. भारत के प्रमुख बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर: गंगा-ब्रह्मपुत्र घाटी, विशेषकर बिहार और असम, तथा पूर्वी भारत के कई नदी और डेल्टा क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 25. भूस्खलन किसे कहते हैं?
उत्तर: ढाल पर स्थित चट्टान, मिट्टी या मलबे का गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर खिसकना भूस्खलन कहलाता है।
प्रश्न 26. आपदा प्रबंधन किसे कहते हैं?
उत्तर: आपदा के जोखिम को कम करने, तैयारी करने, पूर्व चेतावनी देने, राहत पहुँचाने और पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण करने की संगठित प्रक्रिया को आपदा प्रबंधन कहते हैं।
प्रश्न 27. चक्रवात की उत्पत्ति के लिए आधारभूत आवश्यकताएँ कौन-सी हैं?
उत्तर: गर्म समुद्री जल, पर्याप्त नमी, निम्न वायुदाब, कोरियोलिस प्रभाव और अनुकूल ऊर्ध्वाधर वायुमंडलीय परिस्थितियाँ उष्णकटिबंधीय चक्रवात के निर्माण में सहायक होती हैं।
प्रश्न 28. चक्रवात की गति और सामान्य अवधि कितनी होती है?
उत्तर: चक्रवात की गति और अवधि निश्चित नहीं होती। यह उसकी तीव्रता और वातावरण पर निर्भर करती है। इसलिए किसी एक निश्चित गति या अवधि को सार्वभौमिक मानना उचित नहीं है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि का वर्णन करें।
उत्तर: प्राकृतिक आपदाएँ मानव जीवन, मकानों, कृषि, सड़क, रेल, बिजली, संचार और अन्य आधारभूत संरचनाओं को नुकसान पहुँचा सकती हैं। बाढ़ से फसलें और मकान नष्ट हो सकते हैं, भूकंप से भवन और सड़कें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं तथा चक्रवात से तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं, वर्षा और तूफानी लहरों का प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा आपदाओं के बाद बीमारी, बेरोजगारी और विस्थापन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रश्न 2. प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर: प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन, सुनामी, ज्वालामुखी गतिविधि, बादल फटना और हिमधाव आदि शामिल हैं। इनका स्वरूप और प्रभाव क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
प्रश्न 3. भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों पर नोट लिखें।
उत्तर: भारत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात मुख्यतः बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में विकसित होते हैं। पूर्वी तट के ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। चक्रवात के साथ तेज हवाएँ, भारी वर्षा और तूफानी समुद्री लहरें आती हैं। इससे बाढ़, फसल क्षति, मकानों का विनाश और जन-धन की हानि हो सकती है। पूर्व चेतावनी, तटीय निकासी और सुरक्षित आश्रय आपदा जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 4. भूस्खलन से क्या अभिप्राय है? इसके प्रभाव बताइए।
उत्तर: ढाल पर चट्टान, मिट्टी या मलबे का नीचे की ओर खिसकना भूस्खलन कहलाता है। भारी वर्षा, भूकंप, तीव्र ढाल और मानव गतिविधियाँ इसके कारण हो सकती हैं। इससे सड़कें और पुल टूट सकते हैं, मकान क्षतिग्रस्त हो सकते हैं तथा नदियों के मार्ग अवरुद्ध होकर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
प्रश्न 5. शुष्कता और सूखा में अंतर स्पष्ट करें।
| आधार | शुष्कता | सूखा |
|---|---|---|
| अर्थ | किसी क्षेत्र की दीर्घकालीन जलवायु विशेषता जिसमें नमी कम होती है। | सामान्य से कम जल उपलब्धता की असामान्य स्थिति। |
| समय | दीर्घकालीन जलवायु दशा | किसी अवधि में उत्पन्न संकट |
| प्रभाव | क्षेत्र की सामान्य जलवायु को दर्शाती है। | कृषि, जल, पशुधन और मानव जीवन को प्रभावित कर सकता है। |
प्रश्न 6. आपदा और संकट में अंतर स्पष्ट करें।
| आधार | संकट | आपदा |
|---|---|---|
| अर्थ | नुकसान की संभावना वाला खतरा या परिस्थिति | व्यापक वास्तविक नुकसान पैदा करने वाली घटना |
| प्रभाव | संभावित नुकसान | जन-धन और सामान्य व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव |
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भारत के सूखाग्रस्त इलाकों का वर्णन करते हुए सूखे के अर्थव्यवस्था पर होने वाले प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत में सूखे का खतरा विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक रहता है जहाँ वर्षा कम और अनिश्चित होती है। पश्चिमी राजस्थान, गुजरात के कच्छ क्षेत्र, मध्य भारत तथा प्रायद्वीपीय भारत के कुछ आंतरिक भाग सूखे की दृष्टि से संवेदनशील हैं।
सूखे का सबसे पहला प्रभाव कृषि पर पड़ता है। वर्षा की कमी के कारण फसल उत्पादन घट सकता है। इससे किसानों की आय कम होती है और खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। पशुओं के लिए चारे और पानी की कमी होने से पशुधन पर भी प्रभाव पड़ता है।
लंबे समय तक जल संकट रहने पर ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का पलायन बढ़ सकता है। पेयजल की कमी और खराब जल गुणवत्ता के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियाँ भी जल की कमी से प्रभावित हो सकती हैं।
इसलिए सूखे से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, सूखा-सहिष्णु फसलें और वैज्ञानिक सिंचाई आवश्यक हैं।
प्रश्न 2. भूकंप की परिभाषा दें। भारत में भूकंप क्षेत्रों के वितरण का वर्णन करें।
उत्तर: पृथ्वी की आंतरिक संरचना में अचानक ऊर्जा मुक्त होने के कारण उत्पन्न धरातलीय कंपन को भूकंप कहा जाता है। इससे उत्पन्न ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है।
भारत में भूकंप का वितरण समान नहीं है। हिमालयी क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण भूकंपीय क्षेत्रों में है क्योंकि यहाँ भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट की ओर गतिशील है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा उत्तर-पूर्वी भारत में भूकंप का जोखिम अधिक है।
गंगा के मैदान में भी हिमालय से संबंधित भूकंपीय गतिविधियों का प्रभाव पहुँच सकता है। इसके अलावा प्रायद्वीपीय भारत अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता है, लेकिन यहाँ भी अंतर्प्लेट भूकंप आते हैं। कोयना, लातूर और भुज इसके महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
भूकंप से भवन, सड़क, पुल, रेलमार्ग और संचार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए भूकंपरोधी निर्माण और पूर्व तैयारी अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 3. आपदा प्रबंधन पर एक लेख लिखें।
उत्तर: आपदा प्रबंधन वह संगठित प्रक्रिया है जिसके द्वारा आपदा के जोखिम को कम करने, उससे पहले तैयारी करने, आपदा के दौरान राहत पहुँचाने तथा आपदा के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य किया जाता है।
आपदा प्रबंधन का पहला महत्वपूर्ण चरण जोखिम की पहचान और तैयारी है। इसमें संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, चेतावनी प्रणाली, आपदा अभ्यास, सुरक्षित भवन और आपातकालीन योजनाएँ शामिल हैं।
आपदा के समय लोगों को समय पर चेतावनी देना और सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाना महत्वपूर्ण है। राहत कार्यों में भोजन, स्वच्छ पानी, चिकित्सा, अस्थायी आश्रय और आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की जाती है।
आपदा के बाद क्षतिग्रस्त मकानों, सड़कों, बिजली और जल व्यवस्था का पुनर्निर्माण किया जाता है। भविष्य में समान आपदा से होने वाली क्षति कम करने के लिए Build Back Better जैसी अवधारणाओं के अनुसार अधिक सुरक्षित निर्माण किया जाना चाहिए।
प्रश्न 4. भूकंप आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर: भूकंप के समय घबराने के बजाय सुरक्षित व्यवहार करना चाहिए। यदि व्यक्ति भवन के अंदर है तो मजबूत मेज या अन्य सुरक्षित संरचना के नीचे जाकर सिर और गर्दन को सुरक्षित रखना चाहिए। खिड़कियों, काँच और भारी वस्तुओं से दूर रहना चाहिए।
भूकंप के दौरान लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए और झटकों के बीच बाहर भागने का प्रयास नहीं करना चाहिए। बाहर होने पर भवनों, ऊँची दीवारों, पेड़ों और बिजली की तारों से दूर खुले स्थान में जाना चाहिए। वाहन में होने पर सुरक्षित स्थान पर वाहन रोककर वहीं रहना चाहिए।
झटके रुकने के बाद गैस, बिजली और पानी की व्यवस्था को आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित करना चाहिए तथा क्षतिग्रस्त भवन में बिना विशेषज्ञ की अनुमति के वापस नहीं जाना चाहिए।
प्रश्न 5. भारत में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का वर्णन करें। बाढ़ के कारणों और क्षति का वर्णन करते हुए बाढ़ नियंत्रण के उपाय बताइए।
उत्तर: भारत में बाढ़ मुख्यतः नदी घाटियों और मैदानी क्षेत्रों में अधिक दिखाई देती है। गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र के मैदान इसके प्रमुख उदाहरण हैं। बिहार, असम, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के अनेक क्षेत्रों में बाढ़ की समस्या गंभीर हो सकती है। पूर्वी तट के डेल्टा क्षेत्रों में चक्रवात भी बाढ़ को बढ़ा सकते हैं।
बाढ़ के प्रमुख कारण:
- अत्यधिक और लगातार वर्षा
- नदियों में जलस्तर का बढ़ना
- चक्रवात
- नदी तल में अवसाद का जमाव
- वनों की कटाई
- अपर्याप्त जल निकासी
- बाढ़ मैदानों में अनियोजित निर्माण
बाढ़ से होने वाली क्षति: फसलें नष्ट हो सकती हैं, मकान और सड़कें क्षतिग्रस्त हो सकते हैं तथा बिजली और संचार व्यवस्था बाधित हो सकती है। बाढ़ के बाद दूषित जल के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
बाढ़ नियंत्रण: तटबंध, जलाशय, उचित जल निकासी, नदी घाटी प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान, चेतावनी प्रणाली, जलग्रहण क्षेत्र में वनीकरण तथा बाढ़ मैदानों का वैज्ञानिक भूमि उपयोग बाढ़ के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
प्रश्न 6. सूखा क्या है? भारत में इसके कारणों एवं प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर: जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक जल की उपलब्धता सामान्य आवश्यकता से काफी कम हो जाती है तो सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है। भारत में सूखे का प्रमुख कारण मानसूनी वर्षा की कमी और उसका असमान वितरण है।
पश्चिमी और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में वर्षा की अनिश्चितता सूखे का जोखिम बढ़ाती है। सूखे का प्रभाव केवल कृषि तक सीमित नहीं रहता। इससे पेयजल, पशुओं के चारे, भूजल, उद्योग और ग्रामीण रोजगार पर भी प्रभाव पड़ता है।
सूखे के कारण फसल उत्पादन घट सकता है और किसानों की आय कम हो सकती है। लंबे समय तक सूखा रहने पर मानव और पशुधन का पलायन भी हो सकता है। इसलिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, सूखा-सहिष्णु फसल और प्रभावी सिंचाई प्रबंधन महत्वपूर्ण उपाय हैं।
प्रश्न 7. चक्रवात आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर: चक्रवात की चेतावनी मिलते ही आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। खुले में रखी ऐसी वस्तुओं को सुरक्षित कर देना चाहिए जो तेज हवा में उड़कर नुकसान कर सकती हैं। खिड़कियाँ और दरवाजे सुरक्षित रूप से बंद रखने चाहिए।
चक्रवात के दौरान घर के मजबूत हिस्से में रहना चाहिए। समुद्र तट, नदी के किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में नहीं जाना चाहिए। केवल अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना चाहिए। तूफान की आँख या हवा के अस्थायी रूप से शांत होने को खतरा समाप्त होना नहीं समझना चाहिए।
प्रश्न 8. बाढ़ आने पर करणीय एवं अकरणीय कर्मों का विवरण कीजिए।
उत्तर: बाढ़ की चेतावनी मिलने पर बिजली के उपकरणों को सुरक्षित करना चाहिए और आवश्यक सामान को ऊँचे स्थान पर रखना चाहिए। स्थानीय प्रशासन के निर्देश मिलने पर सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। पीने के पानी और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था करनी चाहिए।
बाढ़ के तेज पानी में पैदल या वाहन से प्रवेश नहीं करना चाहिए क्योंकि कम गहराई का दिखाई देने वाला पानी भी तेज बहाव वाला हो सकता है। टूटे बिजली के तारों से दूर रहना चाहिए। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी दूषित जल और असुरक्षित भवनों से सावधान रहना चाहिए।
प्रश्न 9. भारत की प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं का वर्गीकरण कर किसी एक का वर्णन करें।
उत्तर: प्राकृतिक आपदाओं को उनके कारण और प्रकृति के आधार पर अलग-अलग समूहों में समझा जा सकता है। इनमें भूगर्भीय आपदाएँ जैसे भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियाँ; जल-मौसम संबंधी आपदाएँ जैसे बाढ़, सूखा और चक्रवात; तथा ढाल संबंधी आपदाएँ जैसे भूस्खलन शामिल हैं।
चक्रवात का उदाहरण लें तो यह निम्न वायुदाब से संबंधित एक तीव्र वायुमंडलीय प्रणाली है। गर्म समुद्री जल और पर्याप्त नमी इसके विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। चक्रवात के साथ तेज हवाएँ, भारी वर्षा और तूफानी समुद्री लहरें आती हैं। इससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़, भवनों की क्षति, फसल नष्ट होने और जन-धन की हानि जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। पूर्व चेतावनी और समय पर निकासी से नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।
प्रश्न 10. चक्रवात किसे कहते हैं? चक्रवातों द्वारा क्षति का वर्णन करें।
उत्तर: चक्रवात कम वायुदाब के आसपास विकसित होने वाली तीव्र घूर्णनशील वायुमंडलीय प्रणाली है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात गर्म समुद्री जल और पर्याप्त वायुमंडलीय नमी से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
चक्रवातों से तेज हवाएँ चलती हैं और भारी वर्षा होती है। समुद्र में उत्पन्न तूफानी लहरें (storm surge) तटीय क्षेत्रों में गंभीर बाढ़ ला सकती हैं। इसके अलावा नदी बाढ़, भूस्खलन और बिजली तथा संचार व्यवस्था में व्यवधान भी हो सकता है।
मकानों की छतें और कमजोर संरचनाएँ क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, फसलें नष्ट हो सकती हैं और पेड़ गिर सकते हैं। इसलिए चक्रवात के दौरान पूर्व चेतावनी, सुरक्षित निकासी, मजबूत आश्रय और प्रशासनिक तैयारी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदु
- संकट और आपदा में अंतर जरूर याद करें।
- हिमालय और उत्तर-पूर्वी भारत में भूकंप का कारण समझें।
- भूकंप की P, S और Surface Waves पढ़ें।
- भारत के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।
- सूखे के कारण और प्रभाव से प्रश्न बन सकता है।
- चक्रवात की उत्पत्ति और प्रभाव महत्वपूर्ण है।
- भूस्खलन के कारण और रोकथाम जरूर तैयार करें।
- आपदा प्रबंधन का अर्थ और चरण समझें।
- भूकंप, चक्रवात और बाढ़ के समय करणीय-अकरणीय कार्य याद करें।
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Chapter 2 – संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान
निष्कर्ष
प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ अध्याय हमें यह समझाता है कि प्राकृतिक घटनाओं को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन वैज्ञानिक तैयारी, पूर्व चेतावनी, सुरक्षित निर्माण और उचित आपदा प्रबंधन द्वारा उनके प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।
इस अध्याय में भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात और भूस्खलन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा की तैयारी करते समय केवल परिभाषाएँ याद करने के बजाय प्रत्येक आपदा के कारण, प्रभाव, प्रभावित क्षेत्र और रोकथाम के उपाय को समझकर पढ़ना अधिक उपयोगी रहेगा।