Bihar Board Class 11 Geography Chapter 6 – मृदा में हम मृदा की परिभाषा, निर्माण के कारक, मृदा परिच्छेदिका के संस्तर, भारत की प्रमुख मिट्टियों, मृदा अपरदन तथा मृदा संरक्षण का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे MCQ, अतिलघु, लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
अध्याय 6 : मृदा का परिचय
मृदा पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली वह ऊपरी परत है जिसमें खनिज कण, जैव पदार्थ, जल और वायु पाए जाते हैं। पौधों की वृद्धि तथा कृषि के लिए मृदा अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। मृदा बनने की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है और इसमें चट्टान, जलवायु, उच्चावच, वनस्पति तथा समय जैसे अनेक कारकों की भूमिका होती है।
इसे आसान भाषा में समझें तो चट्टानों के लंबे समय तक अपक्षय, वनस्पतियों के सड़ने-गलने और जलवायु की क्रियाओं से धीरे-धीरे मिट्टी का विकास होता है। अलग-अलग स्थानों पर इन कारकों में अंतर होने के कारण वहाँ मिलने वाली मिट्टी का रंग, बनावट, गहराई और उर्वरता भी अलग होती है।
मृदा निर्माण के प्रमुख कारक
मृदा निर्माण एक प्राकृतिक और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है। इसके प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
1. मूल पदार्थ
मूल पदार्थ मुख्य रूप से उन चट्टानों से प्राप्त होता है जिनके अपक्षय से मिट्टी का निर्माण शुरू होता है। इसलिए किसी क्षेत्र की मिट्टी के गुणों पर वहाँ की आधार चट्टानों का प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, दक्कन क्षेत्र की ज्वालामुखीय चट्टानों से काली मिट्टी के विकास में सहायता मिली है।
2. उच्चावच
भूमि की ऊँचाई और ढाल मृदा निर्माण को प्रभावित करते हैं। समतल क्षेत्रों में मिट्टी का जमाव अधिक हो सकता है, जबकि तेज ढाल वाले क्षेत्रों में जल के बहाव के कारण ऊपरी मिट्टी का अपरदन तेजी से हो सकता है।
3. जलवायु
तापमान और वर्षा मृदा निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिक तापमान से अपक्षय की प्रक्रिया तेज हो सकती है तथा वर्षा जल पदार्थों के स्थानांतरण और निक्षालन को प्रभावित करती है।
4. प्राकृतिक वनस्पति और जीव-जंतु
पौधों और जीव-जंतुओं के अवशेष मिट्टी में जैव पदार्थ तथा ह्यूमस की मात्रा बढ़ाते हैं। इससे मिट्टी की संरचना और उर्वरता प्रभावित होती है।
5. समय
मृदा का निर्माण तत्काल नहीं होता। चट्टानों के अपक्षय और जैव पदार्थों के संचय की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती है। इसलिए समय भी मृदा निर्माण का महत्वपूर्ण कारक है।
मृदा परिच्छेदिका के संस्तर
मृदा की ऊर्ध्वाधर काट को मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) कहा जाता है। इसमें अलग-अलग संस्तर या horizons पाए जाते हैं। सामान्य रूप से A, B और C संस्तर महत्वपूर्ण हैं।
A संस्तर
यह सबसे ऊपरी संस्तर होता है। इसमें खनिज पदार्थों के साथ जैव पदार्थ और ह्यूमस पाए जाते हैं। पौधों की वृद्धि के लिए यह संस्तर विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।
B संस्तर
यह A और C संस्तर के बीच स्थित होता है। इसमें ऊपर और नीचे से पदार्थों का संचय हो सकता है।
C संस्तर
यह अपेक्षाकृत ढीली मूल सामग्री से बना होता है। मृदा निर्माण में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है क्योंकि यह मूल पदार्थ उपलब्ध कराता है।
मृदा के प्रमुख घटक
मृदा में मुख्य रूप से निम्न घटक पाए जाते हैं:
- खनिज कण
- ह्यूमस एवं जैव पदार्थ
- जल
- वायु
इन घटकों का संतुलन मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता को प्रभावित करता है।
मृदा की प्रमुख विशेषताएँ
मृदा की उपयोगिता केवल उसके रंग से निर्धारित नहीं होती। उसकी बनावट, गहराई, जल धारण क्षमता, खनिज तत्व, जैव पदार्थ और जल निकास जैसी विशेषताएँ भी महत्वपूर्ण हैं।
Textbook Questions and Answers
बहुवैकल्पिक प्रश्न (MCQ)
1. भारत में सबसे विस्तृत और उपजाऊ मृदा कौन-सी है?
(क) जलोढ़ मृदा
(ख) काली मृदा
(ग) लैटेराइट मृदा
(घ) वन मृदा
सही उत्तर: (क) जलोढ़ मृदा
व्याख्या: जलोढ़ मृदा का निर्माण मुख्य रूप से नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेप से हुआ है। उत्तरी मैदान और कई नदी घाटियों में इसके व्यापक विस्तार के कारण इसका कृषि की दृष्टि से बहुत महत्व है।
2. रेगुर मृदा किसे कहा जाता है?
(क) जलोढ़ मृदा
(ख) काली मृदा
(ग) मरुस्थलीय मृदा
(घ) लैटेराइट मृदा
सही उत्तर: (ख) काली मृदा
व्याख्या: काली मृदा को रेगुर मृदा तथा कपास की मिट्टी भी कहा जाता है। इसमें नमी धारण करने की अच्छी क्षमता होती है और कपास की खेती के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
3. मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत के हटने को क्या कहा जाता है?
(क) पवन अपरदन
(ख) अपक्षय
(ग) जल अपरदन
(घ) निक्षेपण
सही उत्तर: (ग) जल अपरदन
व्याख्या: बहता हुआ जल मिट्टी के महीन और उपजाऊ कणों को अपने साथ बहा ले जाता है। इसे जल द्वारा होने वाला मृदा अपरदन कहते हैं।
4. सिंचित कृषि भूमि में मृदा की समस्या का एक प्रमुख कारण क्या हो सकता है?
(क) जिप्सम
(ख) अत्यधिक सिंचाई
(ग) नियंत्रित चराई
(घ) जैव खाद
सही उत्तर: (ख) अत्यधिक सिंचाई
व्याख्या: अत्यधिक सिंचाई से कुछ क्षेत्रों में जलभराव और लवणीयता जैसी समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। इसलिए सिंचाई का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग आवश्यक है।
लगभग 30 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. मृदा क्या है?
उत्तर: पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली खनिज कणों, जैव पदार्थ, जल और वायु से बनी ऊपरी परत को मृदा कहते हैं। यह कृषि और वनस्पति जीवन के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है।
प्रश्न 2. मृदा निर्माण के प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: मृदा निर्माण में मूल पदार्थ, उच्चावच, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जंतु और समय प्रमुख भूमिका निभाते हैं। मानवीय गतिविधियाँ भी मृदा के गुणों को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रश्न 3. मृदा परिच्छेदिका के तीन प्रमुख संस्तर कौन-से हैं?
उत्तर: मृदा परिच्छेदिका के प्रमुख संस्तर A, B और C हैं। A ऊपरी परत, B मध्य संचय परत और C मूल सामग्री से संबंधित परत होती है।
प्रश्न 4. मृदा अवकर्षण क्या है?
उत्तर: मृदा की गुणवत्ता और उर्वरता में कमी को मृदा अवकर्षण कहते हैं। अपरदन, अनुचित कृषि, अति चराई और भूमि के गलत उपयोग से मृदा अवकर्षण बढ़ सकता है।
प्रश्न 5. खादर और बांगर में अंतर बताइए।
उत्तर: खादर नवीन जलोढ़ मृदा है, जो बाढ़ के दौरान नदियों द्वारा जमा की जाती है। बांगर पुरानी जलोढ़ मृदा है, जो सामान्यतः बाढ़ के मैदान से अपेक्षाकृत ऊँचे भागों में मिलती है।
लगभग 125 शब्दों में उत्तर
प्रश्न 1. काली मृदा क्या है? इसके निर्माण और विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: काली मृदा भारत की महत्वपूर्ण मृदाओं में से एक है। इसे रेगुर मृदा या कपास की मिट्टी भी कहा जाता है। इसका व्यापक विकास दक्कन के पठार के उन क्षेत्रों में हुआ है जहाँ ज्वालामुखीय चट्टानों से संबंधित मूल पदार्थ उपलब्ध है।
काली मृदा सामान्यतः गहरी और चिकनी होती है। गीली अवस्था में यह फूलकर चिपचिपी हो जाती है और सूखने पर सिकुड़ती है। सूखने पर इसमें दरारें बन जाती हैं। इसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी नमी धारण करने की क्षमता है। यही कारण है कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी यह कुछ फसलों के लिए उपयोगी रहती है।
काली मृदा में कुछ खनिज तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और जैव पदार्थों की कमी हो सकती है। कपास की खेती के लिए इसका विशेष महत्व है।
प्रश्न 2. मृदा संरक्षण क्या है? इसके उपाय बताइए।
उत्तर: मृदा को अपरदन और क्षय से बचाकर उसकी उर्वरता बनाए रखने की प्रक्रिया को मृदा संरक्षण कहते हैं। मृदा संरक्षण इसलिए जरूरी है क्योंकि उपजाऊ मिट्टी बनने में बहुत लंबा समय लगता है, लेकिन थोड़े समय में अपरदन से इसकी ऊपरी परत नष्ट हो सकती है।
मृदा संरक्षण के लिए ढाल वाले क्षेत्रों में सीढ़ीदार कृषि, समोच्च रेखीय जुताई और मेड़बंदी की जा सकती है। वृक्षारोपण से मिट्टी को बाँधने में सहायता मिलती है। अति चराई पर नियंत्रण, आवरण फसलों का प्रयोग, मिश्रित खेती और शस्यावर्तन भी उपयोगी उपाय हैं। मरुस्थलीय क्षेत्रों में वायु की गति कम करने के लिए वृक्षों की रक्षक पट्टियाँ बनाई जा सकती हैं।
प्रश्न 3. मृदा की उर्वरता कैसे पहचानी जाती है? प्राकृतिक और मानवकृत उर्वरता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मृदा की उर्वरता का संबंध उसकी पोषक तत्व उपलब्ध कराने की क्षमता से है। जिस मिट्टी में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व, पर्याप्त नमी, उचित संरचना और जैव पदार्थ मौजूद हों, वह सामान्यतः अधिक उर्वर होती है।
प्राकृतिक उर्वरता वह उर्वरता है जो मिट्टी में प्राकृतिक रूप से मौजूद पोषक तत्वों और उसके भौतिक गुणों से प्राप्त होती है। इसके विपरीत, जब मानव खाद, उर्वरक या अन्य उपयुक्त पदार्थों के माध्यम से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है, तो इसे मानवकृत या प्रबंधित उर्वरता के रूप में समझा जा सकता है।
परियोजना कार्य (Project Work)
प्रश्न 1. अपने क्षेत्र से मृदा के विभिन्न नमूने एकत्र करके मृदा के प्रकारों पर रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर लिखने का तरीका: विद्यार्थी अपने आसपास के अलग-अलग स्थानों से थोड़ी मात्रा में मिट्टी के नमूने लें। प्रत्येक नमूने का स्थान, रंग, बनावट, नमी, उसमें पाए जाने वाले कण और स्थानीय उपयोग को नोट करें। इसके बाद नमूनों की तुलना करके एक छोटी रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।
प्रश्न 2. भारत के रेखा मानचित्र पर लाल, लैटेराइट और जलोढ़ मृदा के क्षेत्रों को चिह्नित कीजिए।
मानचित्र कार्य: इस प्रश्न के लिए भारत के मानचित्र पर तीनों मृदा प्रकारों के प्रमुख वितरण क्षेत्रों को अलग-अलग संकेतों से दिखाएँ। परीक्षा में मानचित्र को साफ-सुथरा बनाना और संकेतांक (Legend) देना उपयोगी रहेगा।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. उत्तरी भारत की जलोढ़ मृदा की दो प्रमुख किस्में कौन-सी हैं?
उत्तर: खादर और बांगर।
प्रश्न 2. भारतीय मैदानों में सबसे व्यापक रूप से कौन-सी मृदा मिलती है?
उत्तर: जलोढ़ मृदा।
प्रश्न 3. खादर और बांगर के स्थानीय नाम क्या बताए जाते हैं?
उत्तर: संदर्भ सामग्री में खादर के लिए बैठ और बांगर के लिए धाया नाम दिए गए हैं।
प्रश्न 4. खादर मृदा के प्रमुख क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर: सतलुज बेसिन, गंगा का मैदान और यमुना बेसिन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 5. जलोढ़ मृदा में उगाई जाने वाली दो प्रमुख खाद्य फसलें बताइए।
उत्तर: गेहूँ और चावल।
प्रश्न 6. पश्चिम बंगाल की जलोढ़ मृदा किस फसल के लिए विशेष रूप से उपयोगी है?
उत्तर: पटसन की खेती के लिए।
प्रश्न 7. मृदा क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: मृदा पौधों की वृद्धि और खाद्य उत्पादन का आधार है। इसलिए मानव सहित अनेक जीवों के जीवन के लिए इसका बहुत महत्व है।
प्रश्न 8. मृदा के मुख्य आवश्यक घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: मृदा में खनिज कण, जैव पदार्थ या ह्यूमस, जल और वायु प्रमुख घटक हैं।
प्रश्न 9. चिकनी मिट्टी की एक प्रमुख विशेषता क्या है?
उत्तर: चिकनी मिट्टी जल को अपेक्षाकृत अधिक धारण कर सकती है।
प्रश्न 10. मृदा की तीन प्रमुख परतों के नाम बताइए।
उत्तर: A संस्तर, B संस्तर और C संस्तर।
प्रश्न 11. मृदा की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: पृथ्वी की सतह पर खनिज कणों, जैव पदार्थ, जल और वायु से बनी ऊपरी परत को मृदा कहा जाता है।
प्रश्न 12. मृदा की बनावट किन प्रमुख तत्वों पर निर्भर करती है?
उत्तर: मूल पदार्थ, उच्चावच और जलवायु सहित वनस्पति तथा अन्य प्राकृतिक परिस्थितियाँ मृदा की बनावट को प्रभावित करती हैं।
प्रश्न 13. भारत में मृदा के तीन व्यापक प्रादेशिक भाग कौन-से बताए जाते हैं?
उत्तर: प्रायद्वीपीय भारत की मिट्टियाँ, उत्तरी मैदान की मिट्टियाँ और हिमालयी क्षेत्रों की मिट्टियाँ।
प्रश्न 14. बनावट के आधार पर मिट्टी की प्रमुख किस्में कौन-सी हैं?
उत्तर: रेतीली, चिकनी और दोमट मिट्टी।
प्रश्न 15. भारत में सबसे व्यापक रूप से पाई जाने वाली मिट्टी कौन-सी है?
उत्तर: जलोढ़ मिट्टी।
प्रश्न 16. लैटेराइट मिट्टी की दो अवस्थाएँ/किस्में कौन-सी बताई गई हैं?
उत्तर: उच्च मैदान लैटेराइट मिट्टी और निम्न मैदान लैटेराइट मिट्टी।
प्रश्न 17. लैटेराइट मिट्टी वाले कुछ प्रमुख राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर: आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 18. लैटेराइट मिट्टी किस प्रकार की कृषि के लिए उपयोगी हो सकती है?
उत्तर: उपयुक्त प्रबंधन और उर्वरक के साथ यह बागानी फसलों के लिए उपयोगी हो सकती है।
प्रश्न 19. मरुस्थलीय मिट्टी कहाँ पाई जाती है?
उत्तर: शुष्क और अर्द्ध-शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्रों में। भारत में इसका प्रमुख विस्तार पश्चिमी राजस्थान में है।
प्रश्न 20. भारत में मरुस्थलीय मिट्टी का प्रमुख क्षेत्र कौन-सा है?
उत्तर: पश्चिमी राजस्थान का थार मरुस्थल इसका प्रमुख क्षेत्र है।
प्रश्न 21. मरुस्थलीय क्षेत्रों में कृषि किस कारण संभव हो पाती है?
उत्तर: पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध होने पर मरुस्थलीय क्षेत्रों में कृषि संभव हो सकती है।
प्रश्न 22. मरुस्थलीय मिट्टी की दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: यह सामान्यतः रेतीली होती है और कई स्थानों पर इसमें लवणीयता की समस्या भी हो सकती है।
प्रश्न 23. मृदा किसे कहते हैं?
उत्तर: भू-पृष्ठ की ऊपरी असंगठित परत, जिसमें खनिज तथा जैव पदार्थ पाए जाते हैं, मृदा कहलाती है।
प्रश्न 24. दक्कन पठार के बाहरी भागों में कौन-सी मृदा मिलती है?
उत्तर: लाल मृदा के व्यापक क्षेत्र दक्कन पठार के बाहरी भागों में पाए जाते हैं।
प्रश्न 25. प्रायद्वीपीय भारत की एक प्रमुख मृदा कौन-सी है?
उत्तर: लाल मृदा।
प्रश्न 26. लाल मृदा वाले दो प्रमुख राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर: तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 27. लाल मृदा के रंग में कौन-से रंग दिखाई दे सकते हैं?
उत्तर: लाल मृदा में लाल, पीले तथा भूरे रंग की विभिन्न छायाएँ दिखाई दे सकती हैं।
प्रश्न 28. रेगुर मृदा का रंग कैसा होता है?
उत्तर: काला।
प्रश्न 29. काली मृदा वाले दो राज्य बताइए।
उत्तर: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश।
प्रश्न 30. काली मृदा के दो अन्य नाम क्या हैं?
उत्तर: रेगुर मृदा और कपास की मिट्टी।
प्रश्न 31. काली मृदा का निर्माण किससे संबंधित है?
उत्तर: दक्कन ट्रैप की ज्वालामुखीय चट्टानों से निकले लावा के अपक्षय से इसके निर्माण का संबंध है।
प्रश्न 32. काली मृदा के लिए एक प्रमुख फसल बताइए।
उत्तर: कपास।
प्रश्न 33. लैटेराइट मृदा किस जलवायु में विकसित होती है?
उत्तर: उष्ण और आर्द्र, अधिक मौसमी वर्षा वाली जलवायु में लैटेराइट मृदा का विकास होता है।
प्रश्न 34. मृदा के तीन प्रमुख संस्तर कौन-से हैं?
उत्तर: A संस्तर, B संस्तर और C संस्तर।
प्रश्न 35. मृदा अपरदन किसे कहते हैं?
उत्तर: जल या वायु जैसे कारकों द्वारा मृदा की ऊपरी परत के कणों का हटना या बह जाना मृदा अपरदन कहलाता है।
प्रश्न 36. बीहड़ क्या हैं?
उत्तर: गहरी नालियों और अवनालिका अपरदन से निर्मित ऊबड़-खाबड़ भूमि को बीहड़ कहा जाता है।
प्रश्न 37. मृदा का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: चट्टानों के भौतिक और रासायनिक अपक्षय, जैव पदार्थों के संचय तथा जलवायु और जीवों की क्रियाओं से लंबे समय में मृदा का निर्माण होता है।
प्रश्न 38. मृदा निर्माण के प्रमुख कारक लिखिए।
उत्तर: मूल पदार्थ, उच्चावच, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति और समय मृदा निर्माण के प्रमुख कारक हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मृदा का मूल पदार्थ क्या है?
उत्तर: जिन चट्टानों और अवसादों से मृदा निर्माण के लिए मूल खनिज पदार्थ प्राप्त होते हैं, उन्हें मृदा का मूल पदार्थ कहा जाता है। यह मृदा के रंग, बनावट और रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है।
प्रश्न 2. मृदा जनन में कौन-कौन से प्राकृतिक तत्व महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: मृदा जनन में मूल पदार्थ, उच्चावच, जलवायु, वनस्पति, जीव-जंतु और समय महत्वपूर्ण हैं। तापमान और वर्षा अपक्षय तथा पदार्थों के स्थानांतरण को प्रभावित करते हैं, जबकि वनस्पति जैव पदार्थ उपलब्ध कराती है।
प्रश्न 3. जलोढ़ मृदा की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
- इसका निर्माण मुख्यतः नदी द्वारा लाए गए अवसादों से होता है।
- यह नदी घाटियों और मैदानों में व्यापक रूप से मिलती है।
- सामान्यतः कृषि की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
- इसमें महीन गाद और अन्य अवसादी कण पाए जाते हैं।
- खादर और बांगर इसके प्रमुख रूप हैं।
प्रश्न 4. भारत में मिट्टियों में प्रादेशिक विभिन्नता के कारण बताइए।
उत्तर: भारत में मिट्टी की विभिन्नता का कारण अलग-अलग क्षेत्रों में चट्टान, उच्चावच, ढाल, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति तथा जीव-जंतुओं की स्थिति में अंतर होना है। इसलिए किसी क्षेत्र की मिट्टी दूसरे क्षेत्र की मिट्टी से अलग हो सकती है।
प्रश्न 5. पठारों और मैदानों की मिट्टी में अंतर बताइए।
| आधार | पठार की मिट्टी | मैदान की मिट्टी |
|---|---|---|
| मूल | मुख्यतः स्थानीय चट्टानों से संबंधित | नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से |
| बनावट | कई स्थानों पर अपेक्षाकृत मोटे कण | अक्सर महीन गाद और चिकनी कणयुक्त |
| उदाहरण | लाल या काली मिट्टी | जलोढ़ मिट्टी |
प्रश्न 6. लाल मिट्टी के निर्माण और प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: लाल मिट्टी का संबंध मुख्यतः लौहयुक्त चट्टानों के अपक्षय और लौह के ऑक्सीकरण से है। लौह ऑक्साइड के कारण इसका रंग लाल या लाल-पीला दिखाई देता है। इसका विस्तार प्रायद्वीपीय भारत के कई भागों में मिलता है। इसमें सामान्यतः नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी हो सकती है। उचित खाद और उर्वरक के प्रयोग से इसकी कृषि उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है।
प्रश्न 7. मृदा क्या है और इसका निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: पृथ्वी की सतह की खनिज और जैव पदार्थों वाली ऊपरी परत को मृदा कहते हैं। इसका निर्माण चट्टानों के अपक्षय, जैव पदार्थों के संचय, जलवायु, वनस्पति, जीव-जंतु और समय के संयुक्त प्रभाव से होता है। यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है।
प्रश्न 8. मृदा जनन की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर: मृदा जनन वह प्रक्रिया है जिसमें प्राकृतिक परिस्थितियों के प्रभाव से मूल पदार्थ धीरे-धीरे मृदा में बदलता है। अपक्षय से चट्टानें टूटती हैं, जैव पदार्थ जुड़ते हैं और जल तथा वायु की क्रियाओं से मिट्टी की संरचना विकसित होती है।
प्रश्न 9. दक्षिणी पठार की लाल मिट्टी का रंग लाल क्यों है?
उत्तर: दक्षिणी पठार की अनेक चट्टानों में लौह तत्व मौजूद है। अपक्षय और ऑक्सीकरण की प्रक्रिया के कारण लौह ऑक्साइड बनता है। यही लौह ऑक्साइड मिट्टी को लाल रंग प्रदान करता है।
प्रश्न 10. वनस्पति जाति और वनस्पति में क्या अंतर है?
उत्तर: वनस्पति जाति से किसी विशेष प्रकार के पौधे या पौधों के समूह का संकेत मिलता है, जबकि वनस्पति किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले समग्र पौधों के आवरण को कहा जाता है।
प्रश्न 11. वनस्पति और वन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वनस्पति में किसी क्षेत्र के सभी प्रकार के पौधों का व्यापक अर्थ शामिल हो सकता है। वन अपेक्षाकृत घना वृक्ष-प्रधान पौधों का क्षेत्र होता है। इसलिए हर वनस्पति क्षेत्र को वन नहीं कहा जा सकता।
प्रश्न 12. समोच्च रेखा बंधन क्या है? इसका उपयोग कैसे किया जाता है?
उत्तर: ढाल पर समान ऊँचाई वाली रेखाओं के अनुरूप मेड़ या बाँध बनाना समोच्च रेखा बंधन कहलाता है। इससे वर्षा का पानी तेजी से नीचे नहीं बहता और मृदा अपरदन कम होता है।
प्रश्न 13. मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के उपाय बताइए।
उत्तर: मृदा अपरदन रोकना, जैव खाद का प्रयोग, उचित उर्वरक प्रबंधन, शस्यावर्तन, मिश्रित खेती, वैज्ञानिक कृषि पद्धति और मिट्टी की नमी का संरक्षण मृदा की उर्वरता बनाए रखने में सहायता करते हैं।
प्रश्न 14. आर्थिक विकास में मृदा का क्या महत्व है?
उत्तर: कृषि, पशुपालन और वनस्पति जीवन का आधार मृदा है। उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में कृषि उत्पादन अधिक हो सकता है, जिससे रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। इसके विपरीत अत्यधिक अनुपजाऊ भूमि में कृषि की संभावनाएँ सीमित हो सकती हैं।
प्रश्न 15. मृदा की उर्वरता कम होने के प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर: लगातार खेती, अनुचित कृषि पद्धति, एक ही फसल बार-बार उगाना, अति चराई, वनों की कटाई तथा जल और वायु अपरदन से मृदा की उर्वरता कम हो सकती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मृदा अपरदन क्या है? इसके कारण और रोकने के उपाय बताइए।
उत्तर: मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत का जल या वायु जैसे प्राकृतिक कारकों द्वारा हटना मृदा अपरदन कहलाता है। जब उपजाऊ मिट्टी का लगातार क्षय होता है तो कृषि की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
मृदा अपरदन के प्रमुख कारण:
- अत्यधिक वर्षा: तेज वर्षा और बहता हुआ पानी मिट्टी के कणों को बहा सकता है।
- वनों की कटाई: पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बाँधती हैं। वनों की कटाई से मिट्टी खुली हो जाती है।
- स्थानांतरी कृषि: प्राकृतिक वनस्पति हटने से कुछ क्षेत्रों में अपरदन बढ़ सकता है।
- अति चराई: पशुओं द्वारा अत्यधिक चराई से वनस्पति आवरण कम हो जाता है।
- तेज हवाएँ: शुष्क और मरुस्थलीय क्षेत्रों में हवा मिट्टी के महीन कणों को उड़ा सकती है।
मृदा अपरदन रोकने के उपाय:
- वृक्षारोपण और वन संरक्षण
- नियंत्रित पशुचारण
- सीढ़ीनुमा खेती
- समोच्च रेखीय जुताई और मेड़बंदी
- आवरण फसलों का प्रयोग
- शस्यावर्तन
- वायु की गति कम करने के लिए रक्षक वृक्ष-पट्टी
- स्थानांतरी कृषि को नियंत्रित करना
इसे आसान भाषा में समझें तो मृदा को खुला छोड़ने के बजाय उसे वनस्पति, फसल या उचित भूमि प्रबंधन से ढककर रखना अपरदन कम करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।
प्रश्न 2. मृदा निर्माण के मुख्य घटकों के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मृदा निर्माण किसी एक कारक का परिणाम नहीं है। मूल पदार्थ, उच्चावच, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति और समय एक-दूसरे के साथ मिलकर मृदा के विकास को प्रभावित करते हैं।
मूल पदार्थ: जिस चट्टान या अवसाद से मिट्टी का निर्माण होता है, वह उसके खनिज और रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है।
उच्चावच: समतल क्षेत्रों में मिट्टी का जमाव अधिक हो सकता है, जबकि तीव्र ढाल वाले क्षेत्रों में अपरदन के कारण मिट्टी की मोटाई कम हो सकती है।
जलवायु: तापमान और वर्षा अपक्षय, निक्षालन और अपरदन को प्रभावित करते हैं। इसलिए अलग-अलग जलवायु वाले क्षेत्रों में अलग प्रकार की मिट्टियाँ विकसित होती हैं।
प्राकृतिक वनस्पति: पौधों के गले-सड़े अवशेष मिट्टी में जैव पदार्थ और ह्यूमस जोड़ते हैं। इससे मिट्टी की संरचना और उर्वरता प्रभावित होती है।
समय: मृदा का विकास धीमी प्रक्रिया है। इसलिए पर्याप्त समय के बिना पूर्ण विकसित मृदा का निर्माण संभव नहीं होता।
प्रश्न 3. भारत में मृदा संरक्षण पर निबंध लिखिए।
उत्तर: भारत में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मृदा अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। लेकिन जल अपरदन, वायु अपरदन, वनों की कटाई, अति चराई और अनुचित कृषि पद्धतियों के कारण अनेक क्षेत्रों में मृदा का क्षय हो रहा है। इसलिए मृदा संरक्षण आवश्यक है।
ढाल वाले क्षेत्रों में समोच्च रेखीय खेती और सीढ़ीनुमा कृषि अपनाई जानी चाहिए। इससे पानी की गति कम होती है और मिट्टी का कटाव घटता है। वनों की कटाई रोकने और वृक्षारोपण बढ़ाने से भी मिट्टी को स्थिर रखने में सहायता मिलती है।
अति चराई को नियंत्रित करना चाहिए तथा स्थानांतरी कृषि के दुष्प्रभावों को कम करना चाहिए। शस्यावर्तन, मिश्रित खेती, आवरण फसल और वैज्ञानिक सिंचाई पद्धतियों को अपनाया जाना चाहिए। मरुस्थलीय क्षेत्रों में हवा से मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए रक्षक वृक्ष-पट्टी उपयोगी होती है।
इस प्रकार वैज्ञानिक भूमि उपयोग, वृक्षारोपण, समोच्च खेती, नियंत्रित चराई और उचित कृषि प्रबंधन द्वारा भारत में मृदा संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रश्न 4. विश्व की प्रमुख मिट्टियों के प्रकार बताइए और किसी एक का वर्णन कीजिए।
उत्तर: संदर्भ सामग्री में विश्व की मिट्टियों को व्यापक रूप से कई प्रमुख प्रकारों में समझाया गया है, जिनमें जलोढ़, काली, लाल, लैटेराइट, मरुस्थलीय और पर्वतीय मिट्टियाँ शामिल हैं।
जलोढ़ मिट्टी: यह नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेप से बनती है। भारत के उत्तरी मैदान और अनेक नदी घाटियों में इसका व्यापक विस्तार है। यह सामान्यतः कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण मिट्टी है।
जलोढ़ मिट्टी को नवीनता के आधार पर खादर और बांगर में समझा जाता है। खादर अपेक्षाकृत नई जलोढ़ मिट्टी है, जबकि बांगर पुरानी जलोढ़ मिट्टी है।
प्रश्न 5. भारत की मिट्टियों का वर्गीकरण कीजिए तथा उनकी विशेषताओं और वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भारत में अलग-अलग प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण कई प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं। प्रमुख प्रकारों को इस प्रकार समझा जा सकता है:
| मृदा का प्रकार | मुख्य विशेषता | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|---|
| जलोढ़ मृदा | नदी निक्षेप से निर्मित, कृषि के लिए महत्वपूर्ण | उत्तरी मैदान और नदी डेल्टा |
| काली मृदा | नमी धारण क्षमता अच्छी, कपास के लिए महत्वपूर्ण | दक्कन का पठार |
| लाल एवं पीली मृदा | लौह ऑक्साइड के कारण लाल/पीला रंग | प्रायद्वीपीय भारत के कई भाग |
| लैटेराइट मृदा | अधिक वर्षा और निक्षालन से संबंधित | पश्चिमी एवं पूर्वी घाट के कुछ भाग तथा अन्य आर्द्र क्षेत्र |
| मरुस्थलीय मृदा | रेतीली, कई स्थानों पर लवणीय | पश्चिमी राजस्थान |
| वन मृदा | पर्वतीय और वन क्षेत्रों में विकसित | हिमालय और अन्य पर्वतीय क्षेत्र |
प्रश्न 6. भारत में काली मृदा के क्षेत्र और उसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: काली मृदा का विकास मुख्यतः दक्कन के पठार की ज्वालामुखीय चट्टानों से संबंधित है। महाराष्ट्र, पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में इसका विस्तार मिलता है।
इसे रेगुर मृदा और कपास की मिट्टी भी कहा जाता है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में नमी धारण करने की क्षमता, गहरी संरचना और सूखने पर दरारें पड़ना शामिल हैं। कपास की खेती के लिए यह विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
मृदा अपरदन के प्रमुख प्रकार
1. परत अपरदन (Sheet Erosion)
जब बहता हुआ पानी मिट्टी की ऊपरी परत को अपेक्षाकृत समान रूप से हटा देता है, तो इसे परत अपरदन कहा जाता है।
2. अवनालिका या नालीदार अपरदन (Gully Erosion)
जब बहता हुआ पानी मिट्टी को काटते हुए गहरी नालियाँ बना देता है, तो अवनालिका अपरदन विकसित होता है। लंबे समय तक यह प्रक्रिया बीहड़ जैसी भूमि का निर्माण कर सकती है।
3. पवन अपरदन (Wind Erosion)
शुष्क और मरुस्थलीय क्षेत्रों में तेज हवा मिट्टी के महीन कणों को उड़ा सकती है। इसे पवन अपरदन कहा जाता है।
मृदा संरक्षण के महत्वपूर्ण उपाय
- वृक्षारोपण: पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बाँधने में मदद करती हैं।
- समोच्च जुताई: ढाल के समानांतर पानी के बहाव को नियंत्रित किया जाता है।
- सीढ़ीनुमा खेती: पर्वतीय क्षेत्रों में ढाल को सीढ़ियों में बाँटकर जल बहाव कम किया जाता है।
- नियंत्रित चराई: अत्यधिक चराई रोकने से वनस्पति आवरण सुरक्षित रहता है।
- शस्यावर्तन: अलग-अलग फसलों को क्रम से उगाने से मिट्टी पर एकतरफा पोषक दबाव कम किया जा सकता है।
- आवरण फसल: भूमि को वनस्पति आवरण मिलने से मिट्टी सीधे वर्षा और हवा के संपर्क से बचती है।
- रक्षक वृक्ष-पट्टी: शुष्क क्षेत्रों में तेज हवाओं की गति कम करने में सहायता करती है।
अध्याय 6 मृदा – त्वरित पुनरावृत्ति
- मृदा पृथ्वी की सतह की महत्वपूर्ण प्राकृतिक परत है।
- मृदा निर्माण में मूल पदार्थ, उच्चावच, जलवायु, वनस्पति और समय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
- मृदा परिच्छेदिका के प्रमुख संस्तर A, B और C हैं।
- जलोढ़ मृदा नदी द्वारा लाए गए अवसादों से बनती है।
- खादर नवीन और बांगर पुरानी जलोढ़ मृदा है।
- काली मृदा को रेगुर और कपास की मिट्टी भी कहा जाता है।
- काली मृदा की नमी धारण क्षमता अच्छी होती है।
- लाल मृदा के रंग में लौह ऑक्साइड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
- लैटेराइट मृदा अधिक वर्षा और निक्षालन से संबंधित है।
- मरुस्थलीय मृदा का प्रमुख क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान है।
- मृदा की ऊपरी परत के हटने को मृदा अपरदन कहते हैं।
- वृक्षारोपण, समोच्च जुताई, सीढ़ीनुमा खेती और नियंत्रित चराई मृदा संरक्षण के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
BSEB Class 11 Geography के अन्य अध्याय
Chapter 2 – संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान
Chapter 7 – प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ
निष्कर्ष
मृदा मानव जीवन और कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। भारत में जलोढ़, काली, लाल एवं पीली, लैटेराइट, मरुस्थलीय और वन मृदा जैसी विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं। इनकी विशेषताएँ उनके निर्माण में योगदान देने वाले मूल पदार्थ, जलवायु, उच्चावच, वनस्पति और अन्य कारकों के कारण अलग-अलग होती हैं।
मृदा का निर्माण बहुत धीमी प्रक्रिया है, जबकि मृदा अपरदन और अवकर्षण अपेक्षाकृत तेजी से हो सकते हैं। इसलिए मृदा संरक्षण, वैज्ञानिक कृषि, वृक्षारोपण, नियंत्रित चराई और उचित भूमि उपयोग को अपनाना आवश्यक है। परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय में मृदा निर्माण, खादर-बांगर, काली मृदा, लाल मृदा, मृदा अपरदन और मृदा संरक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।