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Bihar Board Class 11 History Solutions Chapter 7 बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ

Bihar Board Class 11 History Chapter 7 – बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ में यूरोप में पुनर्जागरण, मानवतावाद, कला और साहित्य के विकास, वैज्ञानिक क्रांति, भौगोलिक खोजों तथा धर्म-सुधार आंदोलन का अध्ययन किया जाता है। इस अध्याय से यह समझने में सहायता मिलती है कि यूरोप में मध्यकालीन विचारों से आधुनिक विचारों की ओर परिवर्तन किस प्रकार हुआ।

Table of Contents

अध्याय का परिचय

पुनर्जागरण का अर्थ पुनर्जन्म या नई जागृति से है। यूरोप में लगभग चौदहवीं से सोलहवीं शताब्दी के बीच प्राचीन यूनानी और रोमन ज्ञान, कला तथा साहित्य में नई रुचि पैदा हुई। इसके साथ मानव जीवन, तर्क, प्रयोग और ज्ञान को नए ढंग से देखने की प्रवृत्ति विकसित हुई।

इटली के नगर इस परिवर्तन के प्रमुख केंद्र बने। फ्लोरेंस, वेनिस और रोम जैसे नगरों में व्यापार, शिक्षा, कला और साहित्य का विकास हुआ। बाद में ये विचार यूरोप के दूसरे भागों में भी फैल गए।

पुनर्जागरण की प्रमुख विशेषताएँ

  • प्राचीन यूनानी और रोमन ज्ञान में नई रुचि।
  • मानवतावादी विचारों का विकास।
  • तर्क और विवेक पर अधिक जोर।
  • कला और साहित्य में नए विषयों का विकास।
  • विज्ञान तथा प्रयोग को प्रोत्साहन।
  • मुद्रण तकनीक के विकास से विचारों का तेजी से प्रसार।
  • व्यापार और नगरों का विकास।
  • धर्म-सुधार आंदोलन का उदय।

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. चौदहवीं और पंद्रहवीं शताब्दियों में यूनानी और रोमन संस्कृति के किन तत्वों को पुनर्जीवित किया गया?

उत्तर: चौदहवीं और पंद्रहवीं शताब्दियों में यूरोप में प्राचीन यूनानी और रोमन संस्कृति के कई तत्वों में नई रुचि उत्पन्न हुई।

  • प्राचीन लेखकों की रचनाओं का अध्ययन किया गया।
  • प्राचीन ज्ञान और विचारों को फिर से समझने का प्रयास हुआ।
  • मानवतावादी विचारों को महत्व दिया गया।
  • प्राचीन कला और चित्रकला की परंपराओं को नया रूप मिला।
  • प्राचीन वास्तुकला से प्रेरणा लेकर नई भवन शैली विकसित हुई।

प्रश्न 2. इस काल की इटली की वास्तुकला और इस्लामी वास्तुकला की विशिष्टताओं की तुलना कीजिए।

उत्तर:

आधारइटली की वास्तुकलाइस्लामी वास्तुकला
प्रेरणाप्राचीन यूनानी-रोमन वास्तुकला से प्रेरणाइस्लामी धार्मिक और स्थापत्य परंपराओं से प्रेरणा
भवनभव्य चर्च, मठ और सार्वजनिक भवनभव्य मस्जिदें और अन्य स्थापत्य भवन
सजावटचित्रों, मूर्तियों और विभिन्न आकृतियों का प्रयोगसजावटी आकृतियों, मेहराबों और स्तंभों पर विशेष ध्यान
उद्देश्यधार्मिक तथा नागरिक भवनों का विकासधार्मिक और शहरी स्थापत्य का विकास

प्रश्न 3. मानवतावादी विचारों का अनुभव सबसे पहले इतालवी शहरों में क्यों हुआ?

उत्तर: इटली के नगर व्यापार और शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके थे। तेरहवीं और चौदहवीं शताब्दी में शिक्षा का प्रसार हुआ और प्राचीन यूनानी तथा रोमन ग्रंथों का अनुवाद किया गया। इन ग्रंथों और उन पर लिखी टिप्पणियों ने लोगों को मानवतावादी विचारों से परिचित कराया।

इटली के विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में मानवतावादी विषय भी पढ़ाए जाने लगे। प्राकृतिक विज्ञान, शरीर रचना विज्ञान, खगोल विज्ञान, औषधि विज्ञान और गणित जैसे विषयों ने लोगों का ध्यान मानव और उसकी भौतिक आवश्यकताओं की ओर आकर्षित किया। 1

प्रश्न 4. वेनिस और समकालीन फ्रांस में ‘अच्छी सरकार’ के विचारों की तुलना कीजिए।

उत्तर:

आधारवेनिससमकालीन फ्रांस
शासनगणराज्य जैसी नगर-राज्य व्यवस्थाराजतंत्रीय व्यवस्था
व्यापारियों की भूमिकाधनी व्यापारी और महाजन शासन में सक्रिय थेऐसी भागीदारी अपेक्षाकृत कम थी
सामंत और धर्माधिकारीराजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत कम प्रभावशालीराजनीतिक व्यवस्था में अधिक प्रभावशाली
नागरिकतानागरिक भागीदारी की भावना विकसित हुईजनसाधारण की राजनीतिक भागीदारी सीमित थी

प्रश्न 5. मानवतावादी विचारों के क्या अभिलक्षण थे?

उत्तर: मानवतावादी विचारधारा में मानव जीवन और उसकी क्षमताओं को विशेष महत्व दिया गया। इसके प्रमुख अभिलक्षण निम्नलिखित थे:

  • मानव जीवन की समस्याओं में रुचि।
  • मानव की गरिमा और क्षमताओं पर जोर।
  • भौतिक जीवन और सुख-सुविधाओं को महत्व।
  • व्याकरण, इतिहास, राजनीति, अर्थशास्त्र, कविता और दर्शन जैसे विषयों का अध्ययन।
  • वाद-विवाद और स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहन।
  • कला में मानव शरीर और मानवीय भावनाओं का यथार्थ चित्रण।

प्रश्न 6. सत्रहवीं शताब्दी के यूरोपियों को विश्व किस प्रकार भिन्न लगा?

उत्तर: सत्रहवीं शताब्दी तक यूरोप में सामाजिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक दृष्टि से बड़े परिवर्तन हो चुके थे।

  • यूरोप में नगरों की संख्या बढ़ रही थी।
  • नगरीय संस्कृति का विकास हो रहा था।
  • फ्लोरेंस, वेनिस और रोम कला एवं विद्या के केंद्र बन चुके थे।
  • मुद्रण के कारण पुस्तकों की उपलब्धता बढ़ी।
  • लोग अपने समय की तुलना यूनान और रोम की प्राचीन दुनिया से करने लगे।
  • धार्मिक विचारों में परिवर्तन आया।
  • सूर्य-केंद्रित सौरमंडल के विचार ने पुरानी धारणाओं को चुनौती दी।
  • भौगोलिक खोजों ने यूरोपियों की विश्व संबंधी समझ को व्यापक बनाया।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. ‘मानववाद’ से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: मानववाद वह विचारधारा है जिसमें मानव जीवन, उसकी समस्याओं, क्षमताओं और कल्याण को विशेष महत्व दिया जाता है। पुनर्जागरण काल में मानवतावाद ने इहलोक के जीवन को समझने और बेहतर बनाने पर जोर दिया।

प्रश्न 2. पुनर्जागरण को आधुनिक युग का प्रारंभ क्यों समझा जाता है?

उत्तर: पुनर्जागरण के दौरान पुरानी रूढ़ियों को चुनौती मिली, वैज्ञानिक सोच विकसित हुई तथा कला और साहित्य में नए विचार आए। इससे आधुनिक विचारधारा के विकास को गति मिली।

प्रश्न 3. आधुनिक युग के आरंभ में किन बातों ने सहायता की?

उत्तर: व्यापार का विकास, नगरों का उदय, मध्यम वर्ग का विकास, पुनर्जागरण और भौगोलिक खोजों ने आधुनिक युग के विकास में सहायता की।

प्रश्न 4. पुनर्जागरण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: पुनर्जागरण का अर्थ पुनर्जन्म या नई जागृति है। यूरोप में प्राचीन यूनानी और रोमन ज्ञान, कला तथा संस्कृति के प्रति नई रुचि के विकास को पुनर्जागरण कहा जाता है।

प्रश्न 5. यूरोप में पुनर्जागरण के दो प्रभाव लिखिए।

उत्तर:

  • मानवतावादी विचारों का प्रसार हुआ।
  • अंधविश्वासों को चुनौती मिली और तर्कपूर्ण चिंतन को बढ़ावा मिला।

प्रश्न 6. छापेखाने का आविष्कार किससे संबंधित है?

उत्तर: स्रोत में छापेखाने का आविष्कार गुटेनबर्ग और कैस्टर से जोड़ा गया है। मुद्रण तकनीक ने पुस्तकों और ज्ञान के प्रसार को गति दी।

प्रश्न 7. धर्म-सुधार आंदोलन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: रोमन कैथोलिक चर्च की प्रचलित प्रथाओं और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग से जुड़े आंदोलन को धर्म-सुधार आंदोलन कहा जाता है। मार्टिन लूथर इसके प्रमुख नेताओं में थे।

प्रश्न 8. प्रोटेस्टेंट आंदोलन के दो परिणाम लिखिए।

उत्तर:

  • ईसाई धर्म में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धाराओं का विभाजन हुआ।
  • धर्म के विषय में चर्च के एकाधिकार को चुनौती मिली।

प्रश्न 9. चौदहवीं शताब्दी के यूरोपीय इतिहास के प्रमुख स्रोत क्या हैं?

उत्तर: अभिलेख, दस्तावेज, मुद्रित पुस्तकें, मूर्तियाँ, वस्त्र तथा भवन आदि इस काल के इतिहास के प्रमुख स्रोत हैं।

प्रश्न 10. मानवतावादी संस्कृति व्यक्ति के बारे में क्या मानती थी?

उत्तर: मानवतावादी संस्कृति के अनुसार व्यक्ति अपने बारे में स्वयं निर्णय लेने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने में सक्षम था।

प्रश्न 11. पश्चिमी रोमन साम्राज्य के पतन के बाद इटली की स्थिति कैसी थी?

उत्तर: इटली में कोई एकीकृत सरकार नहीं थी। राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र कमजोर हो गए थे तथा देश कई भागों में विभाजित था।

प्रश्न 12. वेनिस और जिनेवा जैसे नगरों की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  • धर्माधिकारी और सामंत राजनीतिक रूप से अपेक्षाकृत कम शक्तिशाली थे।
  • धनी व्यापारी और महाजन नगर प्रशासन में सक्रिय भाग लेते थे।

प्रश्न 13. पादुआ और बोलोनिया विश्वविद्यालय विधिशास्त्र के केंद्र क्यों बने?

उत्तर: इन नगरों में व्यापार और वाणिज्य काफी विकसित था। व्यापारिक गतिविधियों के लिए वकीलों और नोटरी की आवश्यकता होती थी। इसलिए वहाँ विधिशास्त्र के अध्ययन को विशेष महत्व मिला।

प्रश्न 14. यूनानी और रोमन संस्कृति के किन तत्वों को पुनर्जीवित किया गया?

उत्तर: धार्मिक, साहित्यिक और कलात्मक तत्वों को पुनर्जीवित किया गया।

प्रश्न 15. 15वीं शताब्दी में किन अध्यापकों को मानवतावादी कहा जाता था?

उत्तर: व्याकरण, अलंकारशास्त्र, कविता, इतिहास और नीतिदर्शन जैसे विषय पढ़ाने वाले अध्यापकों को मानवतावादी कहा जाता था।

प्रश्न 16. प्राचीन यूनानी और रोमन लेखकों की रचनाओं के अध्ययन पर जोर क्यों दिया गया?

उत्तर: प्राचीन यूनानी और रोमन सभ्यताओं को ज्ञान और संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा माना गया। इसलिए उनके मूल ग्रंथों को पढ़कर उस सभ्यता और उसके विचारों को समझने पर जोर दिया गया।

प्रश्न 17. मानवतावादियों ने 15वीं शताब्दी के आरंभ को नया युग क्यों कहा?

उत्तर: मानवतावादियों का मानना था कि मध्यकाल के बाद प्राचीन ज्ञान और संस्कृति में फिर से रुचि उत्पन्न हुई। इसलिए उन्होंने इसे नए या आधुनिक युग की शुरुआत के रूप में देखा।

प्रश्न 18. टॉलेमी की ‘अलमजेस्ट’ क्या थी?

उत्तर: ‘अलमजेस्ट’ टॉलेमी की खगोल विज्ञान से संबंधित रचना थी। इसका बाद में अरबी भाषा में भी अनुवाद हुआ।

प्रश्न 19. इब्न रूश्द कौन थे?

उत्तर: इब्न रूश्द स्पेन के एक प्रमुख अरब दार्शनिक थे। उन्होंने दार्शनिक ज्ञान और धार्मिक विश्वासों के बीच संबंधों को समझाने का प्रयास किया।

प्रश्न 20. मानवतावादी विचारों के प्रसार में किन बातों ने भूमिका निभाई?

उत्तर: विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में मानवतावादी विषयों का अध्ययन, कला, वास्तुकला, साहित्य तथा मुद्रण ने मानवतावादी विचारों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 21. एंड्रियास वेसेलियस कौन थे?

उत्तर: एंड्रियास वेसेलियस पादुआ विश्वविद्यालय में आयुर्विज्ञान के अध्यापक थे। उन्होंने मानव शरीर की संरचना के अध्ययन के लिए चीर-फाड़ की वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया।

प्रश्न 22. यथार्थवाद क्या था?

उत्तर: कला में मानव शरीर और वास्तविक जीवन को अधिक स्वाभाविक तथा सटीक रूप में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति को यथार्थवाद कहा गया।

प्रश्न 23. माइकेल एंजेलो कौन थे?

उत्तर: माइकेल एंजेलो एक प्रसिद्ध चित्रकार, मूर्तिकार और वास्तुकार थे। उन्होंने सिस्टीन चैपल की छत पर चित्र बनाए, ‘पिएता’ जैसी मूर्ति बनाई तथा सेंट पीटर गिरजाघर के गुंबद की रूपरेखा तैयार की।

प्रश्न 24. समुद्री खोजों के पीछे प्रमुख प्रेरक तत्व क्या थे?

उत्तर: व्यापार बढ़ाने, धन कमाने, मसालों और सोने की खोज करने, नए क्षेत्रों तक पहुँचने तथा दास व्यापार से लाभ कमाने की इच्छा समुद्री खोजों के प्रमुख प्रेरक तत्वों में थी।

प्रश्न 25. नए देशों की खोजों के क्या परिणाम हुए?

उत्तर: नए व्यापारिक मार्ग मिले, यूरोपियों का अमेरिका, अफ्रीका और एशिया से संपर्क बढ़ा तथा उपनिवेशवाद और दास व्यापार का विस्तार हुआ।

प्रश्न 26. धर्म-युद्धों के दो प्रभाव लिखिए।

उत्तर:

  • यूरोपियों का इस्लामी दुनिया से संपर्क बढ़ा।
  • कला, विज्ञान और ज्ञान के विभिन्न रूपों से यूरोपियों का परिचय हुआ।

प्रश्न 27. ‘कॉस्टैनटाइन के अनुदान’ के प्रति मानवतावादियों की क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर: मानवतावादियों ने इस दस्तावेज की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया और इसे जाली दस्तावेज बताया। इससे चर्च की न्यायिक तथा वित्तीय शक्तियों के औचित्य पर प्रश्न उठे।

प्रश्न 28. इंडल्जेन्स या क्षमा-पत्र क्या था?

उत्तर: चर्च द्वारा जारी ऐसे दस्तावेज को क्षमा-पत्र कहा जाता था जिसे पापों से मुक्ति से संबंधित माना जाता था। इसकी बिक्री धर्म-सुधार आंदोलन के विरोध के प्रमुख मुद्दों में शामिल हुई।

प्रश्न 29. मानवतावादी युग में व्यापारी परिवारों की महिलाओं की स्थिति कैसी थी?

उत्तर: व्यापारी परिवारों की महिलाएँ कई बार व्यापार में अपने पति की सहायता करती थीं। पति के दूर रहने पर वे दुकान या व्यापार का संचालन संभाल सकती थीं।

प्रश्न 30. इसाबेला दि इस्ते कौन थीं?

उत्तर: इसाबेला दि इस्ते मंदुआ की एक प्रभावशाली महिला थीं। पति की अनुपस्थिति में उन्होंने राज्य के प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 31. दो मानवतावादी लेखकों के नाम और उनके विचार लिखिए।

उत्तर:

  • फ्रांसेस्को बरबारो: उन्होंने संपत्ति प्राप्त करने को एक महत्वपूर्ण गुण के रूप में देखा।
  • लोरेंजो वल्ला: उन्होंने अपनी रचनाओं में भोग-विलास और धार्मिक प्रतिबंधों से संबंधित विचारों पर चर्चा की।

प्रश्न 32. मानवतावादी संस्कृति का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:

  • मानव जीवन पर धार्मिक नियंत्रण कमजोर हुआ।
  • लोग भौतिक संपत्ति, शक्ति और व्यक्तिगत उपलब्धियों की ओर अधिक आकर्षित हुए।

प्रश्न 33. 15वीं शताब्दी में विचारों का प्रसार तेजी से क्यों हुआ?

उत्तर: मुद्रण तकनीक के विकास से बड़ी संख्या में पुस्तकें छपने लगीं। अब विद्यार्थी केवल अध्यापकों के व्याख्यानों पर निर्भर नहीं थे, बल्कि बाजार से पुस्तकें खरीदकर पढ़ सकते थे। इससे विचारों का व्यापक प्रसार हुआ।

प्रश्न 34. वाणिज्य और व्यापार की वृद्धि के क्या परिणाम हुए?

उत्तर: व्यापार के विकास से यूरोप के अनेक लोग समृद्ध हुए। नए क्षेत्रों में व्यापार बढ़ा और यूरोपीय देशों ने उपनिवेश स्थापित किए।

प्रश्न 35. वेनिस और समकालीन फ्रांस में ‘अच्छी सरकार’ की तुलना कीजिए।

उत्तर: वेनिस में धनी व्यापारी और महाजन शासन में सक्रिय भाग लेते थे तथा नगर में नागरिकता की भावना विकसित हुई थी। फ्रांस में राजतंत्रीय सत्ता अधिक केंद्रीकृत थी और सामान्य लोगों की राजनीतिक भागीदारी सीमित थी।

प्रश्न 36. मानवतावादी विचारों के मुख्य अभिलक्षण बताइए।

उत्तर:

  • मानव जीवन पर अधिक ध्यान।
  • भौतिक सुख-सुविधाओं को महत्व।
  • मानव की गरिमा और क्षमताओं पर जोर।
  • संपत्ति तथा व्यक्तिगत उपलब्धियों को महत्व।
  • स्वतंत्र चिंतन और विवेक का विकास।

प्रश्न 37. पुनर्जागरण काल की इटली और इस्लामी वास्तुकला की तुलना कीजिए।

उत्तर:

इटलीइस्लामी वास्तुकला
प्राचीन यूनानी-रोमन शैली से प्रेरणाइस्लामी स्थापत्य परंपरा से प्रेरणा
चर्च और मठों का निर्माणमस्जिदों का निर्माण
स्तंभ, मेहराब और सजावटी तत्वमेहराब, स्तंभ और सजावटी तत्व

प्रश्न 38. यूरोपीय मुद्रण प्रौद्योगिकी के विकास में चीनियों और मंगोलों की भूमिका क्यों मानी गई?

उत्तर: यूरोपीय व्यापारी और राजनयिक एशिया की यात्राओं के दौरान चीनी और मंगोल क्षेत्रों में प्रचलित मुद्रण तकनीक से परिचित हुए। बाद में यूरोप में मुद्रण तकनीक के विकास को गति मिली।

प्रश्न 39. प्लेटो और अरस्तु ने वाद-विवाद को क्यों महत्वपूर्ण माना?

उत्तर: उनके अनुसार वाद-विवाद और विचार-विमर्श से मनुष्य की बौद्धिक क्षमता विकसित होती है। जिस प्रकार व्यायाम शरीर को मजबूत करता है, उसी प्रकार विचार-विमर्श मस्तिष्क को सक्रिय बनाता है।

प्रश्न 40. फ्लोरेंस की प्रसिद्धि में किन दो व्यक्तियों का योगदान था?

उत्तर: दाँते अलिगहियरी और कलाकार जोटो ने फ्लोरेंस की सांस्कृतिक पहचान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 41. ‘रेनेसा व्यक्ति’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ऐसा व्यक्ति जिसकी अनेक रुचियाँ हों और जो अनेक क्षेत्रों या कलाओं में दक्ष हो, उसे रेनेसा व्यक्ति कहा जाता है।

प्रश्न 42. पुनर्जागरण की तीन मुख्य विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:

  1. इटली के नगर पुनर्जागरण के प्रारंभिक केंद्र बने।
  2. नई कला शैली का विकास हुआ।
  3. वास्तुकला और साहित्य में प्रगति हुई।

प्रश्न 43. पुनर्जागरण सबसे पहले इटली में क्यों शुरू हुआ?

उत्तर: इटली के अनेक नगर व्यापार और वाणिज्य के केंद्र थे। यहाँ समृद्ध व्यापारी वर्ग विकसित हुआ और कई नगर सामंती नियंत्रण से अपेक्षाकृत स्वतंत्र थे। इसी स्वतंत्र शहरी वातावरण ने नए विचारों, कला और साहित्य के विकास को प्रोत्साहित किया।

लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. पुनर्जागरण से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: पुनर्जागरण का अर्थ पुनर्जन्म या नई जागृति है। यूरोप में प्राचीन यूनानी-रोमन संस्कृति, ज्ञान और कला में नई रुचि के विकास तथा स्वतंत्र चिंतन के प्रसार को पुनर्जागरण कहा जाता है। स्रोत इसे लगभग 1350 से 1550 ई. के बीच की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 2. पुनर्जागरण से नए युग का आरंभ क्यों हुआ?

उत्तर: पुनर्जागरण के कारण रूढ़िवादी विचारों को चुनौती मिली, वैज्ञानिक चिंतन विकसित हुआ, कला-साहित्य में नए विषय आए और सामंती व्यवस्था कमजोर हुई। लोगों ने धार्मिक तथा सामाजिक विषयों को तर्क की कसौटी पर देखना शुरू किया।

प्रश्न 3. यूरोप में पुनर्जागरण के उदय के कारण क्या थे?

उत्तर: धर्म-युद्धों से पूर्व और पश्चिम के संपर्क बढ़े, धर्म-सुधार विचारों ने चर्च के अधिकार को चुनौती दी और भौगोलिक खोजों तथा वैज्ञानिक विचारों ने लोगों की विश्व-दृष्टि को बदला। व्यापार और नगरों का विकास भी महत्वपूर्ण था।

प्रश्न 4. विज्ञान और दर्शन में अरबों के योगदान का वर्णन कीजिए।

उत्तर: अरब विद्वानों ने यूनानी और रोमन ग्रंथों को संरक्षित किया तथा उनका अरबी में अनुवाद किया। गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, प्राकृतिक विज्ञान और दर्शन के ग्रंथों का संरक्षण एवं अनुवाद हुआ। इब्न-सिना, अल-राजी और इब्न-रूश्द जैसे विद्वानों का उल्लेख स्रोत में मिलता है।

प्रश्न 5. पुनर्जागरण काल में व्यापार और नगरों के उदय का क्या महत्व था?

उत्तर: व्यापार के विकास से धनी मध्यम वर्ग उभरा। व्यापारी वर्ग ने राजाओं को आर्थिक सहायता दी जिससे राजसत्ता मजबूत हुई। नगरों में अपेक्षाकृत स्वतंत्र वातावरण मिला और लोगों को नए विचार विकसित करने का अवसर मिला।

प्रश्न 6. धर्म-सुधार आंदोलन के उदय के कारण बताइए।

उत्तर:

  • चर्च में धन और संपत्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण।
  • पादरी पदों की बिक्री।
  • क्षमा-पत्रों की बिक्री।
  • चर्च द्वारा कर और शुल्क वसूली।
  • राजाओं द्वारा पोप के राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध।
  • पुनर्जागरण से तर्क और विवेक की भावना का विकास।

प्रश्न 7. लियोनार्दो दा विंची की प्रतिभा पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: लियोनार्दो दा विंची पुनर्जागरण काल के बहुमुखी प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। वे चित्रकार, मूर्तिकार, इंजीनियर और वैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध थे। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में मोनालिसा, द लास्ट सपर और द वर्जिन ऑफ द रॉक्स शामिल हैं।

प्रश्न 8. मानवतावाद से क्या समझते हैं? कला और साहित्य में इसके उदाहरण दीजिए।

उत्तर: मानवतावाद में मानव जीवन, उसकी भावनाओं, समस्याओं और क्षमताओं को केंद्र में रखा गया। कला में मानव शरीर और भावनाओं का यथार्थ चित्रण हुआ। साहित्य में मानव जीवन और उसकी समस्याओं को महत्व दिया गया। मोनालिसा और दाँते, पेट्रार्क तथा बोक्काचियो की रचनाएँ इस सांस्कृतिक परिवर्तन के उदाहरण हैं।

प्रश्न 9. मानवतावादियों ने मध्ययुग और आधुनिक युग में किस प्रकार अंतर किया?

उत्तर: मानवतावादियों के अनुसार मध्ययुग में चर्च का बौद्धिक जीवन पर बहुत प्रभाव था। उनके विचार में पंद्रहवीं शताब्दी से प्राचीन ज्ञान और स्वतंत्र चिंतन का पुनरुत्थान हुआ, इसलिए उन्होंने इसे आधुनिक युग की शुरुआत माना।

प्रश्न 10. मानवतावादी विचारों का प्रसार कैसे हुआ?

उत्तर: विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में मानवतावादी विषय पढ़ाए गए। कला, वास्तुकला और साहित्य ने भी इन विचारों को व्यापक समाज तक पहुँचाया। मुद्रण तकनीक ने पुस्तकों को अधिक लोगों तक पहुँचाने में विशेष भूमिका निभाई।

प्रश्न 11. यूरोपीय साहित्य पर पुनर्जागरण के प्रभाव लिखिए।

उत्तर: साहित्य में स्थानीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ा। धार्मिक विषयों के साथ मानव जीवन और उसकी समस्याओं को महत्व मिला। दाँते, पेट्रार्क और बोक्काचियो जैसे लेखकों ने इतालवी साहित्य को नई दिशा दी। बाइबिल सहित अनेक ग्रंथों के स्थानीय भाषाओं में अनुवाद हुए।

प्रश्न 12. पुनर्जागरण काल में विज्ञान के क्षेत्र में क्या प्रगति हुई?

उत्तर: कोपरनिकस ने सूर्य-केंद्रित विचार प्रस्तुत किया। केपलर ने ग्रहों की गति को दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं से जोड़ा। गैलीलियो ने दूरबीन और प्रयोगों के माध्यम से वैज्ञानिक अध्ययन को आगे बढ़ाया। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत प्रस्तुत किया। चिकित्सा में वेसेलियस और हार्वे के कार्य भी महत्वपूर्ण रहे।

प्रश्न 13. पुनर्जागरण का सामान्य जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: नागरिक जीवन का महत्व बढ़ा। व्यापारी, बैंकर, उद्योगपति, बुद्धिजीवी और वैज्ञानिक सामाजिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण हुए। व्यापार और उद्योग का विकास हुआ तथा लोग गाँवों से नगरों की ओर जाने लगे। धार्मिक विचारों में भी परिवर्तन आया।

प्रश्न 14. मार्टिन लूथर के जीवन और सफलताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: मार्टिन लूथर जर्मनी के प्रमुख धर्म-सुधारक थे। उन्होंने क्षमा-पत्रों की बिक्री का विरोध किया और 1517 में अपने प्रसिद्ध 95 थीसिस प्रस्तुत किए। उनके विचारों का जर्मन भाषा में प्रसार हुआ। बाद में उन्होंने बाइबिल का जर्मन अनुवाद किया। उनके विचारों से प्रोटेस्टेंट आंदोलन को व्यापक समर्थन मिला।

प्रश्न 15. धर्म-सुधार आंदोलन के कारणों की चर्चा कीजिए।

उत्तर: धर्म-सुधार आंदोलन के पीछे चर्च की आर्थिक शक्ति, पादरियों के आचरण से असंतोष, क्षमा-पत्रों की बिक्री, चर्च द्वारा कर-वसूली, राजाओं की राजनीतिक स्वतंत्रता की इच्छा और पुनर्जागरण से विकसित तर्कपूर्ण विचार प्रमुख कारण थे।

प्रश्न 16. धर्म-सुधार आंदोलन के परिणाम बताइए।

उत्तर:

  • कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धाराओं का विकास हुआ।
  • चर्च के राजनीतिक प्रभाव को चुनौती मिली।
  • लोक भाषाओं में धार्मिक साहित्य बढ़ा।
  • कैथोलिक चर्च ने भी अपने भीतर सुधार किए।
  • व्यापार और मध्यम वर्ग को प्रोत्साहन मिला।

प्रश्न 17. प्रति-सुधार आंदोलन क्या था?

उत्तर: प्रोटेस्टेंट आंदोलन के प्रभाव का सामना करने और कैथोलिक चर्च में सुधार करने के लिए कैथोलिक चर्च ने जो प्रयास किए उन्हें प्रति-सुधार या काउंटर-रिफॉर्मेशन कहा गया। ट्रेंट की परिषद्, जेसुइट संस्था और इंक्विजिशन इसके प्रमुख उपायों में शामिल थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर

प्रश्न 1. मानवतावाद के उदय तथा विकास में विश्वविद्यालयों के योगदान की चर्चा कीजिए।

उत्तर: यूरोप में विश्वविद्यालयों ने मानवतावादी विचारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पादुआ और बोलोनिया जैसे विश्वविद्यालय विधिशास्त्र के प्रमुख केंद्र बने। व्यापार और वाणिज्य के कारण वकीलों तथा नोटरी की आवश्यकता बढ़ी और रोमन कानून के अध्ययन को महत्व मिला।

पेट्रार्क जैसे विद्वानों ने प्राचीन यूनानी और रोमन लेखकों की रचनाओं के अध्ययन पर जोर दिया। बाद में मानवतावादी विषयों में व्याकरण, अलंकारशास्त्र, कविता, इतिहास और नीतिदर्शन को भी शामिल किया गया।

फ्लोरेंस जैसे नगरों में शिक्षा और कला का विकास हुआ। इससे विश्वविद्यालय, साहित्य, कला और मानवतावादी विचार एक-दूसरे से जुड़े और नई सांस्कृतिक चेतना का प्रसार हुआ।

प्रश्न 2. पुनर्जागरण से क्या तात्पर्य है? इसकी मुख्य विशेषताओं की चर्चा कीजिए।

उत्तर: पुनर्जागरण का अर्थ पुनर्जन्म या नई जागृति है। यूरोप में प्राचीन यूनानी-रोमन ज्ञान और संस्कृति के प्रति नई रुचि तथा स्वतंत्र चिंतन के विकास को पुनर्जागरण कहा जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • तर्क की प्रधानता: विचारों को तर्क की कसौटी पर परखा जाने लगा।
  • प्रयोग का महत्व: अनुभव और प्रयोग से ज्ञान प्राप्त करने की प्रवृत्ति बढ़ी।
  • मानवतावाद: मानव जीवन और उसकी समस्याओं को महत्व मिला।
  • सौंदर्य की उपासना: कला में मानव शरीर और प्राकृतिक सौंदर्य का यथार्थ चित्रण बढ़ा।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: खगोल, चिकित्सा, भौतिकी और गणित में नए अध्ययन हुए।

प्रश्न 3. पुनर्जागरण का जन्म सर्वप्रथम इटली में ही क्यों हुआ?

उत्तर: पुनर्जागरण का प्रारंभिक विकास इटली में हुआ। इसके पीछे कई परिस्थितियाँ थीं:

  • इटली के नगर व्यापार और वाणिज्य के महत्वपूर्ण केंद्र थे।
  • व्यापार से धनी मध्यम वर्ग का विकास हुआ।
  • कई नगर सामंती नियंत्रण से अपेक्षाकृत स्वतंत्र थे।
  • प्राचीन रोमन सभ्यता के अनेक अवशेष इटली में मौजूद थे।
  • फ्लोरेंस, वेनिस और रोम जैसे नगर कला तथा शिक्षा के केंद्र बने।
  • धनी परिवारों और व्यापारियों ने कलाकारों तथा विद्वानों को संरक्षण दिया।

प्रश्न 4. पुनर्जागरण काल में कला और वास्तुकला के विकास का वर्णन कीजिए।

उत्तर: पुनर्जागरण काल में कला और वास्तुकला में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। कलाकारों ने मानव शरीर, भावनाओं और प्राकृतिक रूपों का अधिक यथार्थ चित्रण करना शुरू किया।

माइकेल एंजेलो, लियोनार्दो दा विंची और अन्य कलाकारों ने चित्रकला तथा मूर्तिकला को नई ऊँचाई दी। मानव शरीर की संरचना समझने के लिए शरीर रचना विज्ञान का अध्ययन भी किया गया।

वास्तुकला में प्राचीन यूनानी और रोमन शैली से प्रेरणा ली गई। भवनों में स्तंभ, मेहराब, गुंबद और संतुलित अनुपात का प्रयोग हुआ।

प्रश्न 5. 16वीं और 17वीं शताब्दी के धर्म-सुधार आंदोलन के कारणों की चर्चा कीजिए।

उत्तर: धर्म-सुधार आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य रोमन कैथोलिक चर्च की प्रचलित व्यवस्थाओं और कुछ प्रथाओं की आलोचना तथा सुधार था।

मुख्य कारण

  1. चर्च के पास बहुत अधिक धन और संपत्ति का केंद्रीकरण।
  2. पादरियों के पदों की बिक्री।
  3. क्षमा-पत्रों की बिक्री।
  4. चर्च द्वारा विभिन्न कर और शुल्क वसूलना।
  5. पोप के राजनीतिक हस्तक्षेप का राजाओं द्वारा विरोध।
  6. पुनर्जागरण और मानवतावाद से तर्क तथा विवेक की भावना का विकास।

मार्टिन लूथर ने इन परिस्थितियों के विरुद्ध आवाज उठाई। बाद में ज्विंगली और काल्विन जैसे सुधारकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में धर्म-सुधार विचारों को आगे बढ़ाया।

प्रश्न 6. धर्म-सुधार आंदोलन के परिणामों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: धर्म-सुधार आंदोलन से यूरोप के धार्मिक और राजनीतिक जीवन में कई परिवर्तन हुए।

  • कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धाराओं का विकास हुआ।
  • चर्च के राजनीतिक प्रभाव को चुनौती मिली।
  • लोक भाषाओं में धार्मिक साहित्य का विकास हुआ।
  • बाइबिल के स्थानीय भाषाओं में अनुवाद हुए।
  • कैथोलिक चर्च ने ट्रेंट की परिषद् के माध्यम से सुधार किए।
  • जेसुइट संस्था का विकास हुआ।
  • व्यापार और मध्यम वर्ग को नई परिस्थितियों में विस्तार मिला।

प्रश्न 7. मानवतावादी विचारों और धर्म-सुधार आंदोलन के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: मानवतावाद ने लोगों को प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करने, तर्क करने और स्थापित मान्यताओं की समीक्षा करने के लिए प्रेरित किया। मानवतावादी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं और प्रथाओं का भी अध्ययन किया।

जब कुछ विद्वानों ने चर्च की प्रचलित प्रथाओं और आर्थिक गतिविधियों की आलोचना की तो धार्मिक सुधार की आवश्यकता का विचार मजबूत हुआ। स्थानीय भाषाओं में बाइबिल के अनुवाद और मुद्रण ने इन विचारों को अधिक लोगों तक पहुँचाया। इस प्रकार मानवतावादी चिंतन ने धर्म-सुधार आंदोलन के लिए बौद्धिक वातावरण तैयार किया।

महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

वैज्ञानिकप्रमुख योगदान
कोपरनिकससूर्य-केंद्रित सौरमंडल के सिद्धांत को प्रस्तुत किया।
केपलरग्रहों की गति और दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं के बारे में बताया।
गैलीलियोदूरबीन के प्रयोग और वैज्ञानिक प्रेक्षणों को आगे बढ़ाया।
न्यूटनगुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
वेसेलियसमानव शरीर की संरचना के अध्ययन को आगे बढ़ाया।
विलियम हार्वेरक्त प्रवाह के अध्ययन को आगे बढ़ाया।

मार्टिन लूथर के प्रमुख विचार

  • ईसा और बाइबिल की सत्ता को स्वीकार करना।
  • चर्च की निरंकुश सत्ता को स्वीकार न करना।
  • मुक्ति के लिए ईश्वर में अटूट आस्था पर जोर।
  • धार्मिक ग्रंथों को सामान्य लोगों तक पहुँचाना।
  • चर्च के भ्रष्टाचार का विरोध।
  • पादरियों को विवाह करने की अनुमति देने का समर्थन।

काल्विनवाद

जॉन काल्विन धर्म-सुधार आंदोलन के प्रमुख सुधारकों में थे। उन्होंने स्विट्जरलैंड में अपने विचारों को विकसित किया। उनकी प्रमुख रचना Institute of Christian Religion थी। उन्होंने बाइबिल को धार्मिक ज्ञान का प्रमुख आधार माना और धार्मिक जीवन में अनुशासन तथा नैतिक आचरण पर जोर दिया।

काल्विन के विचारों से काल्विनवाद विकसित हुआ और यह यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों में फैला।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

प्रश्न 1. कोलंबस अमेरिका पहुँचा था—

(क) 1492
(ख) 1497
(ग) 1495
(घ) 1473

सही उत्तर: (क) 1492

व्याख्या: स्रोत में 1492 को सही विकल्प दिया गया है।

प्रश्न 2. 1861–65 ई. तक दास प्रथा को लेकर गृहयुद्ध किस देश में हुआ?

(क) कनाडा
(ख) ऑस्ट्रेलिया
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) इंग्लैंड

सही उत्तर: (ग) संयुक्त राज्य अमेरिका

प्रश्न 3. ‘On the Origin of Species’ पुस्तक किसने लिखी?

(क) चार्ल्स डार्विन
(ख) ग्रेगरी मेंडल
(ग) हरगोविंद खुराना
(घ) न्यूटन

सही उत्तर: (क) चार्ल्स डार्विन

प्रश्न 4. निम्न में से कौन-सी सामंतों की एक श्रेणी नहीं थी?

(क) बैरन
(ख) नाइट
(ग) ड्यूक
(घ) सर्प

सही उत्तर: (क) बैरन

प्रश्न 5. चर्च को प्रतिवर्ष कृषकों से उनकी उपज का कौन-सा भाग लेने का अधिकार था?

(क) एक-तिहाई
(ख) दसवाँ भाग
(ग) एक-चौथाई
(घ) एक-छठा

सही उत्तर: (ख) दसवाँ भाग

प्रश्न 6. अभिजात्य सत्ताधारी वर्ग में प्रवेश के लिए प्रतियोगिता परीक्षा कहाँ आयोजित होती थी?

(क) जापान
(ख) वर्मा
(ग) भारत
(घ) चीन

सही उत्तर: (घ) चीन

प्रश्न 7. सोने और चाँदी के देश के विषय में किसने सुना था?

(क) कैनालल
(ख) वास्को द गामा
(ग) पिजारो
(घ) कोलंबस

सही उत्तर: (ग) पिजारो

प्रश्न 8. हेलनीज किस देश के निवासियों को कहा जाता था?

(क) रोम
(ख) यूनान
(ग) मिस्र
(घ) चीन

सही उत्तर: (ख) यूनान

प्रश्न 9. ओलंपिक खेल किस प्राचीन सभ्यता की देन हैं?

(क) रोम
(ख) मिस्र
(ग) यूनान
(घ) चीन

सही उत्तर: (ग) यूनान

प्रश्न 10. यूरोप में सर्वप्रथम विश्वविद्यालय कहाँ स्थापित हुए?

(क) इटली
(ख) जापान
(ग) रूस
(घ) मिस्र

सही उत्तर: (क) इटली

प्रश्न 11. एक चर्चित कलाकार कौन था?

(क) कोपरनिकस
(ख) लियोनार्दो दा विंची
(ग) लूथर
(घ) मार्टिन

सही उत्तर: (ख) लियोनार्दो दा विंची

प्रश्न 12. ‘लास्ट सपर’ चित्र का निर्माण वर्ष source में क्या दिया गया है?

(क) 1495
(ख) 1946
(ग) 1947
(घ) 1467

सही उत्तर: (क) 1495

प्रश्न 13. ग्रेगोरियन कैलेंडर का आरंभ कब हुआ?

(क) 1582
(ख) 1587
(ग) 1560
(घ) 1547

सही उत्तर: (क) 1582

प्रश्न 14. ‘नाइंटी-फाइव थीसिस’ की रचना कब हुई?

(क) 1517
(ख) 1518
(ग) 1516
(घ) 1520

सही उत्तर: (क) 1517

त्वरित पुनरावृत्ति

  • पुनर्जागरण: यूरोप में प्राचीन ज्ञान और संस्कृति की नई जागृति।
  • मानवतावाद: मानव जीवन और उसकी क्षमताओं को केंद्र में रखने वाली विचारधारा।
  • पुनर्जागरण का प्रमुख प्रारंभिक केंद्र: इटली।
  • प्रमुख नगर: फ्लोरेंस, वेनिस और रोम।
  • मानवतावाद के प्रमुख लेखक: पेट्रार्क, दाँते और बोक्काचियो।
  • प्रमुख कलाकार: लियोनार्दो दा विंची और माइकेल एंजेलो।
  • वैज्ञानिक क्रांति: प्रेक्षण, प्रयोग और तर्क पर आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास।
  • सूर्य-केंद्रित सिद्धांत: कोपरनिकस से संबंधित।
  • धर्म-सुधार आंदोलन: चर्च की प्रचलित व्यवस्था में सुधार की मांग से जुड़ा आंदोलन।
  • मार्टिन लूथर: जर्मनी के प्रमुख धर्म-सुधारक।
  • 95 थीसिस: 1517 में लूथर से संबंधित।
  • काल्विनवाद: जॉन काल्विन से संबंधित प्रोटेस्टेंट विचारधारा।

अध्याय का सारांश

बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ यूरोप के मध्यकाल से आधुनिक युग की ओर संक्रमण को समझने वाला महत्वपूर्ण अध्याय है। इटली के नगरों में व्यापार, शिक्षा और प्राचीन यूनानी-रोमन संस्कृति के अध्ययन से पुनर्जागरण को गति मिली। मानवतावादी विचारों ने मानव जीवन, तर्क, स्वतंत्र चिंतन और ज्ञान को अधिक महत्व दिया।

मुद्रण तकनीक ने विचारों और पुस्तकों को व्यापक समाज तक पहुँचाया। पुनर्जागरण काल में चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, साहित्य और विज्ञान में नए प्रयोग हुए। कोपरनिकस, केपलर, गैलीलियो, न्यूटन और वेसेलियस जैसे वैज्ञानिकों के कार्यों ने ज्ञान की नई दिशा को मजबूत किया।

धर्म-सुधार आंदोलन ने रोमन कैथोलिक चर्च की कुछ प्रथाओं और सत्ता को चुनौती दी। मार्टिन लूथर, ज्विंगली और काल्विन जैसे सुधारकों के विचारों से यूरोप के धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। इस प्रकार पुनर्जागरण और धर्म-सुधार आंदोलन ने यूरोप की सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक संरचना में व्यापक परिवर्तन को जन्म दिया।


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