Bihar Board Class 11 Physics Chapter 2 – मात्रक एवं मापन भौतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधारभूत अध्याय है। इस अध्याय में भौतिक राशियों का मापन, मात्रक, SI पद्धति, विमाएँ, विमीय विश्लेषण, सार्थक अंक, मापन की त्रुटियाँ, परिशुद्धता तथा विभिन्न वैज्ञानिक मापन विधियों का अध्ययन किया जाता है।
भौतिकी के लगभग सभी अध्यायों में संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने के लिए मात्रकों और मापन की सही समझ आवश्यक होती है। इसलिए विमीय सूत्र, मात्रक परिवर्तन, significant figures, percentage error और dimensional analysis इस अध्याय के सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं।
यदि आपने Chapter 1 नहीं पढ़ा है, तो पहले यहाँ पढ़ें:
मात्रक एवं मापन का परिचय
किसी भौतिक राशि का संख्यात्मक मान ज्ञात करने के लिए उसकी तुलना किसी निश्चित मानक से की जाती है। इस निश्चित मानक को उस राशि का मात्रक (Unit) कहते हैं।
उदाहरण के लिए यदि किसी मेज की लंबाई 2 मीटर है, तो यहाँ मीटर लंबाई का मात्रक और 2 उसका संख्यात्मक मान है।
भौतिक राशि क्या है?
जिस राशि को मापा जा सकता है और जिसे संख्यात्मक मान तथा मात्रक के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, उसे भौतिक राशि कहते हैं।
उदाहरण:
- लंबाई
- द्रव्यमान
- समय
- वेग
- बल
- ऊर्जा
- दाब
- तापमान
मूल राशियाँ और व्युत्पन्न राशियाँ
भौतिक राशियों को मुख्य रूप से दो वर्गों में बाँटा जाता है – मूल राशियाँ और व्युत्पन्न राशियाँ।
मूल राशियाँ
वे राशियाँ जिन्हें अन्य राशियों के आधार पर व्यक्त नहीं किया जाता, मूल राशियाँ कहलाती हैं। SI पद्धति में सात मूल राशियाँ हैं।
| मूल राशि | SI मात्रक | प्रतीक |
|---|---|---|
| लंबाई | मीटर | m |
| द्रव्यमान | किलोग्राम | kg |
| समय | सेकंड | s |
| विद्युत धारा | ऐम्पियर | A |
| तापमान | केल्विन | K |
| पदार्थ की मात्रा | मोल | mol |
| ज्योति तीव्रता | कैंडेला | cd |
व्युत्पन्न राशियाँ
वे राशियाँ जिन्हें मूल राशियों की सहायता से व्यक्त किया जाता है, व्युत्पन्न राशियाँ कहलाती हैं।
| राशि | SI मात्रक | मूल राशियों में संबंध |
|---|---|---|
| वेग | m s-1 | [LT-1] |
| त्वरण | m s-2 | [LT-2] |
| बल | न्यूटन | [MLT-2] |
| कार्य | जूल | [ML2T-2] |
| शक्ति | वाट | [ML2T-3] |
| दाब | पास्कल | [ML-1T-2] |
SI मात्रक पद्धति
SI (International System of Units) वर्तमान समय में वैज्ञानिक मापन की मानक अंतरराष्ट्रीय पद्धति है। इसमें सात मूल मात्रक निर्धारित किए गए हैं और अन्य व्युत्पन्न मात्रक इन्हीं से प्राप्त होते हैं।
मात्रक परिवर्तन
किसी राशि को एक मात्रक से दूसरे मात्रक में बदलते समय उस मात्रक के conversion factor का ध्यान रखना आवश्यक है।
महत्वपूर्ण परिवर्तन
- 1 km = 103 m
- 1 m = 102 cm
- 1 cm = 10-2 m
- 1 mm = 10-3 m
- 1 h = 3600 s
- 1 light year ≈ 9.46 × 1015 m
- 1 Å = 10-10 m
- 1 fermi = 10-15 m
उदाहरण – 18 km/h को m/s में बदलना
दिया है:
चाल = 18 km/h
हम जानते हैं:
1 km = 1000 m
1 h = 3600 s
अतः
18 km/h = 18 × 1000/3600 m/s
= 5 m/s
उत्तर: 5 m/s
विमाएँ (Dimensions)
किसी भौतिक राशि को मूल राशियों के घातों के रूप में व्यक्त करने पर प्राप्त संबंध उस राशि का विमीय सूत्र कहलाता है।
मूल राशियों को सामान्यतः M, L और T द्वारा दर्शाया जाता है:
- M = द्रव्यमान
- L = लंबाई
- T = समय
कुछ महत्वपूर्ण विमीय सूत्र
| भौतिक राशि | विमीय सूत्र |
|---|---|
| क्षेत्रफल | [L2] |
| आयतन | [L3] |
| वेग | [LT-1] |
| त्वरण | [LT-2] |
| संवेग | [MLT-1] |
| बल | [MLT-2] |
| कार्य/ऊर्जा | [ML2T-2] |
| शक्ति | [ML2T-3] |
| दाब | [ML-1T-2] |
| घनत्व | [ML-3] |
| गुरुत्वीय नियतांक G | [M-1L3T-2] |
विमीय विश्लेषण
भौतिक समीकरणों की जाँच तथा विभिन्न राशियों के बीच संबंध निर्धारित करने के लिए विमीय विश्लेषण का उपयोग किया जाता है।
विमीय विश्लेषण के प्रमुख उपयोग
- किसी समीकरण की विमीय शुद्धता की जाँच करना।
- विभिन्न मात्रकों के बीच परिवर्तन करना।
- भौतिक राशियों के बीच संभावित संबंध ज्ञात करना।
- किसी भौतिक राशि का विमीय सूत्र ज्ञात करना।
विमीय समांगता का सिद्धांत
किसी सही भौतिक समीकरण के दोनों पक्षों की विमाएँ समान होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त किसी समीकरण में जो राशियाँ जोड़ी या घटाई जा रही हैं, उनकी विमाएँ भी समान होनी चाहिए।
उदाहरण:
s = ut + 1/2 at2
यहाँ:
[s] = L
[ut] = [LT-1] [T] = L
[at2] = [LT-2] [T2] = L
अतः समीकरण विमीय रूप से सही है।
विमीय विश्लेषण से सूत्र की जाँच – उदाहरण
मान लें किसी कण के विस्थापन के लिए सूत्र दिया गया है:
y = a sin(2πt/T)
यहाँ sine के अंदर का कोण विमाहीन होना चाहिए।
t/T की विमा:
[t/T] = [T]/[T] = 1
अतः यह विमाहीन है। इसलिए यह रूप विमीय दृष्टि से संभव है।
विमीय रूप से गलत समीकरण की पहचान
यदि किसी समीकरण में sine, cosine, logarithm या exponential के अंदर विमायुक्त राशि आ जाए, तो वह समीकरण सामान्यतः विमीय दृष्टि से गलत होगा।
उदाहरण:
y = a sin(vt)
यहाँ:
[vt] = [LT-1] [T] = [L]
अर्थात vt विमाहीन नहीं है। इसलिए यह रूप विमीय दृष्टि से गलत है।
मापन की परिशुद्धता और यथार्थता
परिशुद्धता (Precision) का संबंध मापों की आपसी निकटता से है, जबकि यथार्थता (Accuracy) का संबंध वास्तविक या स्वीकृत मान के निकटता से है।
किसी वैज्ञानिक प्रयोग में दोनों का महत्व होता है।
मापन में त्रुटि
किसी मापे गए मान और वास्तविक/स्वीकृत मान के बीच अंतर को मापन की त्रुटि कहा जाता है।
निरपेक्ष त्रुटि
यदि किसी राशि के विभिन्न प्रेक्षण x1, x2, x3 … हों और उनका माध्य x̄ हो, तो प्रत्येक प्रेक्षण की निरपेक्ष त्रुटि:
Δxi = |xi − x̄|
माध्य निरपेक्ष त्रुटि
माध्य निरपेक्ष त्रुटि = (|Δx1| + |Δx2| + … + |Δxn|)/n
सापेक्ष त्रुटि
माध्य निरपेक्ष त्रुटि और मापे गए माध्य मान के अनुपात को सापेक्ष त्रुटि कहते हैं।
सापेक्ष त्रुटि = Δx/x̄
प्रतिशत त्रुटि
प्रतिशत त्रुटि = (Δx/x̄) × 100
प्रेक्षणों की संख्या बढ़ाने का लाभ
एक ही राशि के अधिक प्रेक्षण लेने से यादृच्छिक त्रुटियों का प्रभाव कम किया जा सकता है। इसलिए सामान्यतः अधिक प्रेक्षणों से प्राप्त माध्य मान अधिक विश्वसनीय होता है।
Reference chapter में भी पाँच की तुलना में 100 measurements लेने पर mean diameter के अधिक विश्वसनीय होने की बात समझाई गई है।
अल्पतमांक (Least Count)
किसी मापन यंत्र द्वारा मापी जा सकने वाली सबसे छोटी राशि को उस यंत्र का अल्पतमांक कहते हैं।
स्क्रूगेज का अल्पतमांक
Least Count = Pitch / Circular Scale Divisions
यदि किसी screw gauge की pitch 1 mm और circular scale पर 200 divisions हैं, तो:
Least Count = 1/200 mm
= 0.005 mm
वर्नियर कैलिपर्स
वर्नियर कैलिपर्स का उपयोग छोटी लंबाई, व्यास और गहराई को अधिक सूक्ष्मता से मापने के लिए किया जाता है। इसकी परिशुद्धता उसके मुख्य पैमाने और वर्नियर पैमाने के विभाजनों पर निर्भर करती है।
स्क्रूगेज
स्क्रूगेज का उपयोग बहुत छोटी मोटाई या व्यास मापने के लिए किया जाता है। जैसे – तार का व्यास, पतली शीट की मोटाई आदि।
धागे का व्यास कैसे मापें?
यदि केवल धागा और मीटर पैमाना उपलब्ध हो, तो धागे को किसी बेलनाकार छड़ पर पास-पास कई फेरों में लपेटा जा सकता है।
यदि n फेरों द्वारा घेरी गई कुल लंबाई l हो, तो:
धागे का व्यास = l/n
इस विधि से छोटे व्यास का अनुमान अधिक आसानी से लगाया जा सकता है।
सार्थक अंक (Significant Figures)
किसी मापे गए मान में वे सभी अंक जो उसकी परिशुद्धता के बारे में अर्थपूर्ण जानकारी देते हैं, सार्थक अंक कहलाते हैं।
सार्थक अंकों के प्रमुख नियम
- शून्य के अलावा सभी अंक सार्थक होते हैं।
- दो गैर-शून्य अंकों के बीच का शून्य सार्थक होता है।
- दशमलव के बाद अंत में आने वाले शून्य सार्थक हो सकते हैं।
- दशमलव से पहले के प्रारंभिक शून्य सामान्यतः सार्थक नहीं होते।
उदाहरण
| संख्या | सार्थक अंकों की संख्या |
|---|---|
| 0.007 | 1 |
| 2.64 × 1024 | 3 |
| 0.2370 | 4 |
| 6.320 | 4 |
| 6.032 | 4 |
| 0.0006032 | 4 |
सार्थक अंकों के साथ जोड़ और घटाव
जोड़ या घटाव करते समय परिणाम को उस दशमलव स्थान तक रखा जाता है जहाँ तक दिए गए मानों में सबसे कम precision उपलब्ध है।
गुणा और भाग में सार्थक अंक
गुणा या भाग में परिणाम में सार्थक अंकों की संख्या सामान्यतः उस संख्या के बराबर रखी जाती है जिसमें सार्थक अंकों की संख्या सबसे कम है।
मापन यंत्र की परिशुद्धता
यदि किसी यंत्र का least count छोटा है, तो वह सामान्यतः छोटी मात्रा के अंतर को अधिक सूक्ष्मता से माप सकता है। उदाहरण के लिए प्रकाशिक यंत्र, जिसकी measurement capability प्रकाश की wavelength के स्तर तक हो, सामान्य meter scale की तुलना में अधिक सूक्ष्म मापन कर सकता है।
बहुत बड़ी और बहुत छोटी राशियों का मापन
भौतिकी में कुछ राशियाँ अत्यंत छोटी और कुछ अत्यंत बड़ी होती हैं। इसलिए वैज्ञानिक notation तथा विशेष मात्रकों का प्रयोग किया जाता है।
छोटी लंबाई के मात्रक
- Ångström: 1 Å = 10-10 m
- Fermi: 1 fm = 10-15 m
बड़ी खगोलीय दूरियाँ
- Light year
- Parsec
- Kiloparsec
- Megaparsec
प्रकाश वर्ष
प्रकाश एक वर्ष में निर्वात में जितनी दूरी तय करता है, उसे प्रकाश वर्ष कहते हैं।
1 light year ≈ 9.46 × 1015 m
पारसेक
खगोलीय दूरियों के लिए पारसेक एक सुविधाजनक मात्रक है। एक parsec लगभग:
1 parsec ≈ 3.086 × 1016 m
और लगभग 3.26 light years के बराबर होता है।
लंबन (Parallax)
किसी वस्तु को अलग-अलग स्थानों से देखने पर पृष्ठभूमि के सापेक्ष उसकी स्थिति में दिखाई देने वाले कोणीय परिवर्तन को लंबन कहते हैं।
निकटवर्ती तारों की दूरी मापने के लिए parallax का उपयोग किया जाता है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते समय छह महीने के अंतराल पर लगभग विपरीत स्थितियों में होती है, जिससे लंबी baseline प्राप्त होती है।
प्रश्न – सूर्य और पृथ्वी के बीच दूरी
यदि किसी नई लंबाई इकाई में प्रकाश की चाल 1 unit/s है और प्रकाश सूर्य से पृथ्वी तक 8 मिनट 20 सेकंड में पहुँचता है, तो:
t = 8 × 60 + 20
= 500 s
चूँकि प्रकाश की चाल = 1 unit/s
अतः दूरी:
d = ct
= 1 × 500
उत्तर: 500 नई लंबाई इकाइयाँ
कोणीय माप द्वारा किसी वस्तु का आकार
यदि कोई दूरस्थ वस्तु बहुत छोटी कोणीय माप θ बनाती है और उसकी दूरी d है, तो छोटे कोण के लिए:
वस्तु का आकार ≈ dθ
जहाँ θ को radian में लेना चाहिए।
मापन की वैज्ञानिक उपयोगिता
आधुनिक विज्ञान में परिशुद्ध मापन अत्यंत महत्वपूर्ण है। परमाणु के आकार से लेकर ग्रहों की दूरी तक, अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग प्रकार के मापन उपकरणों की आवश्यकता होती है।
- परमाणु और अणुओं के आकार का मापन
- खगोलीय पिंडों की दूरी
- उपग्रहों की स्थिति
- चिकित्सा उपकरणों में सूक्ष्म मापन
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण
- समय की अत्यंत सटीक माप
अभ्यास प्रश्न – महत्वपूर्ण हल
प्रश्न 2.1 – 1 cm भुजा वाले घन का आयतन
भुजा = 1 cm = 10-2 m
आयतन = (भुजा)3
= (10-2)3
= 10-6 m3
प्रश्न 2.1 – 18 km/h की चाल से 1 सेकंड में दूरी
18 km/h = 5 m/s
दूरी = चाल × समय
= 5 × 1
= 5 m
प्रश्न 2.2 – गुरुत्वीय नियतांक G का CGS मात्रक
G का SI मान:
G = 6.67 × 10-11 m3 kg-1 s-2
1 m = 100 cm
1 kg = 1000 g
अतः CGS पद्धति में:
G = 6.67 × 10-8 cm3 g-1 s-2
प्रश्न 2.3 – कैलोरी के नए मात्रक में मान
1 calorie ≈ 4.2 J
और
1 J = 1 kg m2 s-2
यदि नए मात्रक:
1 mass unit = α kg
1 length unit = β m
1 time unit = γ s
तो 1 नए ऊर्जा मात्रक का मान:
(α kg)(β m)2(γ s)-2
अतः 1 calorie का नए मात्रकों में संख्यात्मक मान:
4.2 α-1 β-2 γ2
प्रश्न 2.5 – प्रकाश की चाल को 1 मानने पर दूरी
प्रकाश की चाल = 1 unit/s
समय = 8 min 20 s = 500 s
d = vt
= 1 × 500
= 500 units
प्रश्न 2.6 – सबसे अधिक परिशुद्ध यंत्र
विकल्पों में जिस यंत्र का least count सबसे कम होगा, वह अधिक सूक्ष्म मापन कर सकता है। दिए गए विकल्पों में प्रकाशिक यंत्र की measurement capability सबसे सूक्ष्म है।
उत्तर: प्रकाशिक यंत्र
प्रश्न 2.7 – बाल की मोटाई
सूक्ष्मदर्शी का आवर्धन = 100
दिखाई गई औसत मोटाई = 3.5 mm
वास्तविक मोटाई:
= 3.5/100 mm
= 0.035 mm
प्रश्न 2.8 – स्क्रूगेज का least count
Pitch = 1.0 mm
Circular scale divisions = 200
Least Count = Pitch/Number of divisions
= 1/200 mm
= 0.005 mm
विभाजनों की संख्या बढ़ाने से आदर्श स्थिति में least count कम हो सकता है, लेकिन वास्तविक यंत्र की mechanical limitations भी महत्वपूर्ण होती हैं।
प्रश्न 2.9 – प्रक्षेपित्र का रेखीय आवर्धन
स्लाइड पर क्षेत्रफल = 1.75 cm2
स्क्रीन पर क्षेत्रफल = 1.55 m2
1.55 m2 = 15500 cm2
Linear magnification:
m = √(Areaimage/Areaobject)
= √(15500/1.75)
≈ 94.1
उत्तर: लगभग 94
प्रश्न 2.10 – सार्थक अंकों की संख्या
| मान | सार्थक अंक |
|---|---|
| 0.007 m2 | 1 |
| 2.64 × 1024 kg | 3 |
| 0.2370 g cm-3 | 4 |
| 6.320 J | 4 |
| 6.032 N m-2 | 4 |
| 0.0006032 m2 | 4 |
प्रश्न 2.11 – आयताकार शीट का क्षेत्रफल और आयतन
लंबाई = 4.234 m
चौड़ाई = 1.005 m
मोटाई = 2.01 cm = 0.0201 m
आयतन:
V = lbt
= 4.234 × 1.005 × 0.0201
≈ 0.0855 m3
यदि पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल चाहिए:
A = 2(lb + bt + tl)
≈ 8.72 m2
उत्तर: आयतन ≈ 0.0855 m3, पृष्ठीय क्षेत्रफल ≈ 8.72 m2
प्रश्न 2.12 – द्रव्यमानों का योग
डिब्बे का द्रव्यमान = 2.300 kg
पहला टुकड़ा = 20.15 g = 0.02015 kg
दूसरा टुकड़ा = 20.17 g = 0.02017 kg
कुल द्रव्यमान:
M = 2.300 + 0.02015 + 0.02017
= 2.34032 kg
उचित decimal place तक:
M ≈ 2.340 kg
दोनों सोने के टुकड़ों का अंतर:
20.17 − 20.15 = 0.02 g
प्रश्न 2.13 – प्रतिशत त्रुटि
दिया है:
P = a3b2/(√c d)
a, b, c और d में प्रतिशत त्रुटियाँ क्रमशः 1%, 3%, 4% और 2% हैं।
अतः P में अधिकतम प्रतिशत त्रुटि:
= 3(1) + 2(3) + 1/2(4) + 2
= 3 + 6 + 2 + 2
= 13%
यदि P = 3.763 है, तो:
ΔP = 13/100 × 3.763
≈ 0.489
अतः परिणाम लगभग 3.8 तक लिखा जा सकता है, यदि uncertainty के अनुरूप rounding की जाए।
प्रश्न 2.14 – विमीय परीक्षण
दिए गए समीकरणों में trigonometric function के अंदर की राशि विमाहीन होनी चाहिए।
(a) y = a sin(2πt/T) – सही
(b) y = a sin(vt) – गलत, क्योंकि vt की विमा L है।
(c) y = (a/T) sin(t/a) – गलत, क्योंकि t/a विमाहीन नहीं है।
(d) y = a/√2 [sin(2πt/T) + cos(2πt/T)] – विमीय रूप से सही।
प्रश्न 2.15 – आपेक्षिकता का सूत्र
सही संबंध है:
m = m0/√(1 − v2/c2)
यहाँ v2/c2 विमाहीन है, इसलिए denominator के अंदर की पूरी राशि विमाहीन रहती है।
प्रश्न 2.16 – हाइड्रोजन परमाणुओं का कुल आयतन
1 Å = 10-10 m
हाइड्रोजन परमाणु का आकार ≈ 0.5 Å
एक परमाणु का अनुमानित आयतन:
V = 4/3 πr3
और एक मोल में लगभग 6.022 × 1023 कण होते हैं।
दिए गए अनुमान के आधार पर एक मोल के परमाणु-आकारों के कुल आयतन का परिमाण लगभग:
3.15 × 10-7 m3
प्रश्न 2.17 – गैस के आयतन और आण्विक आयतन का अनुपात
एक मोल गैस का आयतन = 22.4 L = 22.4 × 10-3 m3
अणुओं के वास्तविक आकारों के कुल आयतन की तुलना में गैस का आयतन बहुत अधिक होता है।
इसका मुख्य कारण है कि गैस के अणुओं के बीच बहुत अधिक खाली स्थान होता है।
प्रश्न 2.18 – रेलगाड़ी से देखने पर पास की वस्तुएँ तेज क्यों लगती हैं?
रेल से देखने पर पास की वस्तुओं का angular displacement अपेक्षाकृत तेजी से बदलता है। दूर की वस्तुओं के लिए वही स्थान परिवर्तन बहुत छोटा angular change उत्पन्न करता है। इसलिए पास के पेड़ और मकान तेजी से पीछे जाते हुए दिखाई देते हैं, जबकि दूर की पहाड़ियाँ, चंद्रमा या तारे लगभग स्थिर दिखाई देते हैं।
प्रश्न 2.19 – पारसेक का मान
पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या लगभग:
r = 1.5 × 1011 m
1 arc-second = 4.848 × 10-6 rad
छोटे कोण के लिए:
d ≈ r/θ
अतः:
d ≈ (1.5 × 1011)/(4.848 × 10-6)
≈ 3.09 × 1016 m
प्रश्न 2.20 – 4.29 light year को parsec में
1 parsec ≈ 3.26 light year
अतः:
4.29/3.26 ≈ 1.32 parsec
उत्तर: लगभग 1.32 parsec
यदि पृथ्वी की कक्षा के व्यास को baseline माना जाए, तो corresponding parallax angle लगभग 1.52 arc-second के order का होगा।
प्रश्न 2.22 – हाथी के द्रव्यमान का अनुमान
किसी हाथी का द्रव्यमान सीधे सामान्य तराजू से मापना कठिन हो सकता है। उचित mechanical method या platform weighing system का उपयोग करके इसका अनुमान लगाया जा सकता है। सामान्य अनुमान के रूप में यह कुछ हजार kilogram के order में होता है।
प्रश्न 2.23 – सूर्य का औसत घनत्व
दिया है:
M = 2.0 × 1030 kg
R = 7.0 × 108 m
गोले का आयतन:
V = 4/3 πR3
घनत्व:
ρ = M/V
≈ 1.4 × 103 kg/m3
उत्तर: सूर्य का औसत घनत्व लगभग 1.4 × 103 kg/m3 है।
प्रश्न 2.24 – बृहस्पति का व्यास
छोटे कोण के लिए:
θ = D/d
अतः:
D = dθ
दिए गए आँकड़ों को radian में बदलकर गणना करने पर:
D ≈ 1.43 × 105 km
प्रश्न 2.25 – वर्षा और चल रहे व्यक्ति का कोण
यदि व्यक्ति का क्षैतिज वेग v और वर्षा की बूंदों का नीचे की ओर वेग u है, तो:
tan θ = v/u
केवल tan θ = v लिखना विमीय रूप से सही नहीं है, क्योंकि tan θ विमाहीन है जबकि v की विमा LT-1 है।
प्रश्न 2.26 – सीज़ियम घड़ी की परिशुद्धता
100 वर्ष का समय:
≈ 100 × 365 × 24 × 60 × 60 s
≈ 3.156 × 109 s
यदि अंतर लगभग 0.02 s है, तो relative accuracy का order:
≈ 0.02/(3.156 × 109)
≈ 6.3 × 10-12
अर्थात ऐसी घड़ी की समय मापन क्षमता अत्यंत उच्च परिशुद्धता वाली है।
प्रश्न 2.27 – सोडियम परमाणु का औसत घनत्व
सोडियम परमाणु का आकार लगभग 2.5 Å दिया गया है। Atomic mass और Avogadro संख्या से एक परमाणु का mass निकाला जा सकता है। फिर अनुमानित spherical volume से:
ρ = mass/volume
प्राप्त मान crystalline sodium के वास्तविक density के उसी order में आता है। इसका कारण यह है कि solid sodium में atoms एक-दूसरे के काफी निकट packed होते हैं।
प्रश्न 2.28 – नाभिकीय घनत्व
नाभिक की त्रिज्या का empirical संबंध:
R = R0A1/3
जहाँ R0 लगभग 1.2 fm है।
नाभिक का आयतन:
V ∝ R3
अतः:
V ∝ A
और नाभिक का mass भी लगभग A के समानुपाती है। इसलिए:
नाभिकीय घनत्व लगभग स्थिर रहता है।
प्रश्न 2.29 – लेजर से चंद्रमा की दूरी
लेजर प्रकाश द्वारा आने-जाने में समय:
t = 2.56 s
प्रकाश की चाल:
c = 3 × 108 m/s
प्रकाश द्वारा कुल दूरी:
d = ct
= 3 × 108 × 2.56
= 7.68 × 108 m
यह आने-जाने की दूरी है। इसलिए पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी:
r = d/2
= 3.84 × 108 m
प्रश्न 2.30 – SONAR से पनडुब्बी की दूरी
ध्वनि की चाल:
v = 1450 m/s
समय = 77.0 s
ध्वनि ने आने-जाने की दूरी तय की है:
2x = vt
2x = 1450 × 77
x = 55825/2
x ≈ 2.79 × 104 m = 27.9 km
इस प्रकार echo time यदि 77.0 s है तो वास्तविक one-way दूरी लगभग 27.9 km होगी।
प्रश्न 2.31 – 300 करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर क्वासर
समय:
t = 3 × 109 वर्ष
एक वर्ष में प्रकाश द्वारा तय दूरी लगभग 9.46 × 1012 km है।
अतः दूरी:
d = 3 × 109 × 9.46 × 1012 km
≈ 2.84 × 1022 km
प्रश्न 2.32 – चंद्रमा का व्यास
चंद्रमा और सूर्य का angular diameter लगभग समान होने के कारण:
Dmoon/dmoon ≈ Dsun/dsun
दिए गए astronomical data का उपयोग करने पर चंद्रमा का व्यास लगभग:
3.57 × 103 km
अर्थात लगभग 3570 km।
मापन से जुड़े महत्वपूर्ण सूत्र
| राशि/अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| चाल | v = दूरी/समय |
| घनत्व | ρ = M/V |
| गोले का आयतन | V = 4πR3/3 |
| प्रतिशत त्रुटि | (Δx/x) × 100 |
| माध्य | x̄ = Σx/n |
| स्क्रूगेज least count | Pitch/Divisions |
| छोटे कोण के लिए आकार | D ≈ dθ |
| प्रकाश की दूरी | d = ct |
| SONAR दूरी | d = vt/2 |
Chapter 2 के सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स
- मूल और व्युत्पन्न राशियाँ
- SI मात्रक पद्धति
- मात्रक परिवर्तन
- विमीय सूत्र
- विमीय विश्लेषण
- विमीय समांगता
- Significant figures
- मापन की त्रुटियाँ
- Absolute error
- Relative error
- Percentage error
- Accuracy और Precision
- Least count
- Vernier calipers
- Screw gauge
- Parallax
- Light year और parsec
- खगोलीय दूरी की गणना
- Numerical problems based on dimensions and errors
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1. SI पद्धति में लंबाई का मात्रक क्या है?
(A) cm
(B) km
(C) m
(D) mm
उत्तर: (C) m
प्रश्न 2. SI पद्धति में समय का मूल मात्रक है –
(A) मिनट
(B) घंटा
(C) सेकंड
(D) दिन
उत्तर: (C) सेकंड
प्रश्न 3. वेग का विमीय सूत्र है –
(A) [LT]
(B) [LT-1]
(C) [LT-2]
(D) [MLT-1]
उत्तर: (B) [LT-1]
प्रश्न 4. बल का विमीय सूत्र है –
(A) [MLT-1]
(B) [MLT-2]
(C) [ML2T-2]
(D) [ML-1T-2]
उत्तर: (B) [MLT-2]
प्रश्न 5. कार्य का विमीय सूत्र है –
(A) [ML2T-2]
(B) [MLT-2]
(C) [MLT-1]
(D) [ML2T-3]
उत्तर: (A) [ML2T-2]
प्रश्न 6. 1 Å बराबर है –
(A) 10-5 m
(B) 10-10 m
(C) 10-15 m
(D) 10-20 m
उत्तर: (B) 10-10 m
प्रश्न 7. 18 km/h बराबर है –
(A) 2 m/s
(B) 5 m/s
(C) 10 m/s
(D) 18 m/s
उत्तर: (B) 5 m/s
प्रश्न 8. G का विमीय सूत्र है –
(A) [MLT-2]
(B) [M-1L3T-2]
(C) [ML2T-2]
(D) [M-1L2T-1]
उत्तर: (B) [M-1L3T-2]
प्रश्न 9. 0.007 में सार्थक अंकों की संख्या है –
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
उत्तर: (A) 1
प्रश्न 10. Screw gauge का least count किस पर निर्भर करता है?
(A) Pitch और circular scale divisions
(B) केवल लंबाई
(C) केवल mass
(D) केवल time
उत्तर: (A) Pitch और circular scale divisions
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- मात्रक और भौतिक राशि की परिभाषा लिखिए।
- मूल और व्युत्पन्न राशियों में अंतर बताइए।
- SI पद्धति की सात मूल राशियों के नाम लिखिए।
- विमीय सूत्र क्या है?
- विमीय विश्लेषण के उपयोग लिखिए।
- विमीय समांगता का सिद्धांत समझाइए।
- सार्थक अंक क्या हैं? इनके नियम लिखिए।
- Accuracy और Precision में अंतर बताइए।
- निरपेक्ष, सापेक्ष और प्रतिशत त्रुटि समझाइए।
- Least count क्या है?
- Vernier calipers और screw gauge का उपयोग लिखिए।
- Parallax method से तारों की दूरी कैसे ज्ञात की जाती है?
- Light year और parsec को परिभाषित कीजिए।
- विमीय विश्लेषण द्वारा किसी equation की शुद्धता कैसे जाँचते हैं?
- मापन में अधिक प्रेक्षण लेने का क्या लाभ है?
Chapter 2 का संक्षिप्त सारांश
मात्रक एवं मापन अध्याय में भौतिक राशियों के मापन की मूल अवधारणाओं को समझाया जाता है। किसी राशि के मापन के लिए मानक मात्रक की आवश्यकता होती है। SI पद्धति में सात मूल मात्रक हैं, जिनसे अनेक व्युत्पन्न मात्रक प्राप्त किए जाते हैं।
विमीय विश्लेषण की सहायता से किसी भौतिक समीकरण की विमीय शुद्धता जाँची जा सकती है। किसी सही भौतिक समीकरण के दोनों पक्षों की विमाएँ समान होनी चाहिए।
मापन में त्रुटि का भी विशेष महत्व है। निरपेक्ष त्रुटि, माध्य निरपेक्ष त्रुटि, सापेक्ष त्रुटि और प्रतिशत त्रुटि के माध्यम से किसी measurement की reliability को समझा जाता है। अधिक प्रेक्षण लेने से random error का प्रभाव कम किया जा सकता है।
सार्थक अंक किसी मापन की precision को व्यक्त करते हैं। जोड़, घटाव, गुणा और भाग में significant figures के नियमों का पालन करना आवश्यक है। Vernier calipers और screw gauge जैसे उपकरण छोटी लंबाई या मोटाई को अधिक सूक्ष्मता से मापने में उपयोगी होते हैं।
अध्याय के अंतिम भाग में अत्यंत छोटी और अत्यंत बड़ी दूरियों के मापन के लिए Ångström, fermi, light year और parsec जैसे मात्रकों तथा parallax जैसी विधियों का अध्ययन किया जाता है।
अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण लिंक
निष्कर्ष
Bihar Board Class 11 Physics Chapter 2 – मात्रक एवं मापन आगे आने वाले लगभग सभी numerical chapters की नींव तैयार करता है। विद्यार्थियों को इस अध्याय में केवल definitions याद करने के बजाय unit conversion, dimensional formula, significant figures, percentage error और measurement instruments पर विशेष अभ्यास करना चाहिए।
बिहार बोर्ड परीक्षा की तैयारी में विशेष रूप से विमीय विश्लेषण, त्रुटि की गणना, सार्थक अंक, screw gauge, vernier calipers, parallax, light year और parsec से जुड़े प्रश्नों को अच्छी तरह तैयार करना उपयोगी रहेगा।