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Bihar Board Class 12 Home Science Chapter 11 – बच्चे का जन्म तथा नवजात शिशु परिचर्या

कक्षा 12 गृह विज्ञान का यह अध्याय ‘बच्चे का जन्म तथा नवजात शिशु परिचर्या’ (Child Birth and Newborn Care) जन्म की प्रक्रिया, प्रसव की विभिन्न अवस्थाओं, प्रसव के प्रकारों तथा नवजात शिशु की प्राथमिक देखभाल पर आधारित है। इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी यह समझते हैं कि प्रसव से पूर्व और प्रसव के पश्चात माँ एवं शिशु की किस प्रकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परिचर्या की जानी चाहिए।

Table of Contents

अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview

शिशु का जन्म एक प्राकृतिक एवं संवेदनशील प्रक्रिया है। जन्म से पूर्व की समयावधि को परसव पूर्व काल तथा जन्म के बाद की समयावधि को परसवोत्तर काल कहा जाता है। प्रसव प्रक्रिया मुख्य रूप से तीन अवस्थाओं—विस्फारण की अवस्था, निष्कासन की अवस्था तथा संपूर्ण विस्फारण की अवस्था से होकर गुजरती है। शिशु जन्म के पश्चात नवजात शिशु के रुदन, नाल काटने व बांधने, प्रथम स्नान, तापमान नियंत्रण, सुलाने की सही विधि तथा मां के प्रथम गाढ़े पीले दूध (कोलेस्ट्रम) के सेवन से जुड़ी परिचर्या अत्यंत आवश्यक होती है।

मुख्य अवधारणाएँ

विषय 1: प्रसव एवं इसके काल (परसव पूर्व काल तथा परसवोत्तर काल)

विस्तृत व्याख्या:

गर्भकाल की समाप्ति पर शिशु के मां के गर्भ से बाहर आने की प्रक्रिया को प्रसव (Delivery/Labor) कहते हैं। अध्ययन और स्वास्थ्य देखभाल के दृष्टिकोण से इस प्रक्रिया को दो मुख्य कालों में विभाजित किया जाता है:

  1. परसव पूर्व काल (Prenatal Period): शिशु के जन्म से पहले का समय परसव पूर्व काल कहलाता है। इस दौरान गर्भवती महिला के शरीर और गर्भाशय में प्रसव के पूर्व लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
  2. परसवोत्तर काल (Postnatal Period): शिशु के जन्म के तुरंत बाद का समय परसवोत्तर काल कहलाता है। इसमें नवजात शिशु की देखभाल तथा प्रसूता (मां) के स्वास्थ्य और रिकवरी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

विषय 2: प्रसव के लक्षण एवं प्रसव पीड़ा (Symptoms of Labor & Labor Pain)

विस्तृत व्याख्या:

प्रसव का समय निकट आने पर गर्भवती महिला के शरीर में विशिष्ट शारीरिक परिवर्तन और लक्षण उत्पन्न होते हैं:

  • गर्भाशय का संकुचन: प्रसव का समय होने पर गर्भाशय में संकुचन (Contractions) आरंभ हो जाता है। प्रारंभ में यह संकुचन धीमी गति से लगभग 30 मिनट के अंतराल पर होता है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी गति और तीव्रता बढ़ती जाती है।
  • प्रसव पीड़ा (Labor Pain): गर्भाशय की पेशियों के इस तीव्र संकुचन से जो दर्द उत्पन्न होता है, उसे प्रसव पीड़ा कहते हैं।
  • चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता: जब गर्भाशय का संकुचन 10 मिनट के अंतराल पर होने लगे और पीड़ा असहनीय हो जाए, तो गर्भवती महिला को तुरंत अस्पताल या डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

प्रसव पूर्व अन्य प्रमुख लक्षण:

  • उदर (गर्भाशय व रीढ़ की हड्डी) की पेशियों में कठोरता आना।
  • पीठ तथा उदर के निचले हिस्से में विशेष प्रकार का दर्द होना।
  • योनि मार्ग से थोड़ा रक्त एवं श्लेष्मिक स्राव (Mucous discharge) होना।

विषय 3: प्रसव की अवस्थाएँ (Stages of Labor)

विस्तृत व्याख्या:

प्रसव की अवस्थाप्रमुख विशेषताएँ एवं घटित होने वाले कार्य
1. विस्फारण की अवस्था (Stage of Dilation)यह गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के पूरी तरह खुलने/विस्तारित होने की अवस्था है। उल् तरल की थैली (Amniotic Sac) फटने से पेट में दर्द होता है और गर्भाशय संकुचन के साथ भ्रूण नीचे की ओर खिसकने लगता है। इससे शिशु के बाहर निकलने का मार्ग बनता है।
2. निष्कासन की अवस्था (Stage of Expulsion)ग्रीवा के पूर्ण रूप से खुलने से लेकर शिशु के जन्म तक की स्थिति निष्कासन की अवस्था कहलाती है। गर्भाशय के ऊपरी भाग में तीव्र संकुचन होता है, जिससे शिशु बाहर आ जाता है और उसका जन्म होता है।
3. संपूर्ण विस्फारण की अवस्था (Stage of Afterbirth/Placenta Expulsion)शिशु के जन्म के बाद अपरा (Placenta) तथा अन्य झिल्लियाँ/तंतु जो शिशु को गर्भ में ढके रहते हैं, वे माँ के शरीर से बाहर निकल आते हैं। इसके पश्चात माँ तथा शिशु की प्राथमिक परिचर्या की जाती है।

विषय 4: प्रसव के प्रकार (Types of Delivery)

विस्तृत व्याख्या:

शिशु के जन्म की प्रक्रिया तीन मुख्य तरीकों से हो सकती है:

1. प्राकृतिक या स्वाभाविक प्रसव (Natural Delivery)

  • इसमें बिना किसी शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) के प्राकृतिक रूप से शिशु का जन्म होता है।
  • इस प्रक्रिया में सबसे पहले शिशु का सिर गर्भाशय से बाहर निकलता है, उसके बाद धड़ और अंत में पैर बाहर आते हैं।
  • यदि शिशु की स्थिति सामान्य हो और मां की उम्र सही हो, तो यह सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

2. यंत्रों की सहायता से प्रसव (Instrumental Delivery)

  • जब शिशु का आकार मां के जननांगों की अपेक्षा बड़ा हो या शिशु गर्भ में अप्राकृतिक/असामान्य स्थिति में हो, तो डॉक्टर विशेष यंत्रों या औजारों की सहायता से प्रसव कराते हैं।

3. जटिलतापूर्ण या सिज़रियन प्रसव (Cesarean/Complicated Delivery)

  • जब प्राकृतिक मार्ग से शिशु का जन्म संभव न हो या आपातकालीन स्थिति (Emergency) उत्पन्न हो जाए, तो शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) द्वारा मां के पेट व गर्भाशय को काटकर शिशु को बाहर निकाला जाता है।
  • कम उम्र में विवाह होने पर गर्भाशय और जननांग पूरी तरह विकसित न होने के कारण अक्सर प्राकृतिक प्रसव कठिन हो जाता है, जिससे सिज़रियन की आवश्यकता पड़ती है।

विषय 5: नवजात शिशु का जन्म, स्थिति एवं रुदन (Newborn Condition & Crying)

विस्तृत व्याख्या:

  • गर्भकालीन स्थिति: गर्भ में शिशु का केवल हृदय कार्यशील रहता है और उसकी हृदय गति चलती रहती है। शिशु को ऑक्सीजन एवं पोषण मां के रक्त द्वारा नाल के माध्यम से प्राप्त होता है।
  • जन्म के समय स्थिति: जन्म लेते ही बाहरी वातावरण गर्भ के वातावरण से भिन्न होने के कारण शिशु असहाय व अबोध महसूस करता है।
  • रुदन (रोने) का महत्व: जन्म लेने के पश्चात शिशु का रोना इस बात का संकेत है कि शिशु पूरी तरह स्वस्थ है और उसने फेफड़ों से सांस लेना प्रारंभ कर दिया है। यदि शिशु जन्म के बाद न रोए, तो उसे अस्वस्थ माना जाता है।

विषय 6: नाल का काटना व बांधना (Umbilical Cord Care)

विस्तृत व्याख्या:

  • नाल की संरचना: नाल (Umbilical Cord) सफेद रंग की लगभग 50 सें.मी. लंबी एक नलिका होती है, जो गर्भ में शिशु को मां के शरीर से जोड़े रखती है।
  • नाल काटने की प्रक्रिया: शिशु के जन्म के पश्चात नाल को सुरक्षित रूप से काटा और बांधा जाता है। कटे हुए नाल का स्थान ही आगे चलकर नाभि (Navel) का रूप धारण कर लेता है।
  • देखभाल एवं औषधि: नाल काटने के पश्चात उस पर संक्रमण रोकने और सुखाने के लिए ‘सिबाजोल’ (Cibazol) या ‘न्यूस पोरिन’ (Nebasporin) पाउडर लगाया जाता है।
  • नाल का गिरना: लगभग 10 से 12 दिनों के भीतर नाल स्वतः ही सूखकर कट कर गिर जाती है।

विषय 7: नवजात शिशु का प्रथम स्नान एवं सावधानियाँ (First Bath & Precautions)

विस्तृत व्याख्या:

  • त्वचा की सफाई: जन्म के समय शिशु के शरीर पर सफेद रंग का चिकना/चिपचिपा पदार्थ लगा होता है। इसे पहले रुई के कोमल पोहे से साफ किया जाता है।
  • स्नान का समय: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जन्म के 2 से 3 घंटे के बाद गुनगुने पानी से शिशु को स्नान कराना चाहिए।

स्नान के दौरान आवश्यक सावधानियाँ:

  • नाल तथा नाभि वाले क्षेत्र में पानी नहीं जाना चाहिए।
  • मुलायम कपड़े की बत्ती बनाकर नाक और कान की सफाई करनी चाहिए।
  • आंखों की सफाई के लिए अलग साफ कपड़े का प्रयोग करना चाहिए।
  • स्नान के बाद शिशु का शरीर मुलायम तौलिए से थपथपाकर सुखाना चाहिए।
  • मलमूत्र के स्थान को बोरिक लोशन के घोल से साफ करना चाहिए।
  • स्नान के पश्चात जैतून के तेल से मालिश करनी चाहिए।

विषय 8: गर्मी व सर्दी से बचाव और कमरे का तापमान (Temperature & Seasonal Care)

विस्तृत व्याख्या:

  • पर्यावरण परिवर्तन: शिशु मां के गर्भ के नियंत्रित तापमान से निकलकर बाहरी वातावरण में आता है, जहाँ अत्यधिक गर्मी या सर्दी हो सकती है।
  • कमरे का तापमान: नवजात शिशु के कमरे का तापमान शिशु की सहनशक्ति और सुविधा के अनुसार अनुकूल होना चाहिए।
  • मौसम से बचाव: शिशु में रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है, इसलिए उसे सर्दी व गर्मी के प्रतिकूल प्रभाव से बचाकर रखना चाहिए ताकि वह बीमार न पड़े।

विषय 9: नवजात शिशु की नींद व विश्राम (Sleep & Rest)

विस्तृत व्याख्या:

  • स्वास्थ्य का लक्षण: पर्याप्त और उत्तम नींद नवजात शिशु के अच्छे स्वास्थ्य का लक्षण है।
  • सुलाने की विधि: शिशु को मां के पास सुलाने की बजाय अलग पालने में सुलाना चाहिए ताकि मां और शिशु दोनों को असुविधा न हो।
शिशु की आयुदैनिक सोने की औसतन अवधि
जन्म के तुरंत बाद / प्रारंभिक दिन21 से 30 घंटे
3 माह तक18 से 21 घंटे
6 माह तक16 से 18 घंटे
1 वर्ष तक14 से 16 घंटे

विषय 10: प्रथम स्तनपान तथा कोलेस्ट्रम का महत्व (First Breastfeeding & Colostrum)

विस्तृत व्याख्या:

  • कोलेस्ट्रम (Colostrum): प्रसव के पश्चात मां के स्तनों से निकलने वाला पहला गाढ़ा, पीला दूध ‘कोलेस्ट्रम’ कहलाता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: कोलेस्ट्रम में प्रचुर मात्रा में एंटीबॉडीज और पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु को संक्रामक बीमारियों से बचाते हैं और उसकी इम्युनिटी बढ़ाते हैं।
  • स्तनपान कराने की विधि: प्रसव के तुरंत बाद (1 से 2 घंटे के भीतर) शिशु को स्तनपान कराना चाहिए। मां को तकिए के सहारे बैठाकर गोद में शिशु को लेकर स्तनपान कराना सुविधाजनक होता है।
  • केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding): जन्म से लेकर 6 माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही देना चाहिए, ऊपर से जल या अन्य आहार देने की आवश्यकता नहीं होती।

विषय 11: मां के दूध का रासायनिक संघटन व पोषक तत्व (Composition of Mother’s Milk)

विस्तृत व्याख्या:

मां का दूध नवजात शिशु के लिए सर्वोत्तम और पूर्ण आहार है। इसका संघटन निम्न प्रकार है:

  • वसा (Fat): मां के दूध में लगभग 3.9% वसा होती है, जो शिशु के लिए आसानी से पच जाती है।
  • प्रोटीन (Protein): इसमें लगभग 1.1% प्रोटीन होता है, जो कोशिका निर्माण और शारीरिक वृद्धि में सहायक है।
  • खनिज लवण (Minerals): मां के दूध में आवश्यक खनिज पाए जाते हैं। यकृत में लोहा (Iron) संचित रहता है जो 6 माह तक पर्याप्त होता है।
  • विटामिन (Vitamins): मां के दूध में विटामिन A, B और C प्रचुर मात्रा में होते हैं, परंतु विटामिन D का अभाव रहता है। विटामिन D की पूर्ति के लिए शिशु को सुबह की हल्की धूप में सुलाया जाता है।
  • जल (Water): मां के दूध में जल की पर्याप्त मात्रा होती है, जिससे अलग से पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती।

विषय 12: नवजात शिशु के वस्त्रों का चयन (Clothing for Newborns)

विस्तृत व्याख्या:

नवजात शिशु की त्वचा अत्यंत कोमल और संवेदनशील होती है। अतः उसके वस्त्रों में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:

  • वस्त्र अत्यंत कोमल, सूती और ढीले होने चाहिए।
  • आसानी से धुले और साफ होने वाले होने चाहिए।
  • पसीना व नमी सोखने की क्षमता वाले होने चाहिए।

शब्दावली / Key Terms

  • प्रसव (Labor/Delivery): गर्भकाल पूरा होने पर शिशु के मां के गर्भ से बाहर आने की प्राकृतिक प्रक्रिया।
  • परसव पूर्व काल (Prenatal Period): शिशु के जन्म से पूर्व की समयावधि।
  • परसवोत्तर काल (Postnatal Period): शिशु के जन्म के पश्चात की समयावधि।
  • कोलेस्ट्रम (Colostrum): प्रसव के बाद मां का पहला गाढ़ा-पीला दूध, जो रोगों से रक्षा करता है।
  • अपरा (Placenta): वह अंग जो गर्भ में मां से शिशु को पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाता है।
  • नाल (Umbilical Cord): लगभग 50 सें.मी. लंबी नली जो शिशु को मां के गर्भ से जोड़े रखती है।
  • विस्फारण (Dilation): प्रसव के समय गर्भाशय ग्रीवा के फैलने/खुलने की क्रिया।
  • सिज़रियन प्रसव (Cesarean Delivery): शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) द्वारा पेट काटकर शिशु को बाहर निकालने की विधि।

अध्याय का सारांश

यह अध्याय शिशु के जन्म की जैविक प्रक्रिया तथा उसके पश्चात दी जाने वाली प्राथमिक परिचर्या पर प्रकाश डालता है। प्रसव पूर्व एवं प्रसवोत्तर काल मां और बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। प्रसव की तीन अवस्थाओं—विस्फारण, निष्कासन व संपूर्ण विस्फारण—से गुजरकर शिशु का जन्म होता है। प्रसव प्राकृतिक, यंत्र चालित या सिज़रियन हो सकता है। जन्म के बाद शिशु का रोना उसके स्वस्थ होने का प्रमाण है। नाल को काटकर सिबाजोल पाउडर लगाया जाता है और 10-12 दिन में यह स्वतः गिर जाती है। शिशु को 2-3 घंटे बाद गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए। 0 से 6 माह तक केवल मां का दूध (प्रथम गाढ़ा दूध – कोलेस्ट्रम) ही शिशु का सर्वोत्तम आहार होता है, जिसमें विटामिन D के अलावा सभी आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision

  • प्रसव के काल: परसव पूर्व काल (जन्म से पहले) एवं परसवोत्तर काल (जन्म के बाद)।
  • प्रसव पीड़ा लक्षण: गर्भाशय संकुचन प्रारंभ में 30 मिनट तथा बाद में 10 मिनट के अंतराल पर होना।
  • प्रसव की अवस्थाएँ: 1. विस्फारण, 2. निष्कासन, 3. संपूर्ण विस्फारण।
  • प्रसव के प्रकार: प्राकृतिक प्रसव, यंत्रों द्वारा प्रसव, जटिलतापूर्ण/सिज़रियन प्रसव।
  • नाल की लंबाई: लगभग 50 सें.मी.
  • नाल सुखाने का पाउडर: सिबाजोल (Cibazol) या न्यूस पोरिन (Nebasporin)।
  • नाल गिरने का समय: 10 से 12 दिन।
  • प्रथम स्तनपान: कोलेस्ट्रम (मां का पहला गाढ़ा पीला दूध)।
  • दूध में वसा प्रतिशत: 3.9%।
  • दूध में प्रोटीन प्रतिशत: 1.1%।
  • अनुपस्थित विटामिन: मां के दूध में विटामिन D अनुपस्थित होता है।
  • शिशु की नींद: जन्म के समय 21-30 घंटे औसतन सोना।
  • वस्त्र का प्रकार: ढीले, कोमल, सूती व नमी सोखने वाले।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: शिशु के जन्म से पूर्व की समयावधि को क्या कहा जाता है?

(A) परसवोत्तर काल
(B) परस्व पूर्व काल
(C) किशोरावस्था
(D) प्रौढ़ावस्था

सही उत्तर: (B) परस्व पूर्व काल

Explanation: शिशु के जन्म से पहले के समय को परस्व पूर्व काल और जन्म के बाद के समय को परसवोत्तर काल कहते हैं।

प्रश्न 2: मां के स्तनों से निकलने वाले पहले गाढ़े-पीले दूध को क्या कहते हैं?

(A) केसीन
(B) कोलेस्ट्रम
(C) लैक्टोज
(D) सेरुमन

सही उत्तर: (B) कोलेस्ट्रम

Explanation: प्रसव के तुरंत बाद मां के स्तनों से निकलने वाला प्रथम गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम कहलाता है, जो शिशु की इम्युनिटी बढ़ाता है।

प्रश्न 3: मां के दूध में वसा (Fat) का प्रतिशत कितना होता है?

(A) 1.1%
(B) 3.9%
(C) 5.5%
(D) 2.0%

सही उत्तर: (B) 3.9%

Explanation: मां के दूध में लगभग 3.9% वसा पाई जाती है, जो आसानी से पच जाती है।

प्रश्न 4: मां के दूध में किस विटामिन की कमी होती है?

(A) विटामिन A
(B) विटामिन B
(C) विटामिन C
(D) विटामिन D

सही उत्तर: (D) विटामिन D

Explanation: मां के दूध में विटामिन A, B और C पाए जाते हैं, परंतु विटामिन D का अभाव रहता है।

प्रश्न 5: नवजात शिशु की नाल (Umbilical Cord) की लंबाई लगभग कितनी होती है?

(A) 25 सें.मी.
(B) 50 सें.मी.
(C) 75 सें.मी.
(D) 100 सें.मी.

सही उत्तर: (B) 50 सें.मी.

Explanation: नाल एक लंबी नलिका होती है जो लगभग 50 सें.मी. तक लंबी होती है।

प्रश्न 6: कटे हुए नाल पर कौन-सा पाउडर लगाया जाता है?

(A) बोरिक पाउडर
(B) टेलकम पाउडर
(C) सिबाजोल या न्यूस पोरिन
(D) पेनिसिलिन

सही उत्तर: (C) सिबाजोल या न्यूस पोरिन

Explanation: नाल काटने के बाद उस पर सिबाजोल या न्यूस पोरिन पाउडर लगाया जाता है ताकि वह जल्दी सूख जाए।

प्रश्न 7: शिशु की नाल स्वतः ही सूखकर कितने दिनों में झड़ जाती है?

(A) 2 से 4 दिन
(B) 5 से 7 दिन
(C) 10 से 12 दिन
(D) 20 से 25 दिन

सही उत्तर: (C) 10 से 12 दिन

Explanation: प्रसव के 10 से 12 दिनों के उपरांत नाल स्वतः ही सूखकर कट कर झड़ जाती है।

प्रश्न 8: प्राकृतिक प्रसव में शिशु का कौन-सा अंग सबसे पहले बाहर निकलता है?

(A) पैर
(B) धड़
(C) सिर
(D) हाथ

सही उत्तर: (C) सिर

Explanation: प्राकृतिक या स्वाभाविक प्रसव में सबसे पहले शिशु का सिर, फिर धड़ और अंत में पैर बाहर आते हैं।

प्रश्न 9: मां के गर्भ में पल रहे शिशु का कौन-सा अंग मुख्य रूप से कार्यशील रहता है?

(A) फेफड़े
(B) यकृत
(C) हृदय
(D) गुर्दा

सही उत्तर: (C) हृदय

Explanation: गर्भकाल में शिशु के केवल हृदय की गति चलती रहती है तथा अन्य पोषण नाल द्वारा होता है।

प्रश्न 10: नवजात शिशु के रोने (रुदन) से किस बात का संकेत मिलता है?

(A) शिशु अस्वस्थ है
(B) शिशु स्वस्थ है
(C) शिशु भूखा है
(D) शिशु डर गया है

सही उत्तर: (B) शिशु स्वस्थ है

Explanation: जन्म लेने के उपरांत शिशु का रोना इस बात का संकेत है कि शिशु पूरी तरह स्वस्थ है।

प्रश्न 11: जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु औसतन 24 घंटे में कितने घंटे सोता है?

(A) 10 से 12 घंटे
(B) 12 से 15 घंटे
(C) 21 से 30 घंटे
(D) 8 से 10 घंटे

सही उत्तर: (C) 21 से 30 घंटे

Explanation: जन्म के उपरांत प्रारंभिक दिनों में शिशु 21 से 30 घंटे तक की नींद लेता है।

प्रश्न 12: प्रसव प्रक्रिया की प्रथम अवस्था कौन-सी है?

(A) निष्कासन की अवस्था
(B) संपूर्ण विस्फारण की अवस्था
(C) विस्फारण की अवस्था
(D) प्रसवोत्तर अवस्था

सही उत्तर: (C) विस्फारण की अवस्था

Explanation: प्रसव की पहली अवस्था विस्फारण की अवस्था होती है जिसमें गर्भाशय ग्रीवा खुलती है।

प्रश्न 13: माता के दूध में प्रोटीन का कितना प्रतिशत पाया जाता है?

(A) 1.1%
(B) 3.9%
(C) 2.5%
(D) 4.0%

सही उत्तर: (A) 1.1%

Explanation: मां के दूध में 1.1% प्रोटीन होता है जो शरीर की वृद्धि और कोशिका निर्माण में मदद करता है।

प्रश्न 14: नवजात शिशु के मलमूत्र के स्थान को साफ करने के लिए किस घोल का प्रयोग किया जाता है?

(A) डिटॉल
(B) बोरिक लोशन
(C) साधारण पानी
(D) सेवलॉन

सही उत्तर: (B) बोरिक लोशन

Explanation: स्नान एवं स्वच्छता के समय शिशु के मलमूत्र के स्थान को बोरिक लोशन के घोल से धोना चाहिए।

प्रश्न 15: नवजात शिशु के कपड़े कैसे होने चाहिए?

(A) कोमल और ढीले
(B) आसानी से साफ होने वाले
(C) नमी सोखने वाले
(D) उपरोक्त सभी

सही उत्तर: (D) उपरोक्त सभी

Explanation: नवजात शिशु के वस्त्रों में कोमलता, ढीलापन, नमी सोखने की क्षमता और स्वच्छता जैसे सभी गुण होने चाहिए।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: परसव पूर्व काल तथा परसवोत्तर काल में क्या अंतर है?

उत्तर: परस्व पूर्व काल शिशु के जन्म से पहले का समय होता है, जिसमें गर्भाशय में संकुचन व प्रसव के लक्षण दिखाई देते हैं। जबकि परसवोत्तर काल शिशु जन्म के बाद का समय होता है, जिसमें माँ तथा नवजात शिशु की परिचर्या और स्वास्थ्य देखभाल की जाती है।

प्रश्न 2: प्रसव पीड़ा किसे कहते हैं? इसके क्या लक्षण हैं?

उत्तर: प्रसव के समय गर्भाशय की पेशियों में होने वाले तीव्र संकुचन के कारण जो दर्द होता है, उसे प्रसव पीड़ा कहते हैं। प्रारंभ में संकुचन 30 मिनट के अंतराल पर होता है और धीरे-धीरे 10 मिनट के अंतराल पर तीव्र व असहनीय हो जाता है।

प्रश्न 3: प्रसव की तीनों अवस्थाओं के नाम लिखिए।

उत्तर: प्रसव की तीन अवस्थाएँ हैं:

  1. विस्फारण की अवस्था (Stage of Dilation)
  2. निष्कासन की अवस्था (Stage of Expulsion)
  3. संपूर्ण विस्फारण की अवस्था (Stage of Afterbirth)

प्रश्न 4: कोलेस्ट्रम क्या है और यह शिशु के लिए क्यों आवश्यक है?

उत्तर: प्रसव के पश्चात माँ के स्तनों से निकलने वाला पहला गाढ़ा-पीला दूध ‘कोलेस्ट्रम’ कहलाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunoglobulins) होती है जो नवजात शिशु को बीमारियों से बचाती है।

प्रश्न 5: नवजात शिशु की नाल काटने के बाद उस पर क्या लगाया जाता है?

उत्तर: नाल काटने के बाद उस पर संक्रमण से बचाव और उसे जल्दी सुखाने के लिए सिबाजोल (Cibazol) या न्यूस पोरिन (Nebasporin) पाउडर लगाया जाता है।

प्रश्न 6: नवजात शिशु को प्रथम स्नान कराते समय किन दो प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर:

  1. स्नान कराते समय नाल और नाभि को पानी से भीगने नहीं देना चाहिए।
  2. शिशु के शरीर को रगड़ने के बजाय मुलायम तौलिए से थपथपाकर पोंछना चाहिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: प्रसव के विभिन्न प्रकारों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। सिज़रियन प्रसव की आवश्यकता कब पड़ती है?

उत्तर: प्रसव मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:

  1. प्राकृतिक या स्वाभाविक प्रसव: इसमें बिना किसी शल्य चिकित्सा या मशीन के प्राकृतिक रूप से शिशु का जन्म होता है। इसमें सर्वप्रथम शिशु का सिर, फिर धड़ और अंत में पैर बाहर आते हैं।
  2. यंत्रों की सहायता से प्रसव: जब शिशु का आकार बड़ा हो या वह अप्राकृतिक स्थिति में हो, तो डॉक्टर विशेष यंत्रों की सहायता से शिशु को बाहर निकालते हैं।
  3. जटिलतापूर्ण या सिज़रियन प्रसव: इस विधि में शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) द्वारा मां के पेट और गर्भाशय को काटकर शिशु को बाहर निकाला जाता है।

सिज़रियन प्रसव की आवश्यकता: जब प्रसव के दौरान आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो जाए, प्राकृतिक मार्ग से जन्म असंभव हो, या मां का गर्भाशय एवं जननांग कम उम्र या अन्य कारणों से पूरी तरह सक्षम न हों, तब मां और बच्चे की जान बचाने के लिए सिज़रियन प्रसव कराया जाता है।

प्रश्न 2: मां के दूध के पोषण तत्वों के संघटन का वर्णन कीजिए तथा शिशु के लिए स्तनपान के महत्व को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

मां के दूध का संघटन:

मां का दूध नवजात शिशु के लिए प्रकृति द्वारा प्रदत्त सर्वोत्तम आहार है। इसमें निम्नलिखित पोषक तत्व सही अनुपात में होते हैं:

  • वसा (3.9%): यह आसानी से पच जाती है और शिशु को ऊर्जा देती है।
  • प्रोटीन (1.1%): यह शिशु की शारीरिक वृद्धि और कोशिका विभाजन में मदद करता है।
  • खनिज लवण: आवश्यक खनिज पाए जाते हैं तथा लोहा (Iron) यकृत में 6 माह तक संचित रहता है।
  • विटामिन: विटामिन A, B तथा C पाए जाते हैं, जबकि विटामिन D का अभाव रहता है।
  • जल: पर्याप्त मात्रा में जल होता है।

स्तनपान का महत्व:

  1. उत्तम पाचन: यह सुपाच्य होता है और शिशु के पाचन तंत्र पर दबाव नहीं डालता।
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता: प्रथम दूध (कोलेस्ट्रम) शिशु को जीवनभर बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है।
  3. भावात्मक जुड़ाव: स्तनपान कराने से मां और शिशु के बीच गहरा भावात्मक संबंध स्थापित होता है।
  4. पूर्ण आहार: 0 से 6 माह तक शिशु को पानी या अन्य किसी ऊपर के आहार की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 3: नवजात शिशु की दैनिक परिचर्या (देखभाल, स्नान, नींद व वस्त्र) का विस्तृत वर्णन कीजिए।

उत्तर: नवजात शिशु की दैनिक परिचर्या में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

  1. नाल एवं नाभि की देखभाल: नाल को साफ रखकर उस पर सिबाजोल पाउडर लगाना चाहिए और 10-12 दिन में इसके स्वतः गिरने का इंतजार करना चाहिए।
  2. प्रथम स्नान: जन्म के 2-3 घंटे बाद गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए। नाभि को भीगने से बचाना चाहिए तथा नाक-कान की सफाई सूती कपड़े की बत्ती से करनी चाहिए।
  3. कमरे का तापमान व मौसम से बचाव: कमरे का तापमान अनुकूल होना चाहिए। शिशु को अत्यधिक सर्दी और गर्मी से बचाना चाहिए।
  4. पर्याप्त नींद: नवजात शिशु प्रारंभ में 21 से 30 घंटे सोता है। उसे मां से अलग पालने में सुलाना चाहिए ताकि आरामदायक नींद मिल सके।
  5. वस्त्र: सूती, कोमल, ढीले और नमी सोखने वाले वस्त्रों का चयन करना चाहिए।

बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. प्रसव की तीनों अवस्थाओं के नाम और उनके लक्षण लिखिए।
  2. कोलेस्ट्रम किसे कहते हैं? इसका क्या महत्व है?
  3. प्राकृतिक प्रसव और सिज़रियन प्रसव में क्या अंतर है?
  4. मां के दूध में कौन-सा विटामिन अनुपस्थित रहता है और इसकी पूर्ति कैसे की जाती है?
  5. नवजात शिशु के वस्त्रों में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?
  6. शिशु की नाल काटने के पश्चात क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?

अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points

  • जन्म से पूर्व का समय = परसव पूर्व काल; जन्म के बाद का समय = परसवोत्तर काल।
  • प्रसव पीड़ा में गर्भाशय का संकुचन प्रारंभ में 30 मिनट और बाद में 10 मिनट के अंतराल पर होता है।
  • प्रसव की अवस्थाएँ: विस्फारण, निष्कासन और संपूर्ण विस्फारण।
  • शिशु का रोना = स्वस्थ शिशु का लक्षण।
  • नाल की लंबाई = 50 सें.मी.
  • नाल सुखाने की दवा = सिबाजोल या न्यूस पोरिन।
  • नाल गिरने की अवधि = 10-12 दिन।
  • प्रथम स्नान = जन्म के 2-3 घंटे बाद, गुनगुने पानी से।
  • मां के प्रथम दूध का नाम = कोलेस्ट्रम।
  • मां के दूध में संघटन = 3.9% वसा, 1.1% प्रोटीन।
  • मां के दूध में अनुपस्थित विटामिन = विटामिन D।
  • केवल स्तनपान अवधि = 0 से 6 महीने तक।

अध्याय का निष्कर्ष

अध्याय 11 ‘बच्चे का जन्म तथा नवजात शिशु परिचर्या’ हमें यह समझाता है कि शिशु जन्म की प्रक्रिया एक प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक प्रक्रिया है। प्रसव की विभिन्न अवस्थाओं को सही ढंग से समझना, प्रसव के दौरान आवश्यकतानुसार सही निर्णय लेना तथा जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु की उचित परिचर्या करना शिशु और माँ दोनों के सुरक्षित स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। कोलेस्ट्रम का सेवन, सही स्नान तकनीक, नाल की सुरक्षा तथा अनुकूल वातावरण शिशु के सर्वांगीण विकास का आधार बनते हैं।