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Bihar Board Class 12 Home Science Chapter 10 – मातृशिल्प और बाल विकास

कक्षा 12 गृह विज्ञान (Home Science) का अध्याय 10 “मातृशिल्प और बाल विकास” मातृत्व, प्रसव, प्रसुता की देखभाल तथा नवजात शिशु के विकास और स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें बहुविकल्पीय, अति लघु, लघु तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

Table of Contents

अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview

इस अध्याय में मुख्य रूप से दो प्रमुख घटकों को सम्मिलित किया गया है — पहला ‘मातृशिल्प’ तथा दूसरा ‘बाल विकास’। इसके अंतर्गत प्रसव के चरणों, प्रसुता की स्वास्थ्य जांच एवं आहार, नवजात शिशु की प्राथमिक देखभाल, अपगार स्कोरिंग, स्तनपान एवं कोलेस्ट्रम का महत्व, आवश्यक टीकाकरण तथा शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी सरकारी योजनाओं का विस्तारपूर्वक अध्ययन किया गया है।

मुख्य अवधारणाएँ

विषय 1: मातृशिल्प और बाल विकास का अर्थ एवं अवधारणा

1. मातृशिल्प का अर्थ

  • मातृशिल्प का तात्पर्य स्त्री के मां बनने के गुण, भूमिका और जिम्मेदारी धारण करने से है।
  • यह केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिशु और मां दोनों के शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य का सामंजस्य बनाए रखने की कला है।

2. बाल विकास की परिभाषा

बाल विकास वह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें बच्चे की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक और भाषाई प्रगति होती है। यह प्रक्रिया गर्भावस्था से प्रारंभ होकर जीवन पर्यंत चलती रहती है।

3. वृद्धि (Growth) और विकास (Development) में अंतर

  • वृद्धि: गर्भाशय से लेकर किशोरावस्था तक शिशु के शरीर की लंबाई, चौड़ाई और वजन में होने वाले भौतिक परिवर्तनों को वृद्धि कहते हैं। यह किशोरावस्था के बाद रुक जाती है।
  • विकास: विकास के अंतर्गत मानसिक, बौद्धिक व गुणात्मक परिवर्तन आते हैं, जो जीवन भर निरंतर चलते रहते हैं।

4. बाल विकास के प्रमुख आयाम

  • शारीरिक विकास: शरीर के अंगों की वृद्धि और कार्यक्षमता का विकास।
  • मानसिक/बौद्धिक विकास: सोचने, समझने और सीखने की क्षमता।
  • सामाजिक विकास: समाज के नियमों, संस्कृति और अंतःक्रिया को सीखना।
  • भावनात्मक विकास: संवेगों और भावनाओं पर नियंत्रण स्थापित करना।
  • नैतिक एवं भाषाई विकास: सही-गलत का ज्ञान तथा भाषा का उचित प्रयोग।

विषय 2: परस्व (प्रसव) की प्रक्रिया और इसके चरण

1. परस्व (Parturition / Delivery) की परिभाषा

  • बच्चे को जन्म देने की प्राकृतिक प्रक्रिया को परस्व (प्रसव) कहा जाता है।
  • बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री को ‘प्रसुता’ कहा जाता है।
  • सामान्य गर्भावस्था की अवधि 40 सप्ताह लगभग 9 माह या 270-280 दिन की होती है। 40 सप्ताह से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु कमजोर हो सकते हैं।

2. परस्व के तीन चरण

  1. प्रथम चरण: प्रसव पीड़ा की शुरुआत होती है और गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) का खुलना प्रारंभ होता है ताकि शिशु जन्म के लिए तैयार हो सके।
  2. द्वितीय चरण: इसमें शिशु गर्भाशय ग्रीवा से बाहर निकलता है अर्थात शिशु का जन्म होता है।
  3. तृतीय चरण: इसमें अपरा (Placenta) शरीर से बाहर आती है और मां का गर्भाशय पुनः अपनी पुरानी स्थिति में लौटना शुरू करता है।

3. परस्व के समय मां की स्थिति

प्रसव के दौरान मां को बिल्कुल सीधा (90°) बैठाना या पूरी तरह सीधा (180°) सुलाना सही नहीं माना जाता, बल्कि दीवार/तकिए के सहारे अध-लिटाकर लगभग 45° के कोण पर रखना उचित होता है ताकि गर्भाशय सामान्य स्थिति में आ सके।

विषय 3: प्रसुता (मां) की तत्कालीन देखभाल, आहार एवं स्वास्थ्य

1. प्रथम 1 घंटे का महत्व (निर्णायक घंटा)

प्रसव के तुरंत बाद का पहला 1 घंटा मां और नवजात शिशु दोनों के लिए अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक होता है। इस दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) और बेहोशी का खतरा रहता है।

2. प्रसुता की आवश्यक स्वास्थ्य जांचें

  • रक्तचाप (Blood Pressure/BP): बीपी की स्थिति सामान्य है या नहीं।
  • नब्ज (Pulse/Vein): धमनियों और सिराओं में रक्त प्रवाह की स्थिति।
  • श्वास की गति: सांस सही ढंग से चल रही है या नहीं।
  • रक्तस्राव की मात्रा: पैड की जांच करके बहने वाले रक्त की मात्रा का आकलन करना।

3. प्रसुता का आहार (Diet of New Mother)

प्रसव के तुरंत बाद पाचन तंत्र सही ढंग से काम नहीं करता, इसलिए हल्का व शीघ्र पचने वाला (सुपाच्य) भोजन देना चाहिए।

मुख्य आहार: खिचड़ी, दलिया, दूध, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबूदाना, दालें (प्रोटीन हेतु) और पर्याप्त मात्रा में पानी।

प्रसुता को आरामदायक बिस्तर और हल्का गर्म पेय देना चाहिए।

4. व्यायाम और स्वच्छता

  • प्रसव के 2-3 दिन बाद प्रसुता को धीरे-धीरे कमरे से बाहर टहलना चाहिए ताकि शरीर में रक्त संचार (Blood circulation) सुचारू रहे और गर्भाशय सामान्य स्थिति में आए।
  • 1 सप्ताह बाद मौसम के अनुसार गुनगुने पानी से स्नान कराना चाहिए।

5. प्रसुता के सामान्य रोग

  • रक्तअल्पता (Anemia): प्रसव के दौरान रक्त बहने और कुपोषण के कारण होती है; इसके लिए आयरन-फोलिक एसिड (Iron Folic Acid) की गोलियां दी जाती हैं।
  • टॉक्सिमिया (Toxemia): इसमें हाथ-पांव में सूजन, जी घबराना तथा मूत्र में एल्ब्यूमिन (Albumin) की मात्रा बढ़ जाती है।
  • यौन संक्रमित बीमारियां: यदि मां को यह समस्या हो तो मृत शिशु या कमजोर/अंधा बच्चा पैदा होने का जोखिम रहता है।

विषय 4: नवजात शिशु की तत्कालिक देखभाल एवं अपगार स्कोरिंग

1. नवजात शिशु (Neonate) की परिभाषा

जन्म से लेकर 30 दिन (1 माह) की आयु तक के बच्चे को नवजात शिशु कहा जाता है। नवजात शिशु का सामान्य वजन 2.5 kg से 3.5 kg होता है। 2 kg से कम वजन वाले शिशु कमजोर माने जाते हैं।

2. तत्कालिक देखभाल के मुख्य चरण

  1. श्वास प्रारंभ करना: यदि शिशु जन्म के समय न रोए, तो उसकी पीठ थपथपानी चाहिए ताकि श्वसन क्रिया शुरू हो सके।
  2. नाक व मुंह की सफाई: नेजल पंप (Nasal Pump) या सक्शन बल्ब से कफ/सलेश्मा की सफाई की जाती है।
  3. नाभि नाल (Umbilical Cord) काटना: नाभि नाल को बांधकर 5 से 7 सेमी दूरी पर काटा जाता है और उस पर आयोडीन एंटीसेप्टिक लगाया जाता है।
  4. तापमान नियंत्रण: नवजात शिशु अपना तापमान स्वयं नियंत्रित नहीं कर सकता, इसलिए उसे कपड़े में लपेटकर रखना चाहिए और पंखे/कूलर की सीधी हवा से बचाना चाहिए।
  5. पहला स्नान: जन्म के तुरंत बाद स्नान नहीं कराना चाहिए; पहला स्नान 12 से 14 घंटे बाद गुनगुने पानी से कराना चाहिए।
  6. विटामिन K का इंजेक्शन: रक्तस्रावी बीमारियों से बचाव हेतु जन्म के बाद विटामिन K का इंजेक्शन लगाया जाता है।

3. अपगार स्कोरिंग (Apgar Scoring)

जन्म के 1 से 5 मिनट के भीतर शिशु की शारीरिक स्थिति जांचने के लिए अपगार स्कोरिंग की जाती है। इसके अंतर्गत 5 घटकों का मूल्यांकन किया जाता है:

  1. हृदय गति (Heart Rate)
  2. श्वसन का प्रयास (Respiration)
  3. मांसपेशियों की रंगत/ताकत (Muscle Tone)
  4. सहज क्रियाएं (Reflexes)
  5. त्वचा का रंग (Skin Color)

विषय 5: स्तनपान, कोलेस्ट्रम और पूरक आहार

1. स्तनपान (Breastfeeding)

शिशु के जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान प्रारंभ करा देना चाहिए। जन्म से 6 महीने तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए; पानी या अन्य कोई ठोस आहार नहीं देना चाहिए।

2. कोलेस्ट्रम (Colostrum) का महत्व

मां के प्रसव के बाद निकलने वाले पहले गाढ़े-पीले दूध को कोलेस्ट्रम कहते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में रोग प्रतिरोधक तत्व (एंटीबॉडीज) पाए जाते हैं।

  • यह शिशु को संक्रमण से बचाता है।
  • यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
  • यह मां और शिशु में भावनात्मक संबंध स्थापित करने में सहायता करता है।

3. पूरक आहार (Complementary Feeding)

6 माह की आयु पूरी होने के बाद शिशु को मां के दूध के साथ-साथ जो हल्का ठोस/अर्ध-ठोस आहार दिया जाता है, उसे पूरक आहार कहते हैं।

विषय 6: शिशु का टीकाकरण (Vaccination)

टीकाकरण शिशु के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और उसे जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखता है।

टीका (Vaccine)बचाव वाली बीमारीविशेष तथ्य / फुल फॉर्म
BCGक्षय रोग (टीबी / Tuberculosis)Bacille Calmette-Guérin
OPVपोलियो (Polio / पैरालिसिस)Oral Polio Vaccine
DPTडिप्थीरिया, पर्ट्यूसिस (काली खांसी) एवं टिटनेसतीन बीमारियों हेतु संयुक्त टीका
हेपेटाइटिस Bयकृत/लिवर का रोगलिवर संक्रमण से बचाव हेतु
खसरे का टीकाखसरा (Measles)खसरा बीमारी से सुरक्षा हेतु

विषय 7: शिशु मृत्यु के कारण और सरकारी योजनाएं

1. WHO के अनुसार शिशु मृत्यु के प्रमुख कारण

  • समय पूर्व जन्म (37 सप्ताह से पहले) तथा कम वजन (2 kg से कम)।
  • प्रसव के दौरान दम घुटना (Asphyxia)।
  • निमोनिया एवं जन्मजात शारीरिक विकृतियां।

2. प्रमुख सरकारी योजनाएं

  • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम: प्रसव एवं नवजात शिशु की मुफ्त देखभाल व इलाज हेतु।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: प्रसव पूर्व एवं प्रसव उत्तर उचित स्वास्थ्य व पोषण हेतु धात्री माताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना।

शब्दावली / Key Terms

  • मातृशिल्प: स्त्री द्वारा मातृत्व का गुण धारण करना और शिशु की देखभाल की कला।
  • परस्व (Parturition): शिशु को जन्म देने की प्रक्रिया।
  • प्रसुता: बच्चे को जन्म देने वाली मां।
  • परस्व उत्तर काल (Postnatal Period): प्रसव के बाद की अवधि (लगभग 6 सप्ताह)।
  • परस्व पूर्व काल (Prenatal Period): प्रसव से पूर्व का समय।
  • कोलेस्ट्रम: प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाला मां का पहला गाढ़ा-पीला दूध।
  • नवजात शिशु (Neonate): जन्म से 30 दिन तक का बच्चा।
  • अपगार स्कोरिंग: जन्म के 1-5 मिनट बाद शिशु की 5 शारीरिक क्रियाओं की जांच।
  • पूरक आहार: 6 माह के बाद शिशु को दिया जाने वाला अतिरिक्त पोषण।

अध्याय का सारांश

अध्याय 10 “मातृशिल्प और बाल विकास” बाल विकास के संपूर्ण सिद्धांतों और प्रसूति विज्ञान के मूलभूत पहलुओं को समझाता है। बाल विकास गर्भाशय से शुरू होकर जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। प्रसव के तीन चरण होते हैं और प्रसव के बाद का पहला 1 घंटा मां व बच्चे दोनों के लिए निर्णयकारी होता है। प्रसुता को सुपाच्य पौष्टिक आहार और पर्याप्त विश्राम की आवश्यकता होती है। नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद श्वास सफाई, अपगार मूल्यांकन, तापमान नियंत्रण और विटामिन K की आवश्यकता होती है। 6 महीने तक केवल मां का दूध (कोलेस्ट्रम सहित) ही सर्वोत्तम आहार है। इसके अतिरिक्त बीसीजी, ओपीवी और डीपीटी जैसे टीके शिशु को विभिन्न गंभीर रोगों से बचाते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision

  • गर्भावस्था की सामान्य अवधि: 40 सप्ताह।
  • निर्णायक समय: प्रसव के बाद का पहला 1 घंटा।
  • प्रसुता की मुख्य जांचें: बीपी, नब्ज, श्वास गति, रक्तस्राव।
  • नवजात शिशु की आयु सीमा: 0 से 30 दिन।
  • सामान्य जन्म वजन: 2.5 kg से 3.5 kg।
  • कमजोर शिशु का वजन: 2 kg से कम।
  • अपगार स्कोरिंग का समय: जन्म के 1 से 5 मिनट के भीतर।
  • पहला स्नान: 12 से 14 घंटे बाद।
  • केवल स्तनपान की अवधि: जन्म से 6 माह तक।
  • टीबी से बचाव का टीका: BCG।
  • तीन बीमारियों का टीका: DPT — डिप्थीरिया, पर्ट्यूसिस और टिटनेस।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: प्रसुता के लिए प्रसव के बाद का कौन सा समय अत्यधिक निर्णायक माना जाता है?

(A) प्रथम 12 घंटे
(B) पहला 1 घंटा
(C) प्रथम 24 घंटे
(D) पहला 1 सप्ताह

सही उत्तर: (B) पहला 1 घंटा

Explanation: प्रसुता और नवजात शिशु के लिए प्रसव के तुरंत बाद का पहला 1 घंटा अत्यधिक नाजुक और निर्णायक होता है।

प्रश्न 2: सामान्यतः गर्भावस्था की अवधि कितने सप्ताह की होती है?

(A) 30 सप्ताह
(B) 35 सप्ताह
(C) 40 सप्ताह
(D) 45 सप्ताह

सही उत्तर: (C) 40 सप्ताह

Explanation: सामान्यतः मानव गर्भावस्था की अवधि 40 सप्ताह मानी जाती है।

प्रश्न 3: नवजात शिशु की नाक और मुंह की सफाई हेतु किसका प्रयोग किया जाता है?

(A) नेजल पंप या सक्शन बल्ब
(B) सूखा रुई
(C) सूती कपड़ा
(D) ठंडा पानी

सही उत्तर: (A) नेजल पंप या सक्शन बल्ब

Explanation: जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु के श्वसन मार्ग को साफ करने के लिए नेजल पंप या सक्शन बल्ब का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 4: टीबी (क्षय रोग/Tuberculosis) से बचाव के लिए नवजात शिशु को कौन सा टीका लगाया जाता है?

(A) OPV
(B) DPT
(C) BCG
(D) हेपेटाइटिस B

सही उत्तर: (C) BCG

Explanation: टीबी से सुरक्षा प्रदान करने के लिए BCG का टीका लगाया जाता है।

प्रश्न 5: प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाले मां के पहले गाढ़े-पीले दूध को क्या कहते हैं?

(A) पूरक आहार
(B) कोलेस्ट्रम
(C) सेरम
(D) प्लाज्मा

सही उत्तर: (B) कोलेस्ट्रम

Explanation: मां के प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाले प्रथम गाढ़े-पीले दूध को कोलेस्ट्रम कहा जाता है, जो एंटीबॉडीज से भरपूर होता है।

प्रश्न 6: नवजात शिशु (Neonate) की आयु अवधि मानी जाती है:

(A) 0 से 6 माह
(B) 0 से 1 वर्ष
(C) जन्म से 30 दिन (1 माह)
(D) 0 से 15 दिन

सही उत्तर: (C) जन्म से 30 दिन (1 माह)

प्रश्न 7: अपगार स्कोरिंग (Apgar Scoring) परीक्षण जन्म के कितने समय बाद किया जाता है?

(A) 12 घंटे बाद
(B) 1 से 5 मिनट बाद
(C) 24 घंटे बाद
(D) 1 सप्ताह बाद

सही उत्तर: (B) 1 से 5 मिनट बाद

Explanation: शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसकी शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए अपगार स्कोरिंग की जाती है।

प्रश्न 8: नवजात शिशु का सामान्य जन्म वजन कितना माना जाता है?

(A) 1.5 kg से 2.0 kg
(B) 2.5 kg से 3.5 kg
(C) 4.0 kg से 5.0 kg
(D) 1.0 kg से 2.0 kg

सही उत्तर: (B) 2.5 kg से 3.5 kg

प्रश्न 9: DPT का टीका किन तीन रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है?

(A) डिप्थीरिया, पर्ट्यूसिस (काली खांसी), टिटनेस
(B) डायरिया, पोलियो, टिटनेस
(C) टीबी, पोलियो, खसरा
(D) हेपेटाइटिस, डिप्थीरिया, टिटनेस

सही उत्तर: (A) डिप्थीरिया, पर्ट्यूसिस (काली खांसी), टिटनेस

प्रश्न 10: नवजात शिशु में रक्तस्रावी बीमारी से बचाव हेतु कौन सा इंजेक्शन लगाया जाता है?

(A) विटामिन A
(B) विटामिन C
(C) विटामिन K
(D) विटामिन D

सही उत्तर: (C) विटामिन K

प्रश्न 11: WHO के अनुसार शिशु को कितने माह तक केवल स्तनपान कराना चाहिए?

(A) 3 माह
(B) 6 माह
(C) 9 माह
(D) 12 माह

सही उत्तर: (B) 6 माह

प्रश्न 12: 6 माह की आयु के बाद शिशु को दिए जाने वाले अतिरिक्त पोषाहार को क्या कहते हैं?

(A) प्राथमिक आहार
(B) पूरक आहार
(C) संपूर्ण आहार
(D) वसायुक्त आहार

सही उत्तर: (B) पूरक आहार

प्रश्न 13: नवजात शिशु को पहला स्नान जन्म के कितने घंटे बाद कराना चाहिए?

(A) तुरंत बाद
(B) 2 से 4 घंटे बाद
(C) 12 से 14 घंटे बाद
(D) 48 घंटे बाद

सही उत्तर: (C) 12 से 14 घंटे बाद

प्रश्न 14: प्रसुता में कुपोषण एवं रक्तस्राव के कारण कौन सा रोग होने की संभावना रहती है?

(A) टॉक्सिमिया
(B) रक्तअल्पता (एनीमिया)
(C) डिप्थीरिया
(D) निमोनिया

सही उत्तर: (B) रक्तअल्पता (एनीमिया)

प्रश्न 15: प्रसव (परस्व) की प्रक्रिया को मुख्य रूप से कितने चरणों में बांटा गया है?

(A) दो चरण
(B) तीन चरण
(C) चार चरण
(D) पांच चरण

सही उत्तर: (B) तीन चरण

प्रश्न 16: ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) किस रोग से बचाव हेतु दी जाती है?

(A) क्षय रोग
(B) पोलियो (पैरालिसिस)
(C) डिप्थीरिया
(D) हेपेटाइटिस

सही उत्तर: (B) पोलियो (पैरालिसिस)

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: मातृशिल्प से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: मातृशिल्प का अर्थ स्त्री द्वारा मां बनने के गुण, रूप और जिम्मेदारी को स्वीकार करना है। इसके अंतर्गत गर्भावस्था से लेकर प्रसव के बाद तक मां और शिशु की स्वास्थ्य देखभाल का प्रबंधन शामिल है।

प्रश्न 2: बाल विकास की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: बाल विकास वह निरंतर प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत बच्चे का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक तथा भाषाई विकास होता है। यह प्रक्रिया गर्भावस्था से शुरू होकर जीवन भर चलती है।

प्रश्न 3: प्रसुता किसे कहते हैं?

उत्तर: जो स्त्री प्रसव (परस्व) की प्रक्रिया द्वारा बच्चे को जन्म देती है, उसे प्रसुता कहा जाता है।

प्रश्न 4: अपगार स्कोरिंग क्या है और यह कब की जाती है?

उत्तर: अपगार स्कोरिंग नवजात शिशु की स्वास्थ्य स्थिति जांचने का एक प्राथमिक परीक्षण है। यह जन्म के 1 से 5 मिनट के भीतर शिशु की हृदय गति, श्वसन, मांसपेशियों की रंगत, सहज क्रियाओं और त्वचा के रंग का मूल्यांकन करने के लिए की जाती है।

प्रश्न 5: कोलेस्ट्रम किसे कहते हैं? इसके दो लाभ लिखिए।

उत्तर: प्रसव के तुरंत बाद निकलने वाले मां के पहले गाढ़े-पीले दूध को कोलेस्ट्रम कहते हैं।

  1. यह शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
  2. यह शिशु को विभिन्न संक्रमणों से सुरक्षित रखता है और पाचन में आसान होता है।

प्रश्न 6: पूरक आहार किसे कहते हैं?

उत्तर: शिशु की 6 माह की आयु पूरी होने के पश्चात मां के दूध के साथ-साथ जो सुपाच्य अर्ध-ठोस आहार दिया जाता है, उसे पूरक आहार कहते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: प्रसव (परस्व) के तीनों चरणों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए तथा प्रसुता की देखभाल के मुख्य बिंदु बताइए।

उत्तर: परस्व (प्रसव) बच्चे को जन्म देने की प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया गया है।

  1. प्रथम चरण: इस चरण में प्रसव पीड़ा प्रारंभ होती है और गर्भाशय ग्रीवा धीरे-धीरे फैलकर खुलना शुरू होती है ताकि शिशु बाहर आ सके।
  2. द्वितीय चरण: इस चरण में शिशु गर्भाशय ग्रीवा से होकर बाहर आता है अर्थात शिशु का जन्म संपन्न होता है।
  3. तृतीय चरण: शिशु के जन्म के पश्चात इस चरण में अपरा गर्भाशय से अलग होकर बाहर निकलती है और मां का शरीर सामान्य स्थिति में लौटने लगता है।

प्रसुता की तत्कालिक देखभाल:

  • निर्णायक घंटा: प्रसव के बाद का पहला 1 घंटा अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है।
  • स्वास्थ्य जांच: प्रसुता के रक्तचाप, नब्ज, श्वसन गति और रक्तस्राव की मात्रा को नियमित रिकॉर्ड करना चाहिए।
  • आहार व्यवस्था: प्रसुता को सुपाच्य और पौष्टिक भोजन जैसे खिचड़ी, दलिया, दूध, हरी सब्जियां, फल और दालें दी जानी चाहिए।
  • व्यायाम व विश्राम: 2-3 दिन बाद प्रसुता को हल्का टहलना चाहिए ताकि रक्त परिसंचरण सुचारू रहे और गर्भाशय जल्दी सामान्य स्थिति में आ सके।

प्रश्न 2: नवजात शिशु की प्राथमिक (तत्कालिक) देखभाल के कौन-कौन से चरण हैं? विस्तार से समझाइए।

उत्तर: जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु की विशेष देखभाल आवश्यक होती है।

  1. श्वसन प्रक्रिया प्रारंभ करना: शिशु जन्म के तुरंत बाद न रोए तो उसकी पीठ थपथपाकर श्वास प्रक्रिया शुरू कराई जाती है।
  2. नाक व मुंह की सफाई: नेजल पंप या सक्शन बल्ब की सहायता से शिशु के श्वसन मार्ग से तरल व कफ निकाला जाता है।
  3. नाभि नाल का काटना: नाभि नाल को बांधकर 5 से 7 सेमी दूरी पर काटा जाता है और उस पर आयोडीन एंटीसेप्टिक लगाया जाता है।
  4. अपगार स्कोरिंग: जन्म के 1 से 5 मिनट के भीतर हृदय गति, श्वास, मांसपेशियों की ताकत, सहज क्रियाओं व त्वचा के रंग की जांच की जाती है।
  5. तापमान नियंत्रण: नवजात शिशु को साफ गर्म कपड़े में लपेटकर रखा जाता है और पंखे/कूलर से दूर रखा जाता है।
  6. प्रथम स्नान: जन्म के तुरंत बाद नहलाना उचित नहीं है; पहला स्नान 12-14 घंटे बाद गुनगुने पानी से कराया जाता है।
  7. विटामिन K व टीकाकरण: रक्तस्रावी रोग से बचाव के लिए विटामिन K का इंजेक्शन दिया जाता है तथा बीसीजी व ओपीवी का टीका लगाया जाता है।

बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. परस्व (प्रसव) के बाद पहला घंटा क्यों निर्णायक माना जाता है?
  2. अपगार स्कोरिंग के पांच मुख्य घटक कौन-कौन से हैं?
  3. कोलेस्ट्रम क्या है और यह नवजात शिशु के लिए क्यों आवश्यक है?
  4. DPT तथा BCG के टीकों का पूरा नाम और उपयोग लिखिए।
  5. प्रसुता में होने वाले दो मुख्य रोगों (रक्तअल्पता व टॉक्सिमिया) के लक्षण और बचाव लिखिए।
  6. WHO के अनुसार शिशु मृत्यु के मुख्य कारण क्या हैं?
  7. जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points

  • बाल विकास: गर्भाशय से शुरू होकर जीवन भर चलने वाली निरंतर प्रक्रिया।
  • प्रसव अवधि: सामान्यतः 40 सप्ताह।
  • परस्व के चरण: 3 चरण — ग्रीवा का खुलना, शिशु जन्म, अपरा निष्कासन।
  • प्रसुता की स्थिति: अध-लिटाकर लगभग 45° पर रखना उचित।
  • नवजात शिशु का वजन: सामान्य वजन 2.5 kg से 3.5 kg।
  • मां का दूध: जन्म के 1 घंटे के भीतर शुरू करें; 6 महीने तक केवल स्तनपान।
  • बीसीजी (BCG): टीबी रोग से बचाव हेतु टीका।
  • डीपीटी (DPT): डिप्थीरिया, काली खांसी और टिटनेस हेतु टीका।
  • विटामिन K: नवजात में रक्तस्राव रोकने हेतु दिया जाने वाला इंजेक्शन।

अध्याय का निष्कर्ष

अध्याय 10 “मातृशिल्प और बाल विकास” यह स्पष्ट करता है कि सुरक्षित मातृत्व और वैज्ञानिक बाल विकास स्वस्थ समाज की नींव हैं। प्रसव के दौरान वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का पालन, प्रसुता की उचित देखभाल, समय पर स्तनपान (कोलेस्ट्रम) तथा संपूर्ण टीकाकरण शिशु स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। होम साइंस के विद्यार्थियों के लिए यह अध्ययन न केवल बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए भी उपयोगी है।