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Bihar Board Class 12 Home Science Chapter 6 – खाद्य पदार्थों में मिलावट

खाद्य पदार्थों में मिलावट (Food Adulteration) गृह विज्ञान कक्षा 12 का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, पोषण और उपभोक्ता अधिकारों के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी है। इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य खाद्य मिलावट का अर्थ, विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले अपमिश्रकों (Adulterants), उनसे उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संकटों, मिलावट की पहचान करने की विधियों, खाद्य सुरक्षा कानूनों तथा प्रमाणन चिन्हों की विस्तृत जानकारी प्रदान करना है।

Table of Contents

अध्याय परिचय

वर्तमान समय में बाजार में उपलब्ध विभिन्न दैनिक खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या महत्वपूर्ण है। खाद्य पदार्थों में मिलावट से उनकी प्राकृतिक शुद्धता, गुणवत्ता तथा पोषण स्तर प्रभावित हो सकता है। इसलिए एक जागरूक उपभोक्ता के लिए खाद्य पदार्थों की शुद्धता और सुरक्षा की पहचान करना आवश्यक है।

इस अध्याय में खाद्य मिलावट, अपमिश्रक, स्वास्थ्य पर प्रभाव, मिलावट की जाँच, FSSAI, PFA Act, Agmark, ISI, FPO तथा खाद्य लेबलिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।

अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview

  • खाद्य मिलावट का अर्थ एवं कारण: खाद्य पदार्थ की मात्रा या आर्थिक लाभ बढ़ाने के उद्देश्य से उसमें अवांछित या घटिया पदार्थ मिलाना तथा उसकी गुणवत्ता को प्रभावित करना।
  • दैनिक खाद्य पदार्थों में अपमिश्रक: दूध, घी, तेल, मसाले, अनाज, दालें, चाय-कॉफी, चीनी, मिठाई आदि में मिलाए जाने वाले विभिन्न पदार्थ।
  • मिलावट से स्वास्थ्य संकट: लेथायरिज्म, एपिडेमिक ड्रॉप्स, विषाक्तता तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ।
  • मिलावट की पहचान: दृश्य, भौतिक और रासायनिक परीक्षण।
  • खाद्य सुरक्षा नियम: PFA Act 1954 तथा FSSAI से संबंधित जानकारी।
  • गुणवत्ता प्रमाणन एवं लेबलिंग: Agmark, ISI, FPO तथा खाद्य पैकेट पर दी जाने वाली महत्वपूर्ण जानकारी।

मुख्य अवधारणाएँ

विषय 1: मिलावट का अर्थ और परिभाषा

मिलावट (Adulteration) से तात्पर्य किसी खाद्य पदार्थ की मात्रा या वजन बढ़ाने अथवा अधिक आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उसमें कोई अशुद्ध, सस्ता, अवांछनीय या हानिकारक बाहरी पदार्थ मिला देना अथवा उसमें से कोई पौष्टिक या मूल्यवान घटक निकाल लेना है।

मिलावट के परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थ की प्राकृतिक शुद्धता एवं गुणवत्ता का स्तर निम्न हो सकता है और इसके सेवन से उपभोक्ता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

कानूनी रूप से मिलावटी खाद्य पदार्थ के प्रमुख लक्षण

  1. खाद्य सामग्री अपने मूल व यथार्थ स्वरूप, प्राकृतिक गुण या रंग में न हो।
  2. उसमें कोई सस्ता, घटिया या हानिकारक बाहरी पदार्थ मिलाया गया हो।
  3. वस्तु से उसका महत्वपूर्ण या मूल्यवान अंश निकाल लिया गया हो।
  4. सरकार द्वारा प्रतिबंधित या वर्जित कृत्रिम रंग या रसायन मिलाए गए हों।
  5. परिरक्षण या सुरक्षा के लिए आवश्यकता से अधिक रासायनिक पदार्थों का प्रयोग किया गया हो।
  6. खाद्य सामग्री सड़ी-गली, कीड़े/घुन लगी या हानिकारक सूक्ष्मजीवों से दूषित हो।
  7. वस्तु का बाजार मूल्य उसकी वास्तविक गुणवत्ता के अनुरूप न हो।

मिलावट के मुख्य कारण

  • कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की प्रवृत्ति।
  • खाद्य सामग्री की माँग की तुलना में पूर्ति कम होना।
  • उपभोक्ताओं में जागरूकता एवं पहचान क्षमता की कमी।

विषय 2: प्रमुख खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले अपमिश्रक

खाद्य पदार्थप्रमुख अपमिश्रक
दूधपानी, स्टार्च, अरारोट, यूरिया, डिटर्जेंट आदि
शुद्ध देसी घीवनस्पति घी, पशु वसा, वैसलीन, मिनरल ऑयल आदि
सरसों का तेलआर्जीमोन बीज/तेल, मिनरल ऑयल आदि
अरहर व चने की दालखेसरी दाल, अरगट, कंकर-मिट्टी, कृत्रिम रंग आदि
काली मिर्चपपीते के बीज आदि
लाल मिर्च पाउडरलाल ईंट का चूर्ण, गेरू, लकड़ी का लाल बुरादा आदि
हल्दी पाउडरपीली मिट्टी, ईंट/मेट का चूर्ण, कृत्रिम रंग आदि
गेहूँ का आटा व मैदाचॉक पाउडर, पत्थर का चूर्ण, घटिया आटा आदि
चीनीसैकरीन, चॉक पाउडर आदि
चाय की पत्तीप्रयुक्त सूखी पत्तियाँ, लोहे का बुरादा, लकड़ी का बुरादा आदि
कॉफीचिकोरी का चूर्ण
पिसा धनियाचावल का भूसा, लकड़ी का बुरादा आदि
शहदचीनी की चाशनी, गुड़ की चाशनी
जीराजंगली घास के बीज, रेत/मिट्टी
केसररंगी हुई मूंज की कतरन, मक्के के रेशे
मिठाई व दही/रबड़ीमैटानिल येलो, अरारोट, आलू/चावल का आटा, सैकरीन आदि

विषय 3: मिलावटी खाद्य पदार्थों से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट

1. खेसरी दाल और लेथायरिज्म (Lathyrism)

कारण: खेसरी दाल को अरहर तथा चने की दाल में मिलाया जा सकता है। इसमें BOAA (Beta-N-Oxalyl-Amino-Alanine) नामक विषैला अमीनो एसिड पाया जाता है।

प्रभाव: लगातार अधिक मात्रा में खेसरी दाल के सेवन से लेथायरिज्म नामक रोग हो सकता है। इसमें घुटनों एवं जोड़ों में दर्द तथा अकड़न के बाद कमर से नीचे की टाँगों में लकवा होने जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

2. आर्जीमोन बीज और एपिडेमिक ड्रॉप्स

सरसों के तेल में आर्जीमोन के बीज या तेल की मिलावट स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। इसके सेवन से एपिडेमिक ड्रॉप्स जैसी बीमारी हो सकती है।

इसके प्रमुख लक्षणों में शरीर में सूजन, आँखों की समस्या, यकृत एवं गुर्दे से संबंधित समस्याएँ तथा गंभीर स्थिति में मृत्यु का खतरा शामिल है।

3. मैटानिल येलो और कृत्रिम रसायन

मैटानिल येलो का उपयोग खाद्य पदार्थों को आकर्षक पीला रंग देने के लिए अनधिकृत रूप से किया जा सकता है। इसे दालों, हल्दी तथा मिठाइयों जैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट के रूप में पाया जा सकता है। इसके सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

4. अन्य अपमिश्रकों के प्रभाव

  • मसालों में लकड़ी का बुरादा तथा ईंट का चूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • चाय की पत्ती में लोहे के बुरादे जैसी मिलावट स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
  • दूध में यूरिया या डिटर्जेंट जैसी मिलावट स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकती है।

विषय 4: खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच / परीक्षण विधियाँ

खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान के लिए मुख्य रूप से दृश्य, भौतिक एवं रासायनिक परीक्षण किए जाते हैं।

1. दृश्य परीक्षण विधि

नग्न आँखों से देखकर अपमिश्रक की पहचान करना दृश्य परीक्षण कहलाता है। उदाहरण के लिए काली मिर्च में अलग दिखाई देने वाले पपीते के बीज तथा अनाज या दालों में कंकड़-पत्थर को देखा जा सकता है।

2. भौतिक परीक्षण विधि

यह परीक्षण पदार्थों के घनत्व, घुलनशीलता एवं अन्य भौतिक गुणों पर आधारित होता है।

  • चावल में पत्थर: पानी में डालने पर भारी पत्थर नीचे बैठ जाते हैं।
  • काली मिर्च में पपीते के बीज: पानी में पपीते के बीज ऊपर तैर सकते हैं जबकि भारी काली मिर्च नीचे बैठ सकती है।
  • कॉफी में चिकोरी: पानी में चिकोरी के व्यवहार से मिलावट का अनुमान लगाया जा सकता है।
  • नमक में मिट्टी/कंकड़: पानी में नमक घुल जाता है जबकि मिट्टी और कंकड़ नीचे बैठ सकते हैं।
  • चाय पत्ती में लोहे का चूर्ण: चुंबक की सहायता से लोहे के कणों की पहचान की जा सकती है।

3. रासायनिक परीक्षण विधि

दूध/मक्खन में स्टार्च की जाँच – आयोडीन टेस्ट

प्रक्रिया: दूध या पिघले मक्खन के नमूने में आयोडीन के घोल की कुछ बूंदें मिलाई जाती हैं।

परिणाम: यदि नमूना नीला हो जाए तो स्टार्च/मांड की उपस्थिति का संकेत मिलता है।

दूध में पानी की जाँच – Lactometer Test

लैक्टोमीटर नामक यंत्र की सहायता से दूध के विशिष्ट घनत्व की जाँच की जाती है। दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार शुद्ध दूध का विशिष्ट घनत्व 1.030 से 1.034 के बीच बताया गया है।

दाल में मिलावट की जाँच – HCL Test

दाल के नमूने को पानी में भिगोकर उसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCL) डालकर रंग में परिवर्तन देखा जाता है। दिए गए स्रोत के अनुसार गहरा पीला अथवा गुलाबी-लाल रंग मिलावट का संकेत माना गया है।

घी में वनस्पति घी की जाँच

दिए गए परीक्षण में पिघले घी के नमूने के साथ HCL और चीनी के घोल का प्रयोग करके रंग परिवर्तन देखा जाता है। अम्ल की परत में गुलाबी या पीला रंग मिलावट का संकेत माना गया है।

सरसों तेल में मिलावट की जाँच

दिए गए स्रोत के अनुसार नाइट्रिक एसिड के प्रयोग द्वारा सरसों के तेल में आर्जीमोन या अन्य तेल की उपस्थिति की जाँच का उल्लेख किया गया है।

विषय 5: खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम तथा FSSAI

1. खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 (PFA Act 1954)

दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार यह अधिनियम 29 सितंबर 1954 को पारित हुआ तथा 1 जून 1955 से पूरे देश में लागू हुआ। इसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखना तथा मिलावट पर रोक लगाना था।

2. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)

FSSAI का पूरा नाम Food Safety and Standards Authority of India अर्थात भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण है। दिए गए स्रोत के अनुसार इसकी स्थापना Food Safety and Standards Act 2006 के अंतर्गत वर्ष 2008 में की गई।

यह भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित है और इसका केंद्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में बताया गया है।

FSSAI के मुख्य कार्य

  1. खाद्य मानकों का निर्धारण: खाद्य पदार्थों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता से संबंधित मानक निर्धारित करना।
  2. लाइसेंस एवं पंजीकरण: खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए लाइसेंस एवं पंजीकरण की व्यवस्था करना।
  3. निरीक्षण एवं सैंपल टेस्ट: खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी जाँच एवं नियामक कार्रवाई करना।
  4. जन-जागरूकता: उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा और मिलावट के प्रति जागरूक करना।

विषय 6: गुणवत्ता मानक चिन्ह एवं लेबलिंग

1. एगमार्क (Agmark)

Agmark कृषि आधारित उत्पादों की गुणवत्ता से संबंधित प्रमाणन व्यवस्था है। इसके अंतर्गत कृषि उत्पादों जैसे खाद्यान्न, घी, तेल, दालें, मसाले और शहद आदि से संबंधित गुणवत्ता मानकों की जानकारी मिलती है।

2. आईएसआई मार्क (ISI Mark)

ISI भारतीय मानकों से संबंधित चिन्ह है। यह विभिन्न निर्मित औद्योगिक एवं उपभोक्ता वस्तुओं की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित है। प्रेशर कुकर, विद्युत उपकरण और अन्य औद्योगिक उत्पाद इसके उदाहरण हैं।

3. एफपीओ मार्क (FPO Mark)

FPO का पूर्ण रूप Fruit Products Order है। दिए गए स्रोत के अनुसार यह फल एवं सब्जियों से बने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं स्वच्छता से संबंधित चिन्ह है। जैम, जेली, सॉस, केचप, अचार, शर्बत तथा फ्रूट जूस इसके उदाहरण हैं।

4. अन्य मानक चिन्ह

  • Hallmark: सोने और चाँदी के आभूषणों की शुद्धता से संबंधित।
  • Woolmark: ऊन एवं ऊनी वस्त्रों से संबंधित।

खाद्य पैकेट पर लेबल की महत्वपूर्ण जानकारी

  1. खाद्य पदार्थ का नाम एवं ब्रांड।
  2. सामग्री एवं घटकों की सूची।
  3. निर्माण तिथि तथा Best Before/Expiry से संबंधित जानकारी।
  4. निर्माता का नाम एवं पता।
  5. शुद्ध वजन एवं MRP।
  6. FSSAI लाइसेंस नंबर तथा लागू गुणवत्ता चिन्ह।
  7. भंडारण एवं प्रयोग संबंधी निर्देश।

विषय 7: मिलावट रोकने के व्यावहारिक उपाय

  • विश्वसनीय दुकानों से खाद्य सामग्री खरीदें।
  • सीलबंद और उचित लेबल वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें।
  • अत्यधिक सस्ते और बिना ब्रांड वाले संदिग्ध खाद्य पदार्थों से सावधान रहें।
  • पैकेट पर निर्माण तिथि, Best Before/Expiry तथा अन्य जानकारी जाँचें।
  • संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण को शिकायत करें।

शब्दावली / Key Terms

  • खाद्य मिलावट (Food Adulteration): खाद्य पदार्थ में अवांछित, घटिया या हानिकारक पदार्थ मिलाना अथवा मूल्यवान घटक निकाल लेना।
  • अपमिश्रक (Adulterant): वह बाहरी पदार्थ जो खाद्य सामग्री में मिलाया जाता है।
  • लेथायरिज्म (Lathyrism): खेसरी दाल से संबंधित गंभीर पोषण-विषाक्तता की स्थिति, जिसमें लकवा हो सकता है।
  • एपिडेमिक ड्रॉप्स: आर्जीमोन से दूषित सरसों के तेल के सेवन से जुड़ी बीमारी।
  • FSSAI: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण।
  • Agmark: कृषि उत्पादों की गुणवत्ता से संबंधित प्रमाणन व्यवस्था।
  • FPO: फल एवं सब्जी आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों से संबंधित मानक व्यवस्था।
  • Lactometer: दूध के घनत्व की जाँच करने वाला यंत्र।

अध्याय का सारांश

  • खाद्य पदार्थों में मिलावट से उनकी गुणवत्ता एवं शुद्धता प्रभावित हो सकती है।
  • दूध में पानी और स्टार्च, घी में वनस्पति घी, सरसों तेल में आर्जीमोन तथा दालों में खेसरी दाल जैसे अपमिश्रकों का उल्लेख इस अध्याय में किया गया है।
  • खेसरी दाल से लेथायरिज्म तथा आर्जीमोन से एपिडेमिक ड्रॉप्स जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का संबंध बताया गया है।
  • मिलावट की पहचान दृश्य, भौतिक एवं रासायनिक परीक्षणों से की जा सकती है।
  • PFA Act 1954 तथा Food Safety and Standards Act 2006 से संबंधित जानकारी खाद्य सुरक्षा के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
  • FSSAI खाद्य सुरक्षा एवं मानकों से संबंधित प्रमुख प्राधिकरण है।
  • Agmark, FPO और ISI जैसे चिन्ह उपभोक्ताओं को गुणवत्ता संबंधी जानकारी समझने में सहायता करते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision

  • PFA Act 1954: 29 सितंबर 1954 को पारित और दिए गए स्रोत के अनुसार 1 जून 1955 से लागू।
  • FSSAI: Food Safety and Standards Authority of India।
  • FSSAI Act: Food Safety and Standards Act 2006।
  • FSSAI स्थापना: दिए गए स्रोत के अनुसार वर्ष 2008।
  • FSSAI मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • खेसरी दाल का विषैला तत्व: BOAA।
  • खेसरी दाल से संबंधित रोग: लेथायरिज्म।
  • आर्जीमोन युक्त सरसों तेल: एपिडेमिक ड्रॉप्स से संबंधित।
  • दूध में स्टार्च: आयोडीन परीक्षण।
  • दूध का घनत्व: लैक्टोमीटर से जाँच।
  • Agmark: कृषि उत्पाद।
  • FPO: फल एवं सब्जी आधारित प्रसंस्कृत उत्पाद।
  • ISI: निर्मित औद्योगिक एवं उपभोक्ता वस्तुओं से संबंधित।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: आहारीय मिलावट का मुख्य अर्थ क्या है?

(A) खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का स्तर निम्न होना
(B) खाद्य पदार्थों का विषैला हो जाना
(C) खाद्य पदार्थों का दूषित हो जाना
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

सही उत्तर: (A) खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का स्तर निम्न होना

Explanation: मिलावट से खाद्य पदार्थ की प्राकृतिक गुणवत्ता और शुद्धता प्रभावित होती है तथा स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

प्रश्न 2: भारत में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (PFA Act) कब लागू हुआ था?

(A) 29 सितंबर 1954
(B) 1 जून 1955
(C) 15 अगस्त 1947
(D) 26 जनवरी 1950

सही उत्तर: (B) 1 जून 1955

Explanation: दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार अधिनियम 29 सितंबर 1954 को पारित हुआ और 1 जून 1955 से लागू हुआ।

प्रश्न 3: खेसरी दाल के अधिक सेवन से कौन सा गंभीर रोग हो सकता है?

(A) एपिडेमिक ड्रॉप्स
(B) लेथायरिज्म (पैरालाइसिस/लकवा)
(C) घेंघा रोग
(D) कैंसर

सही उत्तर: (B) लेथायरिज्म (पैरालाइसिस/लकवा)

Explanation: खेसरी दाल में BOAA नामक विषैला घटक पाया जाता है, जिसके सेवन से लेथायरिज्म जैसी गंभीर स्थिति हो सकती है।

प्रश्न 4: काली मिर्च में सामान्यतः किस अपमिश्रक की मिलावट की जाती है?

(A) सरसों के बीज
(B) पपीते के बीज
(C) लोहे का बुरादा
(D) अरारोट

सही उत्तर: (B) पपीते के बीज

Explanation: दिए गए स्रोत के अनुसार काली मिर्च में पपीते के बीज मिलावट के रूप में पाए जा सकते हैं।

प्रश्न 5: सरसों के तेल में आर्जीमोन बीजों की मिलावट से कौन सी बीमारी होती है?

(A) लेथायरिज्म
(B) एपिडेमिक ड्रॉप्स
(C) एनीमिया
(D) घेंघा

सही उत्तर: (B) एपिडेमिक ड्रॉप्स

Explanation: आर्जीमोन युक्त सरसों के तेल के सेवन को एपिडेमिक ड्रॉप्स से जोड़ा जाता है।

प्रश्न 6: दूध में स्टार्च की मिलावट का पता लगाने के लिए किस रसायन का उपयोग किया जाता है?

(A) आयोडीन का घोल
(B) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(C) सल्फर घोल
(D) ब्रोमैथिल ब्लू

सही उत्तर: (A) आयोडीन का घोल

Explanation: दूध के नमूने में आयोडीन डालने पर नीला रंग दिखाई देना स्टार्च की उपस्थिति का संकेत माना जाता है।

प्रश्न 7: कृषि उत्पादों की गुणवत्ता दर्शाने वाला प्रमुख सरकारी चिन्ह कौन सा है?

(A) ISI Mark
(B) Agmark
(C) FPO Mark
(D) Hallmark

सही उत्तर: (B) Agmark

Explanation: Agmark कृषि आधारित उत्पादों की गुणवत्ता से संबंधित प्रमाणन व्यवस्था है।

प्रश्न 8: फल एवं सब्जियों से बने प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए कौन सा मार्क संबंधित है?

(A) FPO Mark
(B) Agmark
(C) Woolmark
(D) ISI Mark

सही उत्तर: (A) FPO Mark

Explanation: FPO का संबंध फल एवं सब्जियों से बने प्रसंस्कृत उत्पादों से बताया गया है।

प्रश्न 9: दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार FSSAI की स्थापना किस वर्ष की गई थी और इसका मुख्यालय कहाँ है?

(A) 1954, मुंबई
(B) 2008, नई दिल्ली
(C) 2006, कोलकाता
(D) 2010, चेन्नई

सही उत्तर: (B) 2008, नई दिल्ली

Explanation: दिए गए स्रोत के अनुसार FSSAI की स्थापना Food Safety and Standards Act 2006 के अंतर्गत वर्ष 2008 में हुई तथा मुख्यालय नई दिल्ली में है।

प्रश्न 10: दूध की शुद्धता एवं उसमें पानी की मात्रा की जाँच के लिए किस यंत्र का उपयोग किया जाता है?

(A) थर्मामीटर
(B) लैक्टोमीटर
(C) बैरोमीटर
(D) स्पीडोमीटर

सही उत्तर: (B) लैक्टोमीटर

Explanation: लैक्टोमीटर द्वारा दूध के विशिष्ट घनत्व की जाँच की जाती है।

प्रश्न 11: पिसी हुई लाल मिर्च में सामान्यतः किस अपमिश्रक का उल्लेख किया गया है?

(A) पीली मिट्टी
(B) लाल ईंट का चूर्ण या गेरू
(C) चॉक का पाउडर
(D) पपीते के बीज

सही उत्तर: (B) लाल ईंट का चूर्ण या गेरू

Explanation: दिए गए स्रोत के अनुसार लाल मिर्च पाउडर में लाल ईंट का बारीक चूर्ण, गेरू तथा अन्य लाल पदार्थ मिलाए जा सकते हैं।

प्रश्न 12: चीनी में अत्यधिक मिठास के लिए किस पदार्थ की मिलावट का उल्लेख किया गया है?

(A) यूरिया
(B) सैकरीन
(C) अरारोट
(D) स्टेरीन

सही उत्तर: (B) सैकरीन

Explanation: दिए गए अध्ययन स्रोत में सैकरीन को चीनी में मिलावट के रूप में उल्लेखित किया गया है।

प्रश्न 13: FSSAI भारत सरकार के किस मंत्रालय से संबंधित है?

(A) कृषि मंत्रालय
(B) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
(C) गृह मंत्रालय
(D) उपभोक्ता मामले मंत्रालय

सही उत्तर: (B) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

Explanation: दिए गए स्रोत के अनुसार FSSAI स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित है।

प्रश्न 14: चाय की पत्ती में लोहे के चूर्ण की पहचान किस वस्तु से की जा सकती है?

(A) चुंबक
(B) पानी का घोल
(C) चूना
(D) तेल

सही उत्तर: (A) चुंबक

Explanation: लोहे के कण चुंबक से आकर्षित होते हैं, इसलिए चुंबक की सहायता से उनकी पहचान की जा सकती है।

प्रश्न 15: सोने और चाँदी के आभूषणों की शुद्धता से संबंधित मानक चिन्ह कौन सा है?

(A) Agmark
(B) Hallmark
(C) FPO
(D) ISI

सही उत्तर: (B) Hallmark

Explanation: Hallmark सोने और चाँदी के आभूषणों की शुद्धता से संबंधित प्रमाणन चिन्ह है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: मिलावट (Adulteration) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: खाद्य पदार्थ में अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से कोई अशुद्ध, सस्ता या हानिकारक बाहरी पदार्थ मिला देना अथवा उसमें से कोई मूल्यवान या पौष्टिक तत्व निकाल लेना मिलावट कहलाता है।

प्रश्न 2: FSSAI का पूरा नाम लिखें तथा इसके दो मुख्य कार्य बताएँ।

उत्तर: FSSAI का पूरा नाम Food Safety and Standards Authority of India है।

  1. खाद्य पदार्थों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता के लिए मानक निर्धारित करना।
  2. खाद्य व्यवसायों के लिए लाइसेंस एवं पंजीकरण की व्यवस्था करना।

प्रश्न 3: लेथायरिज्म रोग किस कारण होता है और इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?

उत्तर: दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार खेसरी दाल में उपस्थित BOAA नामक विषैले घटक के निरंतर सेवन से लेथायरिज्म रोग हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में घुटनों एवं जोड़ों में अकड़न तथा कमर से नीचे की टाँगों में लकवा जैसी स्थिति शामिल है।

प्रश्न 4: एपिडेमिक ड्रॉप्स बीमारी का कारण तथा इसके लक्षण लिखें।

उत्तर: सरसों के तेल में आर्जीमोन के बीजों या तेल की मिलावट इसके प्रमुख कारणों में बताई गई है। इसके लक्षणों में शरीर में सूजन, आँखों से संबंधित समस्याएँ तथा गंभीर स्थिति में अन्य अंगों पर प्रभाव शामिल हो सकते हैं।

प्रश्न 5: दूध में पानी तथा स्टार्च की मिलावट की पहचान कैसे की जाती है?

मिलावटजाँच विधि
पानीलैक्टोमीटर द्वारा दूध के घनत्व की जाँच।
स्टार्चआयोडीन घोल डालने पर नीला रंग दिखाई देना स्टार्च की उपस्थिति का संकेत माना जाता है।

प्रश्न 6: Agmark तथा FPO में क्या अंतर है?

आधारAgmarkFPO
संबंधकृषि आधारित उत्पादफल एवं सब्जी आधारित प्रसंस्कृत उत्पाद
उदाहरणअनाज, घी, तेल, दाल, मसाले, शहदजैम, जेली, सॉस, अचार, शर्बत

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: मिलावटी खाद्य पदार्थ से आप क्या समझते हैं? खाद्य पदार्थों में मिलावट से उत्पन्न स्वास्थ्य संकटों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: वह खाद्य पदार्थ मिलावटी माना जाता है जिसमें कोई घटिया, अशुद्ध या अवांछित बाहरी पदार्थ मिला दिया गया हो अथवा उसके मूल्यवान घटक को निकाल लिया गया हो।

1. लेथायरिज्म

  • कारण: खेसरी दाल का अत्यधिक सेवन।
  • विषैला तत्व: BOAA।
  • प्रभाव: घुटनों एवं जोड़ों में अकड़न तथा कमर से नीचे की टाँगों में लकवा जैसी स्थिति।

2. एपिडेमिक ड्रॉप्स

  • कारण: आर्जीमोन मिले सरसों के तेल का सेवन।
  • प्रभाव: शरीर में सूजन तथा अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ।

3. मैटानिल येलो एवं कृत्रिम रंग

दिए गए स्रोत में मैटानिल येलो को दालों, हल्दी तथा मिठाइयों में अनधिकृत रंग के रूप में वर्णित किया गया है और इसके सेवन को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है।

4. पाचन संबंधी समस्याएँ

आटा तथा मसालों में पत्थर, चॉक, ईंट या लकड़ी के चूर्ण जैसी मिलावट खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

प्रश्न 2: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के गठन, उद्देश्यों तथा मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: दिए गए अध्ययन स्रोत के अनुसार भारत में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा एवं मानकों के लिए Food Safety and Standards Act 2006 के अंतर्गत वर्ष 2008 में FSSAI की स्थापना की गई। इसका संबंध स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से बताया गया है तथा मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

FSSAI के मुख्य कार्य

  1. खाद्य मानकों का निर्धारण: विभिन्न खाद्य पदार्थों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता से संबंधित मानक निर्धारित करना।
  2. खाद्य व्यवसाय लाइसेंसिंग: खाद्य व्यवसाय संचालकों के लिए लाइसेंस एवं पंजीकरण की व्यवस्था करना।
  3. निरीक्षण एवं परीक्षण: खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण एवं नियामक कार्रवाई करना।
  4. उपभोक्ता जागरूकता: जनता को खाद्य सुरक्षा और मिलावट के प्रति जागरूक करना।

बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. आहारीय मिलावट से क्या तात्पर्य है? इसके दो मुख्य कारण लिखिए।
  2. PFA Act 1954 कब पारित हुआ तथा यह पूरे देश में किस तिथि से लागू किया गया?
  3. खेसरी दाल में कौन सा विषैला तत्व पाया जाता है? इसके सेवन से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
  4. एपिडेमिक ड्रॉप्स रोग किस अपमिश्रक के कारण होता है? इसके प्रमुख लक्षण बताएँ।
  5. सरसों तेल, काली मिर्च, हल्दी, दूध और चाय पत्ती में मिलाए जाने वाले अपमिश्रकों के नाम लिखिए।
  6. घरेलू स्तर पर दूध में पानी तथा स्टार्च की जाँच किस प्रकार की जाती है?
  7. Agmark, ISI तथा FPO चिन्हों का विस्तृत विवरण दीजिए।
  8. किसी खाद्य डिब्बे पर लगे लेबल से उपभोक्ता को क्या-क्या जानकारी मिलती है?
  9. FSSAI के चार मुख्य कार्यों का उल्लेख कीजिए।
  10. एक जागरूक उपभोक्ता के रूप में मिलावट से बचने के लिए क्या-क्या उपाय करेंगे?

अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points

  • मिलावट: खाद्य पदार्थ की प्राकृतिक गुणवत्ता एवं शुद्धता को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया।
  • PFA Act 1954: दिए गए स्रोत के अनुसार 29 सितंबर 1954 को पारित और 1 जून 1955 से लागू।
  • FSSAI: Food Safety and Standards Authority of India।
  • FSSAI Act: Food Safety and Standards Act 2006।
  • FSSAI स्थापना: दिए गए स्रोत के अनुसार 2008।
  • FSSAI मुख्यालय: नई दिल्ली।
  • खेसरी दाल: BOAA → लेथायरिज्म।
  • आर्जीमोन: सरसों तेल में मिलावट → एपिडेमिक ड्रॉप्स।
  • मैटानिल येलो: खाद्य पदार्थों में अनधिकृत कृत्रिम रंग के रूप में उल्लेखित।
  • आयोडीन परीक्षण: दूध/मक्खन में स्टार्च की जाँच।
  • लैक्टोमीटर: दूध के घनत्व की जाँच।
  • Agmark: कृषि उत्पाद।
  • FPO: फल एवं सब्जी आधारित प्रसंस्कृत उत्पाद।
  • ISI: औद्योगिक एवं निर्मित उपभोक्ता वस्तुएँ।

अध्याय का निष्कर्ष

कक्षा 12 गृह विज्ञान अध्याय 6 – खाद्य पदार्थों में मिलावट हमें खाद्य पदार्थों की शुद्धता, सुरक्षा और गुणवत्ता के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता समझाता है। खाद्य मिलावट से न केवल खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि कुछ प्रकार की मिलावट स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी पैदा कर सकती है।

एक जागरूक उपभोक्ता के रूप में खाद्य पदार्थ खरीदते समय लेबल, निर्माण तिथि, Best Before/Expiry, MRP, FSSAI संबंधी जानकारी तथा लागू गुणवत्ता चिन्हों पर ध्यान देना आवश्यक है। साथ ही मिलावट की सामान्य पहचान विधियों की जानकारी भी उपयोगी है।

बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से विद्यार्थियों को मिलावट की परिभाषा, प्रमुख अपमिश्रक, लेथायरिज्म, एपिडेमिक ड्रॉप्स, परीक्षण विधियाँ, PFA Act, FSSAI, Agmark, ISI, FPO और खाद्य लेबलिंग से संबंधित प्रश्नों का विशेष रूप से अभ्यास करना चाहिए।