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Bihar Board Class 12 Home Science Chapter 5 – खाद्य एवं पोषण

खाद्य एवं पोषण (Food and Nutrition) गृह विज्ञान विषय का एक अत्यधिक महत्वपूर्ण, व्यावहारिक और परीक्षा-उपयोगी अध्याय है। यह अध्याय मनुष्य के दैनिक जीवन, आहार प्रणालियों, शरीर विज्ञान तथा उत्तम स्वास्थ्य को बनाए रखने के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया, भोजन के प्रमुख घटकों, संतुलित आहार की संरचना, विभिन्न आयु वर्गों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं, आहार आयोजन, खाद्य संरक्षण तथा पोषण जनित विकारों का ज्ञान प्रदान करना है।

Table of Contents

अध्याय परिचय

गृह विज्ञान के अंतर्गत खाद्य एवं पोषण एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक अध्याय है। भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर की वृद्धि, विकास, ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति तथा रोगों से सुरक्षा का प्रमुख आधार है।

इस अध्याय में पोषण की प्रक्रिया, पोषक तत्व, संतुलित आहार, आहार आयोजन, विभिन्न आयु वर्गों की पोषण आवश्यकताएँ, कुपोषण, भोजन पकाने की विधियाँ तथा खाद्य संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है।

अध्याय का संक्षिप्त परिचय / Overview

खाद्य एवं पोषण अध्याय केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत एवं पारिवारिक स्वास्थ्य प्रबंधन का व्यावहारिक मार्गदर्शक है। इस अध्याय में भोजन और स्वास्थ्य के बीच संबंध, पोषक तत्वों के कार्य, संतुलित आहार तथा भोजन की उचित योजना के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है।

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से भी यह अध्याय महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें से बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs), अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

मुख्य अवधारणाएँ

  1. पोषण (Nutrition): भोजन ग्रहण करने, उसके पाचन, अवशोषण तथा शरीर द्वारा उसके उपयोग की संपूर्ण जैविक प्रक्रिया।
  2. पोषक तत्व (Nutrients): भोजन में पाए जाने वाले वे रासायनिक घटक जो शरीर को ऊर्जा देते हैं, वृद्धि करते हैं और बीमारियों से बचाने में सहायता करते हैं।
  3. संतुलित आहार (Balanced Diet): ऐसा आहार जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्व उचित मात्रा एवं अनुपात में मौजूद हों।
  4. आहार आयोजन (Meal / Diet Planning): भोजन पकाने और परोसने से पूर्व परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई पूर्व-योजना।
  5. खाद्य संरक्षण (Food Preservation): भोजन को भविष्य के लिए बिना खराब हुए लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीक।
  6. कुपोषण (Malnutrition): आहार में पोषक तत्वों की कमी, अधिकता या असंतुलन से उत्पन्न शारीरिक विकार।

विस्तृत विषय-वार व्याख्या

विषय 1: पोषण (Nutrition) एवं इसकी जैविक प्रक्रिया

पोषण वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई जीव भोज्य पदार्थों को ग्रहण करता है, उसका पाचन करता है, पोषक तत्वों का अवशोषण करता है और उनका उपयोग शरीर की वृद्धि, विकास, कोशिकाओं की मरम्मत तथा ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है।

पोषण की प्रक्रिया के चार मुख्य चरण:

  1. भोजन ग्रहण करना (Ingestion): मुख द्वारा खाद्य पदार्थों को शरीर के भीतर लेना।
  2. भोजन का पाचन (Digestion): जटिल एवं अघुलनशील खाद्य पदार्थों को सरल व घुलनशील घटकों में तोड़ना।
  3. पोषक तत्वों का अवशोषण (Absorption): पाचित भोजन से पोषक तत्वों को शरीर द्वारा ग्रहण करना।
  4. वृद्धि एवं विकास (Growth & Development): अवशोषित पोषक तत्वों के माध्यम से शरीर की नई कोशिकाओं का निर्माण एवं शारीरिक वृद्धि करना।

विषय 2: आहार आयोजन (Meal / Diet Planning)

आहार आयोजन से तात्पर्य भोजन तैयार करने व पकाने से पूर्व सोची-समझी योजना या सूची तैयार करने से है।

आहार आयोजन का महत्व एवं लाभ

  • संतुलित आहार की सुनिश्चितता: इससे परिवार के प्रत्येक सदस्य को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं।
  • समय, ऊर्जा और धन की बचत: पूर्व योजना से बाजार से केवल आवश्यक सामग्री खरीदी जाती है तथा अनावश्यक व्यय व समय की बर्बादी रुकती है।
  • भोजन में विविधता (Variety): बार-बार एक ही प्रकार का भोजन खाने की बोरियत दूर होती है तथा आहार में स्वाद व रुचि बनी रहती है।
  • स्वास्थ्य एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार: सही पोषण शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता करता है।
  • भोजन पकाने में सुगमता: मेन्यू तय रहने से रसोई का कार्य व्यवस्थित रहता है।

आहार आयोजन के मुख्य सिद्धांत

  1. आयु, लिंग व कार्यप्रकृति के अनुसार आयोजन: बच्चों, युवाओं, वयस्कों तथा वृद्धों की पोषण आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं।
  2. मौसमी व स्थानीय खाद्य पदार्थों का चयन: स्थानीय एवं मौसमी सब्जियाँ व फल सामान्यतः ताजे और आसानी से उपलब्ध होते हैं।
  3. पारिवारिक बजट का ध्यान: कम लागत में पौष्टिक विकल्प जैसे दाल, चना, गुड़, मूंगफली आदि का चुनाव किया जा सकता है।

विषय 3: संतुलित आहार (Balanced Diet)

संतुलित आहार वह भोजन है जिसमें व्यक्ति की आयु, लिंग, कार्यप्रकृति तथा स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा और सही अनुपात में उपस्थित होते हैं।

संतुलित आहार की मुख्य विशेषताएँ

  • यह शरीर की ऊर्जा आवश्यकता को पूर्ण करता है।
  • यह शरीर की वृद्धि, कोशिकाओं के विभाजन व मरम्मत में सहायक है।
  • यह शरीर की रोगों से रक्षा करने में सहायता करता है।
  • शिशु अवस्था में माँ का दूध शिशु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पोषण स्रोत है।

विषय 4: खाद्य पदार्थों के मुख्य घटक / पोषक तत्व (Nutrients)

खाद्य पदार्थों में मुख्य रूप से आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनके प्रमुख कार्य ऊर्जा प्रदान करना, शरीर का निर्माण एवं मरम्मत करना तथा शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करना है।

पोषक तत्वमुख्य कार्य1 ग्राम से ऊर्जामुख्य स्रोतकमी से प्रभाव
कार्बोहाइड्रेटमुख्य एवं शीघ्र ऊर्जा प्रदान करना4 कैलोरीगेहूं, चावल, आलू, शकरकंद, मक्का, चीनी, गुड़कमजोरी, ऊर्जा की कमी, वजन घटना
वसा (Fat)ऊर्जा का संचित भंडार तथा शरीर का तापमान बनाए रखने में सहायता9 कैलोरीसरसों तेल, घी, मक्खन, सोयाबीन, मूंगफली, तिलकमी से त्वचा में सूखापन; अधिकता से मोटापा
प्रोटीनकोशिका निर्माण, शारीरिक वृद्धि तथा ऊतकों की मरम्मत4 कैलोरीदालें, सोयाबीन, अंडा, दूध, मांस, मछलीकवाशयकोर, मरस्मस, वृद्धि रुकना
विटामिनरोगों से रक्षा तथा शारीरिक क्रियाओं का नियमनऊर्जा नहीं देताफल, हरी सब्जियाँ, दूध आदिरतौंधी, स्कर्वी आदि
खनिज लवणहड्डियों, दाँतों व रक्त के निर्माण तथा शारीरिक क्रियाओं में सहायताऊर्जा नहीं देतादूध, पालक, नमक, अंडा, गुड़एनीमिया, घेंघा आदि
जल (Water)तापमान नियंत्रण, अपशिष्ट निष्कासन और पाचन में सहायताऊर्जा नहीं देतापेयजल, फल, सब्जियाँ, दूधनिर्जलीकरण, पाचन संबंधी विकार
रेशा (Fiber)आंतों की सफाई तथा कब्ज निवारणऊर्जा नहीं देताफल, सब्जियाँ, छिलके वाली दालें, साबुत अनाजकब्ज, अपच, आंतों की समस्या

विटामिन्स का वर्गीकरण

विटामिनों को मुख्य रूप से दो वर्गों में बाँटा जाता है:

  • जल में घुलनशील विटामिन: विटामिन B और C।
  • वसा में घुलनशील विटामिन: विटामिन A, D, E और K।

प्रमुख विटामिन्स एवं खनिज लवण

  • विटामिन A: गाजर, पालक, आम और दूध इसके प्रमुख स्रोत हैं। इसकी कमी से रतौंधी (Night Blindness) तथा आँखों में सूखापन हो सकता है।
  • विटामिन B1: इसकी कमी से बेरीबेरी रोग हो सकता है।
  • विटामिन B3: नियासिन की कमी से पेलाग्रा हो सकता है।
  • विटामिन C: नींबू, संतरा, आंवला और अमरूद इसके प्रमुख स्रोत हैं। इसकी कमी से स्कर्वी रोग होता है।
  • विटामिन D: सूर्य का प्रकाश, दूध तथा मछली का तेल इसके स्रोत हैं। इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स तथा वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया हो सकता है।
  • विटामिन E: शरीर की सामान्य जैविक क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • विटामिन K: रक्त का थक्का बनाने में सहायक होता है।
  • आयरन (लोहा): पालक, गुड़, चुकंदर आदि इसके स्रोत हैं। इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है।
  • आयोडीन: आयोडीन युक्त नमक इसका प्रमुख स्रोत है। इसकी कमी से गॉइटर / घेंघा रोग हो सकता है।
  • कैल्शियम: दूध, दही, पनीर और हरी पत्तेदार सब्जियाँ इसके स्रोत हैं। इसकी कमी से हड्डियाँ और दाँत कमजोर हो सकते हैं।
  • जिंक: इसकी कमी से बाल झड़ना, त्वचा में सूखापन तथा दृष्टि संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।

विषय 5: विभिन्न आयु वर्गों के लिए पोषण की आवश्यकताएँ

  1. शिशु अवस्था (0 से 6 माह): इस अवस्था में माँ का दूध शिशु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आहार है। प्रसव के बाद निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध कोलेस्ट्रम कहलाता है।
  2. शिशु अवस्था (6 माह से 1 वर्ष): 6 माह के पश्चात माँ के दूध के साथ सुपाच्य पूरक आहार जैसे खिचड़ी, मसली हुई सब्जियाँ आदि दी जाती हैं।
  3. बाल्यावस्था (1 से 12 वर्ष): इस काल में शारीरिक वृद्धि व कोशिका निर्माण तीव्र गति से होता है, अतः आहार में प्रोटीन, कैल्शियम और ऊर्जा की आवश्यकता अधिक होती है।
  4. किशोरावस्था (13 से 19 वर्ष): इस अवस्था में तीव्र शारीरिक, मानसिक व हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। किशोरियों को आयरन तथा किशोरों को प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन्स की पर्याप्त आवश्यकता होती है। एक स्वस्थ किशोर लड़की के लिए प्रतिदिन लगभग 2200 कैलोरी ऊर्जा का उदाहरण दिया गया है।
  5. वयस्कता (19+ वर्ष): पोषण की आवश्यकता व्यक्ति के कार्य के स्वरूप पर निर्भर करती है। भारी शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है।

विषय 6: पोषण संबंधी समस्याएँ (Nutritional Problems)

  1. अल्पपोषण (Under-nutrition): भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होना, जिससे शरीर कमजोर हो सकता है और शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है।
  2. कुपोषण (Malnutrition): पोषक तत्वों की कमी, अधिकता या असंतुलन से उत्पन्न पोषण संबंधी स्थिति।
  3. अतिपोषण (Over-nutrition) व मोटापा (Obesity): आवश्यकता से अधिक ऊर्जा ग्रहण करना तथा शारीरिक गतिविधि की कमी मोटापे जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।
  4. प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण (PEM): भोजन में प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की कमी से होने वाला गंभीर पोषण विकार। इसके दो प्रमुख रूप हैं:
    • कवाशयकोर (Kwashiorkor): मुख्य रूप से प्रोटीन की कमी से बच्चों में होने वाला पोषण विकार।
    • मरस्मस (Marasmus): प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की गंभीर कमी से होने वाला पोषण विकार।

विषय 7: खाद्य चयन को प्रभावित करने वाले कारक

  1. आर्थिक स्थिति व आय: व्यक्ति की क्रय क्षमता के अनुसार भोजन का चुनाव प्रभावित होता है।
  2. परिवार का आकार व संरचना: बड़े परिवारों में भोजन की मात्रा और लागत महत्वपूर्ण कारक होते हैं।
  3. परंपरा एवं संस्कृति: क्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक खान-पान की आदतें भोजन के चयन को प्रभावित करती हैं।
  4. स्वास्थ्य स्थिति: बीमार व्यक्ति या बच्चों के लिए विशेष प्रकार का आहार आवश्यक हो सकता है।
  5. मौसमी उपलब्धता: ऋतु के अनुसार फल एवं सब्जियों की उपलब्धता भोजन चयन को प्रभावित करती है।

विषय 8: भोजन पकाने की विधियाँ एवं पौष्टिक तत्वों की सुरक्षा

भोजन पकाने की मुख्य विधियाँ

  1. उबालना (Boiling): जल में पकाना; जैसे आलू और अंडा।
  2. भाप में पकाना (Steaming): भाप की सहायता से भोजन पकाना।
  3. सेकना (Baking): आग या ओवन में सेकना; जैसे रोटी और ब्रेड।
  4. तलना (Frying): तेल या घी में पकाना; जैसे समोसा और पूरी।
  5. भूनना (Roasting): सूखी गर्मी में पकाना; जैसे भुजा/मुढ़ी आदि।

भोजन पकाने के लाभ

  • भोजन स्वादिष्ट बनता है।
  • भोजन सुपाच्य बनता है।
  • हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने में सहायता मिलती है।

पोषक तत्वों की हानि रोकने के उपाय

  • सब्जियों को काटने के बाद धोने के बजाय पहले धोकर फिर काटें।
  • भोजन को ढँककर पकाएँ।
  • कम पानी में पकाएँ।
  • उबाले गए पानी को फेंकने के बजाय सूप या दाल में प्रयोग करें।
  • बहुत अधिक तापमान पर भोजन को अत्यधिक न पकाएँ।

विषय 9: खाद्य संरक्षण (Food Preservation)

खाद्य पदार्थों को भविष्य के उपयोग के लिए बिना खराब हुए लंबे समय तक सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को खाद्य संरक्षण कहते हैं।

खाद्य संरक्षण की प्रमुख विधियाँ

  1. धूप में सुखाना (Drying): खाद्य पदार्थ से नमी कम करना; जैसे अनाज, गेहूं, चावल, मटर और आम।
  2. नमक या चीनी डालना (Salting / Sugaring): नमक या चीनी की सहायता से सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकना; जैसे अचार, पापड़, मुरब्बा और जैम।
  3. ठंडा करना / प्रशीतन (Refrigeration / Freezing): कम तापमान पर खाद्य पदार्थों को रखना; जैसे फल, सब्जियाँ, दूध और मांस।
  4. डिब्बाबंदी (Canning): खाद्य पदार्थों को उपयुक्त डिब्बों में बंद करके सुरक्षित रखना।
  5. पाश्चुरीकरण (Pasteurization): द्रव खाद्य पदार्थ, विशेष रूप से दूध, को नियंत्रित तापमान पर गर्म करके और फिर ठंडा करके सुरक्षित रखने की विधि। यह विधि लुई पाश्चर के नाम से संबंधित है।

खाद्य संरक्षण का महत्व

  • भोजन की बर्बादी को कम करने में सहायता करता है।
  • मौसम के बाहर भी कुछ खाद्य पदार्थों की उपलब्धता में सहायता करता है।
  • आपातकालीन परिस्थितियों में खाद्य उपलब्धता बनाए रखने में सहायता करता है।

विषय 10: आहार संबंधी त्रुटियाँ एवं भोजन-स्वास्थ्य संबंध

आहार संबंधी त्रुटियाँ में प्रतिदिन एक ही प्रकार का भोजन खाना, बहुत अधिक तला-भुना भोजन करना, असमय भोजन करना तथा केवल स्वाद के लिए भोजन करना जैसी आदतें शामिल हो सकती हैं।

भोजन एवं स्वास्थ्य का संबंध: भोजन और स्वास्थ्य का आपस में घनिष्ठ संबंध है। संतुलित एवं पौष्टिक भोजन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में सहायता करता है, जबकि असंतुलित आहार से मोटापा, कब्ज, कुपोषण तथा विभिन्न पोषण संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।

विषय 11: ऊर्जा की आवश्यकता एवं मापन

  • मापन इकाई: भोजन से प्राप्त ऊर्जा को कैलोरी (Calorie) में मापा जाता है।
  • ऊर्जा की आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कारक: आयु, लिंग, कार्य की प्रकृति तथा शारीरिक अवस्था।
  • दैनिक आवश्यकता का उदाहरण: एक स्वस्थ किशोर लड़की के लिए लगभग 2200 कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।

शब्दावली / Key Terms

  • पोषण (Nutrition): भोजन ग्रहण करने से लेकर शरीर द्वारा उसके उपयोग तक की संपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया।
  • संतुलित आहार (Balanced Diet): सभी आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त पर्याप्त एवं उपयुक्त आहार।
  • कोलेस्ट्रम (Colostrum): प्रसव के बाद माँ के स्तन से निकलने वाला पहला गाढ़ा पीला दूध।
  • कवाशयकोर (Kwashiorkor): मुख्य रूप से प्रोटीन की कमी से बच्चों में होने वाला पोषण विकार।
  • मरस्मस (Marasmus): प्रोटीन और ऊर्जा दोनों की गंभीर कमी से होने वाला कुपोषण।
  • पाश्चुरीकरण (Pasteurization): दूध या अन्य द्रव खाद्य पदार्थों को नियंत्रित ताप पर गर्म करके और फिर ठंडा करके सुरक्षित रखने की विधि।
  • कैलोरी (Calorie): भोजन से प्राप्त ऊर्जा को मापने की इकाई।
  • एनीमिया (Anemia): शरीर में पर्याप्त हीमोग्लोबिन/लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से संबंधित रक्ताल्पता की स्थिति।

अध्याय का सारांश

खाद्य एवं पोषण अध्याय गृह विज्ञान का एक महत्वपूर्ण भाग है जो स्वस्थ जीवन के वैज्ञानिक आधार को समझने में सहायता करता है। भोजन हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, कोशिकाओं के निर्माण एवं मरम्मत में सहायता करता है तथा शरीर की विभिन्न क्रियाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है।

भोजन में प्रमुख पोषक तत्वों के रूप में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज लवण और जल का महत्वपूर्ण स्थान है। संतुलित आहार एवं उचित आहार आयोजन के माध्यम से परिवार के सदस्यों की आयु, कार्यप्रकृति और स्वास्थ्य के अनुसार पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है।

कुपोषण, अल्पपोषण और अतिपोषण जैसी समस्याओं से बचने के लिए संतुलित भोजन, उचित पाक विधियों तथा खाद्य संरक्षण की जानकारी आवश्यक है।

त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision

  • 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट = 4 कैलोरी ऊर्जा
  • 1 ग्राम प्रोटीन = 4 कैलोरी ऊर्जा
  • 1 ग्राम वसा = 9 कैलोरी ऊर्जा
  • जल में घुलनशील विटामिन = B और C
  • वसा में घुलनशील विटामिन = A, D, E और K
  • विटामिन A की कमी = रतौंधी
  • विटामिन C की कमी = स्कर्वी
  • विटामिन D की कमी = रिकेट्स व ऑस्टियोमलेशिया
  • विटामिन B1 की कमी = बेरीबेरी
  • विटामिन B3 की कमी = पेलाग्रा
  • आयरन की कमी = एनीमिया
  • आयोडीन की कमी = गॉइटर / घेंघा
  • 0–6 माह के शिशु के लिए प्रमुख आहार = माँ का दूध
  • किशोर लड़की हेतु दिया गया दैनिक ऊर्जा उदाहरण = लगभग 2200 कैलोरी

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

प्रश्न 1: 1 ग्राम वसा से कितनी कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है?

(A) 4 कैलोरी
(B) 6 कैलोरी
(C) 9 कैलोरी
(D) 12 कैलोरी

सही उत्तर: (C) 9 कैलोरी

Explanation: वसा ऊर्जा का समृद्ध स्रोत है। 1 ग्राम वसा से लगभग 9 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है, जबकि कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से लगभग 4-4 कैलोरी ऊर्जा मिलती है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सा विटामिन जल में घुलनशील है?

(A) विटामिन A
(B) विटामिन B
(C) विटामिन D
(D) विटामिन K

सही उत्तर: (B) विटामिन B

Explanation: विटामिन B और C जल में घुलनशील होते हैं, जबकि A, D, E और K वसा में घुलनशील विटामिन हैं।

प्रश्न 3: विटामिन A की कमी से कौन सा रोग होता है?

(A) बेरीबेरी
(B) स्कर्वी
(C) रतौंधी
(D) रिकेट्स

सही उत्तर: (C) रतौंधी

Explanation: विटामिन A दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी से रतौंधी हो सकती है।

प्रश्न 4: शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, विभाजन एवं ऊतकों की मरम्मत के लिए कौन सा पोषक तत्व आवश्यक है?

(A) कार्बोहाइड्रेट
(B) वसा
(C) प्रोटीन
(D) विटामिन

सही उत्तर: (C) प्रोटीन

Explanation: प्रोटीन शरीर की वृद्धि, कोशिका निर्माण तथा ऊतकों की मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व है।

प्रश्न 5: आयरन (लोहे) की कमी से मानव शरीर में कौन सी बीमारी होती है?

(A) एनीमिया
(B) स्कर्वी
(C) घेंघा
(D) पेलाग्रा

सही उत्तर: (A) एनीमिया

Explanation: आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन निर्माण के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है।

प्रश्न 6: 0 से 6 माह तक के शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार क्या है?

(A) गाय का दूध
(B) माँ का दूध
(C) दलिया व खिचड़ी
(D) फलों का रस

सही उत्तर: (B) माँ का दूध

Explanation: जीवन के शुरुआती महीनों में माँ का दूध शिशु के लिए महत्वपूर्ण एवं उपयुक्त पोषण स्रोत है।

प्रश्न 7: विटामिन C के प्रमुख स्रोतों में कौन शामिल है?

(A) गेहूं
(B) दूध
(C) नींबू व आंवला
(D) चावल

सही उत्तर: (C) नींबू व आंवला

Explanation: नींबू, संतरा, आंवला और अमरूद जैसे फलों में विटामिन C पाया जाता है।

प्रश्न 8: विटामिन D के प्राकृतिक स्रोत के रूप में किसका विशेष महत्व है?

(A) हरी सब्जियाँ
(B) सूर्य का प्रकाश
(C) चावल
(D) दलिया

सही उत्तर: (B) सूर्य का प्रकाश

Explanation: सूर्य का प्रकाश शरीर में विटामिन D के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 9: आयोडीन की कमी से कौन सा रोग हो सकता है?

(A) रिकेट्स
(B) गॉइटर / घेंघा रोग
(C) बेरीबेरी
(D) रतौंधी

सही उत्तर: (B) गॉइटर / घेंघा रोग

Explanation: आयोडीन थायरॉयड हार्मोन के निर्माण के लिए आवश्यक है। इसकी कमी गॉइटर जैसी समस्या से जुड़ी हो सकती है।

प्रश्न 10: पाश्चुरीकरण विधि किस वैज्ञानिक के नाम से संबंधित है?

(A) एडवर्ड जेनर
(B) लुई पाश्चर
(C) रॉबर्ट कोच
(D) अलेक्जेंडर फ्लेमिंग

सही उत्तर: (B) लुई पाश्चर

Explanation: पाश्चुरीकरण विधि का नाम वैज्ञानिक लुई पाश्चर के नाम पर रखा गया है।

प्रश्न 11: प्रोटीन की कमी से बच्चों में कौन सा पोषण विकार हो सकता है?

(A) कवाशयकोर
(B) एनीमिया
(C) स्कर्वी
(D) घेंघा

सही उत्तर: (A) कवाशयकोर

Explanation: गंभीर प्रोटीन की कमी से बच्चों में कवाशयकोर जैसा पोषण विकार हो सकता है।

प्रश्न 12: 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से लगभग कितनी ऊर्जा मिलती है?

(A) 2 कैलोरी
(B) 4 कैलोरी
(C) 9 कैलोरी
(D) 6 कैलोरी

सही उत्तर: (B) 4 कैलोरी

Explanation: 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से लगभग 4 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।

प्रश्न 13: भोजन पकाने की कौन सी विधि पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने में सहायक मानी जाती है?

(A) तलना
(B) भूनना
(C) भाप में पकाना
(D) उबालकर पानी फेंकना

सही उत्तर: (C) भाप में पकाना

Explanation: भाप में पकाने से भोजन को पकाने के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है और उचित विधि अपनाने पर पोषक तत्वों की हानि को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 14: एक स्वस्थ किशोर लड़की के लिए प्रतिदिन कितनी कैलोरी ऊर्जा का उदाहरण दिया गया है?

(A) 1200 कैलोरी
(B) 1800 कैलोरी
(C) 2200 कैलोरी
(D) 3000 कैलोरी

सही उत्तर: (C) 2200 कैलोरी

Explanation: दी गई अध्ययन सामग्री में स्वस्थ किशोर लड़की के लिए लगभग 2200 कैलोरी प्रतिदिन ऊर्जा की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 15: विटामिन B3 (नियासिन) की कमी से कौन सा रोग होता है?

(A) स्कर्वी
(B) पेलाग्रा
(C) बेरीबेरी
(D) रिकेट्स

सही उत्तर: (B) पेलाग्रा

Explanation: विटामिन B3 या नियासिन की कमी से पेलाग्रा नामक पोषण संबंधी रोग हो सकता है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: पोषण (Nutrition) किसे कहते हैं? इसके मुख्य चरण लिखिए।

उत्तर: पोषण वह जैविक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति भोजन ग्रहण करता है, उसका पाचन करता है, पोषक तत्वों को अवशोषित करता है और उनका उपयोग शरीर की वृद्धि, विकास व ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है।

इसके मुख्य चरण हैं:

  1. भोजन ग्रहण करना
  2. पाचन
  3. अवशोषण
  4. वृद्धि एवं विकास

प्रश्न 2: संतुलित आहार की परिभाषा दीजिए।

उत्तर: ऐसा आहार जिसमें व्यक्ति की आयु, लिंग, कार्यप्रकृति तथा स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा तथा सही अनुपात में मौजूद हों, संतुलित आहार कहलाता है।

प्रश्न 3: आहार आयोजन के दो प्रमुख लाभ लिखिए।

उत्तर:

  1. समय, धन व ऊर्जा की बचत: पूर्व योजना से आवश्यक सामग्री ही खरीदी जाती है तथा बजट नियंत्रित रहता है।
  2. संतुलित व विविध आहार: परिवार के सदस्यों को उनकी आवश्यकतानुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है।

प्रश्न 4: वसा में घुलनशील तथा जल में घुलनशील विटामिन्स के नाम लिखिए।

वर्गविटामिन
जल में घुलनशीलविटामिन B और C
वसा में घुलनशीलविटामिन A, D, E और K

प्रश्न 5: कवाशयकोर और मरस्मस रोग में क्या अंतर है?

आधारकवाशयकोरमरस्मस
मुख्य कमीमुख्य रूप से प्रोटीन की कमीप्रोटीन और ऊर्जा दोनों की गंभीर कमी
प्रभावशरीर में सूजन तथा पेट बाहर निकलने जैसे लक्षण हो सकते हैंबच्चा अत्यधिक दुबला-पतला हो जाता है
प्रमुख स्थितिप्रोटीन ऊर्जा कुपोषण का एक रूपप्रोटीन ऊर्जा कुपोषण का एक रूप

प्रश्न 6: पाश्चुरीकरण प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: पाश्चुरीकरण खाद्य संरक्षण की एक वैज्ञानिक विधि है जिसमें दूध या अन्य द्रव खाद्य पदार्थ को नियंत्रित तापमान पर गर्म करके और फिर तेजी से ठंडा करके सुरक्षित रखने में सहायता की जाती है। यह विधि लुई पाश्चर के नाम से संबंधित है।

प्रश्न 7: भोजन पकाते समय पौष्टिक तत्वों को नष्ट होने से कैसे बचाया जा सकता है?

उत्तर:

  1. सब्जियों को पहले धोकर फिर काटना चाहिए।
  2. भोजन को ढँककर पकाना चाहिए।
  3. कम पानी में पकाना चाहिए।
  4. उबाले गए पानी को फेंकने के बजाय अन्य व्यंजनों में प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 8: कोलेस्ट्रम क्या है और यह शिशु के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: प्रसव के बाद माँ के स्तन से निकलने वाले पहले गाढ़े पीले दूध को कोलेस्ट्रम कहते हैं। इसमें पोषक तत्वों तथा प्रतिरक्षात्मक घटकों की उपस्थिति के कारण यह शिशु के लिए महत्वपूर्ण होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: भोजन के मुख्य पोषक तत्वों का नाम लिखते हुए उनके कार्य, स्रोत तथा कमी से होने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: मानव शरीर को स्वस्थ रहने के लिए भोजन में विभिन्न पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। प्रमुख पोषक तत्व निम्नलिखित हैं:

1. कार्बोहाइड्रेट

  • कार्य: शरीर को मुख्य एवं शीघ्र ऊर्जा प्रदान करना।
  • ऊर्जा: 1 ग्राम से लगभग 4 कैलोरी।
  • स्रोत: गेहूं, चावल, आलू, शकरकंद, मक्का, चीनी और गुड़।
  • कमी का प्रभाव: कमजोरी, थकान और वजन में कमी।

2. वसा (Fat)

  • कार्य: ऊर्जा का संचित भंडार बनाना तथा शरीर के तापमान को बनाए रखने में सहायता करना।
  • ऊर्जा: 1 ग्राम से लगभग 9 कैलोरी।
  • स्रोत: सरसों तेल, सोयाबीन तेल, घी, मक्खन, तिल और मूंगफली।
  • प्रभाव: कमी से त्वचा शुष्क हो सकती है तथा अधिकता से मोटापा जैसी समस्या हो सकती है।

3. प्रोटीन

  • कार्य: कोशिकाओं का निर्माण, शारीरिक वृद्धि तथा ऊतकों की मरम्मत।
  • ऊर्जा: 1 ग्राम से लगभग 4 कैलोरी।
  • स्रोत: दालें, सोयाबीन, दूध, अंडा, मांस और मछली।
  • कमी का प्रभाव: बच्चों में कवाशयकोर और मरस्मस जैसे पोषण विकार तथा विकास में रुकावट।

4. विटामिन

  • कार्य: शरीर की विभिन्न क्रियाओं के नियमन तथा स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायता।
  • प्रमुख प्रकार: A, B, C, D, E और K।
  • स्रोत: फल, हरी सब्जियाँ, दूध तथा अन्य खाद्य पदार्थ।
  • कमी का प्रभाव: विटामिन A की कमी से रतौंधी, B1 की कमी से बेरीबेरी, B3 की कमी से पेलाग्रा, C की कमी से स्कर्वी तथा D की कमी से रिकेट्स हो सकता है।

5. खनिज लवण

  • कार्य: हड्डियों, दाँतों और रक्त के निर्माण तथा शरीर की विभिन्न क्रियाओं में सहायता।
  • स्रोत: दूध, पालक, आयोडीन युक्त नमक, अंडा और गुड़ आदि।
  • कमी का प्रभाव: आयरन की कमी से एनीमिया, आयोडीन की कमी से घेंघा तथा कैल्शियम की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो सकती हैं।

6. जल एवं रेशा

  • जल का कार्य: शरीर के तापमान को नियंत्रित करना, पाचन में सहायता करना तथा अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन में सहायता करना।
  • रेशे का कार्य: आंतों की कार्यप्रणाली को सुचारू रखने तथा कब्ज से बचाने में सहायता करना।
  • स्रोत: जल, फल, सब्जियाँ, छिलके वाली दालें तथा साबुत अनाज।

प्रश्न 2: आहार आयोजन से आप क्या समझते हैं? परिवार के लिए आहार आयोजन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: भोजन पकाने व परोसने से पूर्व परिवार की आवश्यकताओं, बजट और उपलब्ध साधनों को ध्यान में रखकर बनाई गई व्यवस्थित पूर्व-योजना को आहार आयोजन कहते हैं।

आहार आयोजन करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. परिवार के सदस्यों की आयु व लिंग: शिशुओं, बच्चों, वयस्कों और वृद्धों की पोषण आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं।
  2. शारीरिक कार्य की प्रकृति: कठोर शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  3. विशेष शारीरिक अवस्थाएँ: गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अतिरिक्त पोषण आवश्यक होता है।
  4. मौसम व स्थानीय उपलब्धता: मौसमी और स्थानीय फल-सब्जियों को भोजन में शामिल किया जा सकता है।
  5. आर्थिक बजट: परिवार की आय के अनुसार पौष्टिक एवं किफायती खाद्य पदार्थों का चुनाव करना चाहिए।
  6. भोजन में विविधता: रंग, स्वाद और पकाने की विधि में विविधता लाकर भोजन को रुचिकर बनाया जाना चाहिए।

प्रश्न 3: खाद्य संरक्षण क्या है? इसके महत्व तथा प्रमुख विधियों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने तथा उन्हें खराब होने से बचाने की प्रक्रिया को खाद्य संरक्षण कहते हैं।

खाद्य संरक्षण का महत्व

  • भोजन को सड़ने और व्यर्थ नष्ट होने से बचाने में सहायता करता है।
  • मौसम के बाहर भी कुछ खाद्य पदार्थों की उपलब्धता में सहायता करता है।
  • बाढ़, सूखा या आपातकाल जैसी परिस्थितियों में खाद्य उपलब्धता बनाए रखने में सहायता करता है।

प्रमुख विधियाँ

  1. निर्जलीकरण / सुखाना: खाद्य पदार्थों से नमी कम करना।
  2. नमक व चीनी द्वारा संरक्षण: अचार, जैम और मुरब्बे जैसे खाद्य पदार्थों में प्रयोग।
  3. प्रशीतन: कम तापमान पर खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखना।
  4. डिब्बाबंदी: खाद्य पदार्थों को उचित रूप से बंद डिब्बों में रखना।
  5. पाश्चुरीकरण: दूध जैसे द्रव खाद्य पदार्थों को नियंत्रित ताप पर गर्म करके और फिर ठंडा करके सुरक्षित रखने की विधि।

बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. पोषण की परिभाषा दीजिए तथा पोषण प्रक्रिया के चारों चरणों का उल्लेख कीजिए।
  2. 1 ग्राम वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन से कितनी-कितनी कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है?
  3. जल में घुलनशील तथा वसा में घुलनशील विटामिन्स के नाम व उनके स्रोत लिखिए।
  4. विटामिन A, C तथा D की कमी से होने वाले रोगों के नाम व लक्षण लिखिए।
  5. एनीमिया तथा घेंघा रोग किस खनिज की कमी से होते हैं? इनके बचाव के उपाय लिखिए।
  6. आहार आयोजन के मुख्य उद्देश्यों एवं सिद्धांतों की विवेचना कीजिए।
  7. कुपोषण किसे कहते हैं? कवाशयकोर और मरस्मस रोग की तुलना कीजिए।
  8. भोजन पकाने की भाप विधि के लाभ बताइए तथा पकाते समय पोषक तत्वों की रक्षा के उपाय लिखिए।
  9. खाद्य संरक्षण की पाश्चुरीकरण विधि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  10. किशोरावस्था में पोषण संबंधी आवश्यकताओं का वर्णन कीजिए।

अंतिम परीक्षा उपयोगी Revision Points

  • पोषण में भोजन ग्रहण करने, पाचन, अवशोषण तथा शरीर द्वारा उपयोग की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
  • वसा लगभग 9 कैलोरी प्रति ग्राम ऊर्जा प्रदान करती है।
  • कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 4-4 कैलोरी प्रति ग्राम ऊर्जा प्रदान करते हैं।
  • प्रोटीन शरीर की वृद्धि, कोशिका निर्माण और ऊतकों की मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण है।
  • विटामिन B और C जल में घुलनशील तथा A, D, E और K वसा में घुलनशील हैं।
  • लोहे की कमी से एनीमिया तथा आयोडीन की कमी से घेंघा हो सकता है।
  • शिशु के लिए माँ का दूध महत्वपूर्ण पोषण स्रोत है।
  • सब्जियों को काटने के बाद धोने के बजाय पहले धोकर फिर काटना चाहिए।
  • पाश्चुरीकरण दूध के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण विधि है।

अध्याय का निष्कर्ष

अध्याय 5 – खाद्य एवं पोषण का अध्ययन हमें यह समझने में सहायता करता है कि भोजन केवल भूख मिटाने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे शारीरिक विकास, ऊर्जा, स्वास्थ्य तथा रोगों से सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।

यदि दैनिक जीवन में आहार आयोजन के सिद्धांतों, संतुलित भोजन की अवधारणा, उचित पाक विधियों तथा खाद्य संरक्षण की विधियों को अपनाया जाए तो व्यक्ति और परिवार के पोषण स्तर को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को इस अध्याय के पोषक तत्व, उनके कार्य एवं स्रोत, विटामिन और खनिजों की कमी से होने वाले रोग, आहार आयोजन, कुपोषण, भोजन पकाने की विधियाँ, खाद्य संरक्षण तथा महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर का नियमित अभ्यास करना चाहिए।